Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

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Javed Akhtar: ‘बेनजीर से शादी कर चमकने वाले लोग’, जरदारी का बयान सुन भड़के जावेद अख्तर

Javed Akhtar: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की देश के हिंदू अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणी पर लेखक जावेद अख्तर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में पाकिस्तानी नेता पर “संवेदनहीन” होने का आरोप लगाया।

यह मामला तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान आसिफ अली जरदारी के भाषण का एक वीडियो सामने आया। देश की हिंदू आबादी के बारे में बात करते हुए, आसिफ अली जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान और वहां की मुस्लिम बहुल आबादी 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को “बर्दाश्त” करती है।

वीडियो में आसिफ अली जरदारी ने “अखंड भारत” पर भारत के रुख का जिक्र करते हुए कहा, “भारतीयों का नजरिया अलग है। उनके मन में अपना एजेंडा है। वे अखंड भारत में यकीन रखते हैं। लेकिन इसके बीच बहुत सी ऐसी बातें हैं, जिन्हें वे भूल गए हैं।”

उन्होंने कहा, “हम मुसलमान हैं। वे नहीं हैं। लेकिन हमारी सोच ऐसी है कि हम पाकिस्तान में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं।” आसिफ अली जरदारी ने आगे दावा किया कि पाकिस्तान में हिंदू “उतने ही आजाद और अच्छी स्थिति में हैं, जितने वे कहीं और हो सकते थे” और कहा कि वे “उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे।”

इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, जावेद अख्तर ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की “मिस्टर 10 परसेंट” वाली छवि पर तंज कसा। यह उपनाम उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। जावेद अख्तर ने X पर लिखा, “पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी – जो बेनजीर भुट्टो से शादी के बाद चर्चा में आए थे – कहते हैं कि वे अपने देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं। मिस्टर जरदारी, मैं समझता हूं कि आप हमेशा से ही उन सभी के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनकी आबादी 10 प्रतिशत से कम है।”

यह इशारा “मिस्टर 10 परसेंट” वाले उपनाम की ओर था, जो लंबे समय से आसिफ अली जरदारी के साथ जुड़ा हुआ है। यह नाम उन पर सरकारी ठेकों से कमीशन लेने के आरोपों के कारण पड़ा था। यह पहली बार नहीं है, जब जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की नीतियों और भारत के प्रति उसके रवैये पर खुलकर बात की है।

पिछले साल मई में, मुंबई में एक किताब के लॉन्च के दौरान, उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की थी और कहा था कि भारत ने रिश्ते सुधारने की कोशिशें की हैं, जिसमें पाकिस्तानी कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रास्ते खोलना भी शामिल है। आसिफ अली जरदारी अभी पाकिस्तान के राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 10 मार्च, 2024 को देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी।

शासन प्रमुख के तौर पर लगातार तिरंगा फहराने का नया रिकॉर्ड बना गये मोदी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से आज तेरहवीं बार झंडा फहराया। इसी के साथ मोदी ने शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया, लगातार 25 बार झंडोत्तोलन करने का। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी पहले ही बारह बार राष्ट्र ध्वज राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में फहरा चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर आज तेरहवीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर वो सिल्वर जुबली का ऐसा रिकॉर्ड बना गये, जो जल्दी टूटने वाला नहीं है।

इससे पहले सबसे अधिक झंडोत्तोलन का रिकॉर्ड राज्य स्तर पर तीन मुख्यमंत्रियों के नाम था, ज्योति बसु, पवन कुमार चामलिंग और नवीन पटनायक ने लगातार चौबीस बार झंडोत्तोलन करने का रिकॉर्ड बनाया था। उन तीनों में सबसे पहले ये कीर्तिमान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर ज्योति बसु ने जून 1977 से लेकर नवंबर 2000 के बीच बनाया था। आगे चलकर सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दिसंबर 1994 से मई 2019 के बीच और ओडीशा के मुख्यमंत्री के तौर पर के नवीन पटनायक ने मार्च 2000 से जून 2024 के बीच इसकी बराबरी की। मोदी इन तीनों से अब आगे निकल गये हैं। न सिर्फ सीएम से लेकर पीएम तक सबसे अधिक समय तक प्रशासनिक प्रमुख बने रहने का, बल्कि सबसे अधिक बार झंडा फहराने का, जो रिकॉर्ड उन्होंने देश के अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर बनाया।

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राष्ट्र ध्वज फहराने के मामले में आज सिल्वर जुबली मनाने वाले मोदी अगले दो महीने के अंदर अपने प्रशासनिक कैरियर की भी सिल्वर जुबली मनाने जा रहे हैं। सात अक्टूबर के दिन उन्हें प्रशासन के शीर्ष पर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे, सात अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात का सीएम बनने वाले मोदी लगातार मिले जनसमर्थन के कारण सीएम से पीएम तक की अपनी प्रशासनिक यात्रा की निरंतरता को बनाए हुए हैं।

मोदी से पहले लगातार शासन के अगुआ बने रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जो सिक्किम के मुख्यमंत्री 24 साल 165 दिन लगातार रहे थे, 12 दिसंबर 1994 से लेकर 26 मई 2019 तक। मोदी चामलिंग का ये रिकॉर्ड पहले ही तोड़ चुके हैं, सिर्फ सीएम के तौर पर कौन कहे, सीएम- पीएम के तौर कुल मिलाकर सबसे लंबे समय तक प्रशासन के शीर्ष पर बने हुए हैं मोदी।

लेकिन अगर स्वतंत्रता दिवस समारोह की ही बात की जाए, तो मोदी ने इसे सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर जन उत्सव में बदल दिया है पिछले 25 वर्षों में। यही नहीं, इसे बड़े संकल्प लेने और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने का भी अवसर बना दिया है मोदी ने। आखिर प्रजातंत्र में जन प्रतिनिधि को अपना हिसाब देने और शासन की दशा- दिशा और बड़े लक्ष्यों को तय करने का स्वतंत्रता दिवस समारोह से बड़ा अवसर क्या हो सकता है।

बहुत कम लोगों को ध्यान में होगा कि सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले मोदी को पहली बार शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का अवसर 15 अगस्त 2002 को मिला था। ये वो समय था, जब मोदी गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे थे। 27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड में 59 कारसेवकों को साजिशन जलाकर मार देने की घटना की वजह से गुजरात के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे और इसे लेकर मोदी पर विपक्ष हमलावर था।

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मोदी ने इसके सामने जनता की अदालत में जाने का फैसला किया था और 19 जुलाई 2002 को गुजरात विधानसभा को भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से करते हुए जल्दी चुनाव कराने की मांग की थी। लेकिन तब के मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंगदोह ने गुजरात में शीघ्र चुनाव कराने से मना कर दिया था।

ऐसे में राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार अगस्त 2002 में झंडोत्तोलन किया था। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम गुजरात की राजधानी गांधीनगर की जगह अहमदाबाद में हुआ था। दरअसल ये किसी नई परंपरा की शुरूआत नहीं थी, बल्कि गुजरात की स्थापना के बाद से ही ये हो रहा था।

एक मई 1960 को अलग राज्य के तौर पर अस्तित्व में आये गुजरात की पहली राजधानी होने का गौरव राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद को ही हासिल हुआ था और इसलिए यहां के पुलिस स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होने लगा, जो 1961-62 के साल में बना था। बाद में गांधीनगर में राजधानी शिफ्ट हो जाने के बावजूद स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद में ही होता रहा, उसी पुलिस स्टेडियम में।

अहमदाबाद के पुलिस स्टेडियम में ही 15 अगस्त 2002 की सुबह जब मोदी ने सीएम के तौर पर पहली बार झंडोत्तोलन किया, तो इस अवसर को गुजरात को लेकर अपने बड़े सपने सामने रखने का अवसर बना दिया। गुरूवार की उस सुबह मोदी ने शिक्षा पर बल देते हुए ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए इंटरनेट के जरिये आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने की बात की। यही नहीं, अपनी नई शिक्षा नीति को सामने रखते हए मदरसों के आधुनिकीकरण के साथ ही सीमावर्ती इलाको के सैनिक स्कूलों को भी उन्नत करने की बात की।

मोदी ने तब राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या भी बढ़ाने की बात की, ताकि गुजराती और हिंदी के साथ ही अंग्रेजी सिखकर भी राज्य के बच्चे राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें, अपनी जगह बना सकें। जिस राज्य की स्थापना के साथ ही गुजराती भाषा के स्कूलों पर जोर था, वहां के लिए ये एक क्रांतिकारी, आधुनिक सोच थी, ‘त्रिभाषा फार्मूले’ को पूरी ईमानदारी के साथ लागू करने की शुरूआत थी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह शिक्षा से आगे बढ़कर सुशासन पर भी जोर दिया। मोदी का कहना था कि गुजरात के दो प्रमुख सपूतों- गांधी और सरदार की अगुआई में आजादी हासिल करने वाले भारत में ‘सुराज’ के बाद ‘सुशासन’ भी उतना ही जरूरी है, और इस मामले में गुजरात को पहल लेनी होगी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह जिस सुशासन का संकल्प लिया था, अगले एक दशक में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर वही उनके शासन का मूल मंत्र रहा, जिसके आधार पर गुजरात मॉडल विकसित हुआ और पूरे देश में उनकी शोहरत हुई। इसी सुशासन के बल पर जनता के हृदय में अपनी जगह बनाकर मई 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

लेकिन देश का प्रधानमंत्री बनने से पहले करीब पौने तेरह साल लंबे अपने सीएम कैरियर में मोदी ने जो दर्जन भर अवसरों पर गुजरात में राष्ट्र ध्वज फहराया, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, मोदी ने उन अवसरों को फटाफट जन उत्सव में बदल दिया।

दिसंबर 2002 में राज्य विधानसभा का चुनाव अपनी अगुआई में जीताने के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह का जो पहला मौका मोदी को मिला, उन्होंने उस मौके को राज्य की जनता के लिए अनूठा बना दिया। गुजरात की स्थापना के बाद पहली बार हुआ, जब स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद की जगह पाटण में मना, जिस पाटण को गुजरात की प्राचीन राजधानी रहने का गौरव भी हासिल रहा है।

पाटण में तब पूरे शहर को सजाया- संवारा गया, भांति- भांति के कार्यक्रम किये गये।

पूरे शहर में लाइटिंग ऐसी, मानो पूरा पाटण दीपावली मना रहा हो। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। न सिर्फ पाटण शहर के लोग, बल्कि राज्य के कई हिस्सो से यहां लोग पहुंचे। सबके लिए ये सुखद आश्चर्य था, किसी ने कल्पना नहीं की थी कि जिले स्तर पर कभी राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह होगा, अमूमन होता तो ये था कि ऐसे कार्यक्रम या तो राज्य की राजधानी में होते थे या फिर सबसे बड़े शहर में। लेकिन मोदी तो लीक से हटकर चलने के आदी रहे हैं, उन्हें कहां रूटीन चीजों में भरोसा।

15 अगस्त 2003 से पाटण में जो सिलसिला शुरु हुआ, वो मोदी के कार्यकाल के दौरान तो रहा ही, उनके राज्य छोड़ने के बाद भी कोविड की महामारी से आए व्यवधान को छोड़ दें, तो ये सिलसिला अब भी जारी है। मोदी जब आज लाल किले से झंडा फहरा रहे थे, उनके गृह राज्य गुजरात में उनकी शुरू की गई परंपरा के तहत ही राज्य स्तरीय 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अहमदाबाद या गांधीनगर की जगह अमरेली में मनाया जा रहा था।

खुद मोदी ने गुजरात में राज्य सरकार के मुखिया के तौर पर जो आखिरी झंडोत्तोलन किया था, वो कच्छ जिले के मुख्यालय भुज में। भुज के लालन कॉलेज से ही 15 अगस्त 2013 के दिन मोदी ने लाल किले की तरफ बढ़ने की हुंकार भरी थी। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल के चारों तरफ भी लालन कॉलेज से लाल किले की तरफ बढ़ते मोदी के ढेरों पोस्टर- बैनर और होर्डिंग्स लगे थे।

हुआ भी वही, अगले साल मोदी लालन कॉलेज की जगह लाल किले से झंडोत्तोलन करते नजर आए। 15 अगस्त 2014 की सुबह जब देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार तिरंगा फहराया, लगे हाथों अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र किया, जिसमें स्वच्छ भारत अभियान की बात की थी, सबके लिए शौचालय की बात थी। तब ज्यादातर लोगों को आश्चर्य हुआ था, एक तो लाल किले से कभी किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की बात नहीं की थी, विपक्ष ने माखौल भी उड़ाया था। लेकिन ये मोदी की प्राथमिकताओं का संकेत था, जिसके केंद्र में देश का आम आदमी रहा है।

वहां से मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है, हर बार लाल किले की प्राचीर से बड़े लक्ष्य का ऐलान करते हुए और उसे पाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ने की योजना और उसका रोड मैप रखते आए हैं वो। बतौर पीएम तेरहवीं बार भी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी आज ऐसा ही करते नजर आए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए शक्ति की सप्तधारा बहाने की बात की, एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों की सामूहिक ताकत के साथ इस सपने को हकीकत में बदलने की बात की।

मोदी खुली आंखों से सपने देखते हैं, ऐसा वो खुद बार- बार कहते हैं, गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी ये बात कहते थे, 2014 से देश के प्रधानमंत्री हैं, तब भी ये बात करते हैं। मोदी का मानना है कि खुली आंखों से देखे हुए सपने पूरे होते हैं, जरूरत होती है इसके लिए तनतोड़ मेहनत की और अहर्निश प्रयासों की। मोदी को इन दोनों चीजों से कभी परहेज नहीं रहा है, तभी बिना रूके, बिना थके, पचीस वर्षों की प्रशासनिक यात्रा को जल्दी ही पूरा करने जा रहे हैं, विकसित भारत की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं, Gen-Z से लेकर नौजवानों, किसानों और महिलाओं को भी इस लक्ष्य को पाने में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

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स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन पर सियासी बवाल मच गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से के बाद भी गायन जारी रखा। इसी दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ओर से गायन रोकने का इशारा किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इसे नहीं रोका। ALSO READ: लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

 

कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष लालजी देसाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए गायन पूरा कराया। कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी की देसाई के साथ बातचीत भी हुई।

 

राहुल-सोनिया ने रूकने का इशारा किया

कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन तय हिस्से से आगे बढ़ने पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का संकेत दिया। हालांकि, लालजी देसाई ने दोनों नेताओं को समझाया कि गायन जारी रखा जाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया। बाद में राहुल गांधी और सोनिया गांधी देसाई से इस मुद्दे पर चर्चा करते नजर आए।

 

भाजपा ने मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया 

भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के शासनकाल में भी ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद सामने आए हैं। पार्टी ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए।

 

सोनिया गांधी गीत नहीं, खरगे के लिए कह रही थीं

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठने के लिए कह रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को गलत तरीके से पेश किया गया घटनाक्रम बताया।

मुक्त व्यापार समझौतों से बने हैं बड़े मौके, MSME उठाएं फायदा: PM मोदी

भारत ने 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को अंतिम रूप दिया है। इससे देश के सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए एक बड़ा अवसर तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे उद्यमों से इन अवसरों का लाभ उठाने और इस मौके को हाथ से न जाने देने की अपील की है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कपड़ा, मशीनरी और दवाओं जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाएं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें वैश्विक मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) पर खरा उतरना होगा।

भारत ने हाल में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, EFTA समूह और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

देश की मैन्युफैक्चरिंग में MSME सेक्टर का हिस्सा लगभग 35.4 प्रतिशत है। वहीं एक्सपोर्ट में लगभग 48.58 प्रतिशत और GDP में 31.1 प्रतिशत का योगदान है। MSME सेक्टर में 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम हैं और यह 32.82 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। यह खेती के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। दुनिया भर में कुल कारोबारों में MSMEs का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत है। ये कुल वैश्विक रोजगार में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देते हैं।

अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ”भारत की वैश्विक साख बढ़ रही है। आज यह विश्व मंच पर एक सम्मानित राष्ट्र बन रहा है। भारत के पास एक स्थिर राजनीतिक जनादेश और सरकार, एक जीवंत लोकतंत्र और एक मजबूत न्याय व्यवस्था है। ये सभी भारतीय संविधान द्वारा निर्देशित हैं। दुनिया हमारी क्षमताओं को पहचान रही है, यही वजह है कि 2014 से हमने लगभग 40 देशों के साथ FTA किया है।”

उन्होंने आगे कहा, ”इन व्यापार समझौतों से तैयार हुए विशाल अवसर को देखिए। मैं अपने MSME क्षेत्र से आग्रह करना चाहता हूं कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हमें वैश्विक मंच तक पहुंचना है। भारतीय उत्पाद, चाहे वे कपड़ा हों, मशीनरी हों या दवाएं, उन्हें वैश्विक बाजारों में जगह बनाने की जरूरत है। हम इस अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें वैश्विक स्तर पर उत्पादों की मौजूदा उपलब्ध गुणवत्ता से बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत की पेशकश करनी चाहिए। पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुप्पुर तक फैले हमारे कपड़ों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।”

कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

घरेलू समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर

पीएम ने यह भी कहा कि इन समझौतों ने घरेलू समुद्री खाद्य (seafood) क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर खोले हैं। केरल से लेकर गुजरात और तमिलनाडु से लेकर बंगाल तक, ये FTA घरेलू झींगा निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”मैं चाहूंगा कि हम इस स्थिति का पूरा फायदा उठाएं।” पीएम ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और ड्रोन प्रणाली जैसी एडवांस्ड क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की भी वकालत की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन की मात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

why rahul gandhi and mallikarjun kharge

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल शामिल नहीं हुए। 2024 में सीट व्यवस्था को लेकर हुए विवाद के बाद से यह मुद्दा फिर चर्चा में है। ALSO READ: युवाओं के लिए पीएम मोदी का बड़ा प्लान, 1 करोड़ को AI ट्रेनिंग, फ्री कोचिंग से लेकर स्पोर्ट्स टैलेंट हंट तक बड़े ऐलान

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को टेबल ऑफ प्रेसीडेंस के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के ठीक बाद सीट दी जानी थी। हालांकि मुख्य कार्यक्रम से राहुल गांधी समेत संपूर्ण विपक्ष ने दूरी बनाई।

 

बैठने की व्यवस्था को लेकर हुआ था विवाद

गौरतलब है कि 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को परंपरा और प्रोटोकॉल से अलग हटकर दूसरी आखिरी पंक्ति में बैठाया गया था। ALSO READ: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

 

विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनता का अपमान करार दिया था, जबकि कार्यक्रम का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी थी कि पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को सम्मानित करने और जगह देने के लिए बैठने के क्रम में बदलाव किया गया था।

 

बहरहाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूरी बनाई और इस बार भी वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 2024 में हुए सीट विवाद को ही इस साल भी कार्यक्रम में न पहुंचने की वजह माना जा रहा है। ALSO READ: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

80th Independence Day: कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, PM मोदी ने किया ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स (प्रतियोगी परीक्षा) की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। ऐसा छात्रों के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए किया जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कोचिंग क्लास से गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ पड़ता है। हम अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराएंगे।”

पीएम ने कहा कि हर माता-पिता को लगता है कि अगर वे अपने बच्चे को कोचिंग क्लास नहीं भेजेंगे तो वे प्रतिष्ठित परिवार नहीं कहलाएंगे। प्रधानमंत्री ने इन परिवारों को भरोसा दिलाया कि वे कोचिंग पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचा सकते हैं, अपने बच्चों के करीब रह सकते हैं और उनकी देखभाल कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “इसलिए, हमने युवाओं के लिए अलग-अलग परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने का फैसला किया है। हमारे पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, हमारे पास बेहतरीन टैलेंट और शिक्षक हैं। इन संसाधनों को एक साथ लाकर, हम देश के युवाओं को मुफ्त कोचिंग देने के लिए एक पूरा नेटवर्क बनाने जा रहे हैं।”

एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हमने तय किया है कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) कौशल की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह भी कहा कि युवाओं की क्षमताओं का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में किया जाएगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे देश में जारी जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। साथ ही जनगणना को त्रुटिरहित (जिसमें कोई गलती न हो) बनाने के लिए अपने परिवार की सही डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करें।

इस वर्ष का समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

80th Independence Day: देश में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू, अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और प्लांट शुरू होने की उम्मीद- PM मोदी

5,000 विशेष अतिथियों ने लिया हिस्सा

लाल किले पर शनिवार को आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथियों ने हिस्सा लिया। इनमें महिला उद्यमी, युवा इनोवेटर्स, किसान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों सहित समाज के कई क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल रहे। समारोह में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पारंपरिक वेशभूषा में सजे 1,500 से अधिक लोग भी उपस्थित रहे।

Independence Day 2026: बड़े सपने देखने’ से लेकर ‘विकसित भारत’ के संकल्प तक, PM मोदी के भाषण की बड़ी बातें

Independence Day 2026: देश आज आजादी के 80वें साल का जश्न मना रहा है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। जैसे ही राष्ट्रीय ध्वज आसमान में लहराया, भारतीय वायुसेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने लाल किले के ऊपर से फूलों की बारिश कर माहौल को और खास बना दिया। ध्वजारोहण के साथ 21 तोपों की सलामी भी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी सरकार के संकल्प को दोहराया। इसके बाद उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और 1947 में देश की आजादी के लिए लड़ने वालों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ के गायन का भी जश्न मनाया।

बता दें कि लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण बजाया गया, जो देश के आधिकारिक राष्ट्रीय समारोहों में एक ऐतिहासिक क्षण था।

प्रधानमंत्री के भाषण की मुख्य बातें देखें

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने नई रफ्तार पकड़ी है और अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प और सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है।
  • लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन मोदी ने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने और ऊंचे संकल्प लेने होंगे।
  • उन्होंने कहा कि बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और दृढ़ संकल्प होने पर कठिनाइयों तथा आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।
  • प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत ने 2047 में, जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, विकसित राष्ट्र बनने का बड़ा सपना देखा है और 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।’’
  • उन्होंने कहा, ‘‘जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है, तो यह दुनिया की नजरों में हमारे साहस का परिचय बन जाता है। दुनिया हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है।’’
  • मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित, पीड़ित, वंचित, आदिवासी, गांव या शहर में रहने वाले, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है।
  • उन्होंने कहा, ‘‘इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतनी कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।’’
  • प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत पहले ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में गिना जाता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
  • मोदी ने कहा कि आजादी के समय देश ने बहुत से सपने देखे थे, लेकिन अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया।
  • उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने रफ्तार पकड़ी है और तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
  • प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है।
  • उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती।’’
  • उन्होंने कहा कि अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक भारत में इसका कोई बड़ा संयंत्र नहीं बन पाया, लेकिन अब देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुके हैं और उनमें उत्पादित सेमीकंडक्टर का निर्यात भी शुरू हो गया है।
  • उन्होंने कहा कि आने वाले सात-आठ वर्षों में कई और सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने वाले हैं और यह विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण मार्ग है।
  • मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महात्मा गांधी समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों और महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ गूंज रहा है और इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह ऐतिहासिक पल है।

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Independence Day: 21 तोपों की सलामी और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज… इस बार लाल किले पर दिखेगा नया अंदाज

Independence Day: अब से कुछ ही घंटों बाद देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2026 को दिल्ली के लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की अगुवाई करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और लगातार 13वीं बार देश को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संबोधित करेंगे। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम ‘विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति’ रखी गई है। इसके साथ ही ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

समारोह में भारत में बनी 105 मिमी हल्की फील्ड गन से स्वदेशी 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इसके बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से फूलों की बारिश भी की जाएगी। प्रधानमंत्री के भाषण का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 22 भारतीय भाषाओं में तुरंत अनुवाद भी किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह का सीधा प्रसारण सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा। इसे डीडी नेशनल के साथ कई डिजिटल मंचों पर भी लाइव देखा जा सकेगा।

स्वतंत्रता दिवस 2026: पहली बार होंगी ये खास बातें

  • लाल किले पर पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’: ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे पहली बार लाइव गाया जाएगा। आजादी के बाद लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों के इतिहास में यह पहली बार होगा।
  • स्वदेशी तोपों से 21 तोपों की सलामी: इस बार 21 तोपों की सलामी में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख उपकरण भारत में बने होंगे। समारोह में स्वदेशी 105 मिमी हल्की फील्ड गन से पारंपरिक 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इसके लिए औपचारिक 1721 फील्ड बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • प्रधानमंत्री की मदद करेंगी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान: ध्वजारोहण के दौरान कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद करेंगी। वह लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री के साथ रहेंगी।
  • हेलिकॉप्टर से होगी फूलों की बारिश: तिरंगा फहराने के तुरंत बाद दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर लाल किले के ऊपर से फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करेंगे।
  • 5,000 विशेष अतिथि होंगे शामिल: स्वतंत्रता दिवस समारोह में करीब 5,000 विशेष अतिथियों के साथ 2,500 राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेट भी शामिल होंगे।
  • 22 भाषाओं में होगा भाषण का लाइव अनुवाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 22 भारतीय भाषाओं में तुरंत अनुवाद किया जाएगा। इसके लिए ‘डिजिटल इंडिया भाषिणी’ ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मकसद प्रधानमंत्री का संदेश देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है।

स्वतंत्रता दिवस 2026: मुख्य विषय

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के इतिहास और भविष्य, दोनों पर खास जोर दिया गया है। समारोह के दो मुख्य विषय रखे गए हैं।

  • ‘वंदे मातरम’ के 150 साल: इस साल राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर इसकी विरासत को खास सम्मान दिया जाएगा। पहली बार प्रधानमंत्री के भाषण के तुरंत बाद लाल किले पर राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट और ‘मेरा भारत’ के स्वयंसेवक मिलकर औपचारिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन करेंगे।
  • 2047 तक विकसित भारत के लिए युवा शक्ति: इस विषय के तहत 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। इसमें खास तौर पर जेन-जी युवाओं और युवा उद्यमियों की प्रतिभा, मेहनत और नए विचारों को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लालकिले और उसके आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा की कई परतें तैयार की हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाए गए हैं।

 

सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आसपास रहने और काम करने वाले 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन भी किया है। किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या व्यवधान को रोकने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

 

 लाल किले के आसपास कड़ी सुरक्षा

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर लाल किले और आसपास के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात की गई है ताकि आसमान से आने वाले किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

 

20 हजार से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन

 

सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि लाल किले के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में रहने या काम करने वाले 20,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किला सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।

 

DTC बसों के रूट में बदलाव

 

दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर DTC बसों और अन्य बसों के संचालन के संबंध में भी एडवाइजरी जारी की है। अधिकारी के मुताबिक, प्रभावित मार्गों पर इस अवधि के दौरान DTC या अन्य बसें सामान्य रूप से संचालित नहीं होंगी। बसों के रूट डायवर्ट किए जाएंगे और उनके टर्मिनेशन पॉइंट रामलीला मैदान और तीस हजारी कोर्ट में निर्धारित किए गए हैं।

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मेहमानों के लिए पार्किंग की व्यवस्था

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले आमंत्रित मेहमानों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थानों को Google Maps पर चिह्नित किया गया है। लोगों से ट्रैफिक और पार्किंग से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट को फॉलो करने की अपील की गई है।

 

सुबह 4 बजे से 11 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन

 

दिल्ली पुलिस के अनुसार, लाल किले के आसपास आम लोगों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन सुबह 4 बजे से 11 बजे तक लागू रहेगा। इसके बाद ट्रैफिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। चांदनी चौक क्षेत्र की कुछ सड़कें प्रतिबंधित समय के दौरान बंद रहेंगी। हालांकि, पुलिस के मुताबिक दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

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भारी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। पुलिस का लक्ष्य समारोह के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चूक और ट्रैफिक व्यवधान को रोकना है।