Gurpreet Singh Shot Dead: कौन थे गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी? अपनी ही सरकार में AAP नेता की सरेआम हत्या

Gurpreet Singh Shot Dead: पंजाब के फिरोजपुर में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक सीनियर नेता गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने रविवार (30 अगस्त) को बताया कि हमलावरों ने उनके बाइक का काफी देर तक पीछा किया और फिर उनपर तोबड़तोड़ फायरिंग की। यह हत्याकांड रविवार (29 अगस्त) शाम पंजाब के सीमावर्ती जिले फिरोजपुर के ममदोट शहर में हुई। गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम कई राउंड गोली मारकर हत्या कर दी गई।

हथियारबंद हमलावरों ने कथित तौर पर उस मोटरसाइकिल का पीछा किया जिस पर वह सवार थे। फिर उन पर गोलियां चला दीं। यह घटना शाम करीब 7:45 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक, गोपी और एक अन्य व्यक्ति मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, तभी कार में सवार हमलावरों ने उनका पीछा किया और फायरिंग कर दी।

गोलीबारी में गोपी को गंभीर चोटें आईं। फिर उन्हें इलाज के लिए फिरोजपुर के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद, फिरोजपुर ग्रामीण के डीएसपी करण कुमार शर्मा भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। घटनाक्रम का पता लगाने तथा हमलावरों की पहचान करने के लिए इलाके में और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। इस हत्याकांड से पंजाब में तनाव का माहौल है। इस हत्याकांड पर इसलिए अधिक सवार उठ रहे हैं क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की ही सरकार है।

दोस्त के कार पर भी गोलीबारी

SSP ने बताया कि इस हमले के पीछे एक पुराना विवाद था। जांच में चुनाव से जुड़ा विवाद एक अहम पहलू के तौर पर सामने आया है। सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भूपिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि गोपी और उनके दोस्त हरप्रीत मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। जबकि उनके कुछ दोस्त एक अलग कार में उनके पीछे आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने उस कार पर भी गोलीबारी की।

‘आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है’

जांच करने वाले अधिकारी गाड़ी पर हुई फायरिंग से जुड़े हालात की जांच कर रहे हैं। घटनाक्रम का पूरा ब्योरा पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। एसएसपी भूपिंदर सिंह सिद्धू ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद था। हमलावरों की पहचान कर ली गई है। हमारी टीमें बना दी गई हैं। हम जल्द से जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्य आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है। वह गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है।

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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जांच जारी रहने के साथ ही कई टीमें बनाई गई हैं। आरोपी की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है। दरअसल, इस घटना ने पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हमले के पीछे चुनाव से जुड़ा विवाद होने की बात से इस मामले के राजनीतिक चर्चा का विषय बनने की भी संभावना है।

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर हरियाणवी गायक को जिम के बाहर मार दी गईं 15 गोलियां, कौन थे अंकित बालियान?

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर यूट्यूबर और हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की बुधवार (26 अगस्त) शाम उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक जिम के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शामली के शहर कोतवाली इलाके में शाम को अंकित बालियान जब जिम से बाहर निकले, तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सिंगर पर करीब 15 से 18 राउंड फायरिंग की गई।

पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। हत्या के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अंकित बालियान की हत्या कैसे हुई?

मौके पर मौजूद एक शख्स ने घटनाक्रम के बारे में बताया कि बालियान जिम में कसरत करने के बाद जैसे ही बाहर निकले उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। चश्मदीद ने कहा, “अंकित एक्सरसाइज के बाद जिम से बाहर आए थे। फायरिंग शुरू होते ही हम बाहर भागे और उन्हें गोली लगने से घायल पाया।

अंकित पिछले एक साल से रोज इस जिम में आ रहे थे। वह शाम करीब 4 से 4:15 बजे के बीच जिम पहुंचे थे। कम से कम 10 से 15 राउंड फायरिंग हुई। हमने चार लोगों को भागते हुए देखा। आरोपी पैदल थे और उनके हाथों में पिस्तौल थी।” इस बयान से पता चलता है कि हमलावर हथियारों से लैस थे। गोलीबारी के तुरंत बाद वे मौके से भाग गए।

हत्या के पीछे की असल वजह अभी साफ नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर हत्या से जुड़ी परिस्थितियों का पता चल जाएगा। जांचकर्ता हमलावरों की पहचान करने और घटनाक्रम को समझने के लिए CCTV फुटेज की जांच कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर कहां से आए थे। वे मौके तक कैसे पहुंचे और भागने के लिए उन्होंने किस रास्ते का इस्तेमाल किया।

अखिलेश का बीजेपी पर हमला

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वारदात को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश का पूरा जाट समुदाय इसे खुद पर प्रहार मानकर आक्रोशित है। सपा प्रमुख ने बालियान की हत्या को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति शून्य पर पहुंच गई है। उन्होंने हत्या की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के पहलू से भी जांच किए जाने की मांग की।

उन्होंने देर रात X पर कहा, “उप्र की कानून-व्यवस्था को शून्य करते हुए जिस प्रकार शामली में लोकप्रिय गायक अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर बेरहमी से हत्या की गई है उससे पूरे क्षेत्र में भय व्याप्त हो गया है।”

यादव ने इसी पोस्ट में आगे कहा, ”मृतक की दुखी मां के द्वारा अपने बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर ही शोकाकुल होने का समाचार हृदयविदारक है। जाट समाज ने हमलावारों की गिरफ्तारी को लेकर सड़क पर ही अपनी मांग बुलंद की है। उत्तर प्रदेश का समस्त जाट समुदाय इसे अपने ऊपर प्रहार मानकर आक्रोशित है।” उन्होंने कहा, ”इस हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से भी किये जाने की मांग उठ रही है। बेहद निंदनीय!”

पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे बालियान?

यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि अंकित बालियान आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, अधिकारियों या उनके सहयोगियों की ओर से तत्काल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, और न ही यह स्पष्ट हो सका कि क्या यह उनकी हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने कहा, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।”

पुलिस के अनुसार, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई गोलियां चलाईं जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है।

कौन थे अंकित बालियान?

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान के यूट्यूब चैनल के 3.66 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। वह अपने वीडियो में विभिन्न सहयोगियों के साथ गायक और कलाकार के रूप में नजर आते थे। उनके कई वीडियो में बंदूक, हथियार और SUV का इस्तेमाल दिखाया गया था। संगीत के अलावा बालियान ने हरियाणवी पॉप वीडियो, पॉडकास्ट और जमीनी स्तर के व्लॉग के जरिए अपनी मजबूत डिजिटल मौजूदगी बनाई थी।

उनका कंटेंट अक्सर क्षेत्रीय गर्व, देसी पहचान, ग्रामीण जीवन और युवा संस्कृति पर केंद्रित होता था। उनके कई गानों में बंदूक संस्कृति, स्थानीय राजनीति और बहादुरी जैसे विषय शामिल थे। एक गायक और क्रिएटर के तौर पर बालियान ने मासूम शर्मा, राजू पंजाबी और आशु ट्विंकल जैसे हरियाणवी कलाकारों के साथ भी काम किया।

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बालियान ने राजनीतिक पॉडकास्ट और स्थानीय व्लॉगिंग में भी हाथ आजमाया। उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के राजनेताओं और समुदाय के प्रमुख लोगों के इंटरव्यू लिए। उनके लोकप्रिय गानों में ‘भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’, ‘112 NE’, ‘गोली के बारूद’, ‘जाट जाटनी’, ‘अगला जनम जाट’, ‘संविधान’, ‘मोदी बरगा रुतबा’, ‘जाट धर्मेंद्र की तरिया’, ‘एक खटोला जेल के भीतर’, ‘वेट’, ‘सिस्टम’ और ‘राइफलें’ शामिल थे।

इजरायल में काकेशियन माफिया को सिर में सटाकर मार दी गोली, कौन था लक्जरी कारों का ये शौकीन क्राइम बॉस यानीस युशवाएव?

Caucasus Jewish Mafia: इजरायल के कैसरिया जंक्शन पर सोमवार को दिनदहाड़े एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। इजरायल में काकेशियन यहूदी माफिया का कथित सरगना 40 वर्षीय यानीस युशवाएव मारा गया। हमलावर ने बहुत पास से यानीस के सिर में पिस्टल सटाकर गोली मार दी।

माफिया वर्ल्ड से लेकर लग्जरी कारों के शौक तक, आइए जानते हैं कि इजरायल की पुलिस की नाक में दम करने वाला यह अंडरवर्ल्ड डॉन यानीस युशवाएव कौन था।

दिनदहाड़े पेट्रो स्टेशन पर प्वाइंट-ब्लैंक रेंज पर मारी गोली

सीसीटीवी फुटेज में कैद इस हत्याकांड की वारदात बेहद खौफनाक है। यानीस अपने दो साथियों के साथ कैसरिया जंक्शन स्थित एक पेट्रोल स्टेशन के बिजनेस आउटलेट से बाहर निकल रहा था। हुडी और कैप पहने एक नकाबपोश हमलावर पास आया और सीधे प्वाइंट-ब्लैंक रेंज से यानीस के सिर में गोली मार दी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावर ने पुलिस से बचने के लिए चेहरे पर एक बेहद रियलिस्टिक सिलिकॉन ह्यूमन मास्क पहन रखा था।

कौन था यानीस युशवाएव?

ऑर अकीवा का रहने वाला 40 वर्षीय यानीस युशवाएव इजरायल के शरोन क्षेत्र में एक खौफनाक नाम बन चुका था। इजरायली मीडिया और पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह काकेशियन यहूदी संगठित अपराध गिरोह का कथित चीफ था। यानीस कई बड़े रेस्टोरेंट का मालिक था और बेंटले जैसी लग्जरी गाड़ियों में चलता था।

अक्टूबर में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने माफिया होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, ‘मैं एक लीगल बिजनेसमैन हूं, बेहद स्थापित हूं और बेंटले चलाता हूं। पुलिस को इसी बात से परेशानी होती है।’

गैंगवार, बम धमाके और दर्जनों गाड़ियों में आगजनी का आरोप

इजरायली पुलिस कई सालों से यानीस के पीछे पड़ी थी, लेकिन वह हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता था। नवंबर 2025 में कोर्ट की सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसे खूनी दुश्मनी में शामिल क्राइम गैंग का मुखिया बताया था।

साल 2023 में ऑर अकीवा और हाडेरा में एक ही महीने के भीतर दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें यानीस मुख्य संदिग्ध था। उस पर हडेरा के बड़े व्यापारियों के घरों और गाड़ियों पर गोलियां बरसाने, हैंड ग्रेनेड फेंकने और हत्या के प्रयास के दर्जनों केस दर्ज थे।

इसी साल फरवरी में जब वह मॉस्को से लौट रहा था, तब बेन गुरियन एयरपोर्ट से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, पर सबूतों के अभाव में कुछ ही दिनों में रिहा कर दिया गया।

पुलिस की जासूसी से भी हमेशा रहता था आगे

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यानीस को सजा दिलाना सबसे मुश्किल काम था। वह जानता था कि उसके फोन टैप किए जा रहे हैं, इसलिए वह कभी फोन पर संवेदनशील बात नहीं करता था। उसके गैंग के साथी पुलिस पूछताछ के दौरान कभी मुंह नहीं खोलते थे। करीब 10 साल पहले हाडेरा में एक शोक सभा के दौरान भी उस पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वह गोली लगने से घायल हुआ था, लेकिन बच निकला।

सबूतों की कमी के चलते अदालत से बार-बार बरी होने वाले इस ‘काकेशियन क्राइम बॉस’ का अंत अदालत के बजाय गैंगवार की रंजिश में हुआ। यानीस युशवाएव की इस सनसनीखेज हत्या के साथ ही इजरायल के शरोन रीजन में जारी लंबे अंडरवर्ल्ड संघर्ष में एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है।

बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

‘उसे सब पता था…’, पत्नी की हत्या के बाद SBI कर्मचारी के WhatsApp स्टेटस में आया यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा का नाम

Divya Mishra Murder: लखनऊ में दिव्या मिश्रा की हत्या के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, दिव्या की मौत से पहले उनके पति मानस वाजपेयी ने एक WhatsApp स्टेटस लगाया था, जिसमें उसने ने दावा किया था कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और आरोप लगाया कि उसने उसे धोखा दिया था। मानस ने स्टेटस में यह भी लिखा कि दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा और उनके पति भरत को “सब कुछ पता था।”

बता दें कि मशहूर हिंदी यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन दिव्या को गुरुवार दोपहर गोमती नगर में ICICI बैंक की ब्रांच के बाहर गोली मार दी गई थी, जहां वह काम करती थीं। जिसके बाद उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

‘उसे सब पता है’: स्टेटस में क्या लिखा था

38 वर्षीय मानस, जो SBI में कर्मचारी था उस पर आरोप है कि वह दिव्या के ऑफिस पहुंचा और उसे गोली मार दी। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद वह घर लौटा और अपनी 28 साल की बहन शिवा वाजपेयी (जो मानसिक रूप से बीमार थी) को गोली मारी, और फिर खुद को भी गोली मार ली।

मानस ने अपने WhatsApp स्टेटस में बताया कि उसने अपनी पत्नी को मार दिया है और उस पर धोखा देने का आरोप लगाया। उसने प्रज्ञा और उसके पति का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें “सब पता था।”

खास बात यह है कि यह स्टेटस दिव्या की मौत की खबर आने से पहले शेयर किया गया था।

बहन को ऑफिस के बाहर मारी गई गोली

प्रज्ञा ने दोपहर करीब 1:26 बजे X पर एक पोस्ट कर इस हमले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर सूचना मिली है कि उनकी बहन को गोमती नगर में गोली मार दी गई है और उनका इलाज लोहिया अस्पताल में चल रहा है। प्रज्ञा ने लोगों से दिव्या के लिए दुआ और प्रार्थना करने की अपील भी की।

बता दें कि प्रज्ञा पहले न्यूज टेलीविजन चैनलों के साथ काम कर चुकी हैं। अब वह अपने YouTube चैनल ‘उल्टा चश्मा’ के लिए जानी जाती हैं, जिसके 85 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

पति-पत्नी एक साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे

दिव्या और मानस की शादी को 12 साल हो चुके थे, लेकिन वे एक साल से ज्यादा समय से अलग-अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले साल तलाक के लिए अर्जी भी दी थी।

पुलिस ने बताया कि मानस ने अपनी बहन शिवा की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि उसे लगता था कि उसकी मौत के बाद उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा।

पड़ोसी को मानस मृत अवस्था में मिला

मानस के घर के पास रहने वाले एक दुकानदार ने NDTV को बताया कि वह दोपहर करीब 12:30 बजे घर लौटा था। वह जल्दबाजी में लग रहा था और उसे बहुत पसीना आ रहा था। पड़ोसी ने बताया कि मानस अंदर गया और उसने हनुमान चालीसा बजाई।

इसके बाद जब पड़ोसी ने मानस का WhatsApp स्टेटस देखा, तो वह घर के अंदर गया। वहां उसने मानस को मृत पाया।

हत्याओं के इस घटनाक्रम के बाद जांचकर्ता अब कपल के खराब रिश्तों और मानस के आखिरी WhatsApp स्टेटस में लगाए गए आरोपों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

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रवि कुमार दिवाकर कौन हैं? यूपी के वो जज जिन्होंने 4 महीने में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई, उनसे 100 केस हटा लिए गए

Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की कोर्ट में ट्रांसफ़र किया गया है।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफ़र वकीलों और मुक़दमा लड़ने वालों की उस आशंका के बाद किया गया है कि कोर्ट मौत की सज़ा सुना सकती है। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हटाकर डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में भेज दिया गया। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफर वकीलों और मुक़दमे से जुड़े लोगों की उस आशंका के बाद किया गया कि अदालत मौत की सज़ा सुना सकती है।

कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

जज रवि कुमार दिवाकर, जो अभी मुज़फ़्फ़रनगर की फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर तैनात हैं, चार महीनों में 10 मामलों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाने के बाद फिर से चर्चा में आए हैं। वह नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में तैनात हैं।

दिवाकर पहली बार 2022 में चर्चा में आए थे, जब वाराणसी में सिविल जज के तौर पर काम करते हुए उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफ़िक सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश ने उन्हें देश के सबसे ज़्यादा चर्चित कानूनी और धार्मिक विवादों में से एक का हिस्सा बना दिया।

उन्होंने 2009 में एडिशनल सिविल जज के तौर पर अपना न्यायिक करियर शुरू किया और उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में काम किया, जिनमें आज़मगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली शामिल हैं। मुज़फ़्फ़रनगर में उनके हालिया फ़ैसलों ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है। अप्रैल और अगस्त 2026 के बीच, उन्होंने हत्या, अपहरण और डकैती जैसे अपराधों से जुड़े 10 मामलों में मौत की सज़ा सुनाई। अदालत ने इनमें से कई मामलों को “दुर्लभतम से दुर्लभ” (rarest of rare) श्रेणी का माना।

लखनऊ के रहने वाले, 46 वर्षीय जज ने 2009 में आज़मगढ़ में एडिशनल सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी। इसके बाद मई 2015 में उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज और लगभग पांच महीने बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर पदोन्नत किया गया। जज दिवाकर, जिनके पास BCom और LLM की डिग्री है, नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर काम कर रहे हैं।

10 मामलों में 22 मौत की सज़ाएं

2014 की हत्या के मामले में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 13 अगस्त को, शामली में पुरानी रंजिश से जुड़ी गोलीबारी की घटना में पवन कुमार की हत्या के लिए चार लोगों — रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार — को मौत की सज़ा सुनाई गई।

1999 में फिरौती के लिए हत्या में मौत की सज़ा- 12 अगस्त को शाहनवाज़ को 1999 में लकड़ी व्यापारी सलीम को 5 लाख रुपये की फिरौती के लिए अगवा करने और उसकी हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

2011 में किसान की हत्या में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 17 जुलाई को शामली में 2011 में लूट की कोशिश के दौरान किसान राज सिंह की हत्या करने के आरोप में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

पूर्व ग्राम प्रधान को मौत की सज़ा- 6 जुलाई को पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उनके साथी सहदेव को 2010 में राजबीर सिंह की हत्या के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” (rarest of rare) मामला करार दिया।

होम गार्ड की हत्या के लिए मौत की सज़ा- 2 जुलाई को दीपक को 2020 में ड्यूटी पर तैनात होम गार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” मामला माना।

दो लोगों को मौत की सज़ा- 20 जून को गजेंद्र और रामकिरण को राजेंद्र सैनी की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

15 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में मौत की सज़ा- 30 मई को 50 वर्षीय रहीस को 2011 में एक महिला और उसके छह साल के बेटे की हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले को “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” माना।

महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा- 28 अप्रैल को 2019 के एक हत्या के मामले में एक महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

वकील की हत्या में तीन लोगों को मौत की सज़ा- 6 अप्रैल को 45 लाख रुपये के पैसों के विवाद को लेकर 2019 में वकील मोहम्मद समीर को अगवा करने और उनकी हत्या करने के आरोप में तीन लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

महज 4 महीने में 10 मुकदमों के 22 अपराधियों को सुना दी फांसी की सजा, यूपी के इस जज की फैसलों की जबर्दस्त चर्चा

UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत अपने फैसलों को लेकर जबर्दस्त चर्चा में है। पिछले चार महीनों के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने 10 अलग-अलग मुकदमों में अपने फैसले सुनाए हैं। इनमें कुल 22 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि पिछले चार महीनों में इन 10 मामलों में दोषी ठहराए गए सभी 22 व्यक्तियों को मौत की सजा दी गई है। जिन मुकदमों में यह सजा सुनाई गई है उनमें एक वकील की हत्या, होमगार्ड की हत्या, हाईवे पर डकैती और दूसरे हत्याकांड के संगीन मामले शामिल हैं।

अप्रैल से अगस्त तक मृत्युदंड के फैसलों का पूरा ब्योरा

सरकारी वकील के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 28 अप्रैल को एक अन्य मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई। मई महीने में 20 मई को एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि 20 जून को दो अपराधियों को मृत्युदंड दिया गया।

जुलाई के महीने में भी अदालत का कड़ा रुख जारी रहा। 2 जुलाई को एक व्यक्ति को, 6 जुलाई को दो लोगों को और 17 जुलाई को चार अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद अगस्त महीने में 12 अगस्त को एक व्यक्ति और 13 अगस्त को चार और अपराधियों को मौत की सजा सुनाई गई।

27 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में मिली मौत की सजा

अदालत ने 12 अगस्त को सुनाए गए फैसले में लगभग 27 साल पुराने एक लकड़ी व्यापारी के अपहरण और हत्या के मामले में एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई। यह वारदात साल 1999 में हुई थी। इसमें फिरौती के लिए सलीम नाम के व्यापारी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। अदालत ने इस मामले में शहनवाज को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया और उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

12 साल पुराने पवन कुमार हत्याकांड में 4 दोषियों को फांसी

इसके अगले ही दिन 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 12 साल पुराने एक अन्य हत्याकांड में चार व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई। यह घटना 14 जुलाई 2014 को शामली जिले के भभीसा गांव में घटी थी। जहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पवन कुमार के घर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी।

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इस गोलीबारी में पवन कुमार की मौत हो गई थी जबकि उनका भाई अशोक कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना के संबंध में शिकायत भी घायल भाई अशोक कुमार ने ही दर्ज कराई थी। जज दिवाकर ने पवन कुमार की हत्या का दोषी पाए जाने पर रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को फांसी की सजा सुनाई और सभी दोषियों पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति असद को फांसी की सजा:लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गए; ममेरे भाई को पिंजरे में कोर्ट लाया गया

सीरिया की एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को फांसी की सजा सुनाई। दोनों को गृहयुद्ध के दौरान हत्या और आम लोगों पर अत्याचार जैसे मामलों में दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई गई। इसी मामले में बशर अल-असद के मामा के बेटे अतीफ नजीब को भी फांसी की सजा सुनाई गई। बशर और माहेर दिसंबर 2024 में सत्ता गिरने के बाद रूस भाग गए थे। पुतिन सरकार ने उन्हें शरण दी हुई है। ऐसे में दोनों की गैरमौजदगी में यह सजा सुनाई गई। अतीफ नजीब रूस नहीं भाग पाए थे। उन्हें जनवरी 2025 में गिरफ्तार कर लिया गया था। अतीफ मंगलवार को अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उनको कैदी की वर्दी पहनाकर पिंजरे में लाया गया था। दिसंबर 2024 में 53 साल पुराना राज खत्म हुआ यह बशर अल-असद के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में आया पहला फैसला है। दिसंबर 2024 में विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर उनकी सरकार गिरा दी थी। इसके साथ ही 1971 से सीरिया पर शासन कर रहे असद परिवार का 53 साल पुराना राज भी खत्म हो गया था। सरकार गिरने से ठीक पहले बशर अल-असद ने देश छोड़ दिया था। इसके बाद सीरिया पर विद्रोही नेता अहमद अल-शरा का कब्जा हो गया। उनकी सरकार ने उनके शासन के दौरान लोगों पर हुए अत्याचार और हत्याओं के मामलों की जांच शुरू की। अतीफ के आदेश के बाद सीरिया में गृहयुद्ध भड़का था अतीफ नजीब सीरियाई सेना में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में वे दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। वह असद सरकार के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक हैं, जिन पर अदालत में मुकदमा चला।

अतीफ पर आरोप है कि 2011 में सीरिया के दारा राज्य में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती से निपटने का आदेश दिया था। उनके आदेश के बाद ही पूरे सीरिया में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया जो बाद में 14 साल तक चलता रहा। इस गृहयुद्ध में करीब 5 लाख लोगों की मौत हुई। कैसे शुरू हुआ सीरिया का गृहयुद्ध? रूस और ईरान के दोस्त असद की सरकार कैसे गिरी 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध के बाद भी बशर अल-असद लंबे समय तक रूस, ईरान और हिजबुल्लाह की मदद से सत्ता में बने रहे। लेकिन 2024 में हालात बदलने लगे। इजराइल ने हिजबुल्लाह और ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर लगातार हमले किए। इससे ये गुट कमजोर पड़ गए। वहीं रूस भी यूक्रेन जंग में उलझा था, ऐसे में उन्हें पहले जैसी सैन्य मदद नहीं मिल सकी। इसी मौके का फायदा उठाकर तुर्किये के समर्थन वाले विद्रोही गुटों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से बड़ा हमला शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में विद्रोहियों ने एक के बाद एक कई शहरों पर कब्जा कर लिया। विद्रोही 8 दिसंबर 2024 को राजधानी दमिश्क पहुंच गए। इसके बाद बशर अल-असद अपने परिवार के साथ रूस भाग गए। उनकी सरकार गिर गई और असद परिवार का 53 साल से ज्यादा पुराना शासन खत्म हो गया। रूस ने असद और उनके परिवार को शरण दी। —————————

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।

जेल में बंद अतीक के बेटे उमर और अली को मिली पैरोल, छोटे भाई अबान के जनाजे में होंगे शामिल

झांसी हाईवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद का प्रयागराज में अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अली अहमद और उमर अहमद को पैरोल देने की अनुमति दी। दोनों अतीक अहमद के बेटे हैं। अदालत ने उन्हें अपने छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है। अबान की हाल ही में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। यह फैसला जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने सुनाया। यह आदेश अतीक अहमद की बहन परवीन कुरैशी की ओर से दायर याचिका पर दिया गया, जिसमें दोनों भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

कोर्ट से मिली राहत

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अबान अहमद का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह किया जाएगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने अली अहमद और उमर अहमद को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहा करने की अनुमति दे दी। अली अहमद इस समय झांसी जेल में बंद है, जबकि उसका भाई उमर अहमद लखनऊ जेल में सजा काट रहा है।

21 वर्षीय अबान अहमद की गुरुवार को एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह जिस एसयूवी में सफर कर रहा था, वह उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में उसके 25 वर्षीय दोस्त सोनू की भी जान चली गई। पुलिस के अनुसार, अबान अपने दोस्तों के साथ झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली से मिलने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। कार में सवार तीन अन्य लोग—आजम, मोहम्मद जावेद और उमर—भी घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उनके परिवार के लोग उन्हें प्रयागराज ले गए।

पिता और भाई की कब्र के पास होगा अबान का अंतिम संस्कार

अबान अहमद को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। उसकी कब्र उसके पिता अतीक अहमद के पास बनाई गई है। इसी कब्रिस्तान में अतीक के भाई अशरफ और बेटे असद की कब्र भी मौजूद है। अबान, अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था। पिछले कुछ वर्षों में अहमद परिवार ने कई बड़ी घटनाओं का सामना किया है। अप्रैल 2023 में अतीक अहमद के बेटे असद को झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। वह उमेश पाल हत्याकांड में वांछित था। उमेश पाल, वर्ष 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे। इसके कुछ दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के एक अस्पताल ले जा रही थी। इसी दौरान पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।