वसीम जाफर ने किया मुख्य चयनकर्ता पद के लिए आवेदन, ऐसा रहा है करियर

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा आमंत्रित चयन समिति के लिए मुख्य चयनकर्ताओं के लिए आवेदन किया है। यह पोस्ट BCCI ने कुछ दिनों पहले  एक्स पर अजीत आगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद की थी जिसपर वसीम जाफर ने आवेदन किया।

वसीम जाफर लंबे समय तक रहे भारतीय टेस्ट ओपनर

साल 2020 में क्रिकेट के सभी प्रारुपों से संन्यास लेने वाले वसीम जाफर ने भारत की तरफ से 31 टेस्ट मैचों में 34.11 की औसत से 1,944 रन बनाए जिसमें 5 शतक और 11 अर्द्धशतक शामिल हैं। उनका उच्चतम स्कोर 212 रन है।यह सलामी बल्लेबाज उन कुछ भारतीय बल्लेबाजों में शामिल है जिन्होंने वेस्टइंडीज में दोहरा शतक लगाया है। उन्होंने कैरेबियाई टीम के खिलाफ सेंट लूसिया में 212 रन बनाए थे

जाफर ने 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच 2006 में इसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेला था। जाफर ने केवल 2 वनडे खेले जिनमें 10 रन बनाए। उन्हें हालांकि घरेलू क्रिकेट विशेषकर रणजी ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है।

वे रणजी ट्रॉफी में 12,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं। उन्होंने अपने करियर में अधिकतर समय मुंबई का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन बाद के दिनों में वे विदर्भ से खेलने लगे थे। वे रणजी ट्रॉफी में 150 मैच खेलने वाले पहले बल्लेबाज हैं। जाफर ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1996-97 में पदार्पण किया था।जाफर को घरेलू क्रिकेट का दिग्गज माना जाता है। उन्होंने 260 प्रथम श्रेणी मैचों में 19,000 से ज्यादा रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 50.67 रहा है और उनका सर्वाधिक स्कोर 314 है।

बांग्लादेश क्रिकेट के बल्लेबाजी सलाहकार रह चुके वसीम

साल 2019 में  बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने मीरपुर स्थित अपनी अकादमी के लिए बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त किया था। पहले जाफर ने अकादमी में अंडर-16 और अंडर-19 आयु वर्गों की टीमों को कोचिंग दी थी।बांग्लादेश के युवा बल्लेबाजों के साथ जाफर ने 6 महीने बिताए थे।

जसप्रीत बुमराह, आकाशदीप लौटे टेस्ट टीम में, न्यूजीलैंड के खिलाफ स्कॉड घोषित

Jasprit Bumrah

INDvsNZ न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की शृंखला के लिए भारतीय टीम में तेज गेंदबाज आकाश दीप और अंशुल कंबोज को शामिल किया गया है। चोट से उबरकर वापसी करने वाले आकाश दीप ने पिछली बार इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट क्रिकेट खेला था, जहां उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था। वहीं, अंशुल कंबोज को इंग्लैंड में टेस्ट पदार्पण के बाद टीम से बाहर कर दिया गया था।

टेस्ट शृंखला 19 नवंबर से शुरू होगी। इससे पहले भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच वनडे मैचों की शृंखला खेली जाएगी, जिसका आगाज चार नवंबर से होगा।श्रीलंका दौरे से चोट के कारण बाहर रहने वाले जसप्रीत बुमराह को भी टेस्ट सीरीज में शामिल किया गया है।

भारत की टेस्ट टीम: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उपकप्तान), देवदत्त पडिक्कल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर, फिटनेस मंजूरी मिलने पर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, अंशुल कंबोज, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा (फिटनेस मंजूरी मिलने पर), आकाश दीप, साई सुदर्शन, नितीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव और मोहम्मद सिराज।

अगले महीने शुरु होगा क्रिकेट का चौथा फॉर्मेट, क्या है यह टेस्ट ट्वेंटी?

क्रिकेट के इतिहास में ‘टेस्ट ट्वेंटी’ के 80 ओवर के प्रारूप पर आधारित दुनिया का पहला मिश्रित युगल (लड़के-लड़कियों का मिला-जुला) क्रिकेट टूर्नामेंट 14 नवंबर को कोलंबो के SSC में शुरू होगा। इसमें 160 लड़के और लड़कियां हिस्सा लेंगे, जिनका स्कोरबोर्ड एक ही होगा। इस टूर्नामेंट में पहली बार, एक टॉस से दो चीजें तय होंगी। कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी, और पहले लड़कियां खेलेंगी या लड़के।

लड़कियां लड़कियों के खिलाफ खेलेंगी, और लड़के लड़कों के खिलाफ। जो भी सुबह बल्लेबाजी करेगा, उसके रन रात तक जुड़ते जाएंगे, और अंत में दोनों का कुल स्कोर ही जीत तय करेगा। लड़कियों के रन लड़कों के मैच का नतीजा तय करेंगे, और लड़कों के रन लड़कियों के मैच का। क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है।

पिछले लगभग 150 सालों में क्रिकेट के तीन प्रारूप रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट, वनडे और टी-20 अब 14 नवंबर को चौथा प्रारूप सामने आएगा। ‘टेस्ट ट्वेंटी’ का पहला सीजन श्रीलंका के कोलंबो स्थित सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब एसएससी में 14 से 29 नवंबर तक खेला जाएगा, जिसमें 30 नवंबर को ‘रिजर्व डे’ (अतिरिक्त दिन) के तौर पर रखा गया है। दुनिया भर से चुने गए 13 से 21 साल के 160 युवा क्रिकेटर 4 महाद्वीपीय टीमों में बंटकर कोलंबो पहुंचेंगे। यह पहला ऐसा टूर्नामेंट होगा, जिसमें एक ही टीम के लिए लड़कियों की 11 सदस्यीय टीम और लड़कों की 11 सदस्यीय टीम खेलेंगी, और उनके रन जुड़कर एक साझा परिणाम बनाएंगे।

श्रीलंका ने पिछले 100 सालों में युवा क्रिकेट की एक ऐसी संस्कृति विकसित की है, जिसका कोई और देश मुकाबला नहीं कर सकता। नवंबर से, यह देश दुनिया के इस नए युवा क्रिकेट फॉर्मेट का जन्मस्थान बन जाएगा। 80 ओवर। 2 गेंदें। कुछ भी रीसेट नहीं होता।

एक ही मैच में लाल और सफेद दोनों गेंदों का इस्तेमाल

‘टेस्ट ट्वेंटी का हर मैच एक ही दिन में खेला जाता है। दोनों टीमें दो-दो बार बल्लेबाजी करती हैं। पहले 40 ओवर सफेद कपड़ों में, लाल गेंद से और दिन के उजाले में खेले जाते हैं। बाकी 40 ओवर रंगीन कपड़ों में, सफेद गेंद से और एसएससी की फ्लडलाइट्स के नीचे खेले जाते हैं। यह पहली बार है जब एक ही मैच में लाल और सफेद दोनों गेंदों का इस्तेमाल होगा। पहले हाफ के स्कोर दूसरे हाफ में जुड़ जाते हैं। दिन में बनाए गए रन रात में भी मायने रखते हैं। रात होने तक एक नतीजा सामने आ जाता है।

20 लड़कियां और 20 लड़के

हर महाद्वीपीय टीम में 40 खिलाड़ियों का स्क्वॉड होता है। 20 लड़कियां और 20 लड़के। हर मैच में लड़कियां लड़कियों के खिलाफ और लड़के लड़कों के खिलाफ खेलते हैं। फिर उनके स्कोर एक ही स्कोरबोर्ड पर जुड़ जाते हैं, और कुल स्कोर के आधार पर ही जीत तय होती है।

इससे डगआउट का माहौल भी बदल जाता है। लड़कियां और लड़के पूरे दिन एक साथ, एक ही टीम के बैनर तले बैठते हैं और दूसरी टीम की हर गेंद को देखते हैं, क्योंकि उनके द्वारा बनाया गया हर रन उनकी अपनी टीम के लिए जरूरी होता है।

क्रिकेट के लगभग 150 साल के इतिहास में, लड़कियों के रन कभी लड़कों के मैच में नहीं गिने गए। लेकिन 14 नवंबर से कोलंबो में, वे ही तय करेंगी कि जीत किसकी होगी। हज़ारों से 160 तक एक भी गेंद फेंके जाने से पहले, 5 महाद्वीपों के हज़ारों युवा क्रिकेटरों ने अपना नाम आगे बढ़ाया। पिछले 300 दिनों में, मैदान पर और ऑनलाइन हुए ट्रायल के ज़रिए इनमें से बेहतरीन खिलाड़ियों को चुना गया।

इनमें से, ग्लोबल सिलेक्शन कमिटी ने सबसे अच्छे खिलाड़ियों का चयन किया है। इस कमिटी के अध्यक्ष भारत के जाने-माने कोच राजकुमार शर्मा हैं – वही व्यक्ति जिन्होंने विराट कोहली को बचपन में खोजा था और उन्हें एक चैंपियन के रूप में तैयार किया था। इस महीने के आखिर में, ‘प्लेयर्स ड्राफ्ट’ के ज़रिए अंतिम 160 खिलाड़ियों के नामों की घोषणा होगी। 80 लड़कियाँ और 80 लड़के। यह ‘टेस्ट ट्वेंटी’ का पहला बैच होगा।

रणजी मैच में घरेलू पिच पर सर जड़ेजा ने बल्ले और गेंद से जीता मैन ऑफ द मैच

Ravindra Jadeja

सौराष्ट्र की टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी रविंद्र जड़ेजा ने अपने गृहनगर राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में पहले शतक लगाकर और फिर 3 विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच का अवार्ड पाया। उनके इस प्रदर्शन से सौराष्ट्र छत्तीसगढ़ से मैच ड्रॉ कराने में कामयाब हो पाई।

सौराष्ट्र ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 392 रन बनाए जिसमें रविंद्र जड़ेजा का 209 गेंदों में 7 चौके लगाकर 102 रनों का योगदान था। इसके बाद छत्तीसगढ़ 312 रनों पर सिमट गई। रविंद्र जड़ेजा ने सर्वाधिक 17 ओवरों में सिर्फ 40 रन देकर 3 विकेट लिए। हालांकि यह तीनों विकेट निचले क्रम के थे लेकिन इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की टीम सौराष्ट्र पर बढ़त नहीं ले पाई।

भारत के अनुभवी खिलाड़ी रविंद्र जडेजा टेस्ट ऑलराउंडरों की रैंकिंग में शीर्ष पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के बाद दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर एक स्थान ऊपर चढ़कर चौथे और साइमन हार्मर पांच पायदान की छलांग लगाकर संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर हैं।

जडेजा हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की 2-1 से वनडे सीरीज जीत का हिस्सा थे, जहां उन्होंने दो मैचों में दो विकेट लिए, लेकिन उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। रणजी ट्रॉफी इस बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर को अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के दो टेस्ट मैचों के दौरे से पहले अपनी लाल गेंद की क्रिकेट का फॉर्म हासिल करने का मौका देगी। टेस्ट सीरीज वेलिंग्टन में 19-23 नवंबर तक शुरू होगी, जिसके बाद दूसरा मैच क्राइस्टचर्च में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक खेला जाएगा।

ऐसा रहा है करियर

टेस्ट क्रिकेट में रविंद्र जड़ेजा की उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।

टेस्ट क्रिकेट में स्टीव स्मिथ बने सर्वाधिक कैच पकड़ने वाले फील्डर, तीसरे नंबर पर एक भारतीय

टेस्ट क्रिकेट के सफलतम बल्लेबाजों में से एक स्टीव स्मिथ ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक बेहतरीन कैच लेकर ना केवल चपलता लेकर बौद्धिक शक्ति बताई बल्कि वह टेस्ट के सर्वकालिक बेहतरीन फील्डर में शुमार हो गए। उनका यह कैच 221वां कैच था।

वह इंग्लैंड के कप्तान जो रूट से आगे निकल गए जिनसे फैब फोर में उनकी तुलना अक्सर होती रहती है।  164 टेस्ट मैचों में 210 कैच पकड़ने वाले राहुल द्रविड़ तीसरे स्थान पर हैं। हालांकि राहुल द्रविड़ ने कुछ टेस्ट मैचों में भारत के लिए विकेटकीपिंग की थी तब वह इस आंकड़े पर पहुंच पाए।

हालांकि बल्ले से स्टीव स्मिथ का संघर्ष जारी है और उनको एक बार फिर मौजूदा टेस्ट में सिर पर चोट लग चुकी है। ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में तेज गेंदबाज एनरिच नॉर्किया की गेंद हेलमेट पर लगने के बाद कनकशन जांच के लिये भेजा जायेगा।

सैतीस वर्ष के स्मिथ को मैच के चौथे दिन सोमवार को नॉर्किया की शॉर्टपिच गेंद को खेलने के प्रयास में चोट लगी।वह दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी में फील्डिंग के लिये नहीं आये।क्रिकेट आस्ट्रेलिया की सिर की चोट और कनकशन नीति के तहत स्मिथ को अगले 24 घंटे निगरानी में रखा जायेगा। कनकशन (सिर में चोट) होने पर उन्हें मेडिकल अधिकारी से हरी झंडी मिलने तक क्रिकेट से दूर रहना होगा।

स्मिथ को 2019 में एशेज टेस्ट के दौरान इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की गेंद भी सिर पर लगी थी। उनके स्थान पर खेलने आए मार्नस लाबुशेन ने बेहतरीन पारी खेल अपनी जगह सुनिश्चित की थी और वह अब तक टीम की योजनाओं में शामिल है।

टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले बांग्लादेशी पेसर बने हसन महमूद (Video)

बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद ने सोमवार को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में हैट्रिक ली। इसी के साथ वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले अपने देश के पहले तेज गेंदबाज बने गये।

महमूद ने अबू धाबी में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में यह कारनामा किया। उन्होंने विरोधी टीम की बल्लेबाजी लाइन-अप को तहस-नहस करते हुए एक और बार पारी में पांच विकेट लिए। दाएं हाथ के यह गेंदबाज टेस्ट मैच में हैट्रिक लेने वाले बांग्लादेश के तीसरे खिलाड़ी और ऐसा करने वाले पहले तेज गेंदबाज बन गए हैं।

उनसे पहले आलोक कपाली (2003 में पाकिस्तान के खिलाफ) और सोहाग गाजी(2013 में न्यूजीलैंड के खिलाफ) ने यह उपलब्धि हासिल की थी। टेस्ट मैच में लगातार तीन विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में अब महमूद भी शामिल हो गए हैं।

महमूद ने सबसे पहले इस्मत आलम को छकाया और उनका ऑफ़-स्टंप उखाड़ दिया, इसके बाद उन्होंने लगातार गेंदों पर क़ैस अहमद और ज़िया-उर-रहमान को आउट करके यह दुर्लभ हैट्रिक पूरी की।

महमूद ने टेस्ट के तीसरे दिन स्टंप्स के समय कहा, “यह बहुत ही शानदार एहसास है।” उस समय बांग्लादेश अपनी दूसरी पारी में 223/6 के स्कोर पर था और कुल मिलाकर 329 रनों की बढ़त बना चुका था। जब आप गेंदबाज़ी शुरू करते हैं और विकेट से गेंद को मूव होते देखते हैं, तो आप सीधा हाथ रखकर गेंदबाज़ी करने, गेंद को स्विंग कराने और विकेट लेने की कोशिश करते हैं। मैं बस यही कोशिश कर रहा था और अपनी प्रक्रिया का पालन कर रहा था। सुबह के समय गेंद को इस तरह से मूव होते देखकर मुझे खुशी हुई।”

अफगानिस्तान के खिलाफ यह मैच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चरण का हिस्सा नहीं है, लेकिन महमूद का फ़ॉर्म उतना ही शानदार रहा। उन्होंने तीसरे दिन कुल चार विकेट लिए और 21 किफायती ओवरों में 5/55 के आंकड़े के साथ अपना स्पेल पूरा किया। महमूद ने हैट्रिक लेने में मदद के लिए बांग्लादेश के कप्तान नजमुल हुसैन शांतो और अनुभवी बल्लेबाज लिटन दास को श्रेय दिया। इन दोनों ने ही उन्हें ज़िया-उर-रहमान के ख़िलाफ पगबाधा के फैसले पर रिव्यू लेने के लिए मनाया, जिससे वह यह कारनामा कर सके।

महमूद ने कहा, “पिछले दिन मुझे पूरे दिन में सिर्फ़ एक विकेट मिला था, लेकिन मैं बिल्कुल भी घबराया हुआ नहीं था। मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। पहली पारी में हमने कुछ डीआरएस गंवा दिए थे, इसलिए हर कोई डीआरएस के बारे में सोच रहा था कि गेंद स्टंप्स पर लगेगी या नहीं। कप्तान और लिटन दास को इसका श्रेय जाता है। वे आपस में बात कर रहे थे और फिर उन्होंने मुझे बताया कि गेंद स्टंप्स पर लगेगी, इसलिए मैंने रिव्यू ले लिया। मुझे बस लगा कि मुझे सीधी गेंद डालनी चाहिए। बस इतना ही। गेंद को अपना काम करने दिया। इसलिए मैंने सही लाइन पकड़ी और स्टंप्स के ऊपरी हिस्से पर गेंद डाली।”

रविंद्र जड़ेजा मैदान छोड़ बनना चाहते हैं मुख्य चयनकर्ता, बोर्ड से पूछी प्रक्रिया

वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय मैच में एक साल बाद विकेट लेकर विकेटों का सूखा खत्म करने वाले रविंद्र जड़ेजा ने मुख्य चयनकर्ता बनने के लिए आवेदन देना चाहते हैं। उन्होंने इस सिलसिले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के साथ संपर्क साधा है।

दरअसल अजीत आगरकर के कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रज्ञान ओझा अंतरिम मुख्य चयनकर्ता  हैं।  बोर्ड ने एक्स पर इसका आवेदन मांगा जिसका रविंद्र जड़ेजा ने मजाकिया अंदाज में इसकी प्रक्रिया पूछी है। वैसे गंभीरता से सोचा जाए तो  रविंद्र जड़ेजा से बेहतर विकल्प बोर्ड को शायद ही मिलेगा।उनकी पत्नी गुजरात में भाजपा की विधायक हैं और सभी खिलाड़ियों से उनके अच्छे संबंध है।

खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं जड़ेजा

क्रिकेट विशेषज्ञों को लगा था कि जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ खराब प्रदर्शन के कारण उनका लौट पाना मुश्किल है लेकिन चयनकर्ताओं ने उनको दूसरा मौका दिया।

गौरतलब है कि ऑलराउंडर रविंद्र जड़ेजा न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में बल्ले और गेंद दोनों से फ्लॉप रहे। 3 मैचों में उन्होंने 14 की औसत से 43 रन बनाए। पूरी सीरीज में वह सिर्फ एक बार ही गेंद को सीमा पार भेज पाए।

 

ऐसा रहा है करियर

रविंद्र जड़ेजा के सफेद गेंद के करियर पर नजर डालें तो वह 210 मैच खेल चुके हैं। 32 की औसत के साथ उन्होंने 2905 रन बनाए हैं। इसमें 12 अर्धशतक शामिल है। इस प्रारुप में गेंद से उन्होंने 234 विकेट निकाले हैं। इसमें 7 बार 4 विकेट और 2 बार 5 विकेट लेना शामिल है।

वहीं टी-20 क्रिकेट में उन्होंने 74 मैच खेले और 21 की औसत से 515 रन बना पाए। इसमें एक भी अर्धशतक शामिल नहीं है। वहीं इस प्रारुप में वह सिर्फ 54 विकेट ही निकाल पाए।

हालांकि टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।

वहीं गेंद से तो वह एक विकेट के लिए तरसते रह गए। पहले मैच में उन्होंने 9 ओवर में 56 रन दिए। दूसरे मैच में उन्होंने 8 ओवर में 44 रन दिए और अंतिम मैच में उन्होंने 6 ओवर में 41 रन दिए। कुल मिलाकर वह 21 ओवर में 141 रन देकर भी एक विकेट नहीं ले सके। रविंद्र जड़ेजा 37 साल के हो चुके हैं और अक्षर पटेल की जगह ले रहे हैं जो टीम को कई अहम मौकों पर गेंद और बल्ले से मैच जितवा चुके हैं।


Sandpaper Gate के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया खेलेगी दक्षिण अफ्रीका में, ब्रॉडकास्टर ने याद दिलाया विवाद (Video)

Sandpaper Gate यह 24 मार्च 2018 को हुआ क्रिकेट जगत का एक बड़ा विवाद साबित हुआ जब ऑस्ट्रेलियाई टीम के 3 खिलाड़ियों ने केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट में गेंद से छेड़छाड़ की और कैमरे को धोखा ना दे सके। कल से शुरु हो रही टेस्ट सीरीज से पहले प्रसारणकर्ता ने इस पर चुटकी लेते हुए वीडियो अपलोड किया है कि इस बार हमारी निगाहें पहले से ज्यादा तेज रहेंगी।

क्या हुआ था सैंडपेपर विवाद में

बॉल टैम्परिंग की इस हरकत को अंपायरों की नज़र से तो बचा लिया था, लेकिन कैमरे की नज़र में आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की पूरी पोल पट्टी खुल गई थी। मैच के दौरान कैमरन बेनक्रॉफ्ट को जेब से किसी चीज़ को निकालते हुए देखा गया था, जिसके बाद अंपायरों को उन पर शक हुआ और उन्होंने बेनक्रॉफ्ट से पूछताछ की थी। बेनक्रॉफ्ट ने अंपायरों  को जेब से निकालकर पाउच दिखाया, जो चश्मे के पैकेट जैसा दिख रहा था।

अंपायरों को यह मामूली चीज़ लगी और उन्होंने जारी रखा गया था। कुछ देर बाद स्टेडियम में लगे बड़े स्क्रीन पर बेनक्रॉफ्ट का वह वीडियो दिखाया गया था, जिसमें वे टैम्परिंग कर रहे थे। इसके बाद स्टेडियम में हंगामा शुरू हो गया था। कैमरे ने  बेनक्रॉफ्ट की यह हरकत पकड़ ली और सार्वजनिक कर दी थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम के पास छुपाने को कुछ नहीं था। इस पूरे मामले को उजागर करने में कैमरामैन की बड़ी भूमिका रही थी।

गेंद से छेड़खानी मामले में क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने कड़ा रवैया अपनाते हुए आज टेस्ट टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और कैमरन बेनक्राफ्ट को आरोपी बनाते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चौथे टेस्ट की टीम से बाहर कर दिया था।

इसके बाद इन तीनों खिलाड़ियों पर ही एक साल का प्रतिबंध लगा था। डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ तो ऑस्ट्रेलिया के लिए खेल गए लेकिन कैमरून बैकरोफ्ट के करियर का अंत हो गया था।  डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ ऑस्ट्रेलिया की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023 विजेता टीम का भी हिस्सा रहे थे।उस वक्त से अब तक सिर्फ स्टीव स्मिथ ही वह क्रिकेटर है जो वर्तमान में भी ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट क्रिकेट का हिस्सा है उन पर इस सीरीज में पूरे समय नजर रहने वाली है।

धनंजय डी सिल्वा ने श्रीलंका टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ी

धनंजय डी सिल्वा ने गुरुवार को तत्काल प्रभाव से श्रीलंका की टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ दी। उन्होंने कहा कि वह “अगली पीढ़ी” को कप्तानी सौंपना चाहते हैं। वह टीम में चुने जाने के लिए उपलब्ध रहेंगे। श्रीलंका का अगला टेस्ट कार्यक्रम पाकिस्तान के खिलाफ दो मैचों की सीरीज है, जो शुक्रवार को रावलपिंडी में शुरू होगी। चयनकर्ताओं ने अभी तक उनकी जगह किसी और का नाम तय नहीं किया है।

मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चरण में श्रीलंका का टॉप-दो में जगह बनाना लगभग नामुमकिन हो गया है, इसलिए डी सिल्वा को लगा होगा कि कप्तानी सौंप देना सही रहेगा, ताकि नए कप्तान को अगले चरण के शुरू होने से पहले टीम को समझने और अपनी जगह बनाने का मौका मिल सके।

श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के चीफ एग्जीक्यूटिव एशले डी सिल्वा ने एक बयान में कहा, “श्रीलंका क्रिकेट धनंजय के बाकी करियर के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता है और हमारी टेस्ट टीम को दी गई उनकी कप्तानी के लिए उनका शुक्रिया अदा करता है। बयान में यह भी कहा गया कि एसएलसी में एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी लगातार उपलब्धता का स्वागत करता है।

Also Read : होप्स और हैडिन ने पंजाब किंग्स की कोचिंग छोड़ी

यह इस्तीफा टेस्ट टीम के लिए एक औसत दौर में आया – जो बहुत बुरा तो नहीं था, लेकिन बहुत अच्छा भी नहीं – जिसमें टीम ने इस साल दोनों सीरीज़ 1-0 से गंवा दीं। पहले वेस्टइंडीज में और फिर घरेलू मैदान पर भारत के खिलाफ। कुल मिलाकर, डी सिल्वा की कप्तानी में श्रीलंका का रिकॉर्ड सात जीत, आठ हार और तीन ड्रॉ का रहा। कप्तान के तौर पर डी सिल्वा का सबसे अच्छा साल 2024 रहा, जब टीम ने बंगलादेश में 2-0 से सीरीज जीती, फिर द ओवल में जीत हासिल की (हालांकि वह सीरीज वे 2-1 से हार गए थे), और उसके बाद घरेलू मैदान पर न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हराया। हालांकि, 2024 के आखिर और 2025 की शुरुआत के बीच दक्षिण अफ्रीका (बाहर) और ऑस्ट्रेलिया (घर पर) लगातार चार हार का दौर भी आया। लेकिन उनके कार्यकाल में श्रीलंका के टेस्ट क्रिकेट की सबसे खास बात मैचों का कम होना थी।

जून 2025 में बंगलादेश के खिलाफ घरेलू सीरीज 1-0 से जीतने के बाद, टीम के शेड्यूल में पूरे 12 महीनों तक कोई टेस्ट मैच नहीं था। वे अभी एक ऐसे डब्ल्यूटीसी चरण का हिस्सा हैं जिसमें उनके लिए केवल 12 टेस्ट मैच हैं – जो कि कम से कम संख्या है। डी सिल्वा ने बार-बार ऐसे कम मैचों वाले शेड्यूल से होने वाली बड़ी चुनौतियों के बारे में बात की है, खासकर टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों के लिए।

डी सिल्वा का इस्तीफा पुरुष टीमों की लीडरशिप और प्रबंधन में हो रहे बड़े बदलावों का हिस्सा था। इस साल की शुरुआत में, कुसल मेंडिस को सफेद गेंद क्रिकेट की कप्तानी सौंपी गई थी, और उन्होंने चरिथ असलंका की जगह ली थी। मेंडिस उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन पर चयनकर्ता टेस्ट कप्तानी के लिए भी विचार करेंगे।

Pic Credit : UNI

आगरकर के लिए टीम सर्वोपरि, इतिहास योगदान याद रखेगा, गंभीर ने किया ट्वीट

अजीत आगरकर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और न्यूजीलैंड दौरे की टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा हो चुकी है। ऐसे में मुख्य कोच गौतम गंभीर ने एक ट्वीट लिखकर अजीत आगरकर और उनकी उपलब्धियों को गिनाते हुए एक ट्वीट किया है।

गंभीर ने पोस्ट किया, ‘‘प्रिय अजीत भाई, आपके साथ काम करना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात रही। तीन आईसीसी ट्रॉफियां आपके भरोसे की गवाही देती हैं जिसमें हमेशा टीम को सर्वोपरि रखा गया। मुझे कहना होगा कि इतिहास आपके योगदान को याद रखेगा। हर चीज के लिए धन्यवाद। आपके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। ’’

कड़े फैसले लेने के लिए बने थे मुख्य चयनकर्ता

अजीत आगरकर के कार्यकाल ने भारत ने साल 2024 और 2026 का टी-20 विश्वकप और साल 2025 की चैंपियन्स ट्रॉफी जीती। बोर्ड ने उनको कड़े फैसले लेने के लिए भेजा था। अजीत आगरकर ने टी-20 विश्वकप  2024 में रोहित और विराट को शामिल कर पहले ही संदेश दे दिया था कि यह विश्वकप उनका आखिरी है। दोनों ने यह बात मान भी ली थी।

वहीं टेस्ट क्रिकेट में दोनों का फॉर्म खराब हो गया और दोनों को संन्यास लेना पड़ा। अजीत आगरकर की यहां भी जीत हुई। लेकिन जब उन्होंने कहा कि एकदिवसीय विश्वकप के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली अनिर्णित है तब से चयनकर्ताओं और खिलाड़ियों में रस्साकशी शुरु हो गई और अंत में अजीत आगरकर की हार हुई। उन्होंने टी-20 विश्वकप विजेता सूर्यकुमार यादव को भी टूर्नामेंट जीतने के तुरंत बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

भारत की ओर से 26 टेस्ट और 191 एकदिवसीय मैच खेलने वाले आगरकर ने लाल गेंद की क्रिकेट में 58 और सीमित ओवर की क्रिकेट में 288 विकेट लिए। उन्होंने टीम के लिए दो विश्वकप भी खेले। उनके नाम लॉर्ड्स के मैदान पर एक टेस्ट शतक और लंबे समय तक सबसे सीमित ओवर की क्रिकेट में तेज पजास रन और पचास विकेट का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा।