Pragyan Ojha: गंभीर-कोहली के बीच नहीं है सबकुछ ठीक? प्रज्ञान ओझा के सामने सबसे बड़ी चुनौती

BCCI ने भारत के पूर्व क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा नया चीफ सिलेक्टर बनाया है। प्रज्ञान अजित अगरकर की जगह लेंगे। इसके साथ ही बोर्ड ने पूर्व भारतीय स्पिनर रमेश पोवार को भी सीनियर पुरुष चयन समिति में शामिल करने की पुष्टि की है। वहीं प्रज्ञान ओझा का बोर्ड और खिलाड़ियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई प्रमुख ने प्रज्ञान ओझा से कहा था कि वह परेशानी दूर करने में मदद करें। उन्हें मुख्य कोच गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच बातचीत की कमी को दूर करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सिलेक्शन कमिटी में साउथ ज़ोन को रिप्रेजेंट करने वाले ओझा ने अपने कार्यकाल के दौरान कभी-कभी कोहली से इस मुद्दे पर बात की थी। ओझा और कोहली ने भारत के लिए एक-दूसरे के साथ 22 मैच खेले हैं।

ओझा को दी जिम्मेदारी

ऐसी खबरें है कि इंग्लैंड दौरे के बाद जब पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने रोहित शर्मा को वनडे टीम से बाहर रखने का फैसला किया था, तो इसकी जानकारी रोहित तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रज्ञान ओझा को दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय ओझा और रोहित दोनों ब्रिटेन में थे। ओझा ने वहीं रोहित को चयनकर्ताओं के इस फैसले के बारे में बताया था।

24 टेस्ट मैच खेल चुके हैं ओझा

राष्ट्रीय चयनकर्ता के तौर पर प्रज्ञान ओझा अब तक ज्यादा चर्चा में नहीं रहे थे। लेकिन भारतीय क्रिकेट की एक अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद उन पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव होगा। अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता रहते हुए भारतीय टीम ने आईसीसी की दो बड़ी ट्रॉफियां जीती थीं। ऐसे में उनकी जगह लेना प्रज्ञान ओझा के लिए आसान नहीं होगा। प्रज्ञान ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्हें उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मुख्य चयनकर्ता के पद पर आगे बढ़ाया गया। ऐसी खबरें हैं कि, ओझा के बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भी अच्छे संबंध हैं। चयन से जुड़े मामलों में लक्ष्मण की भूमिका और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

खत्म हुआ 78 साल का इंतजार! रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार ने ठोके 400 रन, ब्रायन लारा और ब्रैडमैन के खास क्लब में हुए शामिल

3 करोड़ सैलरी भी है कम! पार्थिव पटेल ने क्यों नहीं किया चीफ सेलेक्टर के लिए आवेदन? जानें वजह

अजीत अगरकर के जाने के बाद से बीसीसीआई नए चीफ सेलेक्टर की तलाश जारी है। वहीं ऐसी खबरे थी की पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल को इस पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। ऐसी चर्चाएं भी थीं कि अगर पटेल इस पद के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें बोर्ड का पूरा समर्थन मिल सकता है। वहीं आवेदन करने की आखिरी तारीख बीत जाने के बावजूद पार्थिव पटेल ने इस पद के लिए अपना नाम नहीं दिया। वहीं रिपोर्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीफ सेलेक्टर को मिलने वाली सैलरी की वजह से पार्थिव ने आवेदन नहीं किया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

इस वजह से पार्थिव ने नहीं दिया नाम

द टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आर्थिक कारणों के चलते मुख्य चयनकर्ता बनने का फैसला छोड़ दिया। BCCI इस पद के लिए उन्हें हर साल 3 करोड़ रुपये देने को तैयार था, लेकिन यह जिम्मेदारी स्वीकार करने पर उन्हें गुजरात टाइटंस में अपनी कोचिंग की नौकरी और कमेंट्री से होने वाली कमाई छोड़नी पड़ सकती थी। ऐसे में उन्हें इस पद को चुनने से आर्थिक नुकसान होने की आशंका थी। फिलहाल, साउथ जोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं।

वहीं, वेस्ट जोन से एक नए चयनकर्ता को भी टीम में शामिल किया जाना है। इस पद के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर और रमेश पोवार के नामों की चर्चा हो रही है। दोनों को मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

अश्विन ने सैलरी को लेकर उठाए सवाल

भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर चयनकर्ताओं की सैलरी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, BCCI में चयनकर्ता के पद पर मिलने वाली रकम इतनी नहीं है कि बड़े और अनुभवी क्रिकेटर इस जिम्मेदारी को लेने के लिए आगे आएं। अश्विन ने कहा कि, ‘अगर सेलेक्टर्स की सैलरी बढ़ाई जाती है, तो इस पद के लिए बड़े और अनुभवी क्रिकेटर आगे आ सकते हैं। उन्होंने सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छे स्तर के चयनकर्ताओं को लाने के लिए इस पद को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाना जरूरी है।”

हेड कोच जितनी मिले सैलरी

अश्विन ने आगे कहा, “चयनकर्ता बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर मीडिया में काम नहीं कर सकते, खिलाड़ियों पर खुलकर चर्चा नहीं कर सकते और न ही कहीं कोचिंग दे सकते हैं, क्योंकि इससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, उन्हें पूरे साल घरेलू क्रिकेट और IPL पर नजर रखनी पड़ती है। अश्विन का मानना है कि अगर मुख्य चयनकर्ता को भारतीय टीम के मुख्य कोच के बराबर वेतन मिले, तो इस पद के लिए बेहतर अनुभव और योग्यता वाले लोग सामने आएंगे।” उन्होंने यह पूछकर अपनी बात खत्म की कि क्या बोर्ड पहले उन पेडिग्री वाले सिलेक्टर्स को चाहता था।