3 करोड़ सैलरी भी है कम! पार्थिव पटेल ने क्यों नहीं किया चीफ सेलेक्टर के लिए आवेदन? जानें वजह

अजीत अगरकर के जाने के बाद से बीसीसीआई नए चीफ सेलेक्टर की तलाश जारी है। वहीं ऐसी खबरे थी की पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल को इस पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। ऐसी चर्चाएं भी थीं कि अगर पटेल इस पद के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें बोर्ड का पूरा समर्थन मिल सकता है। वहीं आवेदन करने की आखिरी तारीख बीत जाने के बावजूद पार्थिव पटेल ने इस पद के लिए अपना नाम नहीं दिया। वहीं रिपोर्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीफ सेलेक्टर को मिलने वाली सैलरी की वजह से पार्थिव ने आवेदन नहीं किया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

इस वजह से पार्थिव ने नहीं दिया नाम

द टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आर्थिक कारणों के चलते मुख्य चयनकर्ता बनने का फैसला छोड़ दिया। BCCI इस पद के लिए उन्हें हर साल 3 करोड़ रुपये देने को तैयार था, लेकिन यह जिम्मेदारी स्वीकार करने पर उन्हें गुजरात टाइटंस में अपनी कोचिंग की नौकरी और कमेंट्री से होने वाली कमाई छोड़नी पड़ सकती थी। ऐसे में उन्हें इस पद को चुनने से आर्थिक नुकसान होने की आशंका थी। फिलहाल, साउथ जोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं।

वहीं, वेस्ट जोन से एक नए चयनकर्ता को भी टीम में शामिल किया जाना है। इस पद के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर और रमेश पोवार के नामों की चर्चा हो रही है। दोनों को मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

अश्विन ने सैलरी को लेकर उठाए सवाल

भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर चयनकर्ताओं की सैलरी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, BCCI में चयनकर्ता के पद पर मिलने वाली रकम इतनी नहीं है कि बड़े और अनुभवी क्रिकेटर इस जिम्मेदारी को लेने के लिए आगे आएं। अश्विन ने कहा कि, ‘अगर सेलेक्टर्स की सैलरी बढ़ाई जाती है, तो इस पद के लिए बड़े और अनुभवी क्रिकेटर आगे आ सकते हैं। उन्होंने सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छे स्तर के चयनकर्ताओं को लाने के लिए इस पद को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाना जरूरी है।”

हेड कोच जितनी मिले सैलरी

अश्विन ने आगे कहा, “चयनकर्ता बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर मीडिया में काम नहीं कर सकते, खिलाड़ियों पर खुलकर चर्चा नहीं कर सकते और न ही कहीं कोचिंग दे सकते हैं, क्योंकि इससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, उन्हें पूरे साल घरेलू क्रिकेट और IPL पर नजर रखनी पड़ती है। अश्विन का मानना है कि अगर मुख्य चयनकर्ता को भारतीय टीम के मुख्य कोच के बराबर वेतन मिले, तो इस पद के लिए बेहतर अनुभव और योग्यता वाले लोग सामने आएंगे।” उन्होंने यह पूछकर अपनी बात खत्म की कि क्या बोर्ड पहले उन पेडिग्री वाले सिलेक्टर्स को चाहता था।

टेस्ट क्रिकेट में स्टीव स्मिथ बने सर्वाधिक कैच पकड़ने वाले फील्डर, तीसरे नंबर पर एक भारतीय

टेस्ट क्रिकेट के सफलतम बल्लेबाजों में से एक स्टीव स्मिथ ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक बेहतरीन कैच लेकर ना केवल चपलता लेकर बौद्धिक शक्ति बताई बल्कि वह टेस्ट के सर्वकालिक बेहतरीन फील्डर में शुमार हो गए। उनका यह कैच 221वां कैच था।

वह इंग्लैंड के कप्तान जो रूट से आगे निकल गए जिनसे फैब फोर में उनकी तुलना अक्सर होती रहती है।  164 टेस्ट मैचों में 210 कैच पकड़ने वाले राहुल द्रविड़ तीसरे स्थान पर हैं। हालांकि राहुल द्रविड़ ने कुछ टेस्ट मैचों में भारत के लिए विकेटकीपिंग की थी तब वह इस आंकड़े पर पहुंच पाए।

हालांकि बल्ले से स्टीव स्मिथ का संघर्ष जारी है और उनको एक बार फिर मौजूदा टेस्ट में सिर पर चोट लग चुकी है। ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में तेज गेंदबाज एनरिच नॉर्किया की गेंद हेलमेट पर लगने के बाद कनकशन जांच के लिये भेजा जायेगा।

सैतीस वर्ष के स्मिथ को मैच के चौथे दिन सोमवार को नॉर्किया की शॉर्टपिच गेंद को खेलने के प्रयास में चोट लगी।वह दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी में फील्डिंग के लिये नहीं आये।क्रिकेट आस्ट्रेलिया की सिर की चोट और कनकशन नीति के तहत स्मिथ को अगले 24 घंटे निगरानी में रखा जायेगा। कनकशन (सिर में चोट) होने पर उन्हें मेडिकल अधिकारी से हरी झंडी मिलने तक क्रिकेट से दूर रहना होगा।

स्मिथ को 2019 में एशेज टेस्ट के दौरान इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की गेंद भी सिर पर लगी थी। उनके स्थान पर खेलने आए मार्नस लाबुशेन ने बेहतरीन पारी खेल अपनी जगह सुनिश्चित की थी और वह अब तक टीम की योजनाओं में शामिल है।

IND vs WI: ‘तूफान होकर भी वैभव सूर्यवंशी पिला रहा पानी’ खिलाड़ी को बेंच पर बैठाने को लेकर भड़के कोच

Vaibhav Sooryavanshi: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज जारी है। पांच मैचों की T20I सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भी जगह दी गई है। वहीं उन्हें अभी प्लेइंग 11 में शामिल नहीं किया गया है। फैंस को वैभव को मैदान पर देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 15 साल के वैभव ने जुलाई 2026 में इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। लेकिन भारत लौटने के बाद उन्हें लगातार खेलने का मौका नहीं मिल पाया। टीम में ओपनिंग के लिए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को प्राथमिकता मिलने के कारण वैभव को फिलहाल बेंच पर रहना पड़ रहा है।

वहीं हाल ही में एक इंटरव्यू में वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने गौतम गंभीर की अगुवाई वाली टीम मैनेजमेंट पर युवा खिलाड़ी को संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठाए। आइए जानते हैं कोच ने क्या कहा

बेंच पर बैठकर नहीं तैयार होते खिलाड़ी

सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने स्पोर्ट्स नाउ से कहा, “मेरे हिसाब से, वैभव एक तूफान की तरह है। जो कोई भी उसे रोकने की कोशिश करेगा, वह आखिरकार टूट जाएगा, आज नहीं तो कल।” कोच ने आगे कहा, “मौजूदा भारतीय टीम मैनेजमेंट का मानना है कि खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर तैयार किया जा सकता है। लेकिन क्रिकेट के कई दिग्गजों से बात करेंगे तो वे भी यही कहेंगे कि अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में उतारना जरूरी है। उन्हें खेलने का मौका देना होगा। बेंच पर बैठकर कोई खिलाड़ी न पहले कभी बना है और न आगे बनेगा। खासकर तब, जब आपके पास वैभव जैसा टैलेंट मौजूद हो।”

मैनेजमेंट के रवैये को “तानाशाही” बताया

ओझा ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सवाल उठाते हुए उनके रवैये को “तानाशाही” जैसा बताया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि उन्होंने तय कर लिया है कि इस बच्चे को मौका नहीं देना है। उसे बाहर रखेंगे और परेशान करेंगे। वह अभी बेंच पर बैठकर पानी पिला रहा है। मुझे लगता है कि मौजूदा मैनेजमेंट का रवैया एक तरह की तानाशाही जैसा है, जहां वे वही कर रहे हैं जो उन्हें सही लग रहा है।”

एशियन गेम्स में मिला था मौका

2026 के एशियन गेम्स के दौरान टीम इंडिया के T20I की जिम्मेदारी वीवीएस लक्ष्मण के पास थी। उस समय गौतम गंभीर वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में व्यस्त थे। इसी दौरान टीम ने संजू सैमसन को बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेजा और वैभव सूर्यवंशी को अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करने का मौका मिला। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ T20I सीरीज में टीम इंडिया ने बल्लेबाजी क्रम में फिर बदलाव किया। संजू सैमसन को दोबारा ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने शुरुआती तीन मुकाबलों में पारी की शुरुआत की। वहीं, वैभव सूर्यवंशी को इन मैचों में प्लेइंग XI में जगह नहीं मिली और उन्हें बेंच पर बैठकर ही इंतजार करना पड़ा।

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VVS लक्ष्मण को मिली बड़ी भूमिका, टीम चयन में रहेगा योगदान

भारतीय क्रिकेट के पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण लंबे समय से भारतीय क्रिकेट टीम के साथ बतौर कोच समय बिता चुके हैं। जब राहुल द्रविड़ मुख्य टीम के साथ व्यस्त रहते थे तो राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण युवा टीम के साथ दौरे पर जाते थे। पिछली बार की तरह इस बार भी एशियाड में वीवीएस लक्ष्मण ही कोच थे। अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उनको बड़ी जिम्मेदारी देने का मन बना लिया है।अब टीम का चयन करते वक्त उनकी भी राय ली जाएगी ऐसा बोर्ड सचिव देवाजीत सैकिया ने कहा है।

इंग्लैंड के हालिया दौरे पर दूसरे वनडे से पहले रोहित के करियर खत्म होने की खबरों का बाहर आना, उसके बाद बीसीसीआइ सचिव देवजीत सैकिया का मुख्य चयनकर्ता से बात किए बिना ये कहना कि रोहित जब तक टीम योजना का हिस्सा हैं। इन सब परिस्थितियों ने पहलुओं को बहुत उलझा दिया है।

BCCI पदाधिकारियों को लगता है कि लक्ष्मण की बातों को ज्यादा तवज्जो मिलेगी और रोहित-विराट जैसे सीनियर खिलाड़ी भी उनकी बात को मानेंगे। भारतीय टीम प्रबंधन नहीं चाहता था कि रोहित शर्मा 2027 वनडे विश्व कप खेलें। इसको लेकर इंग्लैंड दौरे के दौरान एक चयनकर्ता ने बोर्ड को शीशे में भी ढाल लिया था लेकिन मामला उल्टा पड़ गया।ऐसा माना जा रहा है कि वीवीएस लक्ष्मण ना केवल गुत्थियों को सुलझाएंगे बल्कि बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच एक पुल का काम भी करेंगेँ।

51 वर्ष के लक्ष्मण 5 साल से NCA के प्रमुख हैं और भारतीय क्रिकेटरों की अगली नस्ल को बखूबी जानते हैं। द्रविड़ के अवकाश पर होने पर उन्होंने सीनियर टीम की कोचिंग भी की है। उनके कोच रहते भारत ने एशियाई खेल, आस्ट्रेलिया के खिलाफ द्विपक्षीय टी20 श्रृंखला और इंग्लैंड, न्यूजीलैंड तथा आयरलैंड में श्रृंखलायें खेली है।

लक्ष्मण के चमकदार करियर की विदाई रही कड़वी

द्रविड़ की तरह लक्ष्मण को भी मैदान पर विदाई लेने का मौका नहीं मिला। अपने करियर में अधिकतर समय ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की नाक में दम करने वाले लक्ष्मण के करियर का अंत आखिर में ऑस्ट्रेलिया दौरे के साथ ही हो गया। लक्ष्मण ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में चार टेस्ट मैचों में 19.37 की औसत से 155 रन बनाए थे। इसके बाद भी वह भारत के घरेलू सत्र की तैयारियों में जुटे थे लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ अगस्त 2009 में होने वाली टेस्ट श्रृंखला के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्होंने 18 अगस्त को अचानक संन्यास लेने की घोषणा करके सभी को चौंका दिया था।

माना जा रहा था कि चयनकर्ताओं ने लक्ष्मण को कह दिया था कि यह उनकी आखिरी श्रृंखला होगी और इस कलात्मक बल्लेबाज ने इससे पहले टेस्ट क्रिकेट छोड़ना उचित समझा।भारत के लिए कई यादगार पारियां खेलने वाले लक्ष्मण ने अपना करियर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू किया था। उन्होंने 134 टेस्टों में 8781 रन बनाए जिनमें 17 शतक और 56 अर्द्धशतक शामिल हैं। लक्ष्मण ने 86 वनडे में छह शतकों के साथ 2338 रन भी बनाए।

ना कोहली ना रिकी पोंटिंग और ना ही कपिव देव…राहुल द्रविड़ ने इन्हें बताया दुनिया का नंबर-1 कप्तान

इंटरनेशनल क्रिकेट में कई ऐसे कप्तान रहे हैं, जिन्होंने अपनी टीम को बड़ी जीत दिलाकर इतिहास में खास जगह बनाई। इस लिस्ट में क्लाइव लॉयड से लेकर कपिल देव, इमरान खान, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे कई कप्तान शामिल है। वहीं हाल ही में राहुल द्रविड़ ने बताया कि उनका पसंदीदा कप्तान कौन है। एक क्रिकेट चैलेंज में राहुल को 15 महान कप्तानों में से अपनी पसंद चुननी थी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और हेड कोच राहुल ने इस दौरान पहले नंबर पर ना तो विराट कोहली को रखा और ना ही पोटिंग और रोहित शर्मा को। आइए जानते हैं राहुल ने किसको चुना बेस्ट कैप्टन

धोनी को बताया बेस्ट कप्तान

ईएसपीएनक्रिकइन्फो के क्विज में राहुल को 15 महान कप्तानों में से अपनी पसंद चुननी थी। चैलेंज के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के 1992 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान इमरान खान और वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए धोनी को चुना। द्रविड़ ने धोनी को अपनी पहली पसंद बताया। बता दें राहुल धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके फैसले और अलग-अलग दौर के महान कप्तानों को लेकर अपनी राय शेयर कर रहे हैं।

किस राउंड में किसे चुना

राहुल द्रविड़ को एक खास चैलेंज के दौरान जब उन्हें अलग-अलग दौर के दिग्गज कप्तानों में से चुनना था, तो द्रविड़ ने धोनी को अपनी पहली पसंद बताया। राहुल द्रविड़ को इस चैलेंज के शुरुआती दौर में कई शानदार कप्तानों के बीच अपनी पसंद तय करनी थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ को सबसे आगे रखा और लगातार कई राउंड में उन्हें चुना। द्रविड़ ने बेन स्टोक्स, केन विलियमसन, अर्जुन रणतुंगा, ग्रीम स्मिथ और स्टीफन फ्लेमिंग जैसे दिग्गज कप्तानों की तुलना में स्मिथ को तरजीह दी। इस तरह स्मिथ ने शुरुआती मुकाबलों में अपनी जगह मजबूत कर ली।

इस चैलेंज में राहुल द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया के कई दिग्गज कप्तानों के बीच भी स्टीवन स्मिथ को अपनी पसंद बनाए रखा। उन्होंने माइकल क्लार्क, इयोन मॉर्गन और पैट कमिंस जैसे कप्तानों की तुलना में स्मिथ को चुना, लेकिन रिकी पोंटिंग के सामने उनकी पसंद बदल गई। इसके बाद पोंटिंग ने एलन बॉर्डर को हराकर अगले दौर में जगह बनाई, जहां उनका सामना स्टीव वॉ से हुआ। आखिरकार द्रविड़ की पसंद के तौर पर सामने आए स्टीव वॉ ने पोंटिंग को पीछे छोड़ते हुए ऑस्ट्रेलियाई कप्तानों वाले इस दौर को जीत लिया।

 

राहुल द्रविड़ ने एमएस धोनी को अपना सबसे पसंदीदा कप्तान चुनकर सभी का ध्यान खींचा। इसके बाद मुकाबला भारतीय और पाकिस्तानी कप्तानों के बीच पहुंचा। स्टीव वॉ और विराट कोहली में से किसी एक को चुनने की बारी आई तो द्रविड़ ने कोहली को चुना।

धोनी की कप्तानी सबसे अच्छी

चैलेंज के आखिरी दौर में राहुल द्रविड़ के सामने एमएस धोनी, इमरान खान और क्लाइव लॉयड जैसे बड़े कप्तानों में से चुनाव करने की स्थिति आई। इमरान खान के मुकाबले द्रविड़ ने धोनी को चुना। द्रविड़ ने धोनी की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत उनकी उपलब्धियों को बताया। उन्होंने कहा कि धोनी ऐसे इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी तीनों खिताब जीते हैं, इसलिए उनकी कप्तानी की सफलता की बराबरी करना मुश्किल है।

सहवाग और द्रविड़ के बेटे को साथ में मिला टीम में मौका, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ चयन

वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना खासा पसंद था। अब इन दोंनों क्रिकेटरों के बेटें को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही डेब्यू करने का मौका दिया जा रहा है। आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ को मार्च में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 अंडर 19  एकदिवसीय सीरीज में भारतीय टीम के लिए चुना गया है। यह  मैच राजकोट और अहमदाबाद में खेले जाएंगे। तीनों एकदिवसीय और पहला बहुदिवसीय मैच राजकोट में खेला जाएगा, जबकि दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद में होगा।

अन्वय द्रविड़ एक विकेटकीपर की हैसियत से इस टूर्नामेंट में खेलेंगे जिसमें कप्तान लक्ष्य रायचंदानी होंगे। यशवर्धन सिंह चौहान को लंबे प्रारूप के मुकाबलों के लिए कप्तान बनाया गया है। आर्यवीर सहवाग एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुने गए हैं। इससे पहले यह दोनों खिलाड़ी 3 साल पहले रणजी ट्रॉफी में आमने सामने हुए थे और अब दोनों साथ में खेलेंगे।

द्रविड़ के बड़े बेटे, समित द्रविड़, जो 20 वर्ष के हैं उन्हें भी 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ खेलने के लिए इंडिया अंडर-19 टीम में चुना गया था, लेकिन घुटने की चोट के कारण वह बाहर हो गए थे। समित ने कर्नाटक की टी20 लीग, महाराजा टी20 ट्रॉफ़ी में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अंडर-19 टीम में जगह बनाई थी।

भारत अंडर-19 एकदिवसीय टीम: लक्ष्य रायचंदानी (कप्तान), यशवर्धन चौहान, रजत बघेल, आर्यवीर सहवाग, वीके विनीत, कुशाग्र ओझा, अर्जुन राजपूत, मनाल चौहान, अन्वय द्रविड़, वी यशवीर, रोहित यादव, शाविन विनोद, मोहित उलवा, चिगुरुपति वेंकट और काव्या पटेल।

भारत अंडर-19 बहुदिवसीय टीम:यशवर्धन चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी, सागर विर्क, कुशाग्र ओझा, मनाल चौहान, कुश पटेल, मानव कृष्णा, अभिप्राय बिस्वास, रोहित यादव, ईशान ओम, अयान अकरम, प्रणव राघवेंद्र, प्रियांशु सिंह, मोहित उलवा और आर्यन यादव।

Rahul Dravid ने वैभव सूर्यवंशी को दी बड़ी सलाह, बोले- जल्दबाजी न करें

भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। आईपीएल में बेहरतरीन प्रदर्शन के बाद उनको भारत के टी20 टीम में शामिल किया गया। वहीं हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राहुल द्रविड़ ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के खेल को लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि वैभव का घरेलू क्रिकेट में सफेद और लाल गेंद दोनों फॉर्मेट में खेलना अच्छी बात है। द्रविड़ ने कहा कि, इतनी कम उम्र में मिले इस मौके का सही इस्तेमाल करने के लिए वैभव को अपने करियर में बैलेंस बनाए रखना चाहिए। इससे उसे लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है।

दिलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन वैभव

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने IPL में शानदार प्रदर्शन के बाद जून में इंग्लैंड के खिलाफ T20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था। अब वह दिलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए खेलेंगे और रेड-बॉल क्रिकेट में अपना हुनर दिखाएंगे। हालांकि, रणजी ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। उन्होंने तीन मैचों की 12 पारियों में 17.25 की औसत से रन बनाए। अंडर-19 टीम की जिम्मेदारियों के कारण वह घरेलू क्रिकेट में लगातार नहीं खेल पाए थे।

वैभव को दी ये सलाह

क्रिकइन्फो से बातचीत में राहुल द्रविड़ ने कहा, “मुझे लगता है कि करियर में हमेशा संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह अच्छी बात है कि वैभव को IPL के जरिए भारत में व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलने का अनुभव मिल रहा है। साथ ही, उसके पास भारतीय घरेलू क्रिकेट में लौटकर रेड-बॉल क्रिकेट खेलने और अपने इस करियर को आगे बढ़ाने का भी पूरा समय है।” उन्होंने आगे कहा, “हम सभी चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट मजबूत रहे और आगे बढ़ता रहे। इसके लिए वैभव जैसे खिलाड़ियों की जरूरत है, जो उम्मीद है कि आने वाले समय में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में खेल सकें।”

ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का मौका मिलना चाहिए

राहुल द्रविड़ ने IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स के साथ वैभव सूर्यवंशी के साथ काम किया था। द्रविड़ का माना कि, रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार खेलने से वैभव का अनुभव और खेल बेहतर होगा। द्रविड़ ने कहा, “अच्छी बात यह है कि वैभव के पास अभी काफी समय है और उसे अनुभव हासिल करने के लिए ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का मौका मिलेगा। उसने अब तक व्हाइट-बॉल क्रिकेट की तुलना में रेड-बॉल क्रिकेट कम खेला है। वह अभी सिर्फ 15 साल का है, इसलिए उसे समय देने और धैर्य रखने की जरूरत है। उसने शुरुआत में ही काफी सफलता हासिल की है, लेकिन करियर में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। ऐसे में लोगों को उसके साथ धैर्य रखना चाहिए।”

40 एकड़ की जमीन पर बने Centre of Excellence में है 3 क्रिकेट ग्राउंड 40 नेट पिच, 16 हजार Sq Ft का जिम (Video)

बीते कुछ दिनों में बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अच्छी खबरों में नहीं रहा है। जिन खिलाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट बांटे जाते हैं वह मैदान पर आकर अनफिट हो जाते हैं। लेकिन 9 अगस्त को  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 2 साल पूरे किए और क्रिकेटर्स को दी जाने वाली तमाम सुविधाएं ही इसकी उपलब्धि है। इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 3 बड़े क्रिकेट ग्राउंड है जिसमें अंतरराष्ट्रीय अभ्यास मैच हो चुके हैं। 40 नेट पिच और 33 सेंटर विकेट्स हैं। 8 लेन का इनडोर प्रेक्टिस एरिया है और 16 हजार Sq Ft का जिम है।इसका वीडियो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया।

बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मीडिया से बातचीत में सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, ‘‘उन्होंने बीसीसीआई की शीर्ष परिषद के सभी सदस्यों को साथ लिया और दृढ़ निर्णय किया कि इस परिसर का निर्माण युद्धस्तर पर किया जाना चाहिए। हमें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी की पुरानी और अस्थायी व्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत थी।’’ काम शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए शाह कई बार व्यक्तिगत रूप से यहां आए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई बड़ी परियोजना शुरू करनी होती है तो कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके अलावा जमीन को नियमित कराना भी जरूरी था। इन सभी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए जय कई मौकों पर खुद यहां आए।’’ यह सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि 40 एकड़ की यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी और कई लोग इसे वापस लेना चाहते थे। इसलिए 14 फरवरी 2022 को काम शुरू होने से पहले हर चीज को मंजूरी दिलाना जरूरी था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ बदलाव का दौर चुनौतीपूर्ण था। उस समय रोजर बिन्नी अध्यक्ष थे और हमने वीवीएस लक्ष्मण की भी मदद ली, जो उस समय इस पूरी योजना का हिस्सा बन चुके थे।’’

लक्ष्मण ने भी उस लंबे सफर को याद किया, जिसके लिए वह हैदराबाद से बेंगलुरु आए थे। उन्होंने बताया कि 2021 में जय शाह और तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने उनसे संपर्क किया था। उस समय राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच बनने जा रहे थे और बोर्ड राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में निरंतरता बनाए रखना चाहता था।

लक्ष्मण ने कहा, ‘‘मेरे लिए यह कठिन फैसला था। लेकिन एक क्रिकेटर के तौर पर मेरा हमेशा मानना रहा है कि जिन पूर्व खिलाड़ियों को इस महान खेल से लाभ मिला है, उनकी जिम्मेदारी है कि वे खेल के लिए अपना योगदान वापस दें। इसी सोच के साथ मैं दिसंबर 2021 में बेंगलुरु आ गया।’’ पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने पूरी परियोजना के दौरान शाह के मार्गदर्शन को याद करते हुए कहा, ‘‘करीब दो साल के भीतर पूरा बुनियादी ढांचा तैयार होकर काम करने लगा। इसका बड़ा श्रेय जय शाह को जाता है। वह उस समय बीसीसीआई सचिव थे और मैंने खुद देखा कि वह आर्किटेक्ट और L&T की टीम के साथ होने वाली हमारी विभिन्न बैठकों में कितनी दिलचस्पी लेते थे। उनका प्रयास रहता था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।’’

लक्ष्मण ने कहा, ‘‘यह देखकर अच्छा लगता है कि जो दृष्टिकोण था, उसे हकीकत में बदला गया। मेरा मानना है कि सभी नेतृत्व करने वालों के पास विजन होता है, लेकिन वह विजन तभी सार्थक होता है जब उसे वास्तविकता में बदला जाए। हमने नवंबर 2024 में उस विजन को वास्तविकता के रूप में देखा।’

वीवीएस लक्ष्मण बनने वाले थे टीम इंडिया के हेड कोच, इस वजह से ठुकराया था ऑफर

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने हाल ही में बताया कि जय शाह ने उन्हें भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य कोच बनने का प्रस्ताव दिया था। लक्ष्मण ने बताया कि, वह इस जिम्मेदारी को संभालना चाहते थे, लेकिन कुछ पर्सनल रीजन की वजह से टीम से जुड़ने से मना कर दिया था। वहीं राहुल द्रविड़ के के बाद गौतम गंभीर टीम के मुख्य कोच बने। गंभीर 2027 तक टीम के हेड कोच बने रहेंगे।

लक्ष्मण ने क्या कहा

लक्ष्मण ने ये नहीं बताया कि उन्हें मुख्य कोच बनने का प्रस्ताव किस समय मिला था। लेकिन ऐसा माना जा रहा कि ये 2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद की बात है, जब राहुल द्रविड़ का कार्यकाल खत्म होने वाला था। उस समय द्रविड़ आगे भी कोच बने रहने को लेकर तैयार नहीं थे। बाद में BCCI ने उनका कार्यकाल 2024 टी20 वर्ल्ड कप तक बढ़ा दिया। भारत ने द्रविड़ की कोचिंग में यह टूर्नामेंट जीतकर लंबे समय बाद ICC ट्रॉफी अपने नाम की।

पर्सनल वजह से नहीं लिया पद

वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा, “2023 में, मुझे हेड कोच बनना था।” उन्होंने आगे कहा, “पर्सनल वजहों से मैं यह काम नहीं कर पाया। मैं दो बार जय शाह से बात करने गया। वह मेरी वजहें समझ गए। जय और BCCI ने मुझे जो आजादी दी है, अपने विजन के साथ काम करने की, वह देवजीत और दूसरे अधिकारियों के साथ भी जारी है।” लक्ष्मण ने कहा कि हेड कोच बनने के बजाय उन्होंने बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के चेयरमैन का पद संभालने का फैसला किया, जो पहले राहुल द्रविड़ के पास था। उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने का फैसला किया।

दो साल का लिया एक्सटेंशन

उन्होंने आगे कहा, “मैंने दो साल के लिए एक्सटेंशन लिया और BCCI से वादा किया कि मैं यहां हेड कोच का पद नहीं ले रहा हूं। लेकिन मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को बेहतर बनाऊं, इसके लिए सही स्ट्रक्चर, प्रोसेस और प्रोटोकॉल तैयार करूं, ताकि आगे बढ़ने से पहले यहां एक मजबूत व्यवस्था बन सके।”

गौतम गंभीर बने भारत के कोच

राहुल द्रविड़ ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच का पद छोड़ दिया था। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण का नाम एक बार फिर इस पद के लिए चर्चा में आया। लेकिन, उस समय BCCI ने गौतम गंभीर को मुख्य कोच की जिम्मेदारी सौंपी। गंभीर इससे पहले IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स के मेंटर थे और उनकी अगुवाई में टीम ने खिताब जीता था। इसके बाद गंभीर के कार्यकाल में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और टी20 वर्ल्ड कप भी जीता।