7 things to know about the Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition

7 things to know about the Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition
7 things to know about the Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition

Royal Enfield has just announced a new, commemorative edition of the Classic 350 Gorkha Edition. Meant as an acknowledgement to the bravery and discipline of the Gorkha Regiment of the Indian army, the variant has prominent hat-tips to the most celebrated army unit in the world. If all of that sounds appealing to you and you want to bring one home, here’s what you need to know about it.

1. How is the Gorkha Edition different from the regular Classic 350?

Being a commemorative edition, the Gorkha Edition has a special colour called Gorkha Green which resembles a lot of army vehicles. It features two crossed Khukris on both the side panels, the official insignia of the Gorkha Regiment. There’s also a ‘Gorkha Edition’ sticker on the fuel tank, just above the fuel lid. The overall design and the dimensions remain unchanged otherwise.

2. How much does the Gorkha Edition cost?

Royal Enfield has priced the Classic 350 Gorkha Edition at Rs 2.11 lakh (ex-showroom, Delhi) which puts it right in the middle of the range that starts at Rs 1.87 lakh and goes all the way up to Rs 2.24 lakh. There’s another variant called ‘Commando Sand’ which also costs the same as the ‘Gorkha Edition’.

3. Which engine does the Classic 350 Gorkha Edition have?

The Classic 350 Gorkha Edition continues with Royal Enfield’s tried-and-tested J-series engine. Unveiled first with the Meteor 350 back in 2020, this single-cylinder, air-cooled unit has 20.2hp of power and 27Nm of torque. 

4. What is the seat height of the Classic 350 Gorkha Edition?

The seat height on the Classic 350 Gorkha Edition is 805mm (unchanged from the regular Classic 350).

5. What features does the Classic 350 Gorkha Edition get?

The Classic 350 Gorkha Edition has a semi-digital instrument cluster, assist and slipper clutch, and a type-C USB port for charging your devices on the go. Note that Royal Enfield had recently updated all variants of the Classic 350 with the exact same feature set.

6. Does it get dual-channel ABS?

What separates the Classic 350 variants mainly are two things, the colour scheme and ABS. Of the eight available colours, the base ‘Redditch Red’ variant has single-channel ABS, with all the other colours—including the Gorkha Edition—getting dual-channel ABS as standard. Braking duties too are covered by the same 300mm disc at the front and 270mm disc at the rear.

7. What’s the weight and ground clearance like?

They continue unchanged as the Classic 350 at 195kg kerb weight and 170mm of ground clearance. If you like the Royal Enfield J-series engine but are fazed by the weight, the Hunter 350 remains the lightest Royal Enfield motorcycle you can buy today with a lighter kerb weight figure of 181kg but do note that its ground clearance is 160mm although it’s unlikely that the 10mm reduction will ever be an issue.

Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition launched at Rs 2.11 lakh

Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition launched at Rs 2.11 lakh
Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition launched at Rs 2.11 lakh

Royal Enfield has launched a new ‘Gorkha Edition’ of the Classic 350 at Rs 2.11 lakh. The renowned retro roadster remains mechanically unchanged. Named after the Gorkha regiment of the Indian Army, this colourway is meant to commemorate the unit’s bravery and discipline.

  1. Mechanically similar to the regular Classic 350
  2. A tribute to the Gorkha Regiment, an infantry unit of the Indian army
  3. Gets exclusive tributary decals of the regiment

New colour, with tributes to the Gorkha regiment

Though the underlying design itself remains unchanged, this edition of the Classic 350 gets a few specific additions to emphasise on the fact that it’s a tribute. Apart from the matte military green colour that’s typically associated with army vehicles, the sidepanels feature the crossed Khukris, the regiment’s official insignia. The fuel tank also gets a ‘Gorkha Edition’ sticker.

Mechanically the same

Same features as the latest Classic 350

As we had reported earlier, the Gorkha Edition remains mechanically and electrically the same as the regular Classic 350. Which means it still has the same J-series 349cc, single-cylinder engine with 20.2hp of power and 27Nm of torque and a 5-speed transmission. The brakes also remain the same with dual-channel ABS. The bike remains unchanged by way of electronic features too, sticking to the semi-digital instrument cluster, but the tripper pod is missing. However, it should be available as an accessory, if you have a need for it.

Royal Enfield currently offers the Classic 350 in seven different colours with the main differences being single or dual-channel ABS. The base variant gets single-channel ABS with the others getting dual-channel ABS as standard. Royal Enfield has given the Gorkha Edition features like assist and slipper clutch as well as a USB type-C port; the regular Classic 350 had also received it recently. The Gorkha Edition has been launched at Rs 2.11 lakh, slotting right in the middle of the line-up. Royal Enfield says booking starts today.

आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

New Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition spotted

New Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition spotted
Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition at a dealership

A new special edition of the Royal Enfield Classic 350 has been spotted at a dealership. The Classic 350 Gorkha Edition is finished in matte military green and features imagery drawn from one of the most decorated regiments in the Indian Army – the Gorkha Regiment.

  1. Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition spotted at a dealership
  2. Finished in matte military green with crossed Khukri insignia on the side panels
  3. Chrome engine casings, exhaust and wire-spoke rims

Royal Enfield Classic 350 Gorkha Edition: What we know

Mechanically identical to the rest of the Classic 350 range

From the video of the bike at a dealership, the Gorkha Edition features chrome-finished engine casings and exhaust, and rides on chrome wire-spoke rims, unlike some of the colourways for the Classic 350 that get blacked-out elements and alloy wheels. The Gorkha Edition sticker on the side panels prominently features the crossed Khukri (traditional knife) insignia associated with the Gorkha Rifles.

Mechanically, the Gorkha Edition is expected to be identical to the rest of the Classic 350 range, powered by the 349cc J-series single-cylinder engine producing 20.2hp and 27Nm, paired with a 5-speed gearbox. The Classic 350 was recently updated with a slip-and-assist clutch and a USB Type-C charging port on dual-channel ABS variants, and considering this is a special edition, we could expect these updates to be included on this bike.

Royal Enfield has not officially announced the Gorkha Edition or confirmed pricing, but given that it appears to have reached dealerships, a launch in the near future is likely.

Image source: PJ Auto Hub

15 अगस्त पर लाल किले में दिखेगा नया इतिहास! जश्न में पहली बार दो ऐतिहासिक पल

15 अगस्त से पहले दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाल किले के पास दंगल पार्क में भारतीय सेना के जवानों ने पारंपरिक 21 तोपों की सलामी रिहर्सल की जा रही है। इस बार समारोह में ‘युवा शक्ति’, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने को खास जगह दी जाएगी।

युवा शक्ति और Gen-Z

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इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की युवा शक्ति और Gen-Z पर फोकस रहेगा। इसमें युवाओं की अचीवमेंट, उनकी नई सोच और देश के डेवलपमेंट में उनके योगदान को सामने रखा जाएगा। साथ ही 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को भी खास तरीके से दिखाया जाएगा। सेरेमनी में युवा अचीवर्स को स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह

इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे खास जगह दी जाएगी। पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और साइंस

स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक अचीवमेंट को भी दिखाया जाएगा। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस और मॉडर्न टेक्निक सेक्टर में देश ने जो प्रगति की है, उसकी झलक विजुअल्स के जरिए दिखाई जाएगी। इन्विटेशन कार्ड में ‘सेवा तीर्थ’ को प्रायोरिटी दी गई है, जो पब्लिक सर्विस और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिखाती है।

इंटर्नशिप और डेवलपमेंट स्कीम

इस बार समारोह में देश के युवा प्रतिभाओं को खास सम्मान दिया जाएगा। इंटरनेशनल फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमैटिक्स ओलंपियाड 2026 में मेडल जीतने वाले 19 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के इंटर्न, स्किल डेवलपमेंट स्कीम का लाभ लेने वाले और MY भारत के वॉलंटियर्स जैसे युवा अचीवर्स भी समारोह में शामिल होंगे।

जल संरक्षण

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे जाएंगे। इसका मकसद लोगों का ध्यान जल संरक्षण और पानी बचाने की जरूरत की ओर अट्रैक्ट करना है।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की परंपरा, युवाओं की ताकत और भारत की तरक्की की झलक एक साथ दिखाएगा। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने से यह मौका और खास बन गया है। युवा प्रतिभाओं के सम्मान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ समारोह में विकसित भारत 2047 का संदेश भी मिलेगा।

NMMSS Scholarship 2026-27: 8वीं के बाद पैसों की कमी से नहीं रुकेगी पढ़ाई, एनएमएमएसएस स्कॉलरशिप के लिए शुरू हुए आवेदन

NMMSS Scholarship 2026-27: देश में स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की काफी बड़ी तादात है। बहुत से छात्र पैसों की कमी की वजह से 8वीं कक्षा के बाद स्कूल की पढ़ाई आगे नहीं कर पाते हैं। ऐसे छात्रों को पढ़ाई से वापस जोड़ने में मदद देने के लिए शिक्ष मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप (NMMSS Scholarship) प्रदान करता है। इस स्कॉलरशिप का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों की सहायता करना है।

इस छात्रवृत्ति का नवीनीकरण कराने या नई छात्रवृत्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक और योग्य छात्र 31 अगस्त, 2026 तक नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के ज़रिए अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। इस छात्रवृत्ति की मदद से कक्षा 8 के बाद छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में बढ़ावा मिलता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे डेडलाइन से काफी पहले आवेदन प्रक्रिया पूरा कर लें।

एनएमएमएसएस स्कॉलरशिप 2026-27 योग्यता

यह स्कॉलरशिप सरकारी, सरकारी मदद पाने वाले और लोकल बॉडी स्कूलों में कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध है। इसे कक्षा 10 से 12 के लिए भी रिन्यू किया जा सकता है, बशर्ते छात्र योजना की नवीनीकरण शर्तों को पूरा करते रहें। छात्रों को मेधा आधारित स्कॉलरशिप स्कीम के साथ एक या ज्यादा वेलफेयर-बेस्ड स्कॉलरशिप स्कीम के लिए भी अप्लाई करने की इजाजत है।

एनएमएमएसएस स्कॉलरशिप 2026-27 के लिए कैसे करें आवेदन?

  • नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के लिए scholarships.gov.in पर जाएं।
  • पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग नया रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करें।
  • रजिस्टर्ड क्रेडेंशियल से लॉग इन करें।
  • नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम चुनें।
  • जरूरी डिटेल्स भरें।
  • डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें।
  • एप्लीकेशन सबमिट करें।
  • आगे के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें और सेव करें।

एनएमएमएसएस स्कॉलरशिप के फायदे

नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम केंद्र द्वारा प्रायोजित एक कार्यक्रम है। यह स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ने की दर को कम करने में मदद करता है। यह आर्थिक रूप से कमजोर तबके के काबिल स्टूडेंट्स को वित्तीय मदद देता है। कक्षा 9 में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को हर साल एक लाख नई स्कॉलरशिप दी जाती हैं। तय शर्तों के तहत, स्कॉलरशिप को कक्षा 12 तक रिन्यू किया जा सकता है।

एनएमएमएसएस वेरिफिकेशन शेड्यूल

सत्यापन प्रक्रिया दो चरणों में पूरा होगा। इंस्टिट्यूट नोडल ऑफिसर (INOs) 15 सितंबर, 2026 तक लेवल-1 वेरिफिकेशन करेंगे। डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर (DNOs) 30 सितंबर, 2026 तक लेवल-2 वेरिफिकेशन पूरा करेंगे।

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना आयोजित करेगी साइबर क्वेस्ट, 20 अगस्त तक करें आवेदन

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना आयोजित करेगी साइबर क्वेस्ट, 20 अगस्त तक करें आवेदन

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और साइबर दुनिया के खतरों से निपटने के लिए इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह एक प्रतियोगिता है जिसमें छात्र, साइबर प्रोफेशनल, इनोवेटर्सऔर टेक्नोलॉजी के शौकीन हिस्सा ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन साइबरपीस फाउंडेशन के साथ मिलकर टेरिटोरियल आर्मी करेगी। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 अगस्त तक आधिकारिक पोर्टल के जरिए रजिस्टर कर सकते हैं।

इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 टाइमलाइन

रजिस्ट्रेशन : 30 जुलाई से 20 अगस्त, 2026

शॉर्टलिस्टिंग फेज : ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग प्रोसेस 1 सितंबर से 10 सितंबर, 2026 तक चलेगा।

ग्रैंड फिनाले : कॉम्पिटिशन का ग्रैंड फिनाले 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

अवार्ड सेरेमनी : अवार्ड सेरेमनी 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में होगी।

अंतिम राउंड में चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक इनाम और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों से मिलने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता के विजेता रक्षा संस्थानों का दौरा भी करेंगे।

प्रतियोगिता का फॉर्मेट

शॉर्टलिस्टिंग राउंड में सभी उम्मीदवार एक ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) चैलेंज में हिस्सा लेंगे। इस राउंड में चयनित टीमें फिर 36 घंटे के लाइव फिनाले में आगे बढ़ेंगी। यहां वे एक कृत्रिम नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सैंडबॉक्स में इंडियन आर्मी के लिए खास तौर से विकसित सॉल्यूशन पर काम करेंगी। फिनाले के दौरान, टीमें कमजोरियों की पहचान करेंगी, गलतियों को दर्ज करेंगी, और डोमेन में कमाए गए अपने साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन या बैज के लिंक सबमिट करेंगी।

कौन हिस्सा ले सकता है ?

छात्र, साइबर सुरक्षा पेशेवर, एथिकल हैकर्स, सेना से जुड़े लोग और शोधकर्ता।

फॉर्मेट : एक पूरी तरह से ऑनलाइन सीटीएफ क्वालिफायर राउंड के बाद एक इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले होगा। हर टीम में टीम लीडर समेत ज्यादा से ज्यादा तीन सदस्य हो सकते हैं।

स्कोरिंग : एक विशेषज्ञ पैनल ग्रैंड फिनाले के दौरान जमा की गई एंट्री का आकलन कमजोरियों की गंभीरता, सुलझाने का तरीका और जटिलता के आधार पर करेगा।

ग्रैंड फिनाले

टॉप 10 शॉर्टलिस्टेड टीमें नई दिल्ली में 36 घंटे के इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले में मुकाबला करेंगी। सभी प्रतिभागी रियलिस्टिक डमी डेटा का इस्तेमाल करके एक खासतौर से तैयार सिस्टम स्टैक पर लाइव कमजोरी तलाशेंगे और दर्ज करेंगे। पहचानी गई वल्नरेबिलिटीज का उनकी गंभीरता, मूलता और जटिलता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। एक विशेषज्ञ पैनल खोजों को सत्यापित करेगा और फाइनल स्कोर तय करेगा। टॉप तीन टीमों को उनके पूरे प्रदर्शन के आधार पर विजेता घोषित किया जाएगा।

मेडल और सर्टिफिकेट

टेरिटोरियल आर्मी प्रतियोगिता में उम्मीदवारों के योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट देगी। प्रतिभागियों को टेरिटोरियल आर्मी के साथ काम करने, रक्षा विशेषज्ञों के साथ काम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा इकोसिस्टम में योगदान देने और वरिष्ठ सरकारी और सेना के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।

विजेताओं का सम्मान

इस प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा और उन्हें खास डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट्स में जाने का भी मौका मिलेगा।

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Commonwealth Games में भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने जीते 16 पदक (Video)

Neeraj Chopra

भारतीय सेना ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अपने खिलाड़ियों के ‘शानदार प्रदर्शन’ की मंगलवार को तारीफ की और कहा कि यह अलग-अलग खेलों में उनके जोश और लगन का सबूत है।सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में 16 पदक जीते और इस बात पर जोर दिया कि ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए उसकी प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।

सेना ने कहा, ‘‘हर काम, देश के नाम, जनरल धीरज सेठ, सीओएएस और भारतीय सेना में सभी पद के लोग राष्ट्रमंडल खेले ग्लास्गो 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय सेना के खिलाड़ियों को दिल से बधाई देते हैं।’’ सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने जूडो, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, पैरा-एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने जीत के पलों की झलक दिखाने वाली एक वीडियो क्लिप भी साझा की।

सेना ने कहा, ‘‘भारतीय सेना के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन उनके जोश और लगन का सबूत है। ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और मिशन ओलंपिक 2036 के जरिए देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।’’

तीन अगस्त को संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 39 पदक जीते जिसमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। भारत चौथे स्थान पर रहा। गुजरात का अहमदाबाद 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा जिससे दो दशक बाद इस प्रतियोगिता की भारत में वापसी होगी।भारत ने पिछली बार 2010 में नयी दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की थी।

ICSE 10th Improvement Result 2026: 10वीं के इंप्रूवमेंट नतीजे जारी, 24 जुलाई से डिजिलॉकर पर मिलेगी डिजिटल मार्कशीट

ICSE 10th Improvement Result 2026: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) से 10वीं कक्षा की परीक्षा दे चुके छात्र अपनी इंप्रूवमेंट परीक्षा के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। इन छात्रों के लिए आज अच्छा दिन है। बोर्ड ने इंडियन काउंसिल फॉर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (ICSE) 10वीं इम्प्रूवमेंट एग्जामिनेशन रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। 15 जून से 30 जून, 2026 तक हुई इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल छात्र अब सीआईएससीई रिजल्ट्स पोर्टल के जरिए अपना रिजल्ट देख सकते हैं। डिजिटल मार्कशीट भी 24 जुलाई, 2026 से डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगी।

इस साल, 37 विषयों/पेपर्स में 13,032 पेपर-वाइज एंट्रीज के साथ 5,321 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। यह परीक्षा 341 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जबकि 43 केंद्रों पर 185 परीक्षकों ने छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया था। सीआईएससीई ने स्पष्ट किया है कि मुख्य और इम्प्रूवमेंट परीक्षा में मिले अधिक अंकों को अंतिम अंक माना जाएगा।

आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026 कैसे चेक करें?

छात्र आईसीएसई 10वीं इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026 डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं :

  • सीआईएससीई रिजल्ट्स पोर्टल cisce.org पर जाएं।
  • आईसीएसई इम्प्रूवमेंट एग्जामिनेशन रिजल्ट 2026 लिंक चुनें।
  • ज़रूरी लॉगिन क्रेडेंशियल डालें।
  • रिजल्ट देखने के लिए डिटेल्स सबमिट करें।
  • आगे के रेफरेंस के लिए प्रोविजनल स्कोरकार्ड डाउनलोड करके सेव कर लें।
  • स्कूल CAREERS पोर्टल के जरिए टेबुलेशन रजिस्टर और कैंडिडेट-वाइज रिपोर्ट देख सकते हैं।

आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026: एक नजर

परीक्षा तारीख : 15 जून से 30 जून, 2026

कुल कैंडिडेट शामिल हुए : 5,321

पेपर-वाइज एंट्री : 13,032

कवर किए गए सब्जेक्ट/पेपर : 37

एग्जाम सेंटर : 341

इवैल्यूएशन सेंटर : 43

इवैल्यूएशन करने वाले एग्जामिनर : 185

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट स्कोरकार्ड 2026 डाउनलोड करके सुरक्षित रखें, क्योंकि मेन और इम्प्रूवमेंट एग्जाम में मिले मार्क्स में से जो ज्यादा होगा, उसे फाइनल स्कोर माना जाएगा। रिजल्ट से जुड़े किसी भी सवाल के लिए, स्कूल सीआईएससीई हेल्पडेस्क से helpdesk@cisce.org पर संपर्क कर सकते हैं या 1800-203-2414 पर कॉल कर सकते हैं।

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पाकिस्तानी हैंडल्स फैलाने लगे दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर झूठा प्रॉपेगेंडा, इंडियन आर्मी फैक्ट चेक ने तुरंत खारिज किए ये दावे

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च को लेकर दिल्ली में लगातार गहमागहमी जारी है। वहींदिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर फेक खबरें भी तेजी से फैलाया जा  रही हैं। पाकिस्तान से संचालित कुछ प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया हैंडल यह झूठ फैला रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली में भारतीय सेना तैनात की गई है। इतना ही नहीं, इन पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

फैलाई गई फेक खबरें 

हालांकि, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स, जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान संभाल रहे हैं। इस पूरे मामले में भारतीय सेना की कोई तैनाती नहीं की गई है।फर्जी खबर फैलाने वाले लोग आम प्रदर्शन का वीडियो दिखाकर उसके साथ सेना की तैनाती और हथियारों के इस्तेमाल जैसी झूठी बातें जोड़ रहे हैं। इसका मकसद लोगों में डर और भ्रम फैलाना तथा भारतीय सेना की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

जंतर-मंतर से हटाया गया प्रदर्शन स्थल

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। इससे कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर और लाठीचार्ज कर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए। आंदोलन के एक नेता ने कहा कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक वहीं डटे रहेंगे।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पुलिस ने वह मंच भी हटा दिया, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी। इसके साथ ही वहां रखे ट्रैम्पोलिन, कालीन, गद्दे और अन्य सामान भी हटा दिए गए। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग मान ली गई है। हालांकि, उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी मौजूद हैं।

सीजेपी ने सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद आंदोलन लगातार बढ़ता गया और कई लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे यह लंबा धरना बन गया। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास जुटे। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च निकाला। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।