रवि कुमार दिवाकर कौन हैं? यूपी के वो जज जिन्होंने 4 महीने में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई, उनसे 100 केस हटा लिए गए

Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की कोर्ट में ट्रांसफ़र किया गया है।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफ़र वकीलों और मुक़दमा लड़ने वालों की उस आशंका के बाद किया गया है कि कोर्ट मौत की सज़ा सुना सकती है। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हटाकर डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में भेज दिया गया। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफर वकीलों और मुक़दमे से जुड़े लोगों की उस आशंका के बाद किया गया कि अदालत मौत की सज़ा सुना सकती है।

कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

जज रवि कुमार दिवाकर, जो अभी मुज़फ़्फ़रनगर की फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर तैनात हैं, चार महीनों में 10 मामलों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाने के बाद फिर से चर्चा में आए हैं। वह नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में तैनात हैं।

दिवाकर पहली बार 2022 में चर्चा में आए थे, जब वाराणसी में सिविल जज के तौर पर काम करते हुए उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफ़िक सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश ने उन्हें देश के सबसे ज़्यादा चर्चित कानूनी और धार्मिक विवादों में से एक का हिस्सा बना दिया।

उन्होंने 2009 में एडिशनल सिविल जज के तौर पर अपना न्यायिक करियर शुरू किया और उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में काम किया, जिनमें आज़मगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली शामिल हैं। मुज़फ़्फ़रनगर में उनके हालिया फ़ैसलों ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है। अप्रैल और अगस्त 2026 के बीच, उन्होंने हत्या, अपहरण और डकैती जैसे अपराधों से जुड़े 10 मामलों में मौत की सज़ा सुनाई। अदालत ने इनमें से कई मामलों को “दुर्लभतम से दुर्लभ” (rarest of rare) श्रेणी का माना।

लखनऊ के रहने वाले, 46 वर्षीय जज ने 2009 में आज़मगढ़ में एडिशनल सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी। इसके बाद मई 2015 में उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज और लगभग पांच महीने बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर पदोन्नत किया गया। जज दिवाकर, जिनके पास BCom और LLM की डिग्री है, नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर काम कर रहे हैं।

10 मामलों में 22 मौत की सज़ाएं

2014 की हत्या के मामले में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 13 अगस्त को, शामली में पुरानी रंजिश से जुड़ी गोलीबारी की घटना में पवन कुमार की हत्या के लिए चार लोगों — रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार — को मौत की सज़ा सुनाई गई।

1999 में फिरौती के लिए हत्या में मौत की सज़ा- 12 अगस्त को शाहनवाज़ को 1999 में लकड़ी व्यापारी सलीम को 5 लाख रुपये की फिरौती के लिए अगवा करने और उसकी हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

2011 में किसान की हत्या में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 17 जुलाई को शामली में 2011 में लूट की कोशिश के दौरान किसान राज सिंह की हत्या करने के आरोप में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

पूर्व ग्राम प्रधान को मौत की सज़ा- 6 जुलाई को पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उनके साथी सहदेव को 2010 में राजबीर सिंह की हत्या के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” (rarest of rare) मामला करार दिया।

होम गार्ड की हत्या के लिए मौत की सज़ा- 2 जुलाई को दीपक को 2020 में ड्यूटी पर तैनात होम गार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” मामला माना।

दो लोगों को मौत की सज़ा- 20 जून को गजेंद्र और रामकिरण को राजेंद्र सैनी की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

15 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में मौत की सज़ा- 30 मई को 50 वर्षीय रहीस को 2011 में एक महिला और उसके छह साल के बेटे की हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले को “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” माना।

महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा- 28 अप्रैल को 2019 के एक हत्या के मामले में एक महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

वकील की हत्या में तीन लोगों को मौत की सज़ा- 6 अप्रैल को 45 लाख रुपये के पैसों के विवाद को लेकर 2019 में वकील मोहम्मद समीर को अगवा करने और उनकी हत्या करने के आरोप में तीन लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

महज 4 महीने में 10 मुकदमों के 22 अपराधियों को सुना दी फांसी की सजा, यूपी के इस जज की फैसलों की जबर्दस्त चर्चा

UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत अपने फैसलों को लेकर जबर्दस्त चर्चा में है। पिछले चार महीनों के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने 10 अलग-अलग मुकदमों में अपने फैसले सुनाए हैं। इनमें कुल 22 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि पिछले चार महीनों में इन 10 मामलों में दोषी ठहराए गए सभी 22 व्यक्तियों को मौत की सजा दी गई है। जिन मुकदमों में यह सजा सुनाई गई है उनमें एक वकील की हत्या, होमगार्ड की हत्या, हाईवे पर डकैती और दूसरे हत्याकांड के संगीन मामले शामिल हैं।

अप्रैल से अगस्त तक मृत्युदंड के फैसलों का पूरा ब्योरा

सरकारी वकील के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 28 अप्रैल को एक अन्य मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई। मई महीने में 20 मई को एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि 20 जून को दो अपराधियों को मृत्युदंड दिया गया।

जुलाई के महीने में भी अदालत का कड़ा रुख जारी रहा। 2 जुलाई को एक व्यक्ति को, 6 जुलाई को दो लोगों को और 17 जुलाई को चार अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद अगस्त महीने में 12 अगस्त को एक व्यक्ति और 13 अगस्त को चार और अपराधियों को मौत की सजा सुनाई गई।

27 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में मिली मौत की सजा

अदालत ने 12 अगस्त को सुनाए गए फैसले में लगभग 27 साल पुराने एक लकड़ी व्यापारी के अपहरण और हत्या के मामले में एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई। यह वारदात साल 1999 में हुई थी। इसमें फिरौती के लिए सलीम नाम के व्यापारी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। अदालत ने इस मामले में शहनवाज को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया और उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

12 साल पुराने पवन कुमार हत्याकांड में 4 दोषियों को फांसी

इसके अगले ही दिन 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 12 साल पुराने एक अन्य हत्याकांड में चार व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई। यह घटना 14 जुलाई 2014 को शामली जिले के भभीसा गांव में घटी थी। जहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पवन कुमार के घर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी।

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इस गोलीबारी में पवन कुमार की मौत हो गई थी जबकि उनका भाई अशोक कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना के संबंध में शिकायत भी घायल भाई अशोक कुमार ने ही दर्ज कराई थी। जज दिवाकर ने पवन कुमार की हत्या का दोषी पाए जाने पर रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को फांसी की सजा सुनाई और सभी दोषियों पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति असद को फांसी की सजा:लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गए; ममेरे भाई को पिंजरे में कोर्ट लाया गया

सीरिया की एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को फांसी की सजा सुनाई। दोनों को गृहयुद्ध के दौरान हत्या और आम लोगों पर अत्याचार जैसे मामलों में दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई गई। इसी मामले में बशर अल-असद के मामा के बेटे अतीफ नजीब को भी फांसी की सजा सुनाई गई। बशर और माहेर दिसंबर 2024 में सत्ता गिरने के बाद रूस भाग गए थे। पुतिन सरकार ने उन्हें शरण दी हुई है। ऐसे में दोनों की गैरमौजदगी में यह सजा सुनाई गई। अतीफ नजीब रूस नहीं भाग पाए थे। उन्हें जनवरी 2025 में गिरफ्तार कर लिया गया था। अतीफ मंगलवार को अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उनको कैदी की वर्दी पहनाकर पिंजरे में लाया गया था। दिसंबर 2024 में 53 साल पुराना राज खत्म हुआ यह बशर अल-असद के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में आया पहला फैसला है। दिसंबर 2024 में विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर उनकी सरकार गिरा दी थी। इसके साथ ही 1971 से सीरिया पर शासन कर रहे असद परिवार का 53 साल पुराना राज भी खत्म हो गया था। सरकार गिरने से ठीक पहले बशर अल-असद ने देश छोड़ दिया था। इसके बाद सीरिया पर विद्रोही नेता अहमद अल-शरा का कब्जा हो गया। उनकी सरकार ने उनके शासन के दौरान लोगों पर हुए अत्याचार और हत्याओं के मामलों की जांच शुरू की। अतीफ के आदेश के बाद सीरिया में गृहयुद्ध भड़का था अतीफ नजीब सीरियाई सेना में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में वे दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। वह असद सरकार के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक हैं, जिन पर अदालत में मुकदमा चला।

अतीफ पर आरोप है कि 2011 में सीरिया के दारा राज्य में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती से निपटने का आदेश दिया था। उनके आदेश के बाद ही पूरे सीरिया में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया जो बाद में 14 साल तक चलता रहा। इस गृहयुद्ध में करीब 5 लाख लोगों की मौत हुई। कैसे शुरू हुआ सीरिया का गृहयुद्ध? रूस और ईरान के दोस्त असद की सरकार कैसे गिरी 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध के बाद भी बशर अल-असद लंबे समय तक रूस, ईरान और हिजबुल्लाह की मदद से सत्ता में बने रहे। लेकिन 2024 में हालात बदलने लगे। इजराइल ने हिजबुल्लाह और ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर लगातार हमले किए। इससे ये गुट कमजोर पड़ गए। वहीं रूस भी यूक्रेन जंग में उलझा था, ऐसे में उन्हें पहले जैसी सैन्य मदद नहीं मिल सकी। इसी मौके का फायदा उठाकर तुर्किये के समर्थन वाले विद्रोही गुटों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से बड़ा हमला शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में विद्रोहियों ने एक के बाद एक कई शहरों पर कब्जा कर लिया। विद्रोही 8 दिसंबर 2024 को राजधानी दमिश्क पहुंच गए। इसके बाद बशर अल-असद अपने परिवार के साथ रूस भाग गए। उनकी सरकार गिर गई और असद परिवार का 53 साल से ज्यादा पुराना शासन खत्म हो गया। रूस ने असद और उनके परिवार को शरण दी। —————————

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।

जेल में बंद अतीक के बेटे उमर और अली को मिली पैरोल, छोटे भाई अबान के जनाजे में होंगे शामिल

झांसी हाईवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद का प्रयागराज में अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अली अहमद और उमर अहमद को पैरोल देने की अनुमति दी। दोनों अतीक अहमद के बेटे हैं। अदालत ने उन्हें अपने छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है। अबान की हाल ही में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। यह फैसला जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने सुनाया। यह आदेश अतीक अहमद की बहन परवीन कुरैशी की ओर से दायर याचिका पर दिया गया, जिसमें दोनों भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

कोर्ट से मिली राहत

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अबान अहमद का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह किया जाएगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने अली अहमद और उमर अहमद को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहा करने की अनुमति दे दी। अली अहमद इस समय झांसी जेल में बंद है, जबकि उसका भाई उमर अहमद लखनऊ जेल में सजा काट रहा है।

21 वर्षीय अबान अहमद की गुरुवार को एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह जिस एसयूवी में सफर कर रहा था, वह उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में उसके 25 वर्षीय दोस्त सोनू की भी जान चली गई। पुलिस के अनुसार, अबान अपने दोस्तों के साथ झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली से मिलने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। कार में सवार तीन अन्य लोग—आजम, मोहम्मद जावेद और उमर—भी घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उनके परिवार के लोग उन्हें प्रयागराज ले गए।

पिता और भाई की कब्र के पास होगा अबान का अंतिम संस्कार

अबान अहमद को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। उसकी कब्र उसके पिता अतीक अहमद के पास बनाई गई है। इसी कब्रिस्तान में अतीक के भाई अशरफ और बेटे असद की कब्र भी मौजूद है। अबान, अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था। पिछले कुछ वर्षों में अहमद परिवार ने कई बड़ी घटनाओं का सामना किया है। अप्रैल 2023 में अतीक अहमद के बेटे असद को झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। वह उमेश पाल हत्याकांड में वांछित था। उमेश पाल, वर्ष 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे। इसके कुछ दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के एक अस्पताल ले जा रही थी। इसी दौरान पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

Aaban Ahmed Dead: सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के बेटे आबान की दर्दनाक मौत, जेल में बंद भाई से जा रहा था मिलने, चकनाचूर हुई कार

Aaban Ahmed News: माफिया एवं पूर्व सांसद अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान समेत दो लोगों की गुरुवार (6 अगस्त) को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस घटना में कार सवार तीन अन्य लोग भी घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (देहात) अरविंद कुमार ने बताया कि पूर्व सांसद अतीक अहमद का बेटा आबान अहमद अपने कुछ साथियों के साथ झांसी जेल में बंद अपने भाइयों से मिलने जा रहा था। इस दौरान रास्ते में पुंछ थाना में झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर उसकी तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर एक डिवाइडर से टकराकर पलट गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SP) बीबीजीटीएस मूर्ति ने पत्रकारों को बताया कि इस हादसे में 21 वर्षीय आबान अहमद और उसके दोस्त सोनू (26) की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए जिनका मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा रहा है। मूर्ति ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आबान अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने के लिए झांसी जेल गया था। वहां से लौटते वक्त तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। कार का अलग हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि गाड़ी में कुल 5 लोग थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हादसे के दौरान आबान और उसके एक साथी सोनू की मौत हो गई। इसी झांसी में अतीक अहमद के तीसरे नंबर वाले बेटे असद अहमद की भी एनकाउंटर में मौत हुई थी। अतीक के कुल 5 बेटे थे। इनमें से अब दो की मौत हो चुकी है। जबकि दो बेटे जेल में बंद है। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अभी भी फरार चल रही है। उनके ऊपर यूपी पुलिस ने 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।

अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही थी। हमलावर मीडिया कर्मी बनकर पहुंचे थे। पुलिस सुरक्षा के बीच उन्होंने दोनों पर नजदीक से गोलियां चला दीं। तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके अलावा अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का 13 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने झांसी में मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मार गिराया था। उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप था। अब यूपी पुलिस को अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश है।

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Sheikh Hasina: ‘भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा…’; शेख हसीना ने की PM मोदी की तारीफ

Sheikh Hasina Hails PM Modi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार (5 अगस्त) को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। 2024 में बांग्लादेश की सत्ता से हटाए जाने के बाद मीडिया से यह उनकी पहली बातचीत थी। दिल्ली से एक वर्चुअली इंटरनेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हसीना ने अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों के बावजूद बांग्लादेश लौटने के अपने इरादे को दोहराया। भारत को बांग्लादेश का बहुत अच्छा दोस्त बताते हुए हसीना ने कहा कि नई दिल्ली मुश्किल समय में हमेशा ढाका के साथ खड़ा रहा है और आगे भी ऐसा ही करेगा।

हसीना ने घोषणा की है कि वह देश को सही राह पर लाने के वास्ते दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने यह बात भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित प्रेसवार्ता में कही। वह पांच अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं। इस ‘डिजिटल’ प्रेसवार्ता में पत्रकारों को केवल उनकी आवाज सुनाई दे रही थी। वह नजर नहीं आ रही थीं।

हसीना ने कहा, “मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।” अवामी लीग की नेता हसीना ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र रहा है।”

‘मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं’

उन्होंने अपने संबोधन में अपने देश के राजनीतिक माहौल, उनके लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा, “मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को विकास, धर्मनिरपेक्षता और समृद्धि के रास्ते पर वापस लाने के लिए है।”

‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब’ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “चाहे मेरी किस्मत में कुछ भी लिखा हो, मैं अपने लोगों के बीच रहने के लिए बांग्लादेश लौटूंगी। जब मेरे प्यारे देशवासी तकलीफ़ में हों, तो मैं उनसे दूर नहीं रह सकती।”

उन्होंने कहा, “मुझे हिरासत में लिया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है, मुझ पर झूठे मामले थोपे जा सकते हैं। लेकिन डर लोगों के प्रति मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता। मेरी जिंदगी निजी सुरक्षा के हिसाब-किताब से कहीं ऊपर है।”

‘मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं’

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी वापसी पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के साथ किसी भी तरह की पर्दे के पीछे की बातचीत की संभावना को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, “मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है। मुझे बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है। मैं लौटना चाहती हूं क्योंकि वहां के लोग सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति के हकदार हैं।” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही उन्हें अपने देश से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन वह वहां के लोगों से कभी अलग नहीं हुईं।

78 वर्षीय हसीना ढाका छोड़ने के बाद से भारत में रह रही हैं। पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हसीना की सरकार की कार्रवाई को लेकर मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद से ढाका नयी दिल्ली से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है।

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं थे, जिनके बाद उनकी सरकार सत्ता से हट गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठित समूहों ने इस आंदोलन को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने का काम किया।

हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याओं को वैध बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश एक विफल राष्ट्र है और देश में कानून-व्यवस्था नहीं है। जॉय ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक और पाकिस्तान बन गया है।

बांग्लादेश की कड़ी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने हसीना की प्रेसवार्ता पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश इस बात से नाराज है कि ढाका द्वारा नई दिल्ली को इस कार्यक्रम के द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित असर के बारे में चिंता जताए जाने के बावजूद, यह बातचीत करने की इजाजत दी गई। उसने कहा कि भारतीय धरती पर हसीना की बातचीत का कार्यक्रम बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान है।

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बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, “बांग्लादेश भारत के साथ ऐसे संबंध बनाए रखना चाहता है जो रचनात्मक हों, दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हों और भविष्य की ओर देखने वाले हों। ये संबंध संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने और राष्ट्रीय सम्मान पर आधारित हों।”

दतिया में हार के बाद बड़े एक्शन की तैयारी में भाजपा, जिला अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी पर गिर सकती है गाज

भोपाल। दतिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद अब पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे है। पार्टी में हाशिए पर चले रहे नेताओं ने अब पार्टी के फैसलों के खिलाफ सवाल उठाना शुरु कर दिया है। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने दतिया और बांकीपुर में भाजपा की हार के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स लिखा…आत्ममंथन का समय। इसके साथ 

वहीं दतिया में कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि दतिया के जनादेश से यह साफ हो गया है कि जनता अब झूठे वादों की बजाय पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और ठोस परिणाम चाहती है। पटवारी ने प्रदेश की बुनियादी चुनौतियों पर सरकार से श्र्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।  

हार पर भाजपा की समीक्षा, बड़े एक्शन की तैयारी-दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब भाजपा बड़े एक्शन की तैयारी में है। हार के कारणों की समीक्षा को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडलेवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में भाजपा के चुनाव प्रभारी और सांसद  भारत सिंह कुशवाह, प्रत्याशी आशुतोष तिवारी सहित वह सभी मंत्री भी शामिल हुए जिन्हें भाजपा ने दतिया में विभिन्न मंडलों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

पार्टी सूत्रों के साथ बैठक में उपचुनाव में भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा सहित भाजपा के जिला पदाधिकारियों, पार्षदों की भूमिका की विस्तार से समीक्षा की गई। बताया  जा  रहा है कि बैठक में शामिल दतिया विधानसभा चुनाव से जुड़े सभी नेताओं ने हार की मुख्य वजह भितरघात को बताया। इसके साथ बैठक में पार्टी की चुनावी रणनीति और चुनावी मैनेजमेंट को लेकर भी सवाल उठाया गया।

इसके साथ वोटिंग के ठीक पहले पार्षद कल्लू कुशवाह के हत्याकांड की सीआईडी जांच को लेकर उसकी पत्नी के वायरल किए गए वीडियो और वोंटिग के दिन भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह को निष्कासन के फर्जी वायरल पत्र के चुनाव पर प़ड़े प्रभाव की समीक्षा की गई।

भितरघात भाजपा की हार की मुख्य वजह-दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से उनके समर्थकों ने बवाल काटा, उसने उपचुनाव में बीजेपी की हार की पूरी भूमिका तैयार कर दी थी। इसके बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनाव परिणाम के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ के साथ दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।

दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया। 

दतिया में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ बीजेपी के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के विरोध में काम किया और अपने घर बैठ गए। दतिया बीजेपी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी के साथ बीजेपी के पार्षद एक तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नदारद रहे। 

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एजेंट भेजकर हत्या कराई

इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। पाकिस्तान पहले भी भारत पर ऐसे आरोप लगा चुका पाकिस्तान इससे पहले भी अपनी सरजमीं पर आतंकियों की हत्याओं के लिए भारत पर आरोप लगाता रहा है। जनवरी 2024 में तत्कालीन विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि भारतीय एजेंसियां पाकिस्तान में सीमा पार टारगेट किलिंग की घटनाओं में शामिल हैं। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके कुछ महीने बाद, अप्रैल 2024 में ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2020 के बाद पाकिस्तान में करीब 20 आतंकियों और उग्रवादियों की अज्ञात हमलावरों ने हत्या की। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े कई लोगों के नाम भी शामिल बताए गए थे। रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों और कथित खुफिया सूत्रों के हवाले से इन घटनाओं के पीछे भारतीय एजेंसियों की भूमिका होने का दावा किया गया था। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने द गार्डियन की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया था। मंत्रालय ने इसे झूठा और दुर्भावनापूर्ण भारत-विरोधी प्रचार बताया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि दूसरे देशों में टारगेट किलिंग करना भारत सरकार की नीति नहीं है। 40 साल पहले हुआ लश्कर ए तैयबा का गठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की। मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे। 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। इसी साल पेशावर में एक बम धमाके में अब्दुल्लाह अज्जाम की मौत हो गई। इसके बाद हाफिज सईद ने इस संगठन की कमान संभाल ली। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।

Weather Update : क्या कहता है कल का मौसम, किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, कहां आंधी-ओलों से बढ़ेगी परेशानी

water update

Weather Forecast Tomorrow : देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 अगस्त को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

 

मध्यप्रदेश में 1 अगस्त 2026 के लिए मानसूनी गतिविधियों के चलते भारी बारिश, तेज हवाओं के चलने और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के 14 जिलों में अचानक बाढ़ आने का खतरा भी जताया गया है और पूरे सूबे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों, मछुआरों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

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इन 19 राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट

 

1 अगस्त को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश जारी रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है।

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पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकती है मुश्किल

 

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है।

 

ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और वहां जाने वाले पर्यटकों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

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पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा

 

असम और अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। निचले क्षोभमंडल स्तर पर मध्य असम के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है, जो मौसम की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।

गुजरात से केरल तक भी मौसम सक्रिय

मौसम विभाग के अनुसार तट से दूर बना एक निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिणी गुजरात से उत्तरी केरल तक फैले मौसम तंत्र को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते पश्चिमी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।