FIFA World Cup Final में जबरन स्टेज पर खड़े रहे डोनाल्ड ट्रंप, हूटिंग का VIDEO हुआ वायरल

FIFA World Cup 2026 का फाइनल Spain की ऐतिहासिक जीत के साथ खत्म हुआ, लेकिन मैच के बाद Trophy Ceremony में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। Spain ने Extra Time में Argentina को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, लेकिन विजेता टीम के जश्न के बीच US President Donald Trump की मौजूदगी सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई। स्टेडियम में उनके लिए हूटिंग हुई और ट्रॉफी सौंपने के बाद उनका मंच पर रुकना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

 

New York New Jersey Stadium में खेले गए रोमांचक फाइनल में दोनों टीमें 90 मिनट तक गोल नहीं कर सकीं। मुकाबले का इकलौता गोल Ferran Torres ने Extra Time के 106वें मिनट में दागा, जिसने Spain को 1-0 की यादगार जीत दिलाई।

 

Argentina के लिए मैच और मुश्किल तब हो गया जब Enzo Fernandez को दूसरे येलो कार्ड के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। अंतिम क्षणों में तनाव इतना बढ़ गया कि खिलाड़ियों के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली। इसके साथ ही Lionel Messi का लगातार दूसरा World Cup जीतने का सपना भी टूट गया।

Donald Trump की एंट्री पर स्टेडियम में गूंजी हूटिंग

 

फाइनल देखने पहुंचे Donald Trump ने FIFA President Gianni Infantino के साथ मिलकर खिलाड़ियों को मेडल और विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपी। जैसे ही Trump मैदान पर पहुंचे, स्टेडियम के कई हिस्सों से तेज हूटिंग और सीटी की आवाजें सुनाई दीं।

 

हालांकि समारोह आगे बढ़ता रहा और Trump ने Spain के कप्तान Rodri को World Cup Trophy सौंपी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वही पूरी रात की सबसे चर्चित घटना बन गया।

ALSO READ: जिसे Messi ने गोद में नहलाया, अब उसी से होगी FIFA World Cup Final की जंग! जानिए 19 साल पुरानी तस्वीर की कहानी


Trophy देने के बाद स्टेज पर ही खड़े रहे Trump

 

ट्रॉफी सौंपने के बाद जहां Gianni Infantino मंच से हट गए, वहीं Donald Trump विजेता खिलाड़ियों के बीच ही खड़े रहे। Spain के खिलाड़ी Trophy Lift की तैयारी कर रहे थे, लेकिन Trump कुछ देर तक वहीं मुस्कुराते हुए खिलाड़ियों से हाथ मिलाते और तालियां बजाते नजर आए।

 

बताया जाता है कि इसके बाद Gianni Infantino दोबारा उनके पास पहुंचे और उन्हें धीरे से मंच से हटने का इशारा किया। कुछ क्षण बाद Trump मंच के किनारे चले गए, जिसके बाद Rodri ने अपने साथियों के साथ World Cup Trophy उठाई और Spain का ऐतिहासिक जश्न शुरू हुआ।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

 

पूरी Trophy Ceremony के वीडियो कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में Trump की एंट्री के दौरान हुई हूटिंग चर्चा का विषय बनी, जबकि दूसरे वीडियो में उनके Trophy Lift के दौरान मंच पर खड़े रहने को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।

 

कई यूजर्स ने इसे पिछले साल हुए FIFA Club World Cup से भी जोड़कर देखा, जब Chelsea की जीत के बाद भी Donald Trump खिलाड़ियों के साथ मंच पर कुछ देर तक मौजूद रहे थे। इस बार हालांकि Trophy Lift से पहले उन्हें मंच से हटते हुए देखा गया।

 

पहले भी विवादों में रह चुके हैं Donald Trump

 

World Cup 2026 के दौरान Donald Trump पहले भी सुर्खियों में आ चुके हैं। उन्होंने एक बयान में दावा किया था कि उन्होंने Gianni Infantino से बात कर USA के खिलाड़ी Folarin Balogun का Red Card हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद भी काफी विवाद हुआ था।

 

अब World Cup Final की Trophy Ceremony ने Donald Trump को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। Spain की ऐतिहासिक जीत के साथ-साथ Trophy Presentation का यह पल भी लंबे समय तक फुटबॉल प्रशंसकों के बीच याद किया जाएगा। 

 

Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

Khamenei Funeral News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ईरान के लोग खामेनेई को पसंद नहीं करते। लेकिन अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी देखकर वे चौंक गए। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें ईरान के अंदर बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया की उम्मीद थी। एक्सियोस (Axios) से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह तेहरान में अंतिम संस्कार की रस्मों पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

अंतिम संस्कार के वीडियो के बारे में पूछे जाने पर न्यूज वेबसाइट Axios से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हैरान था। मुझे लगा था कि लोग उससे नफरत करते हैं।” यह टिप्पणी तब आई जब खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए तेहरान में लाखों लोग जमा हुए। खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा। अंत में मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि लोगों के आंसू नकली हों।

‘हम चाहें तो सभी नेताओं को निशाना बना सकते थे’

ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। अमेरिका चाहे तो उन्हें निशाना बना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक, “वे सभी एक जगह मौजूद हैं। एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”

‘ईरान समझौता करना चाहता है’

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने अंतिम संस्कार की अवधि तक बातचीत और सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। हमने अंतिम संस्कार के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया क्योंकि हम ऐसा करना उचित समझते हैं।”

तेहरान में उमड़ा जनसैलाब

4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार में तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धांजलि देने आए लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में ली थी। इस दौरान अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। उनके ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया।

9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार की रस्में ईरान के कई शहरों में जारी रहेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए मोजतबा खामेनेई के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना कम है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन गया?

केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में शुक्रवार को हिस्सा लिया। दोनों ने भारत सरकार एवं देश की जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले तीन दशक से ईरान का नेतृत्व कर रहे खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दिन मृत्यु हो गई थी।

विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने X पर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के हैंडल को टैग करते हुए पोस्ट किया, “माननीय बिहार के राज्यपाल और मैंने तेहरान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार और देश की जनता की ओर से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।”

उन्होंने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। बिहार लोकभवन ने X पर एक पोस्ट में कहा कि राज्यपाल ने पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की। बिहार के लोकभवन ने राज्यपाल हसनैन के हैंडल को टैग करते हुए कहा, “विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा के साथ आज तेहरान में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की।”

लोकभवन ने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी X पर एक पोस्ट जारी करके हसनैन और मार्गेरिटा के श्रद्धांजलि अर्पित करने का वीडियो शेयर किया। यह श्रद्धांजलि उस सभागार में दी गई, जहां खामेनेई के लिए शोक समारोह आयोजित किया गया था।

विपक्षी नेता भी पहुंचे तेहरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती और भारत से गए सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उनकी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया, क्योंकि इसमें कई लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत सरकार का सवाल है, हमने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। हमारी ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा आज तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”

ये भी पढे़ं- E20 पेट्रोल से बिगड़ी Innova Hycross? एथेनॉल विवाद के बीच बिहार के यूट्यूबर का दावा, Toyota का आया जवाब

विदेश मंत्रालय ने दो जुलाई को जारी अपने बयान में कहा था, “इस कार्यक्रम में भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों तथा लोगों के बीच संपर्क के महत्व को रेखांकित करता है, जो राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।” खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। जबकि उन्हें नौ जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत के बीच लगातार तीसरे सेशन में गिरे क्रूड के दाम, $71 के नीचे आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price: ईरान और अमेरिका के बीच पॉजिटिव बातचीत की खबरों से कच्चे तेल में लगातार तीसरे सेशन में नरमी देखने को मिल रहा। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की शिपमेंट बढ़ी और US और ईरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत में प्रोग्रेस के संकेत दिखे।

सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड पिछले दो सेशन में 3% से ज़्यादा गिरने के बाद $71 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $68 प्रति बैरल के आसपास था।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ब्लूमबर्ग ने US अधिकारी के हवाले से कहा कि स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट बढ़कर 10 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज़्यादा हो गया है, जो समुद्री ट्रैफिक को रोकने की ईरान की घटती क्षमता को दिखाता है। इस बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही बातचीत में हुई प्रोग्रेस का स्वागत किया।

कतर ने कहा कि अगले राउंड की बातचीत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी, जो लड़ाई शुरू होने पर एक एयर स्ट्राइक में मारे गए थे। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि ये सेरेमनी 4 जुलाई से शुरू होंगी और कई दिनों तक चलेंगी।

2020 के बाद से तिमाही में सबसे बड़ी गिरावट के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का शिपमेंट – जो फारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है – वीकेंड में हुई झड़पों के बावजूद बिना रुके जारी रहा। हालांकि कुल सप्लाई कुछ हद तक सीमित है, यूनाइटेड अरब अमीरात ने अल्टरनेटिव लॉजिस्टिक्स के ज़रिए एक्सपोर्ट को लड़ाई से पहले के लेवल पर वापस ला दिया है, जबकि अमेरिकी तेल की कमज़ोर मांग के बीच अमेरिका के बड़े कच्चे तेल के बेंचमार्क डिस्काउंट पर आ गए हैं।

कतर में बातचीत से पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पर कंट्रोल बनाए रखने के अपने इरादे को फिर से पक्का किया, और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम और लेबनान में लड़ाई सहित कुछ खास रुकावटों पर ज़ोर दिया, जो 60-दिन के सीज़फ़ायर पीरियड के दौरान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वर्जीनिया में रिपोर्टर्स से बात करते हुए दोहराया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

US-ईरान युद्ध: बुधवार, 1 जुलाई को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जब ईरान ने कहा कि वह US अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकने वाले नाज़ुक सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर, और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ मंगलवार को दोहा पहुँचे, जिसे व्हाइट हाउस ने हाई-लेवल बातचीत बताया। हालाँकि, ईरान और मेज़बान देश कतर ने साफ़ किया कि US डेलीगेशन सीधे ईरानी प्रतिनिधियों के बजाय मीडिएटर्स से बात करेगा। कतर ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी उन अधिकारियों में शामिल थे जो विटकॉफ और कुशनेर से मिले थे।

बुधवार की बढ़त के बावजूद, तिमाही आधार पर भारी गिरावट के बाद तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड साल की पहली और दूसरी तिमाही के बीच लगभग $45 प्रति बैरल गिरा, जो 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इसी दौरान US क्रूड फ्यूचर्स लगभग $31 प्रति बैरल गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, जब COVID-19 महामारी ने ग्लोबल फ्यूल डिमांड को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह तेज गिरावट तब आई जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति ने उस रिस्क प्रीमियम को उलट दिया जिसने संघर्ष के दौरान कीमतों को बढ़ा दिया था।

मंगलवार को जारी रॉयटर्स के एक पोल से पता चला कि एनालिस्ट्स ने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार 2026 के लिए अपने तेल कीमतों के अनुमान को कम किया, जिससे लगातार पांच महीनों से ऊपर की ओर बदलाव का सिलसिला खत्म हो गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ग्लोबल तेल सप्लाई में लंबे समय से रुकावटों की चिंता कम हो गई है। इस बीच, US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फिर कहा कि वॉशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाजों पर ट्रांज़िट फीस लगाने की इजाज़त नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी इस पानी के रास्ते का इस्तेमाल करने वाले “जहाजों पर टोल वसूलने” से खत्म नहीं होगी।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trump vs Netanyahu: ‘यहूदी भी आपसे तंग आ चुके हैं…’; ट्रंप ने गाजा सीजफायर को लेकर नेतन्याहू को लगाई फटकार, नई किताब में बड़ा दावा

Trump vs Netanyahu: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सितंबर 2025 में फोन पर हुई एक कथित तीखी बातचीत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह दावा ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप (Regime Change: Inside The Imperial Presidency Of Donald Trump)’ नामक नई किताब में किया गया है। इस किताब को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान (Maggie Haberman और Jonathan Swan) ने लिखा है।

नई किताब में किए गए ये दावे अमेरिका और इज़राइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच पर्दे के पीछे मौजूद तनाव की तस्वीर पेश करते हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि गाजा सीजफायर को लेकर ट्रंप प्रशासन ने नेतन्याहू पर काफी दबाव बनाया था, भले ही दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि लंबे समय तक मजबूत सहयोगियों की रही हो।

किताब के अनुसार, गाजा में सीजफायर को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से नाराजगी जताते हुए कहा, “सब लोग तुमसे तंग आ चुके हैं, बिबी। सभी यहूदी भी तुमसे परेशान हैं। यहां तक कि इस कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे तंग आ चुके हैं।”

गाजा सीजफायर को लेकर बढ़ा था तनाव

किताब के मुताबिक, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच यह बातचीत सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान हुई थी। उस समय ट्रंप प्रशासन गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय शांति योजना पर काम कर रहा था।

बताया जा है कि ट्रंप को आशंका थी कि नेतन्याहू अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए सीजफायर समझौते से पीछे हट सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर नेतन्याहू पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि युद्ध बहुत लंबा खिंच चुका है और अब समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी है।

कॉल में मौजूद थे विटकॉफ और कुशनर

किताब में दावा किया गया है कि इस फोन कॉल में ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल थे। दोनों को डर था कि महीनों की बातचीत के बाद तैयार किया गया शांति प्रस्ताव इजरायल की अनिच्छा के कारण विफल हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी पक्ष नेतन्याहू से स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता था।

कतर में हमले के बाद बढ़ी नाराजगी

किताब के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर एक हवाई हमला किया था। उस समय सीजफायर को लेकर बातचीत जारी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई से कतर नाराज हो गया।

इतना ही नहीं कतर ने मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी रखने पर आपत्ति जताई। इससे युद्धविराम प्रयासों को झटका लगा। किताब का दावा है कि विटकॉफ और कुशनर को लगा कि उन्हें इजरायल की योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इससे अमेरिकी टीम के भीतर भी असंतोष पैदा हुआ।

ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया ‘कॉन मैन’

किताब के लेखकों के अनुसार ट्रंप ने निजी बातचीत में नेतन्याहू को ‘कॉन मैन’ (धोखेबाज या चालाक व्यक्ति) भी कहा था। किताब का दावा है कि ट्रंप की राजनीतिक शब्दावली में यह सबसे कठोर टिप्पणियों में से एक मानी जाती है। यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सार्वजनिक तौर पर ट्रंप और नेतन्याहू को लंबे समय तक करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है।

आखिरकार नेतन्याहू ने माना प्रस्ताव

किताब के मुताबिक, शुरुआती विरोध और तनाव के बावजूद नेतन्याहू ने आखिरकार अमेरिकी सीजफायर को स्वीकार कर लिया। किताब में दावा किया गया है कि दोहा हमले के लगभग 18 दिन बाद इजरायल इस समझौते पर सहमत हुआ। बाद में नेतन्याहू ने अपनी ओर से खेद भी जताया।

हालांकि, ये सभी दावे पत्रकारों की किताब में प्रकाशित डिटेल्स पर आधारित हैं। कथित फोन कॉल की कोई आधिकारिक रिकॉर्डिंग या सार्वजनिक ट्रांसक्रिप्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों और दावों को फिलहाल किताब में किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

ये भी पढ़ें- Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद उनके भाई चंदन तिवारी ने कर दिया बड़ा ऐलान, अंतिम संस्कार के बाद करेंगे ये काम