फिल्म ‘प्रहार’ में ललित प्रभाकर निभा रहे हैं यह अहम किरदार | Lalit Prabhakar

फिल्म ‘प्रहार’ में ललित प्रभाकर निभा रहे हैं यह अहम किरदार | Lalit Prabhakar

एक वक्त था, जब पिता को रेलवे स्टेशन पर सोना पड़ता था और पूरा परिवार एक छोटे-से वन रूम किचन में रहता था!
अभिनेता ललित प्रभाकर की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष, त्याग और एक-दूसरे का साथ है।
‘जुळून येती रेशीमगाठी’ में आदित्य के किरदार से लेकर फिल्म ‘प्रहार’ में अजमल कसाब की चुनौतीपूर्ण भूमिका तक… ललित का यह सफर कई सीख देता है।

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Nana Patekar Death: पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, नम आंखो से दी गई एक्टर को अंतिम विदाई

Nana Patekar Death: 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का निधन गुरुवार 8 अक्टूबर को गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के कारण हो गया। उन्हें सुबह लगभग 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। गोवा से उनका पार्थिव शरीर पुणे शाम को पहुंचा था, जहां फैंस और उनके करीबियों ने उनके अंतिम दर्शन किए। नाना पाटेकर पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी।

एक्टर के अंतिम दर्शन करने के लिए वहां पहुंचने वालों में एक्टर जैकी श्रॉफ, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी तुकाराम मुंडे शामिल थे। कई अन्य नेता और गणमान्य व्यक्ति भी अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए फार्महाउस पहुँचे। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, नगर नियोजन राज्य मंत्री माधुरी मिसल, बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर और भीमराव तापकीर और एमएलसी सदाभाऊ खोत भी अंतिम संस्कार स्थल पर मौजूद थे।

एकनाथ शिंदे भी नाना पाटेकर के पैतृक गांव (पुणे) पहुंचे ताकि अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें और अभिनेता के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर सकें। गुरुवार शाम को गोवा से नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे एयरपोर्ट पहुँचा, जिसके तुरंत बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि दी।

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को पुणे एयरपोर्ट पर दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दिवंगत एक्टर को फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाटेकर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री को नाना पाटेकर की पत्नी और बेटे से बात भी की।

जानकारी के मुताबिक नाना पाटेकर डोना पाउला स्थित अपने घर पर थे, तभी उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उनके घर एक मेडिकल टीम भेजी गई, जहां वे बेहोश पाए गए। इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए मणिपाल अस्पताल ले जाया गया।

मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के अनुसार डॉक्टरों ने 45 मिनट तक उनकी धड़कन वापस लाने की कोशिश की, लेकिन रिससिटेशन (resuscitation) के दौरान एक्टर की धड़कन नहीं लौटी। 45 मिनट तक लगातार CPR देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।”

सुबह करीब 5:20 बजे एक्टर को मृत घोषित कर दिया गया। MLC की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अधिकारियों द्वारा गुरुवार को पोस्टमार्टम किए जाने की उम्मीद है। पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के जाने-माने चेहरों में से एक थे। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत 1978 में ‘गमन’ फिल्म से हुई थी। ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘अंगार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनकी बेहतरीन एक्टिंग ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक खास पहचान दिलाई।

Nana Patekar Controversies: एक्ट्रेस को मारा थप्पड़…तो कभी मीटू के लगे आरोप, इन बड़े विवादों से घिरे रहे नाना पाटेकर

Nana Patekar Controversies: एक एक्टर के तौर पर नाना पाटेकर का अंदाज हमेशा अनप्रेडिक्टेबल रहा। ‘परिंदा’ (1989), ‘प्रहार द फाइनल अटैक’ (1991) और ‘क्रांतिवीर’ (1994) जैसी फिल्मों ने उन्हें एक भरोसेमंद स्टार बना दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने ‘वेलकम’ फ्रैंचाइजी जैसी कॉमेडी फिल्मों का रुख किया और उसमें भी आसानी से ढल गए। नाना, जिन्होंने कभी कहा था कि “मुझे शुरू से ही मौत का डर नहीं रहा”, का गुरुवार सुबह (8 अक्टूबर) को गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। एक्टर का विवादों से भी पुराना नाता रहा है।

एक्ट्रेस मधु को जब जड़ा तमाचा

एक्ट्रेस मधु ने 1997 की फिल्म ‘Yeshwant’ की शूटिंग का जून 2026 में एक किस्सा शेयर किया था। मधु ने बताया कि एक इमोशनल सीन में उन्हें ग्लिसरीन का यूज करना था। लेकिन नाना ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। वे बोले कि उन्हें अपने आप असल में रोना चाहिए। जब वह ऐसा नहीं कर पाईं तो नाना ने सीन को रियल फील देने के लिए उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया था। थप्पड़ इतना तेज था कि आंखों से आंसू निकल आए। इसके बाद मधु ने भी पलटकर नाना को थप्पड़ मार दिया था। एक्ट्रेस ने ये भी कहा था कि नाना के साथ काम करने से उनके अभिनय पर असर पड़ा और उन्होंने मेथड एक्टिंग के बारे में सीखा।

फैन को मारा था थप्पड़

एक और विवाद नवंबर 2023 में सामने आया था। वाराणसी में फिल्म ‘Journey’ की शूटिंग के दौरान करीब 10 सेकेंड का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें नाना एक युवक के सिर पर थप्पड़ मारते नजर आए थे। शुरू में इसे सेल्फी लेने आए फैन को मारने का मामला बताया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल किया गया था। निर्देशक अनिल शर्मा ने फिर मामले पर सफाई दी थी। नाना ने भी वीडियो जारी कर बताया कि सीन की रिहर्सल हो रही थी, जिसमें एक लड़के को उनके पास आना था और उन्हें उसे थप्पड़ लगाना था।

तनुश्री दत्ता ने मीटू के लगाए थे आरोप

नाना का सबसे बड़ा और लंबा विवाद तनुश्री दत्ता के साथ चला। एक्ट्रेस ने दिग्गज एक्टर पर मीटू के आरोप लगाए थे। मामला 2008 की फिल्म ‘Horn Ok Pleassss’ की शूटिंग से जुड़ा था। तनुश्री ने आरोप लगाया कि एक गाने की शूटिंग के दौरान नाना ने उनके साथ गलत हरकत की थी। डांस स्टेप सिखाने के बहाने उन्हें गलत तरीके से छुआ करते थे। उनका कहना था कि गाना पहले उनके सोलो परफॉर्मेंस बताया गया था, लेकिन बाद में नाना को भी इसका हिस्सा बनाया गया।

वहीं नाना ने इन आरोप को गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि सेट पर कई लोग मौजूद थे, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। मामले में जांच के बाद 2019 में मुंबई पुलिस ने बी समरी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। पुलिस को आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं मिले थे, वहीं 13 गवाहों ने नाना द्वारा यौन उत्पीड़न की पुष्टि भी नहीं की थी। फिर मामला अदालत गया, जहां मार्च 2025 में मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत ने तनुश्री की याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में उन्होंने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध दर्ज कराया था।

Nana Patekar Death: रात 2:30 बजे नाना पाटेकर के घर पर क्या हुआ? दोस्त को किया था आखिरी मैसेज, डॉक्टर ने बताई पूरी कहानी

Nana Patekar Death: दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। एक्टर की मौत 8 अक्टूबर की सुबह कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई है। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर है। वहीं नाना पाटेकर ने अपने आखिरी घंटों में क्या-क्या किया इसकी जानकारी डॉक्टर ने दी है। डॉक्टर ने बताया कि, मौत से पहले नाना पाटेकर ने अपने एक दोस्त को सीने में तेज दर्ज होने की जानकारी मैसेज से दी थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर साल्कर ने बताया कि नाना पाटेकर को रात के समय कार्डियक अरेस्ट आया था।

45 मिनट तक दिया गया सीपीआर

डॉक्टर ने ANI को बताया कि नाना पाटेकर को अस्पताल लाए जाने तक उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट से एक घंटे तक उन्हें बचाने और होश में लाने की कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। डॉक्टर ने बताया, “नाना पाटेकर को करीब 4:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उस समय उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद उन्हें करीब 5:30 बजे मृत घोषित किया गया। मेडिकल टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। करीब 45 मिनट से एक घंटे तक कार्डियक मसाज दी गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।”

दोस्त को किया मैसेज

डॉक्टर ने घटना के बारे में आगे बताया, “हमें जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने अपने दोस्त को मैसेज कर बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। रात का समय होने की वजह से उनके दोस्त ने मैसेज नहीं देखा और उन्हें फोन कर दिया। करीब 4 बजे वह उनके घर पहुंचे। उस समय नाना पाटेकर को काफी पसीना आ रहा था और उनकी हालत बिगड़ रही थी। उन्हें उठाया गया और जरूरी मदद देने की कोशिश की गई, लेकिन वह धीरे-धीरे बेहोश होने लगे। इसके बाद उनके केयरटेकर को अस्पताल भेजा गया और वह हमारी एंबुलेंस से उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचा।”

अस्पताल पहुंचने तक हो गई थी मौत

इसके बाद उन्होंने बताया, “उन्हें सुबह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच हमारे अस्पताल लाया गया था। हमने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने तक उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद हमें पुलिस केस दर्ज करना पड़ा, क्योंकि यह मेडिको-लीगल केस (MLC) था। शव को अब पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है। उस समय उनके परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था। उनके साथ उनके दोस्त और एक केयरटेकर थे।”

नाना पाटेकर के बारे में

नाना पाटेकर, जिनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था, ने साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से एक्टिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘सलाम बॉम्बे!’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई। आगे चलकर उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी कई फिल्मों में दमदार अभिनय किया। अपने लंबे करियर में नाना पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और साल 2013 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

Nana Patekar News: ‘लगातार 45 मिनट तक CPR देने के बावजूद हम उन्हें नहीं बचा सके’, नाना पाटेकर की मौत पर आया डॉक्टर का बयान

Nana Patekar News: मशहूर एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा में कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) से निधन हो गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। एक्टर 75 साल के थे।

जानकारी के मुताबिक नाना पाटेकर डोना पाउला स्थित अपने घर पर थे, तभी उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उनके घर एक मेडिकल टीम भेजी गई, जहां वे बेहोश पाए गए। इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए मणिपाल अस्पताल ले जाया गया।

मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के अनुसार डॉक्टरों ने 45 मिनट तक उनकी धड़कन वापस लाने की कोशिश की, लेकिन रिससिटेशन (resuscitation) के दौरान एक्टर की धड़कन नहीं लौटी। 45 मिनट तक लगातार CPR देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।”

सुबह करीब 5:20 बजे एक्टर को मृत घोषित कर दिया गया। MLC की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अधिकारियों द्वारा गुरुवार को पोस्टमार्टम किए जाने की उम्मीद है। पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के जाने-माने चेहरों में से एक थे। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत 1978 में ‘गमन’ फिल्म से हुई थी। ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘अंगार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनकी बेहतरीन एक्टिंग ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक खास पहचान दिलाई।

अपनी उम्र के आखिरी दौर में भी पाटेकर एक्टिंग करते रहे। उनकी हालिया फिल्मों में ‘हाउसफुल 5’ शामिल है, जिसमें अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन और रितेश देशमुख भी हैं। वे विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओ रोमियो’ में पुलिस ऑफिसर के रोल में भी दिखे थे, जिसमें शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके अलावा, उन्होंने अनिल कपूर और राधिका मदान की फिल्म ‘सूबेदार’ में भी एक छोटा सा रोल (कैमियो) किया था।

पाटेकर को भारतीय सिनेमा के सबसे खास और असरदार अभिनेताओं में से एक माना जाता था। उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। उनके निधन की खबर के बाद नील नितिन मुकेश, खुशबू सुंदर और रितेश देशमुख समेत कई फिल्मी हस्तियों ने उनके गुज़र जाने पर दुख जताया।

Nana Patekar Top 10 Movies: ‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक…, शानदार रहा नाना पाटेकर का फिल्मी सफर, देखें 10 बेहतरीन फिल्में

भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने कई शानदार और यादगार किरदार निभाए। नाना पाटेकर ने अपने करियर में ऐसे कई किरदार निभाए, जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं। गंभीर भूमिकाओं से लेकर क्राइम, कॉमेडी और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों तक, उन्होंने हर तरह के किरदार को अपनी खास शैली में पर्दे पर पेश किया और अपनी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं नाना पाटेकर की 10 बेहतरीन फिल्में

जानें भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार की 10 ऐसी बेहतरीन फिल्में। इन फिल्मों में नाना पाटेकर के शानदार करियर को नई पहचान दी और अभिनय की दुनिया में उनकी खास छाप छोड़ी।

1. परिंदा (1989)

विधु विनोद चोपड़ा की इस क्राइम फिल्म में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर अन्ना का किरदार निभाया था। उनके दमदार अभिनय को काफी पसंद किया गया और इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

2. क्रांतिवीर (1994)

इस फिल्म में नाना पाटेकर ने प्रताप नारायण तिलक का किरदार निभाया था। एक परेशान इंसान से अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले व्यक्ति तक का उनका सफर दर्शकों को काफी पसंद आया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

3. नटसम्राट (2016)

मराठी फिल्म नटसम्राट में नाना पाटेकर ने गणपतराव बेलवलकर की भूमिका निभाई। वह एक मशहूर थिएटर कलाकार के किरदार में नजर आए, जिसकी जिंदगी रिटायरमेंट के बाद पूरी तरह बदल जाती है। इस भावुक भूमिका में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई।

4. अब तक छप्पन (2004)

इस फिल्म में नाना पाटेकर ने मुंबई पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु अगाशे का किरदार निभाया। उनका शांत लेकिन दमदार अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आया। फिल्म की कहानी मुंबई पुलिस अधिकारी दया नायक से प्रेरित थी।

5. प्रहार: द फाइनल अटैक (1991)

नाना पाटेकर ने इस फिल्म में मेजर चौहान की भूमिका निभाई थी। खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म में अभिनय करने के साथ इसका निर्देशन और सह-लेखन भी किया था। यह फिल्म उनके करियर की अहम फिल्मों में गिनी जाती है।

6. अग्नि साक्षी (1996)

इस मनोवैज्ञानिक थ्रिलर में नाना पाटेकर ने एक बेहद गंभीर और परेशान करने वाला किरदार निभाया था। उनके अभिनय को काफी सराहा गया और इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

7. वेलकम (2007)

कॉमेडी फिल्म वेलकम में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया। इस फिल्म में उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग का शानदार प्रदर्शन किया। अनिल कपूर के मजनू भाई के साथ उनकी जोड़ी और संवाद आज भी दर्शकों को खूब पसंद आते हैं।

8. अपहरण (2005)

प्रकाश झा की इस राजनीतिक क्राइम फिल्म में नाना पाटेकर ने तबरेज आलम का किरदार निभाया था। उनका किरदार ताकतवर होने के साथ-साथ कई तरह की उलझनों से भरा हुआ था। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

9. राजनीति (2010)

फिल्म राजनीति में नाना पाटेकर ने अनुभवी राजनेता बृज गोपाल की भूमिका निभाई। प्रकाश झा की इस राजनीतिक फिल्म में उनका शांत और गंभीर अभिनय दर्शकों के बीच काफी चर्चा में रहा।

10. सलाम बॉम्बे! (1988)

मीरा नायर की चर्चित फिल्म सलाम बॉम्बे! नाना पाटेकर के शुरुआती महत्वपूर्ण कामों में से एक थी। फिल्म में उन्होंने बाबा का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने एक गंभीर और प्रतिभाशाली अभिनेता के तौर पर उनकी पहचान मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

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Nana Patekar Death: जब बॉलीवुड छोड़ नाना पाटेकर पहुंच गए थे कारगिल बॉर्डर, 60 दिन सेना के साथ रहे; 76 से 56 किलो हो गया था वजन

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर को आपने पर्दे पर पुलिस अफसर, गैंगस्टर, सैनिक और आम आदमी जैसे तमाम किरदारों में देखा होगा। लेकिन उनकी जिंदगी का एक ऐसा अध्याय भी है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर करीब 60 दिनों तक भारतीय सेना के जवानों के साथ रहे थे। नाना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कारगिल युद्ध के दौरान वह सेना के साथ जाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से इजाजत मांगी।

शुरुआत में उन्हें बताया गया कि एक आम नागरिक को इस तरह सेना में शामिल नहीं किया जा सकता। लेकिन नाना ने बताया कि उन्होंने कमांडो ट्रेनिंग की है। वह राष्ट्रीय स्तर पर राइफल शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

फिर सेना के साथ जाने की मिली इजाजत

नाना पाटेकर के मुताबिक, जॉर्ज फर्नांडिस से बातचीत के बाद उन्हें सेना के साथ जाने की अनुमति मिल गई। वह करीब 60 दिन तक सेना के जवानों के साथ रहे और द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर जैसे इलाकों में गए। उन्होंने यह भी बताया कि वह एक Quick Reaction Team (QRT) का हिस्सा बने थे। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने वहां वास्तव में क्या काम किया, तो नाना ने ऑपरेशनल जानकारी बताने से इनकार कर दिया।

76 किलो से 56 किलो रह गया था वजन

कारगिल में बिताए उन करीब दो महीनों का असर नाना के शरीर पर भी पड़ा। उन्होंने बताया था कि जब वह वहां गए थे, तब उनका वजन करीब 76 किलो था। लेकिन लौटने तक यह घटकर 56 किलो रह गया था। यानी करीब 20 किलो वजन कम हो गया था। नाना के लिए यह सिर्फ रोमांच या प्रचार का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा था कि उन्हें खुशी थी कि वह देश के लिए कुछ छोटा-सा योगदान कर सके।

फिल्मों में सैनिक का किरदार निभाने से पहले असल ट्रेनिंग

नाना पाटेकर की सेना से यह दिलचस्प जुड़ाव फिल्म ‘प्रहार’ से भी रहा। फिल्म के लिए उन्होंने करीब तीन साल की सैन्य ट्रेनिंग ली थी। उन्हें मानद तौर पर कैप्टन की रैंक भी दी गई थी। यही वजह है कि पर्दे पर सैनिक या पुलिस अधिकारी के किरदार निभाते समय उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में एक अलग वास्तविकता दिखाई देती थी।

गरीबी में पोस्टर और सड़क की लाइनें भी पेंट कीं

नाना पाटेकर की जिंदगी का एक और पहलू बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। फिल्मों में आने से पहले वह फिल्मों के पोस्टर और सड़क की जेब्रा क्रॉसिंग तक पेंट करने का काम कर चुके थे। एक दौर में वह रोजाना करीब 35 रुपये कमाते थे। उसी में गुजारा करते थे। यही संघर्ष आगे चलकर उनके अभिनय में भी दिखाई दिया। उनकी फिल्मों के किरदारों में आम आदमी का गुस्सा, दर्द और संघर्ष बेहद स्वाभाविक नजर आया।

किसानों के लिए भी उठाया बड़ा कदम

नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ अभिनेता के तौर पर नहीं रही। 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘NAAM Foundation’ की शुरुआत की। इसका फोकस महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित गांवों और संकट से जूझ रहे किसानों की मदद करना है। संस्था पानी, गांवों के विकास और किसानों की आजीविका से जुड़े काम करती है। पर्दे पर जिस अभिनेता ने सैनिकों और आम आदमी के किरदारों में जान फूंकी, असल जिंदगी में भी उनकी कहानी संघर्ष, सेना और किसानों से जुड़ी रही।

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Nana Patekar Death: कौन थे नाना पाटेकर? हिंदी-मराठी सिनेमा से थिएटर तक, जानें कैसा रहा उनका फिल्मी सफर

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आयाा और वह बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। नाना पाटेकर के अचानक निधन से हर कोई हैरान है। न्यूज एंजेंसी एएनआई के मुताबिक, मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि एक्टर ने सुबह करीब 5:20 बजे अंतिम सांस ली। उनकी हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों की टीम ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

नाना पाटेकर के निधन के साथ ही भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने अपने एक दिग्गज अभिनेता को खो दिया। पांच दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से सिनेमा में अलग पहचान बनाई। नाना पाटेकर ने अपने करियर के दौरान हिंदी और मराठी फिल्मों अपनी खास पहचान बनाई है। आइए जानते हैं कौन थे नाना पाटेकर

इन फिल्मों में किया है दमदार एक्टिंग

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से लंबे समय तक दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। उन्होंने परिंदा, प्रहार: द फाइनल अटैक, क्रांतिवीर, अग्नि साक्षी, खामोशी: द म्यूजिकल, अब तक छप्पन और वेलकम जैसी कई चर्चित फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। अभिनय के साथ उन्होंने प्रहार: द फाइनल अटैक के निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली। सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया था।

पद्म श्री से किया गया सम्मानित

नाना पाटेकर को उनके शानदार अभिनय के लिए कई बड़े सम्मान मिले। फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। वहीं, ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2013 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।

बनाई अपनी अलग पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और खासकर गंभीर व दमदार भूमिकाओं के लिए दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों के अलावा थिएटर में भी लगातार काम किया। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में पाटेकर ने अभिनय के साथ निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई और भारतीय मनोरंजन जगत में अपनी खास जगह बनाई।

फॉर्म-6 में हुए अवैध बदलाव, ज्ञानेश कुमार ने किया पद का दुरुपयोग : राहुल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पद का दुरुपयोग कर भारतीय जनता पार्टी की मदद की है।

श्री गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा “अब यह स्पष्ट हो गया है कि श्री ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किया है और यह बदलाव स्पष्ट रूप से भाजपा की मदद के लिए किया गया। यह उनके पद के दुरुपयोग का एक और प्रमाण है। इस मामले की साजिश में शामिल सभी लोगों को ‘वोट चोरी’ के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध बदलाव की बात चुनाव आयोग के अपने आयुक्तों ने भी दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यह भी सामने आना चाहिए कि चुनाव आयोग में किसके आदेश पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से यह बदलाव कराया । श्री गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार और इस मामले में शामिल अन्य सभी लोगों को लोकतंत्र पर किए गए इस कथित आपराधिक प्रहार के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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श्री गांधी ने अपने पोस्ट में 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण भी साझा किया है जिसमें कहा गया था कि एसआईआर की अवधि के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। आयोग ने कहा था कि गैर-एसआईआर अवधि में नियमों के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर कोई एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वह मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े अहम फैसले, मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा लिये जाने के आरोपों पर पहले चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगा।

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Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।

मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।”

नेतन्याहू ने आगे कहा, “आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे… मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।”

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला

कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।

‘अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती’

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।”

नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।

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स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।

यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए ‘अशोक चक्र’ की मांग की है।