AFCAT 2 Result 2026 Out: एफकैट 2 लिखित परीक्षा का रिजल्ट हुआ जारी, जानें आधिकारिक वेबसाइट पर कैसे चेक करें अपना रोल नंबर

AFCAT 2 Result 2026 Out: भारतीय वायु सेना (IAF) ने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 2 2026 लिखित परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। एफकैट 2 लिखित परीक्षा में शामिल सभी कैंडिडेट अब एफकैट पोर्टल, afcat.edcil.co.in पर लॉग इन करके अपना रिजल्ट देख और डाउनलोड कर सकते हैं।

रिजल्ट का पीडीएफ देखने के लिए, उम्मीदवारों को अपना यूजर आईडी और पासवर्ड डालना होगा। रिजल्ट के साथ, एफकैट 2026 का कट-ऑफ भी जारी कर दिया गया है। कट-ऑफ कैटेगरी के हिसाब से जारी नहीं किया गया है, बल्कि यह एंट्री ब्रांच के आधार पर जारी किया गया है।

बता दें, एफकैट का कट-ऑफ कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें परीक्षा में शामिल होने वाले कैंडिडेट की संख्या, पेपर में कितना मुश्किल था और कैंडिडेट की परफॉर्मेंस शामिल है। एफकैट 2 लिखित परीक्षा 8 अगस्त, 2026 को फ्लाइंग ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल) ब्रांच में भर्ती के लिए आयोजित की गई थी।

एफकैट 2 रिजल्ट 2026: डाउनलोड करने के स्टेप्स

कैंडिडेट्स एफकैट 2 रिजल्ट पीडीएफ चेक और डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं।

  • ऑफिशियल वेबसाइट: afcat.edcil.co.in पर जाएं
  • होमपेज के टॉप पर मौजूद ‘कैंडिडेट लॉगिन’ ऑप्शन पर क्लिक करें।
  • ‘AFCAT 02/2026’ लिंक चुनें।
  • स्क्रीन पर एक नई रिजल्ट लॉगिन विंडो दिखाई देगी।
  • दिए गए फील्ड में जरूरी क्रेडेंशियल्स डालें।
  • एफकैट 2 रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें।
  • रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • रिजल्ट डाउनलोड करें और इसे भविष्य के लिए सेव कर लें।

एफकैट 2 रिजल्ट 2026: आगे क्या है?

एफकैट 2 लिखित परीक्षा में चयनित उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के अगले चरण – एयर फोर्स सिलेक्शन बोर्ड (AFSB) इंटरव्यू में जाएंगे। इसके बाद उम्मीदवारों का चिकित्स परीक्षण किया जाएगा। ये सभी चरण पूरे होने के बाद, फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

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IAF Success Story: छोटे शहर की बेटी ने अकेले MiG-21 उड़ाकर रचा इतिहास, बनीं भारत की पहली महिला फाइटर पायलट

एक समय था जब भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनना महिलाओं के लिए सिर्फ एक सपना माना जाता था। काबिलियत होने के बावजूद लड़कियों के लिए लड़ाकू विमान उड़ाने का रास्ता बंद था। लेकिन मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे से निकली अवनी चतुर्वेदी ने इस सोच को बदल दिया। उन्होंने अकेले MiG-21 बाइसन फाइटर जेट उड़ाकर इतिहास रच दिया और भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने बिना किसी ट्रेनर के फाइटर विमान की कमान संभाली। उनकी कहानी आज लाखों बेटियों के लिए हौसले और मेहनत की मिसाल बन चुकी है।

भाई की वर्दी से मिली देश सेवा की प्रेरणा

अवनी चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले में हुआ और उनका बचपन देवलोंड कस्बे में बीता। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में थे। भाई को वर्दी में देखकर अवनी के मन में भी देश के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई।

हालांकि उन्होंने सेना में जाने की बजाय आसमान को अपना रास्ता चुना। उनका सपना था कि वह भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनकर देश की सेवा करें।

जब सपना मुश्किल था, लेकिन हौसला मजबूत था

जिस समय अवनी बड़ी हो रही थीं, उस दौर में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम महिलाओं के लिए बंद थी। यानी महिलाएं चाहकर भी लड़ाकू विमान उड़ाने का मौका नहीं पा सकती थीं।

लेकिन अवनी ने इस बाधा को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया।

फ्लाइंग क्लब ने बदली जिंदगी की दिशा

अवनी ने राजस्थान की बनस्थली विद्यापीठ से बीटेक की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान वह फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं और पहली बार विमान उड़ाने का अनुभव हासिल किया।

धीरे-धीरे उड़ान भरना उनका जुनून बन गया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) की तैयारी की और भारतीय वायुसेना में शामिल होने का रास्ता बनाया।

2015 का फैसला, जिसने खोल दिए बंद दरवाजे

साल 2015 भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। सरकार ने महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम खोलने का फैसला किया।

इसी ऐतिहासिक पहल के तहत अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह का चयन हुआ। ये तीनों भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।

जून 2016 में तीनों को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला और एक नए दौर की शुरुआत हुई।

MiG-21 उड़ाकर रचा ऐसा रिकॉर्ड, जो हमेशा याद रहेगा

फाइटर पायलट बनना तो बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन असली परीक्षा अकेले उड़ान भरना था। क्योंकि सोलो फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में कोई ट्रेनर मौजूद नहीं होता।

19 फरवरी 2018 को जामनगर एयरफोर्स स्टेशन से अवनी चतुर्वेदी ने MiG-21 बाइसन को अकेले उड़ाया। करीब 30 मिनट की इस ऐतिहासिक उड़ान के साथ वह भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने अकेले फाइटर जेट उड़ाया।

यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि भारतीय विमानन इतिहास में बदलाव का प्रतीक था।

“विमान को फर्क नहीं पड़ता पायलट पुरुष है या महिला”

अवनी की सोच उनकी उपलब्धियों जितनी ही प्रेरणादायक है। एक बार उनसे महिला फाइटर पायलट होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विमान को इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसे उड़ाने वाला पुरुष है या महिला, उसे सिर्फ यह पता होता है कि उसे कौन सही तरीके से उड़ा सकता है।

उनकी यह सोच लैंगिक समानता का मजबूत संदेश देती है।

भारत की बेटी ने विदेशों में भी लहराया परचम

अवनी ने अपनी पहली ऐतिहासिक उड़ान के बाद भी कई उपलब्धियां हासिल कीं। साल 2023 में वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं, जिन्होंने जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।

इस उपलब्धि ने दिखाया कि भारतीय महिला पायलट अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।

नारी शक्ति पुरस्कार से हुआ सम्मान

अवनी चतुर्वेदी के योगदान को देखते हुए साल 2020 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश में महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देने के लिए दिया जाता है।

एक उड़ान जिसने बदल दी हजारों बेटियों की सोच

अवनी चतुर्वेदी की कहानी सिर्फ एक फाइटर जेट उड़ाने की कहानी नहीं है। यह उन सीमाओं को तोड़ने की कहानी है, जो कभी महिलाओं के रास्ते में खड़ी थीं।

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