India China Relations : भारत-चीन संबंधों में आई नई गर्माहट, अजीत डोभाल का बड़ा बयान, बोले- मोदी-शी जिनपिंग ने दी स्पष्ट दिशा

India China Relations : भारत-चीन संबंधों में आई नई गर्माहट, अजीत डोभाल का बड़ा बयान, बोले- मोदी-शी जिनपिंग ने दी स्पष्ट दिशा

भारत और चीन के रिश्तों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को “स्पष्ट और सकारात्मक दिशा” दी है। डोभाल के मुताबिक, भारत-चीन संबंध लगातार सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। डोभाल मंगलवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी के साथ व्यापक बातचीत कर रहे थे। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता हुई।

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90 मिनट से ज्यादा चली छोटी समूह की बैठक

 

बैठक के दौरान डोभाल और वांग यी ने कई घंटे एक-दूसरे के साथ बातचीत की। पहले दोनों पक्षों के बीच छोटे समूह में चर्चा हुई, जिसे दोनों देशों ने विस्तृत बातचीत बताया। यह बैठक 90 मिनट से अधिक समय तक चली। इसके बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। बैठक में भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

 

चीन के उपराष्ट्रपति से भी मिले डोभाल

 

विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता से पहले मंगलवार को अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

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सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे भारत-चीन संबंध

 

डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत का यह 25वां दौर है। डोभाल ने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट और सकारात्मक दिशा तय की है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।

India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

भारत दौरे पर आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग:12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS समिट; दोनों देशों में सीमा विवाद पर होगी बात

भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा:फिल्म कहानी से हकीकत नहीं बदलेंगी; 15 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म

ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार तड़के करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रेजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ————————
ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

Independence Day 2026 : लालकिले की सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात, 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच; दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लालकिले और उसके आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा की कई परतें तैयार की हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाए गए हैं।

 

सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आसपास रहने और काम करने वाले 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन भी किया है। किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या व्यवधान को रोकने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

 

 लाल किले के आसपास कड़ी सुरक्षा

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर लाल किले और आसपास के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात की गई है ताकि आसमान से आने वाले किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

 

20 हजार से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन

 

सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि लाल किले के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में रहने या काम करने वाले 20,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किला सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।

 

DTC बसों के रूट में बदलाव

 

दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर DTC बसों और अन्य बसों के संचालन के संबंध में भी एडवाइजरी जारी की है। अधिकारी के मुताबिक, प्रभावित मार्गों पर इस अवधि के दौरान DTC या अन्य बसें सामान्य रूप से संचालित नहीं होंगी। बसों के रूट डायवर्ट किए जाएंगे और उनके टर्मिनेशन पॉइंट रामलीला मैदान और तीस हजारी कोर्ट में निर्धारित किए गए हैं।

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मेहमानों के लिए पार्किंग की व्यवस्था

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले आमंत्रित मेहमानों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थानों को Google Maps पर चिह्नित किया गया है। लोगों से ट्रैफिक और पार्किंग से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट को फॉलो करने की अपील की गई है।

 

सुबह 4 बजे से 11 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन

 

दिल्ली पुलिस के अनुसार, लाल किले के आसपास आम लोगों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन सुबह 4 बजे से 11 बजे तक लागू रहेगा। इसके बाद ट्रैफिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। चांदनी चौक क्षेत्र की कुछ सड़कें प्रतिबंधित समय के दौरान बंद रहेंगी। हालांकि, पुलिस के मुताबिक दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

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भारी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। पुलिस का लक्ष्य समारोह के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चूक और ट्रैफिक व्यवधान को रोकना है।

NSA अजीत डोभाल ने खोला पहलगाम हमले के दिन का सबसे बड़ा राज! प्लेन से उतरते ही पीएम मोदी ने उनसे पूछा था ये पहला सवाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुरंत प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हमले के बाद पीएम मोदी भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई तय करने से पहले यह जानना चाहते थे कि इस हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने ये बातें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बनने वाली डिस्कवरी की नई डॉक्यूमेंट्री में कही हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के कई बड़े राजनीतिक नेताओं, सेना के अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के बयान शामिल किए गए हैं। ये सभी लोग  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीधे तौर पर जुड़े थे।

अजीत डोभाल ने बताई ये बात

‘एक्स’ पर शेयर की गई इस सीरीज की क्लिप में अजीत डोभाल ने बताया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर भारत लौटे थे। भारत पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों से हमले की पूरी जानकारी मांगी। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री के भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही बैठक हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने सबसे पहले घटना से जुड़े सभी तथ्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पूछा कि पहलगाम हमले के पीछे कौन है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उस समय साफ कर दिया था कि भारत हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जल्द ही यह साफ हो गया था कि पहलगाम हमले के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की खुफिया एजेंसियों ने बहुत अच्छा काम किया। उनकी मदद से कम समय में हमले के जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति साफ हो गई और भारत इस नतीजे तक पहुंच सका कि इसके पीछे कौन था।

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’

अजीत डोभाल ने यह भी बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी है, तो इसका मतलब क्या है। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री का संदेश साफ है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक आखिरी आतंकवादी का भी सफाया नहीं हो जाता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपने पहले बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” इसे पाकिस्तान के लिए भारत का कड़ा संदेश माना गया था। इसका मतलब था कि भारत किसी भी आतंकी हमले को गंभीरता से लेगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। अजीत डोभाल के बयान से यह भी पता चलता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला किस तरह लिया था।

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की गई थी जान

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के पीछे पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों का हाथ बताया गया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस कार्रवाई में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर अभियान चलाया। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों और हमले की तैयारी वाले स्थानों पर कार्रवाई की गई। भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। करीब चार दिनों तक दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बना रहा। आखिरकार 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी। यह सहमति तब हुई, जब पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया।

‘आजादी सिर्फ मनमानी नहीं, जिम्मेदारी भी है’ लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में अजीत डोभाल का युवाओं को संदेश

शनिवार, 1 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तिलक स्मारक ट्रस्ट की ओर से दिए जाने वाले इस पुरस्कार को डोभाल को प्रदान किया। वहीं, सम्मान समारोह के बाद डोभाल ने युवाओं से कहा कि वे आजादी को सिर्फ बिना किसी रोक-टोक के कुछ भी करने की क्षमता के तौर पर न देखें, बल्कि इसे एक जिम्मेदारी समझें। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्र-निर्माण के आदर्शों को अपनाने की अपील की।

डोभाल ने कहा, तिलक की विरासत को समझने के लिए उस दौर की कठोर सच्चाइयों को जानना जरूरी है जिसमें वे रहते थे। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी आज़ाद भारत में पली-बढ़ी है और शायद उन मुश्किलों, दमन और पाबंदियों की कल्पना भी न कर पाए जो आजादी की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को झेलनी पड़ी थीं।

उन्होंने कहा कि देश के लिए तिलक का विजन आज भी प्रासंगिक है। डोभाल ने युवाओं से उनके विचारों को समझने और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “लोकमान्य तिलक के जीवन और उनके व्यक्तित्व की गहराई को सही मायने में समझने के लिए उस दौर की परिस्थितियों, चुनौतियों और कठिनाइयों को समझना जरूरी है। उस समय की परेशानियों और हालात की कल्पना करना आज हमारे लिए, खासकर युवाओं के लिए, काफी मुश्किल हो सकता है।”

डोभाल ने आजादी को बिना किसी रोक-टोक वाली निजी पसंद समझने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि आज के युवा उन आजादियों को मामूली समझें जिनका वे फायदा उठा रहे हैं, और उन कुर्बानियों को न पहचानें जिनकी वजह से ये आजादियां मुमकिन हो पाई हैं। डोभाल के अनुसार, आजादी का मतलब सिर्फ व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी हैं।

उन्होंने कहा, “आज के युवा शायद यह सोचें कि भारत हमेशा से ऐसा ही रहा है, या वे आजादी का मतलब सिर्फ अपनी मर्जी का काम करना समझ बैठें हैं। लेकिन आजादी का असली मतलब यह नहीं है।”

NSA अजीत डोभाल ने युवाओं से भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि देश अपने इतिहास के एक अहम दौर से गुजर रहा है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से ऊपर देशहित को रखें और एक मजबूत भारत बनाने के लिए मिलकर कोशिश करें। उन्होंने मौजूदा समय को एक दुर्लभ मौका बताया जिसे बर्बाद नहीं करना चाहिए।

बता दें कि उनकी ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब देश ने NEET पेपर लीक समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन देखे हैं। जहां, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक आजादी में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करने का अधिकार भी शामिल है, वहीं डोभाल ने जिम्मेदारी के साथ आजादी का इस्तेमाल करने और सार्वजनिक जीवन में राष्ट्र-निर्माण को केंद्र में रखने पर जोर दिया।

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