महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

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FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

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Tukaram Mundhe: ‘सिर्फ टी-शर्ट पहनना काफी नहीं’, प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ वाली टी-शर्ट पर FDA चीफ ने किया रिएक्ट

Tukaram Mundhe: हाल ही में प्रीति जिंटा ने महाराष्ट्र के फूड-सेफ्टी अभियान की तारीफ करते हुए “टीम तुकाराम मुंढे” लिखी टी-शर्ट पहनी थी। अब FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद प्रीति जिंटा के समर्थन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने प्रीति से बात की है और न ही वे उनसे मिले हैं, लेकिन वे आभारी हैं कि उन्होंने उनका जिक्र किया।

PTI से बात करते हुए अपने काम के लिए प्रीति जिंटा के समर्थन को स्वीकार करते हुए मुंढे ने कहा- “मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है और न ही हमारी फोन पर कोई बातचीत हुई है। लेकिन मैं आभारी हूं कि उन्होंने ‘टीम तुकाराम मुंढे’ का जिक्र किया।”उन्होंने आगे कहा- “मुझे लगता है कि समाज के हर स्तर और हर क्षेत्र में अच्छे इरादों वाले लोग मौजूद हैं। इन अच्छे कामों के लिए एक टीम बनाई जानी चाहिए। अच्छे विचारों, सोच और कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

हालांकि वे प्रीति के इस कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “सिर्फ ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखी टी-शर्ट पहनना ही काफी नहीं है। केवल नाम दिखाने से काम नहीं चलेगा। असल काम करना होगा और सही सोच अपनानी होगी।”

‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट

इस महीने की शुरुआत में प्रीति ने नीली जींस और सफेद स्पोर्ट्स शूज के साथ ‘टीम मुंढे’ टी-शर्ट पहनी थी। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और अपने बाल खुले रखे थे। उनका मेकअप मिनिमल था। लेकिन सादगी भरी स्टाइलिंग के बावजूद उनकी टी-शर्ट पर लिखा संदेश सबसे अलग और आकर्षक था।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंढे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि सभी संस्थान सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्तरां और खाने-पीने के अन्य व्यवसायों के निरीक्षण के बाद मुंढे मुंबई में फ़ूड-सेफ्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

Tukaram Mundhe: तुकाराम मुंढे का एक और बड़ा एक्शन! 2,841% वाले मुनाफे पर इस रिपोर्ट से हंगामा

Tukaram Mundhe Action: अपनी कड़क कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बार फिर जबर्दस्त चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल डिवाइस कंपनियों पर चाबुक चलाई है।

महाराष्ट्र एफडीए के एक चौकाने वाले सर्वे में सामने आया है कि अस्पताल जो सर्जिकल सामान (IV सेट्स, सिरिंज, कैथेटर) कौड़ियों के भाव खरीदते हैं, उन पर मरीजों से 2,841% (28 गुना से भी ज्यादा) तक का भारी-भरकम मुनाफा वसूला जा रहा है। तुकाराम मुंढे ने इस ‘अस्पताल लूट’ का कच्चा चिट्ठा केंद्र सरकार के पाले में फेंकते हुए सख्त नियम बनाने की मांग की है।

FDA के सर्वे में आए होश उड़ाने वाले आंकड़े

महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे ‘सर्जिकल आइटम्स की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर’ की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे हर किसी को हैरान कर रहे हैं। IV इंफ्यूजन सेट जिससे सलाइन चढ़ाया जाता है उसे प्राइवेट अस्पताल कंपनियों से महज ₹11.05 में खरीदते हैं, लेकिन मरीज के बिल में एमआरपी चिपकाकर ₹325 वसूले जाते हैं। वैसे ही कैथेटर अस्पतालों को मात्र ₹29.41 में मिलता है, लेकिन मरीज से इसकी कीमत ₹310 ली जाती है।

सिरिंज, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और कैथेटर जैसे रोजमर्रा के मेडिकल सामानों पर खरीद मूल्य और एमआरपी के बीच 2841% तक का विशाल अंतर पाया गया।

तुकाराम मुंढे ने इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) को चिट्ठी लिखकर ट्रेड मार्जिन पर कैपिंग लगाने की मांग की है।

मुंढे ने डे दी सख्त चेतावनी

तुकाराम मुंढे अपने सख्त और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इस मामले पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ कहा, ‘यह केवल कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह मरीज के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा है। अस्पताल में भर्ती लाचार मरीज के पास यह जांचने का कोई जरिया या जानकारी नहीं होती कि उससे जो सामान का दाम वसूला जा रहा है, वह जायज है या नहीं।’

वैसे इस बड़े खुलासे के बाद केंद्र सरकार का प्राइजिंग रेगुलेटर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(NPPA) हरकत में आ गया है। एनपीपीए अधिकारियों के अनुसार, वे कंपनियों की फाइलिंग्स और अंदरूनी रेट लिस्ट का मिलान महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे से कर रहे हैं।

केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल

अधिकारियों ने भी अस्पतालों द्वारा सर्जिकल सामानों पर वसूले जा रहे इस मोटे मार्जिन की शिकायत केंद्र से की है।

नियम क्या कहते हैं और अस्पताल क्या दे रहे सफाई?

ड्रग्स प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत एनपीपीए कुछ जरूरी दवाओं और डिवाइसेस (जैसे- कोरोनरी स्टेंट या नी इम्प्लांट) की अधिकतम कीमत तय करता है। लेकिन गैर-सूचीबद्ध डिवाइसेस पर केवल इतना नियम है कि कोई कंपनी 12 महीने में 10% से ज्यादा एमआरपी नहीं बढ़ा सकती। इसी ढील का फायदा उठाकर कंपनियां शुरू से ही एमआरपी कई गुना बढ़ाकर प्रिंट करती हैं।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, नियमों में पारदर्शिता जरूर होनी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि अस्पतालों को अपना ढांचा, तकनीक और मरीज की सुरक्षा बनाए रखने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत रहना जरूरी है।

एक्शन मोड में ‘सिंघम’ अधिकारी

आईएएस तुकाराम मुंढे अपने पूरे करियर में सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए जाने जाते हैं। इस साल की शुरुआत में ही मुंबई के फूड सेक्टर में चले उनके सख्त चेकिंग अभियान के बाद स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने पर कई बड़े ईटिंग जॉइंट्स और रेस्टोरेंट्स पर ताले लटक गए थे। अब मेडिकल सेक्टर में उनकी इस एंट्री से अस्पतालों और डिवाइस निर्माताओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

अस्पतालों में मिलने वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स पर मार्जिन की कोई सीमा न होना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी कमियों में से एक है। जब तक केंद्र सरकार एनपीपीए के जरिए इन मेडिकल डिवाइसेस पर ट्रेड मार्जिन रशनलाइजेशन लागू नहीं करती, तब तक आम जनता को एमआरपी के नाम पर होने वाली इस लीगल लूट से राहत मिलना मुश्किल है।

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महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के एक अधिकारी हैं, जिनका नाम आजकल पूरे देश की मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। ये महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे हैं। खबरों में इन्हें ‘आईएएस सिंघम’ और ‘एफडीए का टीएन शेषन’ आदि नामों से संबोधित किया जा रहा है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर के तौर पर कार्यरत हैं। राज्य में फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर इनकी कड़ी कार्रवाई ने हर अमले के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। मुंढे ने तय नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी प्रतिष्ठानों के खिलाफ इंस्पेक्शन और कार्रवाई का आदेश दिया है।

मुंढे के पद से ज्यादा उनके तौर तरीके लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निडर और बेबाक अधिकारी अगर अपनी पहुंच और अधिकारों का इस्तेमाल सही तरीके से करने लगता है, तो वह बड़ी से बड़ी तस्वीर को भी आसानी से बदल सकता है। मुंढे ने सिविल सर्विस में दो दशक से ज्यादा समय बिताया है, इस दौरान उन्होंने कड़े प्रशासनिक फैसले लिए और कहा जाता है कि 20 साल की सेवा में उनका लगभग 25 बार ट्रांसफर हुआ है।

कौन हैं आईएएस ऑफिसर तुकाराम मुंढे?

3 जून, 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में जन्मे तुकाराम मुंढे ने अपनी पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से शुरू की। एक गांव के स्कूल से भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर रैंक तक के उनके सफर ने उनके करियर को खास बना दिया है। बीड में अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद, मुंढे उच्च शिक्षा के लिए औरंगाबाद चले गए। उन्होंने हिस्ट्री में बैचलर डिग्री पूरी की और बाद में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का सफर आखिरकार उन्हें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक ले गया, जिसे उन्होंने 2004 में 20 की शानदार ऑल इंडिया रैंक के साथ पास किया।

2005 बैच के आईएएस अधिकारी मुंढे

मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के ऑफिसर के तौर पर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हुए। 2011 में, मुंढे ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से क्राइसिस, इमरजेंसी और डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में कई मुश्किल प्रशासनिक काम संभाले हैं, जिससे उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी है जो लंबी सोच-विचार के बजाय एक्शन लेना पसंद करते हैं।

तुकाराम मुंढे अब खबरों में क्यों हैं?

मई 2026 में मुंढे को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का कमिश्नर बनाया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोस्टिंग उनके 21 साल से ज्यादा के करियर में उनका 25वां ट्रांसफर था। चार्ज संभालने के बाद से, उन्होंने फूड सेफ्टी नियमों के पालन की जांच के लिए रेस्टोरेंट, फूड आउटलेट, वेयरहाउस और दूसरी जगहों का इंस्पेक्शन बढ़ा दिया है। यह कैंपेन तेजी से बढ़ रहे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले बिजनेस तक भी बढ़ा है। एफडीए की तीखी कार्रवाई की वजह से खाद्य सुरक्षा आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

पानी बचाने से लेकर फूड सेफ्टी तक

मुंढे की सख्त प्रशासक की इमेज उनके मौजूदा एफडीए कार्यकाल से पहले की है। सोलापुर कलेक्टर के तौर पर अपने समय के दौरान, वे पानी बचाने की कोशिशों और गांवों की पानी के टैंकरों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों से जुड़े। काम करने के उनके तौर-तरीकों और समस्या के पूरे समाधान पर फोकस ने उन्हें महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी से बाहर पहचान दिलाई। उनके करियर में उन्हें बार-बार ऐसे पद मिले हैं जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा और विवाद भी। औचक निरीक्षण, एनफोर्समेंट ड्राइव और ग्राउंड पर साफ मौजूदगी ने उनकी इमेज को एक ऐसे ऑफिसर के तौर पर बनाया है जो मुश्किल फैसले लेने से पीछे नहीं हटते।

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Blinkit के आइसक्रीम फ्रीजर में चूहा दिखने का दावा, FDA के एक्शन के बीच वायरल हुआ हैरान करने वाला वीडियो!

Blinkit ice cream: क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की फूड सेफ्टी और हाइजीन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित कल्याण के गोदरेज हिल इलाके में मौजूद ब्लिंकिट के एक आउटलेट में कथित तौर पर आइसक्रीम फ्रीजर के अंदर एक चूहा घूमता हुआ देखा गया। न्यूज एजेंसी ANI और एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, आइसक्रीम खरीदने दुकान पर गए युवाओं के एक समूह ने पैकेज्ड फूड आइटम्स के पास चूहे को देखा और अपने फोन में इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।

यह वीडियो वायरल होने के बाद लोकल लोगों में फूड सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ गई है और महाराष्ट्र एफडीए से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह घटना ऑनलाइन फूड स्टोरेज, बिक्री और डिलीवरी की जांच के लिए एफडीए द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के ठीक बाद सामने आई है।

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आपको बता दें कि 13 अगस्त को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पूरे राज्य में इस तरह के 86 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया था। पीटीआई के मुताबिक इस जांच अभियान के दौरान ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफार्म्स में फूड सेफ्टी और हाइजीन से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गईं।

एफडीए ने कुल 14 खाद्य व्यवसाय लाइसेंस निलंबित कर दिए। इनमें 5 लाइसेंस ब्लिंकिट के, 5 जेप्टो के, 2 इंस्टामार्ट के और 1-1 लाइसेंस भगवती स्टोर्स और स्विंस्टा एंट प्राइवेट लिमिटेड का था। विभाग ने अलग अलग आउटलेट्स को 60 इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए। एक फैसिलिटी को अस्थायी रूप से अपना कामकाज बंद करने का निर्देश दिया गया। हालांकि इस दौरान किसी भी प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है।

जांच के दौरान एफडीए को मिलीं ये गंभीर कमियां

एफडीए अधिकारियों ने आउटलेट्स में स्टोरेज, टेंप्रेचर कंट्रोल, सफाई, पेस्ट कंट्रोल, कर्मचारियों की स्वच्छता, एफआईएफओ/एफईएफओप्रथाओं, सुरक्षा रिकॉर्ड और लाइसेंस प्रदर्शन जैसे मापदंडों की जांच की। मालाड (पश्चिम) मुंबई ब्लिंकिट आउटलेट में चिलर का तापमान 6°C दर्ज किया गया। ये निर्धारित स्तर से अधिक था। लगभग 40 कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण नहीं हुआ था और उनके रिकॉर्ड भी गायब थे। कर्मचारी बिना हेडगियर, एप्रन और ग्लव्स के काम कर रहे थे। शाकाहारी, मांसाहारी, पके हुए और डेयरी उत्पादों को सही तरीके से अलग नहीं रखा गया था।

घाटकोपर ब्लिंकिट आउटलेट में ड्रेनेज और वेस्ट मैनेजनेंट के उपाय ठीक नहीं थे। टेंप्रेचर कंट्रोल सिस्टम में खामिया मिलीं। स्टोरेज में खुली लाइटिंग थी और सफाई बेहद खराब थी। इस फैसिलिटी को 74 में से केवल 34 अंक (46%) मिले और इसे नॉन-कंप्लाइंट श्रेणी में रखा गया। पुणे लोहेगांव जेप्टो आउटलेट में यूज बाय डेट पार कर चुके एक्सपायर्ड उत्पाद पाए गए।

इसके साथ ही पेस्ट कंट्रोल और वर्कर हाइजीन में भी खामियां मिलीं। पुणे स्विंस्टा एंट आउटलेट में कॉकरोच पाए गए। साथ ही कोल्ड-चैन मेंटेनेंस और टेम्परेचर कंट्रोल की गंभीर कमियां थीं। मुंबई के अंधेरी में इंस्टामार्ट फैसिलिटी के फर्श पर ही पैकेट रखे हुए पाए गए। तंग स्टोरेज, कम जगह में सामान की ठूंस-ठूंस कर पैकिंग, रोशनी और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी कई कमियां दर्ज की गईं।

डिलीवरी ऑपरेशन्स की भी हुई जांच, Satara में राइडर्स पर एक्शन

निरीक्षण के दौरान डिलीवरी ऑपरेशन्स को भी जांच के दायरे में लिया गया। सतारा जिले के कराड में स्थित एक ब्लिंकिट स्टोर पर 125 टू-व्हीलर डिलीवरी राइडर्स की जांच की गई। जांच में कोई भी राइडर पहचान पत्र या मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ नहीं पाया गया। इसके अलावा डिलीवरी कार्ट, बैग या बॉक्स पर मुख्य खाद्य व्यवसाय का एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस गायब था। इसके बाद कंपनी को निर्देश दिया गया कि जब तक सभी कमियों को दूर नहीं कर लिया जाता, तब तक वे दोपहिया वाहनों से डिलीवरी ऑपरेशन्स पूरी तरह बंद रखें।

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FDA ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत की गई है। नियामक ने सभी ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स को निर्धारित सुरक्षा, स्वच्छता और भंडारण नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।

Vimal Elaichi विज्ञापन पर फंसे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ! महाराष्ट्र FDA ने भेजा नोटिस

Maharashtra FDA Action: बॉलीवुड के तीन बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ विमल इलायची विज्ञापन को लेकर मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने तीनों अभिनेताओं को Vimal Elaichi के विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर ‘शो-कॉज नोटिस’ यानी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA को आशंका है कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद Vimal Pan Masala के अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार से जुड़ा हो सकता है।

FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भागीदारी और Vimal ब्रांड को जिस तरीके से पेश किया गया है, उसके बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। बताए गए कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों के तहत गुमराह करने वाले विज्ञापनों के लिए 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। सात ही एंडोर्स करने वालों पर तीन साल तक किसी भी प्रोडक्ट को एंडोर्स करने पर रोक लगाई जा सकती है।

साथ 2022 में एक्टर अक्षय कुमार ने शाहरुख खान और अजय देवगन के साथ विमल इलायची के विज्ञापन में दिखने के बाद आलोचना का सामना करने पर फैंस से माफी मांगी थी। उनकी यह सार्वजनिक माफी तब आई जब सोशल मीडिया यूज़र्स ने कहा कि इस ad को एक्टर द्वारा तंबाकू प्रोडक्ट को प्रमोट करने के तौर पर देखा जा सकता है।

शाहरुख, अजय और टाइगर को कहां भेजा गया नोटिस?

FDA ने एक्टर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विज्ञापन के जरिए राज्य में बैन प्रोडक्ट ‘पान मसाला’ को इनडायरेक्ट रूप से प्रमोट करने के लिए नोटिस जारी किया है। ये तीनों एक्टर्स 2024 में पान मसाला कंपनी ‘विमल’ की इलायची को प्रमोट करने वाले एक विज्ञापन के लिए साथ आए थे। महाराष्ट्र के फूड सेफ्टी चीफ तुकाराम मुंडे की ओर से 11 अगस्त को जारी शो-कॉज नोटिस में एक्टर्स को तुरंत कैंपेन से हटने और ऐड से जुड़े सभी प्रमोशनल कंटेंट को अपने आखिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटाने का निर्देश दिया गया।

NDTV के मुताबिक, मुंडे ने 9 पेज के नोटिस में कहा है, “विज्ञापन की जांच करने पर पहली नजर में ऐसा लगता है कि यह ad ‘विमल’ ब्रांड को प्रमोट करता है, जो मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ा है। पान मसाला महाराष्ट्र राज्य में बनाने, स्टोर करने, ट्रांसपोर्ट करने, डिस्ट्रीब्यूट करने और बेचने पर बैन है।” उन्होंने कहा कि विज्ञापन में ‘विमल इलायची’ शब्द का इस्तेमाल इस तरह किया गया है। इससे विमल पान मसाला ब्रांड के साथ जुड़ाव बनता हुआ दिखता है।

‘कंज्यूमर्स गुमराह हो सकते हैं’

इस नोटिस में कहा गया है कि इससे कंज्यूमर्स गुमराह हो सकते हैं। बैन प्रोडक्ट की ब्रांड पहचान को इनडायरेक्ट रूप से बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, इसमें राज्य-व्यापी बैन ऑर्डर का भी जिक्र किया गया है, जो पब्लिक हेल्थ और सेफ्टी नियमों का हवाला देते हुए महाराष्ट्र में पान मसाला बनाने, स्टोर करने, डिस्ट्रीब्यूट करने और बेचने पर सख्ती से रोक लगाता है।

उन्होंने आगे कहा, “अगर इलायची या इसी तरह के प्रोडक्ट के नाम से ‘विमल’ ब्रांड का इस्तेमाल पान मसाला/तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स की ब्रांड पहचान और कंज्यूमर्स के आकर्षण को बनाए रखने, मजबूत करने या बढ़ाने के मकसद से किया जाता है, तो ऐसा कम्युनिकेशन सिर्फ एक इंडिपेंडेंट प्रोडक्ट का विज्ञापन नहीं माना जाएगा। बल्कि यह बैन/रिस्ट्रिक्टेड प्रोडक्ट का इनडायरेक्ट या सरोगेट प्रमोशन हो सकता है।”

FDA को किस बात पर है आपत्ति?

ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सवाल उठाया है कि Vimal Elaichi के नाम से किया गया विज्ञापन कहीं प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटीन वाले उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार तो नहीं कर रहा। महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाला पर बैन लागू है। ताजा प्रतिबंध 13 जुलाई से प्रभावी हुआ है। यह एक साल तक लागू रहेगा।

10 लाख रुपये तक लग सकता है जुर्माना

महाराष्ट्र FDA ने इस मामले में ‘Food Safety and Standards Act (FSS Act), 2006’ की धारा 24 और धारा 53 का हवाला दिया है। धारा 24 भ्रामक या धोखा देने वाले खाद्य विज्ञापनों से संबंधित है। वहीं, धारा 53 के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन में शामिल पाए जाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

FDA ने नोटिस में ‘Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018’ का भी उल्लेख किया है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। तीनों एक्टर्स से जवाब मांगा गया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब तथा जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

महाराष्ट्र में FDA का बड़ा एक्शन

अभिनेताओं को नोटिस ऐसे समय पर जारी किए गए हैं जब महाराष्ट्र FDA ने गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के खिलाफ अभियान तेज कर रखा है। FDA के आंकड़ों के मुताबिक, “25 मई से 31 जुलाई के बीच अधिकारियों ने 658 ठिकानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में करीब ₹15.11 करोड़ का प्रतिबंधित स्टॉक जब्त किया गया।” इस दौरान, 519 FIR दर्ज की गईं और 701 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा प्रतिबंधित उत्पादों के कथित परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे 78 वाहन भी जब्त किए गए, जिनमें रखे सामान की कीमत करीब ₹6.6 करोड़ बताई गई।

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पुलिस के साथ मिलकर भी कार्रवाई

FDA का अभियान सिर्फ खाद्य विभाग तक सीमित नहीं है। 12 जून को FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। यहां प्रतिबंधित गुटखा, तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला उत्पादों का कारोबार संगठित नेटवर्क के जरिए किया जा रहा हो। इन मामलों में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA), 1999 के प्रावधानों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने को भी कहा गया था।

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