पाकिस्तान का नया AI ‘वॉर वीडियो’ वायरल, 32 एयरबेस और 8 विमान तबाह करने का दावा, सबूत नदारद

India-Pakistan Conflict: एयर फोर्स डे के मौके पर, पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस ने एक शानदार और ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया, जिसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का एक असाधारण रूप दिखाया गया है।

“फिजाओं के पासबान” नाम के इस वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए, भारत के आठ विमान गिराए और भारत के नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित किया। एनिमेशन में भारतीय संसद और INS विक्रांत समेत भारत के प्रमुख ठिकानों पर हमले भी दिखाए गए हैं।

वीडियो के ग्राफिक्स से इस फैंटेसी (काल्पनिक कहानी) का दायरा काफी साफ हो जाता है। एक ग्राफिक में दावा किया गया है कि “IAF के 32 बेस पर हमला हुआ”, जबकि दूसरे में दावा है कि चार राफेल, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक मिराज-2000 और एक हेरॉन UAV नष्ट कर दिए गए। अन्य विजुअल में S-400 सिस्टम पर हमले, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बर्बाद होने और भारतीय शहरों की ओर मिसाइलें जाते हुए दिखाई गई हैं।

पाकिस्तान के लिए समस्या काफी सीधी-सी है: वीडियो में बहुत सारे धमाके, मैप और कंप्यूटर से बनाई गई तबाही तो है, लेकिन असल तबाही का बहुत कम सबूत है।

भारत के 32 एयरबेस पर हमला? आखिर इसका सबूत कहां है?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमला किया। अगर यह सच होता, तो यह एक बहुत बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। इसे छिपाना भी बहुत मुश्किल होता।

फिर भी, PAF के वीडियो में इस दावे को साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, हमले से पहले और बाद की तस्वीरें, रनवे को हुए पहचाने जा सकने वाले नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें नहीं दिखतीं जिनकी पुष्टि की जा सके। सीमा के दूसरी तरफ से मिले सबूतों के साथ इसका अंतर साफ दिखता है।

जब मई 2025 की लड़ाई के आखिरी दौर में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो सैटेलाइट तस्वीरों से बिल्कुल अलग तरह की जानकारी मिली। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें पाकिस्तान के कम से कम छह एयरफील्ड पर नुकसान का पता चला, जिनमें तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैंगर, दो रनवे और पाकिस्तान वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो मोबाइल इमारतें शामिल थीं।

तस्वीरों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसी जगहों पर नुकसान दिखाई दिया। भोलारी में, एनालिस्ट्स ने एयरक्राफ्ट हैंगर में एक बड़ा छेद देखा। शाहबाज में एक और बड़े हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था, जबकि मुशफ और शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे पर गड्ढे दिखाई दिए।

बता दें कि जब मिलिट्री को होने वाला नुकसान सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित न रहकर असलियत में सामने आता है, तो वह कुछ ऐसा ही दिखता है।

S-400 वाला दावा पहले ही खारिज किया जा चुका है

PAF के वीडियो में फिर से वही पुराना दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए थे। यह दावा नया नहीं है।

मई 2025 के टकराव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 के नष्ट होने या उसे नुकसान पहुंचाने की खबरों को बेबुनियाद बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान S-400 सिस्टम और भारतीय एयरफील्ड से जुड़े दावों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चला रहा है।

असल में, कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के अचानक दौरे के दौरान अपनी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े थे। मई 2025 में जारी इन तस्वीरों को पाकिस्तान की सेना के उन दावों का जवाब माना गया था, जिनमें कहा गया था कि उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेस और रूस से मिले S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद के भारतीय सैन्य रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के दावे से मेल नहीं खाते। मार्च 2026 में, भारत ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का रास्ता साफ कर दिया था। जबकि जून तक चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच चुकी थी।

यानी पाकिस्तान के नए एनिमेशन ने असल में उस दावे को ही लिया है जिस पर 2025 में ही विवाद था, और बस इस बार उसे कंप्यूटर से नया रूप दिया है।

8 विमानों के दावे की सच्चाई की जांच होनी चाहिए

वीडियो में दावा किया गया है कि भारत के 8 विमान नष्ट हो गए थे। ग्राफिक में खास तौर पर चार राफेल, एक Su-30MKI, MiG-29, Mirage-2000 और Heron UAV का जिक्र किया गया है।

हालांकि, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने माना कि शुरुआत में भारत को हवाई हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के बहुत बड़े दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने पाकिस्तानी आंकड़ों को “पूरी तरह गलत” बताया और कहा कि शुरुआती नुकसान के बाद भारत ने आगे हमले करने से पहले अपनी रणनीति बदल ली थी।

आखिरकार, इस पूरे मामले में चल रही प्रचार की जंग ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया।

अगस्त 2025 में, भारतीय एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट और एक अन्य मिलिट्री एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत के S-400 सिस्टम से गिराए गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने युद्ध के मैदान को लेकर दावे किए हैं, लेकिन कुछ वास्तविक नुकसान को स्वीकार करने और एक एनिमेटेड स्कोरबोर्ड दिखाने में बहुत बड़ा अंतर है—जैसे कि नक्शे पर दिखाए गए हर धमाके की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई हो।

पाकिस्तान के अपने एयर बेस एक अजीब तुलना पेश करते हैं

शायद PAF के हालिया वीडियो के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि मई 2025 की असली सैटेलाइट तस्वीरें एक ऐसी कहानी बताती हैं जिसे पाकिस्तान सिर्फ एनिमेशन से नहीं बदल सकता।

पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत के रक्षा मंत्रालय ने 10 मई को कहा कि उसकी सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, पर हमले किए। स्टिमसन सेंटर के हमले के बाद के आकलन में पाया गया कि भारतीय हमलों ने कम से कम 11 जगहों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, रफीकी, रहीम यार खान, सुक्कुर, सरगोधा, भोलाड़ी और जैकोबाबाद शामिल हैं। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से इन एयर बेस में से ज्यादातर पर हमलों की पुष्टि हुई।

वाशिंगटन पोस्ट ने इन हमलों को 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारत का सबसे बड़े हवाई हमला बताया। पाकिस्तान ने खुद माना कि सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और हमले के बाद वायु सेना के 6 जवान मारे गए।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि जमीन पर हुए नुकसान का मतलब सिर्फ कुछ मामूली निशान नहीं थे। हैंगर टूट गए थे, रनवे पर बड़े गड्ढे हो गए थे और मिलिट्री की इमारतों पर हमले हुए थे।

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि मिलिट्री का गंभीर आकलन कैसा होता है। इसके लिए यह दावा करने की जरूरत नहीं है कि पूरी एयर फोर्स ही गायब हो गई। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि असल में किन चीजों पर हमला हुआ।

एयर बेस से लेकर नेशनल ग्रिड तक

PAF का वीडियो सिर्फ एयरक्राफ्ट और एयर बेस तक ही सीमित नहीं है। इसके ग्राफिक्स में भारत के नेशनल ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और मिलिट्री सैटेलाइट क्षमताओं को बाधित करने का भी दावा किया गया है। एक हिस्से में भारत का नक्शा दिखाया गया है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद होते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़े पैमाने पर साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैंपेन को दिखाया गया है।

यहां भी, ज्यादातर काम एनिमेशन के जरिए ही दिखाया गया है।

इन बड़े दावों के साथ कोई ऐसी सैटेलाइट इमेज या स्वतंत्र रूप से वेरिफाई किया जा सकने वाला ठोस सबूत नहीं है जिसकी तुलना की जा सके। समस्या तब और साफ हो जाती है जब वीडियो किसी खास जगह पर हुए खास नुकसान के बजाय, पूरे देश में चलाए गए कथित कैंपेन को कंप्यूटर से बनाए गए धमाकों की एक सीरीज के तौर पर दिखाता है।

जाहिर है, युद्ध में साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऐसी रुकावटें शामिल हो सकती हैं जिनकी तस्वीरें अंतरिक्ष से नहीं ली जा सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनिमेशन इस बात का सबूत बन जाता है कि वे ऑपरेशन असल में हुए थे।

और फिर बारी आती है संसद की

वीडियो में संसद परिसर समेत भारत के अहम राष्ट्रीय ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं। यह टीवी पर तो रोमांचक लग सकता है, लेकिन सबूत के तौर पर इसकी अहमियत बहुत कम है।

कंप्यूटर से बनाए गए एक सीन में मिसाइलों को एक जानी-पहचानी जगह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसे बनाने वाले दर्शकों को क्या दिखाना चाहते थे। इससे यह साबित नहीं होता कि असल में उस जगह पर हमला हुआ था।

यही बात उन दृश्यों पर भी लागू होती है जिनमें भारत में धमाके, आसमान से गिरते विमान और सेना के ढांचे को ढहते हुए दिखाया गया है। ये दृश्य भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि के बिना सबूत के तौर पर इनकी कोई खास अहमियत नहीं है।

आसिम मुनीर की जीत की कहानी को एक और ग्राफिक्स पैकेज मिला

PAF की इस प्रस्तुति का एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है। मई 2025 के संघर्ष के कुछ ही समय बाद, पाकिस्तान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया। सरकार ने उनकी “रणनीतिक सूझबूझ और साहसी नेतृत्व” का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की और दुश्मन को हराया।

तब से, इस संघर्ष के बारे में सेना का नजरिया पाकिस्तान के आधिकारिक संदेश का मुख्य हिस्सा बन गया है।

PAF का ताजा वीडियो इसी नजरिए के साथ पूरी तरह मेल खाता है। भले ही युद्ध के मैदान का घटनाक्रम जटिल रहा हो, लेकिन एनिमेशन बिल्कुल सरल है। यह एक साफ-सुथरा स्कोरबोर्ड दिखाता है: भारतीय विमान नष्ट, भारतीय बेस पर हमले, S-400 सिस्टम खत्म, बुनियादी ढांचा बर्बाद और पाकिस्तान की जीत।

हकीकत इससे काफी अलग और जटिल है।

उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि भारत को कुछ विमानों का नुकसान हुआ था, खासकर संघर्ष के शुरुआती दौर में। लेकिन यह भी सामने आया है कि इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक और दूर तक पहुंचने वाले हमले किए। सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हुए नुकसान को साफ देखा गया।

और यही वजह है कि PAF का यह नया वीडियो काफी कुछ बताता है।

दावा जितना बड़ा और शानदार होता जाता है, सबूतों की कमी उतनी ही ज्यादा साफ दिखाई देती है।

जब युद्ध का मैदान वीडियो-एडिटिंग का मुकाबला बन जाए

मई 2025 के टकराव में दोनों पक्षों को असल सैन्य सफलताएं और नाकामियां मिलीं। साथ ही, अलग-अलग दावे, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और गलत सूचनाओं की बाढ़ भी देखने को मिली।

लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की वायु सेना एनिमेशन के जरिए इस बहस को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

यहां एक साफ विरोधाभास है।

PAF के वीडियो में दावा किया गया है कि उसने भारत के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 सिस्टम नष्ट किए, 8 विमान तबाह किए, भारत के ग्रिड को बेकार कर दिया और देश के अहम ठिकानों पर हमले किए। फिर भी, जब सवाल यह उठता है कि “सबूत कहां है?”, तो उसका जवाब ज्यादातर उस वीडियो के अंदर ही मिलता है।

भारत को हुए सैन्य नुकसान की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इसके लिए दुर्घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरे उपलब्ध सबूत देखे जा सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के एयरबेस को हुए नुकसान की जांच कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की जा सकती है। भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना ने भी अपने सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की बात स्वीकार की थी।

ऐसे में PAF के सामने एक मुश्किल स्थिति है। या तो वह अपने एनीमेशन में और धमाके जोड़ता रहे, या फिर उन दावों के समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें पेश करे।

आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

अमेरिका-रूस के बाद भारत की वायु सेना सबसे ताकतवर, IAF ने 5वीं बार चीन को छोड़ा पीछे

WDMMA Global Airpower Ranking: रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने ‘वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ़ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ़्ट’ (WDMMA) की 2026 की ग्लोबल एयरपावर रैंकिंग में एक बार फिर तीसरा स्थान हासिल किया है। 2022 के बाद से यह 5वीं बार है जब IAF ने चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स’ (PLAAF) से आगे अपनी जगह बनाए रखी है।

ताजा रैंकिंग में IAF सिर्फ अमेरिका और रूस से पीछे है। WDMMA के आकलन में यह छठी बार है जब IAF को US एयर फोर्स, US नेवी, रूसी एयर फोर्स, US आर्मी और US मरीन कॉर्प्स के बाद रखा गया है।

बता दें कि WDMMA कुल 103 देशों की 129 एयर सेवाओं का मूल्यांकन करता है और 48,000 से ज्यादा विमानों को अपनी रैंकिंग में शामिल करता है। इसकी ‘ट्रू वैल्यू रेटिंग’ (TVR) प्रणाली के जरिए किसी भी वायु सेना की ताकत का आकलन किया जाता है। इसमें बेड़े (Fleet) का आकार, विमानों की क्षमता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कुल सैन्य क्षमता को देखा जाता है।

इस रैंकिंग में सिर्फ फाइटर जेट की संख्या के बजाय फ्लीट मिक्स और खास एसेट्स – जैसे एरियल रिफ्यूलर, स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट, क्लोज-एयर-सपोर्ट प्लेटफॉर्म, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ट्रेनर – को ज्यादा अहमियत दी जाती है। इसमें एयर फोर्स के ऑर्डर बुक और देश में ही एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, IAF अभी 1,716 एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है, जिनमें सात तरह के 542 फाइटर जेट शामिल हैं। इस संख्या में MiG-21 भी शामिल है, भले ही इसे सितंबर 2025 में रिटायर किया जाना है।

इस बेड़े में 498 हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, जिनमें 222 Mi-17 और 111 HAL ध्रुव और रुद्र हेलीकॉप्टर हैं। इसके अलावा, 282 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 374 ट्रेनर (जिनमें से 325 खास तौर पर ट्रेनिंग के लिए हैं) और 20 स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट (जैसे एयरबोर्न अर्ली-वार्निंग, इंटेलिजेंस और एरियल रीफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म) भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में IAF की तुलना यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स (USAF) से भी की गई है। USAF के बेड़े में फाइटर जेट्स की हिस्सेदारी 32% है, और अगर बॉम्बर और क्लोज-एयर-सपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी इसमें शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 41% तक पहुंच जाता है। वहीं, अमेरिकी वायु सेना में हेलीकॉप्टरों की हिस्सेदारी करीब 4%, ट्रांसपोर्ट विमानों की 14% और स्पेशल मिशन विमानों की हिस्सेदारी लगभग 14% है।

हालांकि, अच्छी रैंकिंग के बावजूद, रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना की कुछ कमियों का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल IAF के पास अभी 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि मंजूर की गई संख्या 42 है। हर स्क्वाड्रन में 18 एयरक्राफ्ट के हिसाब से, कुल 750 फाइटर एयरक्राफ्ट का लक्ष्य रखा गया है।

IAF को अभी हवा में ईंधन भरने वाले विमान (Mid-air Refuellers), एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और ISTAR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन और टोही) विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इन कमियों को दूर करने के लिए भारतीय वायु सेना ने 180 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है। इसमें 83 और 97 विमानों की दो खेप शामिल हैं। पहले विमानों को अंतिम सिस्टम इंटीग्रेशन के बाद वायु सेना में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, 114 राफेल फाइटर जेट्स की प्रस्तावित खरीद से बेड़े में 294 एयरक्राफ्ट जुड़ सकते हैं, हालांकि 2030 के दशक में 200 से ज्यादा जगुआर, मिराज 2000 और MiG-29 एयरक्राफ्ट रिटायर होने वाले हैं। इसके साथ ही नए एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम, टैंकर विमान और ISTAR प्लेटफॉर्म भी बेड़े में शामिल किए जा रहे हैं।

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