Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा पर 9 अगस्त से लगी रोक, इस वजह से प्रशासन ने लिया फैसला

Amarnath Yatra 2026: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर बड़ा फैसला लिया है। लगातार खराब मौसम और कई जगहों पर हुए भूस्खलन के चलते अमरनाथ यात्रा को तय तारीख से पहले ही रोकने का फैसला किया गया है। 9 अगस्त से अनंतनाग के चंदनवाड़ी और गांदरबल के बालटाल मार्ग से यात्रा बंद हो जाएगी। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ये फैसला लिया है। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 28 अगस्त तक चलनी थी। लेकिन यात्रा मार्ग में मरम्मत और जरूरी रखरखाव का काम पूरा करने के लिए इसे बीच में रोकने का निर्णय लिया गया है। अब तक 4.8 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन कर चुके हैं।

क्यों रोका गया अमरनाथ यात्रा

9 अगस्त से चंदनवाड़ी और बालटाल, दोनों मार्गों पर अमरनाथ यात्रा रोक दी जाएगी। हाल की हुई तेज बारिश से अमरनाथ यात्रा के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। IMD ने भी आने वाले दिनों में खराब मौसम की संभावना जताई है। वहीं यात्रा के लिए खराब हिस्सों को ठीक करने और जरूरी रखरखाव का काम किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मरम्मत के काम को देखते हुए यात्रा रोकने का फैसला लिया गया है।

रोकी गई अमरनाथ यात्रा

कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने बताया कि, हाल में हुई बारिश से अमरनाथ यात्रा के रास्ते के कुछ हिस्से कमजोर हो गए हैं। इन जगहों पर मरम्मत और जरूरी रखरखाव का काम किया जा रहा है। ट्रैक को सुरक्षित और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) को दी गई है। इसके साथ ही मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में खराब मौसम की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चंदनवाड़ी और बालटाल, दोनों रास्तों से अमरनाथ यात्रा रोकने का फैसला किया है।

कमिश्नर ने लोगों से निर्देशों को पालन करने की अपील की

कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने श्रद्धालुओं से अधिकारियों की ओर से जारी जरूरी निर्देशों और एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये निर्देश यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए जारी किए गए हैं। इस साल अमरनाथ यात्रा में अब तक 4.8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा की शुरुआत अनंतनाग के चंदनवारी और गांदरबल के बालटाल, दोनों मार्गों से एक साथ की गई थी।

कब होगी छड़ी मुबारक यात्रा 

नियमित अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है, लेकिन पारंपरिक पहलगाम मार्ग से छड़ी मुबारक की यात्रा जारी रहेगी। 28 अगस्त को छड़ी मुबारक के साथ इस साल की अमरनाथ यात्रा का समापन होगा। छड़ी मुबारक को भगवान शिव से जुड़ी पवित्र चांदी की छड़ी माना जाता है। हर साल इसे श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पारंपरिक तरीके से ले जाया जाता है।

घूमें बेफिक्र होकर, IRCTC के नए टूर पैकेज से बिना प्लानिंग के करें दर्शन-पूजन!

IRCTC ने ‘गंगा गया संगम यात्रा’ नाम से 8 दिन और 7 रात का नया धार्मिक टूर शुरू किया है। इस पैकेज में गया, वाराणसी, सारनाथ, प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ और नैमिषारण्य जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। फ्लाइट, होटल, खाने, एसी वाहन और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी कई फैसिलिटी भी पैकेज में हैं। इस तरह से श्रद्धालुओं को अलग-अलग बुकिंग करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

यात्रा की शुरुआत

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यह तीर्थयात्रा 2 सितंबर 2026 को हैदराबाद से शुरू होगी। पहले फ्लाइट से गया पहुंचाया जाएगा, जहां होटल में ठहरने के बाद महाबोधि मंदिर और आसपास के बौद्ध मठों के दर्शन कराए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन विष्णुपद मंदिर और मंगला गौरी शक्तिपीठ देखने का मौका मिलेगा। यहां से सड़क मार्ग से वाराणसी के लिए रवाना हुआ जाएगा।

काशी और सारनाथ 

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वाराणसी में यात्रियों को तीन रात रुकने का मौका मिलेगा। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, शाम की भव्य गंगा आरती और शहर के पुराने बाजार देखने का मौका मिलेगा। अगले दिन सारनाथ की सैर भी कराई जाएगी, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यहां आप चाहें तो खाली समय में खरीदारी भी कर सकते हैं।

प्रयागराज और अयोध्या 

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वाराणसी के बाद यात्रा प्रयागराज पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु त्रिवेणी संगम और अलोपी देवी मंदिर के दर्शन करेंगे। इसके बाद अयोध्या ले जाया जाएगा, जहां रामलला मंदिर और भी कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जायेंगे। यहां की आध्यात्मिक शांति और भक्ति का माहौल बहुत ही सुख देता है।

लखनऊ और नैमिषारण्य

अयोध्या से निकलकर यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। यहां से नैमिषारण्य की यात्रा कराई जाएगी, जिसे हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन तीर्थ स्थलों में सबसे खूबसूरत है। वापसी पर लखनऊ का फेमस बड़ा इमामबाड़ा भी दिखाया जाएगा। इसके बाद फ्लाइट से वापस हैदराबाद लौटकर जर्नी पूरी होगी।

यात्रा की सुविधाएं

इस टूर में आने-जाने की फ्लाइट, सात रात होटल में ठहरने की फैसिलिटी, सात बार नाश्ता, सात बार डिनर और एक बार लंच शामिल है। इसके साथ ही एसी वाली गाड़ी से घूमना, ट्रैवल इंश्योरेंस, IRCTC टूर एस्कॉर्ट और सभी जरूरी टैक्स भी पैकेज में हैं। यानी ट्रिप में आपको अलग-अलग बुकिंग करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

पैकेज कॉस्ट 

इस पैकेज की कीमत कमरे और लोगों के हिसाब से की गई है। सिंगल रूम के लिए ₹54,800, दो लोगों के साथ रुकने पर ₹41,000 प्रति व्यक्ति और तीन लोगों के साथ रुकने पर ₹38,750 प्रति व्यक्ति खर्च आएगा। अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से आप इस पैकेज को चुन सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

इस पैकेज में मंदिरों या स्मारकों के एंट्री टिकट शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही ऑटो-रिक्शा, बैटरी वाहन, विशेष पूजा, गाइड, टिप्स, लॉन्ड्री, ड्रिंक्स, बोतलबंद पानी और दूसरे अपने खुद के खर्च यात्रियों को खुद उठाने होंगे। इसलिए ट्रिप पर निकलने से पहले इन एक्स्ट्रा खर्चों को ध्यान में रखकर तैयारी करें।

पहाड़, जंगल या सुनसान रास्ता… गूगल मैप्स का यह फीचर हर जगह देगा साथ!

आज के समय में घूमने निकलते ही ज्यादातर लोग सबसे पहले गूगल मैप खोलते है। लेकिन कई लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ रास्ता देखने के लिए करते हैं। यदि गूगल मैप की कुछ आसान ट्रिक्स पता हों, तो सफर ज्यादा आसान, सेफ और बिना किसी परेशानी के हो सकता है।

ऑफलाइन मैप रखें (Offline Maps)

आपको किसी ऐसी जगह जाना हैं जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है, तो निकलने से पहले उस एरिया का ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें। इससे इंटरनेट बंद होने पर भी रास्ता देखने में परेशानी नहीं होगी। पहाड़ी इलाकों, गांवों या विदेश ट्रिप में यह फीचर काफी काम आता है।

ट्रैफिक पहले देखें (Live Traffic)

घर या होटल से निकलने से पहले Google Maps पर ट्रैफिक जरूर चेक करें। इससे आपको पता चल जाएगा कि रास्ते में कहीं जाम, रोड बंद या कोई और परेशानी तो नहीं है। इससे जरूरत पड़ने पर आप दूसरा रास्ता चुन सकेंगे और टाइम भी बच जाएगा।

जरूरी जगह सेव करें (Save Places)

ट्रिप शुरू करने से पहले होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, एटीएम, अस्पताल और घूमने वाली जगहों को Google Maps में सेव कर लें। इससे नेटऑन करने या बार-बार सर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जरूरत पड़ने पर जल्दी लोकेशन मिल जाएगी।

लाइव लोकेशन शेयर करें (Share Live Location)

अगर आप अकेले ट्रैवल कर रहे हैं या रात हो जाए, तो अपनी लाइव लोकेशन परिवार या दोस्तों के साथ शेयर करें। इससे उन्हें पता रहेगा कि आप कहां हैं और जब भी जरूरत पड़े तो वे आपकी मदद भी कर सकेंगे। यह फीचर सेफ्टी के हिसाब से काफी उपयोगी है।

आसपास की जगह खोजें (Explore Nearby)

किसी नए शहर में पहुंचने के बाद Google Maps का Explore फीचर जरूर इस्तेमाल करें। इससे आसपास के अच्छे रेस्टोरेंट, कैफे, पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, एटीएम और घूमने की जगहें जल्दी मिल जाती हैं। इससे वहां पर आपको किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ती।

भीड़ का सही समय देखें (Popular Times)

किसी मंदिर, मॉल, म्यूजियम या मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाने से पहले Google Maps में Popular Times जरूर देख लें। इससे आप जान पाएंगे कि वहां किस समय सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। फिर सही टाइम देखकर लंबी लाइन और भीड़ से बच सकते हैं।

पहले ही जगह देख लें (Street View)

अगर किसी जगह पर पहली बार जा रहे हैं, तो Street View फीचर की मदद से वहां की सड़क, होटल का एंट्री गेट, पार्किंग और आसपास का एरिया पहले ही देख सकते हैं। इससे वहां पहुंचने के बाद रास्ता ढूंढने में कम परेशानी होती है और आप सही लोकेशन तक पहुंच जाते हैं।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रहेंगे ‘नमो भारत’ के ये 17 स्टेशन, इन राज्यों में स्कूल भी बंद, जानिए रूट समेत सभी बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने बताया है कि कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद और मोदीनगर के बीच 17 ‘नमो भारत’ स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट चार से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इन स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी सीमित रहेगी। NCRTC ने बताया कि वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।

निगम के अनुसार, प्रभावित स्टेशनों में मोदीनगर, मेरठ नॉर्थ, एमईएस कॉलोनी, बेगमपुल, भैंसाली, मेरठ सेंट्रल, ब्रह्मपुरी, शताब्दी नगर, रिठानी, परतापुर, मेरठ साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर और गाजियाबाद शामिल हैं। NCRTC ने बताया कि अधिकतर स्टेशनों पर इस अवधि के दौरान गेट संख्या-2 बंद रहेगा। बयान के मुताबिक, बेगमपुल स्टेशन पर गेट संख्या-2 और 3, जबकि दुहाई स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 4 बंद रहेंगे। गाजियाबाद स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 5 बंद रहेंगे।

पार्किंग भी बंद

इन स्टेशनों के प्रभावित हिस्से की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। एनसीआरटीसी ने यात्रियों को नमो भारत सेवाओं का उपयोग करने के लिए संबंधित स्टेशनों पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रवेश और निकास द्वारों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। निगम ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया।

निगम ने कहा कि सरायकाले खां-मोदीनगर कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। बयान के मुताबिक, 14 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक ट्रेनें आठ मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इस साल कांवड़ यात्रा पवित्र श्रावण मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त को समाप्त होगी।

स्कूल-कॉलेज 12 अगस्त तक बंद रहेंगे

श्रावण मास की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद जिलों में शिक्षण संस्थान 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। मेरठ में जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह के आदेश के अनुसार यह अवकाश 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके अनुसार सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

प्रशासन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए लिया गया है, क्योंकि श्रावण शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से गुजरते हैं। मेरठ प्रशासन के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षण संस्थान, जिनमें बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से जुड़े संस्थान शामिल हैं, 12 अगस्त तक बंद रहेंगे।

इसके अनुसार सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी इस दौरान क्लास बंद रखने का निर्देश दिया गया है। गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूल के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चार अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया।

इस बीच, बागपत प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए तीन अगस्त से 12 अगस्त तक कक्षा एक से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर जाते हुए बागपत से गुज़र रहे हैं। जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ‘जलाभिषेक’ के लिए जिले के प्रमुख शिवमंदिरों में भी जा रहे हैं, जिससे कांवड़ रूट और आस-पास के इलाकों में भारी ट्रैफिक हो रहा है।

कब शुरू हुई कांवड़ यात्रा?

भगवान शिव के पवित्र माह सावन के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचेगी। इसी दिन श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसी के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

कहां से लाया जाता है गंगाजल?

कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री गंगाजल लेने के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से भोलेनाथ के श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने मंजिल की ओर रवाना होते हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई प्रमुख शिवधामों में भी दर्शन-पूजन करते हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने व्यापक ट्रैफिक में बदलाव किया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर जुलाई के अंतिम सप्ताह से भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रा के चरम दिनों में कई रूट केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। जबकि अन्य वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा रूट को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। हजारों CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष गश्ती दलों की तैनाती की गई है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कांवड़ और डीजे सिस्टम की ऊंचाई को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करने की अपील की है।