कम से कम 90 सिविलियन मारे गए, ये चुनाव नहीं ढोंग है…! PoK चुनाव पर भारत ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब

भारत ने पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे कथित चुनावों को सिरे से खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार 4 अगस्त को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कराए जा रहे चुनावों की सख्त आलोचना की। भारत ने इन चुनावों को पूरी तरह दिखावटी और वास्तविकता से दूर बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कराए जा रहे ये तथाकथित स्थानीय चुनाव सिर्फ एक दिखावा हैं और इनका कोई वास्तविक महत्व नहीं है।

‘दिखावटी चुनाव सच्चाई नहीं बदल सकते’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कराए जा रहे स्थानीय चुनाव सिर्फ दिखावा हैं। उन्होंने कहा कि वहां लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और हालात सामान्य नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में कई लोगों की जान गई है। उनके मुताबिक, ऐसे दिखावटी चुनाव वहां की वास्तविक स्थिति को नहीं छिपा सकते। रणधीर जायसवाल ने कहा कि जून से अब तक पीओके में करीब 90 आम नागरिकों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के विरोध का जवाब पाकिस्तान प्रशासन गोलियां चलाकर, ब्लैकआउट करके, डराने-धमकाने और दमन के जरिए दे रहा है। साथ ही, वह चुनाव कराकर अपने शासन को सही साबित करने की कोशिश कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को अपने कदमों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह मानवाधिकारों के मुद्दे पर पाकिस्तान के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर समझे। उन्होंने कहा कि जून से अब तक पीओके में जारी कार्रवाई के दौरान करीब 90 आम नागरिकों की मौत हुई है। उनके अनुसार, जनता के विरोध का जवाब पाकिस्तान प्रशासन गोलियां चलाकर, ब्लैकआउट करके, डराने-धमकाने और दमन के जरिए दे रहा है। साथ ही, चुनाव कराकर अपने शासन को सही साबित करने की कोशिश की जा रही है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और दुनिया को वहां की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

पीओके में तनाव बढ़ा, हालात को लेकर गंभीर दावे

विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में तनाव बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई कर रहा है। समिति का दावा है कि पीओके में मानवीय संकट जैसे हालात पैदा हो गए हैं। उसके अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है, कई लोग घायल हुए हैं और अस्पतालों में दवाओं तथा खून की कमी हो गई है। साथ ही, लोगों की आवाजाही पर भी कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। जेकेजेएएसी ने पाकिस्तान रेड क्रिसेंट सोसाइटी और अल-खिदमत फाउंडेशन से रावलकोट, मीरपुर और अन्य प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत पहुंचाने की अपील की है। समिति का कहना है कि इन क्षेत्रों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और मेडिकल आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।

भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स को फटकार लगाई:PoK को पाकिस्तानी कश्मीर बताने पर आपत्ति जताई , कहा- यह भारत का अभिन्न हिस्सा है

भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसा कुछ नहीं है, केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) है। दूतावास ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा हमेशा रहेंगे। दूतावास ने पाकिस्तान पर इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा करने और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप भी लगाया। भारत ने कहा कि इस मुद्दे पर उसका रुख पहले से स्पष्ट और अपरिवर्तित है। भारतीय दूतावास की यह प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें पीओके में हालिया अशांति और स्थानीय चुनावों का जिक्र करते हुए इस क्षेत्र को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ कहा गया था। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच झड़प, दो लोगों की मौत और चुनावी प्रक्रिया पर पड़े असर का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही अखबार ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

PoK में आज विधानसभा चुनाव का पहला चरण:45 में से 13 सीटों पर मतदान; विरोध प्रदर्शन की वजह से तीन चरणों में चुनाव होगा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं।

बांग्लादेश में होगा Asia Cup 2027 का आयोजन! टी20 नहीं वनडे फॉर्मेट में होगा टूर्नामेंट, शेड्यूल आया सामने

Asia Cup 2027: अगले साल होने वाले एशिया कप 2027 की तारीखों को लेकर बड़ा अपडेट आया है। इस बार टूर्नामेंट बांग्लादेश की मेजबानी में 50-ओवर फॉर्मेट में खेला जाना तय है। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया कप 2027 की शुरुआत 18 जून को होगी वहीं इसका फाइनल मुकबाला 4 जुलाई 2027 को खेला जाएगा। टूर्नामेंट सभी मुकाबले मीरपुर, चटगांव और सिलहट को संभावित मेजबान शहरों के रूप में चुना गया है। वहीं एशिया कप खेलने के लिए भारतीय टीम का बांग्लादेश जाना अभी तय नहीं है। पिछले साल से दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है।

कब शुरू होगा एशिया कप

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया कप 2027 की शुरुआट वनडे वर्ल्ड कप से पहले 18 जून से 5 जुलाई तक खेला जाएगा। मंगलवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की सुरक्षा समिति के चेयरमैन सईद इब्राहिम अहमद ने बताया कि, एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने प्रस्तावित तीनों स्टेडियमों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट की मेजबानी की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए इस दिशा में काम चल रहा है।

एसीसी ने तीन प्रस्तावित वेन्यू की रिपोर्ट

सईद इब्राहिम अहमद ने कहा, “हमसे संपर्क किया गया है और एसीसी ने तीन प्रस्तावित वेन्यू के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में इस मामले को औपचारिक रूप दे दिया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “हम बोगुरा के शहीद चंदू स्टेडियम पर भी काम कर रहे हैं। वहीं, फिलहाल हमारी प्राथमिकता ढाका, सिलहट और चटगांव के वेन्यू हैं। बोगुरा को लेकर भी तैयारी जारी है, लेकिन अभी पूरा ध्यान इन तीन शहरों पर है।”

सफल टूर्मामेंट का हो आयोजन

सईद इब्राहिम अहमद ने कहा, “हमें उम्मीद है कि इन तीनों वेन्यू में से हर एक पर कम से कम एक मैच जरूर खेला जाएगा। अंतिम फैसला होने के बाद हम अगले कुछ दिनों में और जानकारी शेयर करेंगे। हमें भरोसा है कि इतने सालों बाद एशिया कप फिर से बांग्लादेश लौटेगा। हमारी कोशिश है कि खिलाड़ियों, प्रशंसकों और क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक सफल टूर्नामेंट आयोजित किया जाए।”

पिछले साल हुए थी तनातनी

रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 एशिया कप पर इस बार क्रिकेट के साथ-साथ राजनीतिक माहौल का भी असर देखने को मिल सकता है। 2026 टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट संबंधों को लेकर कई चर्चाएं हुई थीं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो सितंबर में भारत के प्रस्तावित सीमित ओवरों के दौरे के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अब इस दौरे के होने की उम्मीद फिर से बढ़ गई है।

सईद इब्राहिम अहमद ने कहा, “हर दौरे पर आने वाली टीम की सुरक्षा हमेशा एक अहम मुद्दा होती है, खासकर बड़ी क्रिकेट टीमों के लिए। अभी तक हमारी उनकी (BCCI) के साथ औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है। हमें उम्मीद है कि अगर दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो सुरक्षा को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं होगी।”