Food Safety : बिस्किट में भरा भूसा, दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, उपभोक्ता अपने सेहत की कैसे करें सुरक्षा !

Food Safety : दूध और डेयरी प्रोडक्ट में डिटर्जेंट और यूरिया, घी में जानवर की चर्बी,लाल मिर्च पाउडर में लाल मिट्टी, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, जीरा में घास के बीज और अब बिस्किट में जानवरों की खिलाने वाला भूसा!ये सब फूड रेगुलेटर के छापों पकड़ा गया और साबित हो चुका है, फिर भी भारत में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है आखिर क्यों? कैसे रुकेगा मिलावट का काला कारोबार? आज कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात की गई है।

सबसे पहले समझते हैं कि फसाई (FSSAI) के छापों में ताजा खुलासा क्या हुआ है। FSSAI ने कंज्यूर्स की शिकायत पर की जांच की तो पाया कि प्रिया गोल्ड बिस्किट में ‘फाइबर’ के सोर्स के रूप में जानवरों को खिलाने वाला चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था । जांच में मिली चोकर की बोरियों पर साफ लिखा था कि ये केवल मवेशियों के खाने के लिए है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग प्लांट में साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भारी उल्लंघन भी पाया गया। FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

दूसरा मामला है दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाने का। डोडला डेयरी (Dodla Dairy) के फुल क्रीम दूध के सैंपल स्टैंडर्ड टेस्टिंग में फेल हो गए। जब रेफरल लैब से जांच कराई गई तो दूध में डिटर्जेंट की पुष्टि हुई। इस दूध में फैट भी तय मात्रा से कम था और ये मानव शरीर के लिए असुरक्षित और हानिकारक घोषित किया गया।

तीसरा मामला है पीली किशमिश में जहरीला पेस्टिसाइड का। UEIR Organic Foods की पीली किशमिश के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक पाए गए। कंज्यूमर इस प्रोडक्ट को ‘ऑर्गेनिक’ और हेल्दी मानकर खा रहे हैं। जबकि इनमें मौजूद केमिकल अवशेष उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हां अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे की फसाई (FSSAI) भारत का फूड रेग्यूलेटर है।

मिलावट के तरीके

दूध और डेयरी उत्पाद में डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च मिलाया जाता है। वहीं, घी और मक्खन में वेजीटेबल तेल, चर्बी, स्टार्च मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट और मेटानिल येलो मिला जाता है। लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा और लाल मिट्टी मिलाई जाती है। धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, गोबर और भूसी मिलाई जाती है। काली मिर्च में पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। जीरा में घास के बीज और झाड़ू के तिनके मिला दिए जाते हैं। हींग में स्टार्च, गोंद और राल मिलाए जाते हैं। वहीं, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल और सस्ता पाम ऑयल मिला दिया जाता है। शहद में चीनी की चाशनी, राइस सिरप गुड़ का घोल मिलाया जाता है। वहीं, चीनी और गुड़ में चाक पाउडर और वॉशिंग सोडा मिला दिया जाता है। हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन की मिलावट की जाती है। वहीं, फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन गैस का इस्तेमाल होता है।

मिलावट की सजा

मानक पूरे ना करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ के लिए 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत ब्रांडिंग/भ्रामक प्रचार के लिए 3-10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित भोजन पर 6 महीने तक जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। भोजन से चोट या बीमारी होने पर 1 साल जेल की जेल और 3 लाख जुर्माना हो सकता है। भोजन से गंभीर बीमारी होने पर 6 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। भोजन से मृत्यु होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है।

यहां दर्ज करें शिकायत 

FSSAI के Food Safety Connect ऐप पर और FSSAI के टोल-फ्री नंबर पर मिलावट की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

खरीदारी के समय इन बातों पर ध्यान दें

पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना चाहिए। एगमार्क (Agmark) / FSSAI लोगो होना चाहिए। अनचाही या असामान्य महक/स्वाद नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और सीलबंद पैकेट ही खरीदें।

 

 

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Video: बिस्किट में गड़बड़ी पर दुकानदार से भिड़ा शख्स, ऑनलाइन शिकायत की बात सुनकर मिला ऐसा जवाब

कई बार रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान लोग छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला बिस्किट के पैकेट को लेकर सामने आया है, जहां एक कंटेंट क्रिएटर ने दुकानदार से ऑनलाइन शिकायत करने की बात कही। दुकानदार के जवाब और दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे देखने के बाद लोग उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा करने लगे। कई यूजर्स ने शिकायत करने के कदम की तारीफ की, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर ध्यान दिलाया।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता को क्या करना चाहिए और अपनी शिकायत कहां दर्ज करानी चाहिए।

दुकानदार से पूछा- ऑनलाइन शिकायत कर दूं?

राघव दुबे नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें वह बिस्किट के पैकेट की गुणवत्ता को लेकर सवाल करते हैं और दुकानदार से पूछते हैं, “Complaint online daalu chalega” यानी क्या वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

इस पर दुकानदार जवाब देता है, “हां, डाल दो।” वीडियो में हुई इस छोटी-सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर ग्राहक को आवाज उठानी चाहिए, न कि मामले को अनदेखा करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो पर कई लोगों ने कंटेंट क्रिएटर के कदम की तारीफ की। कुछ यूजर्स ने इसे उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग के काम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “Good Job”, जबकि दूसरे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तारीफ की। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि शिकायत कहां दर्ज की गई और कार्रवाई होने में कितना समय लगा। यूजर्स का कहना था कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र FDA में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की ऑनलाइन सुविधा है। इसके माध्यम से मिलावट, असुरक्षित खाद्य उत्पादों और पैकेट पर गलत जानकारी जैसी समस्याओं की शिकायत की जा सकती है। जुलाई 2026 में विभाग ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में AI की मदद से शिकायतों को संभालने वाला प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने और उनकी स्थिति जानने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी दिखे तो क्या करें?

अगर किसी बिस्किट या पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसका पैकेट संभालकर रखें। उत्पाद, बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख की तस्वीरें लें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें और संदिग्ध उत्पाद का सेवन न करें। इसके बाद निर्माता या संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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Tukaram Mundhe: ‘सिर्फ टी-शर्ट पहनना काफी नहीं’, प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ वाली टी-शर्ट पर FDA चीफ ने किया रिएक्ट

Tukaram Mundhe: हाल ही में प्रीति जिंटा ने महाराष्ट्र के फूड-सेफ्टी अभियान की तारीफ करते हुए “टीम तुकाराम मुंढे” लिखी टी-शर्ट पहनी थी। अब FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद प्रीति जिंटा के समर्थन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने प्रीति से बात की है और न ही वे उनसे मिले हैं, लेकिन वे आभारी हैं कि उन्होंने उनका जिक्र किया।

PTI से बात करते हुए अपने काम के लिए प्रीति जिंटा के समर्थन को स्वीकार करते हुए मुंढे ने कहा- “मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है और न ही हमारी फोन पर कोई बातचीत हुई है। लेकिन मैं आभारी हूं कि उन्होंने ‘टीम तुकाराम मुंढे’ का जिक्र किया।”उन्होंने आगे कहा- “मुझे लगता है कि समाज के हर स्तर और हर क्षेत्र में अच्छे इरादों वाले लोग मौजूद हैं। इन अच्छे कामों के लिए एक टीम बनाई जानी चाहिए। अच्छे विचारों, सोच और कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

हालांकि वे प्रीति के इस कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “सिर्फ ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखी टी-शर्ट पहनना ही काफी नहीं है। केवल नाम दिखाने से काम नहीं चलेगा। असल काम करना होगा और सही सोच अपनानी होगी।”

‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट

इस महीने की शुरुआत में प्रीति ने नीली जींस और सफेद स्पोर्ट्स शूज के साथ ‘टीम मुंढे’ टी-शर्ट पहनी थी। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और अपने बाल खुले रखे थे। उनका मेकअप मिनिमल था। लेकिन सादगी भरी स्टाइलिंग के बावजूद उनकी टी-शर्ट पर लिखा संदेश सबसे अलग और आकर्षक था।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंढे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि सभी संस्थान सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्तरां और खाने-पीने के अन्य व्यवसायों के निरीक्षण के बाद मुंढे मुंबई में फ़ूड-सेफ्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

अब मिलेगी शुद्ध पनीर! FSSAI की एनालॉग प्रोडक्ट को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर रोक लगाने की तैयारी

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पनीर को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दूध से नहीं बने एनालॉग प्रोडक्ट को ‘पनीर’ नाम से बनाने और बेचने पर रोक लग सकती है। इसका मकसद है कि ग्राहक को प्रोडक्ट की असली सामग्री को लेकर भ्रम न हो।

क्या है एनालॉग पनीर?

डेयरी के मामले में एनालॉग ऐसे फूड प्रोडक्ट होते हैं, जो दूध या दूध से बने सामान जैसे दिखते हैं। उनका स्वाद या इस्तेमाल भी वैसा ही हो सकता है। लेकिन इनमें दूध काफी कम या बिल्कुल नहीं होता। इसकी जगह गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल होता है।

FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया?

FSSAI ने Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। इससे 2011 के नियमों में बदलाव किया जाएगा।

ड्राफ्ट में Regulation 2.1.1 के तहत एक नया क्लॉज जोड़ने का प्रस्ताव है। इसमें दूध से नहीं बनी सामग्री वाले पनीर को शामिल किया गया है।

60 दिन में मांगे सुझाव

FSSAI ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। आधिकारिक राजपत्र में नोटिफिकेशन की कॉपी सार्वजनिक होने के 60 दिन बाद इस प्रस्ताव पर आगे विचार किया जाएगा।

कई राज्यों में पहले से कार्रवाई

FSSAI के मुताबिक, कई राज्यों ने पहले ही एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर रोक लगा रखी है। अब केंद्रीय स्तर पर भी इसके नाम और लेबलिंग को लेकर नियम सख्त करने का प्रस्ताव आया है।

ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी कार्रवाई

पिछले छह महीनों में FSSAI ने फूड बिजनेस ऑपरेटरों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। इसमें भ्रामक दावे, गलत लेबलिंग, हाइजीन से जुड़ी कमियां और दूसरे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन शामिल है।

बुधवार को FSSAI ने Amazon, Swiggy Instamart, BigBasket, Flipkart India और Zepto के खिलाफ भी पेनल कार्रवाई शुरू की। इन पर भ्रामक दावों और प्रतिबंधित प्रोडक्ट की बिक्री समेत नियमों के पालन में कमी के मामले सामने आए हैं। एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है।

दिल्ली में 4,100 किलो मिलावटी सामान जब्त

त्योहारों से पहले दिल्ली सरकार के फूड सेफ्टी विभाग ने एक महीने तक अभियान चलाया। इस दौरान 4,100 किलो से ज्यादा मिलावटी खोया, छेना और एनालॉग पनीर जब्त कर नष्ट किया गया।

दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोरी गेट खोया मंडी से 30 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 22 इंसानों के खाने के लिए असुरक्षित पाए गए। इसके अलावा खोया और छेना के 19 सैंपल में से 12 घटिया गुणवत्ता वाले मिले। ये दोनों चीजें मिठाई बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं।

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Bipasha Basu: बिपाशा बसु को अपने बॉक्स में कीड़े मिलने के बाद प्रोटीन पाउडर ब्रांड ने सफाई दी, बोले- ‘ये इंडियन सेलिब्रिटी…’

Bipasha Basu: न्यूट्रिशन ब्रांड ISOPURE ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है। यह स्पष्टीकरण तब आया जब एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने अपने प्रोटीन पाउडर के एक नए खुले डिब्बे में छोटे कीड़े जैसी चीज मिलने की बात कही और चिंता जताई। Glanbia Performance Nutrition (GPN) इंडिया के जनरल मैनेजर सुमित माथुर ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने तुरंत एक्ट्रेस से संपर्क किया और प्रोडक्ट पैक की असलियत और क्वालिटी की जांच कर रही है।

बयान में कहा गया, “ISOPURE प्रोडक्ट की क्वालिटी और ग्राहकों की सुरक्षा के ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने संबंधित भारतीय सेलिब्रिटी ग्राहक से तुरंत संपर्क किय। उनकी फौरन चिंता का समाधान किया और हमारे जवाब को स्वीकार करने के लिए उनकी सराहना करते हैं। हमारी क्वालिटी टीम अभी पैक की असलियत और क्वालिटी की जांच कर रही है।”

बसु ने 10 सितंबर को इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए यह चिंता जताई थी। उन्होंने प्रोडक्ट का एक वीडियो शेयर किया और महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे को टैग करके उनसे दखल देने की अपील की। ​​वीडियो में एक्टर ने कहा, “इसमें कीड़े हैं… बहुत छोटे-छोटे कीड़े। हमने जो नया डिब्बा खोला है, वह कीड़ों से भरा है।”

वीडियो के साथ बसु ने लिखा, “@tukaram_ias आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं… ताकि हम जो भी खरीदें, उसमें हमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।” हालांकि, इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिख रही चीज कीड़े ही थे या प्रोडक्ट खराब था। ISOPURE ने कहा कि उनकी स्थापित प्रक्रियाओं में तय अधिकारियों के साथ मिलकर बाजार की नियमित निगरानी शामिल है, ताकि नकली सामान या बिना मंजूरी के वितरण का पता लगाया जा सके।

कंपनी ने कहा, “इन लगातार किए जा रहे उपायों का मकसद यह पक्का करना है कि ग्राहकों को असली ISOPURE प्रोडक्ट मिलें। हम ग्राहकों को यह भी सलाह देते हैं कि वे अधिकृत चैनलों से ही खरीदारी करें और इस्तेमाल से पहले असली होने की पुष्टि के लिए हर पैक पर दिए गए यूनिक QR कोड का इस्तेमाल करें।” यह स्पष्टीकरण महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा उपायों पर बढ़ते ध्यान के बीच आया है।

राज्य का FDA रेस्तरां, होटल, सड़क किनारे खाने की दुकानों और खाना परोसने वाले अन्य प्रतिष्ठानों (ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए खाना सप्लाई करने वालों सहित) का निरीक्षण कर रहा है। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में लाइसेंस सस्पेंड करने और सुधार के नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की गई है। खाद्य सुरक्षा को लेकर अपने काम के तरीके के लिए मुंडे की लोगों ने तारीफ भी की है।

एक्टर मनोज बाजपेयी ने ANI से बात करते हुए कमिश्नर की “ईमानदारी” और अपने काम के प्रति “समर्पण” का ज़िक्र किया था। बाजपेयी ने कहा, “एक पुलिस अधिकारी, या मान लीजिए तुकाराम, को एक खास काम के लिए नियुक्त किया जाता है। जब वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपना काम करते हैं, तो लोगों को हैरानी होती है कि वे वायरल होने लगते हैं। क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया है?”

VIDEO: KFC में चिकन खाने पहुंचा शख्स, ऑर्डर आते ही मच गया हंगामा…फ्राइड चिकन से निकली हैरान करने वाली चीज

Viral Video: सोशल मीडिया पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ सिटी मॉल के KFC से जुड़ा एक मामला काफी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया एक ग्राहक ने दावा किया कि, उसने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी मॉल के KFC आउटलेट से डीप-फ्राइड चिकन खरीदा था, लेकिन उसमें उसे एक कीड़ा नजर आया। ग्राहक (कस्टमर) ने इसका वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। शेयर किए गए इस वीडियो में उन्होंने KFC India को टैग करते हुए मामले पर नाराजगी जताई है।

वहीं KFC के डीप-फ्राइड चिकन में कीड़ा देख हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

चिकन में मिला कीड़ा

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में ग्राहक ने KFC इंडिया को टैग करते हुए इस घटना पर नाराजगी और हैरानी जताई। ग्राहक ने बताया कि, ये मामला 5 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे गौर सिटी मॉल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हुआ। यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, ‘गौर सिटी मॉल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के KFC आउटलेट से लिए गए डीप-फ्राइड चिकन में उसे एक कीड़ा मिला, जिसे देखकर वह काफी हैरान और परेशान हुआ। इसके साथ ही उसने आउटलेट की फूड सेफ्टी और क्वालिटी कंट्रोल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर क्या खाने की सही तरीके से जांच की गई थी।’

दिल्ली में खाने-पीने की चीजों पर हो रही जांच

इस मामले से जुड़ा एक लंबा वीडियो भी दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया गया है। इसमें पूरी घटना दिखाने का दावा किया गया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इसे देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में फूड सेफ्टी विभाग ने खाने-पीने की चीजों की जांच बढ़ा दी है। खासतौर पर दूध, डेयरी प्रोडक्ट, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामानों पर नजर रखी जा रही है। 28 अगस्त को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग को त्योहारों से पहले शहरभर में खाने-पीने की चीजों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए।

खाद्य पदार्थों का ले रहे सैंपल

ANI के मुताबिक, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस रिलीज में बताया गया कि, फूड सेफ्टी टीमों ने त्योहारों को देखते हुए मिठाई बनाने वाली जगहों, मंडियों, बाजारों और खाने-पीने की दुकानों पर जांच बढ़ा दी है। इस दौरान कई खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए जा रहे हैं। अधिकारियों का खास ध्यान दूध और उससे बने सामान जैसे पनीर, खोया और घी के साथ-साथ मिठाइयों और उन खाद्य चीजों पर है, जिनकी त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

Bihar Mystery Fish: नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अजीब मछलियां, इनको खाते ही हो रहीं बड़ी दिक्कतें! सरकार ने अब ये बताया

Bihar Mystery Fish: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में सीमा पार से बहकर आ रही अज्ञात और अजीब किस्म की मछलियों ने हड़कंप मचा दिया है। बाढ़ के पानी के साथ आई इन मछलियों को खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसी मछलियों को खाने से से बचने की सख्त हिदायत दी है।

मछलियां क्यों बन रही हैं खतरनाक और बीमारी की क्या है वजह?

मत्स्य विभाग के मुताबिक बाढ़ के दौरान मछलियां तालाबों, झीलों, नदियों और जलाशयों से निकलकर पानी के तेज बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये मछलियां कीचड़, गंदे नाले, सड़े-गले शवों और दूसरे हानिकारक प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इस वजह से ये मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और खतरनाक केमिकल से संक्रमित हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरण सामान्य न हो जाए और साफ मछलियां उपलब्ध न हों, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार की अपील और लक्षण दिखने पर क्या करें?

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने नागरिकों से सुरक्षा के मद्देनजर कई दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कहा गया है कि किसी भी अनजानी या अजीब दिखने वाली मछली को खाने के लिए इस्तेमाल न करें। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न खरीदें, न बेचें और न ही भोजन के रूप में इस्तेमाल करें। बिना विभागीय जांच और वेरिफिकेशन के किसी भी अनजान मछली को खाने लायक न समझें।

अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त/डायरिया, पेट दर्, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं या डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही ये भी कहा गया है कि ऐसी असामान्य मछलियां दिखने पर तुरंत जिला मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

पश्चिमी चंपारण में जागरूकता अभियान

अनजान मछलियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी चंपारण की जिला मत्स्य अधिकारी नूतन ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की बाढ़ से आ रही मछलियां अत्यधिक संक्रामक हैं और इनमें कई बीमारियां फैली हुई हैं। इनको खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और पेचिश जैसे गंभीर लक्षण उभर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विक्रेताओं को ऐसी मछलियां न बेचने और आम जनता को इन्हें न खरीदने व न खाने की सलाह दी जा रही है।

उधर नेपाल पुलिस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक निर्देश जारी कर अपने नागरिकों से बाढ़ के पानी में बहकर आई मछलियों और अन्य नदी आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने का अनुरोध किया है।

नेपाल में बाढ़ से 1127 लोगों की मौत, बिहार में अलर्ट

नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। शवों के बरामद होने का सिलसिला अभी भी जारी है। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने की वजह से निचले इलाकों में स्थित बिहार में हाई अलर्ट जारी है।

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बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

‘इन्हें खुद खाओ’: रिश्वत के आरोप में भीड़ ने महाराष्ट्र FDA अधिकारी को घेरा, मुंह में एक्सपायर्ड बिस्किट ठूंसने की कोशिश की

महाराष्ट्र के संभाजीनगर में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब गुस्साई भीड़ ने एक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) अधिकारी को घेर लिया और उस पर एक्सपायर्ड बिस्किट के पैकेट फेंकने लगी। NDTV के मुताबिक, भीड़ अधिकारी से कह रही थी, “इन्हें खुद खाओ।”

अधिकारी पर आरोप था कि उन्होंने एक ऐसे दुकानदार को बचाने के लिए रिश्वत ली थी जो कथित तौर पर एक्सपायर हो चुके सामान बेच रहा था। इस हंगामे के बीच, कुछ लोगों ने उनके मुँह में एक्सपायर हो चुके बिस्किट ठूंसने की भी कोशिश की।

लेकिन इतना गुस्सा क्यों?

NDTV के अनुसार, यह गुस्सा एक स्थानीय पान की दुकान पर एक्सपायर्ड (समय-सीमा खत्म हो चुके) प्रोडक्ट बेचने के आरोपों की वजह से भड़का। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक दो साल का बच्चा उस दुकान से खरीदे गए नमकीन स्नैक मिक्स को खाने के बाद बीमार पड़ गया और उसे चक्कर आने लगे।

बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इस घटना से छत्रपति संभाजीनगर के लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने FDA ऑफिस से संपर्क करके शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, FDA का एक अधिकारी मौके पर पहुंचा और दुकान की जांच शुरू की।

हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच से पहले ही उस नमकीन स्नैक मिक्स को हटा दिया गया था, जिसका इस घटना से संबंध था। जांच के दौरान, अधिकारी को पान की दुकान पर एक्सपायर्ड बिस्कुट के कई पैकेट बिकते हुए मिले।

एक्सपायर्ड पैकेट जब्त तो कर लिए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकानदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अधिकारी रिश्वत लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि यह घटना राज्य भर में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की बड़ी कार्रवाई के दौरान सामने आई है। हाल के हफ्तों में, खाद्य कंपनियों को कई नोटिस जारी किए गए हैं और अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स की बिक्री और अन्य खामियों को लेकर जांच कर रहे हैं।

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