वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन जारी रहेगा : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तथा चुनाव व्यवस्था में सुधार नहीं होता तब तक युवा पीछे नहीं हटेंगे और यह जन आंदोलन चलता रहेगा।

श्री गांधी ने सोमवार को यहां विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोका जा रहा है, आंदोलनकारी को पीटा जा रहा है और इसे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी भी मौजूदा हालात से परेशान हैं और उनमें से कई विपक्ष के आंदोलन को सही मानते हैं। उनका कहना था कि सच्चाई उनके साथ है और वे न थकेंगे, न रुकेंगे और लड़ते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, जनता और विपक्षी दल एक तरफ हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और ज्ञानेश कुमार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा कर प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा विदेश मंत्रालय के भीतर से उन्हें सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकार छीने जाने पर लोग सवाल पूछ रहे हैं।

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श्री गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उन्होंने लोकतंत्र तथा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब देते हुए याचिका दायर करने को कहा है। इंडिया गठबंधन के नेता अब मिलकर उच्चतम न्यायालय जाकर याचिका दायर करेंगे। लोगों से जन आंदोलन में जुटने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा में विश्वास रखने वाले सभी दलों के लोग इस लड़ाई में शामिल होंगे। जब तक संविधान की रक्षा, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, चुनाव व्यवस्था में सुधार और देश के लोगों को न्याय नहीं मिलता आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले दिन विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग जाते समय रोका गया और बस में बैठाया गया, दूसरे दिन जंतर-मंतर जाते समय भी उन्हें रोका गया और धक्का-मुक्की हुई, जबकि तीसरे दिन विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष उच्चतम न्यायालय जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से हर दिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई जारी रखने, किसी से डरे बिना आंदोलन से पीछे नहीं हटने का आह्वान किया और कहा कि यह आंदोलन भगवान शिव का तांडव और शिव की बारात की तरह लोक कल्याण के लिए है इसमें कुछ भी पहले से तय नहीं होता और इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

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‘मुझे लगा करियर खत्म हो गया…’; NSA अजीत डोभाल ने सुनाया वो किस्सा, जब चीनी सेना ने भारतीय एजेंटों को पकड़ लिया था

NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार (19 सितंबर) को भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा शेयर किया जब उन्हें लगा था कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा। डोभाल ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें सिक्किम में तैनाती मिली जहां सीमा क्षेत्र में निगरानी के लिए भेजी गई उनकी एक टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। बाद में जांच में इसकी वजह सीमा के गलत नक्शे और स्केच होना पता चला।

उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब सिक्किम का भारत में विलय होने वाला था। डोभाल ने कहा कि एक युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में वह सिक्किम में खुफिया तंत्र से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना भी थी। डोभाल ने बताया कि सीमा पार की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टीम को पांच-छह दिनों के मिशन पर भेजा गया था। लेकिन 10-11 दिन बीतने के बाद भी टीम वापस नहीं लौटी। इसके बाद मुख्यालय से उन्हें फोन आया और टीम के चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हिरासत में होने की जानकारी दी गई।

‘लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया’

एनएसए के अनुसार, उन्हें तब लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों को बाद में बिना किसी नुकसान के रिहा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि घटना की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि टीम को उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में गलतियां थीं, जिसके कारण सीमा की पहचान को लेकर भ्रम पैदा हुआ। जांच में डोभाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।

इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि घटना ने उन्हें बेहद निराश और दुखी कर दिया था। डोभाल ने कहा, “मैं बहुत दुखी था। यह जीवन का वह दौर था जब आप खुद को बहुत निराश महसूस करते हैं।” NSA ने कहा कि इसी मुश्किल दौर में खुफिया ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा ने उन्हें सलाह दी जिसे उन्होंने जीवनभर याद रखा। उन्होंने कहा कि शेरपा ने कहा, “ये सब मैप-रीडिंग का चक्कर है। कुछ लोग नक्शा सही पढ़ते हैं और कुछ गलत।”

24 साल बर्फ की चोटियों पर गुजारे

उन्होंने कहा कि इस शेरपा ने माउंट एवरेस्ट को आठ बार फतेह किया। 24 साल उन्होंने बर्फ की चोटियों पर गुजारे थे।डोभाल ने कहा कि शेरपा ने उन्हें जीवन के तीन मंत्र बताए। पहला-तुम कहां खड़े हो। दूसरा- तुम्हें कहां जाना है।और तीसरा- वहां जाने और वहां से आने का रास्ता क्या है। एनएसए ने कहा कि समय के साथ यह सलाह उनके लिए सिर्फ पहाड़ों में रास्ता तलाशने का तरीका नहीं रही। बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया बन गई।

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आज का एक्सप्लेनर:क्या चीन-भारत एक ही पाले में आने वाले हैं; 7 साल बाद जिनपिंग के दिल्ली दौरे के मायने, क्या कुछ ठोस हासिल होगा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। वो BRICS समिट के अलावा पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे। 1. डिप्लोमेसी: कारोबारी मजबूरी में भारत-चीन का सियासी तनाव कम होगा 2. ऑप्टिक्स: जिनपिंग, पुतिन और मोदी एक साथ दिखना भी बड़ी बात 3. मैसेजिंग: BRICS कोई दिखावे का मंच नहीं, सभी देश एकजुट भारत और चीन के रिश्ते करवट ले रहे हैं, लेकिन 2 वजहों से फिलहाल दोनों देश एक पाले में नहीं आ सकते। पहला- ट्रस्ट डेफिसिट, यानी भरोसे की कमी और दूसरा- ट्रेड डेफिसिट, यानी व्यापार घाटा। पहली चुनौती: भारत-चीन के बीच भरोसे की कमी दूसरी चुनौती: भारत को चीन से कारोबारी घाटा जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल चीन गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरे में दोनों देशों के बीच कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी। मसलन- सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाना, सैन्य हॉटलाइन मजबूत करना, वीजा नियमों में ढील और व्यापार से जुड़े मुद्दे। यानी टेबल पहले से तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत में नई दिल्ली की टॉप प्रयॉरिटी आपसी सहयोग, कारोबार, पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज और सीमा विवाद हैं। जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 6 साल बाद ग्वांगझू-दिल्ली रूट पर फ्लाइट सर्विस बहाल कर दी है। जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट मनोज केवलरामानी के मुताबिक, ‘भारत-चीन की बातचीत में बीच कारोबार और निवेश जैसे मुद्दों पर फ्रेमवर्क बनने की उम्मीद है। वीजा नियमों में ढील भी मिल सकती है। लेकिन सीमा विवाद पर कुछ ठोस होता नहीं दिखता।’ ————
ये खबर भी पढ़िए… पुतिन से पहले पहुंच जाता है उनका टॉयलेट: जिनपिंग स्पेशल कार साथ लाते हैं; BRICS समिट में विदेशी नेताओं की सिक्योरिटी के क्या-क्या इंतजाम 12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए दिल्ली में 20 से ज्यादा देशों के नेता हो रहे हैं। इनमें जिनपिंग, पुतिन, पजशकियान जैसे बड़े खतरे वाले नेता शामिल हैं। इनके लिए दिल्ली की किलेबंदी की गई है। पूरी खबर पढ़िए…

BRICS के लिए भारत आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग:गलवान हिंसा के बाद भारत में पहली द्विपक्षीय बैठक करेंगे

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। अगर यह बैठक होती है, तो जून 2020 में हुई गलवान हिंसा के बाद दोनों नेताओं की भारत में यह पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात मानी थी। दोनों देशों ने अभी तक बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। शी की यात्रा से पहले दोनों देशों में बढ़ी बातचीत शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 24 अगस्त को चीन गए थे। वहां 25 अगस्त को उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बातचीत की थी। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन BRICS समिट के लिए भारत आएंगे:11 सितंबर को PM मोदी के साथ मीटिंग रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आएंगे। पूरी खबर पढ़ें…

India China Relations : भारत-चीन संबंधों में आई नई गर्माहट, अजीत डोभाल का बड़ा बयान, बोले- मोदी-शी जिनपिंग ने दी स्पष्ट दिशा

India China Relations : भारत-चीन संबंधों में आई नई गर्माहट, अजीत डोभाल का बड़ा बयान, बोले- मोदी-शी जिनपिंग ने दी स्पष्ट दिशा

भारत और चीन के रिश्तों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को “स्पष्ट और सकारात्मक दिशा” दी है। डोभाल के मुताबिक, भारत-चीन संबंध लगातार सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। डोभाल मंगलवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी के साथ व्यापक बातचीत कर रहे थे। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता हुई।

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90 मिनट से ज्यादा चली छोटी समूह की बैठक

 

बैठक के दौरान डोभाल और वांग यी ने कई घंटे एक-दूसरे के साथ बातचीत की। पहले दोनों पक्षों के बीच छोटे समूह में चर्चा हुई, जिसे दोनों देशों ने विस्तृत बातचीत बताया। यह बैठक 90 मिनट से अधिक समय तक चली। इसके बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। बैठक में भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

 

चीन के उपराष्ट्रपति से भी मिले डोभाल

 

विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता से पहले मंगलवार को अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

ajit doval

सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे भारत-चीन संबंध

 

डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत का यह 25वां दौर है। डोभाल ने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट और सकारात्मक दिशा तय की है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।

India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

भारत दौरे पर आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग:12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS समिट; दोनों देशों में सीमा विवाद पर होगी बात

भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा:फिल्म कहानी से हकीकत नहीं बदलेंगी; 15 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म

ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार तड़के करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रेजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ————————
ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लालकिले और उसके आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा की कई परतें तैयार की हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाए गए हैं।

 

सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आसपास रहने और काम करने वाले 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन भी किया है। किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या व्यवधान को रोकने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

 

 लाल किले के आसपास कड़ी सुरक्षा

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर लाल किले और आसपास के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात की गई है ताकि आसमान से आने वाले किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

 

20 हजार से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन

 

सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि लाल किले के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में रहने या काम करने वाले 20,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किला सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।

 

DTC बसों के रूट में बदलाव

 

दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर DTC बसों और अन्य बसों के संचालन के संबंध में भी एडवाइजरी जारी की है। अधिकारी के मुताबिक, प्रभावित मार्गों पर इस अवधि के दौरान DTC या अन्य बसें सामान्य रूप से संचालित नहीं होंगी। बसों के रूट डायवर्ट किए जाएंगे और उनके टर्मिनेशन पॉइंट रामलीला मैदान और तीस हजारी कोर्ट में निर्धारित किए गए हैं।

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मेहमानों के लिए पार्किंग की व्यवस्था

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले आमंत्रित मेहमानों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थानों को Google Maps पर चिह्नित किया गया है। लोगों से ट्रैफिक और पार्किंग से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट को फॉलो करने की अपील की गई है।

 

सुबह 4 बजे से 11 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन

 

दिल्ली पुलिस के अनुसार, लाल किले के आसपास आम लोगों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन सुबह 4 बजे से 11 बजे तक लागू रहेगा। इसके बाद ट्रैफिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। चांदनी चौक क्षेत्र की कुछ सड़कें प्रतिबंधित समय के दौरान बंद रहेंगी। हालांकि, पुलिस के मुताबिक दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

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भारी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। पुलिस का लक्ष्य समारोह के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चूक और ट्रैफिक व्यवधान को रोकना है।

NSA अजीत डोभाल ने खोला पहलगाम हमले के दिन का सबसे बड़ा राज! प्लेन से उतरते ही पीएम मोदी ने उनसे पूछा था ये पहला सवाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुरंत प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हमले के बाद पीएम मोदी भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई तय करने से पहले यह जानना चाहते थे कि इस हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने ये बातें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बनने वाली डिस्कवरी की नई डॉक्यूमेंट्री में कही हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के कई बड़े राजनीतिक नेताओं, सेना के अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के बयान शामिल किए गए हैं। ये सभी लोग  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीधे तौर पर जुड़े थे।

अजीत डोभाल ने बताई ये बात

‘एक्स’ पर शेयर की गई इस सीरीज की क्लिप में अजीत डोभाल ने बताया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर भारत लौटे थे। भारत पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों से हमले की पूरी जानकारी मांगी। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री के भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही बैठक हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने सबसे पहले घटना से जुड़े सभी तथ्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पूछा कि पहलगाम हमले के पीछे कौन है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उस समय साफ कर दिया था कि भारत हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जल्द ही यह साफ हो गया था कि पहलगाम हमले के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की खुफिया एजेंसियों ने बहुत अच्छा काम किया। उनकी मदद से कम समय में हमले के जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति साफ हो गई और भारत इस नतीजे तक पहुंच सका कि इसके पीछे कौन था।

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’

अजीत डोभाल ने यह भी बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी है, तो इसका मतलब क्या है। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री का संदेश साफ है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक आखिरी आतंकवादी का भी सफाया नहीं हो जाता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपने पहले बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” इसे पाकिस्तान के लिए भारत का कड़ा संदेश माना गया था। इसका मतलब था कि भारत किसी भी आतंकी हमले को गंभीरता से लेगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। अजीत डोभाल के बयान से यह भी पता चलता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला किस तरह लिया था।

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की गई थी जान

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के पीछे पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों का हाथ बताया गया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस कार्रवाई में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर अभियान चलाया। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों और हमले की तैयारी वाले स्थानों पर कार्रवाई की गई। भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। करीब चार दिनों तक दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बना रहा। आखिरकार 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी। यह सहमति तब हुई, जब पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया।