Russia-Ukraine War: रूस के तट पर ऑयल टैंकर में भीषण आग, दिखे काले धुएं के गुबार, सभी 23 भारतीय क्रू मेंबर्स सुरक्षित

Russia-Ukraine War: मंगलवार को रूस के दक्षिणी तट के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक ऑयल टैंकर में भीषण आग लगने से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। बताया जा रहा है कि इस जहाज पर यूक्रेन के नेवल ड्रोन से हमला हुआ था, जिससे रिसॉर्ट शहर सोची के कुछ हिस्सों के ऊपर काले धुएं का गुबार छा गया। वहीं, रूस के ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने बताया कि लाइबेरिया के झंडे वाले इस टैंकर पर काला सागर (Black Sea) में हमला हुआ और पानी पर कच्चा तेल जल रहा था।

मंत्रालय ने कहा कि आग इतनी भीषण थी कि फायरफाइटर्स तुरंत उस पर काबू नहीं पा सके, लेकिन जहाज पर मौजूद सभी 23 क्रू मेंबर्स (जो भारतीय नागरिक थे) को सुरक्षित बचा लिया गया।

सोची से आए वीडियो और तस्वीरों में समुद्र में तेज लपटें उठती और आसमान में घना काला धुआं फैलता दिखाई दिया। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने समुद्र तटों और तटीय इलाकों के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी।

बीच बंद, लोगों को घर के अंदर रहने को कहा गया

सिरियस फेडरल टेरिटरी के प्रमुख दिमित्री प्लिशकिन ने टैंकर में आग लगने की पुष्टि की और स्थानीय बीच को कुछ समय के लिए बंद करने का ऐलान किया।

प्लिशकिन ने कहा, “ब्लैक सी में एक टैंकर में आग लग गई। लोगों की सुरक्षा के लिए सिरियस के बीच कुछ समय के लिए बंद रहेंगे। पानी और हवा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारी रूस की हाइड्रोमेटियोरोलॉजिकल सर्विस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

अधिकारियों के हालात पर नजर रखने के दौरान लोगों को घर के अंदर रहने और खिड़कियां बंद रखने की सलाह भी दी गई।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन ब्लैक सी और उसके आस-पास युद्ध से जुड़े एनर्जी फैसिलिटीज और कमर्शियल शिपिंग को निशाना बना रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में रूस ने रोमानिया के तट के पास यूक्रेनी सामान ले जा रहे अनाज के जहाजों पर हमला किया है, जबकि यूक्रेन ने रूस के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। यूक्रेन का कहना है कि ये हमले यूक्रेनी शहरों पर मॉस्को के लगातार हमलों का जवाब हैं।

दोनों पक्षों ने आने वाले दिनों में अपने हमलों को और तेज करने के संकेत दिए हैं।

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर भी हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें दिन के समय ड्रोन हमले और अहम पुलों पर हमले शामिल हैं, जिससे यूक्रेन की राजधानी में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।

इससे पहले भी दक्षिणी रूस में तेल सुविधाओं पर यूक्रेन के पिछले हमलों के कारण तेल का रिसाव हुआ है, समुद्र तट बंद करने पड़े हैं और पर्यावरण से जुड़ी अन्य चिंताएं पैदा हुई हैं।

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रूस के पास तेल टैंकर पर यूक्रेन का ड्रोन अटैक:23 भारतीय सवार थे; ब्लैक सी में तनाव से रूस का अनाज निर्यात 71% घटा

रूस के पास ब्लैक सी में मंगलवार को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर में आग लग गई। टैंकर पर 23 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। हमले के बाद इमरजेंसी टीमों ने सभी का रेस्कयू किया। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, टैंकर पर यूक्रेन की ओर से आए ड्रोन से हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज में आग लगी और समुद्र में कच्चा तेल जलता दिखाई दिया। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया था, यानी 71% गिरावट। सितंबर में भी निर्यात करीब 50% घटकर 24.5 लाख टन रहने का अनुमान है। हमले के बाद की तस्वीरें… तेज आग के कारण बचाव दल नहीं पहुंच पा रहा था हमले से पहले मरीनट्रैफिक ने जहाज की आखिरी लोकेशन काला सागर में रूस-जॉर्जिया सीमा के पास बताई थी। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक तेज आग की के कारण दमकलकर्मी शुरुआत में जहाज के पास नहीं पहुंच पा रहे थे। मंत्रालय ने बाद में कहा कि आग की तीव्रता घटने के बाद इमरजेंसी टीमों के पास इसे नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन थे। जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में था द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था। इसे रूस के कथित शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया गया था। रूस का शैडो फ्लीट उन टैंकरों और जहाजों का नेटवर्क है, जिनका इस्तेमाल रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल समेत दूसरे सामान के निर्यात में करता है। यूक्रेन ने फरवरी में जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका कहना था कि इस नेटवर्क के जहाज रूस को जरूरी ऊर्जा आय बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी आय से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को फंड करता है। रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब 2 महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों का असर दुनिया की खाद्य सप्लाई पर पड़ने का खतरा है। गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है। रूस से अब 16 देश ही गेहूं खरीदते हैं रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है। वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया। बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ने से अनाज का समुद्री कारोबार प्रभावित हुआ है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं। यूक्रेन ने सड़क-रेल से निर्यात बढ़ाया, लेकिन सप्लाई कम ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज दूसरे देशों तक भेज रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है। डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प समुद्री रास्ते की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। मक्का की ग्लोबल सप्लाई पर भी असर का खतरा ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ गेहूं पर नहीं, मक्का की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था। यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के पास जहाज पर हमला, 11 भारतीय जख्मी भारत ने मंगलवार को ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज पर हमले की निंदा की। हमले में 12 क्रू मेंबर घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय हैं। पूरी खबर पढ़ें…

तालिबानी ड्रोन अटैक से कंगाल पाकिस्तान बेहाल! मुनीर ने बॉर्डर चेकपोस्टों पर बंधवाई मछली पकड़ने की जाली

Pakistan Army Fishing Nets Drones: अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के अशांत इलाके खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बल खौफनाक संकट से जूझ रहे हैं। आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना और पुलिस चेकपोस्टों को निशाना बना रहा है।

इस बढ़ते ड्रोन खतरे से अपने जवानों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना और पुलिस ने एक अनोखा ‘जुगाड़’ निकाला है। सैन्य पोस्टों और बैरकों के ऊपर मछली पकड़ने वाली जालियां टांग दी गई है।

हंगू हमले के बाद लिया गया अजीबोगरीब फैसला

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम 16 अप्रैल को हंगू जिले में हुए एक जानलेवा ड्रोन हमले के बाद उठाया गया। अफगान सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर सरकी पियाला पुलिस चेकपोस्ट पर TTP के ड्रोन ने हमला कर दिया था, जिसके तुरंत बाद आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों जवान घायल हो गए थे।

हंगू जिला अकेले इस साल 16 ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। ड्रोन के खौफ से अब सैनिक और पुलिसकर्मी अपनी बैरकों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। करोड़ों डॉलर के महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम और रडार खरीदने में वित्तीय तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब बेहद सस्ते विकल्पों पर निर्भर है।

अल जजीरा के अनुसार, पूरे चेकपोस्ट को मछली पकड़ने वाली जाली से ढकने का खर्च मात्र $1,400 (लगभग 1.17 लाख रुपये) आता है। वहीं, एक आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत $5,000 से लेकर $5 मिलियन (40 करोड़ रुपये से अधिक) तक होती है।

कहां-कहां लगी जालियां?

कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सेना और पुलिस की चौकियों पर छत और दीवारों के बीच जालियां तान दी गई हैं।

कैसे काम करता है ‘जाल वाला सुरक्षा चक्र’?

पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट की तरफ उड़ता हुआ आता है, तो उसके पंखे जाली में उलझ सकते हैं, जिससे ड्रोन रुक जाएगा या दूर ही डिफ्यूज हो जाएगा।

एक पुलिस अधिकारी फैयाज खान ने अल जजीरा को बताया, ‘अगर ड्रोन जाली में नहीं भी फंसता और ऊपर ही ब्लास्ट हो जाता है, तब भी नुकसान कम होगा। विस्फोट का मलबा और छर्रे सीधे जवानों पर गिरने के बजाय हवा में ही बिखर जाएंगे।’ वैसे, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह सिस्टम 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है।

रक्षा विशेषज्ञों ने बताया लाचारी और ‘बचकाना कदम’

सैन्य विशेषज्ञों ने असीम मुनीर के इस कदम की आलोचना की है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के इम्तियाज गुल ने अल जजीरा से कहा, ‘मछली पकड़ने वाली जाली लगाना एक बचकाना और सस्ता पैंतरा है। पुलिस स्टेशन ही हमेशा एकमात्र टारगेट नहीं होते। TTP के ड्रोन का मकसद बड़े इलाकों को निशाना बनाकर सनसनी फैलाना है। पाकिस्तान को ड्रोन को लॉन्च होते ही इंटरसेप्ट करने की तकनीक चाहिए, न कि जाल बिछाने की।’

TTP का बढ़ता ‘ड्रोन दस्ता’ और चीनी-तुर्की तकनीकों की नाकामी

TTP ने दिसंबर 2025 में मौलवी सलीम हक्कानी के नेतृत्व में एक विशेष ‘ड्रोन यूनिट’ बनाई थी। यह गुट बाजार में मिलने वाले सामान्य क्वाडकोप्टर में संशोधन कर बम और आईईडी (IED) जोड़कर हमले कर रहा है। रिसर्च के मुताबिक, TTP इन ड्रोन की फ्लाइंग टाइमिंग और रेंज बढ़ाने के लिए होंडा मोटरसाइकिल की बैटरियों का इस्तेमाल कर रहा है।

पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ही 100 से अधिक ड्रोन हमलों में लगभग 30 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं और 90 से अधिक घायल हुए हैं।

पाकिस्तान पहले से ही चीन और तुर्की से मिले एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन पहाड़ी इलाकों और TTP के कम ऊंचाई वाले ड्रोन के सामने ये सिस्टम बेअसर साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि असीम मुनीर की सेना को अब केवल मछली पकड़ने वाली जालियों का ही सहारा नजर आ रहा है।

भारत ने तलाश लिया अमेरिकी बाजार का विकल्प? चीन को निर्यात 39% बढ़ा, BRICS देशों ने खरीदा $19.9 अरब का सामान

भारत का चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस को निर्यात अप्रैल-अगस्त 2026-27 में 34 फीसदी बढ़कर 19.9 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें चीन की बड़ी भूमिका रही। चीन को भारत का निर्यात 39 फीसदी बढ़ा। इससे साफ है कि भारत के निर्यात में BRICS देशों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

ये सब उन रिपोर्ट्स के बीच हो रहा है, जिसमें भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते असहज हैं। अमेरिका ने ऐसे कानून को मंजूरी भी दी है, जिसमें रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसमें भारत और चीन का नाम भी शामिल है।

वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने PTI को बताया कि भारत का BRICS देशों के साथ कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। खासकर चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस से निर्यात में अच्छी तेजी दिख रही है। ये चारों BRICS के शुरुआती संस्थापक देश हैं।

चीन को निर्यात में 39% की तेजी

चारों देशों में चीन भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में चीन को भारत का निर्यात 39 फीसदी बढ़कर 9.6 अरब डॉलर हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा इससे काफी कम था।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चारों देशों को भारत का निर्यात अप्रैल-अगस्त 2025-26 में 14.9 अरब डॉलर था। इस साल यह बढ़कर 19.9 अरब डॉलर हो गया। यानी एक साल में करीब 5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। भारत के कुल निर्यात में भी इन चार देशों की हिस्सेदारी बढ़ी है। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में इनकी हिस्सेदारी 9.2 फीसदी रही। एक साल पहले यह 8.1 फीसदी थी।

दक्षिण अफ्रीका में सबसे तेज बढ़ोतरी

चारों देशों में दक्षिण अफ्रीका को भारत के निर्यात में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में निर्यात 58 फीसदी बढ़ा। ब्राजील को निर्यात में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं, रूस को भारत का निर्यात 11 फीसदी बढ़ा। मंत्रालय के मुताबिक, BRICS के इन प्रमुख देशों में निर्यात की रफ्तार पूरे BRICS समूह के मुकाबले काफी तेज रही है।

अधिकारी ने कहा कि भारत अब BRICS देशों में सिर्फ अपना व्यापार बढ़ा नहीं रहा है। इन देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ उसकी कारोबारी हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। ये बाजार भारत की एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी के लिए अहम होते जा रहे हैं।

BRICS में अब कितने देश?

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। 2024 में इसका विस्तार हुआ। इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हुए।

इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी समूह का हिस्सा बना। पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को BRICS का पार्टनर देश बनाया गया।

जापान को निर्यात 43% बढ़ा

BRICS देशों के अलावा जापान को भी भारत के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में जापान को निर्यात 43 फीसदी बढ़कर 3.43 अरब डॉलर हो गया।

इसमें मिनरल फ्यूल का बड़ा योगदान रहा। इसका निर्यात 76 फीसदी बढ़ा। यानी करीब 23.17 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स और एल्युमीनियम के निर्यात में भी अच्छी तेजी रही।

इटली को निर्यात में 30% की बढ़ोतरी

इटली को भारत का निर्यात भी तेजी से बढ़ा। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में यह 3.92 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह 3.02 अरब डॉलर था। यानी करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

दक्षिण कोरिया को निर्यात 22% बढ़ा

दक्षिण कोरिया को भारत का निर्यात पांच महीने में 22 फीसदी बढ़कर 3.21 अरब डॉलर हो गया। इसमें कई सेक्टर का योगदान रहा। मिनरल्स, फ्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स, एल्युमीनियम, आयरन एंड स्टील और केमिकल्स के निर्यात में बढ़ोतरी हुई।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, भारत अब दक्षिण कोरिया के लिए औद्योगिक कच्चे माल, ऊर्जा उत्पादों और इंटरमीडिएट गुड्स का अहम सप्लायर बन रहा है। दक्षिण कोरिया ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत से इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

मॉस्को पर भीषण ड्रोन अटैक! जेलेंस्की ने इस खास मौके पर कर दिया बड़ा धमाका

मॉस्को पर भीषण ड्रोन अटैक! जेलेंस्की ने इस खास मौके पर कर दिया बड़ा धमाका

Ukraine Drone Attack On Moscow: रूस में संसदीय चुनावों के आखिरी दिन राजधानी मॉस्को और उसके आसपास का इलाका भीषण ड्रोन हमलों से थर्रा उठा। रविवार को हुए इस बड़े ड्रोन हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है।

रूस का दावा है कि उसने 1,600 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिनमें से 450 ड्रोन सीधे राजधानी मॉस्को को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता को मजबूती देने वाले इस तीन दिवसीय चुनाव को बाधित करने का आरोप लगाया है।

हमले में 2 लोगों की मौत

मॉस्को के क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर हुए हमलों में दो नागरिकों की जान चली गई। मृतकों में एक 44 वर्षीय महिला और एक बुजुर्ग पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा एक ड्रोन के 21 मंजिला रिहायशी इमारत से टकराने के बाद भीषण आग लग गई, जिसके चलते एहतियातन 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।

मॉस्को ऑयल रिफाइनरी को भारी नुकसान

यूक्रेन ने पिछले कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाकर अपने लंबे समय के ड्रोन अभियान को तेज कर दिया है। मॉस्को के मेयर ने पुष्टि की है कि हमले में ‘मॉस्को ऑयल रिफाइनरी’ के एक परिसर को नुकसान पहुंचा है।

ये रिफाइनरियां और तेल डिपो क्रेमलिन के लिए युद्ध का खर्च निकालने का मुख्य वित्तीय जरिया हैं। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रूस और यूक्रेन आपस में एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला न करने के लिए सहमत हुए हैं।

‘क्रेमलिन की वॉर मशीन पर बड़ा प्रहार’

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस सफल ड्रोन हमले की तारीफ की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘बीती रात मॉस्को क्षेत्र में हमारी लंबी दूरी की जवाबी कार्रवाई का बहुत बड़ा असर हुआ है। रूस के एक प्रमुख तेल उद्योग और लॉजिस्टिक्स ठिकाने को निशाना बनाया गया है। ये वही अरबों डॉलर हैं जो रूस की युद्ध मशीन को हवा देते हैं।’

चुनाव के बीच पुतिन की साख पर हमला

रूस में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है। शुक्रवार से रविवार तक चले इस 3-दिवसीय मतदान में जीत पूरी तरह से पुतिन की ‘युनाइटेड रसिया’ पार्टी के पक्ष में तय मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव में केवल उन्हीं पार्टियों को उतरने की इजाजत दी गई है जो पुतिन और उनके युद्ध का समर्थन करती हैं।

पुतिन जहां इस चुनाव के जरिए जनता के समर्थन का संदेश देना चाहते थे, वहीं यूक्रेन ने ठीक वोटिंग के आखिरी दिन मॉस्को पर हमला करके उनकी सुरक्षा व्यवस्था और दावों की हवा निकाल दी है। हालांकि, मेयर सोबयानिन का कहना है कि दुश्मन अपने मकसद नाकाम रहा।

यूक्रेन द्वारा मॉस्को की सीमा के भीतर घुसकर इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन दागना और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अब युद्ध केवल फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रह गया है। रूस के आर्थिक स्तंभों पर चोट पहुंचाकर यूक्रेन, मॉस्को पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में रूस की ओर से इसका कड़ा और आक्रामक पलटवार देखने को मिल सकता है।

आज का एक्सप्लेनर:चप्पल-लुंगी वाले हूती लड़ाके कौन, जिन्होंने सऊदी का F-15 जेट गिरा दिया; पाक-अमेरिका तक इनसे दूर क्यों भाग रहे

पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। आखिर कौन हैं ये हूती लड़ाके और चाहते क्या हैं, सऊदी जैसा अमीर और ताकतवर देश इन विद्रोहियों के आगे बेबस क्यों नजर आ रहा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: चप्पल और लुंगी पहने ये हूती लड़ाके आखिर हैं कौन?
जवाबः यमन की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती… सवाल-2: सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हूती, कितना नुकसान किया?
जवाबः हालिया लड़ाई की शुरुआत बीती 5 अगस्त से हुई… सऊदी अरब ने कहा कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने पवित्र शहर मक्का को टारगेट करके ड्रोन अटैक किया था। इसे मक्का में घुसने से पहले ही मार गिराया गया। हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया। 16 सितंबर को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने कहा, ‘अल्लाह की मदद से यमन की सशस्त्र सेना ने मारिब प्रांत में सऊदी अरब को अमेरिका से मिले F-15 फाइटर जेट को स्वदेशी तौर पर बनाई मिसाइल से मार गिराया है।’ हूतियों ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है… सऊदी अरब या अमेरिका ने जेट गिराने के दावे पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है। सवाल-3: अमीर और ताकतवर सऊदी अरब बेबस क्यों नजर आ रहा है?
जवाबः इसकी 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सऊदी समर्थित फौजों में तालमेल नहीं, हूतियों की मजबूत तैयारी 2. सऊदी में इंटरसेप्टर मिसाइल और एयर डिफेंस की कमी 3. ईरान जंग में फंसा अमेरिका एक और जंग नहीं चाहता ट्रम्प के इनकार करने के बाद सऊदी ने इजराइल से खुफिया जानकारी और दूसरी सैन्य मदद मांगी, ताकि बाब अल-मंदेब पर हूतियों का कब्जा रोका जा सके, जबकि सऊदी और इजराइल के बीच सीधे राजनयिक संबंध नहीं हैं। वहीं, पाकिस्तान और तुर्किये, सऊदी के साथ मक्का पैक्ट होने के बावजूद उसे सीधी सैन्य मदद के बजाय हूतियों से बातचीत करवाने में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। सवाल-4: पाकिस्तान, सऊदी अरब की सैन्य मदद क्यों नहीं कर रहा?
जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने को लेकर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें हैं…
1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमैट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट तब तक सिर्फ प्रतीकात्मक है, जब तक इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं बनता। तुर्किये और पाकिस्तान, ईरान या भारत से सीधे टकराव में शामिल नहीं होंगे। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ा, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती है। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान भले सुन्नी बहुल मुल्क हो, लेकिन शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने यमन में हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी, तो पाकिस्तान ने सैन्य दखल से इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’
—– ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज के बाद अब दूसरे तेल रूट पर संकट:अल मंदेब पर हूती विद्रोहियों का कब्जा; कहा- सऊदी अरब के अलावा किसी का जहाज नहीं रोकेंगे होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब एक और समुद्री ऑयल रूट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट संकट में है। यमन के हूती विद्रोहियों ने यहां कब्जे का एलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…

मक्का पर ड्रोन हमला किसने किया? दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर

पवित्र शहर मक्का पर 15 सितंबर 2026 की शाम ड्रोन हमले की घटना हुई थी। हालांकि साउदी एयर डिफेंस ने वक्त रहते इस ड्रोन को मार गिराया। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर ये ड्रोन अटैक किसने किया। क्योंकि सऊदी अरब के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी का कहना है कि यह ड्रोन हूती विद्रोहियों ने भेजा था और यह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। तो वहीं अब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के इस आरोप को खारिज कर दिया है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने मक्का या किसी भी दूसरे पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है अगर हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के लिए यह ड्रोन नहीं भेजा, तो फिर यह ड्रोन किसका था? फिलहाल इस सवाल का कोई पुख्ता जवाब तो सामने नहीं आया है लेकिन सऊदी अरब की तरफ से जो दावे किये जा रहो हैं वो चौंकाने वाले हैं

सऊदी के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 मिनट पर मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। ड्रोन का मलबा शहर के दक्षिण में आकर गिरा।

 मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश

सऊदी अरब ने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया है। गठबंधन के प्रवक्ता ने जुलाई 2017 में मक्का की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल का भी हवाला दिया लेकिन इस बार मामले थोड़ा अलग है, मौजूदा घटना में हथियार के तौर पर ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। सऊदी पक्ष ने कहा है कि दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए रेड लाइन है। सऊदी की तरफ से आगो कहा गया कि आगे किसी ऐसे हमले को रोकने के लिए जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे

हूती विद्रोहियों ने आरोपों को बताया झूठ

सऊदी पक्ष के इस दावे के तुरंत बाद हूती विद्रोहियों की ओर से इसका खंडन किया गया। हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य हेजाम अल-असद ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को निशाना बनाने की बात गलत है। यही वजह है कि घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल अलग हैं। सऊदी अरब कह रहा है कि ड्रोन हूतियों की ओर से ही लॉन्च किया गया था, जबकि हूती इस बात से इनकार कर रहे हैं।

सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और वहां मौजूद जायरीनों (तीर्थयात्री) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इस घटना की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां दुनिया भर से मुसलमान उमराह और हज के लिए पहुंचते हैं।

दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर

15 सितंबर 2026 को मक्का के पास ड्रोन हमले की कोशिश ने 1979 की उस घटना की यादें ताजा कर दीं, जब करीब 200 हथियारबंद लोगों ने ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर हजारों लोगों को बंधक बना लिया था। इस कब्जे की अगुवाई धार्मिक उपदेशक जुहैमान अल-उतैबी ने की थी और सुरक्षा बलों को इसे खत्म करने में करीब दो हफ्ते लग गए थे।

मौजूदा घटना में सऊदी अरब के मुताबिक एयर डिफेंस ने शाम करीब 6:50 बजे ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने दावा किया कि ड्रोन हूतियों ने लॉन्च किया था। इसके बाद मक्का में सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ, जिसे कुछ मिनट बाद हटा लिया गया। सऊदी के मुताबिक 2017 के बाद यह पहली ऐसी चेतावनी थी। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यमन की ओर से मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है।

1979 में क्या हुआ था?

20 नवंबर 1979 को करीब 50 हजार लोग ग्रैंड मस्जिद में नमाज के लिए जुटे थे। इसी दौरान जुहैमान अल-उतैबी और उसके समर्थकों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया। उसने अपने बहनोई मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-कहतानी को महदी बताया और सऊदी शाही परिवार के खिलाफ विद्रोह का ऐलान किया।

सुरक्षा बलों और हथियारबंद विद्रोहियों के बीच करीब दो हफ्ते तक लड़ाई चलती रही। विद्रोही मस्जिद के भूमिगत हिस्सों में छिप गए थे। फ्रांस के जानकारों की मदद से अभियान चलाया गया और 5 दिसंबर को जुहैमान समेत करीब 100 विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया। 9 जनवरी 1980 को जुहैमान और 62 अन्य लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।

यमन में हूतियों और सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना और देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।

इसके अलावा इस मामले पर एक और अहम खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि कि सऊदी ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल से मदद मांगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के मक्का पैक्ट के तहत अपने हाथ पीछे खींच लिए जिसके बाद अब सऊदी इजरायल का रुख कर लिया है। इस मामले पर अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों के बीच माहौल काफी शांत था, लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत के बाद संघर्ष फिर तेज हो गया। मक्का के पास ड्रोन की घटना से एक दिन पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूती हमलों में खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए इसके अलावा सात घरों और दो वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प के ‘शांति समझौते’ के दावे पर ईरान का पलटवार, कहा- नहीं हो रही कोई बातचीत

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

Iran US Talks News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच जुबानी जंग और तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ट्रम्प ने ईरान पर हमले को अंतिम समय में टालते हुए दावा किया था कि दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू होने जा रही है। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बैठक या बातचीत की कोई योजना नहीं है। इस कूटनीतिक खींचतान के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

ट्रम्प का दावा- हम बातचीत कर रहे हैं

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया है क्योंकि बातचीत का दौर शुरू होने वाला है। ट्रम्प ने दावा किया कि वे लोगों की जान लेने के बजाय समझौता करना पसंद करेंगे। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान के नेतृत्व को 'अत्यधिक कपटी' बताते हुए कहा कि ईरान ने ही बैठक की मांग की थी। ALSO READ: US-Iran War : ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप तो तेहरान ने कसा तंज, रुबियो बोले- अब चुकानी होगी ‘बहुत बड़ी कीमत’; इराक में ड्रोन अटैक से आग

क्या कहा ईरान ने?

दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रम्प के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही किसी बैठक का कार्यक्रम तय है। उन्होंने बताया कि ईरान के अधिकांश वार्ताकार देश में ही मौजूद हैं और विदेश मंत्री अब्बास अराघची इराक में धार्मिक यात्रा पर हैं। ईरान के मुताबिक अमेरिका के साथ कोई वार्ता प्रस्तावित नहीं है। फिलहाल केवल ओमान के साथ 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है। ALSO READ: ट्रंप कर रहे ईरान में भीषण हमले की तैयारी, अपने नागरिकों को दी यह सलाह, धमकी पर क्‍या बोला तेहरान?

क्या है ट्रंप का दावा?

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से नियंत्रण है, जहां से दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समझौता या ईरान का पूर्ण आत्मसमर्पण नहीं हो जाता, तब तक वहां से कुछ भी नहीं गुजर सकता। दूसरी ओर, ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना अधिकार क्षेत्र बनाए रखने पर अड़ा हुआ है। हालांकि सैन्य कार्रवाई के टलने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 5% गिरकर 83.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की

CJP protest ends Abhijeet Dipke

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति और उनके बेटे की विदेश में हुई उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की है। RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से भी वित्तीय पहलुओं की जांच करने का आग्रह किया है।

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अमित तिवारी ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवानराव दिपके ने अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस तरह वहन किया। उन्होंने भगवानराव दिपके की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग करते हुए उनकी सरकारी सेवा और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने की स्थिति का हवाला दिया है।

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कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपए के कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल

 

RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित 1 करोड़ रुपए के कानूनी रक्षा कोष को लेकर भी निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से जांच की मांग की है।

 

सिब्बल ने सोमवार को NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की ओर से बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। तिवारी ने इस फंड की प्रकृति और इसके वित्तीय स्रोतों की भी जांच किए जाने की मांग की है।

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CJP के राजनीतिक दल के रूप में संचालन पर भी सवाल

 

अमित तिवारी ने कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि CJP एक अपंजीकृत संस्था है, लेकिन राजनीतिक दल के नाम से काम कर रही है। तिवारी के मुताबिक, यदि CJP के लिए 1 करोड़ रुपए का कानूनी रक्षा कोष घोषित किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संगठन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक दल के नाम से उसका संचालन और धन का संग्रह या प्राप्ति जांच के दायरे में आ सकती है।

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GST को लेकर भी जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का भी रुख किया है। उन्होंने बोर्ड से यह जांचने का अनुरोध किया है कि सिब्बल की प्रस्तावित 1 करोड़ रुपए की राशि पर GST लागू होता है या नहीं। फिलहाल, इन सभी मुद्दों पर RTI कार्यकर्ता की ओर से जांच की मांग की गई है। उनके आरोपों और सवालों के आधार पर संबंधित प्राधिकरणों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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कौन हैं अमित तिवारी

अमित तिवारी गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। वे एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। अभिजीत दिपके और उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद अमित तिवारी सुर्खियों में हैं। यह पहला मामला है जब अमित तिवारी किसी तरह की सुर्खियों में आए हो। इससे पहले उन्हें कम लोग ही जानते थे।