क्या है भारत का नया ड्रोन किलर Bhargavastra, जानिए दुश्मन के Drone Swarm को तुरंत कैसे करेगा तबाह

Bhargavastra updates: मॉडर्न हो रही मिलिट्रीज के ड्रोन्स ने सैन्य अभियानों का रूप पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन-रूस के युद्ध से लेकर वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे वॉर तक, मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) ने निगरानी, रेकी और सटीक हमलों का तरीका बदल दिया है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी इस बात का प्रतीक है कि कैसे ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन ने अहम भूमिका निभाई थी। जैसे-जैसे ड्रोन्स युद्धक्षेत्र पर हावी हो रहे हैं, दुनिया भर की सेनाएं दुश्मन के ड्रोन्स को हमले से पहले ही पहचानने, ट्रैक करने और तबाह करने के लिए प्रभावी सिस्टम विकसित कर रही हैं। इसी दिशा में भारत का लेटेस्ट और बड़ा कदम है स्वदेशी ड्रोन किलर भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।

24 जुलाई को भारतीय सेना के सामने हुआ प्रदर्शन

भारतीय सेना ने 24 जुलाई को भार्गवास्त्र के प्रदर्शन को देखा। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, वीकल-माउंटेड काउंटर-स्वाम ड्रोन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से हथियारबंद ड्रोन्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन और इंडिपेंडेंट ड्रोन झुंडों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे मेक-II कार्यक्रम के तहत सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

10 किमी दूर से पहचान और सेंसर सिस्टम

भार्गवास्त्र एक उन्नत C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर से जुड़ा हुआ है। इसमें पहचान और ट्रैकिंग के लिए त्रिस्तरीय सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बड़े UAVs को 10 किलोमीटर तक की दूरी पर और छोटे ड्रोन्स को कम दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर दिन और रात दोनों समय निगरानी और ट्रैकिंग के लिए हैं। इसका पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर दुश्मन के सिग्नल और ड्रोन्स को बिना खुद की लोकेशन दिए ट्रैक कर लेता है।

नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शन

SDAL की नागपुर स्थित फैसिलिटी में प्रदर्शन के दौरान, इस सिस्टम ने ड्रोन्स के एक झुंड का सफलतापूर्वक पता लगाया और उसे ट्रैक किया। सिस्टम ने रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की, अलर्ट जारी किए और लॉन्चर को टारगेट असाइन किए। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण लाइव रॉकेट फायरिंग नहीं की गई लेकिन मेक-II कार्यक्रम के तहत स्टेटस रिव्यू के हिस्से के रूप में भारतीय सेना की टीम के सामने पूरी एंगेजमेंट सीक्वेंस का प्रदर्शन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स जैमिंग से आगे: ‘हार्ड-किल’ तकनीक

पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग पर निर्भर करते हैं लेकिन भार्गवास्त्र को एक हार्ड-किल समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह उन ऑटोनॉमस ड्रोन्स के खिलाफ बेहद कारगर है जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर या जैमिंग का असर नहीं होता। यह अपने स्वदेशी रॉकेट्स और सटीक माइक्रो-मिसाइलों के लेयर्ड आर्किटेक्चर के जरिए एकल ड्रोन्स और समन्वित ड्रोन झुंडों दोनों को नष्ट कर देता है।

5,000 मीटर की ऊंचाई और रेगिस्तान में भी तैनाती योग्य

भार्गवास्त्र को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5000 मीटर तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ आसानी से इंटिग्रेट हो सकता है, जिससे भविष्य में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध अभियानों में मदद मिलेगी।

कम लागत और आर्थिक फायदा

भार्गवास्त्र का एक बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कम कीमत वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए अत्यधिक महंगी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बजाय, भार्गवास्त्र अपेक्षाकृत सस्ते रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग करता है। इससे काउंटर-ड्रोन युद्ध में खर्च में काफी कमी आती है।

भारत का वैश्विक ड्रोन हब बनने का विजन

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दे रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि हम इस देश में वैश्विक स्तर का ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने हेतु मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें देश की भविष्य की रक्षा क्षमताओं में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

वियतनाम नाव हादसे पर PM मोदी ने जताया दुख, दिया हर संभव मदद का भरोसा

Vietnam Boat Accident: वियतनाम के मशहूर फु क्वोक आइलैंड के पास एक स्पीडबोट के पलटने से हुए दर्दनाक हादसे में कम से कम 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई। जिसके बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वहीं, इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारी हर संभव मदद कर रहे हैं और वियतनाम के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “वियतनाम के फु क्वोक के पास भारतीय नागरिकों के साथ हुई नाव दुर्घटना की दुखद खबर सुनकर बहुत दुख हुआ।”

उन्होंने कहा, “जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायल लोगों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। वियतनाम में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। हमारे अधिकारी वियतनाम के अधिकारियों के भी लगातार संपर्क में हैं।”

यह बयान तब आया जब 36 यात्रियों, जिनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार क्रू सदस्य थे, को ले जा रही एक नाव ‘होन मे रुट’ द्वीप से यात्रा के दौरान किनारे से 400 मीटर दूर पलट गई। स्थानीय अधिकारियों ने पलटी हुई नाव से 21 लोगों को बचाया, जबकि 15 भारतीय पर्यटकों (दो महिलाएं और 13 पुरुष) की मौत की पुष्टि हुई।

राजनाथ सिंह ने भी जताया दुख

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। मैं घायलों के जल्द ठीक होने और जारी खोज और बचाव अभियान की सफलता के लिए प्रार्थना करता हूं। इस मुश्किल समय में भारत पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। वियतनाम में हमारा दूतावास इस त्रासदी से प्रभावित भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद पहुंचा रहा है।”

वहीं, वियतनाम में भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर बनाए हैं।

भारतीय दूतावास ने घटना की दी जानकारी

दूतावास ने ‘X’ पर कहा, “एक दुखद घटना में, कुछ घंटे पहले वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई। स्थानीय अधिकारियों द्वारा खोज और बचाव अभियान जारी है और घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।”

वियतनामी टीवी पर दिखाए गए फुटेज में समुद्र में तेज लहरें और तेज हवाएं दिखाई दे रही थीं, और बचाव दल पानी में फंसे लोगों की ओर लाइफबॉय फेंक रहे थे। वहीं, जेट स्की की मदद से बचे हुए लोगों को सुरक्षित किनारे तक लाया गया, जबकि समुद्र तट पर मौजूद लोगों ने पीड़ितों को प्राथमिक उपचार दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे का शिकार हुए भारतीय पर्यटक स्मार्टफोन कंपनी लावा मोबाइल्स के कर्मचारी और डिस्ट्रीब्यूटर थे। स्थानीय खबरों के अनुसार, हादसे के समय समुद्र की स्थिति खराब थी और इलाके में ऊंची लहरें उठ रही थीं।

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