चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

char dham yatra sansmaran in hindi

यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने पहली बार ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिवेट कर दिया है। 2 महीने पहले हुए करार के तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी, अब हूतियों से जंग में उलझे सऊदी की मदद के लिए पाक-तुर्किये को सेनाएं भेजनी पड़ेंगी। आखिर मदद मांगने को कैसे मजबूर हुआ सऊदी, क्या वाकई दूसरे देश के लिए लड़ेंगी पाकिस्तान-तुर्किये की सेनाएं और क्या इससे भारत को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हूतियों ने सऊदी अरब को मदद मांगने पर कैसे मजबूर किया? जवाब: सऊदी अरब के पड़ोस में है यमन। यहां की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। सऊदी के जवान सरकार की सेना के साथ मिलकर कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। वहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह करके यमन के उत्तर-पश्चिम इलाके, राजधानी सना और लाल सागर के तटीय इलाके में हूतियों का कब्जा है। इन्हें ईरान से हथियार और पैसे की मदद मिलती है। 2015 से ही हूतियों और सऊदी समर्थित यमन की सेना में इलाकों पर कब्जे को लेकर छिटपुट संघर्ष चलता रहा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र ने सीजफायर करवाया। बीते साल शुरू हुई ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी पर भी हमले किए। हूतियों ने भी कई बार सऊदी पर हमला करने की धमकी दी। 5 अगस्त 2026 को हूतियों ने सऊदी समर्थित यमन सेना के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. हूतियों ने आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना जमावड़ा बढ़ा रही थी। इसी के साथ 4 साल पुराना सीजफायर टूट गया… सवाल-2: पाकिस्तान ने पहले टाला, फिर जमीनी सेना भेजने को क्यों तैयार हुआ? जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने पर कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें थीं… 1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमेट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट प्रतीकात्मक है, क्योंकि इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं है। तुर्किये और पाकिस्तान का सीधे टकराव में शामिल होना मुश्किल है। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका में है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ने से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती थी। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान में शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’ इधर 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा था। ट्रम्प ने मदद ठुकरा दी। फिर 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें हूतियों ने वादा किया कि वो लाल सागर में अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। इससे सऊदी को अमेरिकी मदद मिलने की उम्मीद और कम हो गई। सऊदी ने दावा किया कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने सऊदी के पवित्र शहर मक्का की तरफ ड्रोन छोड़े। हूतियों के प्रवक्ता याह्या सिरी का कहना था, ‘हमारा निशाना सऊदी के तेल और सैन्य ठिकाने थे, जो कि पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’ हालांकि ड्रोन को रोकने के दौरान मक्का प्रांत के ताइफ शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। इसके बाद पाकिस्तान का रुख बदलने लगा… सवाल-3: तो क्या वाकई पाक-तुर्किये की सेनाएं हूतियों से लड़ेंगी? जवाब: साझा बयान में कहा गया है, ‘तीनों देश सऊदी में ‘तेजी से’ जॉइंट फोर्सेज और दूसरी ताकत (यानी हथियार, इंटेलिजेंस वगैरह) तैनात करेंगे।’ हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों का सऊदी जाना नई बात नहीं है…. वहीं तुर्किये के विदेश मंत्री फिदान ने कहा है कि मक्का पैक्ट, नाटो की तरह काम करेगा, लेकिन मदद का पैमाना आगे की बातचीत से तय होगा। तुर्किये के सामने अपनी सेना भेजने में एक अड़चन ये भी है कि उसके कानून के तहत विदेश में सेना भेजने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। 5 अक्टूबर के फैसले में भी कहा गया है कि सऊदी की मदद में सेनाओं की तैनाती तीनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों और आपसी सहमति के आधार पर होगी। सवाल-4: पाकिस्तान-भारत जंग छिड़ी, तो क्या तुर्किये-सऊदी भी लड़ने आएंगे? जवाब: सऊदी और तुर्किये भारत को दुश्मन नहीं मानते, इसलिए जंग में उनके हमले की आशंका बेहद कम है। लेकिन 3 बातें गौर करनी चाहिए… पाकिस्तान पैक्ट का फायदा उठाएगा: कार्नेगी इंडिया थिंकटैंक में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के फेलो दिनकर पेरी के मुताबिक, ‘यह पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए बना है, लेकिन पाकिस्तान इसे भारत के साथ संघर्षों में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी हालात के चलते।’ सऊदी भारत पर हमला नहीं करेगा: भारत और सऊदी अरब के अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं। सऊदी और भारत में सालाना 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। सऊदी-पाकिस्तान से यह 5 बिलियन डॉलर से भी कम है। इसलिए पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी कहते हैं, ‘अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे या ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो, तो सऊदी पाकिस्तान का रक्षक बनकर नहीं आएगा।’ तुर्किये हथियार सप्लाई जारी रखेगा: रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन्स भेजे थे। पाकिस्तान के समर्थन में स्टेटमेंट जारी किया था। पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘इस पैक्ट से भारत-पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदलेगी। तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करता रहेगा और सऊदी खुद को पाकिस्तान का समर्थक दिखाने से बचेगा।’ सवाल-5: भारत के पास इस नई चुनौती की क्या काट है? जवाब: भारत की सबसे बड़ी काट उसके खाड़ी देशों से डिप्लोमैटिक और व्यापारिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में 89 लाख भारतीय रहते हैं। भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। सऊदी अरब अपना करीब 16% तो UAE करीब 11% कच्चा तेल भारत को बेचता है। मई 2026 में ही भारत ने UAE के साथ रक्षा समझौता किया है। यह रिश्ते और मजबूत किए जा सकते हैं… ——– ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…

ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।

मक्का पर ड्रोन हमला किसने किया? दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर

पवित्र शहर मक्का पर 15 सितंबर 2026 की शाम ड्रोन हमले की घटना हुई थी। हालांकि साउदी एयर डिफेंस ने वक्त रहते इस ड्रोन को मार गिराया। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर ये ड्रोन अटैक किसने किया। क्योंकि सऊदी अरब के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी का कहना है कि यह ड्रोन हूती विद्रोहियों ने भेजा था और यह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। तो वहीं अब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के इस आरोप को खारिज कर दिया है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने मक्का या किसी भी दूसरे पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है अगर हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के लिए यह ड्रोन नहीं भेजा, तो फिर यह ड्रोन किसका था? फिलहाल इस सवाल का कोई पुख्ता जवाब तो सामने नहीं आया है लेकिन सऊदी अरब की तरफ से जो दावे किये जा रहो हैं वो चौंकाने वाले हैं

सऊदी के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 मिनट पर मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। ड्रोन का मलबा शहर के दक्षिण में आकर गिरा।

 मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश

सऊदी अरब ने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया है। गठबंधन के प्रवक्ता ने जुलाई 2017 में मक्का की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल का भी हवाला दिया लेकिन इस बार मामले थोड़ा अलग है, मौजूदा घटना में हथियार के तौर पर ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। सऊदी पक्ष ने कहा है कि दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए रेड लाइन है। सऊदी की तरफ से आगो कहा गया कि आगे किसी ऐसे हमले को रोकने के लिए जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे

हूती विद्रोहियों ने आरोपों को बताया झूठ

सऊदी पक्ष के इस दावे के तुरंत बाद हूती विद्रोहियों की ओर से इसका खंडन किया गया। हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य हेजाम अल-असद ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को निशाना बनाने की बात गलत है। यही वजह है कि घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल अलग हैं। सऊदी अरब कह रहा है कि ड्रोन हूतियों की ओर से ही लॉन्च किया गया था, जबकि हूती इस बात से इनकार कर रहे हैं।

सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और वहां मौजूद जायरीनों (तीर्थयात्री) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इस घटना की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां दुनिया भर से मुसलमान उमराह और हज के लिए पहुंचते हैं।

दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर

15 सितंबर 2026 को मक्का के पास ड्रोन हमले की कोशिश ने 1979 की उस घटना की यादें ताजा कर दीं, जब करीब 200 हथियारबंद लोगों ने ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर हजारों लोगों को बंधक बना लिया था। इस कब्जे की अगुवाई धार्मिक उपदेशक जुहैमान अल-उतैबी ने की थी और सुरक्षा बलों को इसे खत्म करने में करीब दो हफ्ते लग गए थे।

मौजूदा घटना में सऊदी अरब के मुताबिक एयर डिफेंस ने शाम करीब 6:50 बजे ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने दावा किया कि ड्रोन हूतियों ने लॉन्च किया था। इसके बाद मक्का में सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ, जिसे कुछ मिनट बाद हटा लिया गया। सऊदी के मुताबिक 2017 के बाद यह पहली ऐसी चेतावनी थी। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यमन की ओर से मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है।

1979 में क्या हुआ था?

20 नवंबर 1979 को करीब 50 हजार लोग ग्रैंड मस्जिद में नमाज के लिए जुटे थे। इसी दौरान जुहैमान अल-उतैबी और उसके समर्थकों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया। उसने अपने बहनोई मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-कहतानी को महदी बताया और सऊदी शाही परिवार के खिलाफ विद्रोह का ऐलान किया।

सुरक्षा बलों और हथियारबंद विद्रोहियों के बीच करीब दो हफ्ते तक लड़ाई चलती रही। विद्रोही मस्जिद के भूमिगत हिस्सों में छिप गए थे। फ्रांस के जानकारों की मदद से अभियान चलाया गया और 5 दिसंबर को जुहैमान समेत करीब 100 विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया। 9 जनवरी 1980 को जुहैमान और 62 अन्य लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।

यमन में हूतियों और सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना और देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।

इसके अलावा इस मामले पर एक और अहम खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि कि सऊदी ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल से मदद मांगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के मक्का पैक्ट के तहत अपने हाथ पीछे खींच लिए जिसके बाद अब सऊदी इजरायल का रुख कर लिया है। इस मामले पर अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों के बीच माहौल काफी शांत था, लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत के बाद संघर्ष फिर तेज हो गया। मक्का के पास ड्रोन की घटना से एक दिन पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूती हमलों में खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए इसके अलावा सात घरों और दो वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

सऊदी ने मक्का के पास हूती ड्रोन मार गिराया:यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर; हूती बोले- मक्का को कोई खतरा नहीं

सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी निवारक कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। हज इस्लाम के पांच प्रमुख धार्मिक कर्तव्यों में शामिल है। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। उनके मुताबिक, इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट मंगलवार को सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। इनमें मक्का और अन्य शहर शामिल थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब पिछले एक सप्ताह में ईरान समर्थित लड़ाकों के हमलों के बाद सऊदी अरब क्षेत्रीय संघर्ष से और ज्यादा प्रभावित हुआ है। हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के उन तेल निर्यात मार्गों पर भी जोखिम बढ़ा है, जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटाकर वैकल्पिक रास्तों से इस्तेमाल किया जा रहा है। हूतियों ने सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। सऊदी पक्ष ने मक्का के पास ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले नष्ट करने की बात कही है। वहीं, हूती पक्ष ने पवित्र शहर को किसी खतरे से इनकार किया है।

सऊदी ने मक्का के पास हूती ड्रोन मार गिराया:यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर; हूती बोले- मक्का को कोई खतरा नहीं

सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। इस्लामिक देशों के संगठन ने हूती हमलों को आतंकवाद बताया इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने मक्का और मदीना क्षेत्र में हूती हमलों की निंदा की है। संगठन ने कहा कि पवित्र जगहों, मस्जिदों और आम लोगों के ठिकानों पर हमला करना आतंकवाद है। ऐसी कार्रवाई इस्लाम की सीख और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यमन में तनाव के बाद सऊदी में हमले ईरान से जुड़े हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है और क्रूज मिसाइलें दाग रहा है। यमन के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। इसी बीच हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर तेजी से अपना कब्जा बढ़ाया है। उन्होंने सोमवार को इस इलाके में दो और द्वीप ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर भी कब्जा कर लिया। ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में स्थित हैं। हूतियों ने पिछले हफ्ते सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक हफ्ते सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। ————— ये खबर भी पढ़ें… मक्का में पहली बार मिसाइल अटैक का इमरजेंसी अलर्ट:हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर हमला किया; 2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

IRCTC ने सावन के महीने में दिया भक्तो को नया तोहफा, सिरडी के साई बाबा के दर्शन करे इस सस्ते पैकेज से!

IRCTC ने श्रद्धालुओं के लिए एक खास टूर पैकेज पेश किया है। इस पैकेज के जरिए ट्रैवलर को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। यह पैकेज आपके लिए सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें यात्रा के दौरान टिकट, होटल और आने-जाने की व्यवस्था को लेकर आपको अलग से ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी होगी। मतलब एक ही पैकेज में यात्रा और दर्शन से जुड़ी कई सुविधाएं मिलेंगी।

 

 

ट्रैवल शेड्यूल

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यह टूर कुल 5 दिन और 4 रातों का है। जर्नी हर गुरुवार को शुरू होगी और सोमवार को वापस लौटेंगे। सफर पुष्पक एक्सप्रेस (12533/12534) से होगा। पैसेंजर कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, ऐशबाग, बादशाह नगर या गोमती नगर से ट्रेन पकड़ सकते हैं। गुरुवार शाम ट्रेन से निकलने के बाद रातभर सफर रहेगा और शुक्रवार दोपहर करीब 4:15 बजे मनमाड स्टेशन पहुंचेंगे।

 

 

दर्शनीय तीर्थ स्थल

Sanskar

मनमाड स्टेशन पहुंचने के बाद IRCTC की एसी गाड़ी पैसेंजर को शिरडी के होटल तक लेकर जाएगी। होटल में आराम करने के बाद शाम को साईं बाबा के दर्शन के लिए समय मिलेगा। शनिवार सुबह नाश्ते के बाद त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और शनि शिंगणापुर मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। दर्शन के बाद वापस शिरडी के होटल में लौटकर आराम किया जा सकेगा। लेकिन दोपहर के खाने का खर्च पैसेंजर को खुद उठाना होगा।

 

 

 

पैकेज फैसिलिटीज

पैकेज में 2AC या थर्ड इकोनॉमी में आने-जाने का कन्फर्म ट्रेन टिकट शामिल है। शिरडी में दो रात होटल में ठहरने के साथ दोनों दिन सुबह का नाश्ता भी मिलेगा। स्टेशन से होटल और मंदिरों तक आने-जाने के लिए शेयरिंग बेस पर एसी गाड़ी की सुविधा रहेगी। पैसेंजर की सुरक्षा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस भी पैकेज में शामिल है। पैकेज की शुरुआती कीमत करीब ₹14,145 से ₹14,910 के बीच है।

 

 

कैंसिलेशन पॉलिसी

यात्रा से 15 दिन पहले टिकट कैंसिल करने पर सिर्फ ₹250 काटे जाएंगे। 8 से 14 दिन पहले कैंसिल करने पर कुल राशि का 25 प्रतिशत और 4 से 7 दिन पहले कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। यदि ट्रिप में 4 दिन से कम समय बचा है, तो कैंसिलेशन पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। बुकिंग के लिए IRCTC Tourism की ऑफिशल वेबसाइट irctctourism.com पर जाकर सीट बुक की जा सकती है।

 

शिरडी, त्र्यंबकेश्वर और शनि शिंगणापुर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन करने के लिए यह टूर पैकेज परफेक्ट है। ट्रेन यात्रा, होटल, नाश्ता और घूमने की सुविधा एक ही पैकेज में मिलने से यात्रा की प्लानिंग आसान हो जाती है।

पाकिस्तान पर अटैक हुआ तो सऊदी-तुर्किये हमला करेंगे? नए ‘इस्लामिक NATO’ का भारत के लिए क्या मायने है?

Saudi Arabia-Turkey-Pakistan Mecca Alliance: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मक्का डील के तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किये गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने इस समझौते को ‘इस्लामिक NATO’ करार दिया। साथ ही भारत और इजरायल की तरफ से पैदा की गई चुनौतियों से निपटने का आग्रह किया।

एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।

एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा

बयान के अनुसार, “इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।” बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी शामिल है। बयान में कहा गया है, “यह समझौता एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।”

यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है। इसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।

तुर्किये और इजरायल में बढ़ा तनाव

हाल के महीनों में तुर्किये और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें यह संकल्प लिया गया था कि उन दोनों में से किसी भी देश पर हमले को दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा। रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त ट्रेनिंग, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए सैन्य कर्मियों और विमानों को तैनात किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं। साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है। शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।

क्या बोले एक्सपर्ट?

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका काफी कम हो सकती है। रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एक पूर्व प्रमुख के बेटे अब्दुल्ला हमीद गुल ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को सुरक्षा मुहैया कराने की अमेरिका की क्षमता को लेकर क्षेत्र में शंकाएं बढ़ रही हैं।

गुल ने कहा, “खाड़ी देशों में अमेरिका के 27 सैन्य अड्डे थे। उनमें से 17 को अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ईरान ने तबाह कर दिया। इससे क्षेत्र में ये सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिकी वाकई उनकी रक्षा कर सकते हैं। इसी वजह से ऐसे समझौते करने की जरूरत पड़ी।” गुल ने कहा कि इस समझौते के साथ ही क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका बहुत कम या कहें कि खत्म सी हो जाएगी। गुल ने कहा, “कतर और कुवैत भी जल्द ही पाकिस्तान के साथ इसी तरह के समझौतों में शामिल होंगे।”

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को आभास हो गया था कि ईरान के बजाय इजरायल उनके लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने कहा कि इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर धारणा बदल दी है। वहीं, रिटायर्ड ब्रिगेडियर फारूक हमीद ने कहा कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। लिहाजा पाकिस्तान और भारत के बीच भविष्य में किसी तरह के संघर्ष के विरुद्ध यह प्रावधान ‘निवारक’ के रूप में काम करेगा।गठजोड़ से नई दिल्ली की बढ़ेगी टेंशन?

मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यही प्रावधान इस समझौते की तुलना NATO के Article 5 से किए जाने की सबसे बड़ी वजह है। NATO के Article 5 के तहत किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। इसके सदस्य देश सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता जताते हैं।

पाकिस्तान ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा

समझौते पर हस्ताक्षर के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद से पीड़ित राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर ‘Islamic NATO’ से उन चुनौतियों से निपटने की अपील, जिन्हें उन्होंने भारत और इजरायल से जुड़ा बताया। पाकिस्तान की इस बयानबाजी को खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच लंबे समय से सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी मुद्दों पर तनाव बना रहा है।

एक पर हमला तो तीनों आएंगे साथ?

मक्का में हुए इस संयुक्त रक्षा समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामूहिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता है। यानी अगर समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषक इसे NATO मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, केवल इस प्रावधान के आधार पर इसे NATO का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा। NATO एक व्यापक, संस्थागत और दशकों पुराना सैन्य गठबंधन है। जबकि पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये के बीच यह समझौता तीन देशों की रक्षा साझेदारी पर आधारित है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह एग्रीमेंट?

नई दिल्ली के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों शामिल हैं। साथ ही तुर्किये भी पाकिस्तान के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। भारत की चिंता का एक पहलू यह हो सकता है कि पाकिस्तान भविष्य में क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामूहिक रक्षा के मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश करे।

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खासकर तब, जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भारत और इजरायल को कथित चुनौतियों से जोड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नए डिफेंस डील का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करेगा?

क्या भारत के खिलाफ बनेगा सैन्य मोर्चा?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत के खिलाफ बनाया गया सैन्य गठबंधन है। समझौते का घोषित आधार तीनों देशों के बीच सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग है। लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा भारत और इजरायल का नाम लेकर बयान देना निश्चित रूप से इस घटनाक्रम को नई दिल्ली के लिए अधिक संवेदनशील बना देता है। भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि यह समझौता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित रहता है या भविष्य में इसे किसी व्यापक राजनीतिक-सैन्य गठबंधन का रूप दिया जाता है।

घूमें बेफिक्र होकर, IRCTC के नए टूर पैकेज से बिना प्लानिंग के करें दर्शन-पूजन!

IRCTC ने ‘गंगा गया संगम यात्रा’ नाम से 8 दिन और 7 रात का नया धार्मिक टूर शुरू किया है। इस पैकेज में गया, वाराणसी, सारनाथ, प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ और नैमिषारण्य जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। फ्लाइट, होटल, खाने, एसी वाहन और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी कई फैसिलिटी भी पैकेज में हैं। इस तरह से श्रद्धालुओं को अलग-अलग बुकिंग करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

यात्रा की शुरुआत

विष्णुपद मंदिर, पर्यटन, 2023 - बोध गया | विष्णुपद मंदिर की तस्वीरें - Tripinvites - TripInvites

यह तीर्थयात्रा 2 सितंबर 2026 को हैदराबाद से शुरू होगी। पहले फ्लाइट से गया पहुंचाया जाएगा, जहां होटल में ठहरने के बाद महाबोधि मंदिर और आसपास के बौद्ध मठों के दर्शन कराए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन विष्णुपद मंदिर और मंगला गौरी शक्तिपीठ देखने का मौका मिलेगा। यहां से सड़क मार्ग से वाराणसी के लिए रवाना हुआ जाएगा।

काशी और सारनाथ 

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वाराणसी में यात्रियों को तीन रात रुकने का मौका मिलेगा। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, शाम की भव्य गंगा आरती और शहर के पुराने बाजार देखने का मौका मिलेगा। अगले दिन सारनाथ की सैर भी कराई जाएगी, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यहां आप चाहें तो खाली समय में खरीदारी भी कर सकते हैं।

प्रयागराज और अयोध्या 

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वाराणसी के बाद यात्रा प्रयागराज पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु त्रिवेणी संगम और अलोपी देवी मंदिर के दर्शन करेंगे। इसके बाद अयोध्या ले जाया जाएगा, जहां रामलला मंदिर और भी कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जायेंगे। यहां की आध्यात्मिक शांति और भक्ति का माहौल बहुत ही सुख देता है।

लखनऊ और नैमिषारण्य

अयोध्या से निकलकर यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। यहां से नैमिषारण्य की यात्रा कराई जाएगी, जिसे हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन तीर्थ स्थलों में सबसे खूबसूरत है। वापसी पर लखनऊ का फेमस बड़ा इमामबाड़ा भी दिखाया जाएगा। इसके बाद फ्लाइट से वापस हैदराबाद लौटकर जर्नी पूरी होगी।

यात्रा की सुविधाएं

इस टूर में आने-जाने की फ्लाइट, सात रात होटल में ठहरने की फैसिलिटी, सात बार नाश्ता, सात बार डिनर और एक बार लंच शामिल है। इसके साथ ही एसी वाली गाड़ी से घूमना, ट्रैवल इंश्योरेंस, IRCTC टूर एस्कॉर्ट और सभी जरूरी टैक्स भी पैकेज में हैं। यानी ट्रिप में आपको अलग-अलग बुकिंग करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

पैकेज कॉस्ट 

इस पैकेज की कीमत कमरे और लोगों के हिसाब से की गई है। सिंगल रूम के लिए ₹54,800, दो लोगों के साथ रुकने पर ₹41,000 प्रति व्यक्ति और तीन लोगों के साथ रुकने पर ₹38,750 प्रति व्यक्ति खर्च आएगा। अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से आप इस पैकेज को चुन सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

इस पैकेज में मंदिरों या स्मारकों के एंट्री टिकट शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही ऑटो-रिक्शा, बैटरी वाहन, विशेष पूजा, गाइड, टिप्स, लॉन्ड्री, ड्रिंक्स, बोतलबंद पानी और दूसरे अपने खुद के खर्च यात्रियों को खुद उठाने होंगे। इसलिए ट्रिप पर निकलने से पहले इन एक्स्ट्रा खर्चों को ध्यान में रखकर तैयारी करें।