LAC के पास भारत को मिलेगा दूसरा रणनीतिक रूट; जानिए हूरी-टाक्सिंग रोड प्रोजेक्ट कैसे काउंटर करेगा चीन को

अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक करीब 95 किलोमीटर लंबी नई सड़क के लिए विस्तृत योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चीन सीमा के करीब स्थित ताक्सिंग तक पहुंचने के लिए ये सड़क बेहद अहम मानी जा रही है। इसके बनने से दूरदराज के इलाकों में आवाजाही आसान होने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र में जरूरी सामान और सेवाएं पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

सीमावर्ती इलाके में होगा बेहतर संपर्क

CNN-News18 के मुताबिक, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक प्रस्तावित सड़क को लेकर आगे की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सड़क की व्यवहारिकता जांचने के साथ डिटेल्ड परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की योजना है। करीब 95.35 किलोमीटर लंबी ये नई सड़क पूरी तरह नए रास्ते पर बनाई जाएगी और इसे ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के तहत विकसित किया जाना है। अधिकारियों के डाक्युमेंट्स के मुताबिक, सड़क का निर्माण एनएचडीएल के तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती इलाके में बेहतर सड़क संपर्क तैयार हो सके।

ताक्सिंग तक पहुंचना काफी मुश्किल

हुरी-ताक्सिंग सड़क सिर्फ दो इलाकों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है। इससे अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और सीमा के करीब पहुंच को आसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, जरूरी सामान और लोगों की आवाजाही भी सुगम होने की उम्मीद है। ताक्सिंग अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में स्थित एक दूरदराज का इलाका है। ये जिला मुख्यालय दापोरिजो से 200 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पर है और चीन की सीमा के नजदीक पड़ता है। पहाड़ी और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण यहां लंबे समय तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा है।

नई सड़क बनने से होगा फायदा

हाल के वर्षों में ताक्सिंग तक सड़क पहुंची है, लेकिन वहां जाने का रास्ता आज भी काफी मुश्किल है। नाचो से ताक्सिंग की मौजूदा सड़क कई जगह संकरी और खराब है। कुछ हिस्सों में दो गाड़ियों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होता है। इससे आम लोगों और सेना के वाहनों को परेशानी होती है। ऐसे में हुरी से ताक्सिंग तक नई सड़क बनने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। नई सड़क बनने से सेना के लिए सीमा वाले इलाके में आना-जाना और जरूरी सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। इससे वाहन, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें जल्दी पहुंचाई जा सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, किसी आपात स्थिति में एक से ज्यादा रास्ते होना जरूरी होता है। ऐसे में नया रास्ता सेना के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

चीन के काफी करीब है ताक्सिंग

ताक्सिंग ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीन के तिब्बत क्षेत्र के पास स्थित एक अहम सीमावर्ती बस्ती है। यह इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब होने की वजह से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बेहतर सड़क होने से सैनिकों की आवाजाही आसान हो सकती है और जरूरत के समय जरूरी सामान और दूसरी सुविधाएं जल्दी पहुंचाई जा सकती हैं। मजबूत सड़क संपर्क से सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई, मेडिकल मदद और इंजीनियरिंग टीमों की पहुंच को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

मजबूत की जा रही कनेक्टिविटी

हुरी-ताक्सिंग सड़क की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सीमावर्ती क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ताक्सिंग की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इस इलाके में विकास कार्यों पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इसी साल फरवरी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ताक्सिंग का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ताक्सिंग-नाचो-कोडुखा-लाइमकिंग क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की और कुछ योजनाओं का उद्घाटन भी किया।

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India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।