OTT Crime Thrillers: अगर आप भी हैं डिजिटल क्राइम थ्रिलर्स के दीवाने, ओटीटी पर इन फिल्मों और सीरीज का उठा सकते हैं लुत्फ

OTT Crime Thrillers: इन्फ्लुएंसर अंकुश बहुगुणा के 40 घंटे के ‘डिजिटल-अरेस्ट’ के बुरे अनुभव से लेकर हाल ही में जाह्नवी कपूर के AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तक, भारत में डिजिटल धोखाधड़ी एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जहां एक घटना साइबर फ्रॉड और आर्थिक शोषण के खतरे को उजागर करती है, वहीं दूसरी यह दिखाती है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल करके तस्वीरों में हेरफेर की जा सकती है और लोगों की प्राइवेसी का उल्लंघन किया जा सकता है।

ऐसी घटनाएं टेक्नोलॉजी के बुरे पहलुओं को सामने लाती हैं। इसलिए भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी दिलचस्प ड्रामा, थ्रिलर और डॉक्युसीरीज के जरिए इन विषयों को दिखा रही है। फिशिंग नेटवर्क से लेकर फाइनेंशियल स्कैम और AI-आधारित हेरफेर तक, यहा कुछ ऐसे भारतीय शो और फिल्में हैं, जो डिजिटल धोखाधड़ी के कई रूपों पर रोशनी डालते हैं।

1. स्कैम 1992 द हर्षद मेहता स्टोरी-Sony LIV

1992 के सिक्योरिटीज स्कैम पर आधारित, ‘स्कैम 1992’ स्टॉकब्रोकर हर्षद मेहता के उत्थान और पतन की कहानी है। हर्षद मेहता मुंबई के स्टॉक मार्केट में मशहूर हुए थे, लेकिन बाद में भारत के सबसे कुख्यात फाइनेंशियल स्कैम में फंस गए। प्रतीक गांधी अभिनीत और हंसल मेहता द्वारा निर्देशित यह सीरीज बैंकिंग की कमियों, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और उन मीडिया इन्वेस्टिगेशन को दिखाती है, जिनकी वजह से यह स्कैम सबके सामने आया। पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष बसु की किताब ‘द स्कैम हू वॉन, हू लॉस्ट, हू गॉट अवे’ पर आधारित यह सीरीज फाइनेंशियल मार्केट की जटिलताओं और सिस्टम की कमियों का फायदा उठाने के नतीजों की झलक दिखाती है। यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि स्कैम तब पनपते हैं जब लोग और संस्थाएँ उन सिस्टम पर सवाल नहीं उठाते जिन पर वे भरोसा करते हैं।

2. CTRL- Netflix

अनन्या पांडे और विहान सामत अभिनीत, ‘CTRL’ एक इन्फ्लुएंसर की कहानी है, जो अपनी डिजिटल जिंदगी से अपने एक्स-बॉयफ्रेंड की यादें मिटाने के लिए एक AI ऐप का सहारा लेती है। लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि उस टेक्नोलॉजी का मकसद बहुत खतरनाक है। विक्रमादित्य मोटवाने द्वारा निर्देशित यह नेटफ्लिक्स थ्रिलर दिखाती है कि कैसे पर्सनल डेटा, AI टूल्स और टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता का इस्तेमाल लोगों को मैनिपुलेट करने के लिए किया जा सकता है।

3. स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी- Sony LIV

स्टॉक मार्केट से नकली कागजात के मामले की ओर बढ़ते हुए, ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ अब्दुल करीम तेलगी के स्टाम्प पेपर के नकली कारोबार की कहानी दिखाती है। गगन देव रियार की मुख्य भूमिका वाली यह सीरीज दिखाती है कि कैसे स्टाम्प पेपर सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर यह रैकेट एक बड़े नेटवर्क में बदल गया। पत्रकार संजय सिंह की किताब ‘तेलगी स्कैम: रिपोर्टर्स डायरी’ पर आधारित यह शो इस कारोबार के दायरे और उस नेटवर्क के बारे में बताता है जिसने इसे एक बड़े फाइनेंशियल स्कैम में बदल दिया।

4. जामताड़ा सबका नंबर आएगा-Netflix

बड़े फाइनेंशियल संस्थानों से हटकर आम फोन यूजर्स पर फोकस करते हुए, ‘जामताड़ा सबका नंबर आएगा’ झारखंड के जामताड़ा शहर से जुड़े फिशिंग स्कैम की कहानी दिखाती है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए बदनाम है। यह क्राइम ड्रामा उन युवा लड़कों की कहानी है जो फोन कॉल के जरिए अनजान लोगों को धोखा देकर उनकी जरूरी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।

5. बैड बॉय बिलियनेयर्स इंडिया-Netflix

यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज विजय माल्या, नीरव मोदी और सुब्रत रॉय जैसे मशहूर भारतीय बिजनेस दिग्गजों से जुड़े विवादों और आरोपों की पड़ताल करती है। आर्काइवल फ़ुटेज, इंटरव्यू और इन्वेस्टिगेटिव स्टोरीटेलिंग के जरिए, यह ताकतवर बिजनेस एम्पायर के बनने और उसके बाद हुए कानूनी और फाइनेंशियल विवादों को दिखाती है।

Delhi Protest: दिल्ली में पुलिसकर्मियों पर 3 महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न का आरोप, क्राइम जांच ने शुरू की जांच

Delhi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है जिसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ नयी दिल्ली जिला पुलिस को ये शिकायतें मिली थीं। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली जिला पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

अधिकारी के अनुसार, ये आरोप तीनों महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अपराध शाखा आरोपों की गहन जांच करेगी और शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करेगी। दिल्ली पुलिस ने रविवार (4 अक्टूबर) को X पर एक पोस्ट में कहा, “03-10-26 को नई दिल्ली इलाके में विरोध-प्रदर्शन के दौरान, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की स्थिति में, तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। नई दिल्ली ज़िले को उनकी शिकायतें मिली हैं और निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।”

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने के आरोपों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शनिवार को जवाब मांगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए अमित शाह को इस मामले में जवाब देना चाहिए। गांधी ने कहा, “जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वह भी नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि शनिवार को ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। गांधी ने कहा, “महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।” उन्होंने कहा, “और यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अधिकारी महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं-मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।” उन्होंने कहा, “और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है- वह आखिर किसकी हिफाजत कर रही है?” राहुल गांधी ने आगे कहा, “दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।”

आइसा ने भी लगाए आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। आइसा ने एक बयान में कहा, “पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की। कई महिलाओं ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर उन्हें अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया है।” संगठन ने कहा, “महिलाओं को न्याय दिलाने का दावा करने वाला पुलिस बल भीड़ को कंट्रोल करने के बुनियादी नियमों का पालन नहीं कर सका। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ खुलेआम दुर्व्यवहार किया और (वे) बेहद गैर-पेशेवर तरीके से पेश आए।”

200 लोगों को हिरासत में लिया गया

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शनिवार को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर आदेश न मानने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने तथा उनपर हमला करने से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। नई दिल्ली जिले में पाबंदी आदेश लागू होने के बावजूद, छात्र संगठनों और नागरिक संगठन के सदस्यों समेत प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कोशिश की।

हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल थे। आइसा ने बताया कि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसोदिया भी प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई हैं।

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‘वोट चोरी देशद्रोह है…’, चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

'वोट चोरी देशद्रोह है...', चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

rahul gandhi attacks BJP and EC on SIR

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान और मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस खुलासे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर ‘वोट चोरी’ को देश की जनता के खिलाफ अपराध और ‘देशद्रोह’ करार दिया है। ALSO READ: चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे आयोजित करने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय जरूर मिलेगा।

10 माह में 14 बार आपत्ति

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर  पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई।

 

सफाई में क्या बोला चुनाव आयोग?

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

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कभी-कभी किसी छोटी-सी परेशानी का हल ऐसी जगह से मिल जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए शुभांग बोरकर का जूता गूम गया। सामने 1000 से ज्यादा जूते चप्पल थे। ऐसे में उसके लिए अपना जूता खोजना बेहद मुश्किल भरा था। इस पर उसने AI की मदद से और कुछ ही देर में उसका जूता मिल भी गया।

 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो को Shubhang borkar नाम के शख्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वो उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर दिखाई देने वाले जूतों के ढेर के बीच अपना जूता ढूंढने की कोशिश करते नजर आते हैं। यहां इतने ज्यादा जूते रखे हुए थे कि यह समझना मुश्किल था कि इनमें उनका जूता आखिर कौन सा है?

जूते की फोटो लेकर ChatGPT से मांगी मदद

शुभांग ने अपने जूतों की फोटो और जूतों के ढेर की तस्वीर ChatGPT के साथ शेयर की। उन्होंने AI को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह उज्जैन के महाकाल मंदिर आए हैं और बाहर रखे ढेर सारे जूतों में से अपना जूता पहचानना मुश्किल हो रहा है।

 

वीडियो के मुताबिक, ChatGPT ने जूतों की तस्वीर को देखकर उनसे कुछ सवाल पूछे। जूते के रंग, डिजाइन और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर AI ने तस्वीर में उनके जूते को पहचानने में मदद की। 

 

आमतौर पर लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब जानने, लिखने-पढ़ने, जानकारी हासिल करने या किसी काम में मदद लेने के लिए करते हैं। बहरहाल जूता ढूंढने जैसे रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हैं।

 

Deepfake पर सरकार का बड़ा एक्शन, AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, गैरकानूनी सामग्री अब 3 घंटे में हटानी होगी, नए नियम जान लें वरना पछताएंगे

ai aur deeffake

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक और अन्य हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नियामक व्यवस्था को और सख्त किया है। सरकार ने AI से तैयार कंटेंट पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। साथ ही, सरकारी या न्यायालय के आदेश के आधार पर गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।

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AI से बने कंटेंट की पहचान होगी आसान

 

सरकार के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना (SGI), जिसमें डीपफेक और AI-जनित कंटेंट शामिल हैं, से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया गया। नए प्रावधानों के तहत मध्यस्थों को AI-जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि कोई सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है और इसके जरिए धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग को रोकना है।

 

36 घंटे की जगह अब 3 घंटे में हटानी होगी गैरकानूनी सामग्री

 

नए नियमों में कंटेंट हटाने की समयसीमा को भी कम किया गया है। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं कुछ संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी कम की गई है।

 

डीपफेक बनाने और फैलाने पर भी नियम सख्त

 

आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों को ऐसी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी, जिसमें AI के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना, जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देना, निजता का उल्लंघन करना या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना शामिल है।

 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म को रोकथाम और तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

 

डीपफेक और AI से जुड़े अपराधों पर आईटी एक्ट, 2000 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। BNS की धारा 319 प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 336 में धोखाधड़ी के लिए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने जैसे कृत्य शामिल हैं। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह या रिपोर्ट के जरिए गलत सूचना और दुष्प्रचार फैलाने से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी बढ़ी जिम्मेदारी

 

भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत यूजर्स वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट का पता लगाने और उसके प्रसार को सीमित करने के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

 

डीपफेक की शिकायत कहां करें?

 

सरकार के अनुसार, नागरिक National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और कंटेंट के दुरुपयोग की शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है और 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। अगर किसी मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी से समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता Grievance Appellate Committee (GAC) के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।

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सरकार ने डीपफेक डिटेक्शन पर भी बढ़ाया फोकस

 

IndiaAI Mission के तहत सुरक्षित और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देने के लिए 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें डीपफेक का पता लगाने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी पहलें इसमें शामिल हैं।

Delhi Crime News: स्कूटी पर पति-पत्नी के बीच हुआ झगड़ा, कांस्टेबल ने बीच सड़क पर पत्नी को मारी गोली

Delhi Crime News: पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में सोमवार (13 जुलाई) को घरेलू विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया। दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की बीच सड़क सर्विस पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होती रहती थी। सोमवार को भी दोनों घर से एक ही स्कूटर पर निकले थे। लेकिन रास्ते में फिर विवाद शुरू हो गया।

दिल्ली पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कल्याणपुरी इलाके में एक कॉन्स्टेबल अपनी पत्नी के साथ स्कूटर पर जा रहा था, तभी दोनों के बीच बहस हो गई। कॉन्स्टेबल ने सड़क पर ही अपनी पत्नी को गोली मार दी। चार-पांच लोगों ने यह घटना देखी और उसे ऑटो-रिक्शा से अस्पताल पहुंचाया। लेकिन उसकी मौत हो गई। आरोपी कांस्टेबल फरार है।”

आरोपी कांस्टेबल पूर्वी जिला पुलिस की एएटीएस (एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड) में तैनात था। जांच के दौरान पुलिस को इलाके का CCTV फुटेज मिला है, जिसमें कथित तौर पर दोनों सड़क किनारे स्कूटर रोककर उतरते और बहस करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बहस के दौरान कांस्टेबल ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाली और पत्नी को गोली मार दी।

पत्नी ने अस्पताल में तोड़ा दम

गोली लगने के बाद आसपास मौजूद लोगों ने महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी कांस्टेबल मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूर्वी जिले की एंटी-थेफ्ट स्क्वॉड में तैनात था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस आसपास के CCTV फुटेज खंगाल रही है और फरार आरोपी के संभावित भागने के रास्तों की भी जांच कर रही है। मामले में हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस परिजनों और दंपति के परिचितों से भी पूछताछ कर रही है ताकि वारदात के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। जांच जारी है।

दिल्ली में एक और बड़ी घटना

इस बीच दिल्ली के अलीपुर इलाके में हिरनकी गांव के पास यमुना नदी में नहाते समय तेज बहाव में बह जाने से चार नाबालिगों के डूबने की आशंका है। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस को रविवार शाम करीब 7:30 बजे इस घटना की सूचना मिली। पुलिस के मुताबिक, रविवार को पांच नाबालिग नहाने के लिए यमुना में उतरे थे। उनमें से एक ने दूसरों को आगाह करने के लिए शोर मचाया, जबकि बाकी चार तेज़ बहाव में बह गए और लापता हो गए।

नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA), दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस की टीमें तलाशी अभियान में जुटी हुई हैं। सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी तलाशी जारी रही। पुलिस ने बताया कि अब तक कोई शव बरामद नहीं हुआ है।

घोर कलयुग…पत्नी को घर लाने के लिए बेटे ने मां को दिया जहर! आगरा में दिल दहला देने वाली वारदात

उत्तर प्रदेश के आगरा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक पर अपनी मां को कथित तौर पर जहर देने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, युवक की पत्नी मायके में रह रही थी और सास ने उसे तब तक वापस भेजने से इनकार कर दिया था, जब तक उसकी मां की मौत नहीं हो जाती।

बेटे पर मां को मारने का आरोप

एफआईआर के मुताबिक, आरोपी रविंद्र पर आरोप है कि उसने दोपहर के समय छोले में कथित तौर पर जहरीला पदार्थ मिलाकर अपनी मां राममूर्ति को खिला दिया। खाना खाने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। ये मामला राममूर्ति के पति रणवीर सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूछताछ के दौरान रविंद्र ने बताया कि उसे जहर उसकी सास फूलवती ने दिया था।

सास ने दिया पैकेट

इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दर्ज एफआईआर में ये भी आरोप है कि आरोपी की सास ने कथित तौर पर उसे जहर उपलब्ध कराया था। शिकायत के मुताबिक, फूलवती ने रविंद्र को गतपुरा गांव बुलाकर एक पैकेट दिया था। आरोप है कि उसने कहा था कि जब तक वह अपनी मां को रास्ते से नहीं हटाएगा, तब तक उसकी बेटी उसके साथ नहीं जाएगी। वहीं, पुलिस अभी इन आरोपों की जांच कर रही है और इनकी पुष्टि होना बाकी है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ एफआईआर

इस मामले में रविंद्र के भाई मुकेश ने बताया कि परिवार में संपत्ति को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। उनका दावा है कि इसी तनाव के कारण रविंद्र की पत्नी पिछले कुछ समय से अपने मायके में रह रही थी। पुलिस ने इस मामले में रविंद्र और फूलवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 109 और 123 के तहत मामला दर्ज किया है। रविंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ-साथ जांच में सामने आने वाले सबूतों के आधार पर की जाएगी।