Food Safety : बिस्किट में भरा भूसा, दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, उपभोक्ता अपने सेहत की कैसे करें सुरक्षा !

Food Safety : दूध और डेयरी प्रोडक्ट में डिटर्जेंट और यूरिया, घी में जानवर की चर्बी,लाल मिर्च पाउडर में लाल मिट्टी, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, जीरा में घास के बीज और अब बिस्किट में जानवरों की खिलाने वाला भूसा!ये सब फूड रेगुलेटर के छापों पकड़ा गया और साबित हो चुका है, फिर भी भारत में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है आखिर क्यों? कैसे रुकेगा मिलावट का काला कारोबार? आज कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात की गई है।

सबसे पहले समझते हैं कि फसाई (FSSAI) के छापों में ताजा खुलासा क्या हुआ है। FSSAI ने कंज्यूर्स की शिकायत पर की जांच की तो पाया कि प्रिया गोल्ड बिस्किट में ‘फाइबर’ के सोर्स के रूप में जानवरों को खिलाने वाला चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था । जांच में मिली चोकर की बोरियों पर साफ लिखा था कि ये केवल मवेशियों के खाने के लिए है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग प्लांट में साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भारी उल्लंघन भी पाया गया। FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

दूसरा मामला है दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाने का। डोडला डेयरी (Dodla Dairy) के फुल क्रीम दूध के सैंपल स्टैंडर्ड टेस्टिंग में फेल हो गए। जब रेफरल लैब से जांच कराई गई तो दूध में डिटर्जेंट की पुष्टि हुई। इस दूध में फैट भी तय मात्रा से कम था और ये मानव शरीर के लिए असुरक्षित और हानिकारक घोषित किया गया।

तीसरा मामला है पीली किशमिश में जहरीला पेस्टिसाइड का। UEIR Organic Foods की पीली किशमिश के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक पाए गए। कंज्यूमर इस प्रोडक्ट को ‘ऑर्गेनिक’ और हेल्दी मानकर खा रहे हैं। जबकि इनमें मौजूद केमिकल अवशेष उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हां अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे की फसाई (FSSAI) भारत का फूड रेग्यूलेटर है।

मिलावट के तरीके

दूध और डेयरी उत्पाद में डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च मिलाया जाता है। वहीं, घी और मक्खन में वेजीटेबल तेल, चर्बी, स्टार्च मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट और मेटानिल येलो मिला जाता है। लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा और लाल मिट्टी मिलाई जाती है। धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, गोबर और भूसी मिलाई जाती है। काली मिर्च में पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। जीरा में घास के बीज और झाड़ू के तिनके मिला दिए जाते हैं। हींग में स्टार्च, गोंद और राल मिलाए जाते हैं। वहीं, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल और सस्ता पाम ऑयल मिला दिया जाता है। शहद में चीनी की चाशनी, राइस सिरप गुड़ का घोल मिलाया जाता है। वहीं, चीनी और गुड़ में चाक पाउडर और वॉशिंग सोडा मिला दिया जाता है। हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन की मिलावट की जाती है। वहीं, फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन गैस का इस्तेमाल होता है।

मिलावट की सजा

मानक पूरे ना करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ के लिए 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत ब्रांडिंग/भ्रामक प्रचार के लिए 3-10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित भोजन पर 6 महीने तक जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। भोजन से चोट या बीमारी होने पर 1 साल जेल की जेल और 3 लाख जुर्माना हो सकता है। भोजन से गंभीर बीमारी होने पर 6 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। भोजन से मृत्यु होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है।

यहां दर्ज करें शिकायत 

FSSAI के Food Safety Connect ऐप पर और FSSAI के टोल-फ्री नंबर पर मिलावट की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

खरीदारी के समय इन बातों पर ध्यान दें

पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना चाहिए। एगमार्क (Agmark) / FSSAI लोगो होना चाहिए। अनचाही या असामान्य महक/स्वाद नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और सीलबंद पैकेट ही खरीदें।

 

 

खेती से AI तक… बिजनेस आइडिया से जीतें डेढ़ लाख रुपये! जानिए IIT कानपुर के मेंटरशिप वाले चैलेंज में कैसे करें रजिस्ट्रेशन

कैंसर के इलाज और वैक्सीन रिसर्च के लिए आईआईटी कानपुर और भारत बायोटेक ने उठाया बड़ा कदम, मिलकर करेंगे ये काम

कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए देश में ही नई तकनीक तैयार करने की तैयारी चल रही है। IIT कानपुर और भारत बायोटेक इस दिशा में साथ काम करेंगे। दोनों इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट बीमारी की पहचान, जांच और इलाज से जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करेंगे।

दोनों संस्थानों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इसका मकसद देश में ही नई मेडिकल तकनीक तैयार करना है। आगे इन तकनीकों का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा।

कैंसर और वैक्सीन पर रहेगा खास ध्यान

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के बीच हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों पर खास ध्यान दिया गया। साइंटिस्ट इन बीमारियों को समझने पर काम करेंगे। इसके साथ नए इलाज और तकनीक भी तैयार की जाएगी।

बायोमेडिकल और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर IIT कानपुर में पहले से काम हो रहा है। भारत बायोटेक के साथ जुड़ने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

IIT कानपुर पहुंचे भारत बायोटेक के ऑफिसर

IIT कानपुर की इंडस्ट्री कनेक्ट सीरीज के तहत यह मीटिंग हुई। इसमें भारत बायोटेक के प्रेजिडेंट (R&D) डॉ. के. मुरुगप्पन शामिल हुए। IIT कानपुर के शिक्षक और साइंटिस्ट भी मीटिंग में मौजूद रहे। मीटिंग में वैक्सीन, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा हुई।

मीटिंग के बाद डॉ. मुरुगप्पन ने IIT कानपुर की रिसर्च सुविधाएं देखीं। इस दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. जयधरन राव और जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख प्रो. अश्वनी कुमार ठाकुर समेत कई साइंटिस्ट मौजूद रहे।

गंगवाल स्कूल में भी हो रही मेडिकल रिसर्च

IIT कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कई फील्ड पर रिसर्च चल रही है। इनमें हेल्थकेयर में एआई, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक्स शामिल हैं। यहां बीमारी की शुरुआती जांच और मेटाबॉलिक बीमारियों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा इन्फेक्शन, न्यूरोसाइंस, न्यूरोटेक्नोलॉजी और मेंटल हेल्थ पर रिसर्च की जा रही है।

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के साथ काम करने से नई वैक्सीन और जांच की बेहतर तकनीक बन सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

2026 के फिजिक्स नोबेल का ऐलान आज:मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक के वैज्ञानिक दावेदार; 11.5 करोड़ रुपए मिलेंगे

2026 के फिजिक्स नोबेल पुरस्कार की घोषणा आज होगी। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी में अहम काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताएगी। यह पुरस्कार ऐसी खोज के लिए दिया जाता है, जिसने फिजिक्स को समझने या विज्ञान-तकनीक को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद की हो। इस साल मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक पर काम करने वाले वैज्ञानिक चर्चा में हैं। इनमें जॉन पेंड्री, निकॉला स्पैल्डिन, पाब्लो जारिलो-हरेरो और अलेक्सी किताएव जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, नोबेल कमेटी ने संभावित विजेताओं की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। नोबेल विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन के स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि मिलेगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है। एक से ज्यादा वैज्ञानिकों को पुरस्कार मिलने पर रकम उनके बीच बांटी जाएगी। फिजिक्स नोबेल के लिए 4 क्षेत्रों के वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में इस साल फिजिक्स नोबेल के लिए चार अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में हैं। इनमें मेटामटेरियल्स, ग्राफीन, क्वांटम कंप्यूटिंग और बेहद सटीक घड़ियों पर काम करने वाले वैज्ञानिक शामिल हैं। 1. मेटामटेरियल्स के लिए जॉन पेंड्री जॉन पेंड्री ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिक विज्ञानी हैं। उनका नाम मेटामटेरियल्स पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी कृत्रिम सामग्री होती हैं, जिन्हें खास गुणों के साथ बनाया जाता है। पेंड्री के काम से रोशनी को मोड़ने और नियंत्रित करने की तकनीक को समझने में मदद मिली। इससे ऐसी तकनीक की संभावना सामने आई, जिसमें किसी वस्तु को छिपाने जैसा प्रभाव पैदा किया जा सकता है। इस क्षेत्र में डेविड स्मिथ और फेडेरिको कैपासो के नाम भी चर्चा में हैं। 2.ग्राफीन की परतें घुमाने की तकनीक के लिए तीन नाम की चर्चा पाब्लो जारिलो-हरेरो, एलन मैकडोनाल्ड और ईवा अंद्रेई का नाम ट्विस्ट्रोनिक्स पर काम के लिए चर्चा में है। इसमें ग्राफीन जैसी बेहद पतली सामग्री की दो परतों को थोड़ा घुमाया जाता है। इससे सामग्री के गुण बदल सकते हैं। कुछ स्थितियों में इसमें सुपरकंडक्टिविटी जैसे गुण भी दिखाई दे सकते हैं। इन तीनों को 2026 का कावली नैनोसाइंस पुरस्कार भी मिला है। 3. क्वांटम कंप्यूटिंग के काम के लिए तीन वैज्ञानिक चर्चा में अलेक्सी किताएव, जॉन प्रेस्किल और पीटर शोर के नाम क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े काम के लिए चर्चा में हैं। क्वांटम कंप्यूटर बहुत संवेदनशील होते हैं। छोटी-सी गड़बड़ी भी उनके नतीजे को बदल सकती है। इन वैज्ञानिकों के काम ने क्वांटम जानकारी को गलतियों से बचाने और ज्यादा भरोसेमंद क्वांटम कंप्यूटर बनाने के तरीकों को समझने में मदद की। 4. बेहद सटीक घड़ियों की तकनीक पर काम करने वाले दो वैज्ञानिक हिदेतोशी कातोरी और जून ये का नाम ऑप्टिकल लैटिस क्लॉक पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी घड़ियां हैं, जो समय को बेहद सटीक तरीके से माप सकती हैं। इनमें परमाणुओं और लेजर की मदद ली जाती है। इनका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ GPS और कम्युनिकेशन जैसी तकनीकों में भी हो सकता है। 2025 में इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़ी क्वांटम खोज के लिए मिला नोबेल 2025 का फिजिक्स नोबेल जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को दिया गया था। उन्हें ऐसी खोज के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें क्वांटम दुनिया के नियमों को इलेक्ट्रिक सर्किट में देखा गया। वैज्ञानिकों ने दिखाया कि क्वांटम दुनिया में होने वाली घटनाएं सिर्फ बेहद छोटी चीजों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सर्किट में भी देखी जा सकती हैं। इस खोज से क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिली। —————————— ये खबर भी पढ़ें… दिमागी कोशिकाओं को कंट्रोल करने की तकनीक पर मेडिसिन नोबेल:जर्मनी-अमेरिका के 3 वैज्ञानिकों की रिसर्च; डिप्रेशन और मानसिक बीमारियों को समझना आसान हुआ 2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने ऑप्टोजेनेटिक्स नाम की ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जिससे रोशनी की मदद से दिमाग की अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित करके उनके काम को समझा जा सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Groww ने अमेरिकी कंपनियों में निवेश की सुविधा शुरू की, भारत में इनवेस्टर्स AI और Apple, Nvidia जैसी कंपनियों में लगा सकेंगे पैसे

ब्रोकरेज फर्म ग्रो ने पिछले हफ्ते अपने ऐप पर अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू कर दी। हालांकि, ग्रो के सभी यूजर्स के लिए इस सुविधा के अगले हफ्ते से उपलब्ध होने की संभावना है। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। ग्रो को इस साल जुलाई में गिफ्ट सिटी के जरिए ग्लोबल कंपनियों के शेयरों में निवेश के लिए आईएफएससीए लाइसेंस मिला था।

Groww ने विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा देने के लिए ब्रोकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर करने वाली कंपनी Alpaca Securities से समझौता किया है। ग्रो ने इस सुविधा के बारे में मनीकंट्रोल के सवालों के जवाब नहीं दिए। ग्रो की इस सुविधा से इनवेस्टर्स उसके ऐप के जरिए अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद और बेच सकेंगे।

ग्रो के प्लेटफॉर्म से इनवेस्टर्स को 10,000 से ज्यादा कंपनियों के स्टॉक्स और ईटीएफ में निवेश की सुविधा मिलेगी। इनमें Google, Apple, Nvidia, Tesla, Amazon और Meta जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। Zerodha, Angel One और Upstox को भी गिफ्टी सिटी के जरिए अपने प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा ऑफर करने की इजाजत मिल चुकी है।

Gift City ने अगस्त 2025 में ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) रजिस्ट्रेशन लॉन्च की थी। इसका मकसद इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का किफायती रास्ता देना है। विदेशी कंपनी के शेयर बचने पर इनवेस्टर्स जब पैसा भारत लाएगा तो उसे किसी तरह की कॉस्ट नहीं चुकानी होगी। इससे भारतीय इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का आसान रास्ता खुलेगा।

ग्रो यूजर्स की संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म है। इसके 2 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। यह 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट्स का प्रबंधन करती है। इसकी शुरुआत एक म्यूचअल फंड प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। अब तक विदेशी कंपनियों में निवेश की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म्स में IndMoney, Smallcase और Vested Finance का दबदबा रहा है।

बीते करीब 2 सालों में अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। चूंकि, इंडिया में ऐसी कंपनियां नहीं हैं, जिससे भारतीय इनवेस्टर्स की दिलचस्पी विदेश में इन कंपनियों के शेयरों में निवेश के मौके तलाने में बढ़ी है। इसके अलावा कई बड़ी AI कंपनियों का प्लान अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को लिस्ट कराने का है। ये कंपनियां अपने आईपीओ पेश करने वाली हैं।

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

World Heart Day 2026

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है-  “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में  जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक  से खुद को बचा सकते हैं।

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हदय रोग के कारण:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • मधुमेह
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
  • मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • अत्यधिक कफ बना रहना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • दीर्घकालिक तनाव
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
  • बड़ी हुई उम्र
  • नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
  • नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
  • दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ

 

हृदय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
  • सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
  • सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
  • अस्पष्ट थकान या कमजोरी
  • दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
  • दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
  • चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
  • पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
  • ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ

 

हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:

  1. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
  2. हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  3. उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
  4. नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
  6. शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें। 

 

कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?

कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:

 

लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।

पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
 

कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय

स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।

मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।

धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।

 

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।

 

ध्यान रखें

  • आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

 

‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

न्यूजीलैंड की कीवी होगी सस्ती? FTA के बाद भारत में घटेगी कीमत, जानें कितना मिलेगा फायदा

न्यूजीलैंड से भारत आने वाला कीवीफ्रूट भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत सस्ता हो सकता है। हालांकि, शुरुआत में इसकी कीमत में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि कीवीफ्रूट का आयात एक तय कोटे और न्यूनतम आयात कीमत के नियम के तहत किया जाएगा।

बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड ने अप्रैल 2026 में FTA पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, भारत ने न्यूजीलैंड को कीवीफ्रूट, सेब और मानुका शहद जैसे चुनिंदा उत्पादों के लिए विशेष पहुंच दी है। इस व्यवस्था का मकसद आयात की बाधाओं को कम करना है, साथ ही कोटा, मौसमी नियंत्रण और न्यूनतम आयात मूल्य के जरिए भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना भी है।

वहीं, दोनों देशों की घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस समझौते के लागू होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड की संसद ने सितंबर में इस समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कानून को मंजूरी दे दी थी और उम्मीद है कि यह समझौता अक्टूबर के दूसरे हिस्से में लागू हो जाएगा।

न्यूजीलैंड की कीवी और कितनी सस्ती हो सकती हैं?

अभी भारत कीवी फल के इंपोर्ट पर 33% कस्टम ड्यूटी लगाता है। FTA के तहत, न्यूजीलैंड को पहले साल में 6,250 टन का ड्यूटी-फ्री कोटा मिलेगा। न्यूजीलैंड के समझौते के आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार, यह कोटा धीरे-धीरे बढ़कर छठे साल तक 15,000 टन हो जाएगा।

इस कोटे के अंदर होने वाले इंपोर्ट पर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी, बशर्ते इंपोर्ट की कीमत कम से कम 1.80 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम हो। न्यूजीलैंड सरकार के दस्तावेज के अनुसार, कोटे से बाहर के शिपमेंट पर तुरंत 50% टैरिफ में कटौती होगी, जिससे प्रभावी ड्यूटी लगभग 33% से घटकर 16.5% हो जाएगी।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि पात्र खेप के भारत पहुंचने की लागत में लगने वाली ड्यूटी काफी कम हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में कीवी की कीमत भी उतने ही प्रतिशत कम हो जाएगी।

कीवी की अंतिम कीमत तय होने में कई दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं। इनमें फ्रेट, इंश्योरेंस, पोर्ट हैंडलिंग, कोल्ड स्टोरेज, खराब होने से होने वाला नुकसान, रुपये और डॉलर की कीमत में बदलाव, इंपोर्टर का मार्जिन, थोक विक्रेताओं का कमीशन, रिटेलर का मार्जिन और घरेलू टैक्स शामिल हैं। इसलिए कस्टम ड्यूटी घटने के बावजूद ग्राहकों को मिलने वाली कीमत में कमी इससे कम हो सकती है।

कम से कम आयात कीमत यह भी तय करती है कि घोषित आयात मूल्य कितना कम हो सकता है। इसका मकसद बहुत कम कीमत वाले आयात को घरेलू उत्पादकों पर ज्यादा दबाव डालने से रोकना है।

शुरुआती कोटा, न्यूजीलैंड से भारत के हालिया आयात से ज्यादा है। ट्रिज (Tridge) के ट्रेड डेटा से पता चलता है कि भारत ने 2024 में न्यूजीलैंड से लगभग 5.84 मिलियन किलोग्राम कीवी फल का आयात किया, जिसकी कीमत लगभग 16.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।

न्यूजीलैंड के कीवी फल उद्योग ने इस समझौते का स्वागत किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड सरकार का अनुमान है कि यह सेक्टर 5 वर्षों में टैरिफ के तौर पर लगभग 125 मिलियन न्यूजीलैंड डॉलर बचा सकता है।

भारत को कीवी कहां से मिलती है?

भारत का कीवी फल मार्केट काफी हद तक आयात पर निर्भर है। Tridge के ट्रेड डेटाबेस के अनुसार, 2024 में भारत ने लगभग 60.51 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के करीब 49.14 मिलियन किलोग्राम ताजे कीवी फल का आयात किया।

प्रमुख सप्लायर ये थे:

देश2024 में आयात की मात्रा2024 में आयात की कीमत
चिली1.307 करोड़ किलोग्राम2.406 करोड़ अमेरिकी डॉलर
न्यूजीलैंड58.4 लाख किलोग्राम1.674 करोड़ अमेरिकी डॉलर
ईरान2.385 करोड़ किलोग्राम1.291 करोड़ अमेरिकी डॉलर
ग्रीस51 लाख किलोग्राम51.9 लाख अमेरिकी डॉलर
इटली11.3 लाख किलोग्राम14.7 लाख अमेरिकी डॉलर

आंकड़े बताते हैं कि ईरान ने सबसे ज्यादा मात्रा में सप्लाई की, जबकि प्रमुख सप्लायरों में न्यूजीलैंड ने प्रति किलोग्राम सबसे ज्यादा कीमत दर्ज की। भारतीय सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रॉसरी मार्केट में प्रीमियम इम्पोर्टेड कीवीफ्रूट के लिए चिली और न्यूजीलैंड भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

भारत में इम्पोर्ट की मांग काफी बनी हुई है। ट्रिज (Tridge) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में लगभग 49.17 मिलियन किलोग्राम और 2022 में 45.94 मिलियन किलोग्राम का इम्पोर्ट हुआ।

क्या भारत में कीवी फल उगाया जाता है?

हां, भारत में कीवी फल की खेती होती है, हालांकि इसकी घरेलू पैदावार मांग के मुकाबले बहुत कम है।

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों के पहाड़ी इलाकों में कीवी फल की खेती की जाती है।

अरुणाचल प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा कीवी फल उत्पादक राज्य माना जाता है। ICAR की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस राज्य में लगभग 3,558 हेक्टेयर जमीन पर इसकी खेती होती है और सालाना पैदावार करीब 7,111 टन है। इस रिपोर्ट में मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश को भी अन्य उत्पादक क्षेत्रों के तौर पर बताया गया है।

उत्तराखंड और हिमालय के अन्य इलाकों में भी कीवी फल की खेती बढ़ी है। इस फसल के लिए ठंडी जलवायु की जरूरत होती है, और इसका कमर्शियल उत्पादन देश के मैदानी इलाकों के बजाय पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ज्यादा होता है।

हालांकि, घरेलू उत्पादन अभी भी जरूरत के हिसाब से कम है। हिमालयी बागवानी पर हुई एक रिसर्च में बताया गया है कि भारत अपनी ताजी कीवी की जरूरत का सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा ही पैदा करता है, यानी लगभग 75% मांग आयात से पूरी करनी पड़ती है।

इसी अंतर की वजह से कम कीमत वाले आयात का शहरी बाजारों पर साफ असर दिख सकता है, साथ ही इससे घरेलू उत्पादकों में चिंता भी पैदा होती है। FTA इसी चिंता को दूर करने की कोशिश करता है। इसके लिए आयात की सुविधा को कृषि उत्पादकता कार्यक्रमों, तकनीकी सहयोग, बाग के प्रबंधन में मदद और फसल कटाई के बाद बेहतर तरीकों से जोड़ा गया है।

FTA का ग्राहकों पर क्या होगा असर?

न्यूजीलैंड से आने वाला कीवीफ्रूट रातोंरात बहुत सस्ता होने की उम्मीद नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि शुरुआत में सिर्फ 6,250 टन कीवीफ्रूट को ड्यूटी-फ्री कोटा मिलेगा। भारत के कुल सालाना आयात के मुकाबले यह मात्रा काफी कम है। 2024 में भारत ने करीब 49,000 टन कीवीफ्रूट आयात किया था।

फिर भी, इसका असर तीन तरह से महत्वपूर्ण हो सकता है:

हालांकि, इस FTA का असर तीन तरह से देखने को मिल सकता है।

पहला, कोटे के तहत बिना इंपोर्ट ड्यूटी के आने वाला न्यूजीलैंड का कीवीफ्रूट उन देशों से आने वाले फलों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है, जिन्हें ऐसी टैरिफ छूट नहीं मिलती।

दूसरा, इंपोर्टर्स को ड्यूटी में होने वाली बचत का कुछ हिस्सा रिटेलर्स और ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। खासकर ऐसे समय में जब बाजार में कीवीफ्रूट की सप्लाई अच्छी होगी, तब ग्राहकों को इसका फायदा कीमतों में देखने को मिल सकता है।

छठे साल तक कोटा बढ़कर 15,000 टन हो जाएगा, जिससे जीरो-ड्यूटी पर आने वाले सामान की मात्रा बढ़ जाएगी।

रिटेल में असल कमी इस बात पर निर्भर करेगी कि टैरिफ से हुई बचत का कितना हिस्सा सप्लाई चेन में आगे बढ़ाया जाता है। जीरो कस्टम ड्यूटी का मतलब जीरो इंपोर्ट कॉस्ट नहीं है, और ट्रांसपोर्टेशन, रेफ्रिजरेशन और खराब होने से जुड़े खर्चों की वजह से छोटे शहरों में कीमतें ज्यादा बनी रह सकती हैं।

कीवी फल को सेहत के लिए अच्छा क्यों माना जाता है?

कीवी फल में खास तौर पर विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, एक कीवी फल से किसी वयस्क की रोजाना की विटामिन C की जरूरत का लगभग 80% हिस्सा मिल जाता है। साथ ही, यह फाइबर, पोटैशियम और विटामिन K का भी अच्छा स्रोत है।

US नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ की एक साइंटिफिक समीक्षा में कीवी फल को पोषक तत्वों से भरपूर बताया गया है, जिसमें विटामिन C, डाइटरी फाइबर, पोटैशियम, विटामिन E और फोलेट होते हैं। इसमें नियमित रूप से कीवी खाने से पाचन, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिक हेल्थ को संभावित फायदे होने की बात कही गई है, साथ ही यह भी कहा गया है कि इन फायदों को एक संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

इस वजह से कीवी फल भारतीय ग्राहकों को न सिर्फ एक प्रीमियम इंपोर्टेड फल के तौर पर, बल्कि विटामिन C और फाइबर के आसान स्रोत के तौर पर भी पसंद आ सकता है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स, सुपरमार्केट में बढ़ती उपलब्धता और शहरों में बढ़ती मांग ने कीवीफ्रूट को भारत में इंपोर्ट किए जाने वाले फलों में शामिल कर दिया है।

ग्राहकों के लिए FTA का सबसे बड़ा और तुरंत दिखने वाला फायदा यह नहीं है कि हर कीवी सस्ता हो जाएगा। असली फायदा यह हो सकता है कि न्यूजीलैंड से ज्यादा मात्रा में कीवीफ्रूट कम टैरिफ रेट पर भारत आ सके।

हालांकि, बाजार में इसकी कीमत वास्तव में कितनी कम होगी, यह कई चीजों पर निर्भर करेगा। इनमें ड्यूटी-फ्री कोटे का कितना इस्तेमाल होता है, बाजार में कीवीफ्रूट की सप्लाई कैसी रहती है और इंपोर्टर्स व रिटेलर्स ड्यूटी में हुई बचत का कितना हिस्सा अपने पास रखते हैं, ये सभी बातें शामिल हैं।

IIT Kanpur: आईआईटी कानपुर के इस प्रोफेसर को मिली नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की फेलोशिप, 01 जनवरी से होगी शुरुआत

IIT Kanpur: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुना गया है। प्रोफेसर भट्टाचार्य को यह सम्मान उनके शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जा रहा है। रिकॉर्ड के मुताबिक, भट्टाचार्य की रिसर्च अलग-अलग लंबाई के स्केल पर फंक्शनल मटीरियल के डिजाइन और डेवलपमेंट और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस पर फोकस करती है। इसमें बायो-MEMS, लैब-ऑन-चिप सिस्टम, नैनोटेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिज़ाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस जैसे एप्लीकेशन शामिल हैं।

आईआईटी कानपुर के साथ बतौर प्रोफेसर शिक्षण सेवा देने के अलावा, प्रोफेसर भट्टाचार्य अभी सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ के निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं। साथ ही, वही सीएसआईआर-सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CEERI), पिलानी में डायरेक्टर का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर ने प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य की इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर एक सोशल मीडिया पोस्ट की। इसमें संस्थान की ओर से कहा गया, “प्रो. भट्टाचार्य की इनोवेटिव रिसर्च बायो एमईएमएस, लैब ऑन चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिजाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस के क्षेत्र में फंक्शनल मटीरियल और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस (अलग-अलग लंबाई के स्केल पर) के डिजाइन और डेवलपमेंट से संबंधित है।” साथ ही पोस्ट में कहा गया, ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. शांतनु भट्टाचार्य को 1 जनवरी, 2027 से द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुने जाने पर हार्दिक बधाई।’ यह फेलोशिप “वैज्ञानिक के शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए” दी गई है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया 1930 में बनी थी। इसका मकसद साइंस और टेक्नोलॉजी को सभी ब्रांच में बढ़ाना और बढ़ावा देने के साथ ही भारतीय वैज्ञानिकों के शोधकार्य के विचारों के लेन-देन और प्रकाशन के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इस एकेडमी को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) से वित्तीय मदद मिलती है। इसे भारत सरकार के डिपार्टमेंट फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (DSIR) से साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के तौर पर भी पहचान मिली है।

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Shanti Inorganics Listing: IPO निवेशकों को छप्परफाड़ गेन, शेयर 90% बढ़त में लिस्ट

शांति इनऑर्गेनिक्स की 7 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्टिंग सुपर डुपर हिट रही। शेयर NSE SME पर 90 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 157.70 रुपये पर लिस्ट हुआ। IPO प्राइस 83 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी का 47.24 करोड़ रुपये का इश्यू 142.17 गुना भरा था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 130.97 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 195.53 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 125.72 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

शांति इनऑर्गेनिक्स लिमिटेड सल्फर-बेस्ड इनऑर्गेनिक केमिकल बनाती और बेचती है। इसके मुख्य प्रोडक्ट्स में सोडियम मेटाबाइसल्फाइट, सोडियम सल्फाइट पाउडर, अमोनियम बाइसल्फाइट सॉल्यूशन और सोडियम बाइसल्फाइट पाउडर/सॉल्यूशन शामिल हैं। इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से ऑयल ड्रिलिंग, फार्मास्यूटिकल्स, फूड और बेवरेज, पल्प और पेपर, और वॉटर ट्रीटमेंट जैसे उद्योगों में प्रिजर्वेटिव, रिड्यूसिंग एजेंट, ऑक्सीजन स्केवेंजर और प्रोसेस इंटरमीडिएट के तौर पर किया जाता है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में बेचती है।

Stocks to Watch: 21 स्टॉक्स; TempSens की लिस्टिंग समेत Lenskart, Wipro और Tejas Networks समेत ये शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों में मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 60.50 प्वाइंट्स यानी 0.25% की बढ़त के साथ 24,260.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 27 अगस्त को सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 539.35 प्वाइंट्स यानी 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 116.90 प्वाइंट्स यानी 0.48% की फिसलन के साथ 24,090.85 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Lenskart Solutions

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अल्फा वेव वेंचर्स ब्लॉक डील के जरिए लेंसकार्ट में 1.2% हिस्सेदारी बेच सकती है। लगभग ₹1,313 करोड़ की इस डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹630 तय किया गया है।

Texmaco Rail and Engineering

टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग ने जर्मनी की Bochumer Verein Verkehrstechnik GmbH (BVV) के साथ एक एमओयू किया है। इसमें रेलवे व्हील्स, व्हीलसेट्स, एक्सल्स और रेल गाड़ियों के दूसरे पार्ट्स को लेकर कारोबारी मौके तलाशने और उन पर आगे बढ़ने के लिए जरूरी शर्तें तय की गई हैं।

Tejas Networks

तेजस नेटवर्क्स को टीसीएस से बीएसएनएल के 4G मोबाइल नेटवर्क के लिए 18,685 साइट्स पर RAN इक्विपमेंट, एक्सेसरीज और इंस्टॉलेशन मैटीरियल की सप्लाई के लिए ₹1,537 करोड़ का LoA (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला है।

NBCC (India)

एनबीसीसी को केंद्रीय विद्यालय संगठन, डायरेक्टरेट ऑफ टीचर एजुकेशन एंड एससीईआरटी (ओडिशा) और केनरा बैंक से ₹134.27 करोड़ के कई कंस्ट्रक्शन ऑर्डर मिला है।

Chemplast Sanmar

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2026 से तीन साल के लिए केमप्लास्ट सनमार

के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर गणेशकुमार सुब्रमण्यन की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।

Wipro

विप्रो ने जेमिनी एंटरप्राइज और एजेंटिक AI को गूगल क्लाउड के साथ अपनी साझेदारी को बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके अलावा विप्रो जेमिनी एंटरप्राइज के इंटरनल डिप्लॉयमेंट को बढ़ा रही है और 1,500 फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स समेत 10,000 से ज्यादा एआई-सर्टिफाइड स्पेशलिस्ट्स को एडवांस्ड AI क्षमताओं से लैस करेगी।

Adani Power

अदाणी पावर ने अपनी सब्सिडियरीज चंदेनवल्ले इंफ्रा पार्क और अदाणीकनेक्स के साथ एक शेयर खरीद समझौता किया है, जिसके तहत यह चंदेनवल्ले इंफ्रा पार्क में अपनी पूरी हिस्सेदारी अदाणीकनेक्स को ₹535.69 करोड़ में बेचेगी।

RPP Infra Projects

तमिलनाडु स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी ने आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को दिए गए ₹205.89 करोड़ के वर्क ऑर्डर को रद्द कर दिया है।

Star Cement

MMDR (माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन)) एक्ट, 1957 के नए नियमों के तहत स्टार सीमेंट और उसकी सब्सिडियरीज को अब 22 अगस्त, 2026 से मिनरल सेस का पेमेंट करने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने MMDR एक्ट में बदलाव किया है और अब राज्य सरकारें मिनरल राइट्स या मिनरल वाली जमीनों पर टैक्स, सेस और अन्य लेवी नहीं लगा सकती हैं। इसमें यह भी है कि पुरानी बकाया लेवी अब वसूली नहीं जाएगी।

Dr Agarwal’s Health Care

डॉ अग्रवाल हेल्थ केयर की सब्सिडियरी डॉ अग्रवाल आई हॉस्पिटल ने चेन्नई में दुनिया का पहला पिनहोल पपिलोप्लास्टी (PPP) सेंटर शुरू किया है।

Union Bank of India

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर ब्रांच के अमेरिकी डॉलर में जारी हुए सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स को ‘BBB’ लॉन्ग-टर्म इश्यू रेटिंग दी है।

Apollo Tyres

ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म वॉरबर्ग पिनकस की कंपनी एमेराल्ड सेज इन्वेस्टमेंट ने अपोलो टायर्स में 4.25% हिस्सेदारी वाले 2.7 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,174.93 करोड़ के भाव पर बेच दिए। ये शेयर तीन घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स- ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, बजाज लाइफ इंश्योरेंस और SBI लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने प्रति शेयर ₹435 के भाव पर खरीदे। जून 2026 तक अपोलो टायर्स में एमेराल्ड सेज इन्वेस्टमेंट की हिस्सेदारी 9.93% थी, जबकि ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के पास 1.12% हिस्सेदारी थी।

ICICI Prudential Asset Management Company

प्रूडेंशियल कॉर्पोरेशन होल्डिंग्स ने ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के 98.85 लाख शेयर (2% हिस्सेदारी) ₹3,030.3 करोड़ में प्रति शेयर ₹3,065.47 के भाव पर बेचे। जून 2026 तक ICICI प्रूडेंशियल AMC में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 87.6% थी, जिसमें प्रूडेंशियल कॉर्पोरेशन होल्डिंग्स की हिस्सेदारी 34.59% थी।

Foseco India

मॉर्गन टेरासेन और मॉर्गेनाइट क्रूसिबल ने फोसेको इंडिया में अपनी पूरी 15.26% हिस्सेदारी बेच दी। मॉर्गन एडवांस्ड मैटेरियल्स की मॉर्गन टेरासेन ने फोसेको इंडिया के 5.6 लाख शेयर (7.43% हिस्सेदारी) ₹330.26 करोड़ में तो मॉर्गेनाइट क्रूसिबल ने 5.9 लाख शेयर (7.84% हिस्सेदारी) ₹348.36 करोड़ में बेचे हैं। कुल मिलाकर ₹678.6 करोड़ में 11.5 लाख शेयर को नौ देशी-विदेशी निवेशकों- सिटीग्रुप, इंवेस्को एमएफ, एलआईसी एमएफ, महिंद्रा मैनुलाइफ एमएफ, मिरे एसेट एमएफ, मॉर्गन स्टेनले, कैटामारन वेंचर्स, एसबीआई एमएफ और मोतीलाल ओसवाल एएमसी ने प्रति शेयर ₹5,897 के भाव पर खरीदे।

Aye Finance

ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट मैनेजर अल्फा वेव ग्लोबल की कंपनी अल्फा वेव इंडिया I ने आय फाइनेंस से अपनी पूरी 7.78% हिस्सेदारी (1.92 करोड़ शेयर) ₹322.57 करोड़ में बेच दी। इनमे में 14.88 लाख शेयर मधुसूदन केला की सिंगुलैरिटी AMC ने सिंगुलैरिटी लार्ज वैल्यू फंड III के जरिए ₹25 करोड़ में और इंटीग्रेटेड कोर स्ट्रैटेजीज (एशिया) ने 23.8 लाख शेयर ₹40 करोड़ में खरीदे। शेयरों का लेन-देन ₹168 के भाव पर हुआ।

DCB Bank

एसबीआई और ओमान इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की ओमान इंडिया जॉइंट इन्वेस्टमेंट फंड II ने डीसीबी बैंक के 37 लाख शेयर (1.14% हिस्सेदारी) ₹80.29 करोड़ में प्रति शेयर ₹217.01 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक बैंक में इस फंड की 2.86% हिस्सेदारी थी।

Happiest Minds Technologies

पोलुनिन इमर्जिंग मार्केट्स स्मॉल कैप फंड एलएलसी ने हैप्पिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज के 8.3 लाख शेयर (0.54% हिस्सेदारी) ₹35.68 करोड़ में प्रति शेयर ₹429.92 के भाव पर खरीद लिए।

Iris Clothings

निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट ने आइरिस क्लोदिंग्स में 0.6% हिस्सेदारी के बराबर 11.53 लाख शेयर ₹6.58 करोड़ में प्रति शेयर ₹57.1 के भाव पर खरीदे।

RPP Infra Projects

सीएमके प्रोजेक्ट्स ने आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के प्रमोटर यागवी एनए से कंपनी के 5 लाख शेयर ₹2.84 करोड़ में प्रति शेयर ₹56.85 के भाव पर खरीद लिए।

Wonder Electricals

नेक्सस ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड और यूनिको ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड ने वंडर इलेक्ट्रिकल्स में अपनी 5.66% हिस्सेदारी (75.89 लाख शेयर) ₹98.21 करोड़ में बेच दी। जून 2026 तक नेक्सस ग्लोबल अपॉर्च्यूनिटीज फंड की कंपनी में 2.34% हिस्सेदारी थी, तो यूनिको ग्लोबल अपॉर्च्यूनिटीज फंड की 7.48%।

Tempsens Instruments (India)

आईपीओ को 184 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स के शेयरों की आज बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

एक्स-डिविडेंड: एमसीएक्स, होनासा कंज्यूमर, एलाइड डिजिटल सर्विसेज, अरविंद स्मार्टस्पेस, ब्लैक बॉक्स, कैंटाबिल रिटेल इंडिया, कोरल इंडिया फाइनेंस एंड हाउसिंग, डैम कैपिटल एडवाइजर्स, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज, इमामी पेपर मिल्स, गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स, गुफिक बायोसाइंसेज, गुलशन पॉलीओल्स, हल्डिन ग्लास, जेनबर्कट फार्मा, क्रेडो ब्रांड्स मार्केटिंग, एनबीसीसी (इंडिया), पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज, पॉली मेडिक्योर, प्रोटियन ई-गवर्नेंस टेक्नोलॉजीज, रॉयल ऑर्किड होटल्स, साल्जर इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टर्लिंग टूल्स, स्टड्स एक्सेसरीज, सुपरशक्ति मेटालिक्स, स्वान कॉर्प, वेरिटास (इंडिया), वर्धमान होल्डिंग्स, विक्रान इंजीनियरिंग, वर्धमान स्पेशल स्टील्स, वर्धमान टेक्सटाइल्स, व्हर्लपूल ऑफ इंडिया, यूकेन इंडिया

एक्स-राइट्स: जयके एंटरप्राइजेज

एक्स-स्प्लिट: रोटोग्राफिक्स (इंडिया), स्पाइस आइलैंड्स इंडस्ट्रीज

F&O बैन: आज एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और SAIL में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

Health American blueberries

नई दिल्ली, भारत| 07 अगस्त 2026: 'द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन' में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व 'एंथोसायनिन' का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने 27 वैज्ञानिक प्रकाशनों से जुड़े 18 प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट अध्ययनों (Prospective Cohort Studies) और स्वस्थ लोगों पर किए गए 65 क्लिनिकल ट्रायल्स का व्यापक विश्लेषण किया। अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में एंथोसायनिन का सेवन करने वाले लोगों में यह परिणाम देखे गए:-

 

  • हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम: 26% तक कम
  • हार्ट अटैक (हृदयघात) का खतरा: 18% तक कम
  • टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम: 11% तक कम
  • हृदय संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा: 9% तक कम
  • हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) का जोखिम: 8% तक कम

 

क्लिनिकल ट्रायल्स में यह भी पाया गया कि प्रतिदिन 50 मिलीग्राम या उससे अधिक एंथोसायनिन का सेवन करने से रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की कार्यक्षमता और इंसुलिन स्तर में सुधार होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि एंथोसायनिन युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करके यह मात्रा आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

 

भारत के लिए इस अध्ययन का महत्व

भारत में हृदय संबंधी बीमारियों, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे जीवनशैली से जुड़े रोगों के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए इस अध्ययन के निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं।

 

दैनिक आहार में प्राकृतिक रूप से लाल, नीले और बैंगनी रंग के फलों व सब्जियों को शामिल करने से भोजन की गुणवत्ता में सुधार होता है। अमेरिकी ब्लूबेरी का सेवन ताज़ा, फ्रोजन या सूखे (ड्राई) रूप में किया जा सकता है। इसे दही, ओट्स, स्मूदी, नाश्ते के व्यंजनों, सलाद, डेजर्ट और भारतीय व्यंजनों में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

 

विशेषज्ञों की राय

“यह शोध हमारे रोजमर्रा के आहार में विविधता लाने और प्राकृतिक रूप से रंगीन खाद्य पदार्थों को शामिल करने के महत्व को रेखांकित करता है। अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जिसे भारतीय खानपान का हिस्सा बनाना बेहद आसान है।”

— राज कपूर, भारत प्रतिनिधि, यूएस हाईबश ब्लूबेरी काउंसिल (USHBC)

 

“अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि खानपान में किए गए छोटे और व्यावहारिक बदलाव लंबे समय में हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में बड़ा योगदान दे सकते हैं।”

— प्रोफेसर एडीन कैसिडी, मुख्य शोधकर्ता

 

संतुलित जीवनशैली ही कुंजी है

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एक खाद्य पदार्थ अकेले किसी बीमारी को पूरी तरह रोक या ठीक नहीं कर सकता। इसके बजाय, संतुलित आहार के रूप में एंथोसायनिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और डॉक्टरी सलाह मिलकर ही बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकते हैं।