Instagram Ad Row: क्या भारत में बैन होगा इंस्टाग्राम? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए क्या है विवाद

Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”

क्या है आरोप?

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

7 दिन में देना होगा जवाब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।

BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।

सरकार क्या चाहती है?

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।

सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई

भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।

Meta पर बढ़ा दबाव

सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है CSEAM?

Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस

इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें- Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।

Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

Khamenei Funeral News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ईरान के लोग खामेनेई को पसंद नहीं करते। लेकिन अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी देखकर वे चौंक गए। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें ईरान के अंदर बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया की उम्मीद थी। एक्सियोस (Axios) से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह तेहरान में अंतिम संस्कार की रस्मों पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

अंतिम संस्कार के वीडियो के बारे में पूछे जाने पर न्यूज वेबसाइट Axios से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हैरान था। मुझे लगा था कि लोग उससे नफरत करते हैं।” यह टिप्पणी तब आई जब खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए तेहरान में लाखों लोग जमा हुए। खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा। अंत में मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि लोगों के आंसू नकली हों।

‘हम चाहें तो सभी नेताओं को निशाना बना सकते थे’

ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। अमेरिका चाहे तो उन्हें निशाना बना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक, “वे सभी एक जगह मौजूद हैं। एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”

‘ईरान समझौता करना चाहता है’

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने अंतिम संस्कार की अवधि तक बातचीत और सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। हमने अंतिम संस्कार के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया क्योंकि हम ऐसा करना उचित समझते हैं।”

तेहरान में उमड़ा जनसैलाब

4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार में तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धांजलि देने आए लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में ली थी। इस दौरान अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। उनके ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया।

9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार की रस्में ईरान के कई शहरों में जारी रहेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए मोजतबा खामेनेई के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना कम है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन गया?

केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में शुक्रवार को हिस्सा लिया। दोनों ने भारत सरकार एवं देश की जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले तीन दशक से ईरान का नेतृत्व कर रहे खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दिन मृत्यु हो गई थी।

विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने X पर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के हैंडल को टैग करते हुए पोस्ट किया, “माननीय बिहार के राज्यपाल और मैंने तेहरान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार और देश की जनता की ओर से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।”

उन्होंने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। बिहार लोकभवन ने X पर एक पोस्ट में कहा कि राज्यपाल ने पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की। बिहार के लोकभवन ने राज्यपाल हसनैन के हैंडल को टैग करते हुए कहा, “विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा के साथ आज तेहरान में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की।”

लोकभवन ने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी X पर एक पोस्ट जारी करके हसनैन और मार्गेरिटा के श्रद्धांजलि अर्पित करने का वीडियो शेयर किया। यह श्रद्धांजलि उस सभागार में दी गई, जहां खामेनेई के लिए शोक समारोह आयोजित किया गया था।

विपक्षी नेता भी पहुंचे तेहरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती और भारत से गए सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उनकी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया, क्योंकि इसमें कई लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत सरकार का सवाल है, हमने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। हमारी ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा आज तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”

ये भी पढे़ं- E20 पेट्रोल से बिगड़ी Innova Hycross? एथेनॉल विवाद के बीच बिहार के यूट्यूबर का दावा, Toyota का आया जवाब

विदेश मंत्रालय ने दो जुलाई को जारी अपने बयान में कहा था, “इस कार्यक्रम में भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों तथा लोगों के बीच संपर्क के महत्व को रेखांकित करता है, जो राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।” खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। जबकि उन्हें नौ जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

Ali Khamenei Funeral: खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़, रोते-बिलखते दिखे लोग, VIDEO हुआ वायरल

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इन वीडियो क्लिप्स में विशाल जनसैलाब नजर आ रहा है, जहां हजारों-लाखों लोग काले कपड़ों में अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं। भीड़ में कई लोग भावनात्मक रूप से टूटते हुए रोते-बिलखते, छाती पीटते और शोक में डूबे दिखाई दे रहे हैं। ईरान के विभिन्न शहरों में चल रहे इस छह दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इन दृश्यों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं

जनसैलाब में बदली अंतिम विदाई

तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है। लोग ईरानी झंडे के साथ शामिल हो रहे हैं, जबकि कई भावुक होकर रोते दिखाई दे रहे हैं। पूरे आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

छह दिनों का लंबा शोक कार्यक्रम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 और 5 जुलाई को ग्रैंड इमाम मुसल्ला में पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इसके बाद 6 जुलाई से अंतिम यात्रा शुरू हुई, जो कई शहरों से गुजरते हुए 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में समाप्त होगी। यह पूरा आयोजन एक राजकीय और बहु-दिवसीय शोक समारोह है।

भारत से भी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

इस अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ है। इसमें बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल हैं। इसके अलावा महबूबा मुफ्ती भी इस आयोजन में मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर बंटे रिएक्शन

वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे जनता का गहरा समर्थन बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स भीड़ की वास्तविकता और राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। कई तरह की चर्चाएं और दावे लगातार सामने आ रहे हैं।

कड़े सुरक्षा इंतजाम और हाई-प्रोफाइल आयोजन

इस आयोजन की जिम्मेदारी IRGC की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” के पास है। पूरे ईरान में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यह आयोजन अब केवल धार्मिक नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी बन गया है।