Pakistan Army Fishing Nets Drones: अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के अशांत इलाके खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बल खौफनाक संकट से जूझ रहे हैं। आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना और पुलिस चेकपोस्टों को निशाना बना रहा है।
इस बढ़ते ड्रोन खतरे से अपने जवानों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना और पुलिस ने एक अनोखा ‘जुगाड़’ निकाला है। सैन्य पोस्टों और बैरकों के ऊपर मछली पकड़ने वाली जालियां टांग दी गई है।
हंगू हमले के बाद लिया गया अजीबोगरीब फैसला
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम 16 अप्रैल को हंगू जिले में हुए एक जानलेवा ड्रोन हमले के बाद उठाया गया। अफगान सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर सरकी पियाला पुलिस चेकपोस्ट पर TTP के ड्रोन ने हमला कर दिया था, जिसके तुरंत बाद आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों जवान घायल हो गए थे।
हंगू जिला अकेले इस साल 16 ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। ड्रोन के खौफ से अब सैनिक और पुलिसकर्मी अपनी बैरकों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। करोड़ों डॉलर के महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम और रडार खरीदने में वित्तीय तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब बेहद सस्ते विकल्पों पर निर्भर है।
अल जजीरा के अनुसार, पूरे चेकपोस्ट को मछली पकड़ने वाली जाली से ढकने का खर्च मात्र $1,400 (लगभग 1.17 लाख रुपये) आता है। वहीं, एक आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत $5,000 से लेकर $5 मिलियन (40 करोड़ रुपये से अधिक) तक होती है।
कहां-कहां लगी जालियां?
कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सेना और पुलिस की चौकियों पर छत और दीवारों के बीच जालियां तान दी गई हैं।
कैसे काम करता है ‘जाल वाला सुरक्षा चक्र’?
पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट की तरफ उड़ता हुआ आता है, तो उसके पंखे जाली में उलझ सकते हैं, जिससे ड्रोन रुक जाएगा या दूर ही डिफ्यूज हो जाएगा।
एक पुलिस अधिकारी फैयाज खान ने अल जजीरा को बताया, ‘अगर ड्रोन जाली में नहीं भी फंसता और ऊपर ही ब्लास्ट हो जाता है, तब भी नुकसान कम होगा। विस्फोट का मलबा और छर्रे सीधे जवानों पर गिरने के बजाय हवा में ही बिखर जाएंगे।’ वैसे, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह सिस्टम 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है।
रक्षा विशेषज्ञों ने बताया लाचारी और ‘बचकाना कदम’
सैन्य विशेषज्ञों ने असीम मुनीर के इस कदम की आलोचना की है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के इम्तियाज गुल ने अल जजीरा से कहा, ‘मछली पकड़ने वाली जाली लगाना एक बचकाना और सस्ता पैंतरा है। पुलिस स्टेशन ही हमेशा एकमात्र टारगेट नहीं होते। TTP के ड्रोन का मकसद बड़े इलाकों को निशाना बनाकर सनसनी फैलाना है। पाकिस्तान को ड्रोन को लॉन्च होते ही इंटरसेप्ट करने की तकनीक चाहिए, न कि जाल बिछाने की।’
TTP का बढ़ता ‘ड्रोन दस्ता’ और चीनी-तुर्की तकनीकों की नाकामी
TTP ने दिसंबर 2025 में मौलवी सलीम हक्कानी के नेतृत्व में एक विशेष ‘ड्रोन यूनिट’ बनाई थी। यह गुट बाजार में मिलने वाले सामान्य क्वाडकोप्टर में संशोधन कर बम और आईईडी (IED) जोड़कर हमले कर रहा है। रिसर्च के मुताबिक, TTP इन ड्रोन की फ्लाइंग टाइमिंग और रेंज बढ़ाने के लिए होंडा मोटरसाइकिल की बैटरियों का इस्तेमाल कर रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ही 100 से अधिक ड्रोन हमलों में लगभग 30 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं और 90 से अधिक घायल हुए हैं।
पाकिस्तान पहले से ही चीन और तुर्की से मिले एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन पहाड़ी इलाकों और TTP के कम ऊंचाई वाले ड्रोन के सामने ये सिस्टम बेअसर साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि असीम मुनीर की सेना को अब केवल मछली पकड़ने वाली जालियों का ही सहारा नजर आ रहा है।

