Rhetan TMT की कर्ज लेने की क्षमता ₹300 करोड़ तक बढ़ाने का प्लान, शेयरों में दिखी तेजी

TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपनी उधार लेने की सीमा बढ़ाने की तैयारी की है। कंपनी ने 16 सितंबर 2026 को होने वाली AGM में उधार लेने की सीमा ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है।

कारोबार बढ़ाने के लिए बढ़ेगी उधारी की सीमा

कंपनी के मुताबिक, यह प्रस्तावित बढ़ोतरी कारोबार के विस्तार और भविष्य की फंडिंग जरूरतों के लिए की जा रही है। इससे कंपनी को ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। सामान्य कामकाज के लिए लिए जाने वाले अस्थायी बैंक लोन इस सीमा में शामिल नहीं होंगे।

Rhetan TMT का कहना है कि पिछले पांच साल में उसका प्रॉफिट 140% CAGR से बढ़ा है। उधारी की सीमा बढ़ने से कंपनी को अपनी ग्रोथ योजनाओं के लिए फंड जुटाने में मदद मिल सकती है।

1 MW का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है। इससे कंपनी अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगी।

कंपनी की कुल लागत में एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

हाई-ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स पर भी फोकस

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल चुका है। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ज्यादा वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि सोलर पावर प्रोजेक्ट कंपनी की एनर्जी इकोनॉमिक्स को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट रेंज मजबूत करने पर फोकस कर रही है।

Rhetan TMT का शेयर बुधवार को 9.94% की तेजी के साथ 21.02 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 1.67 हजार करोड़ रुपये है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जीरोधा (Zerodha) के एप्लीकेशन का रास्ता साफ कर दिया। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। जीरोधा की जीरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने इसका एप्लीकेशन 27 अप्रैल 2026 को फाइल किया था। सेबी ने ऐसे समय में एप्लीकेशन को मंजूरी दी है, जब मर्चेंट बैंकिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म्स देश में बढ़ते प्राइमरी कैपिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए इसमें दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।

Merchant Banker बनने से क्या मिलेगा Zerodha को?

मर्चेंट बैंकर का लाइसेंस मिलने के बाद जीरोधा अपने मौजूदा ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में एंट्री कर सकेगी। इसके तहत कंपनी कई तरह के काम कर सकेगी, जैसे कि कंपनियों के IPO और FPO (फॉलो-ऑप पब्लिक ऑफर) मैनेज करने के साथ-साथ राइट्स इश्यू और कैपिटल मार्केट के दूसरे ट्रांजैक्शंस में कंपनियों का काम करना। इस कदम से जीरोधा की इंवेस्टमेंट बैंकिंग में एंट्री होगी।

जीरोधा ने ब्रोकिंग बिजनेस के बाहर तेजी से बढ़ाया कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में जीरोधा ने अपने ट्रेडिशनल ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर कई फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू की जैसे कि एसेट मैनेजमेंट, जीरोधा कैपिटल के जरिए लेंडिंग, और अपने प्रोप्रॉयटरी फंड के जरिए इंवेस्टमेंट्स। इसके अलावा इसे गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर के रूप में काम करने के लिए IFSCA (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी) से रजिस्ट्रेशन मिल चुका है, जिससे यह भारतीय निवेशकों को विदेशी निवेश की सुविधा दे सकती है। अब यह मर्चेंट बैंकिंग में भी एंट्री करने वाली है। 31 अगस्त, 2026 तक सेबी के पास कुल 248 रजिस्टर्ट मर्चेंट बैंकर्स थे तो सेबी के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर काम चल रहा है।

मर्चेंट बैंकिंग के लिए नियम हुए और सख्त

जीरोधा के मर्चेंट बैंकिंग में आने से पहले सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए नियम सख्त किए थे। सेबी ने कैटेगरी I मर्चेंट बैंकर्स की मिनिमम नेटवर्थ ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ तो कैटेगरी II मर्चेंट बैंकर्स के लिए मिनिमम ₹10 करोड़ की नेटवर्थ तय की है। इसमें सिर्फ पहली कैटेगरी वाले ही मर्चेंट बैंकर्स मेनबोर्ड सेगमेंट के आईपीओ को मैनेज कर सकते हैं। नए नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं और मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए इन बढ़ी हुई जरूरतों को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है तो जीरोधा जैसी नई कंपनियों को शुरुआत से ही नए नियमों के मुताबिक जरूरी नेटवर्थ बनाए रखना होगा।