Mercedes-Maybach S 580e की भारत में एंट्री, 4.8 सेकंड में पकड़ेगी 100 की रफ्तार, जानें कितनी है कीमत

Mercedes-Maybach S 580e: Mercedes-Benz India ने देश की पहली इलेक्ट्रिक Mercedes-Maybach, ‘Mercedes-Maybach S 580e’ लॉन्च की है, जिसकी कीमत 3.35 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) है। यह लग्जरी सेडान Maybach ब्रांड के पारंपरिक आराम और बेहतरीन कारीगरी को प्लग-इन हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ जोड़ती है। बता दें कि Mercedes-Benz शुरू में भारत में S 580e की सिर्फ 30 यूनिट्स ही बेचेगी।

Mercedes-Maybach S 580e: डिजाइन

Mercedes-Maybach S 580e का डिजाइन काफी हद तक फ्लैगशिप S-Class जैसा ही है, लेकिन इसे Maybach की खास पहचान देने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। इसमें रोशनी वाला Maybach ग्रिल, Maybach लोगो प्रोजेक्शन और इल्यूमिनेटेड डोर सिल्स दिए गए हैं। इसके अलावा, ग्राहकों को MANUFAKTUR के तहत कई कस्टमाइजेशन विकल्प भी मिलते हैं।

ग्राहक इस कार के लिए खास टू-टोन पेंट फिनिश और अपनी पसंद के Nappa लेदर इंटीरियर का विकल्प चुन सकते हैं।

भारत में इसका मॉडल सिर्फ 4-सीटर कॉन्फिगरेशन में उपलब्ध होगा। इसमें पीछे Executive सीटें और पूरी लंबाई में रियर बिजनेस कंसोल दिया गया है। Mercedes-Benz के मुताबिक, कार में पीछे बैठने वाले यात्रियों के आराम पर खास ध्यान दिया गया है, जो Maybach कारों की सबसे खास खूबियों में से एक है।

Mercedes-Maybach S 580e: फीचर्स

Mercedes-Maybach S 580e के केबिन में लग्जरी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई शानदार फीचर्स दिए गए हैं। इसमें 31 स्पीकर वाला Burmester 4D साउंड सिस्टम मिलता है। इसमें 8 एक्साइटर्स और 1,610 वॉट का आउटपुट दिया गया है, जिससे कार के अंदर शानदार साउंड का अनुभव मिलता है।

पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए वायरलेस चार्जिंग, फोल्डिंग टेबल, तापमान कंट्रोल वाले कप होल्डर और Rear Comfort Package Plus जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

टेक्नोलॉजी की बात करें तो कार में Mercedes-Benz का लेटेस्ट Operating System (MB.OS), 3D ड्राइवर डिस्प्ले, MBUX Superscreen, Augmented Reality नेविगेशन और Head-Up Display मिलता है। सेफ्टी के लिए इसमें ADAS Level 2, PRE-SAFE सिस्टम और कुल 15 एयरबैग दिए गए हैं।

Mercedes-Maybach S 580e: स्पेसिफिकेशन्स

इसमें 3.0-लीटर, छह-सिलेंडर वाला पेट्रोल प्लग-इन हाइब्रिड पावरट्रेन है, जो Mercedes के 4MATIC ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम के साथ आता है। इसका कंबशन इंजन 443 hp की पावर और 560 Nm का टॉर्क देता है, जबकि इलेक्ट्रिक मोटर 160 hp की पावर और 480 Nm का टॉर्क जोड़ती है।

इसकी कुल पावर 585 hp और टॉर्क 750 Nm है, जो 9G-TRONIC ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के जरिए मिलता है। Mercedes का दावा है कि S 580e 4.8 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 250 kmph है। इस सेडान में 22 kWh का बैटरी पैक भी है, जो WLTP-सर्टिफाइड लगभग 100 km की इलेक्ट्रिक रेंज देता है। चार्जिंग के लिए इसमें 11 kW AC और 60 kW DC फास्ट चार्जिंग की सुविधा है।

Mercedes-Maybach S 580e: कीमत, उपलब्धता और कस्टमाइजेशन

Mercedes-Maybach S 580e की कीमत ₹3.35 करोड़ (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कंपनी शुरुआत में इस लग्जरी सेडान की सिर्फ 30 यूनिट ही उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ग्राहकों को घर पर कार चार्ज करने के लिए फ्री होम चार्जिंग सॉल्यूशन भी दिया जाएगा।

ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से कार को और भी खास बना सकते हैं। इसके लिए Mercedes-Benz ने MANUFAKTUR कस्टमाइजेशन का विकल्प दिया है। इसमें खास पेंट स्कीम, प्रीमियम लेदर थीम और हाथ से तैयार किए गए इंटीरियर ट्रिम जैसे विकल्प शामिल हैं।

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6 दिन के मेगा हेल्थ कैंप से गाजीपुर पहुंचीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं, डॉक्टरों की 35000 मरीजों की जांच और 346 सर्जरियां की गईं

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्रामीणों को हाल ही में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का अनुभव प्राप्त हुआ। इससे पहले इन्हें अव्वल दर्जे की स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सेवाएं पाने के लिए वाराणसी या लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन छह दिनों तक ऐसी कई सेवाओं का लाभ उन्हें अपने ही जिले में पाने का मौका मिला। यह अवसर उन्हें जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एक मेगा हेल्थ कैंप के जरिए मिला।

यह 6 दिनों का था, जिसका उद्घाटन 26 सितंबर को राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस कैंप में 35,200 मरीजों ने चेकअप कराया और 346 सर्जरी की गईं। इसमें ऐसे मुश्किल प्रोसीजर भी शामिल थे जिनके लिए आम तौर पर मरीजों को जिले से बाहर जाना पड़ता है। युवा बीजेपी नेता अभिनव सिन्हा के नेतृत्व में इस कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें ओपीडी सेवा 28 सितंबर तक चलीं, जिसके बाद 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक सर्जरी हुईं।

इस पहल की खास बात यह थी कि एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में स्पेशलिस्ट केयर उपलब्ध थी। इसमें 498 डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें AIIMS दिल्ली, जसलोक हॉस्पिटल मुंबई, अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली और हेरिटेज हॉस्पिटल वाराणसी से जुड़े स्पेशलिस्ट शामिल थे। मरीजों को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से लेकर ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी तक 15 विशेषज्ञ सेवाएं मिलीं। तीन दिन के ओपीडी फेज के दौरान, 35,828 लैब टेस्ट भी किए गए। कैंप में 346 सर्जरी हुईं, जिसमें 140 आंखों की सर्जरी और 206 दूसरे प्रोसीजर शामिल थे। इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े 22 बड़े मुश्किल केस थे।

जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी और न्यूरोलॉजी में कुल मिलाकर 21,120 मरीज आए – जो OPD में आने वालों का 60% है। बाकी 11 स्पेशलिटी OPD में और 14,080 मरीजों का इलाज किया गया। इस बड़े मेडिकल ऑपरेशन में 350 से ज्यादा वॉलंटियर्स ने मदद की, जिन्हें “गाजीपुर के स्वस्थ योद्धा” कहा गया, जिन्होंने मरीजों को रजिस्ट्रेशन, नेविगेशन और जगह पर देखभाल में मदद की। मेडिकल टीम में फैकल्टी और कंसल्टेंट, रेजिडेंट, इंटर्न, नर्स, पैरामेडिक्स और फार्मासिस्ट शामिल थे।

आयोजनकर्ता अभिनव सिन्हा ने कहा कि इस कैंप का मकसद अच्छी हेल्थकेयर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक, बिना उन्हें लंबी दूरी तय किए पहुंचाना था। इस पहल को 2026 में उत्तर प्रदेश में आयोजित सबसे बड़ा हेल्थ कैंप बताया, और कहा कि इस मॉडल को राज्य में कहीं और भी दोहराया जा सकता है। गाजीपुर से बड़ी बात यह है कि सिर्फ छह दिनों में, एक अस्थायी हेल्थकेयर इकोसिस्टम ने कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स, स्पेशलिस्ट ट्रीटमेंट और सर्जरी को एक ही जगह पर ला दिया — जिससे हेल्थकेयर को मरीजों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया, न कि मरीज़ों को हेल्थकेयर सेंटर जाने पर।

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नो मोर ट्रैफिक जाम! दिल्ली में आ रहा है AI सिस्टम, करोड़ों का बजट पास

नई दिल्ली। दिल्ली अब रोज सड़क पर लगने वाले जाम और बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने राजधानी के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दी है। इस सिस्टम में AI और रियल टाइम ट्रैफिक डेटा की मदद से सड़कों पर ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश होगी।

यह प्रोजेक्ट दिल्ली पुलिस लागू करेगी। इसके तहत 42 बड़े ट्रैफिक कॉरिडोर को शामिल किया गया है। काम तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।

ट्रैफिक के हिसाब से खुद बदलेंगे सिग्नल

ITMS में ट्रैफिक सिग्नल सड़क पर गाड़ियों की संख्या के हिसाब से खुद बदलेंगे। ज्यादा ट्रैफिक होने पर सिग्नल की टाइमिंग अपने आप एडजस्ट होगी। बड़े रास्तों के सिग्नल आपस में जुड़े रहेंगे, जिससे बार-बार रुकने और देरी को कम किया जा सकेगा। सिस्टम जाम, धीमी रफ्तार और हादसों का भी तुरंत पता लगाएगा। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस जरूरत के अनुसार डायवर्जन कर सकेगी। एंबुलेंस और दूसरी इमरजेंसी गाड़ियों के लिए जरूरत के समय ग्रीन कॉरिडोर बनाने में ITMS मदद करेगा।

स्मार्ट सिस्टम से ट्रैफिक पर रहेगी नजर

  • AI कैमरों से रेड लाइट तोड़ने, तेज रफ्तार और गलत दिशा में गाड़ी चलाने वालों की पहचान होगी।
  • बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
  • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल और गलत पार्किंग का भी पता चलेगा।
  • सिस्टम चोरी और ब्लैकलिस्टेड वाहनों की पहचान करने में मदद करेगा।
  • लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सड़कों पर लगे वेरिएबल मैसेज साइन से जाम, डायवर्जन और पार्किंग की जानकारी मिलेगी।
  • ट्रैफिक से जुड़ी ताजा जानकारी नेविगेशन सर्विस के साथ भी शेयर की जाएगी, जिससे लोग बेहतर रास्ता चुन सकेंगे।

1,092 सिग्नल और 1,029 एनफोर्समेंट लोकेशन

इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में 1,092 जगहों पर स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और 1,029 जगहों पर ट्रैफिक नियमों की निगरानी के लिए सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ट्रैफिक कमांड और कंट्रोल सेंटर भी बनाया जाएगा। डेटा सिक्योरिटी के लिए डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम होगा। जरूरत के हिसाब से आगे इसमें नई टेक्नोलॉजी और फीचर भी जोड़े जा सकेंगे।

ITMS को पूरी दिल्ली में एक साथ लागू नहीं किया जाएगा। इसे तीन चरणों में शुरू किया जाएगा। हर चरण में टेस्टिंग और जांच के बाद ही आगे का काम किया जाएगा। इसका मकसद ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना, जाम कम करना और सड़क सुरक्षा बढ़ाना है।

Market Insight : बाजार में हालात पलटे, इंश्योरेंस सेक्टर में होगा बड़ा एक्सीडेंट, ऑटो और रियल्टी शेयरों में भी गिरावट का डर

Market Insight : बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में हालात पलट गए हैं। कल अच्छी क्लोजिंग के बावजूद हमने लॉन्ग लेकर जाने से मना किया था। नजरिया यही था कि ट्रेड लेकर जाना जुआ खेलने जैसा होगा। परसों के आउटसाइड डे के बाद कल इनसाइड डे बना था। अगर गिफ्ट निफ्टी सही है तो आज हम 23,250-23,300 पर खुलेंगे। 23,100-23,150 का जोन बाजार के लिए लक्ष्मण रेखा है। आज इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा एक्सीडेंट होगा। IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा आया है।

बाजार: आज के संकेत

बॉन्ड यील्ड से कोहराम मच गया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.135% पर आ गई है। जुलाई 2007 के बाद 10 साल की यील्ड सबसे ज्यादा ऊंचाई पर है।इसमें 7 अप्रैल 2025 के बाद एक-दिन की सबसे बड़ी तेजी आई है। 2 साल की यील्ड 4.947% पर पहुंच गई है। मई 2024 के बाद सबसे ऊंची 2 साल की यील्ड दिखी है। 30 साल की यील्ड 5.398% पर पहुंच गई है। 30 साल की यील्ड जून 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

यील्ड में तेजी के कारण

US के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े मजबूत रहे हैं। सर्विसेज PMI 5 साल के हाई पर पहुंच गई है। S&P Global सितंबर सर्विसेज PMI 58.7 पर है। अगस्त में सर्विसेज PMI 56.5 पर थी। मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.7 पर, 4 साल के हाई पर है। यह कोरोना के बाद 2015 से सबसे तेज उछाल है।

अभी और बढ़ेगी ब्याज दर?

फेड गवर्नर माइकल बार की हॉकिस चेतावनी आई है। उन्होंने कहा है कि महंगाई को समय पर नीचे लाने के लिए पॉलिसी में बदलाव जरूरी है। टिकाऊ ग्रोथ और ज्यादा रोजगार के लिए प्राइस स्टेबिलिटी अहम है। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक Oct में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 70% है। पहले 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 55% ही थी।

बॉन्ड की कमजोर नीलामी

5 साल के ट्रेजरी नोट की नीलामी में डिमांड कमजोर रही है। ऑप्शन 5.033% यील्ड पर पूरा हुआ। 6 ऑप्शन का औसत यील्ड 4.186% रहा।

कच्चे तेल में फिर तेजी

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान के UNGA में भाषण के बाद कच्चे तेल में तेजी आई। ब्रेंट $102 के ऊपर है। WTI भी $91/बैरल के पार चला गया है। UK मैरीटाइम एजेंसी का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक कार्गो जहाज में आग लगी है।

पॉलिटिको की रिपोर्ट है कि US डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगा सकता है। प्रशासन रोक के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। 90 दिनों के लिए एक्सपोर्ट पर रोक की योजना है। अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी हैं क्रिस राइट ने कहा है कि पूरा बैन नहीं होगा,कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स की चेतावनी है कि डीजल एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला गलत होगा। इससे US में रिटेल गैसोलीन महंगा हो सकता है।

ट्रंप पर बरसे मसूद पेजेशकियान

UNGA में ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की इजाजत नहीं। सबसे पहले प्रतिबंध और नेवल ब्लॉकेड हटना जरूरी है। अब तक हॉर्मुज से सभी ने फायदा उठाया है। लेकिन ईरान प्रतिबंध झेले,ये मंजूर नहीं है। किसी भी हाल में बल की भाषा स्वीकार नहीं है।

पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की एटॉमिक हथियार बनाने में दिलचस्पी नहीं है। लेकिन विकास के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जरूरी है। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करना ईरान का अधिकार है। किसी भी सूरत में अपना अधिकारी नहीं छोड़ेंगे। प्रोग्राम से जुड़े सवाल युद्ध के मैदान पर हल नहीं होंगे। पेजेशकियान ने आगे कहा कि स्ट्रेट से अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड तुरंत हटे। ईरानी एसेट्स को अनफ्रीज करना जरूरी है। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना भी जरूरी है।

आज का एक्सीडेंट: PB Fintech

IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा है। PB Fintech आज 10% नीचे खुल सकता है और हो सकता है उसके बाद और भी गिरे। बाजार की उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब कंसल्टेशन पेपर आया है।

इस कंसल्टेशन पेपर का सबसे ज्यादा असर PB Fintech, Turtlemint, Max Fin, HDFC Life, LTF, IndusInd Bank और IDFC First Bank पर पड़ेगा। वहीं, LIC और SBI Life पर इसका सबसे कम असर होगा।

आज कहां लगाएं दांव?

PB फिनटेक आज का एक्सीडेंट होगा। बाकी इंश्योरेंस शेयरों में भी आज गिरावट संभव है। ONGC और OIL में आज वापस रिकवरी आ सकती है। इंटरग्लोब और एशियन पेंट्स पर क्रूड में रैली का असर दिख सकता है। मुथूट,मणप्पुरम में आज सोने में गिरावट और NBFCs में दबाव का असर दिख सकता है। चांदी में गिरावट से हिंदुस्तान जिंक में दबाव संभव है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से मेटल शेयरों में गिरावट आ सकती है। बैंक और NBFCs में आज दबाव संभव है। लार्जकैप IT शेयरों में भी आज गिरावट का खतरा है। ऑटो और रियल्टी शेयरों में आज बड़ी गिरावट की आशंका है।

NSE की लिस्टिंग

NSE की लिस्टिंग शायद बहुत ज्यादा प्रीमियम पर ना हो। प्री-IPO निवेशकों का लॉक इन है लेकिन करीब 15,000 करोड़ के फ्लोट पर नहीं हैं। कुछ चुनिंदा AIFs पर लॉक इन लागू नहीं है। NSE में आज AIF की सप्लाई आएगी। 1 महीने के बाद एंकर निवेशकों की सप्लाई आएगी और 6 महीने बाद प्री-IPO निवेशकों की सप्लाई आएगी। NSE में डिमांड भी मजबूत रह सकती है। MSCI शायद फास्ट ट्रैक पर NSE को शामिल करे।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,300-23,350 पर और सबसे अहम सपोर्ट 23,100-23,150 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,400-23,450 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,500-23,550 पर है। 200 पॉइंट नीचे खुलने के बाद थोड़ा रुकें। आज देखना होगा 23,100-23,150 बचता है या नहीं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी पर पहला सपोर्ट 56,000-56,200 पर और क्रिटिकल सपोर्ट 55,500-55,800 पर है। फिलहाल रजिस्टेंस की बात करना बेमानी है।

 

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Honda का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर QC3 लॉन्च, 145km रेंज के साथ मिलेगा 32-लीटर स्टोरेज

Honda QC3 Electric Scooter: Honda ने भारत में 1.35 लाख रुपये की कीमत पर QC3 इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च कर दिया है, जो उसकी बढ़ती EV रेंज में एक नया मॉडल है। QC3 में 3kWh की बैटरी और 145km की IDC रेंज के साथ-साथ सीट के नीचे 32-लीटर का स्टोरेज और 5-इंच का TFT डिस्प्ले दिया गया है। होंडा के लिए, यह नया स्कूटर ‘Activa e’ से अलग है क्योंकि इसमें स्वैपेबल सेटअप के बजाय फिक्स्ड बैटरी का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें कि Honda QC3 को सबसे पहले पांच शहरों में पेश किया जा रहा है, इसलिए शुरुआत में इसकी उपलब्धता सीमित रहेगी। फिलहाल, QC3 की 5,000 रुपये में बुकिंग शुरू हो गई है, और कंपनी की योजना है कि इस स्कूटर की पहुंच को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए।

Honda QC3 Electric Scooter: कीमत और उपलब्धता

Honda QC3 की कीमत 1.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, नई दिल्ली) है। इसकी बुकिंग Honda की वेबसाइट और चुनिंदा RedWing डीलरशिप पर 5,000 रुपये में शुरू हो गई है। लॉन्च के समय, यह स्कूटर दिल्ली, आगरा, कटक, सूरत और कोल्लम में बेचा जाएगा। Honda ने कहा है कि इसे धीरे-धीरे और शहरों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।

यानी QC3 को भले ही देश में लॉन्च कर दिया गया है, लेकिन इन पांच शहरों के बाहर रहने वाले ग्राहक फिलहाल Honda डीलरशिप पर जाकर इसे खरीद नहीं सकेंगे। शुरुआत में सीमित शहरों में उपलब्धता इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की लॉन्चिंग का एक अहम हिस्सा है।

Honda QC3 Electric Scooter: 3kWh बैटरी, 145km रेंज

QC3 इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3kWh का बैटरी पैक लगा है और इसकी IDC रेंज 145km बताई गई है। Honda का कहना है कि इसे 0 से 80% तक चार्ज होने में लगभग 2 घंटे 40 मिनट लगते हैं, जबकि पूरी तरह चार्ज होने में लगभग चार घंटे का समय लगता है।

Honda QC3 Electric Scooter: 32-लीटर स्टोरेज

QC3 की खासियतें काफी आसान और काम की हैं। इसमें सीट के नीचे 32 लीटर का स्टोरेज और स्मार्ट की (Smart Key) मिलती है। इसका इंस्ट्रूमेंट कंसोल 5-इंच का TFT यूनिट है, जिसमें Honda RoadSync कनेक्टिविटी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन की सुविधा है। यह स्कूटर चार कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। इनमें Matt Photon Gray Metallic, Pearl Precious White, Pearl Shallow Blue और Pearl Siren Blue शामिल हैं।

Honda QC3 Vs TVS iQube

Honda QC3 का मुकाबला शहरों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर से होगा। इस सेगमेंट में TVS iQube के अलावा Bajaj Chetak और Ather Rizta जैसे मॉडल भी शामिल हैं। Honda QC3 की खास बातों में 1.35 लाख रुपये की कीमत, 3kWh बैटरी, 145 किलोमीटर की IDC रेंज और 32 लीटर का स्टोरेज शामिल है।

हालांकि, इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय सिर्फ रेंज का आंकड़ा देखना काफी नहीं होता। चार्जिंग की सुविधा, रोजाना इस्तेमाल में मिलने वाली वास्तविक रेंज, स्टोरेज स्पेस, आपके शहर में उपलब्धता और ऑन-रोड कीमत जैसे कई दूसरे फैक्टर भी जरूरी होते हैं। इन्हीं चीजों के आधार पर ग्राहक Honda QC3 की तुलना TVS iQube और दूसरे इलेक्ट्रिक स्कूटरों से कर सकते हैं।

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Honda ने लॉन्च की नई 501cc रोडस्टर बाइक, मिलेगा 19-इंच फ्रंट व्हील और डुअल-चैनल ABS, जानें कीमत और फीचर्स

अगर आप एक स्टाइलिश और दमदार लुक वाले बाइक की तलाश में हैं, जो आपके राइड यादगार बनाए तो यह खबर आपको जरूरी पढ़नी चाहिए। दरअसल, Honda ने भारत में CB500 को ₹2.75 लाख (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है, जिससे उसकी लाइनअप में एक नई 501cc रोडस्टर बाइक शामिल हो गई है। यह मोटरसाइकिल तीन वेरिएंट्स में उपलब्ध है, जिसमें टॉप मॉडल की कीमत ₹3.01 लाख (एक्स-शोरूम) है। CB350 के उलट, CB500 में बड़ा 501cc सिंगल-सिलेंडर इंजन दिया गया है और इसमें होंडा सिलेक्टेबल टॉर्क कंट्रोल, स्लिपर क्लच और होंडा रोडसिंक कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। Honda ने इस बाइक की बुकिंग शुरू कर दी है, हालांकि हर वेरिएंट की पूरी जानकारी बाद में बताई जाएगी। बता दें कि CB500 को भारत में ही बने मॉडल के तौर पर पेश किया जा रहा है, और इसके तीनों वर्जन में मुख्य अंतर व्हील सेटअप और ग्राफिक्स का है।

Honda CB500: कीमत और वेरिएंट

Honda CB500 को 3 वेरिएंट में पेश किया गया है। कंपनी ने बेंगलुरु में इसकी एक्स-शोरूम कीमतें इस तरह रखी हैं:

वेरिएंटएक्स-शोरूम कीमत
CB500 Alloy₹2.75 लाख
CB500 Spoke₹2.99 लाख
CB500 Spoke With Graphics₹3.01 लाख

इसके बेस मॉडल में अलॉय व्हील्स मिलते हैं। बाकी दो वेरिएंट्स में स्पोक व्हील्स दिए गए हैं, और सबसे महंगे वेरिएंट में ग्राफिक्स भी हैं। फिलहाल, कंपनी ने कीमतें तो बता दी हैं, लेकिन हर वेरिएंट के फीचर्स की पूरी लिस्ट अलग से जारी की जाएगी।

Honda CB500 में 501cc का इंजन है

इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका इंजन है। Honda CB500 में 501cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड इंजन दिया गया है। इसमें ऑयल कूलर भी मिलता है। लॉन्च के समय सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह इंजन 28 hp की पावर और 43.3 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को 5-स्पीड गियरबॉक्स से जोड़ा गया है।

इंजन के मामले में CB500, CB350 से काफी अलग है। CB350 में छोटा 348.36cc इंजन दिया गया है। वहीं, CB500 में ज्यादा क्षमता वाला इंजन मिलता है, जिससे यह रेट्रो रोडस्टर बाइक सेगमेंट में एक अलग जगह बनाती है।

Honda CB500: फीचर्स और हार्डवेयर

Honda ने CB500 में एनालॉग-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट कंसोल और Honda RoadSync कनेक्टिविटी दी है। इस सिस्टम में टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और कॉल व SMS अलर्ट जैसे भी फीचर्स मिलते हैं।

इस बाइक में Honda Selectable Torque Control और स्लिपर क्लच भी दिया गया है। हार्डवेयर की बात करें तो इसमें टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क और ट्विन गैस-चार्ज्ड रियर शॉक एब्जॉर्बर शामिल हैं।

इसके अलावा, Honda CB500 में आगे की तरफ 19 इंच का व्हील और पीछे 17 इंच का व्हील दिया गया है। ब्रेकिंग के लिए बाइक के आगे और पीछे दोनों तरफ डिस्क ब्रेक मिलते हैं। इसके साथ डुअल-चैनल ABS भी दिया गया है।

Honda CB500: बुकिंग और डिलीवरी

HMSI ने भारत में CB500 के लिए बुकिंग पहले ही शुरू कर दी है। कंपनी इसके तीन वेरिएंट्स के लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है और इनके बारे में पूरी जानकारी अलग-अलग समय पर दी जाएगी।

अलॉय वेरिएंट की पूरी जानकारी और स्पेसिफिकेशन की घोषणा FY2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) में की जाएगी, जबकि Spoke और Spoke With Graphics वर्जन की जानकारी चौथी तिमाही (Q4) में दी जाएगी। बता दें कि स्पेसिफिकेशन की घोषणा के बाद ही इन वेरिएंट्स की डिलीवरी शुरू होगी।

फिलहाल Honda CB500 को लेकर मुख्य जानकारी साफ है। इसकी शुरुआती कीमत ₹2.75 लाख (एक्स-शोरूम) है। इसमें 501cc सिंगल-सिलेंडर इंजन दिया गया है और यह 3 वेरिएंट में उपलब्ध होगी। बाकी वेरिएंट्स से जुड़ी पूरी जानकारी Honda बाद में जारी करेगी।

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Saudi Arabia के ‘स्काईवास्प’ अटैक के आगे बेदम हुए हूती लड़ाके, जानें कैसे सऊदी अरब के इस सस्ते और टिकाऊ उपाय ने बदली जंग की तस्वीर

अब तक सऊदी अरब के महंगे और हाईटेक हथियार हूती लड़ाकों के गोरिल्ला अटैक के आगे बौने साबित हो रहे थे। लेकिन जब से सऊदी अरब ने जंग की पुरानी रणनीति को छोड़ कर नई रणनीति अपनाई है, तब से खाड़ी देशों के बीच जारी जंग की सूरत बदलती नजर आ रही है। हाल ही में यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब ने जो हमला किया, उससे हूती विद्रोहियों के पांव उखड़ गए और भागने के लिए उनके पास जमीन कम पड़ गई।

इस हमले में सऊदी अरब की मिसाइलें नहीं गरजीं, बल्कि ‘स्काईवास्प’ अटैक किया गया। इस हमले ने अटैक ने रातों-रात मध्य पूर्व के युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है। हूती विद्रोहियों के हथियार अब काम नहीं आ रहे हैं। सऊदी अरब का यह हथियार त्रिकोणीय आकार के खौफनाक ड्रोन्स हैं, जो हूतियों के ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं। हूती लड़ाकों की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को मार गिराने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। इस हमले के बाद पूरे साना शहर में हड़कंप मच गया और हूती विद्रोहियों के कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

सऊदी अरब ने जंग में उतारे कामिकेज ड्रोन स्काईवास्प

खाड़ी देशों के बीच जारी जंग में सऊदी अरब ने बेहद विनाशकारी कामिकेज यानी ‘सुसाइड’ ड्रोन उतार दिए हैं। इनका नाम ‘स्काईवास्प’ है, जो एक तरह के कीड़े के लिए अंग्रेज में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द वॉस्प से लिया गया है। हिंदी में इसे ततैया कहते हैं। ये सऊदी अरब का पहला स्वदेशी लंबी दूरी का सुसाइड ड्रोन है। सुसाइड ड्रोन उन हथियारों को कहा जाता है, जो मिसाइल की तरह सीधे अपने टारगेट से टकराकर खुद को भी खत्म कर लेते हैं।

ईरान के ‘शाहिद-136’ ड्रोन पर आधारित स्काईवास्प

स्काईवास्प का डिजाइन काफी हद तक ईरान के मशहूर ‘शाहिद-136’ ड्रोन से मिलता-जुलता है। शाहिद-136 का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। इसे हूती विद्रोही भी अक्सर सऊदी अरब और लाल सागर में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सऊदी अरब ने इसी से प्रेरित खुद का कामिकेज ड्रोन तैयार कर लिया है, जो दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है।

सस्ता और टिकाऊ हथियार बना स्काईवास्प

एक ‘स्काईवास्प’ ड्रोन की कीमत महज करीब 35,000 डॉलर यानी लगभग 29 से 30 लाख रुपए आती है। जहां एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यानी सऊदी अरब अपनी सीमा से यमन के हूतियों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। ये ड्रोन जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस होता है, जिससे ये दुश्मन की लोकेशन पर सटीक वार करता है और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दे सकता है।

सऊदी और अमेरिका मिलकर बनाया

स्काईवास्प सऊदी अरब का पहला स्वदेशी प्रोजेक्ट है। इसे ‘SR2Vector’ नाम की कंपनी ने बनाया है, जो सऊदी अरब और अमेरिका का एक ज्वाइंट वेंचर है।

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Tata Sierra Legend Series लॉन्च, पैनोरमिक सनरूफ और 360° कैमरा समेत मिलेंगे ये फीचर्स, जानें कीमत

Tata Motors ने Sierra Legend Series के पांच नए वेरिएंट लॉन्च किए हैं। यह ब्रांड अपनी SUV रेंज में ज्यादा कंफर्ट, टेक्नोलॉजी और सेफ्टी वाले फीचर्स लेकर आया है, जिसकी शुरुआती कीमत ₹11.99 लाख (एक्स-शोरूम) है। यह अपडेट मुख्य रूप से इक्विपमेंट पर फोकस्ड है, जिसमें लेदरेट इंटीरियर, बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन, वेंटिलेटेड सीटें, पैनोरमिक सनरूफ और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स अलग-अलग वेरिएंट में दिए गए हैं। इसके अलावा, Sierra में पहले की तरह पेट्रोल और डीजल इंजन और मैनुअल व ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता रहेगा। Legend Series की कीमतें इंजन, ट्रांसमिशन और वेरिएंट के आधार पर ₹19.49 लाख (एक्स-शोरूम) तक जाती हैं। यहां बताया गया है कि हर वर्जन में क्या-क्या मिलता है और कीमतों में क्या अंतर है।

Tata Sierra Legend Series: एक्स-शोरूम प्राइस लिस्ट

आपकी जानकारी के लिए यहां एक्स-शोरूम कीमतों की पूरी लिस्ट दी गई है।

वेरिएंटपेट्रोल मैनुअलपेट्रोल DCTडीजल मैनुअलडीजल ऑटोमैटिकटर्बो-पेट्रोल ऑटोमैटिक
Smart+ L₹11.99 लाख—₹13.49 लाख——
Pure L₹13.79 लाख₹14.99 लाख₹15.24 लाख——
Pure L (O)₹14.29 लाख₹15.59 लाख₹15.74 लाख₹16.99 लाख—
Pure+ L₹14.99 लाख₹16.29 लाख₹16.44 लाख₹17.74 लाख—
Adventure+ L₹16.99 लाख₹18.29 लाख₹18.19 लाख₹19.49 लाख₹18.99 लाख

Tata Sierra Legend Series: नया क्या है?

Sierra Legend Series में 5 वेरिएंट आते हैं: Smart + L, Pure L, Pure L (O), Pure + L और Adventure + L। कंपनी ने Sierra के बेस पैकेज में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसके बजाय, Tata Motors ने अलग-अलग कीमत वाले वेरिएंट में कुछ नए फीचर्स और सुविधाएं जोड़ी हैं।

इस सीरीज की शुरुआत Smart + L वेरिएंट से होती है, जिसकी कीमत 11.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें लेदरेट सीट्स, डोर ट्रिम्स और आर्मरेस्ट दिए गए हैं। इसके अलावा, स्टीयरिंग-माउंटेड कंट्रोल्स, ऑटो-फोल्डिंग ORVMs और पैसिव एंट्री व पैसिव स्टार्ट जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

इस वेरिएंट में Bi-LED प्रोजेक्टर हेडलैंप्स, 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक और 20 से ज्यादा फंक्शन वाला इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) भी दिया गया है।

Pure L में बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन और अलॉय व्हील्स

Pure L वेरिएंट की कीमत 13.79 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें 10.24 इंच की टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट स्क्रीन के साथ 8-स्पीकर ऑडियो सिस्टम दिया गया है। इसमें वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay का सपोर्ट भी मिलता है। इसके अलावा, इस वेरिएंट में क्रूज कंट्रोल, हिल डिसेंट कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और 17 इंच के अलॉय व्हील्स दिए गए हैं।

वहीं, Pure L (O) वेरिएंट की कीमत 14.29 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें Panoramax वॉयस-असिस्टेड पैनोरमिक सनरूफ मिलता है। इस वेरिएंट में ऑटोमैटिक हेडलैंप्स और रेन-सेंसिंग वाइपर्स भी दिए गए हैं।

Pure + L में वेंटिलेटेड सीट्स की सुविधा

Pure + L वेरिएंट की कीमत 14.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें खासतौर पर आगे की सीटों के आराम पर ध्यान दिया गया है। इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स और थाई-सपोर्ट एक्सटेंडर के साथ 6-वे पावर्ड ड्राइवर सीट दी गई है। इसके अलावा, इसमें Boss Mode, डुअल-जोन फुली ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और पीछे की तरफ 65W के दो USB-C फास्ट चार्जिंग पोर्ट भी मिलते हैं।

Adventure + L में 360 डिग्री कैमरा

Legend Series का सबसे ऊपर वाला वेरिएंट Adventure + L है, जिसकी कीमत 16.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसमें 4Sight के साथ 360 डिग्री HD Surround View System दिया गया है। इसके अलावा, Superglide Suspension with FDD, अलग-अलग Terrain Modes, 31.24 सेमी की टचस्क्रीन और नेविगेशन के साथ 26.03 सेमी का डिजिटल कॉकपिट मिलता है।

इस वेरिएंट में फ्रंट पार्किंग सेंसर, एम्बिएंट लाइटिंग, दो स्टेज में रिक्लाइन होने वाली रियर सीट, वायरलेस चार्जिंग और कूल्ड ग्लवबॉक्स जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।

Tata Sierra Legend Series: कीमत और इंजन

Tata Sierra Legend Series में पहले की तरह तीन इंजन का विकल्प मिलता है। इसमें 1.5-लीटर Hyperion TGDi पेट्रोल, 1.5-लीटर Revotron पेट्रोल और 1.5-लीटर Kryojet डीजल इंजन शामिल हैं। इसमें मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों ट्रांसमिशन के विकल्प मिलते हैं। हालांकि, किस वेरिएंट में कौन सा इंजन और ट्रांसमिशन मिलेगा, यह अलग-अलग हो सकता है। Legend Series की कीमत 19.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

इस सीरीज में सबसे बड़ा बदलाव इंजन या मैकेनिकल सेटअप में नहीं किया गया है। कंपनी ने Sierra के अलग-अलग वेरिएंट में केबिन, टेक्नोलॉजी और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़े फीचर्स को ज्यादा बेहतर तरीके से जोड़ा है।

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उड़ानों को तरसते नए हवाई अड्डे

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। जब रखरखाव का बिल ही कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

भारत में पिछले एक दशक में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का नारा जितना जोर से लगाया गया, उतनी ही तेजी से छोटे शहरों में टर्मिनल बने, रिबन कटे और उद्घाटन की तस्वीरें छपी। ‘उड़े देश का आम नागरिक’ उड़ान योजना का वादा था कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी हवाई नक्शे पर आ जाएंगे। आंकड़ों में सफलता दिखती है कि दर्जनों एयरपोर्ट चालू हुए, सैकड़ों रूट आवंटित हुए। लेकिन मैदान पर तस्वीर इससे उलट है। कई नए हवाई अड्डे और पुरानी पट्टियां आज वीरान पड़ी हैं। रनवे साफ है, सीआईएसएफ खड़ा है, बिजली जल रही है, लेकिन विमान नहीं आते। क्या यह महज ‘अस्थायी रुकावट’ है या नीतिगत असफलता का प्रमाण?

संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, उड़ान के तहत विकसित करीब पंद्रह हवाई अड्डे इस समय अनुसूचित उड़ानों से रहित हैं। इनमें पठानकोट, लुधियाना, शिमला, पाकयोंग, कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद, भावनगर, अंबिकापुर, राउरकेला, दतिया और कलबुर्गी शामिल हैं। इस सब से उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित है। 2021 के बाद राज्य में शुरू हुए सात नए एयरपोर्ट में से छह पर नियमित व्यावसायिक उड़ानें बंद हो चुकी हैं। केवल अयोध्या ही अपवाद है। कुशीनगर बौद्ध सर्किट के लिए खोला गया, मुरादाबाद पीतल उद्योग के लिए, आजमगढ़ और चित्रकूट पर्यटन व धार्मिक यात्रा के नाम पर। लेकिन कुछ ही महीनों में यहाँ उड़ानें थम गईं।

असफलता का सबसे ठोस सबूत खर्च बनाम कमाई है। सरकार इन पंद्रह गैर-संचालित केंद्रों के रखरखाव पर करीब 879 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि वहां नियमित यात्री सेवा नहीं है। पाकयोंग का निर्माण ही करीब 605 करोड़ में हुआ; रखरखाव पर अब तक लगभग 179 करोड़ चुक चुके हैं। शिमला पर रखरखाव खर्च 116 करोड़ से ऊपर बताया गया। मुरादाबाद पर करीब 30 करोड़। भावनगर का हाल और स्पष्ट है, एक रिपोर्ट के अनुसार एक वर्ष में संचालन-रखरखाव पर करीब 18 करोड़ खर्च हुए, वहीं कमाई महज 4 करोड़ ही रही। यानी लागत राजस्व से कई गुना अधिक। गौरतलब है कि जब विमान नहीं उतरते, तब भी रनवे, फायर स्टेशन, सुरक्षा, एटीसी और बिजली का खर्च तो चलता ही रहता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के व्यापक नुकसान का एक हिस्सा इन्हीं सुनसान हवाई अड्डों से आता है।

सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? पहला कारण मांग का गलत आकलन। हवाई अड्डा बनाने से मांग अपने आप नहीं पैदा होती। छोटे शहर में रेल और सड़क पहले से सस्ती व भरोसेमंद हैं। तीन घंटे की दूरी पर अगर ट्रेन है, तो सीमित आय वाला यात्री महंगा टिकट कभी नहीं खरीदेगा, खासकर जब सब्सिडी खत्म होने के बाद किराया दोगुना हो जाए। उड़ान में तीन साल का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) मिलता है। अवधि खत्म होते ही कई रूट ढह जाते हैं। सीएजी की पुरानी समीक्षा पहले ही कह चुकी थी कि शुरुआती चरणों के आधे से अधिक आवंटित रूट कभी शुरू ही नहीं हुए या जल्दी बंद हो गए।

दूसरा, विमान और ऑपरेटर की कमी। क्षेत्रीय उड़ानों के लिए छोटे विमान चाहिए। फ्लाईबिग जैसे ऑपरेटर बंद हुए या उनकी सेवाएं रोक दीं गईं। विमान पट्टे, रखरखाव और पायलट की कमी ने कई रूट को अधर में छोड़ दिया। तीसरा, तकनीकी सीमा। कई छोटे हवाई अड्डे केवल विजुअल फ्लाइट रूल्स पर चलते हैं। उत्तर भारत की सर्दियों में कोहरा आते ही उड़ानें रुक जाती हैं। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम न होने से विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। चौथा, अंतिम छोर की कनेक्टिविटी। शहर से एयरपोर्ट तक सड़क खराब हो, टैक्सी महंगी हो, तो यात्री दोबारा नहीं आता।

इसे विफलता इसलिए कहना चाहिए क्योंकि पैसा करदाता का है और वादा विकास का था। उद्घाटन राजनीतिक पूंजी बन जाता है, लेकिन तीन साल बाद भी खाली टर्मिनल जनता का नुकसान बन जाता है। भूमि अधिग्रहण के बाद गांव वाले विकास की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन जब उड़ान नहीं आती, तो अविश्वास बढ़ता है। क्षेत्रीय विमानन तभी सार्थक है जब वह व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा आपात और रोजगार से जुड़कर स्थायी यातायात पैदा करे। महज रनवे बिछाना बुनियादी ढांचे का भ्रम है, अर्थव्यवस्था नहीं।

ऐसे में सरकार को क्या करना चाहिए? सबसे पहले, नए हवाई अड्डे खोलने से पहले कठोर अध्ययन अनिवार्य हो। यात्री क्षमता, आसपास के उद्योग, तीर्थ-पर्यटन चक्र और वैकल्पिक परिवहन की तुलना के बिना निर्माण न हो। संशोधित उड़ान में यही सबक शामिल होना चाहिए। दूसरा, सब्सिडी की अवधि तीन से बढ़ाकर पांच-सात वर्ष की जा सकती है, लेकिन भार कारक और स्थानीय राजस्व लक्ष्य पूरे होने पर ही। तीसरा, छोटे हवाई अड्डों को केवल यात्री पर निर्भर न रखा जाए। कार्गो, पायलट प्रशिक्षण, चार्टर, मेडिकल फ्लाइट और राज्य सरकार की आधिकारिक यात्राओं से न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित हो। चौथा, मौसम-संवेदनशील अड्डों पर आईएलएस और बेहतर नेविगेशन लगाया जाए, वरना सर्दी या ख़राब मौसम में पूरा नेटवर्क ठप रहेगा।

पांचवां, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ाई जाए। भूमि, सड़क, पर्यटन पैकेज और स्थानीय कर रियायत राज्य दें, केंद्र केवल विमानन ढांचा। छठा, किराया नीति लचीली हो। सब्सिडी खत्म होते ही अचानक महंगा टिकट हवाई यात्रा की मांग को मार देता है। चरणबद्ध वृद्धि और ऑफ-पीक छूट से हवाई यात्रा आदत बन सकती है। सातवां, असफल रूट को बिना शर्म के बंद करने और सफल मॉडल, जैसे बेहतर कनेक्टिविटी वाले कुछ औद्योगिक या तीर्थ केंद्र को दोहराने का साहस हो। हर जिले में एयरपोर्ट का नारा राजनीतिक रूप से आकर्षक है, परंतु आर्थिक रूप से घातक।

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। उड़ान का मकसद आम नागरिक को आसमान देना था, कंक्रीट के स्मारक खड़े करना नहीं। जब रखरखाव का बिल कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

iPhone Duo vs Galaxy Z Fold 8 : दोनों फोल्डेबल में कौन है ज्यादा दमदार? जानें फीचर्स और कीमत

iPhone Duo vs Galaxy Z Fold 8 : दोनों फोल्डेबल में कौन है ज्यादा दमदार? जानें फीचर्स और कीमत

Apple Samsung Mobile Cover

Apple iPhone Duo vs Samsung Galaxy Z Fold 8 कौनसा फोन खरीदना समझदारी डिस्प्ले में दोनों का मुकाबला बराबरी का iPhone Duo में फोन खोलने पर 7.6 इंच की इनर स्क्रीन मिलती है, जबकि बाहर की तरफ 5.4 इंच का डिस्प्ले दिया गया है। Apple ने दोनों स्क्रीन में ProMotion और Always-On Display का सपोर्ट दिया है। इनकी पीक आउटडोर ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक है।

इनर डिस्प्ले पर नैनो-टेक्सचर फिनिश दी गई है, जिससे रोशनी का प्रतिबिंब कम करने में मदद मिलती है। Galaxy Z Fold 8 में भी 7.6 इंच की मेन स्क्रीन है, लेकिन कवर स्क्रीन 5.5 इंच की है। इसमें Dynamic AMOLED 2X पैनल और 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है।

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बड़ी स्क्रीन के मामले में दोनों लगभग बराबर हैं। iPhone Duo का फायदा ProMotion और नैनो-टेक्सचर जैसे फीचर्स में है, जबकि Samsung का 5.5 इंच कवर डिस्प्ले थोड़ा बड़ा है। प्रोसेसर: Apple का A20 Pro बनाम Snapdragon iPhone Duo में Apple का A20 Pro चिपसेट दिया गया है। कंपनी के मुताबिक यह 2nm प्रोसेस पर बना है और इसमें 6-core CPU, 7-core GPU और Neural Engine दिया गया है।

Apple का दावा है कि यह पिछली पीढ़ी के iPhone 17 Pro की तुलना में लगातार परफॉर्मेंस में 35 प्रतिशत तक बेहतर है। दूसरी तरफ Galaxy Z Fold 8 में Snapdragon 8 Elite Gen 5 for Galaxy प्रोसेसर मिलता है। यह खास तौर पर हाई-एंड परफॉर्मेंस और AI फीचर्स के लिए तैयार किया गया है।

दोनों ही फ्लैगशिप लेवल के प्रोसेसर हैं। iPhone Duo उन लोगों को आकर्षित करेगा जो Apple के हार्डवेयर और iOS इकोसिस्टम को पसंद करते हैं, जबकि Samsung का Snapdragon Android और Galaxy AI यूजर्स के लिए मजबूत विकल्प है।

कैमरा : Samsung के मेगापिक्सल ज्यादा, Apple का वीडियो फोकस मजबूत iPhone Duo में 48MP Fusion Main और 48MP Fusion Ultra Wide कैमरा दिए गए हैं। मेन कैमरा ऑप्टिकल-क्वालिटी 2x जूम देता है। फोन से Dolby Vision के साथ 4K वीडियो 120fps तक रिकॉर्ड किया जा सकता है।

Galaxy Z Fold 8 में 50MP वाइड और 50MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलता है। इसमें 2x ऑप्टिकल-क्वालिटी जूम और 10x तक डिजिटल जूम दिया गया है। Samsung फोन से 8K वीडियो 30fps तक रिकॉर्ड किया जा सकता है। सिर्फ मेगापिक्सल देखें तो Samsung आगे है, लेकिन वीडियो रिकॉर्डिंग और Dolby Vision जैसे फीचर्स के कारण iPhone Duo कंटेंट क्रिएटर्स के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

बैटरी: iPhone Duo का दावा ज्यादा वीडियो प्लेबैक का Apple ने iPhone Duo में डुअल-बैटरी आर्किटेक्चर दिया है और कंपनी के मुताबिक फोन इनर डिस्प्ले पर 31 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकता है। Galaxy Z Fold 8 में 4,800mAh बैटरी है और इसका वीडियो प्लेबैक टाइम 26 घंटे तक बताया गया है। iPhone Duo करीब 20 मिनट में 50 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है और वायरलेस चार्जिंग से लगभग 30 मिनट में 50 प्रतिशत तक चार्ज होने का दावा है।

उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर वीडियो प्लेबैक में iPhone Duo आगे दिखाई देता है। AI और सॉफ्टवेयर में अलग-अलग अनुभव iPhone Duo iOS 27.1 पर चलता है और फोल्डिंग स्क्रीन के लिए Split View, दो Home Screen पेज, साइड नेविगेशन और अपडेटेड StandBy जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसमें Apple Intelligence के साथ नया Siri AI भी है। Galaxy Z Fold 8 Android आधारित Samsung सॉफ्टवेयर पर चलता है और इसमें Galaxy AI के फीचर्स दिए गए हैं।

Samsung का फोकस AI आधारित कंटेंट क्रिएशन, एडिटिंग और प्रोडक्टिविटी पर है। नतीजा: अगर आप iPhone, Mac और Apple के दूसरे डिवाइस इस्तेमाल करते हैं तो iPhone Duo ज्यादा सहज लगेगा। वहीं Android और Samsung Galaxy इकोसिस्टम पसंद करने वालों के लिए Fold 8 ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

कीमत में सबसे बड़ा अंतर यही वह जगह है जहां दोनों फोन के बीच सबसे बड़ा फर्क नजर आता है। Apple iPhone Duo vs Samsung Galaxy Z Fold 8: कौन-सा फोल्डेबल फोन है बेहतर? फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

Apple ने पहली बार फोल्डेबल सेगमेंट में iPhone Duo के साथ एंट्री की है, जबकि Samsung पहले से ही अपनी Galaxy Z Fold 8 के साथ इस बाजार में मजबूत स्थिति बनाए हुए है। दोनों फोन किताब की तरह खुलने वाले फोल्डेबल डिजाइन के साथ आते हैं, लेकिन कीमत, कैमरा, प्रोसेसर, सॉफ्टवेयर और बैटरी के मामले में दोनों में काफी अंतर है। सबसे बड़ा अंतर कीमत का है।

Apple-Samsung

भारत में Apple iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए  है, जबकि Samsung Galaxy Z Fold 8 की शुरुआती कीमत करीब 1,74,999 रुपए  है। यानी शुरुआती मॉडल के हिसाब से iPhone Duo के लिए करीब 1.25 लाख रुपए  ज्यादा खर्च करने होंगे। फिर कौन-सा फोन खरीदना समझदारी होगी?

अगर बजट सबसे अहम है, तो Galaxy Z Fold 8 साफ तौर पर ज्यादा किफायती विकल्प है। इसकी शुरुआती कीमत iPhone Duo से करीब 1.25 लाख रुपए  कम है और इसके बावजूद आपको 7.6 इंच की फोल्डेबल स्क्रीन, फ्लैगशिप Snapdragon प्रोसेसर और 50MP कैमरे मिलते हैं।

Apple का इकोसिस्टम, iOS, वीडियो रिकॉर्डिंग, लंबी बैटरी प्लेबैक और 2TB तक स्टोरेज आपकी प्राथमिकता है और बजट बड़ी समस्या नहीं है, तो iPhone Duo प्रीमियम विकल्प बन सकता है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक iPhone Duo तकनीक और Apple के फोल्डेबल सेगमेंट में बड़ी एंट्री जरूर है, लेकिन 2,99,900 रुपए  की शुरुआती कीमत इसे आम भारतीय खरीदार की पहुंच से काफी दूर रखती है।

दूसरी तरफ Galaxy Z Fold 8 कम कीमत में लगभग उसी आकार की फोल्डेबल मेन स्क्रीन और दमदार फ्लैगशिप हार्डवेयर देता है। इसलिए ज्यादातर भारतीय खरीदारों के लिए Galaxy Z Fold 8 ज्यादा प्रैक्टिकल विकल्प नजर आता है, जबकि iPhone Duo मुख्य रूप से प्रीमियम Apple अनुभव चाहने वाले ग्राहकों को आकर्षित करेगा।