Honda ADV160 Flex-Fuel स्कूटर और Rebel 300 बाइक लॉन्च, ₹5,000 में बुकिंग शुरू, अक्टूबर से मिलेगी डिलीवरी

Honda Motorcycle & Scooter India (HMSI) ने ADV160 और Rebel 300 की कीमतों का ऐलान कर दिया है। Honda ADV160 की कीमत 1.70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, बेंगलुरु) रखी गई है। इसे Honda के RedWing और BigWing डीलरशिप नेटवर्क के जरिए बेचा जाएगा। वहीं, Rebel 300 को दो वेरिएंट में पेश किया गया है। इसके स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 2.22 लाख रुपये और E-Clutch वेरिएंट की कीमत 2.62 लाख रुपये है। दोनों कीमतें बेंगलुरु की एक्स-शोरूम कीमतें हैं।

बता दें कि इन दोनों मॉडलों की लॉन्चिंग के साथ Honda ने भारत में अपने प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो को और मजबूत किया है।

Honda ADV160 और Rebel 300 की बुकिंग शुरू

Honda ADV160 और Rebel 300 दोनों की बुकिंग शुरू हो गई है। ग्राहक 5,000 रुपये देकर इन दोनों मॉडलों को बुक कर सकते हैं। बुकिंग HMSI की वेबसाइट और कंपनी की अधिकृत RedWing और BigWing डीलरशिप पर की जा सकती है। बता दें कि इन दोनों मॉडलों की डिलीवरी अक्टूबर 2026 के मध्य से शुरू होगी। वहीं, इनकी लॉन्चिंग के साथ Honda ने भारत में अपने 10 नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की रणनीति की शुरुआत भी कर दी है।

कंपनी का लक्ष्य देश के अलग-अलग प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करना है।

Honda Rebel 300 की खास बातें

Honda Rebel 300 के साथ Honda भारत में किफायती क्रूजर मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख रही है। बॉबर-स्टाइल डिज़ाइन, पूरी तरह से ब्लैक लुक और आरामदायक राइडिंग पोज़िशन वाली यह मोटरसाइकिल उन राइडर्स के लिए है जो आराम से राइडिंग का अनुभव चाहते हैं और अपनी अलग पहचान बनाना पसंद करते हैं। Rebel 300 में 286cc का लिक्विड-कूल्ड सिंगल-सिलेंडर इंजन है और यह स्टैंडर्ड और E-क्लच, दोनों वेरिएंट में उपलब्ध होगी।

फीचर्स की बात करें तो, इस क्रूजर में LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, होंडा रोडसिंक कनेक्टिविटी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन वाला TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। साथ ही, इसमें डुअल-चैनल ABS के साथ दोनों पहियों पर डिस्क ब्रेक भी दिए गए हैं। भारत में बनी Rebel 300 Honda के प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो को बढ़ाती है और साथ ही ब्रांड के दुनिया भर में मशहूर क्रूजर मॉडल को घरेलू बाजार में लाती है।

Honda Rebel 300 की कीमत और मुकाबला

Honda Rebel 300 का मुकाबला भारत में Royal Enfield की 350cc क्रूजर बाइक्स से होगा। इनमें Meteor 350 और Goan Classic 350 प्रमुख हैं। Rebel 300 की शुरुआती कीमत 2.22 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। यह कीमत Meteor 350 के 1.99 लाख रुपये से 2.24 लाख रुपये के प्राइस रेंज के करीब है। वहीं, इसका मुकाबला Goan Classic 350 से भी होगा, जिसकी कीमत 2.20 लाख रुपये से 2.28 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है।

Honda Rebel 300 को अलग पहचान दिलाने के लिए कंपनी ने इसमें बॉबर से प्रेरित डिजाइन, लिक्विड-कूल्ड इंजन और ऑप्शनल E-Clutch टेक्नोलॉजी दी है।

Honda ADV160 की खास बातें

Honda ADV160 भारत का पहला फ्लेक्स-फ्यूल स्कूटर बन गया है। Honda की FlexTech टेक्नोलॉजी की वजह से यह E85 तक के फ्यूल मिक्सचर पर चल सकता है। एडवेंचर-फोकस्ड मैक्सी-स्कूटर के तौर पर, इसमें मजबूत स्टाइलिंग के साथ रोजाना इस्तेमाल की सुविधा भी मिलती है। इसमें 156.9-cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन, सीट के नीचे 27-लीटर स्टोरेज, Honda RoadSync और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन वाला TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, Honda Selectable Torque Control (HSTC) और सिंगल-चैनल ABS के साथ दोनों तरफ डिस्क ब्रेक जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

Honda ADV160 की कीमत और मुकाबला

Honda का कहना है कि ADV160 कंपनी की मल्टी-पाथवे मोबिलिटी स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए कंपनी प्रीमियम स्कूटर सेगमेंट में ग्राहकों को एक नई और भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी वाला विकल्प देना चाहती है।

भारत में Honda ADV160 का मुकाबला Hero Xoom 160 और Yamaha Aerox 155 से होगा। इसकी कीमत 1.70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है, जो दोनों प्रतिद्वंद्वी स्कूटरों से ज्यादा है।

वहीं, Hero Xoom 160 की कीमत 1.37 लाख रुपये से 1.43 लाख रुपये के बीच है। दूसरी ओर, Yamaha Aerox 155 की शुरुआती कीमत 1.45 लाख रुपये से 1.48 लाख रुपये तक जाती है। सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं।

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Android फोन की बैटरी लाइफ कैसे बढ़ाएं? देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

हर तरह के Android स्मार्टफोन की बैटरी समय के साथ जल्दी खत्म होने लगती है, फिर चाहे उसमें कितनी भी बड़ी बैटरी क्यों न लगी हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर चार्जिंग साइकल के साथ बैटरी अपनी ओरिजिनल क्षमता खो देती है और आखिर में इतनी खराब हो जाती है कि इस्तेमाल के लायक नहीं रहती। हालांकि, अगर आप फोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और आपका Android फोन जरूरत से पहले ही बंद हो जाता है, तो कुछ आसान आदतें अपनाकर आप बैटरी को ज्यादा समय तक चला सकते हैं। इसके अलावा, फोन की कुछ सेटिंग्स में बदलाव करके भी बैटरी लाइफ बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, फोन में कुछ ऐप्स और प्रोसेस ऐसे भी होते हैं, जो बैकग्राउंड में चलते रहते हैं और आपको पता भी नहीं चलता कि वे बैटरी खर्च कर रहे हैं। ऐसे में आप इन सेटिंग्स को बदलकर आप फोन के अचानक बंद होने की समस्या से बच सकते हैं।

हमने आपके लिए एक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड तैयार की है जिससे आप अपने Android हैंडसेट की बैटरी लाइफ को जितना हो सके उतना बढ़ा सकते हैं।

Android फोन की बैटरी जल्दी खत्म होने की वजहें

आपके एंड्रॉयड फोन की बैटरी उम्मीद से ज्यादा जल्दी खत्म होने के कई कारण हो सकते हैं। अगर आप लगातार अपने फोन को हाई स्क्रीन ब्राइटनेस पर इस्तेमाल करते हैं, तो बैटरी लाइफ पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि बैटरी का एक बड़ा हिस्सा डिस्प्ले को पावर देने में खर्च होता है। इसी तरह, अगर फोन के बैकग्राउंड में कई ऐप्स और प्रोसेस चल रहे हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो आपका Android फोन आपकी जानकारी के बिना बैटरी खर्च कर सकता है।

इस तरह, अगर Wi-Fi, मोबाइल डेटा या Bluetooth जैसी कनेक्टिविटी सेटिंग्स जरूरत न होने पर भी ऑन रहती हैं, तो फोन लगातार दूसरे डिवाइस या नेटवर्क को खोजता रहता है। इससे भी बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

एक और वजह स्क्रीन टाइमआउट का सही तरीके से सेट न होना हो सकती है। अगर स्क्रीन लंबे समय तक अपने आप बंद नहीं होती, तो फोन इस्तेमाल न होने पर भी डिस्प्ले जलता रहता है और बैटरी तेजी से खत्म होती है।

इसके अलावा, Google Maps और अन्य नेविगेशन ऐप्स सहित लोकेशन सेवाएं लगातार आपके डिवाइस की लोकेशन ट्रैक करती रहती हैं। Google का कहना है कि इससे आपके Android फोन की बैटरी लगातार खत्म होती रहती है, चाहे आप इसका इस्तेमाल कर रहे हों या नहीं। साथ ही, Light Mode में, आपका स्मार्टफोन हल्के रंगों को दिखाने के लिए ज्यादा बैटरी पावर का इस्तेमाल करता है, खासकर अगर आपके फोन में AMOLED डिस्प्ले है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि इस्तेमाल के साथ-साथ सभी फोन की बैटरी धीरे-धीरे कम होती जाती है।

Android फोन की बैटरी लाइफ कैसे बढ़ाएं

  1. Adaptive Brightness ऑन करें: फोन के Control Centre या Settings में जाकर Adaptive Brightness ऑन कर दें। इससे फोन का सेंसर आसपास की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की ब्राइटनेस अपने आप कम या ज्यादा करेगा। इससे जरूरत के मुताबिक ही बैटरी खर्च होगी।
  2. स्क्रीन की ब्राइटनेस खुद कम करें: अगर Adaptive Brightness के बाद भी स्क्रीन ज्यादा चमकदार लगती है, तो ब्राइटनेस को मैन्युअली कम कर दें। इससे बैटरी ज्यादा देर तक चल सकती है।
  3. Screen Timeout कम करें: Settings में जाकर Screen Timeout का समय कम कर दें। इससे फोन इस्तेमाल न होने पर स्क्रीन ज्यादा देर तक ऑन नहीं रहेगी और बैटरी की बचत होगी।
  4. Keyboard की आवाज और Vibrations बंद करें: कीबोर्ड की आवाज और हर टाइपिंग पर होने वाली वाइब्रेशन भी बैटरी खर्च करती है। इन्हें Settings > Keyboard Settings में जाकर बंद किया जा सकता है।
  5. Notifications को मैनेज करें: फोन में आने वाले गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर दें। सिर्फ जरूरी ऐप्स को नोटिफिकेशन भेजने की अनुमति देने से बैटरी की खपत कम हो सकती है।
  6. Background में चलने वाले ऐप्स को सीमित करें: यह बैटरी बचाने का सबसे जरूरी तरीका है। Background App Activity को सीमित करने से इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार चलने और रिफ्रेश होने से बचेंगे। इसे Settings में जाकर मैनेज किया जा सकता है।
  7. Battery Saver Mode ऑन करें: अगर फोन की बैटरी तेजी से खत्म हो रही है, तो Battery Saver Mode ऑन कर दें। इसे Quick Settings या Control Centre से आसानी से चालू किया जा सकता है।
  8. Dark Mode का इस्तेमाल करें: बैटरी बचाने के लिए Dark Mode ऑन करना भी फायदेमंद हो सकता है। खासकर AMOLED डिस्प्ले वाले फोन में काले हिस्सों के पिक्सल बंद हो जाते हैं, जिससे पावर की बचत हो सकती है।
  9. बैटरी की लाइफ बेहतर रखने के लिए फोन को बार-बार जरूरत से ज्यादा चार्ज करने से बचें। साथ ही, बैटरी पूरी तरह खत्म होने के बाद फोन बंद होने का इंतजार न करें।
  10. फोन को बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में इस्तेमाल करने से बचें। Extreme Temperature बैटरी की क्षमता और उसकी लाइफ पर असर डाल सकता है।
  11. अगर फोन में ऐसे Google या दूसरे अकाउंट जुड़े हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें। Google के मुताबिक, इससे भी Android फोन की बैटरी लाइफ बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।

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Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: कीमत, माइलेज और फीचर्स में कौन है बेस्ट?

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: भारत के 125cc स्कूटर सेगमेंट में Honda Activa 125 और TVS Jupiter 125 सबसे ज्यादा तुलना किए जाने वाले दो नाम हैं, लेकिन कीमत और फ्यूल एफिशिएंसी के मामले में दोनों का तरीका काफी अलग है। जो खरीदार इन दोनों के बीच फैसला कर रहे हैं, उनके लिए यह बात अहम है क्योंकि Jupiter 125 की शुरुआती कीमत काफी कम है और कागजों पर इसका माइलेज भी बेहतर बताया गया है, जबकि Activa 125 ज्यादा भरोसेमंद स्मार्ट-की सिस्टम पर आधारित है। आइए जानते हैं कि कीमत, माइलेज और फीचर्स के मामले में ये दोनों असल में कैसे एक-दूसरे से अलग हैं।

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: कीमत और माइलेज

Honda Activa 125 की कीमत दिल्ली में DLX वेरिएंट के लिए 91,178 रुपये से शुरू होती है और इसके टॉप मॉडल H-Smart की कीमत 95,622 रुपये (एक्स-शोरूम) है। वहीं, TVS Jupiter 125 की शुरुआती कीमत काफी कम है। इसका Drum Alloy वेरिएंट 81,700 रुपये से शुरू होता है, जबकि इसके टॉप SmartXonnect वेरिएंट की कीमत 89,935 रुपये (एक्स-शोरूम) है। ये कीमतें TVS की आधिकारिक प्राइसिंग के मुताबिक हैं।

माइलेज की बात करें तो, Activa 125 के सभी वेरिएंट्स के लिए ARAI-क्लेम्ड माइलेज 47 kmpl है, जबकि Jupiter 125 का क्लेम्ड माइलेज 50 kmpl से 57.27 kmpl के बीच बताया गया है।

दोनों स्कूटर में लगभग एक ही साइज के इंजन का इस्तेमाल किया गया है – Activa में 123.92cc और Jupiter में 124.8cc का इंजन है, और दोनों का टॉर्क आउटपुट भी लगभग एक जैसा (10.5 Nm) है।

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: तुलना करने लायक फीचर्स

Activa के टॉप वेरिएंट में H-Smart टेक्नोलॉजी वाली Honda Smart Key मिलती है, जिससे राइडर अपनी जेब से चाबी निकाले बिना ही स्कूटर को अनलॉक कर सकते हैं, सीट खोल सकते हैं और स्टार्ट कर सकते हैं। साथ ही, इसमें TFT डिस्प्ले और ब्लूटूथ नेविगेशन व कॉल अलर्ट के लिए Honda RoadSync भी दिया गया है।

इसके जवाब में Jupiter 125 में सेगमेंट का पहला ‘ऑल-इन-वन लॉक’ दिया गया है, जो एक ही मैकेनिज्म से फ्यूल कैप, सीट, हैंडलबार लॉक और इग्निशन को ऑपरेट करता है। साथ ही, इसमें असल ड्राइविंग में बेहतर माइलेज के लिए TVS IntelliGo ऑटो स्टार्ट-स्टॉप टेक्नोलॉजी भी मिलती है।

दोनों स्कूटर में फ्रंट डिस्क ब्रेक का ऑप्शन, ट्यूबलेस टायर, USB चार्जिंग पोर्ट और टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन मिलता है, यानी राइड का अनुभव लगभग एक जैसा ही है। मुख्य अंतर मैकेनिकल हार्डवेयर के बजाय सुविधा देने वाले फीचर्स में है।

अब अगर आपकी प्राथमिकता कम कीमत और बेहतर माइलेज है, तो TVS Jupiter 125 आपके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप Honda की स्मार्ट-की जैसी सुविधाएं और लंबे समय से मौजूद सर्विस नेटवर्क चाहते हैं, तो Activa 125 की ज्यादा कीमत भी आपको सही लग सकती है।

कुल मिलाकर, दोनों स्कूटर के इंजन और मैकेनिकल सेटअप में ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। इसलिए खरीदारी का फैसला इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि रोजाना इस्तेमाल में आपके लिए कौन से फीचर्स ज्यादा जरूरी हैं।

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आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

Mahindra की नई धांसू EV लॉन्च, 79kWh बैटरी और AI फीचर्स से है लैस, जानें कीमत

क्या आप नई इलेक्ट्रिक SUV लेने का प्लान बना रहे हैं? अगर हां, तो इस खबर को आपको जरूर पढ़ना चाहिए। दरअसल, Mahindra & Mahindra ने आज BE 6 Sporteq को भारत में लॉन्च कर दिया है। यह कंपनी की BE 6 इलेक्ट्रिक SUV पर आधारित नई सीरीज है। इसकी शुरुआती कीमत 19.45 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है और इसमें बैटरी की कीमत भी शामिल है।

कंपनी ने इसे Battery as a Service (BaaS) मॉडल के साथ भी पेश किया है। इस मॉडल में BE 6 Sporteq की शुरुआती कीमत 11.45 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। इसके अलावा बैटरी इस्तेमाल करने के लिए 3.75 रुपये प्रति किलोमीटर का चार्ज देना होगा।

BaaS मॉडल में 3.75 रुपये प्रति किलोमीटर का बैटरी चार्ज रोजाना करीब 60 किलोमीटर की ड्राइविंग को ध्यान में रखकर तय किया गया है। बता दें कि BE 6 Sporteq की डिलीवरी 26 अगस्त 2026 से शुरू होगी।

इस नई सीरीज को आप 8 वेरिएंट में खरीद सकते हैं — One, Two, Three, Three+, Four, FE (फ्रीडम एडिशन), FE Four और लॉन्च एडिशन। ग्राहक अपनी जरूरत और वेरिएंट के हिसाब से 59kWh, 70kWh और 79kWh बैटरी पैक में से चुन सकते हैं।

Mahindra BE 6 Sporteq की कीमतें

59 kWh बैटरी वाले BE 6 Sporteq One ​​की कीमत BaaS के तहत ₹11.45 लाख और बैटरी के साथ ₹19.45 लाख है। Two वेरिएंट की कीमत BaaS के तहत ₹12.95 लाख और 59 kWh बैटरी के साथ ₹20.95 लाख है।

Three वेरिएंट की कीमत 59 kWh बैटरी के साथ ₹21.95 लाख और 70 kWh यूनिट के साथ ₹22.95 लाख है। वहीं, Three+ की कीमत 70 kWh बैटरी के साथ ₹23.95 लाख और 79 kWh बैटरी के साथ ₹24.95 लाख है।

इसके अलावा, Four और ‘लॉन्च एडिशन’ (Launch Edition), दोनों ही 79 kWh बैटरी के साथ आते हैं और इनकी कीमत 26.95 लाख रुपये है। FE की कीमत 24.45 लाख रुपये है, जबकि FE फोर की कीमत 26.95 लाख रुपये है। फॉर्मूला E से प्रेरित इन दोनों ही वेरिएंट्स में 79 kWh की बैटरी का इस्तेमाल किया गया है।

ये सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं और इनमें वॉल चार्जर और उसके इंस्टॉलेशन का खर्च शामिल नहीं है।

तीन-स्क्रीन वाला डिजिटल कॉकपिट

Mahindra ने BE 6 Sporteq सीरीज को 12 एक्सटीरियर कलर ऑप्शन में पेश किया है। इनमें चार नए कलर भी शामिल हैं—Rosso Impulso, Ruby Velvet, Graphite Storm और Firestorm Orange Satin।

Two वेरिएंट से आगे के सभी मॉडल में तीन-स्क्रीन वाला कोस्ट-टू-कोस्ट डिजिटल कॉकपिट दिया गया है। हालांकि, Formula E से प्रेरित Freedom Edition खरीदने वाले ग्राहकों को पहले वाला दो-स्क्रीन कॉकपिट और खास ‘हेलो डिजाइन’ मिलेगा।

Sporteq रेंज में छह नए टेक्नोलॉजी सुइट्स भी पेश किए गए हैं — TEQ_Talk, TEQ_Play, TEQ_Drive, TEQ_Me, TEQ_Secure और TEQ_xting। ये सभी MAIA (महिंद्रा का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्किटेक्चर) पर आधारित हैं, जो कंपनी की ‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल’ स्ट्रैटेजी का आधार है।

Google Gemini-पावर्ड वॉइस असिस्टेंट

TEQ_Talk को Google Gemini के साथ बनाया गया है और इसमें 17 खास AI एजेंट का इस्तेमाल किया गया है। Mahindra के अनुसार, यह सिस्टम 100 से ज्यादा मुख्य फंक्शन और 48 एप्लीकेशन को सपोर्ट करता है, जिनमें गाड़ी के कंट्रोल, नेविगेशन, म्यूजिक और न्यूज शामिल हैं।

TEQ_Play में एंटरटेनमेंट फीचर जैसे कि कराओके, ‘ब्रिंग-योर-ओन-डिवाइस’ (BYOD) मोड वाला इन-कार गेमिंग सुइट, प्राइवेट ऑडियो, Dolby Vision, Dolby Atmos और GrooveMe Party शामिल हैं। Mahindra का दावा है कि भारत में ऑटोमोटिव बनाने वाली कंपनियों में कराओके फ़ीचर और BYOD मोड में गेमिंग की सुविधा सबसे पहले इसी में दी गई है।

TEQ_Drive में परफॉर्मेंस से जुड़े फंक्शन जैसे कस्टम ड्राइव मोड, ड्रिफ़्ट मोड, ट्राइब ड्राइव, रिवाइव और रिवाइव SOS शामिल हैं। Formula E Freedom Edition में एक अतिरिक्त ‘एक्सेलरेशन बूस्ट’ फंक्शन भी मिलता है।

TEQ_Me में ऑटोमैटिक डिटेक्शन वाले यूजर प्रोफाइल की सुविधा है, जबकि TEQ_xting मालिकों को टेलगेट के लिए पर्सनलाइज्ड मैसेज बनाने की सुविधा देता है।

TEQ_Secure में Secure360 Pro शामिल है, जो ऑडियो रिले और घुसपैठ की चेतावनी (intrusion alert) के साथ लाइव व्यू देता है। इसमें iPhone, Apple Watch, Android और Samsung स्मार्टफोन के साथ-साथ NFC की-कार्ड के ज़रिए NFC और डिजिटल कार-की का सपोर्ट भी मिलता है।

महिंद्रा का दावा है कि वह पहली भारतीय ऑटोमोटिव कंपनी है जो कई डिवाइस इकोसिस्टम में ‘कार कनेक्टिविटी कंसोर्टियम’ (CCC) के नियमों के मुताबिक Digital Car-Key फंक्शनैलिटी देती है। इस सुइट में तीसरी स्क्रीन के लिए पैरेंटल लॉक भी शामिल है।.

मौजूदा महिंद्रा इलेक्ट्रिक SUV में अपडेट्स आएंगे

महिंद्रा ने कहा कि Sporteq सीरीज के साथ पेश की गई सभी नई टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर फीचर्स को मौजूदा BE 6, XEV 9e और XEV 9S गाड़ियों में धीरे-धीरे लाया जाएगा, हालांकि उपलब्ध फीचर्स मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होंगे। यह रोलआउट जनवरी 2027 से चरणों में शुरू होगा।

Mahindra & Mahindra के ऑटोमोटिव बिजनेस के प्रेसिडेंट और महिंद्रा इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, आर वेलुसामी ने कहा, “इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। ग्राहक अब EV को सिर्फ उसकी रेंज या तेजी (एक्सेलरेशन) से नहीं आंकते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि यह अपनी पूरी लाइफ-साइकिल के दौरान ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा पर्सनल और ज्यादा काबिल बने। Sporteq इसी बदलाव को दिखाता है। MAIA से पावर्ड, यह AI, पर्सनलाइजेशन, परफॉर्मेंस और एंटरटेनमेंट को इस तरह से एक साथ लाता है कि हर सफर ज्यादा आसान और बेहतर (इंट्यूटिव) बन जाता है।”

लॉन्च एडिशन और फॉर्मूला E फ्रीडम एडिशन

रेंज के टॉप मॉडल के तौर पर BE 6 Sporteq Launch Edition को खास Graphite Storm एक्सटीरियर फिनिश के साथ पेश किया गया है। इसके केबिन में Racing Tan कलर की पूरी लेदर जैसी फिनिश वाली सीटें और इंटीरियर दिया गया है।

वहीं, Formula E Freedom Edition का डिजाइन Mahindra Racing के Formula E रेसिंग प्रोग्राम से प्रेरित है। इसमें BE 6 के पुराने हेडलैंप डिजाइन को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा, कार में तिरंगे वाले एक्सटीरियर एक्सेंट, सैटिन पेंट ऑप्शन और नया Rosso Impulso कलर मिलता है।

इसके केबिन में Black और Firestorm Orange थीम दी गई है। साथ ही इसमें दो-स्क्रीन डिजिटल कॉकपिट और कंपनी का खास Halo डिजाइन मिलता है।

Acceleration Boost फीचर की मदद से Formula E Freedom Edition महज 6.44 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। यह कंपनी द्वारा बताया गया दावा किया गया आंकड़ा है।

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भारतीय नौसेना का किलर ड्रोन प्लान, वॉरशिप से 1000 किमी दूर से ही दुश्मन का जहाज होगा तबाह! समझिए कैसे करेगा काम

लाल सागर में हाल के दिनों में हुए ड्रोन हमलों के बाद दुनियाभर की नौसेनाएं अपनी बेड़े की सुरक्षा और हमला करने की क्षमताओं की समीक्षा कर रही हैं। इसी बीच भारतीय नौसेना ने भी अपनी युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। नौसेना अपने युद्धपोतों के लिए 1000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले शिप-लॉन्च्ड लॉइटरिंग म्यूनिशंस हासिल करने की योजना बना रही है। इस कदम से नौसेना को नौसैनिक चुनौतियों से निपटने और तटीय इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की जबरदस्त क्षमता हासिल हो जाएगी।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इन मध्यम दूरी के ड्रोनों की जरूरतों को हरी झंडी दे दी है। आपको बता दें कि 1000 किलोमीटर की विशाल रेंज से भारतीय नौसेना के सर्फेस फ्लीट की परिचालन पहुंच काफी हद तक बढ़ जाएगी। इसके जरिए भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक इलाकों में तैनात रहकर परिचालन कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्षमता की बदौलत भारतीय युद्धपोत दुश्मन की तटीय मिसाइलों की पहुंच से काफी बाहर रहते हुए भी दुश्मन के तटीय और जमीनी ठिकानों पर विनाशकारी हमला कर पाएंगे।

हवा में 9 घंटे की स्टेमिना और 200 नॉट्स से अधिक गोता लगाने की रफ्तार

भारतीय नौसेना ऐसे स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की तलाश में है जो हवा में 9 घंटे तक लगातार मंडरा सकें। लक्ष्य की पहचान होने पर ये ड्रोन 200 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से दुश्मन पर सीधे गोता लगाकर हमला कर सकेंगे। इन किलर ड्रोनों में दिन और रात दोनों समय काम करने वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सीकर लगे होंगे ताकि दिन हो या रात दुश्मन की पहचान कर उसे तबाह किया जा सके। नौसेना की शर्त है कि ये हथियार वन मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल के साथ अचूक और सटीक हमला करने में सक्षम होने चाहिए।

सबसे खास विशेषता यह है कि ये ड्रोन ऐसे कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करेंगे जहां सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल को जाम कर दिया गया हो, स्पूफ किया गया हो या उनका सिग्नल पूरी तरह बंद कर दिया गया हो।

ऑपरेटर एक साथ नियंत्रित करेगा 10 ड्रोन

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है कि जहाज पर मौजूद सिर्फ एक ऑपरेटर एक मॉड्यूलर कंट्रोल कंसोल के जरिए एक साथ 10 ड्रोनों को नियंत्रित कर सके। हवा में उड़ रहे इन ड्रोनों का नियंत्रण एक जहाज से दूसरे जहाज या फिर जमीन पर बने स्टेशन के बीच भी आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा।

मौसम की मार झेलने की क्षमता और 20 साल तक लाइफ

नौसेना ने इन प्रणालियों के लिए बहुत ही कड़े पर्यावरणीय मानक तय किए हैं। वेंडरों को यह साबित करना होगा कि ये ड्रोन बेहद कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं ताकि 50 नॉट्स की तेज हवाओं और 95% की नमी के स्तर के दौरान भी इन्हें लॉन्च किया जा सके। ड्रोन के क्रिटिकल कंपोनेंट की लाइफ पर भी कम से कम 10 सालों की गारंटी होनी चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर 20 सालों तक बढ़ाया जा सके।

बाय इंडियन कैटिगरी के तहत होगी खरीद, बढ़ेगी स्वदेशी ताकत

रक्षा मंत्रालय इन प्रणालियों को बाय इंडियन-आईडीडीएम (Buy Indian-IDDM – Indigenously Designed, Developed and Manufactured) कैटिगरी के तहत खरीदने की योजना बना रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडिजिनस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और देश के अंदर ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

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क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

नई Bajaj Pulsar N160 S ₹1.34 लाख में लॉन्च, साथ में आया फीचर्स से भरपूर SS वेरिएंट, जानें अंतर

अगर आप नई बाइक खरीदने की प्लानिंग कर रह हैं, जो बेहतरीन माइलेज दे और दिखने में स्टाइलिश भी हो तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Bajaj Auto ने Pulsar N160 S को ₹1.34 लाख में लॉन्च किया है। इसके साथ ही इससे भी अधिक फीचर्स वाली N160 SS को भी 1.43 लाख रुपये में पेश किया है। बता दें कि दोनों ही मॉडल एक बिल्कुल नए 165cc इंजन पर आधारित हैं, जो मौजूदा N160 के एयर-कूल्ड इंजन की जगह लेता है। हालांकि, 160cc सेगमेंट के खरीदारों के लिए यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि यह सिर्फ स्पेसिफिकेशन में मामूली सुधार नहीं है।

नया इंजन, राइड मोड्स और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स को उस कीमत पर लाता है जिस पर आमतौर पर ये फीचर्स नहीं मिलते। मौजूदा N160 इन दोनों मॉडलों के साथ उपलब्ध है, इसलिए खरीदारों के पास अब चुनने के लिए तीन अलग-अलग ट्रिम्स हैं। आइए जानते हैं इनमें क्या अंतर है।

इंजन में क्या बदलाव हुए?

नई Pulsar N160 S और N160 SS में सबसे बड़ा बदलाव इसके इंजन में किया गया है। बाइक में अब 4-वॉल्व वाला नया 165cc इंजन दिया गया है, जो 9,500rpm पर 18.24 hp की पावर और 8,000rpm पर 14.4 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। जबकि, इसकी तुलना में पुराने N160 में 2-वॉल्व इंजन मिलता था, जो 8,750rpm पर 15.78 hp की पावर और 6,750rpm पर 14.65 Nm का टॉर्क देता था। यानी नया इंजन ज्यादा पावर और हाई-रेव पर बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए तैयार किया गया है, जबकि लो-एंड टॉर्क में थोड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

इसके अलावा, इंजन की कूलिंग सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। पुराने एयर-कूल्ड सिस्टम की जगह अब ऑयल-कूल्ड सिस्टम दिया गया है। वहीं, थ्रॉटल कंट्रोल को मैकेनिकल से बदलकर इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल-बाय-वायर (ETB) कर दिया गया है। यही नया सिस्टम बाइक में राइडिंग मोड्स, ट्रैक्शन कंट्रोल और क्रॉल फंक्शन जैसे फीचर्स को संभव बनाता है।

कंपनी का दावा है कि नई Pulsar N160 0-60 kmph की रफ्तार 4.5 सेकंड में पकड़ लेता है और बजाज का कहना है कि यह इस सेगमेंट का सबसे तेज और सबसे पावरफुल इंजन है। हालांकि, इस दावे की असली तस्वीर स्वतंत्र रिव्यू और टेस्ट के बाद ही साफ होगी।

S और SS में क्या अंतर है?

दोनों Pulsar मॉडलों में चार राइड मोड मिलते हैं – रेन, स्पोर्ट, रोड और ऑफ-रोड। साथ ही, इनमें क्रॉल टेक्नोलॉजी भी है, जिससे कम स्पीड पर बिना लगातार क्लच या गियर बदले राइडिंग की जा सकती है। हालांकि, ट्रैक्शन कंट्रोल सिर्फ N160 SS में ही उपलब्ध है। SS में 5 इंच का TFT डिस्प्ले मिलता है, जिसमें गूगल मैप्स मिररिंग की सुविधा है, जबकि S में LCD कंसोल और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन दिया गया है।

डिजाइन और आराम के लिहाज से भी दोनों बाइक्स में अंतर है। N160 SS में कलरफुल अलॉय व्हील्स, नया हैंडलबार और बदली हुई सीट हाइट दी गई है, जिससे राइडिंग पोजिशन ज्यादा आरामदायक हो जाती है। ये बदलाव बेस मॉडल N160 S में नहीं मिलते हैं।

बता दें कि दोनों ही मॉडल तीन कलर ऑप्शन Atlantic Blue, Pearl Metallic White और Brooklyn Black में उपलब्ध हैं।

क्या बाकी सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा?

चेसिस के डायमेंशन मौजूदा Pulsar N160 जैसे ही रखे गए हैं। इसका व्हीलबेस 1,348mm, ग्राउंड क्लीयरेंस 165mm और कर्ब वेट 151kg ही है। यानी इंजन बदलने के बावजूद बाइक की राइडिंग पोजिशन और हैंडलिंग में बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा, पूरी Pulsar N160 रेंज में 14 लीटर का फ्यूल टैंक पहले की तरह ही दिया गया है।

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2026 Mahindra Scorpio-N: Mahindra & Mahindra ने भारत में 2026 Mahindra Scorpio-N को कई नए फीचर्स के साथ लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस बार SUV को पहले से ज्यादा प्रीमियम, आरामदायक और टेक्नोलॉजी से लैस बनाने की कोशिश की है। नई Scorpio-N में कई नए कम्फर्ट, कन्वीनियंस और सेफ्टी फीचर्स जोड़े गए हैं। जबकि, इसके पेट्रोल और डीजल इंजन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

Mahindra Scorpio-N की शुरुआती कीमत पेट्रोल वेरिएंट के लिए ₹13.69 लाख (एक्स-शोरूम) है और टॉप-एंड डीजल ऑटोमैटिक 4WD वर्जन (जिसमें लेवल 2 ADAS है) के लिए यह ₹25.49 लाख (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

बता दें कि 2022 में लॉन्च होने के बाद से अब तक Mahindra Scorpio-N की 3.8 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं। वहीं, कंपनी समय-समय पर नए वेरिएंट और फीचर अपडेट्स के जरिए इस SUV को बेहतर बनाती रही है। ताजा अपडेट के साथ Scorpio-N अपने सेगमेंट में पहले से भी ज्यादा मजबूत दावेदार बनकर सामने आई है।

नई Scorpio-N में पैनोरमिक सनरूफ और 540-डिग्री कैमरा मिलेगा

नई Scorpio-N की सबसे बड़ी खासियतें हैं पैनोरमिक सनरूफ और ब्लाइंड व्यू मॉनिटर के साथ 540-डिग्री सराउंड व्यू सिस्टम। ये फीचर्स इस SUV में पहली बार दिए जा रहे हैं और इनसे केबिन का अनुभव और पार्किंग की सुविधा, दोनों ही बेहतर होने की उम्मीद है।

Mahindra ने नए डिजाइन वाले 18-इंच डायमंड-कट अलॉय व्हील्स भी पेश किए हैं। इसके अलावा, Scorpio-N में वही जानी-पहचानी सीधी (अपराइट) स्टाइलिंग, बोल्ड फ्रंट ग्रिल, LED प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स, C-शेप के LED डे-टाइम रनिंग लैम्प्स, सीक्वेंशियल टर्न इंडिकेटर्स और मस्कुलर लुक को बरकरार रखा गया है।

यानी इस बार Mahindra ने Scorpio-N के बाहरी लुक में बदलाव करने के बजाय नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक फीचर्स और बेहतर सुविधा देने पर ज्यादा ध्यान दिया है, ताकि ग्राहकों को पहले से अधिक प्रीमियम अनुभव मिल सके।

बड़ी डिस्प्ले और ज्यादा कनेक्टेड टेक्नोलॉजी

केबिन के अंदर, Mahindra Scorpio-N फेसलिफ्ट में एक नए डिजाइन वाला डैशबोर्ड दिया गया है, जिसमें 31.24 cm की फ्लोटिंग HD टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है और इसमें छह फिजिकल शॉर्टकट बटन भी हैं। SUV में 26.03 cm का नया HD पूरी तरह से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी मिलता है, जिसमें तीन डिस्प्ले मोड और फुल-स्क्रीन नेविगेशन सपोर्ट है।

नई Scorpio-N का इंफोटेनमेंट सिस्टम Qualcomm 6155 चिपसेट पर चलता है और इसमें वायर्ड और वायरलेस Android Auto व Apple CarPlay दोनों का सपोर्ट मिलता है।

इंफोटेनमेंट सिस्टम क्वालकॉम के 6155 चिपसेट पर चलता है और वायर्ड के साथ-साथ वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को भी सपोर्ट करता है।

Mahindra ने इसमें Adventure Statistics नाम का नया फीचर भी जोड़ा है, जो इंजन परफॉर्मेंस, कंपास, रोल और पिच एंगल, G-फोर्स और अल्टीमीटर जैसी गाड़ी की जानकारी देता है।

इस SUV में पहले की तरह Adrenox कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी मिलती है, जिसमें 70 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स, Alexa का इन-बिल्ट सपोर्ट और रिमोट व्हीकल फंक्शंस शामिल हैं। इसके अलावा, अपडेटेड मॉडल की फ्रंट रो में एक नया 65W USB Type-C फास्ट चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है, जबकि इसके ऊंचे वेरिएंट्स में सेकंड रो के लिए भी यही चार्जिंग सुविधा मिलती है।

कंफर्ट और सेफ्टी फीचर्स हुए पहले से बेहतर

2026 Mahindra Scorpio-N में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, एक्टिव कूलिंग के साथ वायरलेस फोन चार्जर, Sony का 12-स्पीकर ऑडियो सिस्टम, ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, फ्रेमलेस ऑटो-डिमिंग इनसाइड रियर-व्यू मिरर, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, पावर्ड ड्राइवर सीट और ऊंचे वेरिएंट्स में लेदरेट अपहोल्स्ट्री जैसे फीचर्स मिलते रहेंगे।

सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो, इसमें ऊंचे ट्रिम्स पर छह एयरबैग, फ्रंट पार्किंग सेंसर, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्राइवर की नींद का पता लगाने वाला सिस्टम और टॉप-स्पेक Z8L वेरिएंट पर लेवल 2 ADAS शामिल हैं।

कोई मैकेनिकल बदलाव नहीं

2026 Mahindra Scorpio-N में पहले जैसे ही इंजन ऑप्शन मिलते रहेंगे। खरीदार 2.0-लीटर mStallion टर्बो-पेट्रोल इंजन और 2.2-लीटर mHawk डीजल इंजन में से चुन सकते हैं।

टर्बो-पेट्रोल इंजन 149.14 kW (लगभग 203 hp) की पावर और 380 Nm तक का पीक टॉर्क देता है, जबकि डीजल इंजन 128.6 kW (लगभग 175 hp) की पावर और 400 Nm तक का टॉर्क देता है। दोनों इंजन में छह-स्पीड मैनुअल और छह-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के ऑप्शन मिलते हैं।

इसके अलावा, डीजल वेरिएंट्स में चुनिंदा मॉडल्स के साथ Mahindra का 4XPLOR फोर-व्हील-ड्राइव (4WD) सिस्टम भी मिलता है, जो खराब और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बेहतर ड्राइविंग में मदद करता है।

SUV में पहले की तरह Zip, Zap और Zoom ड्राइव मोड्स भी दिए गए हैं। इनकी मदद से ड्राइवर सड़क और ड्राइविंग कंडीशन के अनुसार वाहन की परफॉर्मेंस को आसानी से बदल सकता है।

Mahindra Scorpio-N की कीमत और वैरिएंट्स

Mahindra Scorpio-N, Z2, Z4, Z6, Z8S, Z8, Z8T और Z8L वेरिएंट्स में उपलब्ध है। इसकी कीमतें पेट्रोल Z2 मैनुअल के लिए ₹13.69 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होती हैं और डीजल Z8L 4WD ऑटोमैटिक के लिए ₹25.49 लाख (एक्स-शोरूम) तक जाती हैं।

खरीदार वेरिएंट के आधार पर पेट्रोल और डीजल इंजन, मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, और साथ ही रियर-व्हील-ड्राइव और फोर-व्हील-ड्राइव कॉन्फिगरेशन में से चुन सकते हैं।

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पहाड़, जंगल या सुनसान रास्ता… गूगल मैप्स का यह फीचर हर जगह देगा साथ!

आज के समय में घूमने निकलते ही ज्यादातर लोग सबसे पहले गूगल मैप खोलते है। लेकिन कई लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ रास्ता देखने के लिए करते हैं। यदि गूगल मैप की कुछ आसान ट्रिक्स पता हों, तो सफर ज्यादा आसान, सेफ और बिना किसी परेशानी के हो सकता है।

ऑफलाइन मैप रखें (Offline Maps)

आपको किसी ऐसी जगह जाना हैं जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है, तो निकलने से पहले उस एरिया का ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें। इससे इंटरनेट बंद होने पर भी रास्ता देखने में परेशानी नहीं होगी। पहाड़ी इलाकों, गांवों या विदेश ट्रिप में यह फीचर काफी काम आता है।

ट्रैफिक पहले देखें (Live Traffic)

घर या होटल से निकलने से पहले Google Maps पर ट्रैफिक जरूर चेक करें। इससे आपको पता चल जाएगा कि रास्ते में कहीं जाम, रोड बंद या कोई और परेशानी तो नहीं है। इससे जरूरत पड़ने पर आप दूसरा रास्ता चुन सकेंगे और टाइम भी बच जाएगा।

जरूरी जगह सेव करें (Save Places)

ट्रिप शुरू करने से पहले होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, एटीएम, अस्पताल और घूमने वाली जगहों को Google Maps में सेव कर लें। इससे नेटऑन करने या बार-बार सर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जरूरत पड़ने पर जल्दी लोकेशन मिल जाएगी।

लाइव लोकेशन शेयर करें (Share Live Location)

अगर आप अकेले ट्रैवल कर रहे हैं या रात हो जाए, तो अपनी लाइव लोकेशन परिवार या दोस्तों के साथ शेयर करें। इससे उन्हें पता रहेगा कि आप कहां हैं और जब भी जरूरत पड़े तो वे आपकी मदद भी कर सकेंगे। यह फीचर सेफ्टी के हिसाब से काफी उपयोगी है।

आसपास की जगह खोजें (Explore Nearby)

किसी नए शहर में पहुंचने के बाद Google Maps का Explore फीचर जरूर इस्तेमाल करें। इससे आसपास के अच्छे रेस्टोरेंट, कैफे, पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, एटीएम और घूमने की जगहें जल्दी मिल जाती हैं। इससे वहां पर आपको किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ती।

भीड़ का सही समय देखें (Popular Times)

किसी मंदिर, मॉल, म्यूजियम या मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाने से पहले Google Maps में Popular Times जरूर देख लें। इससे आप जान पाएंगे कि वहां किस समय सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। फिर सही टाइम देखकर लंबी लाइन और भीड़ से बच सकते हैं।

पहले ही जगह देख लें (Street View)

अगर किसी जगह पर पहली बार जा रहे हैं, तो Street View फीचर की मदद से वहां की सड़क, होटल का एंट्री गेट, पार्किंग और आसपास का एरिया पहले ही देख सकते हैं। इससे वहां पहुंचने के बाद रास्ता ढूंढने में कम परेशानी होती है और आप सही लोकेशन तक पहुंच जाते हैं।