Byju’s के लेंडर्स सेटलमेंट के लिए तैयार, लेकिन बदले में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में चाहते हैं 30% हिस्सा

एडटेक प्लेटफॉर्म Byju’s के ग्लोबल लेंडर्स (कर्ज देने वाले) फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई वापस लेने को तैयार हैं। लेकिन बदले में कंपनी की हिस्सेदारी वाली आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं। इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि Byju’s के लेंडर्स विवाद को सुलझाने के अंतिम चरण में हैं और संभावना है कि वे ऑफलाइन कोचिंग संस्थान आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी लें।

समझौते के तहत सभी पक्ष एक साथ सभी मामले वापस ले लेंगे। Byju’s ने 2021 में 1 अरब डॉलर की डील में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदा था। लेकिन तब से अब तक इसमें Byju’s की हिस्सेदारी काफी कम हो चुकी है और अब यह माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर है। अब आकाश में मणिपाल हेल्थ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है।

Aakash पूरे भारत में 300 से ज्यादा सेंटर चलाती है, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल परीक्षाओं के लिए तैयारी कराते हैं। इसमें 5,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की फैकल्टी है और इसकी पिछली रिपोर्ट के अनुसार सालाना रेवेन्यू लगभग 25.4 करोड़ डॉलर था। रॉयटर्स के सूत्रों का कहना है कि सेटलमेंट की बातचीत में बायजू रवींद्रन, ग्लास ट्रस्ट, आकाश और मणिपाल हेल्थ शामिल हैं। आकाश की वैल्यू लगभग 2 अरब डॉलर आंकी गई है।

Byju’s: अर्श से यूं आई फर्श पर

Byju’s एक समय 21 से ज्यादा देशों में ऑपरेशनल थी और COVID-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन कोर्सेज के जरिए लोकप्रिय हुई थी। लेकिन 2023 की शुरुआत में हालात बदल गए, जब अमेरिका स्थित लेंडर्स के साथ कंपनी का बड़ा विवाद शुरू हुआ। अमेरिका स्थित ग्लास ट्रस्ट ने बायजू रवींद्रन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और 2024 में Byju’s के भारत में दिवालियापन के लिए आवेदन करने के बाद 1 अरब डॉलर के बकाया की मांग की।

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हालांकि रवींद्रन और Byju’s ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन इस विवाद के चलते Byju’s ढह गई और 2024 में रवींद्रन ने कहा कि कंपनी की वैल्यू शून्य है। कानूनी विवाद Byju’s के दिवालिया होने के बाद से जारी है और भारत, सिंगापुर और अमेरिका की अदालतों में चल रहा है।

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यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और नौकरियों में कटौती के आंकड़े को लाख तक पहुंचा सकती है। कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम कंपनी को ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनाने की तैयारी में हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर मैगजीन को मामले की जानकारी रखने वालों से पता चला है कि इस हफ्ते की शुरुआत में बोर्ड की मीटिंग हुई।

इसमें CEO ने जो प्लान पेश किए, उनमें कर्मचारियों की छंटनी को दोगुना करके 1,00,000 तक करने की बात शामिल है। कंपनी में अभी लगभग 6,57,000 लोग काम करते हैं। फॉक्सवैगन AG, Porsche और Audi की भी मालिक है। ब्लूम की नई रीस्ट्रक्चरिंग योजना को चर्चा के लिए अगले महीने सुपरवाइजरी बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।

जर्मनी की 4 फैक्ट्रियां हो सकती हैं बंद

मैनेजर मैगजीन के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लूम कंपोनेंट प्लांट्स और सबसे अहम, फॉक्सवैगन ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं। यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे की समस्या से जूझ रहा है। ब्लूम Volkswagen को छोटा और ज्यादा कुशल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह है कि कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोरी और यूरोप में BYD Co. और Stellantis NV जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बढ़ते कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है।

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28,000 कर्मचारी Volkswagen छोड़ने के लिए राजी

लगभग 28,000 कर्मचारी फॉक्सवैगन छोड़ने के लिए सहमत हो गए हैं। यह 2030 तक पूरे ग्रुप में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले से घोषित योजना का हिस्सा है। लेबर लीडर्स ने फॉक्सवैगन की नई योजनाओं का विरोध किया है। फॉक्सवैगन में नौकरियों में कटौती करना मुश्किल है। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, और जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के पास 2 और सीटें हैं। यह राज्य अक्सर कर्मचारी यूनियनों का साथ देता है।