Zerodha पर ट्रेडिंग शुरू की, 45 मिनट में कमाए ₹12 हजार; फिर ऐसी लगी लत कि माता-पिता की बचत गंवाकर ₹38 लाख के कर्ज में डूबा टेक्नीशियन

शेयर बाजार में जल्दी पैसा कमाने का सपना कई लोगों को ट्रेडिंग की ओर खींचता है। शुरुआत में अगर कुछ मुनाफा मिल जाए, तो बाजार से कमाई का भरोसा और बढ़ जाता है। लेकिन कई बार यही उत्साह धीरे-धीरे ऐसी आदत में बदल जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया यूजर Hemdharpan ने अपने 35 वर्षीय दोस्त की ऐसी ही कहानी साझा की है।

2 लाख की सैलरी और 14 लाख की बचत

Hemdharpan के मुताबिक, उनका दोस्त एक IT प्रोफेशनल था और करीब 2 लाख रुपये महीने कमाता था। उसके पास 14 लाख रुपये की बचत थी। शादीशुदा होने के साथ उसका एक बच्चा भी था। यानी नौकरी, कमाई और सेविंग के मामले में उसकी जिंदगी काफी स्थिर थी।

करीब दो साल पहले एक सहकर्मी ने उसे शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में बताया। यहीं से उसकी जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ।

45 मिनट में 12 हजार का मुनाफा

कहानी के मुताबिक, सहकर्मी ने लंच के दौरान अपना Zerodha अकाउंट दिखाया। उसने Nifty options की इंट्राडे ट्रेडिंग से करीब 45 मिनट में 12 हजार रुपये कमाए थे। यह देखकर टेकie को भी लगा कि बाजार में कम समय देकर अच्छी कमाई की जा सकती है।

शुरुआत में उसे सफलता भी मिली। उसने करीब दो घंटे में 18 हजार रुपये कमाए। इस कमाई ने उसका उत्साह और बढ़ा दिया।

फिर शुरू हुआ नुकसान का सिलसिला

दूसरे महीने बाजार ने उसे बड़ा झटका दिया। उसने कुछ ही मिनटों में करीब 50 हजार रुपये गंवा दिए। पोस्ट के मुताबिक, उसने समय पर stop-loss नहीं लगाया और नुकसान को स्वीकार करने के बजाय उसे वापस पाने की कोशिश शुरू कर दी।

उसने परिवार की बचत से 1 लाख रुपये बाजार में लगा दिए। इसके बाद वह नुकसान की भरपाई के लिए लगातार ट्रेड करने लगा। बताया गया कि वह एक दिन में 30-40 ट्रेड तक करने लगा था।

बचत खत्म हुई तो लिया कर्ज

2024 में शुरू हुई ट्रेडिंग का असर 2025 के मध्य तक दिखने लगा। उसकी करीब 14 लाख रुपये की बचत खत्म हो गई, लेकिन ट्रेडिंग नहीं रुकी। पोस्ट के अनुसार, वह परिवार से ट्रेडिंग छिपाने लगा और काम के बीच भी बाजार पर नजर रखता था।

बचत खत्म होने के बाद उसने तीन बैंकों से पर्सनल लोन लिया। कथित तौर पर उसने इन पैसों के लिए घर की मरम्मत का कारण बताया। बाद में इंस्टेंट लोन ऐप्स से भी पैसे लिए।

38 लाख का नुकसान सामने आया

2025 के आखिर में जब रिकवरी एजेंट घर पहुंचने लगे, तब परिवार को पूरी स्थिति का पता चला। पोस्ट के मुताबिक, 14 लाख रुपये की बचत खत्म होने के अलावा उस पर करीब 24 लाख रुपये का कर्ज भी था। यानी कुल नुकसान करीब 38 लाख रुपये बताया गया।

इसका असर परिवार पर भी पड़ा। बच्चे की स्कूल फीस बाउंस होने की बात सामने आई और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर मायके चली गई।

अब कर्ज से निकलने की कोशिश

Hemdharpan के अनुसार, अब वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटा है। उसने कार बेच दी है और लोन को संभालने के लिए restructuring plan अपनाया है। यह कहानी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। इससे यह जरूर सामने आता है कि ट्रेडिंग में लगातार नुकसान की भरपाई करने की कोशिश आर्थिक जोखिम को तेजी से बढ़ा सकती है।

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Groww ने अमेरिकी कंपनियों में निवेश की सुविधा शुरू की, भारत में इनवेस्टर्स AI और Apple, Nvidia जैसी कंपनियों में लगा सकेंगे पैसे

ब्रोकरेज फर्म ग्रो ने पिछले हफ्ते अपने ऐप पर अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू कर दी। हालांकि, ग्रो के सभी यूजर्स के लिए इस सुविधा के अगले हफ्ते से उपलब्ध होने की संभावना है। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। ग्रो को इस साल जुलाई में गिफ्ट सिटी के जरिए ग्लोबल कंपनियों के शेयरों में निवेश के लिए आईएफएससीए लाइसेंस मिला था।

Groww ने विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा देने के लिए ब्रोकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर करने वाली कंपनी Alpaca Securities से समझौता किया है। ग्रो ने इस सुविधा के बारे में मनीकंट्रोल के सवालों के जवाब नहीं दिए। ग्रो की इस सुविधा से इनवेस्टर्स उसके ऐप के जरिए अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद और बेच सकेंगे।

ग्रो के प्लेटफॉर्म से इनवेस्टर्स को 10,000 से ज्यादा कंपनियों के स्टॉक्स और ईटीएफ में निवेश की सुविधा मिलेगी। इनमें Google, Apple, Nvidia, Tesla, Amazon और Meta जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। Zerodha, Angel One और Upstox को भी गिफ्टी सिटी के जरिए अपने प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा ऑफर करने की इजाजत मिल चुकी है।

Gift City ने अगस्त 2025 में ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) रजिस्ट्रेशन लॉन्च की थी। इसका मकसद इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का किफायती रास्ता देना है। विदेशी कंपनी के शेयर बचने पर इनवेस्टर्स जब पैसा भारत लाएगा तो उसे किसी तरह की कॉस्ट नहीं चुकानी होगी। इससे भारतीय इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का आसान रास्ता खुलेगा।

ग्रो यूजर्स की संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म है। इसके 2 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। यह 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट्स का प्रबंधन करती है। इसकी शुरुआत एक म्यूचअल फंड प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। अब तक विदेशी कंपनियों में निवेश की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म्स में IndMoney, Smallcase और Vested Finance का दबदबा रहा है।

बीते करीब 2 सालों में अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। चूंकि, इंडिया में ऐसी कंपनियां नहीं हैं, जिससे भारतीय इनवेस्टर्स की दिलचस्पी विदेश में इन कंपनियों के शेयरों में निवेश के मौके तलाने में बढ़ी है। इसके अलावा कई बड़ी AI कंपनियों का प्लान अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को लिस्ट कराने का है। ये कंपनियां अपने आईपीओ पेश करने वाली हैं।

NSE के शेयर लिस्ट होते ही बन सकते हैं रॉकेट, एक्सपर्ट ने बताई कहां तक जा सकती है कीमत

एनएसई के शेयर इस महीने 24 तारीख को बीएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। लिस्ट होते ही शेयर रॉकेट बन सकते हैं। इस शेयर में 17 सितंबर से 21 सितंबर के बीच निवेश किया जा सकता है। एक लॉट 8 शेयरों का होगा। प्रत्येक 1 रुपये फैस वैल्यू वाले शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,85 रुपये है।

संस्थागत निवेशकों की डिमांड से मिलेगा सपोर्ट

कनवर्जेंट फाइनेंस के मैनेजिंग पार्टनर हर्ष राघवन का कहना है कि लिस्टिंग के चार से छह हफ्तों में एनएसई का शेयर 20-25 फीसदी चढ़ सकता है। उनका कहना है कि इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की डिमांड से इस शेयर को सपोर्ट मिलेगा। एनएसई आईपीओ पर सीएनबीसी-टीवी18 के मार्केट फोरम में उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लिस्टिंग के 4-6 हफ्ते में यह शेयर 20-25 फीसदी चढ़ जाएगा।”

म्यूचुअल फंड्स के पास एनएसई के शेयर नहींं

उन्होंने कहा कि एनएसई में पहले से कई शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी है। लेकिन, बड़े म्यूचुअल फंड्स हाउसेज और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के पास एनएसई के ज्यादा शेयर नहीं हैं। इसलिए शेयर के लिस्ट होते ही संस्थागत निवेशकों की बड़ी दिलचस्पी इस शेयर में दिखेगी। रिटेल इनवेस्टर्स को काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

कम से कम 8 शेयरों के लिए करना होगा अप्लाई

इस आईपीओ में निवेश करने के लिए प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कम से कम 14,280 रुपये की बोली लगानी होगी। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.41 लाख करोड़ रुपये है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एनएसई आईपीओ में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा, जिससे उसके पास कोई पैसा नहीं आएगा।

ये पुराने इनवेस्टर्स बेच रहे एनएसई के शेयर

इस आईपीओ में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचने जा रहे हैं। इनमें एसबीआई ग्रुप, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स, एमएस स्ट्रेटेजिक, न्यू इंडिया एश्योरेंस और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। इन इनवेस्टर्स को अपने रिटर्न पर कई गुना रिटर्न मिलने जा रहा है। एनएसई के शेयर 24 सितंबर को बीएसई में लिस्ट होंगे।

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राघवन का एनएसई में पहले से निवेश

राघवन एनएसई के पुराने निवेशकों में शामिल हैं। 2006 में उन्होंने गोल्डमैन सैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया था। फिर 2016 में उन्होंने फेयरफैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया। उन्होंने कहा कि उनके निवेश की वजह एक्सचेंज के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इंडियन इकोनॉमी में जैसे-जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी, वैसे-वैसे एनएसी की स्थिति मजबूत होगी।

Zerodha के फाउंडर नितिन कामत ने आईपीओ से पहले एनएसई की जमकर की तारीफ, जानिए उन्होंने क्या कहा

एनएसई का आईपीओ खुलने से पहले जीरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने इसमें बताया है कि जीरोधा के शुरुआती दिनों में किस तरह एनएसई ने ब्रोकरेज फर्म की मदद की थी। यहां तक कि एक्सचेंज ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी थी।

NSE के अधिकारियों ने दिया पूरा सहयोग

Nithin Kamath ने X पर अपने पोस्ट में कहा है कि जीरोधा के ब्रोकरेज फर्म बनने के फैसले की एक वजह एनएसई था। उन्होंने बताया है कि एनएसई के पास तब एक फ्री ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होता था, जिसे ब्रोकर्स अपने क्लाइंट्स को ऑफर कर सकते थे। उन्होंने एनएसई के अधिकारियों की भी तारीफ की है। उन्होंने बताया है कि जब उन्होंने मेंबरशिप के लिए एक्सचेंज के अधिकारियों से बातचीत की, तब उनका व्यवहार काफी दोस्ताना था।

NSE ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी

जीरोधा के फाउंडर ने कहा कि यह जानने के बाद कि नई ब्रोकरेज फर्म के पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, एनएसई के अधिकारियों ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी। यह फीस 5 लाख रुपये थी। उन्होंने कहा है कि यह मदद के कई मामलों में से सिर्फ एक है। दरअसल, एनएसई की तरफ से हर समय जीरोधा को मदद मिली।

तारीफ का मतल IPO में निवेश की सलाह नहीं है

कामत ने यह स्पष्ट किया है कि उनके इस पोस्ट का मकसद एनएसई के आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह नहीं है। लेकिन, उन्हें उम्मीद है कि यह इश्यू सफल रहेगा। उन्होंने यहां तक कहा है कि आज अगर जीरोधा है तो इसकी एकमात्र वजह एनएसई है। उन्होंने कहा है कि यह अकेली कंपनी है, जिसके लिए उनके मन में कृतज्ञता का भाव है।

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देश का मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कई पश्चिमी देशों से बेहतर

उन्होंने देश में मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह सभवत: कई पश्चिमी देशों से आगे है। भारत में स्टॉक एक्सचेंज पहले लेवल के रेगुलेटर्स हैं। भारत में एक्सचेंज कई ऐसी जिम्मेदारियां संभालते हैं, जिसे दूसरे बाजारों में ब्रोकर्स संभालते हैं। उन्होंने कहा, “मैं कई बार यह सोचता हूं कि अगर ऐसा नहीं होता तो हमारे जैसे ब्रोकर्स का क्या हाल होता।”

रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व

NSE का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एक्सचेंज ने प्रत्येक 1 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर के लिए 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट 8 शेयरों का होगा। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर यह आईपीओ 22,561.57 करोड़ रुपये का होगा। यह इंडिया का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ बनेगा। एक्सचेंज ने रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व रखे हैं।

BSE-NSE के अलावा MSE पर भी खरीद-बेच सकेंगे शेयर, Groww-Zerodha ने शुरू किया काम

ग्रो (Groww), जीरोधा (Zerodha) और कुछ बड़े रिटेल ब्रोकर्स जल्द ही अपने यूजर्स को BSE और NSE के अलावा MSE (मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज) पर भी शेयरों की खरीद-बिक्री का विकल्प दे सकते हैं। अभी ग्रो और जीरोधा इसे लेकर एमएसई के साथ इंटीग्रेशन की टेस्टिंग कर रहे हैं। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। यह इंटीग्रेशन पूरा होने पर किसी शेयर के लिए एनएसई और बीएसई के साथ एमएसई का भी विकल्प मिल सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रोकर अपने प्रोडक्ट में इसे कैसे लागू करता है।

MSE को क्या होगा फायदा?

ग्रो और जीरोधा के प्लेटफॉर्म पर आने से एमएसई को सबसे बड़ा फायदा कैश मार्केट में लिक्विडिटी और खुदरा भागीदारी में बढ़ोतरी के रूप में मिलेगा। अभी एमएसई में कैश मार्केट एक्टिविटी बड़े पैमाने पर Zanskar और Jainam जैसे प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग फर्म्स और ब्रोकर्स के भरोसे ही है। जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक एमएसई पर कैश मार्केट में हर रोज ₹400-₹500 करोड़ का सीमित कारोबार होता है।

Groww और Zerodha क्यों आए एमएसई में और कब तक होगा इंटीग्रेशन?

ऐसा नहीं है कि ग्रो और जीरोधा पहली बार एमएसई के साथ आए हैं बल्कि इससे पहले भी ये एमएसई में पैसे डाल चुके हैं। एक्सचेंज ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो किश्तों में ₹1240 करोड़ जुटाए, जिसमें ग्रोथ और जीरोधा ने भी हिस्सा लिया। अब ग्रो और जीरोधा इसे अपने प्लेटफॉर्म में इंटीग्रेट कर रहे हैं और सूत्रों के मुताबिक इसकी टेस्टिंग और ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स में जरूरी बदलाव करने में यानी यूजर्स के लिए उपलब्ध होने में लगभग 3–4 महीने लग सकते हैं।

F&O सेगमेंट भी शुरू करने की योजना

एमएसई का प्लान कैश मार्केट से भी आगे का है। यह अपना F&O सेगमेंट भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है लेकिन एक्सचेंज की कोशिश पहले कैश मार्केट में पर्याप्त और टिकाऊ वॉल्यूम लाने की है। ऐसे में एफएंडओ सेगमेंट भी आने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। एमएसई देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और औपचारिक तौर पर इसने इस साल की शुरुआत में अपना काम शुरू किया।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT की कर्ज लेने की क्षमता ₹300 करोड़ तक बढ़ाने का प्लान, शेयरों में दिखी तेजी

TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपनी उधार लेने की सीमा बढ़ाने की तैयारी की है। कंपनी ने 16 सितंबर 2026 को होने वाली AGM में उधार लेने की सीमा ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है।

कारोबार बढ़ाने के लिए बढ़ेगी उधारी की सीमा

कंपनी के मुताबिक, यह प्रस्तावित बढ़ोतरी कारोबार के विस्तार और भविष्य की फंडिंग जरूरतों के लिए की जा रही है। इससे कंपनी को ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। सामान्य कामकाज के लिए लिए जाने वाले अस्थायी बैंक लोन इस सीमा में शामिल नहीं होंगे।

Rhetan TMT का कहना है कि पिछले पांच साल में उसका प्रॉफिट 140% CAGR से बढ़ा है। उधारी की सीमा बढ़ने से कंपनी को अपनी ग्रोथ योजनाओं के लिए फंड जुटाने में मदद मिल सकती है।

1 MW का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है। इससे कंपनी अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगी।

कंपनी की कुल लागत में एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

हाई-ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स पर भी फोकस

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल चुका है। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ज्यादा वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि सोलर पावर प्रोजेक्ट कंपनी की एनर्जी इकोनॉमिक्स को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट रेंज मजबूत करने पर फोकस कर रही है।

Rhetan TMT का शेयर बुधवार को 9.94% की तेजी के साथ 21.02 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 1.67 हजार करोड़ रुपये है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जीरोधा (Zerodha) के एप्लीकेशन का रास्ता साफ कर दिया। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। जीरोधा की जीरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने इसका एप्लीकेशन 27 अप्रैल 2026 को फाइल किया था। सेबी ने ऐसे समय में एप्लीकेशन को मंजूरी दी है, जब मर्चेंट बैंकिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म्स देश में बढ़ते प्राइमरी कैपिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए इसमें दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।

Merchant Banker बनने से क्या मिलेगा Zerodha को?

मर्चेंट बैंकर का लाइसेंस मिलने के बाद जीरोधा अपने मौजूदा ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में एंट्री कर सकेगी। इसके तहत कंपनी कई तरह के काम कर सकेगी, जैसे कि कंपनियों के IPO और FPO (फॉलो-ऑप पब्लिक ऑफर) मैनेज करने के साथ-साथ राइट्स इश्यू और कैपिटल मार्केट के दूसरे ट्रांजैक्शंस में कंपनियों का काम करना। इस कदम से जीरोधा की इंवेस्टमेंट बैंकिंग में एंट्री होगी।

जीरोधा ने ब्रोकिंग बिजनेस के बाहर तेजी से बढ़ाया कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में जीरोधा ने अपने ट्रेडिशनल ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर कई फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू की जैसे कि एसेट मैनेजमेंट, जीरोधा कैपिटल के जरिए लेंडिंग, और अपने प्रोप्रॉयटरी फंड के जरिए इंवेस्टमेंट्स। इसके अलावा इसे गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर के रूप में काम करने के लिए IFSCA (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी) से रजिस्ट्रेशन मिल चुका है, जिससे यह भारतीय निवेशकों को विदेशी निवेश की सुविधा दे सकती है। अब यह मर्चेंट बैंकिंग में भी एंट्री करने वाली है। 31 अगस्त, 2026 तक सेबी के पास कुल 248 रजिस्टर्ट मर्चेंट बैंकर्स थे तो सेबी के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर काम चल रहा है।

मर्चेंट बैंकिंग के लिए नियम हुए और सख्त

जीरोधा के मर्चेंट बैंकिंग में आने से पहले सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए नियम सख्त किए थे। सेबी ने कैटेगरी I मर्चेंट बैंकर्स की मिनिमम नेटवर्थ ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ तो कैटेगरी II मर्चेंट बैंकर्स के लिए मिनिमम ₹10 करोड़ की नेटवर्थ तय की है। इसमें सिर्फ पहली कैटेगरी वाले ही मर्चेंट बैंकर्स मेनबोर्ड सेगमेंट के आईपीओ को मैनेज कर सकते हैं। नए नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं और मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए इन बढ़ी हुई जरूरतों को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है तो जीरोधा जैसी नई कंपनियों को शुरुआत से ही नए नियमों के मुताबिक जरूरी नेटवर्थ बनाए रखना होगा।