चीन की बढ़ेगी टेंशन! लद्दाख में 150 KM लंबी नई सड़क बनाने जा रहा है भारत

पूर्वी लद्दाख में भारत सीमा के पास सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) श्योक नदी के पूर्वी किनारे से दौलत बेग ओल्डी (DBO) तक करीब 150 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इससे DBO और डेपसांग जैसे इलाकों तक पहुंच के लिए एक और रास्ता मिल सकेगा।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 150 किलोमीटर की इस सड़क को पांच हिस्सों में बनाया जाएगा। यह दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड नेटवर्क का हिस्सा होगी। BRO फिलहाल इसकी DPR तैयार कर रहा है। इसमें सड़क के रास्ते, ऊंचाई, मौसम और नदी के बहाव जैसी चीजों की जांच की जाएगी।

DBO तक पहुंच होगी आसान, भारी वाहनों की आवाजाही भी बढ़ेगी

दौलत बेग ओल्डी पूर्वी लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में LAC के पास है। इसके आसपास डेपसांग का इलाका है और यह काराकोरम दर्रे के पास भी है। लेकिन पूर्वी लद्दाख में मौसम इस प्रोजेक्ट की बड़ी चुनौती है। यहां भारी बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन से सड़क प्रभावित हो सकती है। सर्दियों में रास्ते को चालू रखने में मदद मिल सकती है।

श्योक नदी के किनारे सड़क बनाना भी आसान नहीं होगा। नदी का बहाव मौसम के साथ बदलता है और इलाके में काफी ऊंचाई है। इसलिए सड़क के साथ मजबूत सुरक्षा इंतजाम, पुल और खास इंजीनियरिंग की जरूरत होगी।

BRO के कई हिस्सों पर काम जारी

BRO इस पूरे कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सों में 70 फीसदी से ज्यादा काम पूरा होने की जानकारी है।

अगर यह नया रास्ता बनता है, तो DBO और डेपसांग जाने के लिए एक और मार्ग मिल जाएगा। इससे किसी एक रास्ते पर परेशानी होने पर दूसरे रास्ते से रूट जारी रखी जा सकेगी।

क्या फायदे होंगे?

1. दूरी और समय कम: लेह से DBO की दूरी 322

KM से घटकर 243 KM रह जाएगी। 2 दिन का सफर घटकर 11-12 घंटे का रह जाएगा।

2. भारी हथियारों की आवाजाही: इस रूट पर 9

बड़े पुलों को 40 टन से अपग्रेड कर 70 टन क्षमता वाला बनाया जा रहा है, ताकि बोफोर्स तोपें और टैंक आसानी से ले जाए जा सकें।

3. ऑल-वेदर कनेक्टिविटी: 17,660 फीट पर

सासर ला पास के नीचे 7 KM लंबी टनल बनाने की भी योजना है ताकि सर्दियों में भी रास्ता खुला रहे।

BRO (Border Roads Organisation) इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है और बाकी हिर पर 70% से ज्यादा काम पूरा हो गया है।

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अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक करीब 95 किलोमीटर लंबी नई सड़क के लिए विस्तृत योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चीन सीमा के करीब स्थित ताक्सिंग तक पहुंचने के लिए ये सड़क बेहद अहम मानी जा रही है। इसके बनने से दूरदराज के इलाकों में आवाजाही आसान होने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र में जरूरी सामान और सेवाएं पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

सीमावर्ती इलाके में होगा बेहतर संपर्क

CNN-News18 के मुताबिक, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक प्रस्तावित सड़क को लेकर आगे की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सड़क की व्यवहारिकता जांचने के साथ डिटेल्ड परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की योजना है। करीब 95.35 किलोमीटर लंबी ये नई सड़क पूरी तरह नए रास्ते पर बनाई जाएगी और इसे ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के तहत विकसित किया जाना है। अधिकारियों के डाक्युमेंट्स के मुताबिक, सड़क का निर्माण एनएचडीएल के तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती इलाके में बेहतर सड़क संपर्क तैयार हो सके।

ताक्सिंग तक पहुंचना काफी मुश्किल

हुरी-ताक्सिंग सड़क सिर्फ दो इलाकों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है। इससे अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और सीमा के करीब पहुंच को आसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, जरूरी सामान और लोगों की आवाजाही भी सुगम होने की उम्मीद है। ताक्सिंग अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में स्थित एक दूरदराज का इलाका है। ये जिला मुख्यालय दापोरिजो से 200 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पर है और चीन की सीमा के नजदीक पड़ता है। पहाड़ी और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण यहां लंबे समय तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा है।

नई सड़क बनने से होगा फायदा

हाल के वर्षों में ताक्सिंग तक सड़क पहुंची है, लेकिन वहां जाने का रास्ता आज भी काफी मुश्किल है। नाचो से ताक्सिंग की मौजूदा सड़क कई जगह संकरी और खराब है। कुछ हिस्सों में दो गाड़ियों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होता है। इससे आम लोगों और सेना के वाहनों को परेशानी होती है। ऐसे में हुरी से ताक्सिंग तक नई सड़क बनने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। नई सड़क बनने से सेना के लिए सीमा वाले इलाके में आना-जाना और जरूरी सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। इससे वाहन, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें जल्दी पहुंचाई जा सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, किसी आपात स्थिति में एक से ज्यादा रास्ते होना जरूरी होता है। ऐसे में नया रास्ता सेना के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

चीन के काफी करीब है ताक्सिंग

ताक्सिंग ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीन के तिब्बत क्षेत्र के पास स्थित एक अहम सीमावर्ती बस्ती है। यह इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब होने की वजह से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बेहतर सड़क होने से सैनिकों की आवाजाही आसान हो सकती है और जरूरत के समय जरूरी सामान और दूसरी सुविधाएं जल्दी पहुंचाई जा सकती हैं। मजबूत सड़क संपर्क से सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई, मेडिकल मदद और इंजीनियरिंग टीमों की पहुंच को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

मजबूत की जा रही कनेक्टिविटी

हुरी-ताक्सिंग सड़क की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सीमावर्ती क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ताक्सिंग की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इस इलाके में विकास कार्यों पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इसी साल फरवरी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ताक्सिंग का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ताक्सिंग-नाचो-कोडुखा-लाइमकिंग क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की और कुछ योजनाओं का उद्घाटन भी किया।

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