Lakshveer offline AI storytelling device: छोटे से लक्षवीर का बड़ा कमाल, 8 साल की उम्र में ऐसी टेक्नोलॉजी बना दी जो बना सकती है ओरिजनल कहानियां

Lakshveer offline AI storytelling device: अगर आप मानते हैं कि बड़ी सोच छोटी उम्र में नहीं आ सकती, तो एक बार फिर सोच लीजिए। 8 की उम्र ऐसा ही पड़ाव है, जिसमें बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, रंग-बिरंगी और बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाली किताबों में दिल लगा रहे होते हैं। अगर इस मासूम उम्र में कोई बच्चा कहानियों में जीने और रोज नई कहानी सुनने के लिए एक मुकम्मल तकनीक खड़ी कर दे, तो उसे आप क्या कहेंगे? टेक्नोलॉजी जीनियस! अगर हां, तो ये नाम 8 साल के लक्ष्य पर पूरी तरह से सूट करता है।

आठ साल के लक्षवीर ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं उनके लिए कहानी की किताबें बना सकती है। लगभग ₹760 के कम कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर का इस्तेमाल करके, इस नन्हे इनोवेटर ने एक ऑफलाइन, आवाज से नियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहानी सुनाने वाला उपकरण बनाया है। यह ओरिजिनल कहानियां बना सकता है, उन्हें जोर से पढ़ सकता है और बोले गए कमांड का जवाब दे सकता है। वो भी बिना इंटरनेट से कनेक्ट हुए।

लक्ष्यवीर के इस प्रोजेक्ट ने टेक्नोलॉजी के शौकीनों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे कॉम्पैक्ट, ओपन-सोर्स AI मॉडल बेहद सस्ते हार्डवेयर पर भी बखूबी चल सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, वाई-फाई या पेड एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पर निर्भर रहने के बजाय, यह डिवाइस हर काम बहुत छोटे स्तर पर करता है, जिससे यह उन जगहों के लिए सही है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है या उपलब्ध नहीं है।

कैसे काम करता है ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस

प्रोजेक्ट्स बाय लक्ष के को-फाउंडर, लक्ष्यवीर ने इस डिवाइस को एक ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर के आस-पास बनाया और इसे एक INMP441 माइक्रोफोन, एक I2S स्पीकर और एक MAX98357A एम्प्लीफायर के साथ जोड़ा। ये कम्पोनेंट यूजर्स को वॉइस कमांड के जरिए एआई से इंटरैक्ट करने का मौका देते हैं। स्टोरीटेलिंग असिस्टेंट जरूरत के हिसाब से छोटी कहानियां बना सकता है, उन्हें टेक्स्ट-टू-स्पीच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सुना सकता है, आसान एनिमेशन दिखा सकता है और “प्ले”, “पॉज”, “रिज्यूम” और “अगली कहानी” जैसे बोले गए निर्देशों का जवाब दे सकता है। अधिकांश एआई असिस्टेंट के उलट, लक्ष्य के प्रोजेक्ट में प्रोसेस का हर चरण डिवाइस पर ही होता है। कोई भी डेटा बाहरी सर्वर पर नहीं भेजा जाता है, और सिस्टम बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करता रहता है।

ओपन-सोर्स AI प्रोजेक्ट को देता है पावर

शुरू से एक लैंग्वेज मॉडल बनाने के बजाय, लक्ष्य ने ESP32 के लिए TinyStories LLM नाम के एक मौजूदा ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को मॉडिफाई किया, जिसे मूल रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपर slvDev ने तैयार किया था। मूल मॉडल को क्लाउड सपोर्ट के बिना सीधे ESP32 हार्डवेयर पर स्टोरीज बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।

WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

whatsapp users name

केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram के यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अगले करीब 20 दिनों के भीतर कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस के जवाब मंत्रालय को सौंप दिए हैं।

ALSO READ: Electric Vehicle से कैसे होगी 50000 से 1 लाख रुपए तक की कमाई, कौनसे हैं बिजनेस आइडियाज, क्या-क्या काम किया जा सकता है

कानूनी जांच जारी

मंत्रालय की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं संबंधित फीचर किसी नियम या कानून का उल्लंघन तो नहीं करता। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो नियामकीय कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं या नहीं।

ALSO READ: Bajaj Chetak और TVS iQube को मिलेगी कड़ी टक्कर, Ather 29 अगस्त को लॉन्च करेगा सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर

WhatsApp के जवाब की हो रही समीक्षा

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब मिला, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी जवाबों का कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सरकार की यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। फिलहाल मंत्रालय ने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।

ALSO READ: One Nation, One Election : एक देश-एक चुनाव पर बड़ा अपडेट, 2029 में साथ हो सकते हैं लोकसभा और विधानसभा चुनाव

WhatsApp का 'Username' फीचर क्या है?

WhatsApp एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके जरिए लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर Telegram और Signal की तरह काम करेगा। इस फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक यूजरनेम (Username) चुन सकेंगे और मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम को दूसरे लोगों के साथ साझा करेंगे।

 

Meta का दावा है कि इससे यूजर्स की निजता (Privacy) बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, भारत सरकार इस फीचर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर छिप जाएंगे तो ऑनलाइन ठगों और साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।

ALSO READ: US-Iran Conflict: अमेरिकी हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत, ईरान ने लगाए बड़े आरोप, खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले जारी

 

सरकार को किस बात की चिंता है?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि साइबर अपराधी यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस फीचर का उपयोग करके अपराधी- 

 

  • फिशिंग (Phishing) हमले,
  • फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर ठगी,
  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड,
  • और अन्य ऑनलाइन अपराधों को अंजाम दे सकते हैं।

 

इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने की ठोस व्यवस्था नहीं बताता, तब तक इसका रोलआउट आगे न बढ़ाया जाए।

ALSO READ: तीसरा बच्चा होने पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य, नियम पर Supreme Court ने क्या कहा, क्यों बताया गैर जरूरी

Meta ने क्या कहा?

Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई उपाय शामिल किए जाएंगे। हालांकि मामला सिर्फ WhatsApp की लोकप्रियता का नहीं है। भारत के आईटी अधिनियम (IT Act) और आईटी नियमों (IT Rules) के तहत एक बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण WhatsApp पर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी भी है। सरकार यह भी जांच रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ते हैं, तो क्या ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही तय की जा सकती है।

 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

whatsapp

भारत सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच Meta ने भारत में WhatsApp के बहुप्रतीक्षित 'Username' फीचर की लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी है। कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ सभी आवश्यक चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह फीचर भारत में जारी नहीं किया जाएगा।

 

सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि WhatsApp पर यूजरनेम सिस्टम लागू होने से यूजर सुरक्षा, साइबर अपराधों की जांच और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल मंत्रालय कंपनी की ओर से भेजे गए विस्तृत जवाब की समीक्षा कर रहा है, जिसमें फीचर की आवश्यकता और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई है।

क्या है WhatsApp का Username फीचर?

WhatsApp एक ऐसा फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह सुविधा Telegram और Signal की तरह होगी, जहां हर यूजर एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेगा और उसी के जरिए दूसरे लोग उससे संपर्क कर पाएंगे।

 

Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं करना पड़ेगा। हालांकि भारत सरकार को आशंका है कि इससे साइबर अपराधियों की पहचान करना और धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना मुश्किल हो सकता है।

 

सरकार को किस बात की चिंता?

सरकार का मानना है कि अगर मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम का इस्तेमाल होने लगे, तो इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी फिशिंग, फर्जी पहचान (Impersonation), डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराध को अंजाम दे सकते हैं। 1 जुलाई को सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह दुरुपयोग रोकने की स्पष्ट योजना नहीं बताती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।

Meta ने बताए सुरक्षा उपाय

 

Meta का कहना है कि WhatsApp पर यूजरनेम फीचर लागू होने के बावजूद सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। कंपनी के अनुसार—

 

किसी यूजर से चैट करने के लिए उसका सटीक यूजरनेम जानना जरूरी होगा।

यूजरनेम का अनुमान लगाकर मैसेज भेजने या स्पैम करने की अनुमति नहीं होगी।

संदिग्ध गतिविधियों और ब्रूट-फोर्स (Brute Force) हमलों की पहचान कर उन्हें रोकने के लिए विशेष सिस्टम लगाए जाएंगे।

सरकारी संस्थानों, सेलिब्रिटी और आधिकारिक संगठनों के लिए रिजर्व यूजरनेम उपलब्ध कराए जाएंगे।

किसी की पहचान की नकल करने वाले फर्जी या भ्रामक यूजरनेम को ब्लॉक किया जाएगा।

मोबाइल नंबर रहेगा अनिवार्य

 

Meta ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजरनेम फीचर आने के बाद भी WhatsApp अकाउंट बनाने और चलाने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी रहेगा। यानी यूजरनेम केवल संपर्क का एक वैकल्पिक माध्यम होगा, मोबाइल नंबर का पूर्ण विकल्प नहीं।

अभी सरकार के फैसले का इंतजार

फिलहाल MeitY Meta के जवाबों की समीक्षा कर रहा है। यूजरनेम फीचर भारत में कब लॉन्च होगा, इसका फैसला सरकार और Meta के बीच चल रही बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। गौरतलब है कि केवल WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और Arattai जैसे प्लेटफॉर्म भी सरकार की निगरानी में हैं, क्योंकि इन सेवाओं में पहले से यूजरनेम आधारित पहचान की सुविधा उपलब्ध है।

ONGC New Chairman: नियुक्ति के लिए सरकार ने बढ़ाई मैक्सिमम एज लिमिट, अब 5 साल तक का हो सकता है टर्म

सरकार ने सरकारी कंपनी ONGC के अगले चेयरमैन की नियुक्ति के लिए योग्यता शर्तों में ढील दी है। इसके तहत अधिकतम उम्र सीमा को बढ़ाकर 59 साल कर दिया गया है। साथ ही अब चुने गए उम्मीदवार को 3 साल का फिक्स्ड टर्म दिया जाएगा, जिसे और 2 साल बढ़ाया जा सकता है। इससे ONGC चेयरमैन बनने के लिए योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ गया है। ONGC भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकारी कंपनियों में नियुक्तियों के लिए सरकार की एजेंसी ‘पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड (PESB)’ ने ONGC के चेयरमैन पद के लिए आवेदन मंगाए हैं। यह पद 7 दिसंबर को खाली हो जाएगा। 6 दिसंबर 2026 को मौजूदा चेयरमैन अरुण कुमार सिंह का बढ़ा हुआ कार्यकाल खत्म होने वाला है। नई नियुक्ति के लिए संशोधित उम्र सीमा सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) में बोर्ड-लेवल की ज्यादातर नियुक्तियों के लिए अपनाए जाने वाले नियमों से अलग है।

कैसे होगा सिलेक्शन और कब तक कर सकते हैं आवेदन

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के विज्ञापन के अनुसार, उम्मीदवारों की उम्र पद खाली होने की तारीख यानि 7 दिसंबर, 2026 को 59 साल या उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए। चुने गए उम्मीदवार को शुरू में 3 साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद उनके कार्यकाल को 2 साल और बढ़ाया जा सकता है। विज्ञापन में कहा गया है, “60 साल की उम्र के बाद कोई भी नौकरी या कार्यकाल का विस्तार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होगा।” कैंडिडेट का सिलेक्शन सामान्य PESB सिलेक्शन प्रोसेस के बजाय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गठित एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया जाएगा।

विज्ञापन के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन 21 जुलाई को बंद हो जाएंगे, जबकि तय तरीकों से आवेदन भेजने की आखिरी तारीख 30 जुलाई है। जिम्मेदारियों की बात करें तो चेयरमैन ONGC के ओवरऑल मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन के लिए जिम्मेदार होंगे। इसमें रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी करना, ONGC के एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन बिजनेस का नेतृत्व करना, अधिग्रहणों और जॉइंट वेंचर्स के जरिए नए एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स में विस्तार की देखरेख करना और पूरी कंपनी में टेक्नोलॉजी को अपनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शामिल है।

Telegram को सरकार से नोटिस, पायरटेड कंटेंट रोके नहीं तो लिया जाएगा एक्शन

अरुण कुमार सिंह की नियुक्ति के टाइम भी दी गई थी छूट

सरकार ने 2022 में ONGC के मौजूदा चेयरमैन और CEO अरुण कुमार सिंह की नियुक्ति के समय भी इसी तरह की छूट दी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी ने उन्हें अगस्त 2022 में उस वक्त चुना था, जब वह 60 साल के होने वाले थे। इस तरह वह इस उम्र में किसी बड़ी सरकारी कंपनी (ब्लू-चिप कंपनी) के चेयरमैन बनने वाले पहले एग्जीक्यूटिव बने। सिंह अक्टूबर 2022 में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे। सरकार द्वारा योग्यता के नियमों में ढील देने के बाद 6 दिसंबर 2022 को उन्होंने ONGC में कार्यभार संभाला।

पिछले साल, केंद्र सरकार ने उन्हें एक साल का खास एक्सटेंशन दिया, जिससे वह 6 दिसंबर 2026 तक ONGC के चेयरमैन बने रह सकें। सरकार ने पिछले साल ही रेगुलर चेयरमैन की तलाश शुरू कर दी थी। PESB ने अप्रैल 2025 में आवेदन मंगाए थे और ऑयल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रंजीत रथ समेत एक दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। हालांकि, कोई इंटरव्यू नहीं हुआ और बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के सिलेक्शन प्रोसेस बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।

RailOne App का बड़ा कमाल, AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

indian railway

भारतीय रेलवे का डिजिटल टिकटिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक हो गया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई रेलवे आरक्षण प्रणाली में पिछले चार दशकों के दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव हुए, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। नई व्यवस्था से न केवल टिकट बुकिंग आसान हुई है, बल्कि इसकी क्षमता भी कई गुना बढ़ाई गई है।

ALSO READ: WhatsApp Username विवाद बढ़ा, सरकार की रडार पर Telegram और Signal, Arattai भी हटाएगा यूजरनेम फीचर

88% टिकट अब ऑनलाइन बुक हो रहे

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। आज स्थिति यह है कि अधिकांश यात्री टिकट काउंटर की बजाय ऑनलाइन टिकट बुक करना पसंद करते हैं। वर्तमान में देश में कुल टिकट बुकिंग की करीब 88 प्रतिशत मांग ऑनलाइन माध्यमों से पूरी हो रही है।

RailOne App तेजी से बन रहा यात्रियों की पहली पसंद

भारतीय रेलवे का RailOne मोबाइल ऐप यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च किए गए इस ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। टिकटिंग या अन्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान भी इसी ऐप के जरिए किया जा सकता है।

AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

 

RailOne ऐप में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई सुविधा जोड़ी गई है। टिकट बुक करते समय ऐप यह अनुमान लगाता है कि वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, पहले इस अनुमान की सटीकता करीब 53 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 94 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। यह फीचर इस साल की शुरुआत में शुरू किया गया था और यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

एक ही ऐप में मिलती हैं रेलवे की सभी सुविधाएं

RailOne ऐप के जरिए यात्री आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइम टेबल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजिशन, वेटिंग स्टेटस, Rail Madad के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा और यात्रा के दौरान सीट पर खाना ऑर्डर करने जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

रोजाना 9 लाख से ज्यादा टिकट हो रहे बुक

 

रेलवे के अनुसार, देशभर में प्रतिदिन 9.29 लाख से अधिक टिकट RailOne ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 7.20 लाख अनारक्षित (Unreserved) और 2.09 लाख आरक्षित (Reserved) टिकट शामिल हैं। अनारक्षित टिकटों में प्लेटफॉर्म टिकट भी शामिल हैं।  अब तक इस ऐप को Google Play Store से 3.16 करोड़ और Apple iOS डिवाइस पर 33.17 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

ALSO READ: Electric scooter खरीदने से पहले जान लें कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

यात्रियों को मिल रही 43% तक सब्सिडी

भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री किराए पर 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी। इसका मतलब है कि प्रत्येक यात्री को औसतन 43 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। यानी यदि किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपए है, तो यात्री को उसके लिए औसतन केवल 57 रुपए ही चुकाने पड़ते हैं।

WhatsApp Username विवाद बढ़ा, सरकार की रडार पर Telegram और Signal, Arattai भी हटाएगा यूजरनेम फीचर

whatsapp

WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। भारत सरकार की आपत्तियों के बाद अब सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी सरकार की जांच के दायरे में आ गए हैं। इसी बीच Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने घोषणा की है कि उनकी मैसेजिंग ऐप Arattai से भी Username फीचर हटाया जाएगा।  कुछ साइबर एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि सही सुरक्षा उपायों के साथ Username फीचर मोबाइल नंबर साझा किए बिना सुरक्षित बातचीत का बेहतर विकल्प भी बन सकता है। WhatsApp को मिला नोटिस, सरकार ने लगाई रोक

ALSO READ: 2026 के 7 बेस्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर, लंबी रेंज, दमदार फीचर्स और शानदार परफॉर्मेंस, खरीदने से पहले देखें पूरी List

हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि वह अपने यूजर्स के लिए Username फीचर लाने जा रहा है। इस फीचर की मदद से लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। लेकिन फीचर की घोषणा के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को नोटिस जारी कर इसकी लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगाने को कहा। सरकार का कहना है कि पहले इस फीचर के प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा जरूरी है।

अब Telegram और Signal से भी मांगा जाएगा जवाब

WhatsApp के बाद अब सरकार की नजर Telegram और Signal पर भी है। इन दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से ही Username फीचर उपलब्ध है, जिससे यूजर बिना मोबाइल नंबर बताए दूसरे व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर किसी यूजर की वास्तविक पहचान कैसे सत्यापित की जाती है और क्या कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या अन्य व्यक्ति जैसा फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

ALSO READ: Electric Scooter : बिना लाइसेंस चला सकेंगे यह सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर, फीचर्स भी हैं दमदार

Arattai भी हटाएगा Username फीचर

Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी अपना Username फीचर बंद करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बदलते नियामकीय माहौल और संभावित नियमों के अनुरूप लिया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर Username फीचर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर जवाब जरूर मांगा है।

ALSO READ: Electric Scooter खरीदने से पहले 14 जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी

सरकार को किस बात की चिंता है?

 

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि Username फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधी किसी सरकारी विभाग, बैंक, सेलिब्रिटी या प्रसिद्ध संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। चूंकि WhatsApp देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग ऐप्स में शामिल है, इसलिए इस तरह की धोखाधड़ी का खतरा और बढ़ सकता है।

WhatsApp ने सफाई में क्या कहा

Meta का कहना है कि Username फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। सेलिब्रिटी और प्रमुख संस्थाओं से जुड़े यूजरनेम रिजर्व रखे जाएंगे, ताकि उनकी फर्जी पहचान न बनाई जा सके। यूजर चाहें तो Username Key फीचर चालू कर सकते हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति को सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ा चार अंकों का यूनिक कोड भी पता होना जरूरी होगा। WhatsApp पर Username की कोई सार्वजनिक Search Directory नहीं होगी, जिससे अनचाहे मैसेज और स्पैम की संभावना कम होगी।

WhatsApp Username फीचर पर फंसा पेंच, सरकार फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के खतरे को लेकर Meta से करेगी चर्चा

केंद्र सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) WhatsApp के आगामी Username फीचर को लेकर Meta के साथ जल्द ही बैठक कर सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) ने इस फीचर के जरिए फर्जी पहचान बनाकर धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (Impersonation) की आशंका जताई है। सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) और दिल्ली पुलिस ने इस फीचर को लेकर गंभीर चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं।

 

फर्जी प्रोफाइल बनाकर हो सकती है धोखाधड़ी

 

दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, WhatsApp का नया Username फीचर साइबर अपराधियों को नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने का मौका दे सकता है। अधिकारी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे देश के नंबर या किसी प्रतिष्ठित अधिकारी की फोटो और उससे मिलता-जुलता यूजरनेम इस्तेमाल कर लोगों को धोखाधड़ी वाले कॉल या मैसेज भेज सकता है।

 

अधिकारी ने बताया कि यदि फोन नंबर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देगा तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि आरोपी भारत में है या विदेश में। पहले यदि किसी WhatsApp नंबर की शुरुआत +91 से होती थी तो जांच शुरू करना अपेक्षाकृत आसान होता था, लेकिन Username आधारित सिस्टम में यह प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

 

जांच एजेंसियों ने डेटा मिलने में देरी पर भी जताई चिंता

 

दूरसंचार विभाग के अधिकारी ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में WhatsApp कई बार पांच दिन या उससे भी अधिक समय लेता है। इससे साइबर अपराधों की जांच प्रभावित होती है और समय पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।

 

दिल्ली पुलिस ने भी जताई चिंता

 

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि Username फीचर लागू होने के बाद संदिग्धों की पहचान करना और मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उपयोगकर्ता अपनी वास्तविक पहचान और फोन नंबर छिपाकर बातचीत कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि WhatsApp का यह कदम काफी हद तक Telegram और Signal की तर्ज पर है, जहां पहले से Username के जरिए बातचीत की सुविधा उपलब्ध है।

 

Meta और WhatsApp से करेगी सरकार चर्चा

 

सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय जल्द ही Meta और WhatsApp के अधिकारियों के साथ इस फीचर पर विस्तृत चर्चा करेगा। सरकार यह आकलन करेगी कि Username फीचर का दुरुपयोग सरकारी संस्थाओं, अधिकारियों या प्रतिष्ठित संगठनों की नकली पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता।

 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि फीचर से सुरक्षा संबंधी जोखिम सामने आते हैं तो सरकार आवश्यक कदम उठा सकती है।

 

क्या है WhatsApp का नया Username फीचर?

 

Meta के स्वामित्व वाला WhatsApp इस साल अपने प्लेटफॉर्म पर Username फीचर लॉन्च करने जा रहा है। इस फीचर के जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। कंपनी ने Username रिजर्व करने की शुरुआती सुविधा शुरू कर दी है और आधिकारिक रोलआउट इस वर्ष के अंत तक किया जाएगा।

 

WhatsApp का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की गोपनीयता (Privacy) को और मजबूत बनाना है। खासकर ग्रुप चैट या नए लोगों से बातचीत के दौरान अब मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे व्यक्तिगत जानकारी अधिक सुरक्षित रहेगी। Edited by : Sudhir Sharma

भारत में Telegram की वासपी, Play Store और Apple App Store से करें डाउनलोड या अपडेट, नहीं खुल रहा ऐप तो करें ये काम

Telegram Ban Lifted: NEET UG Re-Test के समय लगाई गई अस्थायी पाबंदियों के बाद, भारत में अब यूजर्स के लिए टेलीग्राम की सर्विस धीरे-धीरे बहाल होती दिख रही है। यह मैसेजिंग ऐप एक बार फिर Google Play Store और Apple App Store से डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। वहीं, कई यूजर्स ने बताया है कि मैसेज सामान्य रूप से डिलीवर हो रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों को अभी भी चैट खोलने या मैसेज भेजने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में ऐप को एक बार रिफ्रेश या बंद करके दोबारा खोलने से यह समस्या ठीक हो सकती है।

अगर Telegram अभी भी काम नहीं कर रहा है, तो क्या करें?

जो यूजर्स मैसेज नहीं भेज पा रहे हैं या अपनी चैट्स को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं, वे Google Play Store या Apple App Store से Telegram को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें। इसके बाद ऐप को पूरी तरह बंद करें और फिर दोबारा खोलें। ऐसा करने से यूजर्स की समस्या ठीक हो सकती है।

Android यूजर्स ऐसे ठीक करें Telegram की समस्या:

  • Google Play Store खोलें और Telegram के अपडेट्स चेक करें।
  • अगर कोई अपडेट उपलब्ध हो, तो उसका लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल करें।
  • इसके बाद Settings > Apps > Telegram पर जाएं।
  • यहां Force Stop पर टैप करें।
  • अब Telegram को फिर से खोलें और इसे दोबारा कनेक्ट होने के लिए कुछ समय दें।

iPhone पर Telegram की समस्या ऐसे ठीक करें:

  • App Store खोलें और अगर Telegram का नया वर्जन उपलब्ध है, तो उसे अपडेट करें।
  • इसके बाद App Switcher खोलें और Telegram ऐप को ऊपर की ओर स्वाइप करके पूरी तरह बंद कर दें।
  • अब Telegram को दोबारा खोलें और कुछ सेकंड इंतजार करें, ताकि ऐप दोबारा सर्वर से कनेक्ट हो जाए।

इस प्रोसेस से ऐप Telegram के सर्वर के साथ नया कनेक्शन बना पाता है और इससे उन यूजर्स को सामान्य रूप से ऐप इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है जिन्हें अभी भी समस्याएं आ रही हैं।

टेलीग्राम की ऐप स्टोर पर वापसी

मैसेजिंग सर्विस फिर से शुरू होने के साथ-साथ, टेलीग्राम भी गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर वापस आ गया है। प्रतिबंध के दौरान यह ऐप उपलब्ध नहीं था, जिससे इसे डाउनलोड या री-इंस्टॉल करने की कोशिश कर रहे यूजर्स के बीच अनिश्चितता बनी हुई थी।

हालांकि, कई यूजर्स के लिए Telegram की वेबसाइट भी फिर से खुल रही है, जिससे पता चलता है कि अस्थायी पाबंदियां हटाई जा रही हैं।

टेलीग्राम पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

यह अस्थायी प्रतिबंध तब लगाया गया जब अधिकारियों ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को टेलीग्राम तक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश दिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऐसी आशंका थी कि NEET-UG पुनर्परीक्षा से संबंधित परीक्षा सामग्री इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित हो सकती है।

NEET-UG री-एग्जाम से जुड़ी जानकारी और परीक्षा सामग्री Telegram के जरिए शेयर होने की आशंका के चलते अधिकारियों ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) को कुछ समय के लिए Telegram की सेवाओं पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।

हालांकि अब Telegram की मैसेजिंग सेवा धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन पहले जारी निर्देशों के अनुसार मैसेज एडिट करने का फीचर 30 जून तक बंद रह सकता है।

अगर किसी यूजर को अभी भी Telegram इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही है, तो वह ऐप को अपडेट करें और पूरी तरह बंद करके दोबारा खोलें। इससे ऐप सामान्य तरीके से काम करने लग सकता है।

यह भी पढ़ें: iPhone 18 Pro Max की डिटेल्स लीक! जानें कैमरा, कीमत, लॉन्च डेट और फीचर्स