Nestle India Share Price : Q2 नतीजों के बाद नेस्ले इंडिया में हुआ बड़ा एक्सीडेंट, कल 8% टूटने के बाद आज भी दबाव में है शेयर

Nestle India Share Price : शुक्रवार, 16 अक्टूबर को नेस्ले इंडिया के शेयरों में और गिरावट आई है। इससे पहले कंपनी के वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद कल इसके शेयरों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। ब्रोकरेज फर्म HSBC ने इस स्टॉक पर अपनी ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,480 रुपये तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 16 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। साथ ही, फर्म ने यह भी चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ धीमी हो सकती है।

आज शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में नेस्ले इंडिया के शेयर 1.05 प्रतिशत गिरकर 1,262.40 रुपये पर आ गए। फिलहाल यह शेयर 11.90 रुपए यानी 0.93 फीसदी की कमजोरी के साथ 1263 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। कल गुरुवार को भी इसमें 7.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। दो दिनों की इस भारी गिरावट के बावजूद,2026 में अब तक यह शेयर केवल 1.5 प्रतिशत ही नीचे आया है। यह निफ्टी 50 के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन है,जो इसी अवधि में लगभग 12 प्रतिशत गिरा है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.46 लाख करोड़ रुपये है।

स्टॉक पर HSBC की राय

HSBC का कहना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में नेस्ले इंडिया का रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा है, जो काफी हद तक अनुमानों के अनुरूप है। वहीं, इसका दो साल का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 15 प्रतिशत रहा है। EBITDA बाजार के अनुमानों से लगभग 3 प्रतिशत अधिक रहा है।

ब्रोकरेज ने नेस्ले इंडिया के न्यूट्रिशन बिज़नेस में धीरे-धीरे हो रहे सुधार की ओर इशारा किया है। इसके चॉकलेट और कॉफी कारोबार ने भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, HSBC ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

नेस्ले इंडिया Q2 नतीजे

सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही में नेस्ले इंडिया के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 35.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 1,009.6 करोड़ रुपये पर रहा है। वहीं,इसकी कामकाजी आय 20.3 प्रतिशत बढ़कर 6,788.3 करोड़ रुपये पर रही है। स्टैंडअलोन बेसिस पर नेट प्रॉफिट 36.2 प्रतिशत बढ़कर 1,026.8 करोड़ रुपये रहा है जो CNBC-TV18 के 1,018 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 23.8 प्रतिशत रहा, जबकि विज्ञापन और मार्केटिंग पर होने वाला खर्च 46 प्रतिशत बढ़ है। नेस्ले ने अपने ब्रांडों में निवेश बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से विज्ञापन और मार्केटिंग पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है।

कंपनी ने खाद्य महंगाई और कमोडिटी की लागत बढ़ने पर जताई चिंता

तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, गुरुवार को नेस्ले इंडिया के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के मैनेजमेंट ने बढ़ती महंगाई और कमोडिटी की लागत से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता जताई है। जिसका असर शेयर पर देखने को मिला। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष तिवारी ने कहा कि बढ़ती महंगाई,खासकर खाने-पीने की चीजों की महंगाई,एक सच्चाई है। कंपनी कमोडिटी की लागत के दबाव को कम करने के लिए उत्पादकता बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार लाने पर फोकस करेगी।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Stock To Buy: एक्सिस ने इन 7 लार्ज-कैप शेयरों पर दी खरीद की सलाह, मिल सकता है 44% का रिटर्न

Stock To Buy: भारतीय शेयर बाजार ने अभी एक रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन ऐसा रिकॉर्ड नहीं जिसकी निवेशकों को उम्मीद थी। दलाल स्ट्रीट में लगातार आठ हफ़्तों से गिरावट देखी गई है, जो 2020 के कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान देखी गई गिरावट से भी ज़्यादा है। बाजार की इस बढ़ी गिरावट में एक्सिस सिक्योरिटीज ने 7 लार्ज-कैप स्टॉक्स चुने हैं जिनमें भारी गिरावट के बाद भी मजबूत वैल्यू है। एक्सिस

बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance)

एक्सिस ने 1,305 रुपये का प्राइस टारगेट तय किया है, जो मौजूदा लेवल से 36% ज़्यादा है। यह कंपनी कंज्यूमर फाइनेंस के लिए भारत की सबसे बड़ी NBFCs में से एक है। इसके पास टू-व्हीलर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हाउसिंग और छोटे व्यवसायों के लिए लोन जैसे कई तरह के प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है।

भारती एयरटेल (Bharti Airtel)

2,530 रुपये के प्राइस टारगेट के साथ, ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से 44% बढ़ने की संभावना जताई है। यह एक भारतीय मल्टीनेशनल टेलीकम्युनिकेशन कंपनी है जो दक्षिण एशिया, अफ्रीका और चैनल आइलैंड्स के 18 देशों में काम करती है। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है, जिसकी घरेलू बाज़ार में मज़बूत मौजूदगी है और इसके पास डिजिटल सेवाओं का एक व्यापक पोर्टफोलियो है, जिसमें फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, मोबाइल और डेस्कटॉप टेलीफोनी और अन्य डिजिटल समाधान शामिल हैं।

ICICI बैंक (ICICI Bank )

1,800 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ, ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से 36% बढ़ने की संभावना जताई है। इस लेंडर को मजबूत लायबिलिटी फ्रैंचाइज़ और अच्छे रिटेल-कॉर्पोरेट मिक्स का सहारा मिला हुआ है। बैंक की सब्सिडियरी कंपनियाँ, जैसे ICICI वेंचर फंड्स, ICICI प्रू AMC, ICICI सिक्योरिटीज, ICICI प्रूडेंशियल और ICICI लोम्बार्ड, अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं।

एटरनल (Eternal)

एक्सिस बैंक ने 390 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ खरीदारी की राय दी है। ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से इसमें 22% बढ़ने की संभावना जताई है। कंपनी का बिजनेस मॉडल ‘एसेट-लाइट’ है, जो डिमांड और सप्लाई को एक साथ लाने पर आधारित है। साथ ही, यह कुशल लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है, मज़बूत नेटवर्क प्रभाव पैदा करता है और यूज़र एंगेजमेंट को बढ़ाता है। इसमें चार मुख्य बिज़नेस शामिल हैं। ज़ोमैटो (Zomato), ब्लिंकिट (Blinkit), डिस्ट्रिक्ट (District) और हाइपरप्योर (Hyperpure)।

वरुण बेवरेजेज़ (Varun Beverages)

एक्सिस बैंक ने ₹530 के टारगेट प्राइस के साथ इस स्टॉक में खरीदारी की राय दी है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि पिछली क्लोजिंग के मुकाबले इसमें 23% की बढ़त हो सकती है। VBL ग्लोबल बेवरेज इंडस्ट्री में एक अहम कंपनी है और दुनिया भर में (US के बाहर) पेप्सिको (PepsiCo) की दूसरी सबसे बड़ी फ्रैंचाइज़ी है। इसके पास फ्रैंचाइज़ी अधिकारों के तहत 10 देशों में और डिस्ट्रीब्यूशन अधिकारों के तहत 4 और देशों में कामकाज करने की सुविधा है।

कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank)

₹500 के टारगेट प्राइस के साथ, एक्सिस (Axis) का अनुमान है कि मौजूदा स्तरों से इसमें 20% की बढ़त हो सकती है। यह भारत के प्रमुख डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप्स में से एक है, जो अलग-अलग कस्टमर सेगमेंट और इलाकों में कई तरह की सर्विस देता है। यह रिटेल कस्टमर्स (सैलरी पाने वाले और खुद का काम करने वाले दोनों), छोटे बिज़नेस, NRI, संस्थानों और सरकारी संस्थाओं को सर्विस देता है। इसकी सर्विस में सुविधा, इनोवेशन और डिजिटल-फर्स्ट ऑफरिंग पर खास ध्यान दिया जाता है।

नेस्ले इंडिया (Nestle India)

ब्रोकरेज ने इसका टारगेट प्राइस ₹1,765 तय किया है, जो मौजूदा स्तरों से 35% ज़्यादा है। नेस्ले इंडिया कई तरह के फूड और बेवरेज प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है, जिनमें दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स, कॉफी, चाय, नूडल्स, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी और बच्चों के लिए न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स शामिल हैं। भारत में इसके कुछ पॉपुलर ब्रांड्स में मैगी (Maggi), नेस्कैफे (Nescafé), किटकैट (KitKat), मिल्कीबार (MilkyBar) और नेस्ले एवरीडे (Nestle Everyday) शामिल हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Porsche Layoffs: स्पोर्ट्स कार कंपनी में फिर जॉब कट, जा सकती हैं और 4100 नौकरियां

स्पोर्ट्स कार बनाने वाली कंपनी पोर्श (Porsche) में और करीब 4,100 नौकरियां जाने वाली हैं। यह फॉक्सवैगन की बड़े पैमाने पर बदलाव की योजना का हिस्सा है। यह फैसला पोर्श में आ रही दिक्कतों की वजह से मुनाफे में कमी की चेतावनी के बाद लिया गया है। जर्मन बिजनेस अखबार ‘हैंडल्सब्लैट’ की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पोर्श, फॉक्सवैगन का हिस्सा है और फॉक्सवैगन यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर है। यह Audi की भी मालिक है। रिपोर्ट के अनुसार, फॉक्सवैगन के सुपरवाइजरी बोर्ड के हालिया समझौते के दस्तावेजों में ग्रुप के अब तक के सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत पोर्श में लगभग 4,100 कर्मचारियों की कटौती का प्रस्ताव है।

इसका मकसद खर्च और उपलब्ध पैसे के बीच लगभग 80.38 करोड़ डॉलर के अंतर को कम करना है। सरल शब्दों में कंपनी को अपने खर्च कम करने हैं। अखबार का कहना है कि नौकरियों में 4100 नई कटौतियां मौजूदा समझौतों के अलावा होंगी, यानि कि पहले से की गई या की जा रही छंटनी के अलावा। इस साल जुलाई में, पोर्श मैनेजमेंट और लेबर प्रतिनिधियों के बीच पहले से तय 4,000 नौकरियों की कटौती के अलावा 5,000 और लोगों की छंटनी पर सहमति बनी थी।

हाल ही में फॉक्सवैगन ने पूरे साल के लिए अपने मार्जिन टारगेट को कम कर दिया। अब उसे पहले के 4.0-5.5% की रेंज के बजाय ज्यादा से ज्यादा 1% मार्जिन की उम्मीद है।

Volkswagen में और 50000 लोगों की छंटनी को मिल चुकी है मंजूरी

इससे पहले सितंबर की शुरुआत में सामने आया था कि जर्मनी की फॉक्सवैगन में जल्द ही और 50000 नौकरियां जा सकती हैं। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने एक बदलाव योजना ‘फ्यूचर प्लान 2030’ को मंजूरी दी है। इसमें 50,000 और नौकरियां खत्म करना, 2035 तक अपने व्हीकल मॉडल लाइनअप को आधा करना और 2027-2031 के दौरान कैपिटल खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करना जैसी 12 पहलें शामिल हैं। कंपनी ने इसके पीछे ग्लोबल कॉम्पिटीशन, बदलती मांगों और टेक्नोलॉजी में बदलाव का हवाला दिया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फॉक्सवैगन के 89 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान है। इसमें जर्मनी के उन 4 प्लांट के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करना भी शामिल है, जिनके मॉडल अगले दशक में खत्म हो जाएंगे। AFP की एक रिपोर्ट में कहा गया कि फॉक्सवैगन के मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच इस दशक के आखिर तक कुल 1,00,000 नौकरियां कम करने पर सहमति बन गई है। 50,000 नौकरियां कम करने पर सहमति पहले ही बन चुकी थी और प्रक्रिया चल रही है। अब दुनियाभर में लगभग और 50,000 नौकरियां कम करने के प्लान को मंजूरी मिल गई है।

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Volkswagen India 12% जॉब करने वाली है कट

ब्लूमबर्ग की एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि फॉक्सवैगन ग्रुप की भारतीय यूनिट अपने 3 साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। इसके कारण कंपनी की लगभग 12 प्रतिशत वर्कफोर्स कम हो जाएगी। कंपनी भारत में अपने अगले इन्वेस्टमेंट साइकिल से पहले लागत कम करना चाहती है। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब 2027 तक तेजी से छंटनी करने की तैयारी है। इसके तहत कुछ सौ व्हाइट-कॉलर और शॉप-फ्लोर नौकरियां खत्म हो सकती हैं। कहा जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद फॉक्सवैगन के भारत में नेक्स्ट जनरेशन गाड़ियां लॉन्च करने से पहले कामकाज में करोड़ों डॉलर बचाना है।

Trump ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल पर हस्ताक्षर किया, जानिए अब आगे क्या होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस बिल पर हस्ताक्षर कर दिया है, जिसमें रूस से ऑयल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है। हालांकि, इस बिल का असल मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, लेकिन इसका असर भारत और चीन सहित उन पांच देशों पर पड़ेगा जो रूस से ज्यादा ऑयल इंपोर्ट करते हैं।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ का खतरा

इस बिल का नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026 है। पिछले महीने सीनेट ने इस बिल को मंजूरी दे दी थी। हाल में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में भी यह बिल 262-159 से पारित हो गया था। अब ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह बिल प्रभावी हो गया है। यह बिल ट्रंप को उन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप को मिला 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार 

यह ध्यान में रखना जरूरी है कि इस बिल के प्रावधान अपने आप प्रभावी नहीं होंगे। अब ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100 टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। अब उनके ऊपर है कि वह किस तरह इस बिल का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, अमेरिका कई बार रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की बात कह चुका है।

ये देश 100 फीसदी टैरिफ वाले इस बिल के दायरे में नहीं आएंगे 

इंडिया और चीन उन देशों में शामिल हैं, जो रूस से ज्यादा तेल खरीदते हैं। इसलिए इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगने का खतरा मंडरा रहा है। इस बिल में यह गया है कि उन देशों को इस बिल के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिनकी रूस के नेचुरल गैस के एक्सपोर्ट्स में 15 फीसदी से कम हिस्सेदारी है।

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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की रही है टेढ़ी नजर 

रूस और यूक्रेन में 2022 में लड़ाई शुरू हुई थी, जो अब तक चल रही है। लड़ाई शु्रू होने के बाद अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन, इसका रूस पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। हालांकि, प्रतिबंध के बाद रूस ने कम कीमत पर अपना ऑयल बेचने की पेशकश की, जिसका फायदा भारत और चीन उठा रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन के तेल खरीदने से रूस के पास पैसा आ रहा है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ हमलों के लिए कर रहा है।

Nestle Controversies: कभी बेबी फूड, कभी किटकैट, कभी मैगी…नेस्ले के लिए नया नहीं है विवादों में घिरना, लंबा है इतिहास

एफएमसीजी कंपनी नेस्ले (Nestle) एक बार फिर विवादों में है। ताजा मामला इसकी भारतीय यूनिट नेस्ले इंडिया से जुड़ा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पाया है कि शिशु पोषण (Infant Nutrition) के 3 उत्पादों में खाद्य सुरक्षा मानकों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। इसे लेकर FSSAI ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि वह लागू नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है। FSSAI का कहना है कि उसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध NAN एक्सेला प्रो स्टेज 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला की जांच शुरू की है।

नियामक ने NAN एक्सेला प्रो स्टेज-1 में ‘5HMOs’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई है। वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 में ‘व्हे प्रोटीन’ को आसानी से पचने वाला बताने के दावे पर सवाल उठाया है। इसके अलावा नेस्ले इंडिया के एक फॉलो-अप फॉर्मूला का सैंपल लैब टेस्ट में बायोटिन की मात्रा के मामले में स्टैंडर्ड्स के मुताबिक नहीं पाया गया। नेस्ले इंडिया के ये तीनों प्रोडक्ट प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इसलिए FSSAI ने कंपनी के खिलाफ 3 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। हालांकि नेस्ले इंडिया का कहना कि उसके बच्चों के पोषण वाले प्रोडक्ट सभी लागू नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं।

नेस्ले और विवादों का नाता नया नहीं है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी पहले भी कई बार विवादों के साए में रह चुकी है। कभी गलत मार्केटिंग प्रैक्टिसेज, कभी प्रोडक्ट की प्राइस फिक्सिंग तो कभी अनहेल्दी प्रोडक्ट्स को लेकर कंपनी आलोचनाएं झेल चुकी है। आइए डालते हैं एक नजर नेस्ले से जुड़े प्रमुख विवादों पर…

बेबी फॉर्मूला मार्केटिंग विवाद

साल 1977 में अमेरिका में नेस्ले को जबरदस्त बॉयकॉट झेलना पड़ा था। वजह थी नेस्ले के ब्रेस्ट मिल्क सब्सटिट्यूट की एग्रेसिव मार्केटिंग। यह मार्केटिंग कुछ इस तरह की गई कि कंपनी पर मांओं को स्तनपान कराने से हतोत्साहित करने और अपने बेबी फॉर्मूले को मां के दूध से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक यानि हेल्दी बताने का आरोप लग गया। कैंपेनिंग में इस तरह का संकेत दिया गया कि इस फॉर्मूले का इस्तेमाल हेल्थ प्रोफेशनल्स करते हैं। नेस्ले ने मैटरनिटी यूनिट्स में अपने फॉर्मूले के फ्री सैंपल बांटना शुरू किया और सेल्सपर्सन को नर्स के जैसे तैयार करके पेश करने लगी।

हालांकि नेस्ले का बेबी फॉर्मूला, मां के दूध से ज्यादा पौष्टिक है, इस बात का कोई सबूत नहीं था। लेकिन विवाद तो खड़ा हो गया था और 1977 में अमेरिका में नेस्ले का बहिष्कार शुरू हो गया। फिर यह धीरे-धीरे यूरोप में भी फैल गया। बहिष्कार आधिकारिक तौर पर 1984 में बंद हुआ, वह भी तब जब नेस्ले, WHO द्वारा समर्थित इंटरनेशनल मार्केटिंग कोड का पालन करने पर राजी हुई। लेकिन 1989 में बॉयकॉट फिर शुरू हो गया। इसके बाद नेस्ले पर 1990 के दशक में भी पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में इसी तरह की मार्केटिंग प्रैक्टिसेज अपनाने के आरोप लगते रहे।

KitKat: चॉकलेट या वेफर

बात 1998 की है। नेस्ले इंडिया अपनी किटकैट को भारत में वेफर की कैटेगरी में रखना चाहती थी और इसी के हिसाब से 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी भरना चाहती थी। लेकिन टैक्स अथॉरिटीज को यह मंजूर न था। उनका मानना था कि किटकैट एक चॉकलेट है और इसलिए इस पर 20 प्रतिशत ड्यूटी लगनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि नेस्ले इंडिया, किटकैट का विज्ञापन तो चॉकलेट के तौर पर कर रही है, लेकिन ड्यूटी वेफर वाली भरना चाहती है। लेकिन नेस्ले भी कहां कम थी। उसने सफाई दी कि वह किटकैट को चॉकलेट बताकर नहीं बेचती, लोग इसे वेफर और चॉकलेट का कॉम्बिनेशन समझकर खरीदते हैं।

टैक्स अथॉरिटी का कहना था कि किटकैट में 68-70 प्रतिशत चॉकलेट मिल्क है, इसलिए इसे चॉकलेट माना जाना चाहिए। उस वक्त सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट ने नेस्ले इंडिया पर 24 करोड़ रुपये की ड्यूटी लगाई थी। इसमें किटकैट के कथित मिसक्लासिफिकेशन के लिए 100 प्रतिशत अनिवार्य जुर्माना शामिल था। नेस्ले इंडिया को सेंट्रल एक्साइज एक्ट के सेक्शन 11 AB के प्रावधानों के मुताबिक ब्याज भरने का भी निर्देश दिया गया था।

मामला बढ़ते-बढ़ते ‘कस्टम्स, एक्साइज एंड गोल्ड ट्राइब्यूनल, मुंबई’ में पहुंचा- ‘नेस्ले इंडिया वर्सेज कमिश्नर ऑफ सेंट्रल एक्साइज (एड्ज्यूडिकेशन), मुंबई’। ट्राइब्यूनल को तय करना था कि किटकैट में वेफर पर चॉकलेट की कोटिंग है या चॉकलेट के अंदर वेफर। फैसला नेस्ले के पक्ष में आया, किटकैट को वेफर माना गया और इसे 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की कैटेगरी में ही रखा गया।

चॉकलेट प्राइस फिक्सिंग

कनाडा में प्रतिस्पर्धा ब्यूरो ने चॉकलेट की प्राइसिंग के मामले की जांच के लिए 2007 में नेस्ले कनाडा के ऑफिसेज में छापा मारा था। हर्शी कनाडा और मार्स कनाडा के ऑफिस में भी छापे मारे गए थे। आरोप था कि कीमतों को बढ़ाने के लिए नेस्ले के अधिकारियों ने कनाडा में अपने कॉम्पिटीटर्स के साथ मिलीभगत की। कॉम्पिटीटर्स के अधिकारियों ने रेस्टोरेंट, कॉफी की दुकानों और सम्मेलनों में मुलाकात की। यह आरोप भी था कि नेस्ले कनाडा के तत्कालीन सीईओ रॉबर्ट लियोनिडास ने एक बार एक कॉम्पिटीटर को अपनी कंपनी की प्राइसिंग की जानकारी वाला एक लिफाफा दिया था।

2007 में छापेमारी के सार्वजनिक होने के बाद नेस्ले और अन्य कंपनियों के खिलाफ प्राइसिंग के लिए क्लास एक्शन मुकदमे दायर किए गए। नेस्ले ने किसी भी तरह की जिम्मेदारी माने बिना, 90 लाख डॉलर का समझौता किया। इसके बाद भी संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर क्लास एक्शन मुकदमे चले।

मिल्क प्रोडक्ट विवाद

सितंबर 2008 के आखिर में, हांगकांग सरकार को चीन में बने नेस्ले के दूध के एक प्रोडक्ट में मेलामाइन मिला। किडनी खराब होने से 6 बच्चों की मौत हो गई और 860 अन्य बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि नेस्ले ने कहा कि उसके सभी प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और उन्हें मेलामाइन-मिलावटी दूध से नहीं बनाया गया है। अक्टूबर 2008 में ताइवान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि चीन में नेस्ले द्वारा बनाए गए 6 तरह के मिल्क पाउडर में मेलामाइन की थोड़ी मात्रा पाई गई है, और उन्हें बाजार से हटा दिया गया।

जब मैगी पर हुआ बड़ा बवाल, हो गई थी बैन

सितंबर 2026 में सामने आया नया वाकया FSSAI और नेस्ले इंडिया के बीच दूसरा बड़ा रेगुलेटरी विवाद है। इससे पहले 2015 में भारत में नेस्ले की मैगी को लेकर एक बड़ा बवाल हुआ था। लेड की ज्यादा मात्रा और लेबलिंग से जुड़ी चिंताओं के कारण नेस्ले इंडिया अपने इंस्टेंट नूडल्स लिए घिरी थी। मई 2015 में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी रेगुलेटर्स ने रिपोर्ट दी कि मैगी नूडल्स में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) का लेवल बहुत ही हाई है। साथ ही लेड का स्तर, जितनी मात्रा की इजाजत है उससे 17 गुना ज्यादा है। बस फिर क्या था। मैगी के सेहत के लिए हानिकारक होने, खासकर बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक होने को लेकर वाद-विवाद होने लगे। देश में और विदेश में कई जांच हुईं। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि भारत सरकार ने जून 2015 में मैगी नूडल्स को पूरे देश में बैन कर दिया।

हालांकि नेस्ले हमेशा से यही कहती आई है कि उसके नूडल प्रोडक्ट सुरक्षित हैं। भारत में जब बैन लगा तो मैगी को लगभग 320 करोड़ रुपये का स्टॉक रिकॉल करना पड़ा यानि कि बाजार से वापस मंगाना पड़ा। इतना ही नहीं ऐसी भी खबर आई कि उसने एक सीमेंट फैक्ट्री को स्टॉक जलाने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए। मैगी में MSG और लेड, उचित मात्रा से अधिक होने के चलते भारत के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने नेस्ले इंडिया पर 640 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

अगस्त 2015 में यूएस हेल्थ रेगुलेटर एफडीए ने टेस्ट किए, जिनमें सामने आया कि मैगी में लेड की मात्रा खतरनाक स्तर पर नहीं है। 13 अगस्त 2015 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश में मैगी पर लगे बैन को हटा दिया। कोर्ट का कहना था कि बैन लगाते हुए प्रॉपर प्रोसिजर फॉलो नहीं किया गया। इसके अलावा कोर्ट ने भारत में हुए टेस्ट के नतीजों पर भी सवाल खड़े किए, जिसकी वजह थी कि टेस्ट नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की अधिकृत लैब्स में नहीं हुए थे। नवंबर 2015 में मैगी की भारतीय बाजारों में फिर वापसी हो गई।

2021 में जब फूड प्रॉडक्ट्स और ड्रिंक्स अनहेल्दी होने पर घिरी

जून 2021 में नेस्ले के फूड प्रोडक्ट्स पर एक बड़ा खुलासा हुआ। कंपनी के एक इंटर्नल डॉक्युमेंट में माना गया कि उसके 60 प्रतिशत से ज्यादा फूड प्रोडक्ट और ड्रिंक्स अनहेल्दी हैं। कंपनी ने यह भी माना है कि इसके कुछ फूड प्रोडक्ट कभी भी हेल्दी नहीं होंगे, फिर चाहे वह कितना भी सुधार क्यों न कर ले। यह बात सामने आते ही नेस्ले की फिर से आलोचना होने लगी। एक प्रेजेंटेशन में कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम के तहत कंपनी के 37 प्रतिशत प्रोडक्ट्स को ही 3.5 स्टार या इससे ज्यादा की रेटिंग मिली। 3.5 स्टार की रेटिंग ‘रिकग्नाइज्ड डेफिनेशन ऑफ हेल्थ’ मानी जाती है। सामने आया था कि नेस्ले के 60 प्रतिशत फूड प्रोडक्ट इस मानक पर खरे नहीं उतरे।

भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाली पैकेजिंग पर विवाद

जनवरी 2022 में नेस्ले इंडिया को सोशल मीडिया पर ग्राहकों की पुरजोर नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कारण था किटकैट के रैपर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की तस्वीरें। यह नया स्टॉक आते ही विवादों में घिर गया। कंपनी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा। नेस्ले इंडिया की सफाई थी कि उसके इस कदम का उद्देश्य केवल भारत के खूबसूरत और दर्शनीय स्थलों को उकेरना था। किटकैट के डिब्बे पर पट्टचित्र के जरिए ओडिशा की संस्कृति को उकेरा गया था।

लेकिन तगड़ी आलोचना को देखते हुए कंपनी ने अपने कदम पर खेद जताया। कहा कि उसने साल 2021 में ही विवादास्पद पैकेजिंग वाली किटकैट के डिब्बों को बाजार से वापस ले लिया था। बाकी बचा हुआ माल भी जल्द ही बाजार से गायब हो गया। इससे पहले अप्रैल 2021 में नेस्ले इंडिया ने किटकैट चॉकलेट के पैकेट पर मणिपुर के कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान को मेघालय में दिखाए जाने के लिए माफी मांगी थी। राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्ति के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया था।

बेबी फूड में चीनी

अप्रैल 2024 में स्विस NGO ‘पब्लिक आई’ और ‘इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क’ (IBFAN) की एक जांच से पता चला कि कम और मध्यम आय वाले देशों में बेचे जाने वाले नेस्ले के लोकप्रिय बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स और फॉर्मूलाज में यूरोप और अन्य विकसित देशों में बेचे जाने वाले उत्पादों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में जांचे गए सभी सेरेलक बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स में एडेड शुगर थी और मात्रा औसतन प्रति सर्विंग लगभग 3 ग्राम थी। वहीं नेस्ले के यूरोपीय बाजार में बिना चीनी वाले शिशु पोषण उत्पाद उपलब्ध थे। विकासशील देशों में नेस्ले के सबसे ज्यादा बिकने वाले बेबी-फूड ब्रांड्स में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर पाई गई, जबकि स्विट्जरलैंड में इसके प्रोडक्ट शुगर-फ्री थे।

Market Outlook : आज मिलाजुला रहा शेयर बाजार का रुख, जानिए 21 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में मिलाजुला रुख रहा। निफ्टी में 75.80 अंकों की बढ़त हुई, जबकि सेंसेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। मेटल,सीमेंट, मीडिया,रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी से बाज़ार को सहारा मिला,जबकि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों पर दबाव बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,294.96 पर बंद हुआ। जबकि,निफ्टी 50 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत बढ़कर 23,346.40 पर बंद हुआ।

निफ्टी में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज की गई। हालांकि,सप्ताह के दौरान इसमें 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई,जो लगातार छठी वीकली गिरावट है। ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 1.73 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.74 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप 50 में 0.87 प्रतिशत की तेजी आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में रिकवरी का सिलसिला तीसरे सेशन में भी जारी रहा। डेली चार्ट पर एक छोटी पॉजिटिव कैंडल बनी है,जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ छोटी शैडो हैं। बाजार की चाल सुस्त बनी हुई है।

शेट्टी ने बताया कि निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है और इसमें वीकली बेसिस पर 0.22% की गिरावट आई है। उनके मुताबिक,हालांकि शॉर्ट-टर्म में थोड़ी रिकवरी दिख रही है,लेकिन ओवरऑल स्थिति अभी भी कमजोर है।

उन्होंने कहा निफ्टी 23100-23000 के अहम निचले सपोर्ट लेवल से मजबूत रिकवरी करने में नाकाम रहा। अब कोई तेजी आने पर निफ्टी के 23,500-23,600 के लेवल पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। जबकि, गिरावट की स्थिति में 23,100-23,000 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है।

स्टॉक्सकार्ट के डायरेक्टर और CEO प्रणय अग्रवाल ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 25-बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी और 2026 में और सख्ती के संकेतों से यह बात पक्की हो गई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। इससे निकट भविष्य में ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिका में ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर का असर डॉलर एसेट्स में कैपिटल एलोकेशन पर पड़ सकता है, जिससे भारत समेत तमाम उभरते बाजारों में FII का निवेश कुछ हद तक सतर्कता भरा रह सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि विदेशी निवेश की निकासी और ग्लोबल स्तर पर ऊंची यील्ड के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी बीच-बीच में दबाव बन सकता है। उन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील हैं या जिनका वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है। हालांकि,घरेलू मांग में मजबूती,घरेलू संस्थागत निवेशकों की भागीदारी और कंपनियों की अर्निंग को लेकर स्पष्टता से ब्रॉडर मार्केट को कुछ सहारा मिल सकता है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि निफ्टी हाल के निचले स्तरों से रिकवरी की कोशिश को जारी रखते हुए 23,335 के स्तर के पास थोड़ी बढ़त के साथ खुला। हालांकि,बड़ा तकनीकी ढांचा अभी भी कमजोर बना हुआ है। मोमेंटम इंडिकेटर में कोई खास बदलाव नहीं आया है और वे अभी भी खरीदारी में सुस्ती ही दिखा रहे हैं। इंडेक्स को 23,500–23,600 की ओर बढ़ने के लिए लगातार 23,400 के ऊपर टिके रहना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए नीचे की तरफ 23,200 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। उसके बाद 23,100–23,070 का ज़ोन ज़्यादा मज़बूत सपोर्ट के तौर पर काम करेगा। कुल मिलाकर नियर टर्म में बाजार में सतर्कता का रुख बने रहने की उम्मीद है। बाजार के सेंटीमेंट में और सुधार के लिए निफ्टी को 23,400 के ऊपर एक मजबूत चाल की जरूरत है। जबकि, नीचे की तरफ इसके लिए 23,100–23,070 पर सपोर्ट है। यह सपोर्ट टूटने पर बाजार में गिरावट का ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है।

 

Nestle India Share Price : कंपनी के 3 प्रोडक्ट्स पर FSSAI की कानूनी कार्रवाई, शेयर ऊपर से 3% टूटा

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FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। वहीं दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने सभी तरह के घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया है।

FSSAI ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

30 दिन के लिए लाइसेंस सस्पेंड

नई दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd के परिसर में निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां मिलीं। जांच में डिजाइन, ऑपरेशनल कंट्रोल, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने में खामियां पाई गईं।

इसके बाद FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। कंपनी को इस दौरान सभी खाद्य कारोबार रोकने और कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।

SDP Industries के सभी घी पर रोक

दमन की SDP Industries Pvt Ltd के खिलाफ FSSAI ने घी में मिलावट की आशंका के चलते प्रतिबंध आदेश जारी किया है।

जांच में कंपनी के Shraddha, Shree Saras और Gokul ब्रांड के कई घी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में घी के नमूनों में A-sitosterol मिला, जो घी में नहीं होना चाहिए। साथ ही फैटी एसिड की संरचना भी तय मानकों से अलग पाई गई।

FSSAI के मुताबिक इससे वनस्पति या दूसरे बाहरी फैट की मिलावट का संकेत मिला। कंपनी को अपने अधिकृत परिसर से बने, स्टोर किए गए या बेचे जाने वाले सभी घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है।

हाल में कई बड़ी कंपनियों पर भी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब FSSAI ने हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इनमें Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Mondelez India, Ferrero India समेत कई बड़े ब्रांड शामिल हैं।

ये नोटिस भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं।

Amazon, Flipkart और Domino’s भी कार्रवाई की जद में

FSSAI ने बताया कि Amazon और Flipkart को भी कुल 12 नोटिस जारी किए गए हैं। Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।

इसके अलावा KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee समेत 30 से ज्यादा फूड सर्विस कंपनियों को भी नोटिस मिले हैं। नियामक ने Domino’s के पांच लाइसेंस भी सस्पेंड किए हैं। FSSAI का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

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10 जुलाई को BSE, नेस्ले समेत 14 कंपनियों के डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट, एलिजिबिल बनने ​के लिए 9 जुलाई आखिरी मौका

10 जुलाई को 14 कंपनियों के शेयर एक्स-​डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। लिस्ट में नेस्ले, BSE, हिंडाल्को, एक्सिस बैंक, जेके सीमेंट जैसे नाम शामिल हैं। 10 जुलाई से एक दिन पहले मार्केट क्लोजिंग तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज हो जाएंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप इन 14 कंपनियों में से किसी के डिविडेंड का फायदा पाना चाहते हैं लेकिन अभी तक शेयरहोल्डर नहीं हैं तो आज, 9 जुलाई को ट्रेडिंग बंद होने से पहले शेयर खरीद करनी होगी। आइए जानते हैं इन कंपनियों और डिविडेंड की डिटेल…

ZF Commercial Vehicle Control Systems India

कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने वाली है। इस पर 24 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट 22 अगस्त को या उससे पहले किया जाएगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 19 रुपये का फाइनल डिविडेंड बांटा था। शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है। शेयर 2 सप्ताह में 11 प्रतिशत गिरा है।

JSW Cement

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 50 पैसे या 0.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। डिविडेंड पर 31 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट होगा। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। कीमत 6 महीनों में 15 प्रतिशत चढ़ी है।

Nestle India

नेस्ले इंडिया अपने शेयरहोल्डर्स को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 5 रुपये का फाइनल और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देने वाली है। पेमेंट 30 जुलाई को या 30 जुलाई से किया जाएगा। इस तरह शेयरहोल्डर्स को स्पेशल और फाइनल डिविडेंड मिलाकर कुल 7 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड मिलने वाला है। कंपनी इससे पहले वित्त वर्ष 2026 के लिए 7 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। कीमत 3 महीनों में लगभग 20 प्रतिशत उछली है।

Axis Bank

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 1 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा अप्रैल महीने में हुई थी। 31 जुलाई को होने वाली सालाना आम बैठक में फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए भी इतने ही रुपये का फाइनल डिविडेंड बांटा था। शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है।

Computer Age Management Services

CAMS वित्त वर्ष 2026 के लिए 4 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। इससे पहले कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 3.50 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। कीमत 3 महीनों में 9 प्रतिशत मजबूत हुई है।

JK Cement

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। 17 जुलाई को सालाना आम बैठक में इस डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। जेके सीमेंट ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 15 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। एक महीने में कीमत 13 प्रतिशत उछली है।

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Hindalco Industries

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। डिविडेंड पर 23 जुलाई को कंपनी की सालना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए भी इतने ही रुपये का फाइनल डिविडेंड बांटा था। हिंडाल्को के शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है। शेयर एक साल में 42 प्रतिशत चढ़ा है।

Grindwell Norton

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 19 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। 24 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक में डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 17 रुपये का फाइनल डिविडेंड बांटा था। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। कीमत 3 महीनों में 35 प्रतिशत से ज्यादा उछली है।

Apollo Tyres

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 2.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। 29 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक में डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट होगा। इससे पहले अपोलो टायर्स वित्त वर्ष 2026 के लिए 3.50 रुपये का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 5 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। एक महीने में भाव 13 प्रतिशत चढ़ा है।

New India Assurance Company

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 1.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। 27 जुलाई को होने वाली सालाना आम बैठक में डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट होगा। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 1.80 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है। 3 महीनों में भाव 40 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है।

Aegis Vopak Terminals

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 20 पैसे या 0.20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। कंपनी की 7 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक में फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर पेमेंट 4 सितंबर को या उससे पहले कर दिया जाएगा। शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है। एक महीने में भाव 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है।

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Aegis Logistics

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.70 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। कंपनी की 7 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक में फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर पेमेंट 4 सितंबर को या उससे पहले कर दिया जाएगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 6 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है। यह शेयर 3 महीनों में निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है।

Dr Reddys Laboratories

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 8 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। 23 जुलाई को होने वाली सालाना आम बैठक में फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। डॉ. रेड्डीज लैब्स ने वित्त वर्ष 2025 के लिए भी इतने ही रुपये का फाइनल डिविडेंड बांटा था। शेयर में 9 जुलाई को गिरावट है।

BSE Limited

कंपनी वित्त वर्ष 2026 के लिए 10 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। इसकी घोषणा मई महीने में हुई थी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 18 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर में 9 जुलाई को तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: टाइटन से नेस्ले तक… इस हफ्ते 45 कंपनियां देंगी ₹75 तक का डिविडेंड, चेक करें पूरी लिस्ट

Dividend Stocks: अगले हफ्ते यानी 6 से 10 जुलाई के बीच शेयर बाजार में कई कंपनियों के कॉरपोरेट एक्शन पर निवेशकों की नजर रहेगी। कई बड़ी कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड (Ex-Dividend) पर ट्रेड करेंगे। अगर आप डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो एक्स-डेट से पहले शेयर खरीदना होगा। तभी आप कंपनी की ओर से घोषित डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

सिर्फ डिविडेंड ही नहीं, अगले हफ्ते कुछ कंपनियों के शेयर बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट के लिए भी एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगे। ऐसे में यह हफ्ता निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाला है।

6 जुलाई को किन शेयरों पर रहेगा फोकस?

6 जुलाई को चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे। DCM Shriram International अपने निवेशकों को 0.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। DJ Mediaprint & Logistics ने 0.15 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

वहीं, Pilani Investment and Industries Corporation 9 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी। Sundaram Finance ने 24 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

7 जुलाई को इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड

7 जुलाई को पांच कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। Cera Sanitaryware ने 75 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। Dodla Dairy और Sun Pharmaceutical Industries दोनों 5-5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देंगी।

वहीं, JSW Steel ने 7.10 रुपये प्रति शेयर और LKP Securities ने 0.20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

8 जुलाई को किन स्टॉक्स में मिलेगा डिविडेंड?

8 जुलाई को छह कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। इनमें Bliss GVS Pharma 1 रुपये, Hannah Joseph Hospital 2 रुपये, Kesar Terminals & Infrastructure 1.25 रुपये और Morarka Finance 1.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

वहीं, Mphasis ने 62 रुपये प्रति शेयर और United Spirits ने 11 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

9 जुलाई को इन शेयरों पर रहेगी नजर

9 जुलाई को चार कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। Harsha Engineers International 1.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। RPG Life Sciences ने 24 रुपये प्रति शेयर, Sheela Foam ने 1 रुपये प्रति शेयर और Titan Company ने 15 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

10 जुलाई को सबसे ज्यादा कंपनियां

10 जुलाई इस हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन रहेगा। इस दिन 25 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। इनमें Apollo Tyres, Axis Bank, Birlasoft, CAMS, D-Link (India), Dr Reddy’s Laboratories, Geojit Financial, Hindalco, JK Cement, JSW Cement, Mahindra Logistics, Nestle India और Sobha जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों में D-Link (India) ने 20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड और 7.50 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है। Nestle India अपने निवेशकों को 5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देगी।

इसके अलावा Axis Bank 1 रुपये, Hindalco Industries 5 रुपये, JK Cement 20 रुपये, Apollo Tyres 2.50 रुपये और Dr Reddy’s Laboratories 8 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होंगे

अगले हफ्ते चार कंपनियों में बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होने वाला है। Gujarat Inject Kerala का शेयर 8 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा। Goldiam International 10 जुलाई को 1:3 बोनस इश्यू के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगी।

वहीं, Hindusthan Insulators & Industries ने 2:1 बोनस इश्यू का ऐलान किया है। Mangalam Worldwide का शेयर भी 10 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

अगर आप डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो संबंधित कंपनी के शेयर एक्स-डेट से पहले खरीदने होंगे। साथ ही, कंपनी की ओर से तय रिकॉर्ड डेट का भी ध्यान रखना जरूरी है। रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वही डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का लाभ पाने के पात्र होंगे।

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