Pragyan Ojha: गंभीर-कोहली के बीच नहीं है सबकुछ ठीक? प्रज्ञान ओझा के सामने सबसे बड़ी चुनौती

BCCI ने भारत के पूर्व क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा नया चीफ सिलेक्टर बनाया है। प्रज्ञान अजित अगरकर की जगह लेंगे। इसके साथ ही बोर्ड ने पूर्व भारतीय स्पिनर रमेश पोवार को भी सीनियर पुरुष चयन समिति में शामिल करने की पुष्टि की है। वहीं प्रज्ञान ओझा का बोर्ड और खिलाड़ियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई प्रमुख ने प्रज्ञान ओझा से कहा था कि वह परेशानी दूर करने में मदद करें। उन्हें मुख्य कोच गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच बातचीत की कमी को दूर करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सिलेक्शन कमिटी में साउथ ज़ोन को रिप्रेजेंट करने वाले ओझा ने अपने कार्यकाल के दौरान कभी-कभी कोहली से इस मुद्दे पर बात की थी। ओझा और कोहली ने भारत के लिए एक-दूसरे के साथ 22 मैच खेले हैं।

ओझा को दी जिम्मेदारी

ऐसी खबरें है कि इंग्लैंड दौरे के बाद जब पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने रोहित शर्मा को वनडे टीम से बाहर रखने का फैसला किया था, तो इसकी जानकारी रोहित तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रज्ञान ओझा को दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय ओझा और रोहित दोनों ब्रिटेन में थे। ओझा ने वहीं रोहित को चयनकर्ताओं के इस फैसले के बारे में बताया था।

24 टेस्ट मैच खेल चुके हैं ओझा

राष्ट्रीय चयनकर्ता के तौर पर प्रज्ञान ओझा अब तक ज्यादा चर्चा में नहीं रहे थे। लेकिन भारतीय क्रिकेट की एक अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद उन पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव होगा। अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता रहते हुए भारतीय टीम ने आईसीसी की दो बड़ी ट्रॉफियां जीती थीं। ऐसे में उनकी जगह लेना प्रज्ञान ओझा के लिए आसान नहीं होगा। प्रज्ञान ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्हें उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मुख्य चयनकर्ता के पद पर आगे बढ़ाया गया। ऐसी खबरें हैं कि, ओझा के बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भी अच्छे संबंध हैं। चयन से जुड़े मामलों में लक्ष्मण की भूमिका और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

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3 करोड़ सैलरी भी है कम! पार्थिव पटेल ने क्यों नहीं किया चीफ सेलेक्टर के लिए आवेदन? जानें वजह

अजीत अगरकर के जाने के बाद से बीसीसीआई नए चीफ सेलेक्टर की तलाश जारी है। वहीं ऐसी खबरे थी की पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल को इस पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। ऐसी चर्चाएं भी थीं कि अगर पटेल इस पद के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें बोर्ड का पूरा समर्थन मिल सकता है। वहीं आवेदन करने की आखिरी तारीख बीत जाने के बावजूद पार्थिव पटेल ने इस पद के लिए अपना नाम नहीं दिया। वहीं रिपोर्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीफ सेलेक्टर को मिलने वाली सैलरी की वजह से पार्थिव ने आवेदन नहीं किया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

इस वजह से पार्थिव ने नहीं दिया नाम

द टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आर्थिक कारणों के चलते मुख्य चयनकर्ता बनने का फैसला छोड़ दिया। BCCI इस पद के लिए उन्हें हर साल 3 करोड़ रुपये देने को तैयार था, लेकिन यह जिम्मेदारी स्वीकार करने पर उन्हें गुजरात टाइटंस में अपनी कोचिंग की नौकरी और कमेंट्री से होने वाली कमाई छोड़नी पड़ सकती थी। ऐसे में उन्हें इस पद को चुनने से आर्थिक नुकसान होने की आशंका थी। फिलहाल, साउथ जोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं।

वहीं, वेस्ट जोन से एक नए चयनकर्ता को भी टीम में शामिल किया जाना है। इस पद के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर और रमेश पोवार के नामों की चर्चा हो रही है। दोनों को मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

अश्विन ने सैलरी को लेकर उठाए सवाल

भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर चयनकर्ताओं की सैलरी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, BCCI में चयनकर्ता के पद पर मिलने वाली रकम इतनी नहीं है कि बड़े और अनुभवी क्रिकेटर इस जिम्मेदारी को लेने के लिए आगे आएं। अश्विन ने कहा कि, ‘अगर सेलेक्टर्स की सैलरी बढ़ाई जाती है, तो इस पद के लिए बड़े और अनुभवी क्रिकेटर आगे आ सकते हैं। उन्होंने सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छे स्तर के चयनकर्ताओं को लाने के लिए इस पद को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाना जरूरी है।”

हेड कोच जितनी मिले सैलरी

अश्विन ने आगे कहा, “चयनकर्ता बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर मीडिया में काम नहीं कर सकते, खिलाड़ियों पर खुलकर चर्चा नहीं कर सकते और न ही कहीं कोचिंग दे सकते हैं, क्योंकि इससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, उन्हें पूरे साल घरेलू क्रिकेट और IPL पर नजर रखनी पड़ती है। अश्विन का मानना है कि अगर मुख्य चयनकर्ता को भारतीय टीम के मुख्य कोच के बराबर वेतन मिले, तो इस पद के लिए बेहतर अनुभव और योग्यता वाले लोग सामने आएंगे।” उन्होंने यह पूछकर अपनी बात खत्म की कि क्या बोर्ड पहले उन पेडिग्री वाले सिलेक्टर्स को चाहता था।

वसीम जाफर ने राष्ट्रीय चयनकर्ता पद के लिए किया आवेदन

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर पुरुष चयन समिति की दौड़ में शामिल हो गए हैं। अजीत अगरकर का कार्यकाल आगे न बढ़ाने के बीसीसीआई के फ़ैसले के बाद ख़ाली हुए राष्ट्रीय चयनकर्ता पद के लिए उन्होंने आवेदन किया है।

जाफ़र ने कहा, “हां, मैंने इस पद के लिए आवेदन किया है।” 48 वर्षीय जाफ़र ने भारत के लिए 31 टेस्ट खेले और पांच शतक लगाए। इनमें वेस्टइंडीज़ और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दोहरे शतक भी शामिल हैं। उनका टेस्ट करियर 2000 से 2008 तक रहा। इस दौरान उन्होंने 34.10 की औसत से 1944 रन बनाए। वनडे में जाफ़र ने 2006 में सिर्फ़ दो मैच खेले।

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हालांकि, घरेलू क्रिकेट में जाफ़र का रिकॉर्ड शानदार रहा है। वह रणजी ट्रॉफ़ी के इतिहास में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं और इस प्रतियोगिता में उनके नाम सबसे ज़्यादा शतक भी हैं। उन्होंने 260 प्रथम श्रेणी मैचों में 50 से अधिक के औसत से 19,410 रन बनाए और 57 शतक लगाए। उन्होंने 1996-97 सीज़न में मुंबई के लिए अपने सीनियर क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी और विदर्भ का प्रतिनिधित्व करते हुए क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया।

अगर अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) उन्हें चुनती है, तो अध्यक्ष पद के लिए विचार किए जा रहे उम्मीदवारों में जाफ़र के नाम सबसे ज़्यादा टेस्ट खेलने का रिकॉर्ड होगा। इसी आधार पर वह चयन समिति के अध्यक्ष बनेंगे।

जाफ़र ने प्रज्ञान ओझा से सात टेस्ट ज़्यादा खेले हैं। ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट खेले हैं। ओझा के अलावा मौजूदा चयनकर्ताओं में आरपी सिंह, अजय रात्रा और शिव सुंदर दास शामिल हैं।

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बैंगलूरू T-20I के लिए टीम से जुड़े भुवनेश्वर, 4 साल बाद हो सकती है वापसी

भुवनेश्वर कुमार का बैंगलूरू में रहना भारतीय टीम के लिए वरदान तब साबित हो गया जब  उनको न्यूजीलैंड सीरीज से पहले ही वेस्टइंडीज के खिलाफ पांचवे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में टीम से जोड़ लिया गया। गौरतलब है कि भुवनेश्वर कुमार बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में जुड़े थे। इसके अलावा वह यहां की लीग टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरू का भी हिस्सा है।

अर्शदीप सिंह को शमार जोसेफ ने चौथे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में बांह पर गेंद डालकर चोटिल कर दिया था। हालांकि वह अभी भी टीम का हिस्सा है लेकिन अगर वह फिट नहीं होते तो उनकी जगह भुवनेश्वर कुमार को मौका मिल सकता है। भारत बनाम वेस्टइंडीज की सीरीज 2-2 से बराबर चल रही है।

इससे पहले भुवनेश्वर कुमार की करीब 4 साल बाद टी-20 सीरीज में वापसी हुई है। इससे पहले वह भारत के लिए टी-20 विश्वकप 2022 खेल चुके थे। उन्हें करीब चार साल बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ इस महीने के अंत में होने वाली पांच मैच की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए टीम में भी हाल ही में चुना गया था।

पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के पद छोड़ने के बाद चयनकर्ताओं ने पहली बार टीम का चयन किया जिसकी घोषणा भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने की। प्रज्ञान ओझा अंतरिम मुख्य चयनकर्ता हैं।

भारतीय टीम न्यूजीलैंड में 22 अक्टूबर से एक नवंबर तक पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी। श्रृंखला का पहला मैच 22 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च में होगा जबकि दूसरा मुकाबला भी इसी शहर में 24 अक्टूबर को खेला जाएगा।

तीसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय 27 अक्टूबर को वेलिंगटन में होगा जबकि चौथा और पांचवां मैच क्रमश: 30 अक्टूबर और एक नवंबर को ऑकलैंड और हैमिल्टन में खेले जाएंगे।

भारत: श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, संजू सैमसन (विकेटकीपर), नमन धीर, वैभव सूर्यवंशी, तिलक वर्मा (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, शिवम दुबे, नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार , अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, प्रिंस यादव, रवि बिश्नोई, मयंक यादव।

अर्शदीप का खेलना संदिग्ध, भुवनेश्वर भारतीय टीम में शामिल

हैदराबाद में खेले गए चौथ टी-20 मैच चोटिल हुए तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का वेस्टइंडीज के खिलाफ पांचवें और आखिरी टी-20 मैच में खेलना संदिग्ध है। भारत ने अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को टीम में शामिल किया है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को बताया कि सीरीज का फैसला करने वाले इस मैच में अर्शदीप खेलेंगे या नहीं, इसका फैसला मैच से पहले उनकी रिकवरी को देखकर लिया जाएगा।

पांचवां टी-20 शनिवार को यहां एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। पांच मैचों की यह सीरीज फिलहाल 2-2 से बराबरी पर है। बुधवार को चौथे टी-20 मैच के दौरान बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के गेंदबाजी वाले कंधे में चोट लग गई थी। जिसके बाद चयन समिति ने कवर के तौर पर भुवनेश्वर को टीम में शामिल करने का फैसला किया।

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भुवनेश्वर के आने से इस अहम मुकाबले से पहले भारत को तेज गेंदबाजी में एक अनुभवी विकल्प मिल गया है। 36 वर्षीय भुवनेश्वर के पास सबसे छोटे प्रारुप का बहुत अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। वे नई गेंद को स्विंग कराने और डेथ ओवरों में बेहतरीन वेरिएशन के साथ गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं।

16 सदस्यीय भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं, जबकि तिलक वर्मा उप-कप्तान हैं। टीम में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, संजू सैमसन, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, नितीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव, नमन धीर और भुवनेश्वर कुमार शामिल हैं।

सीरीज बराबरी पर होने के कारण, शनिवार का मुकाबला ही विजेता तय करेगा। भारत की कोशिश होगी कि अर्शदीप की फिटनेस और चिन्नास्वामी स्टेडियम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने गेंदबाजी कॉम्बिनेशन को अंतिम रूप दिया जाए। यह घोषणा बीसीसीआई के मानद सचिव देवजीत सैकिया ने की।

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चुनाव हारकर भी तेलंगाना के मंत्री बने मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा (Video)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान में तेलंगाना राज्य में कांग्रेस के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने भी केंद्रीय पार्टी लाइन पकड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है और S.I.R (Special Intensive revision) को धोखाधड़ी बताया है।यह बातचीत उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कही जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि 3 साल पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना में घरेलू पिच पर भी नहीं जीत सके। तेलंगाना की हाई प्रोफाइल जुबली हिल्स सीट पर  उनकी स्थिती मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन वह इस सीट पर तब हार गए जब पूरे राज्य में कॉंग्रेस की आँधी चल रही थी।हार के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने मशहूर  और मुस्लिम चेहरा होने के कारण अल्पसंख्यक मंत्रालय थमा दिया।

कांग्रेस की आंधी में भी चुनाव हारे अजहर

इस सीट पर भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को कुल 26 राउंड की वोटिंग के बाद  62,343 वोट मिले। वहीं भारत राष्ट्र समिति के प्रतिद्वंदी मगांथी गोपीनाथ को 78282 वोट मिले थे। इस कारण मोहम्मद अजहरुद्दीन 15,939 वोटों से हार गए थे। तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के लंकाला दीपक रेड्डी रहे थे जिन्हें कुल 25,083 वोट हासिल हुए थे। साल 2018 में भी मगांथी गोपीनाथ की इस सीट पर जीत हुई थी लेकिन मोहम्मद अजहरुद्दीन को जीत का दावेदार बताया जा रहा था।

साल 2009 में कॉंग्रेस पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस ही साल लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की मुरादाबद सीट पर जीत अर्जित की थी।इसके बाद साल 2014 में वह राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव में  उतरे थे लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के  प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने उनको मात दी थी।

शानदार करियर का फिक्सिंग के आरोप ने किया अंत

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक अजहर ने भारत का 99 टेस्टों और 334 वनडे में प्रतिनिधित्व किया था। वह 1992, 1996 और 1999 के विश्व कप में भारत के कप्तान रहे थे।अजहर ने अपने करियर में 99 टेस्टों में 22 शतकों की मदद से 6215 रन और 334 वनडे में 7 शतकों की मदद से 9378 रन बनाए थे। वह भारत के सफल कप्तानों में शुमार थे। उन्होंने 47 टेस्टों में भारत का नेतृत्व किया और 14 मैच जीते जबकि वनडे में उन्होंने 174 मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 90 मैच जीते।

अपने शानदार करियर के दौरान अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में आया था जिसके बाद बीसीसीआई ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2012 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनपर लगा प्रतिबंध हटा दिया।

ऋषभ पंत न्यूजीलैंड के खिलाफ ए मैचों से बाहर, यह कीपर हुआ शामिल

 

न्यूजीलैंड ए के खिलाफ पहले दो चार-दिन के मैचों के लिए ऋषभ पंत की जगह कुमार कुशाग्र इंडिया ए में शामिल किया गया है।ऋषभ पंत को बाईं पसली में खिंचाव से उबरने की प्रक्रिया के कारण न्यूजीलैंड दौरे पर इंडिया ए के पहले दो चार-दिन के मैचों से बाहर कर दिया गया है और उनकी जगह कुमार कुशाग्र को टीम में शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि ऋषभ पंत टीम इंडिया के लिए सिर्फ लाल गेंद की क्रिकेट ही खेलते हैं ऐसे में यह उनके करियर के लिए ठीक संकते तो नहीं है। लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिए फाइनल में जाने के लिए मेहनत करने वाली टीम इंडिया के लिए भी झटका है।

ईरानी कप में शेष भारत की अगुआई करने वाले पंत की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है जिसके कारण वह शुरुआती दो मैच से बाहर हो गए हैं।इस दौरे के लिए पंत की उपलब्धता उनकी फिटनेस पर निर्भर थी। बीसीसीआई ने कहा कि वह बोर्ड की चिकित्सा टीम की निगरानी में हैं और अच्छी तरह उबर रहे हैं।

बीसीसीआई ने बयान में कहा कि तीसरे मैच के लिए उनकी उपलब्धता पर फैसला बाद में लिया जाएगा। पंत की चोट शुरुआती अनुमान से अधिक गंभीर लग रही है।

पुरुष चयन समिति ने पहले दो मैच के लिए पंत की जगह कुशाग्र को टीम में शामिल किया है।भारत ए टीम की कप्तानी ध्रुव जुरेल करेंगे। वह विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। टीम में यशस्वी जायसवाल, लोकेश राहुल और वाशिंगटन सुंदर जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के अलावा देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन भी शामिल हैं।

पिछले 4 साल में सिर्फ 1 वनडे मैच खेलने वाले ऋषभ पंत, जो वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला के लिए जगह बनाने में असफल रहे थे। ऋषभ पंत चैंपियन्स ट्रॉफी 2025 की विजयी टीम में भी शामिल थे लेकिन पूरे टूर्नामेंट में वह बैंच पर बैठे रहे थे।कुछ ऐसा ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की घरेलू सीरीज के दौरान हुआ जब चयनित हुए ऋषभ पंत को तीन मैचों की सीरीज में एक बार भी मौका नहीं मिला।

ऋषभ पंत को बीते कुछ सालों में लगभग हर दौरे में चोट लगी है। इंग्लैंड दौरे पर उनको पैर के अंगूठे और कोहनी में चोट लगी। इसके बाद उनको श्रीलंका में दूसरे टेस्ट में भी चोट लगी।

Dhruv Jurel

इंडिया A टीम:यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ध्रुव जुरेल (कप्तान, विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, औकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़, मुकेश कुमार और कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर)।

कमला क्लब का दौर खत्म, अब CSJMU में गढ़े जाएंगे यूपी के क्रिकेट सितारे,UPCA का नया क्रिकेट सेंटर बनेगा विश्वविद्यालय का मैदान, अलग-अलग मिट्टी की पिचों पर तैयार होंगे खिलाड़ी

उत्तर प्रदेश : दशकों तक उत्तर प्रदेश के क्रिकेटरों की नर्सरी रहे कमला क्लब का दौर अब खत्म हो चुका है। कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सूबे के घरेलू क्रिकेट को नया और आधुनिक ठिकाना मिलने जा रहा है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) परिसर में तैयार हो रहा क्रिकेट स्टेडियम आने वाले समय में उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के लिए बड़ा केंद्र बन सकता है। मैदान के संचालन और उपयोग को लेकर UPCA और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच एमओयू की तैयारी चल रही है. इसके बाद यहां प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए अभ्यास, ट्रायल और बड़े घरेलू मुकाबलों का रास्ता खुल सकता

खास अभ्यास का मौका, सात अलग-अलग पिचों पर खिलाड़ी तैयार होंगे

CSJMU का क्रिकेट मैदान अपनी पिचों के कारण खास है. यहां अलग-अलग तरह की मिट्टी का इस्तेमाल कर पिचें तैयार की जा रही हैं. इनमें महाराष्ट्र की लाल मिट्टी, ओडिशा के कालाहांडी की काली कपास मिट्टी और स्थानीय उन्नाव की मिट्टी शामिल है. इससे खिलाड़ियों को अलग-अलग तरह की पिचों पर खेलने का अनुभव मिलेगा. बल्लेबाजों को उछाल और गेंदबाजों को टर्न वाली पिचों पर अभ्यास करने का मौका मिलेगा.

मैदान में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम भी तैयार किया गया है, जिससे बारिश के बाद पानी जल्दी निकल सके और मैदान को कम समय में खेलने लायक बनाया जा सके. मैदान में पवेलियन और दर्शकों के बैठने की व्यवस्था भी तैयार की गई है. आने वाले समय में इसे घरेलू क्रिकेट के बड़े मुकाबलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता

रणजी से एज ग्रुप तक के मैचों की तैयारी

UPCA की योजना इस मैदान को सिर्फ अभ्यास तक सीमित रखने की नहीं है. एमओयू होने के बाद यहां रणजी ट्रॉफी, सीके नायडू ट्रॉफी, एज ग्रुप के ट्रायल, कैंप और अन्य घरेलू क्रिकेट गतिविधियां कराई जा सकती हैं. इससे कानपुर और आसपास के जिलों के युवा खिलाड़ियों को दूसरे शहरों में ट्रायल और अभ्यास के लिए कम जाना पड़ेगा.

बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बताया कि यूपी में क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर लगातार काम हो रहा है. कमला क्लब का करार खत्म होने के बाद खिलाड़ियों के लिए नए मैदान की जरूरत थी. CSJMU का मैदान इस कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता

 

खिलाड़ियों को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म, ऐसा बताया चेयरमैन ने

UP T20 लीग के चेयरमैन संजय कपूर ने बताया कि CSJMU के मैदान को लेकर UPCA और विश्वविद्यालय के बीच बातचीत चल रही है. यह मैदान खिलाड़ियों के अभ्यास और ट्रायल के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है. यहां आधुनिक सुविधाएं होने से युवा क्रिकेटरों को अपने ही शहर में बेहतर तैयारी का मौका मिलेगा.

कमला क्लब लंबे समय तक यूपी क्रिकेट की पहचान रहा है. इसी मैदान से कई खिलाड़ियों ने क्रिकेट की शुरुआत कर आगे का सफर तय किया. अब CSJMU का मैदान उस विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में नया पड़ाव बन सकता है. इसके साथ ही UPCA उन्नाव में भी बड़े स्तर पर क्रिकेट सेंटर विकसित करने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में आने वाले समय में कानपुर और आसपास के खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट की सुविधाएं पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद

T-20I टीम में बैंच पर बैठे वैभव सूर्यवंशी बिहार का रणजी मैच भी करेंगें मिस

वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी बैंच पर बैठे हैं और शायद यह पूरी सीरीज ही वह बैंच पर बैठे क्योंकि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इशारा कर दिया है कि वह विश्व विजेता टीम के संयोजन से खिलवाड़ नहीं करना चाहते। सूर्यवंशी सिर्फ एक वैकल्पिक सलामी बल्लेबाज हैं। ऐसे में वह ना ही राष्ट्रीय टीम के लिए खेल पा रहे हैं और ना ही अपने राज्य बिहार की रणजी टीम के साथ खेल पाएंगे।

वेस्टइंडीज के साथ चल रही पांच मैचों की टी-20 सीरीज के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी रणजी ट्रॉफी में बिहार की ओर से पहले चार मैच नहीं खेल पाएंगे। बिहार क्रिकेट में चल रही भारी उथल-पुथल के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से नियुक्त चयनकर्ताओं ने रणजी ट्रॉफी के पहले दो मैचों के लिए बिहार की 17 सदस्यीय टीम का चयन किया है।

बिहार इस बार एलीट ग्रुप में शामिल है और अपने अभियान की शुरुआत 11 अक्टूबर से नवनिर्मित राजगीर क्रिकेट स्टेडियम में उत्तर प्रदेश के खिलाफ करेगा। टीम का दूसरा मैच 18 अक्तूबर से मेजबान बड़ौदा से होगा। बिहार टीम की अगुवाई साकिबुल गनी करेंगे जबकि हिमांशु सिंह को उप-कप्तान बनाया गया है। वेस्टइंडीज और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा युवा बल्लेबाज सूर्यवंशी टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में टीम के साथ नहीं होंगे।

वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टी-20 सीरीज जहां 17 अक्टूबर तक चलेगी, तो वहीं उसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ 22 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच होने वाली पांच मैचों की टी-20 सीरीज में भी सूर्यवंशी भारतीय दल के साथ होंगे।

बिहार के पूर्व रणजी कप्तान आशुतोष अमन को प्रमुख कोच बनाया गया है जबकि पूर्व रणजी खिलाड़ी अशोक कुमार एसिस्टेंट कोच की भूमिका में होंगे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज साकिब हुसैन टीम के प्रमुख चेहरों में होंगे।

साकिब ने आईपीएल में 11 मैचों में 26.46 की औसत से 15 विकेट झटके थे। उनके अलावा मुंबई इंडियंस (एमआई) का हिस्सा रहे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद इजहार को भी टीम में जगह मिली है। इजहार को आईपीएल में डेब्यू का अवसर नहीं मिल पाया था।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) में प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव चल रहे हैं। 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह को बीसीए का प्रशासक नियुक्त किया था। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने बिहार की महिला और सभी एज-ग्रुप टीमों के चयन के लिए बीसीसीआई से मदद का अनुरोध किया। इसके बाद बीसीसीआई ने बिहार की क्रिकेट टीमों के चयन की जिम्मेदारी पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ताओं और अनुभवी क्रिकेटरों को सौंपी।

इस चयन समिति की अध्यक्षता भारत के पूर्व तेज गेंदबाज हरविंदर सिंह ने की। समिति में तमिलनाडु के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर शरत श्रीधरण और मध्य प्रदेश के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर अमिताभ विजयवर्गीय भी शामिल थे। इसके अलावा प्रशासक अश्विनी कुमार सिंह ने बिहार के पूर्व रणजी कप्तान सुनील कुमार, पूर्व रणजी खिलाड़ी और कोच ज़शान उल यक़ीन और बिहार की पूर्व महिला क्रिकेटर शिखा सोनी को बीसीए के साथ मिलकर काम करने वाली समिती में रखा है।

एलीट ग्रुप ए में बिहार का सामना उत्तर प्रदेश के अलावा बड़ौदा, मध्य प्रदेश, गोवा, जम्मू-कश्मीर, विदर्भ और पुडुचेरी से होगा। बिहार घर में अपने सभी मैच राजगीर में खेलेगा, जो पहली बार किसी प्रथम श्रेणी मैच की मेजबानी करने जा रहा है।

राजगीर के नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार रणजी मुकाबले का आयोजन होने से बिहार के क्रिकेट प्रेमियों में भी खासा उत्साह है। यह मुकाबला न केवल बिहार के घरेलू क्रिकेट सत्र की शुरुआत करेगा, बल्कि राजगीर के इस नए क्रिकेट मैदान को भी आधिकारिक बीसीसीआई के घरेलू क्रिकेट नक़्शे पर स्थापित करेगा।

रणजी ट्रॉफ़ी के लिए बिहार की टीम:– साकिबुल गनी (कप्तान), आयुष लोहारुका, मंगल महरौर, नमन गौरव, पीयूष सिंह, बिपिन कुमार सौरभ(विकेटकीपर), श्रमण निग्रोध (विकेटकीपर), आकाश राज, पृथ्वी राज, हिमांशु सिंह (उप-कप्तान), ख़ालिद आलम, सूरज कुमार कश्यप, साकिब हुसैन, मोहम्मद इज़हार, शब्बीर ख़ान, राघवेंद्र सिंह और आमोद यादव।

‘अगर दोबारा ड्रॉप भी हुआ तो…’, टीम इंडिया में वापसी के बाद ईशान किशन ने बताया अपना फोकस

भारतीय क्रिकेटर ईशान किशन के लिए साल 2026 काफी खास रहा है। भारतीय टीम में वापसी के बाद से ही ईशान किशन बेहरतीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं। ईशान किशन को इस साल जनवरी में भारतीय टीम में वापसी की थी। साल 2023 के अंत में इंटरनेशनल क्रिकेट से ब्रेक लेने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। उस समय ईशान साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद अपनी घरेलू टीम झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी मैच खेलने नहीं उतरे थे। इसके बाद ईशान को बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में भी जगह नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की और लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर टीम में फिर अपनी जगह बनाई। लगातार मेहनत के बाद ईशान ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से टीम में वापसी की और लगातार अच्छे प्रदर्शन से अपनी जगह मजबूत की।

‘मैंने धैर्य बनाए रखा’

ईशान किशन ने JioHotstar पर कहा, “जब मुझे इंटरनेशनल टीम से बाहर किया गया, तो मुझे अपनी कुछ गलतियों के नतीजों का एहसास हुआ। इसलिए, मैंने अपनी फिटनेस और बल्लेबाजी पर काम किया। मैंने धैर्य रखा और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी गलतियों को सुधारने पर ध्यान दिया।” उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि अगर मैं घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करता रहा, तो मुझे मौका जरूर मिलेगा और अपनी मेहनत के दम पर मुझे नेशनल टीम में वापस बुलाया गया। एक बार टीम में वापसी करने के बाद आप यह नहीं सोचते कि अगर दोबारा बाहर कर दिया गया तो क्या होगा।”

लगातार रन बनाना मेरा काम

उन्होंने आगे कहा, “सबसे जरूरी है कि क्रिकेट का आनंद लिया जाए और टीम की सफलता में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने पर ध्यान दिया जाए। मेरा काम लगातार रन बनाना है और अगर मैं ऐसा करता रहा, तो बाकी चीजें अपने आप सही हो जाएंगी।” उन्होंने कहा, “एक बल्लेबाज के तौर पर, जब मैं अच्छी फॉर्म में नहीं होता और दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में बल्लेबाजी कर रहा होता है और गेंद को अच्छे से हिट कर रहा होता है, जैसा कि इस मामले में श्रेयस अय्यर कर रहे थे, तो मुझे दूसरे बल्लेबाज को सपोर्ट करने में कोई दिक्कत नहीं होती।”

ईशान ने खेली शानदार पारी

मंगलवार को लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 मुकाबले में ईशान किशन ने शानदार पारी खेली। भारत को 172 रन का लक्ष्य मिला था, जिसे टीम ने 14.4 ओवर में हासिल कर लिया। इशान ने कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर 137 रन की नाबाद साझेदारी की। इशान के मुताबिक, जब किसी बल्लेबाज का बल्ला अच्छी तरह चल रहा हो, तो दूसरे बल्लेबाज को उसके लिए अपनी भूमिका बदलने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अय्यर ने ठोका शतक

ईशान ने कहा, “वह (अय्यर) हमारी साझेदारी में ज्यादातर रन बना रहे थे और जब वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे हों, तो मेरा काम होता है कि उन्हें विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बनाने का मौका दूं। उन्होंने यह काम बहुत अच्छी तरह किया और आखिर में हमने लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा कर लिया।” श्रेयस अय्यर ने नाबाद शतक लगाकर टी20 इंटरनेशनल में अपनी पहली सेंचुरी पूरी की। इसके साथ ही वह उन चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए, जिन्होंने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने का कारनामा किया है।