कौन हैं IAF के नए चीफ आशुतोष दीक्षित? जिन्होंने कारगिल और ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे। बता दें कि एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को रिटायर होंगे, जिसके बाद आशुतोष दीक्षित वायुसेना प्रमुख का पद संभालेंगे।

एयर मार्शल दीक्षित मुख्य रूप से वायु सेना में स्वदेशी LCA तेजस और अन्य स्वदेशी एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि वह रक्षा क्षेत्र में सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर देंगे।

करीब 4 दशक का अनुभव

आशुतोष दीक्षित 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी, बांग्लादेश के डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्हें कई तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाने का 3,500 घंटे से ज्यादा का अनुभव है, जिनमें Mirage-2000, MiG के अलग-अलग वर्जन, Kiran, Jaguar, IL-78, HAWK और Tejas शामिल हैं। वे एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। लगभग चार दशक के अपने सर्विस करियर के दौरान, वे कई ऑपरेशन और एक्सरसाइज में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जिनमें ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं।

कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित?

एयर मार्शल दीक्षित (सर्विस नंबर 18558 F(P)) फाइटर स्ट्रीम से हैं और 138वें कोर्स के तहत कमीशन हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें 6 दिसंबर 1991 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 5 मई 2003 को विंग कमांडर, 1 मार्च 2009 को ग्रुप कैप्टन और 17 जून 2013 को एयर कमोडोर के पद पर प्रमोट किया गया।

वे 11 जून 2019 को एयर वाइस मार्शल, 1 अक्टूबर 2022 को एयर मार्शल और 1 सितंबर 2024 को कमांडर-इन-चीफ बने। उनकी ट्रेनिंग में कैडेट के तौर पर 69वां नेशनल डिफेंस एकेडमी कोर्स और एयर कमोडोर के तौर पर 57वां नेशनल डिफेंस कॉलेज कोर्स शामिल है।

अपने शानदार करियर के दौरान, एयर मार्शल ने कई अहम फील्ड और स्टाफ पदों पर भी काम किया है। उन्होंने वेस्टर्न सेक्टर में एक फ्रंट-लाइन फाइटर एयर बेस और सदर्न सेक्टर में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली है।

अहम ऑपरेशनल और प्रोजेक्ट पदों पर किया काम

दीक्षित ने 15 दिसंबर 2003 से 15 जनवरी 2006 के बीच ग्वालियर में नंबर 9 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया। उन्होंने दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में प्रिंसिपल डायरेक्टर, एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के तौर पर भी काम किया। वह जनवरी 2018 से मई 2019 तक एयर फोर्स स्टेशन बीदर में एयर ऑफिसर कमांडिंग रहे और बाद में त्रिवेंद्रम में सदर्न एयर कमांड के साथ एयर डिफेंस कमांडर के तौर पर काम किया।

अक्टूबर 2020 से सितंबर 2021 तक, वह एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ, प्रोजेक्ट्स थे। इसके बाद उन्होंने अक्टूबर 2021 से सितंबर 2022 तक असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ, प्लांस के तौर पर काम किया।

एयर मार्शल के तौर पर, दीक्षित ने साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर, एयर हेडक्वार्टर में डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ और इलाहाबाद में सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया।

बाद में उन्होंने मई 2025 से जून 2026 तक चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन के लिए चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तौर पर काम किया। जुलाई 2026 से, वह दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर, ऑपरेशन्स और वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के तौर पर कार्यरत हैं।

सेना मेडल

रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर मार्शल दीक्षित को तीन अवॉर्ड मिले हैं – वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल। उन्हें 2006 में वायु सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए दिया गया। उस समय वह एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे। उनकी कमान में स्क्वाड्रन को दोबारा तैयार किया गया और Mirage-2000 विमानों से लैस किया गया। उन्होंने फ्रांस से भारत तक 10 नए Mirage-2000 विमानों को लाने और उनकी स्वीकृति से जुड़ी उड़ानों में भी अहम भूमिका निभाई।

उन्हें 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। उन्होंने 20 से ज्यादा तरह के एयरक्राफ्ट में 3,200 घंटे उड़ान भरी है और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया है। उन्होंने Jaguar और MiG-27 एयरक्राफ्ट के लिए स्वदेशी अपग्रेड प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है, साथ ही मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत एयरक्राफ्ट के टेक्निकल इवैल्यूएशन और फील्ड ट्रायल्स में भी भूमिका निभाई है।

उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

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क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

Why is Indian Air Force Day celebrated, Learn about history of world's fourth largest air power

Indian Air Force Day 2026: हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वह पावन अवसर है जब पूरा देश अपनी वायुसेना के शौर्य, अदम्य साहस और समर्पण को नमन करता है। ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (गर्व के साथ आकाश को छूना) के अमर ध्येय वाक्य को जीने वाली भारतीय वायुसेना केवल हमारी सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि देशवासियों के विश्वास का वो मज़बूत आधार है जो हर संकट में ढाल बनकर खड़ा रहता है। 8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। आइए जानते हैं भारतीय वायुसेना दिवस पर उसके इतिहास और महत्‍व के बारे में विस्‍तार से… 

 

भारतीय वायुसेना का इतिहास

8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ (RIAF) के रूप में इसकी नींव रखी गई। 1 अप्रैल 1933 को महज 4 वेस्टलैंड वापिटी विमानों और 6 निडर भारतीय अधिकारियों के साथ वायुसेना के पहले स्क्वाड्रन ने सांसें लीं। द्वितीय विश्व युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के लिए इसे ‘रॉयल’ उपाधि मिली थी।

इसे 1950 में पूर्ण गणतंत्र घोषित होने से पहले ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ के नाम से जाना जाता था। इसने 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1950 में आजादी यानी पूर्ण गणतंत्र घोषित होने के बाद इसमें से ‘रॉयल’ शब्द हटाकर उसे सिर्फ इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) कर दिया गया। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के पास भारत से बड़ी वायुसेना मौजूद है।

 

शौर्य और अभियानों की गाथा

भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और ताकतवर वायुसेना है, जिसने इतिहास के हर मोड़ पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। साल 1947, 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध की बर्फीली चोटियों तक वायुसेना ने दुश्मनों के हौसले पस्त किए हैं।

सियाचिन की शून्य से नीचे की बर्फ में ‘ऑपरेशन मेघदूत’, मालदीव में लोकतंत्र बचाने का ‘ऑपरेशन कैक्टस’ और 2019 में सीमा पार जाकर की गई ‘बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक’ वायुसेना की अचूक क्षमता का प्रमाण हैं। 

 

आपदा में सबसे पहली उम्मीद

वायुसेना केवल विनाशकारी युद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि संकटग्रस्त जिंदगियों को बचाने के लिए भी जानी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं (चाहे उत्तराखंड की विनाशकारी बाढ़ हो, गुजरात का भूकंप या केरल की सुनामी) हर जगह वायुसेना के चॉपर संकटमोचन बनकर पहुंचे हैं। महामारी या विदेशों में गृहयुद्ध के दौरान फंसे भारतीयों और मित्र देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे विशाल विमानों ने हमेशा मिसाल कायम की है।

 

जब वायुसेना नीले गगन में रचती है इतिहास

वायुसेना दिवस का जश्न सिर्फ एक औपचारिक परेड नहीं, बल्कि भारत की सैन्य ताकत और एयरोबेटिक कलाबाजी का अद्भुत संगम है। कार्यक्रम की शुरुआत वायुसेना प्रमुख द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने, भव्य परेड के निरीक्षण और अदम्य साहस दिखाने वाले वीर वायु सैनिकों को वीरता पदकों से अलंकृत करने के साथ होती है।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाले भव्य एयर शो में जब राफेल, सुखोई Su-30MKI, स्वदेशी तेजस, जगुआर और मिराज जैसे घातक लड़ाकू विमान एक साथ उड़ान भरते हैं, तो धरती से आसमान तक गर्व की लहर दौड़ जाती है। एयरोबेटिक टीम ‘सूर्य किरण’ के लाल-सफेद विमान और ‘सारंग’ हेलीकॉप्टर दल जब हवा में जटिल और हैरतअंगेज फॉर्मेशन्स बनाते हैं, तो दर्शक दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।

 

भारतीय वायुसेना की भविष्य की ओर उड़ान

आज भारतीय वायुसेना केवल अपनी पुरानी विरासत पर निर्भर नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तेज़ी से खुद को बदल रही है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ‘तेजस’ (LCA), प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों को शामिल कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए गए हैं। अब वायुसेना केवल हवाई सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पेस (अंतरिक्ष) और साइबर सुरक्षा के नए आयामों में भी अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है।

 

भारतीय वायुसेना का महत्व

वर्तमान युग में युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक महत्व वायुसेना का होता है, इसलिए सेना के इस अंग का सबसे मजबूत होना अति आवश्यक है। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत में बड़ी वायुसेना मौजूद है। भारतीय वायुसेना कई ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना होने का दर्जा दिलाती है। भारतीय वायुसेना बल, वीरता और पराक्रम का प्रतीक है।

 

वायुसेना दिवस पर भारतीय वायु सैनिकों की बहादुरी, शौर्य और पराक्रम के लिए उन्हें सलाम करती है। यह दिवस हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज़्बा जगाता है और उन वीर सपूतों को नमन करने का अवसर देता है जो दिन-रात हमारी नींद की हिफाज़त के लिए आसमान में पहरा देते हैं। 

सेवारत सैनिक बेटे के पिता ने किया लिवर और किडनी दान, एयरफोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया मिशन

एक सेवारत सैनिक के 62 साल के पिता ने बेहद साहसिक फैसला किया। उन्होंने लिवर और एक किडनी दान कर मानवीय मूल्यों का सर्वोच्च प्रदर्शन किया। अंगदान के बाद इन महत्वपूर्ण अंगों को तय समयसीमा के भीतर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाना बेहद जरूरी था। इस चुनौतीपूर्ण काम में भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाए गए अंग

भारतीय वायुसेना ने मेडिकल टीमों के साथ सहयोग करते हुए चंडीगढ़ से दिल्ली तक अंगों को एयरलिफ्ट किया। एयरलिफ्ट किए गए दोनों अंगों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। लिवर को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया, जबकि किडनी को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया।

वायुसेना ने तेजी से पूरी की प्रक्रिया

इस पूरे मिशन की खास बात यह रही कि अंगदान करने वाले 62 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे, जो भारतीय सेना में सेवारत है, के माध्यम से देशसेवा की भावना को एक अलग स्तर पर पहुंचाया। उन्होंने अपने अंग दान कर जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगाई। मिशन के दौरान समय की गंभीरता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई, ताकि अंगों को सुरक्षित और जल्द से जल्द संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।

पहले भी ऐसे मिशन का हिस्सा रही है वायुसेना

भारतीय वायुसेना पहले भी ऐसे मिशन का हिस्सा रह चुकी है। समय-समय पर आपात स्थितियों में मेडिकल इवैक्यूएशन और महत्वपूर्ण अंगों को समय पर पहुंचाने जैसे मिशनों में सहयोग करती रही है। इस मिशन में भी तेज प्रतिक्रिया और सटीक समन्वय के जरिए चंडीगढ़ से दिल्ली तक जीवन बचाने की इस महत्वपूर्ण कड़ी को पूरा किया गया।

वायुसेना को मिलेगा तेजस ट्विन सीटर और HTT-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में HAL करने जा रही बड़ा धमाका

Aatmanirbhar Bharat: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कल यानी 18 सितंबर 2026 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना (IAF) को LCA तेजस FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा। इसके अलावा ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को सौंपे जाएंगे। यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में होगा।

HAL के अनुसार, यह हैंडओवर भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में HAL और उसके उद्योग साझेदारों की भूमिका को दिखाया किया जाएगा। इन्होंने देश में सैन्य और नागरिक, दोनों क्षेत्रों के लिए उन्नत एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और निर्माण की क्षमता को मजबूत किया है।

वायुसेना और पवन हंस के लिए अहम सौंपे जाएंगे प्लेटफॉर्म

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को LCA तेजस के FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे। वहीं, ध्रुव NG हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी पवन हंस लिमिटेड को की जाएगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, HAL के CMD रवि के. सहित रक्षा और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों, वायुसेना, पवन हंस, नियामक एजेंसियों तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर सरकार का जोर

सरकार ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता दी है। इन प्लेटफॉर्म्स को शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

‘भारत के विजन की आधारशिला है रक्षा क्षेत्र’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त तकनीकी नेतृत्व से तय होगी। उन्होंने कहा कि आज हम जो कल्पना करते हैं। वही कल की सैन्य क्षमता बनेगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का विजन सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने के बारे में नहीं है। बल्कि ऐसा भारत बनाने के बारे में है जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो।

सिंह ने रक्षा क्षेत्र को इस विज़न की नींव बताया। उन्होंने कहा, “2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल काफी बढ़ाना होगा। रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ाना होगा और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।” रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि सहयोग के बिना इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच मजबूत साझेदारी होनी चाहिए।

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सिंह ने कहा कि DRDO और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन तक फैलाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन, भविष्य की लड़ाई में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी इनोवेशन करने का आग्रह किया।

पाकिस्तान का नया AI ‘वॉर वीडियो’ वायरल, 32 एयरबेस और 8 विमान तबाह करने का दावा, सबूत नदारद

India-Pakistan Conflict: एयर फोर्स डे के मौके पर, पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस ने एक शानदार और ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया, जिसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का एक असाधारण रूप दिखाया गया है।

“फिजाओं के पासबान” नाम के इस वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए, भारत के आठ विमान गिराए और भारत के नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित किया। एनिमेशन में भारतीय संसद और INS विक्रांत समेत भारत के प्रमुख ठिकानों पर हमले भी दिखाए गए हैं।

वीडियो के ग्राफिक्स से इस फैंटेसी (काल्पनिक कहानी) का दायरा काफी साफ हो जाता है। एक ग्राफिक में दावा किया गया है कि “IAF के 32 बेस पर हमला हुआ”, जबकि दूसरे में दावा है कि चार राफेल, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक मिराज-2000 और एक हेरॉन UAV नष्ट कर दिए गए। अन्य विजुअल में S-400 सिस्टम पर हमले, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बर्बाद होने और भारतीय शहरों की ओर मिसाइलें जाते हुए दिखाई गई हैं।

पाकिस्तान के लिए समस्या काफी सीधी-सी है: वीडियो में बहुत सारे धमाके, मैप और कंप्यूटर से बनाई गई तबाही तो है, लेकिन असल तबाही का बहुत कम सबूत है।

भारत के 32 एयरबेस पर हमला? आखिर इसका सबूत कहां है?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमला किया। अगर यह सच होता, तो यह एक बहुत बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। इसे छिपाना भी बहुत मुश्किल होता।

फिर भी, PAF के वीडियो में इस दावे को साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, हमले से पहले और बाद की तस्वीरें, रनवे को हुए पहचाने जा सकने वाले नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें नहीं दिखतीं जिनकी पुष्टि की जा सके। सीमा के दूसरी तरफ से मिले सबूतों के साथ इसका अंतर साफ दिखता है।

जब मई 2025 की लड़ाई के आखिरी दौर में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो सैटेलाइट तस्वीरों से बिल्कुल अलग तरह की जानकारी मिली। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें पाकिस्तान के कम से कम छह एयरफील्ड पर नुकसान का पता चला, जिनमें तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैंगर, दो रनवे और पाकिस्तान वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो मोबाइल इमारतें शामिल थीं।

तस्वीरों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसी जगहों पर नुकसान दिखाई दिया। भोलारी में, एनालिस्ट्स ने एयरक्राफ्ट हैंगर में एक बड़ा छेद देखा। शाहबाज में एक और बड़े हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था, जबकि मुशफ और शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे पर गड्ढे दिखाई दिए।

बता दें कि जब मिलिट्री को होने वाला नुकसान सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित न रहकर असलियत में सामने आता है, तो वह कुछ ऐसा ही दिखता है।

S-400 वाला दावा पहले ही खारिज किया जा चुका है

PAF के वीडियो में फिर से वही पुराना दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए थे। यह दावा नया नहीं है।

मई 2025 के टकराव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 के नष्ट होने या उसे नुकसान पहुंचाने की खबरों को बेबुनियाद बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान S-400 सिस्टम और भारतीय एयरफील्ड से जुड़े दावों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चला रहा है।

असल में, कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के अचानक दौरे के दौरान अपनी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े थे। मई 2025 में जारी इन तस्वीरों को पाकिस्तान की सेना के उन दावों का जवाब माना गया था, जिनमें कहा गया था कि उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेस और रूस से मिले S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद के भारतीय सैन्य रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के दावे से मेल नहीं खाते। मार्च 2026 में, भारत ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का रास्ता साफ कर दिया था। जबकि जून तक चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच चुकी थी।

यानी पाकिस्तान के नए एनिमेशन ने असल में उस दावे को ही लिया है जिस पर 2025 में ही विवाद था, और बस इस बार उसे कंप्यूटर से नया रूप दिया है।

8 विमानों के दावे की सच्चाई की जांच होनी चाहिए

वीडियो में दावा किया गया है कि भारत के 8 विमान नष्ट हो गए थे। ग्राफिक में खास तौर पर चार राफेल, एक Su-30MKI, MiG-29, Mirage-2000 और Heron UAV का जिक्र किया गया है।

हालांकि, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने माना कि शुरुआत में भारत को हवाई हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के बहुत बड़े दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने पाकिस्तानी आंकड़ों को “पूरी तरह गलत” बताया और कहा कि शुरुआती नुकसान के बाद भारत ने आगे हमले करने से पहले अपनी रणनीति बदल ली थी।

आखिरकार, इस पूरे मामले में चल रही प्रचार की जंग ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया।

अगस्त 2025 में, भारतीय एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट और एक अन्य मिलिट्री एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत के S-400 सिस्टम से गिराए गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने युद्ध के मैदान को लेकर दावे किए हैं, लेकिन कुछ वास्तविक नुकसान को स्वीकार करने और एक एनिमेटेड स्कोरबोर्ड दिखाने में बहुत बड़ा अंतर है—जैसे कि नक्शे पर दिखाए गए हर धमाके की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई हो।

पाकिस्तान के अपने एयर बेस एक अजीब तुलना पेश करते हैं

शायद PAF के हालिया वीडियो के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि मई 2025 की असली सैटेलाइट तस्वीरें एक ऐसी कहानी बताती हैं जिसे पाकिस्तान सिर्फ एनिमेशन से नहीं बदल सकता।

पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत के रक्षा मंत्रालय ने 10 मई को कहा कि उसकी सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, पर हमले किए। स्टिमसन सेंटर के हमले के बाद के आकलन में पाया गया कि भारतीय हमलों ने कम से कम 11 जगहों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, रफीकी, रहीम यार खान, सुक्कुर, सरगोधा, भोलाड़ी और जैकोबाबाद शामिल हैं। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से इन एयर बेस में से ज्यादातर पर हमलों की पुष्टि हुई।

वाशिंगटन पोस्ट ने इन हमलों को 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारत का सबसे बड़े हवाई हमला बताया। पाकिस्तान ने खुद माना कि सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और हमले के बाद वायु सेना के 6 जवान मारे गए।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि जमीन पर हुए नुकसान का मतलब सिर्फ कुछ मामूली निशान नहीं थे। हैंगर टूट गए थे, रनवे पर बड़े गड्ढे हो गए थे और मिलिट्री की इमारतों पर हमले हुए थे।

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि मिलिट्री का गंभीर आकलन कैसा होता है। इसके लिए यह दावा करने की जरूरत नहीं है कि पूरी एयर फोर्स ही गायब हो गई। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि असल में किन चीजों पर हमला हुआ।

एयर बेस से लेकर नेशनल ग्रिड तक

PAF का वीडियो सिर्फ एयरक्राफ्ट और एयर बेस तक ही सीमित नहीं है। इसके ग्राफिक्स में भारत के नेशनल ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और मिलिट्री सैटेलाइट क्षमताओं को बाधित करने का भी दावा किया गया है। एक हिस्से में भारत का नक्शा दिखाया गया है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद होते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़े पैमाने पर साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैंपेन को दिखाया गया है।

यहां भी, ज्यादातर काम एनिमेशन के जरिए ही दिखाया गया है।

इन बड़े दावों के साथ कोई ऐसी सैटेलाइट इमेज या स्वतंत्र रूप से वेरिफाई किया जा सकने वाला ठोस सबूत नहीं है जिसकी तुलना की जा सके। समस्या तब और साफ हो जाती है जब वीडियो किसी खास जगह पर हुए खास नुकसान के बजाय, पूरे देश में चलाए गए कथित कैंपेन को कंप्यूटर से बनाए गए धमाकों की एक सीरीज के तौर पर दिखाता है।

जाहिर है, युद्ध में साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऐसी रुकावटें शामिल हो सकती हैं जिनकी तस्वीरें अंतरिक्ष से नहीं ली जा सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनिमेशन इस बात का सबूत बन जाता है कि वे ऑपरेशन असल में हुए थे।

और फिर बारी आती है संसद की

वीडियो में संसद परिसर समेत भारत के अहम राष्ट्रीय ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं। यह टीवी पर तो रोमांचक लग सकता है, लेकिन सबूत के तौर पर इसकी अहमियत बहुत कम है।

कंप्यूटर से बनाए गए एक सीन में मिसाइलों को एक जानी-पहचानी जगह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसे बनाने वाले दर्शकों को क्या दिखाना चाहते थे। इससे यह साबित नहीं होता कि असल में उस जगह पर हमला हुआ था।

यही बात उन दृश्यों पर भी लागू होती है जिनमें भारत में धमाके, आसमान से गिरते विमान और सेना के ढांचे को ढहते हुए दिखाया गया है। ये दृश्य भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि के बिना सबूत के तौर पर इनकी कोई खास अहमियत नहीं है।

आसिम मुनीर की जीत की कहानी को एक और ग्राफिक्स पैकेज मिला

PAF की इस प्रस्तुति का एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है। मई 2025 के संघर्ष के कुछ ही समय बाद, पाकिस्तान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया। सरकार ने उनकी “रणनीतिक सूझबूझ और साहसी नेतृत्व” का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की और दुश्मन को हराया।

तब से, इस संघर्ष के बारे में सेना का नजरिया पाकिस्तान के आधिकारिक संदेश का मुख्य हिस्सा बन गया है।

PAF का ताजा वीडियो इसी नजरिए के साथ पूरी तरह मेल खाता है। भले ही युद्ध के मैदान का घटनाक्रम जटिल रहा हो, लेकिन एनिमेशन बिल्कुल सरल है। यह एक साफ-सुथरा स्कोरबोर्ड दिखाता है: भारतीय विमान नष्ट, भारतीय बेस पर हमले, S-400 सिस्टम खत्म, बुनियादी ढांचा बर्बाद और पाकिस्तान की जीत।

हकीकत इससे काफी अलग और जटिल है।

उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि भारत को कुछ विमानों का नुकसान हुआ था, खासकर संघर्ष के शुरुआती दौर में। लेकिन यह भी सामने आया है कि इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक और दूर तक पहुंचने वाले हमले किए। सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हुए नुकसान को साफ देखा गया।

और यही वजह है कि PAF का यह नया वीडियो काफी कुछ बताता है।

दावा जितना बड़ा और शानदार होता जाता है, सबूतों की कमी उतनी ही ज्यादा साफ दिखाई देती है।

जब युद्ध का मैदान वीडियो-एडिटिंग का मुकाबला बन जाए

मई 2025 के टकराव में दोनों पक्षों को असल सैन्य सफलताएं और नाकामियां मिलीं। साथ ही, अलग-अलग दावे, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और गलत सूचनाओं की बाढ़ भी देखने को मिली।

लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की वायु सेना एनिमेशन के जरिए इस बहस को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

यहां एक साफ विरोधाभास है।

PAF के वीडियो में दावा किया गया है कि उसने भारत के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 सिस्टम नष्ट किए, 8 विमान तबाह किए, भारत के ग्रिड को बेकार कर दिया और देश के अहम ठिकानों पर हमले किए। फिर भी, जब सवाल यह उठता है कि “सबूत कहां है?”, तो उसका जवाब ज्यादातर उस वीडियो के अंदर ही मिलता है।

भारत को हुए सैन्य नुकसान की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इसके लिए दुर्घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरे उपलब्ध सबूत देखे जा सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के एयरबेस को हुए नुकसान की जांच कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की जा सकती है। भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना ने भी अपने सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की बात स्वीकार की थी।

ऐसे में PAF के सामने एक मुश्किल स्थिति है। या तो वह अपने एनीमेशन में और धमाके जोड़ता रहे, या फिर उन दावों के समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें पेश करे।

Abhinandan Varthaman: पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराने वाले एयरफोर्स के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने IAF छोड़ी, अब गोवा के इस एयरलाइन से जुड़े

Abhinandan Varthaman: पाकिस्तानी जेट गिराने वाले इंडियन एयर फोर्स (IAF) के फाइटर पायलट और पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना से समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया है। अब वह गोवा के एक प्राइवेट एयरलाइन में कमर्शियल पायलट के तौर पर अपना नया एविएशन करियर शुरू कर रहे हैं। वर्धमान को फरवरी 2019 में पाकिस्तान एयरफोर्स के फाइटर जेट के साथ हवाई लड़ाई में अपना विमान गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था।

करीब दो दशक इंडियन एयरफोर्स में सेवा देने के बाद यह अभिनंदन के करियर की नई पारी है। अभिनंदन 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तानी फाइटर जेट F-16 गिराने के बाद भारत समेत दुनियाभर में सुर्खियों में आए थे। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अभिनंदन अब पायलट के तौर पर रीजनल एयरलाइन FLY91 से जुड़ गए हैं।

कॉमर्शियल यात्री विमान के पायलट होंगे

सूत्रों ने बताया कि यहां वे कॉमर्शियल यात्री विमान के पायलट होंगे। सूत्रों ने बताया कि ‘वीर चक्र’ से सम्मानित वर्तमान अगस्त में गोवा की एयरलाइन FLY91 में पायलट के तौर पर शामिल हुए। 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के बाद वर्धमान चर्चा में आए थे। उस हवाई लड़ाई के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के एक फाइटर जेट को मार गिराया था। इसके बाद उन्हें तीन दिनों तक पाकिस्तान में हिरासत में रखा गया था।

‘वीर चक्र’ से सम्मानित

उन्हें 2021 में ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था, जो युद्ध के समय वीरता के लिए भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। इस सम्मान के लिए जारी प्रशस्ति पत्र में हवाई संघर्ष के दौरान उनके “कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण” को सराहा गया था। FLY91 के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने पीटीआई से कहा कि किसी कर्मचारी की निजी जानकारी एक निजी मामला है। एयरलाइन में वर्तमान की भूमिका के बारे में और जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकी। गोवा स्थित FLY91 ने मार्च 2024 में अपना कामकाज शुरू किया था। इसके बेड़े में अभी छह ATR 72-600 विमान हैं। यह दो बेस गोवा और हैदराबाद से अपनी सेवाएं देती है।

अभिनंदन वर्धमान के बारे में बड़ी बातें

  • फरवरी 2019 में पुलवामा में आत्मघाती बम धमाके में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जवानों की मौत के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ एयर स्ट्राइक की थी। नई दिल्ली ने कहा कि स्ट्राइक में बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ग्रुप के ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया गया था।
  • अगले दिन पाकिस्तान एयरफोर्स की जवाबी कार्रवाई से दोनों परमाणु बम से लैस दो पड़ोसियों के बीच युद्ध का डर पैदा हो गया था। इस टकराव का सबसे चर्चित चेहरा विंग कमांडर वर्धमान थे। उनके MiG-21 फाइटर जेट को गिराए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा उन्हें पकड़ लिए जाने से दशकों में दोनों पड़ोसियों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संकट पैदा हो गया था।
  • 27 फरवरी 2019 को अपना जेट हिट होने से पहले वर्धमान  ने पाकिस्तान के F-16 फ़ाइटर जेट को मार गिराया था। उस समय विंग कमांडर रहे वर्धमान को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। 1 मार्च की रात को पाकिस्तान ने उन्हें रिहा कर दिया था।
  • हवाई लड़ाई के दौरान अपने मिग-21 बाइसन से बाहर निकलते समय वर्धमान को चोटें आई थीं। बाद में उसी साल डॉगफाइट के दौरान “असाधारण कर्तव्य-निष्ठा” दिखाने के लिए उन्हें भारत के युद्ध-समय के तीसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि वर्धमान ने समय से पहले रिटायरमेंट क्यों लिया।

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आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

अमेरिका-रूस के बाद भारत की वायु सेना सबसे ताकतवर, IAF ने 5वीं बार चीन को छोड़ा पीछे

WDMMA Global Airpower Ranking: रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने ‘वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ़ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ़्ट’ (WDMMA) की 2026 की ग्लोबल एयरपावर रैंकिंग में एक बार फिर तीसरा स्थान हासिल किया है। 2022 के बाद से यह 5वीं बार है जब IAF ने चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स’ (PLAAF) से आगे अपनी जगह बनाए रखी है।

ताजा रैंकिंग में IAF सिर्फ अमेरिका और रूस से पीछे है। WDMMA के आकलन में यह छठी बार है जब IAF को US एयर फोर्स, US नेवी, रूसी एयर फोर्स, US आर्मी और US मरीन कॉर्प्स के बाद रखा गया है।

बता दें कि WDMMA कुल 103 देशों की 129 एयर सेवाओं का मूल्यांकन करता है और 48,000 से ज्यादा विमानों को अपनी रैंकिंग में शामिल करता है। इसकी ‘ट्रू वैल्यू रेटिंग’ (TVR) प्रणाली के जरिए किसी भी वायु सेना की ताकत का आकलन किया जाता है। इसमें बेड़े (Fleet) का आकार, विमानों की क्षमता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कुल सैन्य क्षमता को देखा जाता है।

इस रैंकिंग में सिर्फ फाइटर जेट की संख्या के बजाय फ्लीट मिक्स और खास एसेट्स – जैसे एरियल रिफ्यूलर, स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट, क्लोज-एयर-सपोर्ट प्लेटफॉर्म, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ट्रेनर – को ज्यादा अहमियत दी जाती है। इसमें एयर फोर्स के ऑर्डर बुक और देश में ही एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, IAF अभी 1,716 एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है, जिनमें सात तरह के 542 फाइटर जेट शामिल हैं। इस संख्या में MiG-21 भी शामिल है, भले ही इसे सितंबर 2025 में रिटायर किया जाना है।

इस बेड़े में 498 हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, जिनमें 222 Mi-17 और 111 HAL ध्रुव और रुद्र हेलीकॉप्टर हैं। इसके अलावा, 282 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 374 ट्रेनर (जिनमें से 325 खास तौर पर ट्रेनिंग के लिए हैं) और 20 स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट (जैसे एयरबोर्न अर्ली-वार्निंग, इंटेलिजेंस और एरियल रीफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म) भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में IAF की तुलना यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स (USAF) से भी की गई है। USAF के बेड़े में फाइटर जेट्स की हिस्सेदारी 32% है, और अगर बॉम्बर और क्लोज-एयर-सपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी इसमें शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 41% तक पहुंच जाता है। वहीं, अमेरिकी वायु सेना में हेलीकॉप्टरों की हिस्सेदारी करीब 4%, ट्रांसपोर्ट विमानों की 14% और स्पेशल मिशन विमानों की हिस्सेदारी लगभग 14% है।

हालांकि, अच्छी रैंकिंग के बावजूद, रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना की कुछ कमियों का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल IAF के पास अभी 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि मंजूर की गई संख्या 42 है। हर स्क्वाड्रन में 18 एयरक्राफ्ट के हिसाब से, कुल 750 फाइटर एयरक्राफ्ट का लक्ष्य रखा गया है।

IAF को अभी हवा में ईंधन भरने वाले विमान (Mid-air Refuellers), एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और ISTAR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन और टोही) विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इन कमियों को दूर करने के लिए भारतीय वायु सेना ने 180 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है। इसमें 83 और 97 विमानों की दो खेप शामिल हैं। पहले विमानों को अंतिम सिस्टम इंटीग्रेशन के बाद वायु सेना में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, 114 राफेल फाइटर जेट्स की प्रस्तावित खरीद से बेड़े में 294 एयरक्राफ्ट जुड़ सकते हैं, हालांकि 2030 के दशक में 200 से ज्यादा जगुआर, मिराज 2000 और MiG-29 एयरक्राफ्ट रिटायर होने वाले हैं। इसके साथ ही नए एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम, टैंकर विमान और ISTAR प्लेटफॉर्म भी बेड़े में शामिल किए जा रहे हैं।

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IAF Success Story: छोटे शहर की बेटी ने अकेले MiG-21 उड़ाकर रचा इतिहास, बनीं भारत की पहली महिला फाइटर पायलट

एक समय था जब भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनना महिलाओं के लिए सिर्फ एक सपना माना जाता था। काबिलियत होने के बावजूद लड़कियों के लिए लड़ाकू विमान उड़ाने का रास्ता बंद था। लेकिन मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे से निकली अवनी चतुर्वेदी ने इस सोच को बदल दिया। उन्होंने अकेले MiG-21 बाइसन फाइटर जेट उड़ाकर इतिहास रच दिया और भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने बिना किसी ट्रेनर के फाइटर विमान की कमान संभाली। उनकी कहानी आज लाखों बेटियों के लिए हौसले और मेहनत की मिसाल बन चुकी है।

भाई की वर्दी से मिली देश सेवा की प्रेरणा

अवनी चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले में हुआ और उनका बचपन देवलोंड कस्बे में बीता। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में थे। भाई को वर्दी में देखकर अवनी के मन में भी देश के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई।

हालांकि उन्होंने सेना में जाने की बजाय आसमान को अपना रास्ता चुना। उनका सपना था कि वह भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनकर देश की सेवा करें।

जब सपना मुश्किल था, लेकिन हौसला मजबूत था

जिस समय अवनी बड़ी हो रही थीं, उस दौर में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम महिलाओं के लिए बंद थी। यानी महिलाएं चाहकर भी लड़ाकू विमान उड़ाने का मौका नहीं पा सकती थीं।

लेकिन अवनी ने इस बाधा को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया।

फ्लाइंग क्लब ने बदली जिंदगी की दिशा

अवनी ने राजस्थान की बनस्थली विद्यापीठ से बीटेक की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान वह फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं और पहली बार विमान उड़ाने का अनुभव हासिल किया।

धीरे-धीरे उड़ान भरना उनका जुनून बन गया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) की तैयारी की और भारतीय वायुसेना में शामिल होने का रास्ता बनाया।

2015 का फैसला, जिसने खोल दिए बंद दरवाजे

साल 2015 भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। सरकार ने महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम खोलने का फैसला किया।

इसी ऐतिहासिक पहल के तहत अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह का चयन हुआ। ये तीनों भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।

जून 2016 में तीनों को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला और एक नए दौर की शुरुआत हुई।

MiG-21 उड़ाकर रचा ऐसा रिकॉर्ड, जो हमेशा याद रहेगा

फाइटर पायलट बनना तो बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन असली परीक्षा अकेले उड़ान भरना था। क्योंकि सोलो फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में कोई ट्रेनर मौजूद नहीं होता।

19 फरवरी 2018 को जामनगर एयरफोर्स स्टेशन से अवनी चतुर्वेदी ने MiG-21 बाइसन को अकेले उड़ाया। करीब 30 मिनट की इस ऐतिहासिक उड़ान के साथ वह भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने अकेले फाइटर जेट उड़ाया।

यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि भारतीय विमानन इतिहास में बदलाव का प्रतीक था।

“विमान को फर्क नहीं पड़ता पायलट पुरुष है या महिला”

अवनी की सोच उनकी उपलब्धियों जितनी ही प्रेरणादायक है। एक बार उनसे महिला फाइटर पायलट होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विमान को इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसे उड़ाने वाला पुरुष है या महिला, उसे सिर्फ यह पता होता है कि उसे कौन सही तरीके से उड़ा सकता है।

उनकी यह सोच लैंगिक समानता का मजबूत संदेश देती है।

भारत की बेटी ने विदेशों में भी लहराया परचम

अवनी ने अपनी पहली ऐतिहासिक उड़ान के बाद भी कई उपलब्धियां हासिल कीं। साल 2023 में वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं, जिन्होंने जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।

इस उपलब्धि ने दिखाया कि भारतीय महिला पायलट अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।

नारी शक्ति पुरस्कार से हुआ सम्मान

अवनी चतुर्वेदी के योगदान को देखते हुए साल 2020 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश में महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देने के लिए दिया जाता है।

एक उड़ान जिसने बदल दी हजारों बेटियों की सोच

अवनी चतुर्वेदी की कहानी सिर्फ एक फाइटर जेट उड़ाने की कहानी नहीं है। यह उन सीमाओं को तोड़ने की कहानी है, जो कभी महिलाओं के रास्ते में खड़ी थीं।

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