Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

Byju’s के लेंडर्स सेटलमेंट के लिए तैयार, लेकिन बदले में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में चाहते हैं 30% हिस्सा

उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

Byju’s के लेंडर्स सेटलमेंट के लिए तैयार, लेकिन बदले में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में चाहते हैं 30% हिस्सा

एडटेक प्लेटफॉर्म Byju’s के ग्लोबल लेंडर्स (कर्ज देने वाले) फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई वापस लेने को तैयार हैं। लेकिन बदले में कंपनी की हिस्सेदारी वाली आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं। इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि Byju’s के लेंडर्स विवाद को सुलझाने के अंतिम चरण में हैं और संभावना है कि वे ऑफलाइन कोचिंग संस्थान आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी लें।

समझौते के तहत सभी पक्ष एक साथ सभी मामले वापस ले लेंगे। Byju’s ने 2021 में 1 अरब डॉलर की डील में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदा था। लेकिन तब से अब तक इसमें Byju’s की हिस्सेदारी काफी कम हो चुकी है और अब यह माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर है। अब आकाश में मणिपाल हेल्थ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है।

Aakash पूरे भारत में 300 से ज्यादा सेंटर चलाती है, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल परीक्षाओं के लिए तैयारी कराते हैं। इसमें 5,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की फैकल्टी है और इसकी पिछली रिपोर्ट के अनुसार सालाना रेवेन्यू लगभग 25.4 करोड़ डॉलर था। रॉयटर्स के सूत्रों का कहना है कि सेटलमेंट की बातचीत में बायजू रवींद्रन, ग्लास ट्रस्ट, आकाश और मणिपाल हेल्थ शामिल हैं। आकाश की वैल्यू लगभग 2 अरब डॉलर आंकी गई है।

Byju’s: अर्श से यूं आई फर्श पर

Byju’s एक समय 21 से ज्यादा देशों में ऑपरेशनल थी और COVID-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन कोर्सेज के जरिए लोकप्रिय हुई थी। लेकिन 2023 की शुरुआत में हालात बदल गए, जब अमेरिका स्थित लेंडर्स के साथ कंपनी का बड़ा विवाद शुरू हुआ। अमेरिका स्थित ग्लास ट्रस्ट ने बायजू रवींद्रन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और 2024 में Byju’s के भारत में दिवालियापन के लिए आवेदन करने के बाद 1 अरब डॉलर के बकाया की मांग की।

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हालांकि रवींद्रन और Byju’s ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन इस विवाद के चलते Byju’s ढह गई और 2024 में रवींद्रन ने कहा कि कंपनी की वैल्यू शून्य है। कानूनी विवाद Byju’s के दिवालिया होने के बाद से जारी है और भारत, सिंगापुर और अमेरिका की अदालतों में चल रहा है।