WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

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केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram के यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अगले करीब 20 दिनों के भीतर कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस के जवाब मंत्रालय को सौंप दिए हैं।

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कानूनी जांच जारी

मंत्रालय की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं संबंधित फीचर किसी नियम या कानून का उल्लंघन तो नहीं करता। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो नियामकीय कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं या नहीं।

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WhatsApp के जवाब की हो रही समीक्षा

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब मिला, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी जवाबों का कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सरकार की यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। फिलहाल मंत्रालय ने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।

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WhatsApp का 'Username' फीचर क्या है?

WhatsApp एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके जरिए लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर Telegram और Signal की तरह काम करेगा। इस फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक यूजरनेम (Username) चुन सकेंगे और मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम को दूसरे लोगों के साथ साझा करेंगे।

 

Meta का दावा है कि इससे यूजर्स की निजता (Privacy) बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, भारत सरकार इस फीचर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर छिप जाएंगे तो ऑनलाइन ठगों और साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि साइबर अपराधी यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस फीचर का उपयोग करके अपराधी- 

 

  • फिशिंग (Phishing) हमले,
  • फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर ठगी,
  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड,
  • और अन्य ऑनलाइन अपराधों को अंजाम दे सकते हैं।

 

इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने की ठोस व्यवस्था नहीं बताता, तब तक इसका रोलआउट आगे न बढ़ाया जाए।

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Meta ने क्या कहा?

Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई उपाय शामिल किए जाएंगे। हालांकि मामला सिर्फ WhatsApp की लोकप्रियता का नहीं है। भारत के आईटी अधिनियम (IT Act) और आईटी नियमों (IT Rules) के तहत एक बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण WhatsApp पर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी भी है। सरकार यह भी जांच रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ते हैं, तो क्या ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही तय की जा सकती है।

 

PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में दमनकारी प्रशासन का सीधा परिणाम हैं।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।

 

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चल रहे प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों पुराने शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में दमनकारी शासन का परिणाम हैं। स्थानीय लोगों की वास्तविक समस्याओं को दूर करने के बजाय पाकिस्तान ने पुलिस की बर्बरता का सहारा लिया है। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और कृत्यों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराएगा।”

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PoK भारत का अभिन्न हिस्सा

 

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत लगातार पाकिस्तान पर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और उनके अधिकारों के दमन का आरोप लगाता रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी जताई चिंता

विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। MEA ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

 

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाल ही में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत पर भारत ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

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खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीयों की मौत

सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 28 फरवरी 2026 से अब तक खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता हैं।

 

शेख हसीना की वापसी पर भारत का जवाब

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यदि प्रत्यर्पण (Extradition) से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो उसका निपटारा कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

 

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर क्या बोला भारत?

भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने के सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

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निज्जर हत्याकांड पर भी भारत की प्रतिक्रिया

कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) द्वारा लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड से जोड़ने पर भारत ने कहा कि RCMP की टिप्पणियां हाल ही में सार्वजनिक हुए अमेरिकी अभियोग (US Indictment) के अनुरूप हैं। भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

7 Electric Scooters, कम हाइट वालों को ट्रैफिक में भी नहीं होगी परेशानी, देखें List

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अगर आपकी हाइट कम है और इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो सीट हाइट (Seat Height) सबसे अहम चीजों में से एक होती है। कम सीट हाइट होने से स्कूटर रोकते समय दोनों पैर आसानी से जमीन पर टिक जाते हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और शहर के ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान संतुलन बनाए रखना आसान हो जाता है। जानिए 7 स्कूटर्स- 

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1. Bajaj Chetak (30 और 35 Series) – सीट हाइट: 775mm

 

Bajaj Chetak भारत के सबसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटरों में से एक है। C3001, C3501, C3502 और C3503 जैसे सभी वेरिएंट्स में 775mm की सीट हाइट मिलती है। इन मॉडलों में बैटरी, रेंज और फीचर्स का अंतर है, लेकिन सीट की ऊंचाई समान रहती है।

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2. TVS iQube – सीट हाइट: 770mm

 

TVS iQube फिलहाल भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है। इसके सभी वेरिएंट्स—iQube, iQube S और iQube ST—में 770mm सीट हाइट दी गई है, जिससे यह छोटे कद के राइडर्स के लिए अच्छा विकल्प बन जाता है।

 

3. Kinetic DX – सीट हाइट: 770mm

 

Kinetic DX का डिजाइन पुराने Kinetic Honda DX से प्रेरित है। इसमें रेट्रो स्टाइलिंग के साथ मेटल बॉडी दी गई है। इसकी 770mm सीट हाइट के अलावा इसमें 37 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है, जो इस सेगमेंट में काफी बड़ा माना जाता है।

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4. Yamaha EC-06 – सीट हाइट: 770mm

 

Yamaha EC-06 का प्लेटफॉर्म River Indie पर आधारित है, लेकिन इसका डिजाइन अलग है। इसमें 770mm सीट हाइट और 24.5 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है।

 

5. Suzuki e-Access – सीट हाइट: 765mm

 

Suzuki e-Access की 765mm सीट हाइट इसे और भी आरामदायक बनाती है। इसमें की-लेस एक्सेस, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 95 किमी की दावा की गई IDC रेंज मिलती है। हालांकि इसकी कीमत करीब 1.88 लाख रुपये है, जो कई प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा है।

 

6. Ampere Nexus – सीट हाइट: 765mm

 

Ampere Nexus EX और ST दोनों वेरिएंट्स में उपलब्ध है। दोनों में 765mm सीट हाइट दी गई है। अंतर केवल डिस्प्ले और कनेक्टिविटी फीचर्स का है।

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7. TVS Orbiter – सीट हाइट: 763mm

 

TVS Orbiter के V1 और V2 वेरिएंट्स में 763mm सीट हाइट मिलती है। दोनों मॉडलों में बॉडी डिजाइन समान है, जबकि बैटरी और कनेक्टिविटी फीचर्स अलग-अलग हैं।

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

whatsapp

भारत सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच Meta ने भारत में WhatsApp के बहुप्रतीक्षित 'Username' फीचर की लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी है। कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ सभी आवश्यक चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह फीचर भारत में जारी नहीं किया जाएगा।

 

सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि WhatsApp पर यूजरनेम सिस्टम लागू होने से यूजर सुरक्षा, साइबर अपराधों की जांच और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल मंत्रालय कंपनी की ओर से भेजे गए विस्तृत जवाब की समीक्षा कर रहा है, जिसमें फीचर की आवश्यकता और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई है।

क्या है WhatsApp का Username फीचर?

WhatsApp एक ऐसा फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह सुविधा Telegram और Signal की तरह होगी, जहां हर यूजर एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेगा और उसी के जरिए दूसरे लोग उससे संपर्क कर पाएंगे।

 

Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं करना पड़ेगा। हालांकि भारत सरकार को आशंका है कि इससे साइबर अपराधियों की पहचान करना और धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना मुश्किल हो सकता है।

 

सरकार को किस बात की चिंता?

सरकार का मानना है कि अगर मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम का इस्तेमाल होने लगे, तो इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी फिशिंग, फर्जी पहचान (Impersonation), डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराध को अंजाम दे सकते हैं। 1 जुलाई को सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह दुरुपयोग रोकने की स्पष्ट योजना नहीं बताती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।

Meta ने बताए सुरक्षा उपाय

 

Meta का कहना है कि WhatsApp पर यूजरनेम फीचर लागू होने के बावजूद सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। कंपनी के अनुसार—

 

किसी यूजर से चैट करने के लिए उसका सटीक यूजरनेम जानना जरूरी होगा।

यूजरनेम का अनुमान लगाकर मैसेज भेजने या स्पैम करने की अनुमति नहीं होगी।

संदिग्ध गतिविधियों और ब्रूट-फोर्स (Brute Force) हमलों की पहचान कर उन्हें रोकने के लिए विशेष सिस्टम लगाए जाएंगे।

सरकारी संस्थानों, सेलिब्रिटी और आधिकारिक संगठनों के लिए रिजर्व यूजरनेम उपलब्ध कराए जाएंगे।

किसी की पहचान की नकल करने वाले फर्जी या भ्रामक यूजरनेम को ब्लॉक किया जाएगा।

मोबाइल नंबर रहेगा अनिवार्य

 

Meta ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजरनेम फीचर आने के बाद भी WhatsApp अकाउंट बनाने और चलाने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी रहेगा। यानी यूजरनेम केवल संपर्क का एक वैकल्पिक माध्यम होगा, मोबाइल नंबर का पूर्ण विकल्प नहीं।

अभी सरकार के फैसले का इंतजार

फिलहाल MeitY Meta के जवाबों की समीक्षा कर रहा है। यूजरनेम फीचर भारत में कब लॉन्च होगा, इसका फैसला सरकार और Meta के बीच चल रही बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। गौरतलब है कि केवल WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और Arattai जैसे प्लेटफॉर्म भी सरकार की निगरानी में हैं, क्योंकि इन सेवाओं में पहले से यूजरनेम आधारित पहचान की सुविधा उपलब्ध है।

Instagram Ad Row: क्या भारत में बैन होगा इंस्टाग्राम? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए क्या है विवाद

Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”

क्या है आरोप?

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

7 दिन में देना होगा जवाब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।

BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।

सरकार क्या चाहती है?

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।

सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई

भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।

Meta पर बढ़ा दबाव

सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है CSEAM?

Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस

इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।

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सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।

RailOne App का बड़ा कमाल, AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

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भारतीय रेलवे का डिजिटल टिकटिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक हो गया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई रेलवे आरक्षण प्रणाली में पिछले चार दशकों के दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव हुए, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। नई व्यवस्था से न केवल टिकट बुकिंग आसान हुई है, बल्कि इसकी क्षमता भी कई गुना बढ़ाई गई है।

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88% टिकट अब ऑनलाइन बुक हो रहे

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। आज स्थिति यह है कि अधिकांश यात्री टिकट काउंटर की बजाय ऑनलाइन टिकट बुक करना पसंद करते हैं। वर्तमान में देश में कुल टिकट बुकिंग की करीब 88 प्रतिशत मांग ऑनलाइन माध्यमों से पूरी हो रही है।

RailOne App तेजी से बन रहा यात्रियों की पहली पसंद

भारतीय रेलवे का RailOne मोबाइल ऐप यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च किए गए इस ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। टिकटिंग या अन्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान भी इसी ऐप के जरिए किया जा सकता है।

AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

 

RailOne ऐप में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई सुविधा जोड़ी गई है। टिकट बुक करते समय ऐप यह अनुमान लगाता है कि वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, पहले इस अनुमान की सटीकता करीब 53 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 94 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। यह फीचर इस साल की शुरुआत में शुरू किया गया था और यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

एक ही ऐप में मिलती हैं रेलवे की सभी सुविधाएं

RailOne ऐप के जरिए यात्री आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइम टेबल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजिशन, वेटिंग स्टेटस, Rail Madad के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा और यात्रा के दौरान सीट पर खाना ऑर्डर करने जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

रोजाना 9 लाख से ज्यादा टिकट हो रहे बुक

 

रेलवे के अनुसार, देशभर में प्रतिदिन 9.29 लाख से अधिक टिकट RailOne ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 7.20 लाख अनारक्षित (Unreserved) और 2.09 लाख आरक्षित (Reserved) टिकट शामिल हैं। अनारक्षित टिकटों में प्लेटफॉर्म टिकट भी शामिल हैं।  अब तक इस ऐप को Google Play Store से 3.16 करोड़ और Apple iOS डिवाइस पर 33.17 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

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यात्रियों को मिल रही 43% तक सब्सिडी

भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री किराए पर 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी। इसका मतलब है कि प्रत्येक यात्री को औसतन 43 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। यानी यदि किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपए है, तो यात्री को उसके लिए औसतन केवल 57 रुपए ही चुकाने पड़ते हैं।

WhatsApp Username विवाद बढ़ा, सरकार की रडार पर Telegram और Signal, Arattai भी हटाएगा यूजरनेम फीचर

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WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। भारत सरकार की आपत्तियों के बाद अब सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी सरकार की जांच के दायरे में आ गए हैं। इसी बीच Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने घोषणा की है कि उनकी मैसेजिंग ऐप Arattai से भी Username फीचर हटाया जाएगा।  कुछ साइबर एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि सही सुरक्षा उपायों के साथ Username फीचर मोबाइल नंबर साझा किए बिना सुरक्षित बातचीत का बेहतर विकल्प भी बन सकता है। WhatsApp को मिला नोटिस, सरकार ने लगाई रोक

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हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि वह अपने यूजर्स के लिए Username फीचर लाने जा रहा है। इस फीचर की मदद से लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। लेकिन फीचर की घोषणा के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को नोटिस जारी कर इसकी लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगाने को कहा। सरकार का कहना है कि पहले इस फीचर के प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा जरूरी है।

अब Telegram और Signal से भी मांगा जाएगा जवाब

WhatsApp के बाद अब सरकार की नजर Telegram और Signal पर भी है। इन दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से ही Username फीचर उपलब्ध है, जिससे यूजर बिना मोबाइल नंबर बताए दूसरे व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर किसी यूजर की वास्तविक पहचान कैसे सत्यापित की जाती है और क्या कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या अन्य व्यक्ति जैसा फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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Arattai भी हटाएगा Username फीचर

Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी अपना Username फीचर बंद करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बदलते नियामकीय माहौल और संभावित नियमों के अनुरूप लिया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर Username फीचर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर जवाब जरूर मांगा है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

 

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि Username फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधी किसी सरकारी विभाग, बैंक, सेलिब्रिटी या प्रसिद्ध संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। चूंकि WhatsApp देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग ऐप्स में शामिल है, इसलिए इस तरह की धोखाधड़ी का खतरा और बढ़ सकता है।

WhatsApp ने सफाई में क्या कहा

Meta का कहना है कि Username फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। सेलिब्रिटी और प्रमुख संस्थाओं से जुड़े यूजरनेम रिजर्व रखे जाएंगे, ताकि उनकी फर्जी पहचान न बनाई जा सके। यूजर चाहें तो Username Key फीचर चालू कर सकते हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति को सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ा चार अंकों का यूनिक कोड भी पता होना जरूरी होगा। WhatsApp पर Username की कोई सार्वजनिक Search Directory नहीं होगी, जिससे अनचाहे मैसेज और स्पैम की संभावना कम होगी।

WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त! लॉन्च रोकने का आदेश, मेटा से 3 दिन में मांगा जवाब : सूत्र

भारत में लोकप्रिय सोशल मैसेजिंग ऐप WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस भेजा है। साथ ही साफ निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर सरकार की सलाह-मशविरा प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए। सरकारी सूत्रों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।

तीन दिन में मांगा जवाब

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने Meta से इस फीचर को लेकर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। कंपनी को बताना होगा कि यह फीचर कैसे काम करेगा। साथ ही, इससे जुड़े सुरक्षा और अन्य पहलुओं को कैसे संभाला जाएगा।

WhatsApp का यूजरनेम फीचर क्या है?

WhatsApp यूजर्स नए फीचर के आने के बाद अपना एक यूनिक यूजरनेम बना सकेंगे। इसके जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। WhatsApp ने पहले कहा था कि इस साल फीचर के बड़े रोलआउट से पहले यूजर्स को अपना यूनिक यूजरनेम रिजर्व करने का विकल्प मिलेगा। अभी WhatsApp पर सभी यूजर्स के लिए मोबाइल नंबर साझा करना अनिवार्य रहता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि Meta को साफ तौर पर कहा गया है कि जब तक सरकार की परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाएगा।

सरकार को किस बात की चिंता?

सरकार इस फीचर के असर की जांच कर रही है। खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि यूजरनेम के जरिए लोगों की पहचान की पुष्टि कैसे होगी और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा पर इसका क्या असर पड़ेगा।

हाल की रिपोर्टों में भी कहा गया था कि सरकार इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देने या दूसरे तरह के दुरुपयोग के लिए तो नहीं किया जा सकता।

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