US-Iran War : ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप तो तेहरान ने कसा तंज, रुबियो बोले- अब चुकानी होगी ‘बहुत बड़ी कीमत’; इराक में ड्रोन अटैक से आग

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले को लेकर तेहरान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने ट्रंप के फैसले का मजाक उड़ाते हुए इसे अमेरिकी रुख में बदलाव और पीछे हटने के तौर पर पेश किया है।

 

ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, IRIB ने दावा किया कि तेहरान और क्षेत्रीय ताकतों के दबाव के कारण ट्रंप को अपने रुख से पीछे हटना पड़ा। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे वॉशिंगटन की आक्रामक सैन्य बयानबाजी से पीछे हटने के रूप में बताया है।

 

ईरान को ‘बहुत बड़ी कीमत’ चुकानी होगी: मार्को रुबियो

 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर तेहरान अपनी क्रांति को दूसरे देशों तक फैलाने की कोशिश करता है, तो उसे “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी होगी। फॉक्स न्यूज से बातचीत में रुबियो ने कहा कि ईरान के व्यवहार में बदलाव तभी संभव है, जब उसके कार्यों की कीमत इतनी बढ़ा दी जाए कि वह उसे वहन न कर सके। उन्होंने कहा कि ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने और उसकी नीतियों में बदलाव के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई के परिणामों को बढ़ाना जरूरी है।

ALSO READ: पप्पू यादव के संसद प्रदर्शन पर CM धामी का पलटवार, बोले- सनातन और संत समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं, 'ऑपरेशन कालनेमि' का किया जिक्र

इराक में ड्रोन हमले के बाद लगी भीषण आग

 

इस बीच, इराक के सुलेमानियाह में पेशमर्गा के 70वीं ब्रिगेड मुख्यालय के पास ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। इराकी मीडिया के अनुसार, ड्रोन को रोक लिया गया था, लेकिन उसके जलते हुए मलबे के कारण सैन्य ठिकाने के पास आग भड़क गई।

 

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, अल-मायादीन ने इसे ईरान समर्थित समूहों से जोड़कर बताया है। वहीं, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने इस स्थान को “ईरान विरोधी आतंकवादियों” का ठिकाना बताया है।

 

ट्रंप बोले- हमला करने के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार था

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर कार्रवाई रोकने से पहले अमेरिका सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “पूरी तरह तैयार” था और उसके पास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई सैन्य ताकत के साथ कार्रवाई करने की क्षमता थी।

 

ट्रंप के मुताबिक, ईरान और मध्य-पूर्व के कुछ अन्य देशों ने बातचीत के लिए समय मांगा था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि हमला अभी के लिए रद्द किया गया है और आगे की कार्रवाई बातचीत में तेजी से होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी।

क्या है भारत का नया ड्रोन किलर Bhargavastra, जानिए दुश्मन के Drone Swarm को तुरंत कैसे करेगा तबाह

Bhargavastra updates: मॉडर्न हो रही मिलिट्रीज के ड्रोन्स ने सैन्य अभियानों का रूप पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन-रूस के युद्ध से लेकर वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे वॉर तक, मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) ने निगरानी, रेकी और सटीक हमलों का तरीका बदल दिया है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी इस बात का प्रतीक है कि कैसे ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन ने अहम भूमिका निभाई थी। जैसे-जैसे ड्रोन्स युद्धक्षेत्र पर हावी हो रहे हैं, दुनिया भर की सेनाएं दुश्मन के ड्रोन्स को हमले से पहले ही पहचानने, ट्रैक करने और तबाह करने के लिए प्रभावी सिस्टम विकसित कर रही हैं। इसी दिशा में भारत का लेटेस्ट और बड़ा कदम है स्वदेशी ड्रोन किलर भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।

24 जुलाई को भारतीय सेना के सामने हुआ प्रदर्शन

भारतीय सेना ने 24 जुलाई को भार्गवास्त्र के प्रदर्शन को देखा। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, वीकल-माउंटेड काउंटर-स्वाम ड्रोन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से हथियारबंद ड्रोन्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन और इंडिपेंडेंट ड्रोन झुंडों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे मेक-II कार्यक्रम के तहत सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

10 किमी दूर से पहचान और सेंसर सिस्टम

भार्गवास्त्र एक उन्नत C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर से जुड़ा हुआ है। इसमें पहचान और ट्रैकिंग के लिए त्रिस्तरीय सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बड़े UAVs को 10 किलोमीटर तक की दूरी पर और छोटे ड्रोन्स को कम दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर दिन और रात दोनों समय निगरानी और ट्रैकिंग के लिए हैं। इसका पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर दुश्मन के सिग्नल और ड्रोन्स को बिना खुद की लोकेशन दिए ट्रैक कर लेता है।

नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शन

SDAL की नागपुर स्थित फैसिलिटी में प्रदर्शन के दौरान, इस सिस्टम ने ड्रोन्स के एक झुंड का सफलतापूर्वक पता लगाया और उसे ट्रैक किया। सिस्टम ने रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की, अलर्ट जारी किए और लॉन्चर को टारगेट असाइन किए। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण लाइव रॉकेट फायरिंग नहीं की गई लेकिन मेक-II कार्यक्रम के तहत स्टेटस रिव्यू के हिस्से के रूप में भारतीय सेना की टीम के सामने पूरी एंगेजमेंट सीक्वेंस का प्रदर्शन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स जैमिंग से आगे: ‘हार्ड-किल’ तकनीक

पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग पर निर्भर करते हैं लेकिन भार्गवास्त्र को एक हार्ड-किल समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह उन ऑटोनॉमस ड्रोन्स के खिलाफ बेहद कारगर है जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर या जैमिंग का असर नहीं होता। यह अपने स्वदेशी रॉकेट्स और सटीक माइक्रो-मिसाइलों के लेयर्ड आर्किटेक्चर के जरिए एकल ड्रोन्स और समन्वित ड्रोन झुंडों दोनों को नष्ट कर देता है।

5,000 मीटर की ऊंचाई और रेगिस्तान में भी तैनाती योग्य

भार्गवास्त्र को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5000 मीटर तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ आसानी से इंटिग्रेट हो सकता है, जिससे भविष्य में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध अभियानों में मदद मिलेगी।

कम लागत और आर्थिक फायदा

भार्गवास्त्र का एक बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कम कीमत वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए अत्यधिक महंगी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बजाय, भार्गवास्त्र अपेक्षाकृत सस्ते रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग करता है। इससे काउंटर-ड्रोन युद्ध में खर्च में काफी कमी आती है।

भारत का वैश्विक ड्रोन हब बनने का विजन

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दे रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि हम इस देश में वैश्विक स्तर का ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने हेतु मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें देश की भविष्य की रक्षा क्षमताओं में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।