‘परमाणु धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा भारत…’ राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को फिर चेताया, ऑपरेशन सिंदूर पर कही बड़ी बात

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को News18 DEFCON 2026 में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब परमाणु धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि पाकिस्तानी जमीन से होने वाली किसी भी दुश्मन जैसी कार्रवाई को अब युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा और भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देगा।

राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमने यह साफ कर दिया है कि भारत अब परमाणु हथियारों की धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इसी तरह आतंकवाद और व्यापार भी साथ-साथ नहीं चल सकते।”

सिंह ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना के साथ पाकिस्तान ने “लक्ष्मण रेखा” पार कर दी थी, जिसमें पिछले साल अप्रैल में 26 लोग मारे गए थे।

‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’

उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने यह संदेश भी दिया है कि अब कोई भी सीमा हमें आतंकवादियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने से नहीं रोक पाएगी। उन्होंने कहा, “अब आतंकवादियों और उन्हें मदद देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं किया जाएगा। सिंधु जल संधि को रोककर भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत दूसरे देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन वह किसी को भी अपनी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं करने देगा।

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ी सक्रियता

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग देशों के साथ मिलकर समाधान तलाशने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि आज भारत क्वाड के जरिए एक स्वतंत्र, खुले और नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने I2U2 समूह का भी जिक्र किया, जिसमें भारत, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका शामिल हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस समूह के जरिए भारत ने इजरायल, UAE और अमेरिका के साथ कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है।

उन्होंने आगे कहा कि BIMSTEC, BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय संगठनों में भी भारत की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है। उनके मुताबिक, भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत किया है, सहयोग के लिए नए मंच बनाए हैं और दुनियाभर में अपनी कूटनीतिक पहुंच का विस्तार किया है।

फ्रैजाइल फाइव’ से ‘फैबुलस फाइव’ की श्रेणी में भारत

भारत की 7.8% की आर्थिक वृद्धि दर का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश ‘फ्रैजाइल फाइव’ (कमजोर पांच) से ‘फैबुलस फाइव’ (शानदार पांच) की श्रेणी में आ गया है, जो इसकी बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

यह भी पढ़ें: AI सैनिकों को नहीं करेगा रिप्लेस लेकिन बदल देगा युद्ध का तरीका… लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा ने बताया कैसा होगा फ्यूचर सोल्जर

पाकिस्तान का नया AI ‘वॉर वीडियो’ वायरल, 32 एयरबेस और 8 विमान तबाह करने का दावा, सबूत नदारद

India-Pakistan Conflict: एयर फोर्स डे के मौके पर, पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस ने एक शानदार और ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया, जिसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का एक असाधारण रूप दिखाया गया है।

“फिजाओं के पासबान” नाम के इस वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए, भारत के आठ विमान गिराए और भारत के नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित किया। एनिमेशन में भारतीय संसद और INS विक्रांत समेत भारत के प्रमुख ठिकानों पर हमले भी दिखाए गए हैं।

वीडियो के ग्राफिक्स से इस फैंटेसी (काल्पनिक कहानी) का दायरा काफी साफ हो जाता है। एक ग्राफिक में दावा किया गया है कि “IAF के 32 बेस पर हमला हुआ”, जबकि दूसरे में दावा है कि चार राफेल, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक मिराज-2000 और एक हेरॉन UAV नष्ट कर दिए गए। अन्य विजुअल में S-400 सिस्टम पर हमले, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बर्बाद होने और भारतीय शहरों की ओर मिसाइलें जाते हुए दिखाई गई हैं।

पाकिस्तान के लिए समस्या काफी सीधी-सी है: वीडियो में बहुत सारे धमाके, मैप और कंप्यूटर से बनाई गई तबाही तो है, लेकिन असल तबाही का बहुत कम सबूत है।

भारत के 32 एयरबेस पर हमला? आखिर इसका सबूत कहां है?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमला किया। अगर यह सच होता, तो यह एक बहुत बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। इसे छिपाना भी बहुत मुश्किल होता।

फिर भी, PAF के वीडियो में इस दावे को साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, हमले से पहले और बाद की तस्वीरें, रनवे को हुए पहचाने जा सकने वाले नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें नहीं दिखतीं जिनकी पुष्टि की जा सके। सीमा के दूसरी तरफ से मिले सबूतों के साथ इसका अंतर साफ दिखता है।

जब मई 2025 की लड़ाई के आखिरी दौर में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो सैटेलाइट तस्वीरों से बिल्कुल अलग तरह की जानकारी मिली। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें पाकिस्तान के कम से कम छह एयरफील्ड पर नुकसान का पता चला, जिनमें तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैंगर, दो रनवे और पाकिस्तान वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो मोबाइल इमारतें शामिल थीं।

तस्वीरों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसी जगहों पर नुकसान दिखाई दिया। भोलारी में, एनालिस्ट्स ने एयरक्राफ्ट हैंगर में एक बड़ा छेद देखा। शाहबाज में एक और बड़े हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था, जबकि मुशफ और शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे पर गड्ढे दिखाई दिए।

बता दें कि जब मिलिट्री को होने वाला नुकसान सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित न रहकर असलियत में सामने आता है, तो वह कुछ ऐसा ही दिखता है।

S-400 वाला दावा पहले ही खारिज किया जा चुका है

PAF के वीडियो में फिर से वही पुराना दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए थे। यह दावा नया नहीं है।

मई 2025 के टकराव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 के नष्ट होने या उसे नुकसान पहुंचाने की खबरों को बेबुनियाद बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान S-400 सिस्टम और भारतीय एयरफील्ड से जुड़े दावों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चला रहा है।

असल में, कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के अचानक दौरे के दौरान अपनी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े थे। मई 2025 में जारी इन तस्वीरों को पाकिस्तान की सेना के उन दावों का जवाब माना गया था, जिनमें कहा गया था कि उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेस और रूस से मिले S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद के भारतीय सैन्य रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के दावे से मेल नहीं खाते। मार्च 2026 में, भारत ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का रास्ता साफ कर दिया था। जबकि जून तक चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच चुकी थी।

यानी पाकिस्तान के नए एनिमेशन ने असल में उस दावे को ही लिया है जिस पर 2025 में ही विवाद था, और बस इस बार उसे कंप्यूटर से नया रूप दिया है।

8 विमानों के दावे की सच्चाई की जांच होनी चाहिए

वीडियो में दावा किया गया है कि भारत के 8 विमान नष्ट हो गए थे। ग्राफिक में खास तौर पर चार राफेल, एक Su-30MKI, MiG-29, Mirage-2000 और Heron UAV का जिक्र किया गया है।

हालांकि, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने माना कि शुरुआत में भारत को हवाई हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के बहुत बड़े दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने पाकिस्तानी आंकड़ों को “पूरी तरह गलत” बताया और कहा कि शुरुआती नुकसान के बाद भारत ने आगे हमले करने से पहले अपनी रणनीति बदल ली थी।

आखिरकार, इस पूरे मामले में चल रही प्रचार की जंग ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया।

अगस्त 2025 में, भारतीय एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट और एक अन्य मिलिट्री एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत के S-400 सिस्टम से गिराए गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने युद्ध के मैदान को लेकर दावे किए हैं, लेकिन कुछ वास्तविक नुकसान को स्वीकार करने और एक एनिमेटेड स्कोरबोर्ड दिखाने में बहुत बड़ा अंतर है—जैसे कि नक्शे पर दिखाए गए हर धमाके की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई हो।

पाकिस्तान के अपने एयर बेस एक अजीब तुलना पेश करते हैं

शायद PAF के हालिया वीडियो के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि मई 2025 की असली सैटेलाइट तस्वीरें एक ऐसी कहानी बताती हैं जिसे पाकिस्तान सिर्फ एनिमेशन से नहीं बदल सकता।

पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत के रक्षा मंत्रालय ने 10 मई को कहा कि उसकी सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, पर हमले किए। स्टिमसन सेंटर के हमले के बाद के आकलन में पाया गया कि भारतीय हमलों ने कम से कम 11 जगहों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, रफीकी, रहीम यार खान, सुक्कुर, सरगोधा, भोलाड़ी और जैकोबाबाद शामिल हैं। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से इन एयर बेस में से ज्यादातर पर हमलों की पुष्टि हुई।

वाशिंगटन पोस्ट ने इन हमलों को 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारत का सबसे बड़े हवाई हमला बताया। पाकिस्तान ने खुद माना कि सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और हमले के बाद वायु सेना के 6 जवान मारे गए।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि जमीन पर हुए नुकसान का मतलब सिर्फ कुछ मामूली निशान नहीं थे। हैंगर टूट गए थे, रनवे पर बड़े गड्ढे हो गए थे और मिलिट्री की इमारतों पर हमले हुए थे।

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि मिलिट्री का गंभीर आकलन कैसा होता है। इसके लिए यह दावा करने की जरूरत नहीं है कि पूरी एयर फोर्स ही गायब हो गई। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि असल में किन चीजों पर हमला हुआ।

एयर बेस से लेकर नेशनल ग्रिड तक

PAF का वीडियो सिर्फ एयरक्राफ्ट और एयर बेस तक ही सीमित नहीं है। इसके ग्राफिक्स में भारत के नेशनल ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और मिलिट्री सैटेलाइट क्षमताओं को बाधित करने का भी दावा किया गया है। एक हिस्से में भारत का नक्शा दिखाया गया है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद होते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़े पैमाने पर साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैंपेन को दिखाया गया है।

यहां भी, ज्यादातर काम एनिमेशन के जरिए ही दिखाया गया है।

इन बड़े दावों के साथ कोई ऐसी सैटेलाइट इमेज या स्वतंत्र रूप से वेरिफाई किया जा सकने वाला ठोस सबूत नहीं है जिसकी तुलना की जा सके। समस्या तब और साफ हो जाती है जब वीडियो किसी खास जगह पर हुए खास नुकसान के बजाय, पूरे देश में चलाए गए कथित कैंपेन को कंप्यूटर से बनाए गए धमाकों की एक सीरीज के तौर पर दिखाता है।

जाहिर है, युद्ध में साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऐसी रुकावटें शामिल हो सकती हैं जिनकी तस्वीरें अंतरिक्ष से नहीं ली जा सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनिमेशन इस बात का सबूत बन जाता है कि वे ऑपरेशन असल में हुए थे।

और फिर बारी आती है संसद की

वीडियो में संसद परिसर समेत भारत के अहम राष्ट्रीय ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं। यह टीवी पर तो रोमांचक लग सकता है, लेकिन सबूत के तौर पर इसकी अहमियत बहुत कम है।

कंप्यूटर से बनाए गए एक सीन में मिसाइलों को एक जानी-पहचानी जगह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसे बनाने वाले दर्शकों को क्या दिखाना चाहते थे। इससे यह साबित नहीं होता कि असल में उस जगह पर हमला हुआ था।

यही बात उन दृश्यों पर भी लागू होती है जिनमें भारत में धमाके, आसमान से गिरते विमान और सेना के ढांचे को ढहते हुए दिखाया गया है। ये दृश्य भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि के बिना सबूत के तौर पर इनकी कोई खास अहमियत नहीं है।

आसिम मुनीर की जीत की कहानी को एक और ग्राफिक्स पैकेज मिला

PAF की इस प्रस्तुति का एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है। मई 2025 के संघर्ष के कुछ ही समय बाद, पाकिस्तान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया। सरकार ने उनकी “रणनीतिक सूझबूझ और साहसी नेतृत्व” का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की और दुश्मन को हराया।

तब से, इस संघर्ष के बारे में सेना का नजरिया पाकिस्तान के आधिकारिक संदेश का मुख्य हिस्सा बन गया है।

PAF का ताजा वीडियो इसी नजरिए के साथ पूरी तरह मेल खाता है। भले ही युद्ध के मैदान का घटनाक्रम जटिल रहा हो, लेकिन एनिमेशन बिल्कुल सरल है। यह एक साफ-सुथरा स्कोरबोर्ड दिखाता है: भारतीय विमान नष्ट, भारतीय बेस पर हमले, S-400 सिस्टम खत्म, बुनियादी ढांचा बर्बाद और पाकिस्तान की जीत।

हकीकत इससे काफी अलग और जटिल है।

उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि भारत को कुछ विमानों का नुकसान हुआ था, खासकर संघर्ष के शुरुआती दौर में। लेकिन यह भी सामने आया है कि इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक और दूर तक पहुंचने वाले हमले किए। सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हुए नुकसान को साफ देखा गया।

और यही वजह है कि PAF का यह नया वीडियो काफी कुछ बताता है।

दावा जितना बड़ा और शानदार होता जाता है, सबूतों की कमी उतनी ही ज्यादा साफ दिखाई देती है।

जब युद्ध का मैदान वीडियो-एडिटिंग का मुकाबला बन जाए

मई 2025 के टकराव में दोनों पक्षों को असल सैन्य सफलताएं और नाकामियां मिलीं। साथ ही, अलग-अलग दावे, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और गलत सूचनाओं की बाढ़ भी देखने को मिली।

लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की वायु सेना एनिमेशन के जरिए इस बहस को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

यहां एक साफ विरोधाभास है।

PAF के वीडियो में दावा किया गया है कि उसने भारत के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 सिस्टम नष्ट किए, 8 विमान तबाह किए, भारत के ग्रिड को बेकार कर दिया और देश के अहम ठिकानों पर हमले किए। फिर भी, जब सवाल यह उठता है कि “सबूत कहां है?”, तो उसका जवाब ज्यादातर उस वीडियो के अंदर ही मिलता है।

भारत को हुए सैन्य नुकसान की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इसके लिए दुर्घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरे उपलब्ध सबूत देखे जा सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के एयरबेस को हुए नुकसान की जांच कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की जा सकती है। भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना ने भी अपने सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की बात स्वीकार की थी।

ऐसे में PAF के सामने एक मुश्किल स्थिति है। या तो वह अपने एनीमेशन में और धमाके जोड़ता रहे, या फिर उन दावों के समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें पेश करे।

पावर सेक्टर में 2030 के बाद SCADA इंपोर्ट बंद होगा, देश में बनाने की तैयारी; इन स्टॉक्स पर रखें नजर

सरकार ने पावर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले SCADA सिस्टम का आयात 2030 के बाद बंद करने का फैसला किया है। लक्ष्य 2028-29 तक इसका स्वदेशी विकल्प तैयार करना है। अभी इन सिस्टम में लोकल कंटेंट 20% से भी कम है। सरकार इसे बढ़ाना चाहती है।

आप SCADA को पावर ग्रिड का कंट्रोल सिस्टम समझ सकते हैं। इससे पावर प्लांट, सब-स्टेशन और ग्रिड की रियल टाइम निगरानी होती है। जरूरत पड़ने पर कई इक्विपमेंट को दूर से कंट्रोल भी किया जा सकता है।

स्वदेशीकरण क्यों जरूरी हुआ?

यह पूरा मामला सिर्फ मेक इन इंडिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी भी बड़ी वजह है। अभी SCADA के कई अहम सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट विदेशों से आते हैं। ऐसे में अपडेट, तकनीकी मदद और साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता रहती है।

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान यह चिंता और बढ़ी। पावर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मई 2025 में 8-10 दिनों के दौरान भारत के पावर सिस्टम पर करीब 2 लाख साइबर अटैक की कोशिशें हुई थीं। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के पावर ग्रिड को चलाने वाली अहम टेक्नोलॉजी पर भारत का अपना नियंत्रण हो।

2028-29 तक तैयार होगा स्वदेशी सिस्टम

CEA ने SCADA के स्वदेशीकरण के लिए रोडमैप तैयार किया है। इसमें 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट शामिल हैं।

सरकार National SCADA Mission या एक स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी विचार कर रही है। इसमें Power Grid, GRID-India और घरेलू टेक्नोलॉजी कंपनियों को साथ लाया जा सकता है।

किन स्टॉक्स पर नजर रखें?

शेयर बाजार में इस थीम का सबसे सीधा नाम Power Grid है। प्रस्तावित मॉडल में कंपनी का नाम सीधे आया है। उसके पास ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA का अनुभव भी है।

इसके अलावा Siemens, Hitachi Energy India, GE Vernova T&D और ABB India जैसी कंपनियां भी ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA के कारोबार में हैं। स्वदेशी सिस्टम के विकास और पुराने सिस्टम के अपग्रेड से इन्हें अवसर मिल सकते हैं। TCS जैसी IT कंपनियों के लिए भी सॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और सिस्टम इंटीग्रेशन का मौका बन सकता है।

कंपनीसंभावित फायदा
Power Grid
SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और इंटीग्रेशन

Siemens
SCADA और एनर्जी मैनेजमेंट

Hitachi Energy India
ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA

GE Vernova T&D Indiaट्रांसमिशन और ग्रिड ऑटोमेशन
ABB Indiaपावर ऑटोमेशन और डिजिटल ग्रिड
TCSसॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंटीग्रेशन

निवेशकों के लिए क्या अहम?

अभी इसे सीधे खरीदने का संकेत मानना ठीक नहीं है। असली फायदा तब साफ होगा जब सरकार कंपनियों का चयन करेगी और SCADA के अलग-अलग हिस्सों के लिए ऑर्डर जारी होंगे। फिलहाल Power Grid समेत SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है।

सीधी बात है। सरकार अब पावर ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी पर विदेशी निर्भरता घटाना चाहती है। Operation Sindoor के दौरान सामने आए साइबर खतरे ने इस जरूरत को और गंभीर बना दिया। इससे आने वाले वर्षों में पावर और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ा घरेलू बाजार बन सकता है।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तबाह जैश के अड्डे को फिर बना रहा पाकिस्तान, बहावलपुर में फिर सज रहा आतंकियों का अड्डा!

Pakistan News: भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जिन ठिकानों नेस्तानाबूद कर दिया था, अब उनको लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को पाकिस्तान द्वारा काफी हद तक फिर से बना लिया गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच बहावलपुर कॉम्प्लेक्स का यह रीडेवलपमेंट इस बात का साफ सबूत है कि पाकिस्तान आतंकियों और उनके बुनियादी ढांचे को खत्म करने में पूरी तरह विफल रहा है।

25 करोड़ रुपये का फंड, ISI पर लगे आरोप

CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान सरकार और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने जैश कॉम्प्लेक्स को बनाने के लिएए किश्तों में करीब 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस फंड में से करीब 11 करोड़ रुपये मरकज सुभानअल्लाह सेंट्रल हॉल को बनाने में खर्च किए गए हैं।

2026 की शुरुआत से ही चल रहा काम

रिपोर्ट के मुताबिक, बहावलपुर में ये काम साल 2026 की शुरुआत में ही दिखने लगा था। उस दौरान भारी मशीनरी, ईंटें, स्टील और दूसरे कंस्ट्रक्शन मैटेरियल साइट पर लाए गए थे। धीरे-धीरे आतंकियों का ये पूरा कॉन्प्लेक्स अब फंक्शनल हो गया है। इसके सेंट्रल हॉल को और बड़ा बनाया गया है। इसकी दीवारों पर नया प्लास्टर और पेंट किया गया है, संगमरमर का नया फर्श बिछाया गया है और पूरे परिसर की साफ-सफाई की गई है। सूत्रों का कहना है कि यह कॉम्प्लेक्स एक बार से इस्तेमाल के लिए तैयार हो रहा है।

क्या है बहावलपुर बेस का पाकिस्तानी सेना से कनेक्शन?

एन-5 हाईवे के ठीक पीछे स्थित बहावलपुर का यह ठिकाना ऐतिहासिक रूप से जैश-ए-मोहम्मद के लिए कई काम करता रहा है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से एक मदरसे, भर्ती केंद्र और आतंकी साजिशों के प्लानिंग सेंटर के रूप में किया जाता रहा है। सीएनएन-न्यूज18 की एक पुरानी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया था कि यह कॉम्प्लेक्स पाकिस्तान की 31 कोर सैन्य छावनी के बेहद करीब है। खुफिया स्रोतों ने इस लोकेशन को इस बात का स्पष्ट संकेतक माना था कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सेना के भीतर के तत्वों द्वारा जैश-ए-मोहम्मद को पूरी सुरक्षा और समर्थन दिया जाता है।

क्या था भारत का ऑपरेशन सिंदूर?

साल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बेहद घातक आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इन ठिकानों को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना जाता था।

ये भी पढ़ें- कल का मौसम: 24 अगस्त को सावधान! यूपी-बिहार से लेकर दक्षिण भारत तक बिगड़ेगा मौसम, 18 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट!

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं जो इशारा करती हैं कि पाकिस्तान भारत द्वारा नष्ट किए गए आतंकी ठिकानों का फिर से निर्माण कर रहा है। भारत ने हमेशा इंटरनेशनल कम्युनिटी को बताया है कि पाकिस्तान लगातार जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों को पनाह देना जारी रखे हुए है। यही आतंकी संगठन भारत में 2019 के पुलवामा आतंकी हमले सहित कई हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लालकिले और उसके आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा की कई परतें तैयार की हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाए गए हैं।

 

सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आसपास रहने और काम करने वाले 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन भी किया है। किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या व्यवधान को रोकने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

 

 लाल किले के आसपास कड़ी सुरक्षा

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर लाल किले और आसपास के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात की गई है ताकि आसमान से आने वाले किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

 

20 हजार से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन

 

सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि लाल किले के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में रहने या काम करने वाले 20,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किला सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।

 

DTC बसों के रूट में बदलाव

 

दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर DTC बसों और अन्य बसों के संचालन के संबंध में भी एडवाइजरी जारी की है। अधिकारी के मुताबिक, प्रभावित मार्गों पर इस अवधि के दौरान DTC या अन्य बसें सामान्य रूप से संचालित नहीं होंगी। बसों के रूट डायवर्ट किए जाएंगे और उनके टर्मिनेशन पॉइंट रामलीला मैदान और तीस हजारी कोर्ट में निर्धारित किए गए हैं।

ALSO READ: Operation Sindoor : 88 घंटे के ऑपरेशन सिंदूर पर NSA अजीत डोभाल का बड़ा बयान, खोले रणनीति के राज

मेहमानों के लिए पार्किंग की व्यवस्था

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले आमंत्रित मेहमानों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थानों को Google Maps पर चिह्नित किया गया है। लोगों से ट्रैफिक और पार्किंग से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट को फॉलो करने की अपील की गई है।

 

सुबह 4 बजे से 11 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन

 

दिल्ली पुलिस के अनुसार, लाल किले के आसपास आम लोगों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन सुबह 4 बजे से 11 बजे तक लागू रहेगा। इसके बाद ट्रैफिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। चांदनी चौक क्षेत्र की कुछ सड़कें प्रतिबंधित समय के दौरान बंद रहेंगी। हालांकि, पुलिस के मुताबिक दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

ALSO READ: EPFO Higher Pension : ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन किया है तो जानिए अब क्या करेगा EPFO, सरकार ने बताए 4 बड़े कदम

भारी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। पुलिस का लक्ष्य समारोह के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चूक और ट्रैफिक व्यवधान को रोकना है।

क्या है भारत का नया ड्रोन किलर Bhargavastra, जानिए दुश्मन के Drone Swarm को तुरंत कैसे करेगा तबाह

Bhargavastra updates: मॉडर्न हो रही मिलिट्रीज के ड्रोन्स ने सैन्य अभियानों का रूप पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन-रूस के युद्ध से लेकर वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे वॉर तक, मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) ने निगरानी, रेकी और सटीक हमलों का तरीका बदल दिया है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी इस बात का प्रतीक है कि कैसे ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन ने अहम भूमिका निभाई थी। जैसे-जैसे ड्रोन्स युद्धक्षेत्र पर हावी हो रहे हैं, दुनिया भर की सेनाएं दुश्मन के ड्रोन्स को हमले से पहले ही पहचानने, ट्रैक करने और तबाह करने के लिए प्रभावी सिस्टम विकसित कर रही हैं। इसी दिशा में भारत का लेटेस्ट और बड़ा कदम है स्वदेशी ड्रोन किलर भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।

24 जुलाई को भारतीय सेना के सामने हुआ प्रदर्शन

भारतीय सेना ने 24 जुलाई को भार्गवास्त्र के प्रदर्शन को देखा। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, वीकल-माउंटेड काउंटर-स्वाम ड्रोन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से हथियारबंद ड्रोन्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन और इंडिपेंडेंट ड्रोन झुंडों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे मेक-II कार्यक्रम के तहत सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

10 किमी दूर से पहचान और सेंसर सिस्टम

भार्गवास्त्र एक उन्नत C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर से जुड़ा हुआ है। इसमें पहचान और ट्रैकिंग के लिए त्रिस्तरीय सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बड़े UAVs को 10 किलोमीटर तक की दूरी पर और छोटे ड्रोन्स को कम दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर दिन और रात दोनों समय निगरानी और ट्रैकिंग के लिए हैं। इसका पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर दुश्मन के सिग्नल और ड्रोन्स को बिना खुद की लोकेशन दिए ट्रैक कर लेता है।

नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शन

SDAL की नागपुर स्थित फैसिलिटी में प्रदर्शन के दौरान, इस सिस्टम ने ड्रोन्स के एक झुंड का सफलतापूर्वक पता लगाया और उसे ट्रैक किया। सिस्टम ने रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की, अलर्ट जारी किए और लॉन्चर को टारगेट असाइन किए। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण लाइव रॉकेट फायरिंग नहीं की गई लेकिन मेक-II कार्यक्रम के तहत स्टेटस रिव्यू के हिस्से के रूप में भारतीय सेना की टीम के सामने पूरी एंगेजमेंट सीक्वेंस का प्रदर्शन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स जैमिंग से आगे: ‘हार्ड-किल’ तकनीक

पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग पर निर्भर करते हैं लेकिन भार्गवास्त्र को एक हार्ड-किल समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह उन ऑटोनॉमस ड्रोन्स के खिलाफ बेहद कारगर है जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर या जैमिंग का असर नहीं होता। यह अपने स्वदेशी रॉकेट्स और सटीक माइक्रो-मिसाइलों के लेयर्ड आर्किटेक्चर के जरिए एकल ड्रोन्स और समन्वित ड्रोन झुंडों दोनों को नष्ट कर देता है।

5,000 मीटर की ऊंचाई और रेगिस्तान में भी तैनाती योग्य

भार्गवास्त्र को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5000 मीटर तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ आसानी से इंटिग्रेट हो सकता है, जिससे भविष्य में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध अभियानों में मदद मिलेगी।

कम लागत और आर्थिक फायदा

भार्गवास्त्र का एक बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कम कीमत वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए अत्यधिक महंगी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बजाय, भार्गवास्त्र अपेक्षाकृत सस्ते रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग करता है। इससे काउंटर-ड्रोन युद्ध में खर्च में काफी कमी आती है।

भारत का वैश्विक ड्रोन हब बनने का विजन

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दे रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि हम इस देश में वैश्विक स्तर का ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने हेतु मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें देश की भविष्य की रक्षा क्षमताओं में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

छात्र प्रदर्शन पर पाक स्पिनर ने लगाई भारतीय पत्रकार की क्लास

पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने  प्रदर्शन में लग रहे हिंदू और भारत विरोधी नारों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए ट्वीट लिखा। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि हर प्रदर्शन में या तो हिंदू विरोधी या फिर भारत विरोधी नारे लगते हैं।

इस ट्वीट के प्रति उत्तर में द वायर की पत्रकार आरफा शेरवानी ने कहा कि यह पाकिस्तानी हमारे अंदरूनी मामले में दखल क्यों दे रहा है। इस को रीटिविट करते हुए पाकिस्तानी स्पिनर ने लिखा कि आप तो ऑपरेशन सिंदुर के वक्त पाकिस्तान की तरफ थी। एकतरफा पत्रकारिकता अच्छी बात नहीं है।

कनेरिया पाकिस्तान की तरफ से खेलने वाले केवल दूसरे हिंदू खिलाड़ी हैं। उनसे पहले उनके मामा अनिल दलपत ने भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था।

कनेरिया ने 61 टेस्ट में 34.79 की औसत से 261 विकेट लिए है। दलपत दानिश कनेरिया के मामा थे। कनेरिया को हालाँकि साल 2000 से 2010 के बीच सिर्फ 18 एकदिवसीय मैच खेलने का मौका मिला।

ऐसा रहा करियर

राइट आर्म लेगब्रेक गेंदबाज दानिश कनेरिया ने टेस्ट क्रिकेट में 261 विकेट झटके जो अब्दुल कादिर से 25 विकेट ज्यादा हैं। वसीम अकरम, वकार यूनिस और इमरान खान के बाद वे पाकिस्तान की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले चौथे टेस्ट गेंदबाज हैं।

दानिश कनेरिया ने 61 टेस्ट मैच खेले जबकि 19 वनडे मैच। उन्होंने पहला टेस्ट 29 नवम्बर 2000 को इंग्लैंड के खिलाफ खेला और आखिरी टेस्ट भी इसी देश के खिलाफ 29 जुलाई 2010 में खेला।

चीन हो या पाकिस्तान… अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा ‘100 किमी की चक्रव्यूह’ दीवार

भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।

भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिला बड़ा सबक

कुछ महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अब छोटे लेकिन स्मार्ट हथियारों पर फोकस

भारत अब ऐसे हथियार खरीद रहा है जो सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत जवाब देने की क्षमता देंगे। इनमें शामिल हैं-

एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम

शोल्डर-फायर्ड एंटी-टैंक मिसाइलें

शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम

कामिकाज़े ड्रोन

हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS)

इनका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, टैंक, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को तुरंत रोकना है।

पाकिस्तान और चीन…दो अलग-अलग चुनौतियां

भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन जैसी दो अलग-अलग सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, टैंक, तोपखाने और घुसपैठ का खतरा रहता है। चीन के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी, लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम और आधुनिक ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। इसी वजह से भारत तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ड्रोन बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा

आज के युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल चलाना आर्थिक रूप से सही नहीं माना जाता। इसलिए दुनिया भर की सेनाएं अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अपना रही हैं, जो ड्रोन के संचार और नेविगेशन को जाम करके उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा भारत की सुरक्षा ढाल

सरकार एक राष्ट्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से पूरे देश की सुरक्षा करना है। इसमें लंबी दूरी की S-400, मध्यम दूरी की MR-SAM, छोटी दूरी की मिसाइलें और एंटी-ड्रोन सिस्टम मिलकर कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रदान करेंगे।

आकाश तरंग सिस्टम क्या है?

आकाश तरंग एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिसाइल चलाकर ड्रोन को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसकी रेडियो और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन अपना नियंत्रण खो देता है, वापस लौट जाता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। भविष्य के युद्धों में यह भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जा रहा है।

MR-SAM की ताकत

मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) लगभग 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बना सकती है। यह भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इन सबको मिलाकर देखें तो खरीद की यह लिस्ट यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध के बारे में भारत की समझ कैसे बदल रही है। मिलिट्री प्लानर्स का मानना ​​है कि भविष्य के युद्ध का फैसला सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने वाले फाइटर जेट या महाद्वीपों के बीच मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से नहीं होगा। इसका फैसला सैकड़ों सस्ते ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बिना पायलट वाले विमानों और टैक्टिकल लेवल पर स्मार्ट हथियार लिए सैनिकों से भी होगा।

कम दूरी के हथियार क्यों जरूरी हैं?

एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और पनडुब्बी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बने हुए हैं। हालांकि, कई मिलिट्री एनालिस्ट का तर्क है कि भविष्य की टैक्टिकल लड़ाइयों का नतीजा तय करने वाले हथियार छोटे, सस्ते और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले होंगे। आधुनिक एंटी-टैंक मिसाइल से लैस एक सैनिक करोड़ों रुपये की बख्तरबंद गाड़ी को नष्ट कर सकता है।

सस्ते ड्रोन का एक झुंड एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण बिना एक भी गोली चलाए ड्रोन को बेकार कर सकते हैं। पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें दुश्मन के विमानों को युद्ध के मैदान में आजादी से काम करने से रोक सकती हैं। इससे पता चलता है कि DAC की कई मंजूरियां सैकड़ों किलोमीटर के बजाय कुछ 10 किलोमीटर के दायरे में काम करने वाले सिस्टम पर क्यों केंद्रित हैं।

सिर्फ रणनीतिक क्षमताओं में निवेश करने के बजाय भारत उस चीज को भी मजबूत कर रहा है जिसे मिलिट्री प्लानर अक्सर ‘टैक्टिकल एज’ (युद्ध के मैदान में बढ़त) कहते हैं। भारत की मिलिट्री प्लानिंग अनोखी है क्योंकि उसे दो बिल्कुल अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए तैयारी करनी होती है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान एक तेजी से बदलने वाला युद्ध का मैदान बनाता है, जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने, ड्रोन और सीमा पार से घुसपैठ जैसी चीजें शामिल हैं।

वहीं, उत्तरी सीमा पर चीन की चुनौती ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध, एडवांस्ड सर्विलांस क्षमताएं, लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी और तेजी से बेहतर हो रहे बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि इलाके बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों मोर्चों पर एक जरूरत समान है। लगातार निगरानी, ​​तेजी से टारगेट का पता लगाना और हवाई खतरों से कई स्तरों पर सुरक्षा। यही वजह है कि DAC की मंजूरी में एक साथ कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।