ईरान में खामेनेई के जनाजे से पहले खुफिया रिपोर्ट लीक, एडवांस में तैयार हुईं 3000 कब्रें! ऐसा क्या होने जा रहा?

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों अंतिम विदाई की रस्में उनकी मौत के करीब चार महीने बाद शुक्रवार को शुरू हुईं हैं। अंतिम विदाई की रस्में तीन जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगा। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के अधिकारी पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के प्रस्तावित एक सप्ताह लंबे अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी भीड़ को संभालने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि भगदड़ या भीड़ से जुड़ी घटनाओं में 1,500 से 3,000 लोगों की जान जा सकती है या कई लोग घायल हो सकते हैं।

3000 लोगों के मरने की जताई आशंका 

जर्मन अखबार वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रेड क्रिसेंट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संगठन ने पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ को एक गोपनीय पत्र भेजा था। इसमें चेतावनी दी गई थी कि अंतिम यात्रा के दौरान सबसे खराब स्थिति में 1,500 से 3,000 लोगों की मौत हो सकती है।

अधिकारियों ने दिए गए ये निर्देश 

रिपोर्ट के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों ने किसी भी बड़ी दुर्घटना से निपटने के लिए विस्तृत तैयारी की है। उन्हें आशंका है कि अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की भीड़ और तेज गर्मी के कारण भगदड़ मच सकती है या भीड़ से जुड़े गंभीर हादसे हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेहरान नगर निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि बेहश्त-ए ज़हरा कब्रिस्तान में पहले से ही हजारों अतिरिक्त कब्रें तैयार कर ली गई हैं। कर्मचारी के अनुसार, अधिकारियों को 3,000 तक शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ और भीषण गर्मी में क्या स्थिति बनेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

मौत के करीब चार महीने बाद हो रहा अंतिम संस्कार

रिपोर्ट के अनुसार, किसी बड़े हादसे की स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों ने शवों की पहचान और लापता लोगों की तलाश के लिए एक विशेष टीम भी बनाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के  सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की 28 फरवरी को ईरान-इजराइल युद्ध के पहले दिन हुए एक इजराइली हमले में मौत हो गई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए थे। उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार का कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। खामेनेई का ताबूत तीन दिन तक तेहरान में रखा जाएगा। इसके बाद मंगलवार को उसे पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा। बुधवार को इराक में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और गुरुवार को उन्हें उत्तर-पूर्वी ईरान के उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा।

पहले भी हुआ है ये हादसा 

साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी की मौत के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे ईरान में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 7 जनवरी 2020 को उनके गृहनगर केरमान में अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अधिकारियों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कुछ घंटों के लिए रोकनी पड़ी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और इलाके को सुरक्षित बनाया जा सके। WELT की रिपोर्ट के मुताबिक, अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी वजह से ईरानी अधिकारी पहले से पूरी तैयारी कर रहे हैं, ताकि 2020 जैसी कोई दुखद घटना दोबारा न हो।

Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत में खेत में काम कर रहे एक किसान को अचानक कोबरा ने काट लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सांप के काटते ही किसान की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे चक्कर, कमजोरी और शरीर में सुन्नपन महसूस होने लगा। घटना के बाद परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत मदद की कोशिश करने लगे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। सांप के जहर से बचाव को लेकर अक्सर लोग गलत जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं, और यही इस घटना में भी देखने को मिला। डॉक्टरों ने बाद में साफ किया कि ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका होता है, वरना जहर तेजी से शरीर में फैल सकता है।

पत्नी ने टीवी देखकर किया खतरनाक इलाज

घबराई हुई पत्नी ने तुरंत वही किया जो उसने टीवी पर देखा था उसने अपने पति के घाव से जहर चूसने की कोशिश की। उसे लगा कि इससे जान बच जाएगी, लेकिन यही फैसला उसके लिए भी भारी पड़ गया।

दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा

कुछ ही घंटों बाद पत्नी के मुंह, जीभ और चेहरे में सुन्नपन शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे भी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों को कोबरा के जहर से हल्का जहर चढ़ गया था और एंटी-वेनम देकर इलाज किया गया।

ये गलती कभी न करें

डॉक्टरों ने साफ कहा कि सांप के जहर को मुंह से चूसना बेहद खतरनाक है। मुंह की नसों के जरिए जहर सीधे शरीर में पहुंच सकता है। साथ ही घाव को काटना, जलाना या बर्फ लगाना भी नुकसानदायक हो सकता है।

सांप काटने पर क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे समय में तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को कम से कम हिलाएं। सांप का रंग, आकार और निशान याद रखना या फोटो लेना इलाज में मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में मामला

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग इसे “टीवी ड्रामा वाली गलती” बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने पत्नी की चिंता और प्यार की भी तारीफ की है।

Ali Khamenei Funeral: खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़, रोते-बिलखते दिखे लोग, VIDEO हुआ वायरल

Ali Khamenei Funeral: खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़, रोते-बिलखते दिखे लोग, VIDEO हुआ वायरल

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इन वीडियो क्लिप्स में विशाल जनसैलाब नजर आ रहा है, जहां हजारों-लाखों लोग काले कपड़ों में अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं। भीड़ में कई लोग भावनात्मक रूप से टूटते हुए रोते-बिलखते, छाती पीटते और शोक में डूबे दिखाई दे रहे हैं। ईरान के विभिन्न शहरों में चल रहे इस छह दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इन दृश्यों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं

जनसैलाब में बदली अंतिम विदाई

तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है। लोग ईरानी झंडे के साथ शामिल हो रहे हैं, जबकि कई भावुक होकर रोते दिखाई दे रहे हैं। पूरे आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

छह दिनों का लंबा शोक कार्यक्रम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 और 5 जुलाई को ग्रैंड इमाम मुसल्ला में पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इसके बाद 6 जुलाई से अंतिम यात्रा शुरू हुई, जो कई शहरों से गुजरते हुए 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में समाप्त होगी। यह पूरा आयोजन एक राजकीय और बहु-दिवसीय शोक समारोह है।

भारत से भी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

इस अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ है। इसमें बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल हैं। इसके अलावा महबूबा मुफ्ती भी इस आयोजन में मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर बंटे रिएक्शन

वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे जनता का गहरा समर्थन बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स भीड़ की वास्तविकता और राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। कई तरह की चर्चाएं और दावे लगातार सामने आ रहे हैं।

कड़े सुरक्षा इंतजाम और हाई-प्रोफाइल आयोजन

इस आयोजन की जिम्मेदारी IRGC की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” के पास है। पूरे ईरान में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यह आयोजन अब केवल धार्मिक नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी बन गया है।

अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार शुरू, लाखों लोगों के आने की उम्मीद, जानें 6 दिन का पूरा कार्यक्रम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को अधिकारी “सदी का अंतिम संस्कार” बता रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 1.2 करोड़ से लेकर 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक शोक समारोह बन गया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए इस छह दिवसीय कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ रही है और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसी बीच यह भी सामने आया है कि खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार समारोह में शामिल नहीं होंगे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

अभूतपूर्व तैयारियां और कड़ सुरक्षा

इस बार की तैयारियां किसी भी सरकारी कार्यक्रम से कहीं ज्यादा बड़ी बताई जा रही हैं। पूरे आयोजन की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” संभाल रही है। तेहरान से लेकर अन्य शहरों तक सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

दुनिया भर की नजरें

तेहरान में होने वाला यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मंच भी बन गया है। दर्जनों देशों से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और संसद अध्यक्ष जैसे नेता शामिल हो रहे हैं। करीब 800 विदेशी पत्रकार इस पूरे कार्यक्रम की कवरेज कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है।

भीड़ प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था

अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। खामेनेई का पार्थिव शरीर ऊंचे मंच पर रखा गया है, जहां लोग 15-20 मिनट के भीतर दर्शन कर बाहर निकल रहे हैं। जमकारान मस्जिद जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जनाजे की नमाज और अन्य रस्में भी आयोजित की जा रही हैं।

छह दिनों का पूरा कार्यक्रम

अंतिम संस्कार कई शहरों में चरणबद्ध तरीके से हो रहा है:

  • 4–6 जुलाई: तेहरान में अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि
  • 7 जुलाई: कोम में धार्मिक कार्यक्रम
  • 8 जुलाई: इराक के नजफ और कर्बला में जुलूस
  • 9 जुलाई: मशहद में अंतिम दफन

इसके बाद पूरे देश में 40 दिनों तक शोक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम चलेंगे।

प्रतीकात्मक संदेश

आयोजन का नारा “We Must Rise” रखा गया है, जिसे मुट्ठी भींचे हाथ के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक ताकत और शिया दुनिया में उसके प्रभाव का प्रदर्शन भी है।

वैश्विक शोक और ऐतिहासिक भीड़

तेहरान की सड़कें लाखों लोगों से भर चुकी हैं। काले कपड़ों में उमड़ी भीड़, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा घेराबंदी ने पूरे शहर को शोक के विशाल मंच में बदल दिया है। यह आयोजन न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना बन चुका है।

Mojtaba Khamenei: इस डर की वजह से पिता अली खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा! ईरान से आया बिग अपडेट

Mojtaba Khamenei: ईरान से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है। इस फैसले के पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं और संभावित हमलों का डर बताया जा रहा है क्योंकि इस समय इजरायल के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खुद जनता से मिलना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऐसा न करने की सख्त सलाह दे रही हैं।

तेहरान के लिए रवाना होने से पहले इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बातचीत करते हुए इलाही ने कहा कि मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और मेरे कुछ दोस्तों से मिला जिन्होंने मोजतबा से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है और वे उनके लिए सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। मुझे लगता है कि वह बाहर नहीं आएंगे।

कड़े सुरक्षा पहरे के बीच होगा अंतिम संस्कार

अली खामेनेई के जनाजे में हजारों शोककुल लोगों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के तेहरान पहुंचने की उम्मीद है। यह समारोह इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए एक धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। इस साल की शुरुआत में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बीच हुए युद्ध के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। संभावित जवाबी कार्रवाई या टारगेटेड अटैक्स की आशंकाओं को देखते हुए अधिकारियों द्वारा अंतिम संस्कार के जुलूस के आसपास व्यापक सुरक्षा बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।

इलाही ने बताया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में माहौल बेहद भावुक है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत-बहुत बड़ा नुकसान है। उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी आत्मा, अपने प्राण खो दिए हैं। उनका मानना है कि कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और विदेशों से समर्थक दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए यात्रा कर रहे हैं। वे एकजुटता दिखाने और यह कहने आ रहे हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलेंगे।

मोजतबा की पब्लिक अपियरनेंस नहीं होने पर उठ रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई की संभावित अनुपस्थिति से उनकी स्थिति और उनके अधिकार को लेकर कयासबाजी और तेज होने की संभावना है। 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से वह लोगों के बीच से दूर रहे हैं। हालांकि उन्होंने एक दर्जन से अधिक लिखित संदेश जारी किए हैं और आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रमाणित सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिस हवाई हमले में खामेनेई परिवार के कई सदस्य और मोजतबा की पत्नी जहरा हदाद अदेल मारी गई थीं, उसी हमले में मोजतबा खुद भी घायल हो गए थे। उनकी इस लंबी अनुपस्थिति ने राजनयिक और खुफिया हलकों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति दोनों को लेकर अटकलों को हवा दी है। अगर वह अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होते हैं तो उनके नेतृत्व और सार्वजनिक वैधता पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।

आपको बता दें कि अपने पिता के विपरीत मोजतबा खामेनेई ने अपने करियर का अधिकांश समय पर्दे के पीछे बिताया है। अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने से बहुत पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने 1989 में देश का सर्वोच्च पद संभालने से पहले 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। इसके उलट मोजतबा ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध बनाए रखे।

साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन पर ईरान के कट्टरपंथी क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उन्होंने ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स और आंतरिक सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने के लिए कुद्स फोर्स और बासिज मिलिशिया के साथ मिलकर काम किया था। उनका नाम ईरान के राजनीतिक विवादों में भी बार-बार सामने आया है।

क्या मोजतबा कायम कर पाएंगे पिता जैसा दबदबा?

भले ही मोजतबा सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या वह अपने पिता जैसा प्रभाव हासिल कर पाएंगे। खुफिया आकलनों का हवाला देने वाली ब्लूमबर्ग की एक जांच के मुताबिक मोजतबा ने तेल राजस्व और अपतटीय निवेशों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव बनाया है। कई जानकारों का तर्क है कि संस्थागत शक्ति सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकार में नहीं बदल जाती। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने कहा कि मोजतबा के पास अभी भी उस कद की कमी है जो उनके पिता ने दशकों में बनाया था। जूनो ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की भूमिका अभी अस्पष्ट है। इस मोड़ पर इसकी संभावना बहुत कम है कि उनके पास उतना प्रभाव हो जितना उनके पिता का हुआ करता था।

तनाव के बावजूद ईरान जता रहा है भरोसा

जब इलाही से इजरायल की ओर से मिल रही नई धमकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद ईरान मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान की तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि ईरान युद्ध जीत गया। ईरान अब भी बहुत मजबूत है और डटने के लिए तैयार है। फिलहाल सभी की निगाहें तेहरान पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई ईरान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आखिरकार सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या नहीं।

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