Defence Stocks: रिलायंस, टाटा से अदाणी तक… विदेशी दिग्गजों के साथ मिलकर हथियार बनाएंगी ये 5 भारतीय कंपनियां

Defence Stocks: दुनिया में तनाव बढ़ रहा है। युद्ध और टकराव की वजह से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत अब अपने डिफेंस प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ा रहा है। सरकार की Make in India नीति के तहत विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी पर जोर है। मकसद साफ है। एडवांस टेक्नोलॉजी और हथियारों का उत्पादन भारत में हो।

रक्षा खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर

SIPRI के मुताबिक, 2025 में भारत का रक्षा खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया। भारत अब दुनिया का पांचवां सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाला देश है। वहीं, 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसमें निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 24% रही।

हाल ही में Tata Advanced Systems ने Javelin Joint Venture के साथ MoU किया है। इसके तहत भारत में Javelin एंटी-टैंक मिसाइलों का उत्पादन करने की संभावना तलाशी जाएगी।

2026 में ऐसी कई बड़ी साझेदारियां हुई हैं। आइए 5 अहम डिफेंस पार्टनरशिप पर नजर डालते हैं।

भारतीय कंपनीग्लोबल पार्टनरकिस टेक्नोलॉजी पर काम
2026 में क्या हुआ?

Reliance Industries

Rolls-Royceफाइटर जेट इंजन
साझेदारी के लिए Statement of Intent

Tata Advanced Systems

Lockheed Martin / RaytheonJavelin एंटी-टैंक मिसाइलMoU साइन
Bharat Electronics

Safran ElectronicsHAMMER स्मार्ट हथियार
50:50 JV समझौता

Adani DefenceLeonardoमिलिट्री हेलीकॉप्टर
इंडस्ट्रियल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट

Paras DefenceTandem DefenseGuardian-1 काउंटर-ड्रोन सिस्टम
एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस

Reliance Industries और Rolls-Royce: फाइटर जेट इंजन

रिलायंस इंडस्ट्रीज और Rolls-Royce ने अगस्त में एक बड़ी साझेदारी का इरादा जताया था। दोनों कंपनियां भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए कॉम्बैट इंजन बनाने की संभावनाएं तलाशेंगी।

योजना सिर्फ इंजन बनाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां भारत में Aerospace Gas Turbine Complex बनाने की संभावना भी देख रही हैं।

यहां पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी पर काम हो सकता है। अगर यह साझेदारी आगे बढ़ती है, तो भारत को एयरो-इंजन टेक्नोलॉजी में मदद मिल सकती है।

Tata Advanced Systems और Javelin: एंटी-टैंक मिसाइल

Tata Advanced Systems ने Javelin Joint Venture के साथ MoU साइन किया है। इस जॉइंट वेंचर में Raytheon और Lockheed Martin शामिल हैं। दोनों कंपनियां भारत में Javelin All Up Round यानी AUR का को-प्रोडक्शन करने की संभावना तलाशेंगी।

भारत में मिसाइल की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन की सुविधा बनाई जा सकती है। कुछ पार्ट्स का उत्पादन भी देश में हो सकता है। भारत ने अमेरिका से Javelin एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने पर भी सहमति जताई है।

BEL और Safran: HAMMER स्मार्ट हथियार

Bharat Electronics यानी BEL और Safran Electronics & Defense ने फरवरी में Joint Venture Agreement साइन किया था।

दोनों कंपनियां भारत में HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड हथियार बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसका इस्तेमाल हवा से जमीन पर हमला करने के लिए किया जाता है। दोनों की 50:50 हिस्सेदारी वाली जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने की योजना है।

HAMMER का उत्पादन भारत में लाने के लिए मास्टर प्रोडक्शन एग्रीमेंट किया जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनाया जा सकता है।

Adani Defence और Leonardo: हेलीकॉप्टर

Adani Defence & Aerospace ने इटली की कंपनी Leonardo के साथ फरवरी में MoU साइन किया था। दोनों कंपनियां भारत में हेलीकॉप्टर बनाने का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती हैं। शुरुआत में फोकस मिलिट्री हेलीकॉप्टरों पर रहेगा।

आगे चलकर इसका इस्तेमाल सिविल मार्केट के लिए भी हो सकता है। भारत को Leonardo की ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने की भी योजना है।

Paras Defence और Tandem Defense: काउंटर-ड्रोन सिस्टम

पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने Tandem Defense के साथ एक एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है। ये अमेरिकी कंपनी Autonomous Power Corporation की सब्सिडियरी है। इस समझौते से Paras Defence को Guardian-1 Interceptor टेक्नोलॉजी के भारत में प्रोडक्शन और कमर्शियल इस्तेमाल का विशेष अधिकार मिलेगा।

Guardian-1 एक हाई-स्पीड काउंटर-ड्रोन सिस्टम है। यह बैटरी से चलता है। इसे छोटे और कम लागत वाले हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।

ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से काउंटर-ड्रोन सिस्टम की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, Guardian-1 को अभी भारतीय सेना ने शामिल करने के लिए नहीं चुना है।

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हथियार बनाने में भारत की लंबी छलांग! प्रोडक्शन ₹1.80 लाख करोड़ और एक्सपोर्ट ₹39,000 करोड़ के पार

India Defence Sector Growth: भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़कर लगभग ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़कर ₹39,000 करोड़ के करीब हो गया है।

रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-सीरीज के मेन बैटल टैंक्स के ओवरहॉलिंग के लिए बनने वाले ₹472 करोड़ के नए प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे।

2014 से 2026: रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

राजनाथ सिंह ने 2014 के मुकाबले रक्षा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का ब्योरा पेश किया। साल 2014 में देश का हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ ₹1,000 करोड़ का था, जो अब ₹39,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

जबलपुर VFJ में ₹472 करोड़ का प्रोजेक्ट

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में बनने वाला नया प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह नया प्लांट सालाना 80 T-72 और T-90 टैंकों का ओवरहॉल यानी मरम्मत व अपग्रेडेशन करने में सक्षम होगा। भारतीय सेना को हर साल करीब 230 T-सीरीज टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत होती है।

अब तक चेन्नई के आवडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। जबलपुर का नया प्लांट शुरू होने के बाद सेना की यह कमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

‘अब केवल हथियार बना ही नहीं रहे, मेंटेन भी कर रहे हैं’

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल चुका है और इसके पीछे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन है। भारत अब न सिर्फ अपनी धरती पर आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि उनका रखरखाव, ओवरहॉलिंग और अपग्रेडेशन करने की पूरी क्षमता हासिल कर चुका है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह भारतीय सेना के टैंकों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने में ‘वरदान’ साबित होगा।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का ऐतिहासिक सफर

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर(VFJ) की स्थापना 1969 में हुई थी, जो वर्तमान में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के तहत काम करती है। शुरुआत में इस फैक्ट्री में जर्मनी की MAN कंपनी के सहयोग से ‘शक्तिमान 3-टन’ ट्रक और जापान की निसान के सहयोग से ‘निसान 1T’ व ‘जोन्गा’ गाड़ियां बनाई जाती थीं। यह फैक्ट्री 330 एकड़ में फैली है और इसका संलग्न एस्टेट 600 एकड़ का है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने नई डिफेंस कंपनी में 34% हिस्सेदारी खरीदी, वैज्ञानिक वीके सारस्वत करेंगे अगुवाई

Apollo Micro Systems: डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनी Apollo Micro Systems ने नई रक्षा तकनीक कंपनी ShauryAstra Defence Systems में 34% हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने इसके लिए ₹34,000 का निवेश किया है। ShauryAstra का फोकस ऐसी रक्षा तकनीकों पर रहेगा, जिनकी जरूरत भारतीय सेना को है, लेकिन अभी उनके स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं।

ShauryAstra में 34% हिस्सेदारी

Apollo Micro Systems ने ShauryAstra के 3,400 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। इस निवेश के बाद ShauryAstra में Apollo Micro Systems की हिस्सेदारी 34% हो गई है।

ShauryAstra को 21 अगस्त 2026 को शामिल किया गया था। अब यह Apollo Micro Systems की एसोसिएट कंपनी बन गई है।

डॉ. वी.के. सारस्वत का मिलेगा अनुभव

नई कंपनी का वैज्ञानिक नेतृत्व डॉ. वी.के. सारस्वत करेंगे। वह DRDO के पूर्व महानिदेशक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के पूर्व सचिव रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं।

डॉ. सारस्वत भारत के कई बड़े रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें पृथ्वी, धनुष, प्रहार और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं। वह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम, तेजस और INS अरिहंत से भी जुड़े रहे हैं।

फोकस होगा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक पर

ShauryAstra संपूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगी। कंपनी का फोकस एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।

खास बात यह है कि कंपनी सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर काम नहीं करेगी। वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में आने वाली तकनीकी जरूरतों और संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।

Apollo की मौजूदा क्षमता का मिलेगा फायदा

Apollo Micro Systems पिछले चार दशक से डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में है। कंपनी मिशन-क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, रग्ड कंप्यूटिंग, फ्यूज, एक्ट्यूएटर्स और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

ShauryAstra रिसर्च और सिस्टम डिजाइन पर ज्यादा फोकस करेगी। वहीं Apollo Group की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता का इस्तेमाल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

कंपनी का लक्ष्य क्या है?

Apollo Micro Systems अब सिर्फ कंपोनेंट और सबसिस्टम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी संपूर्ण स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स के विकास में बड़ी भूमिका बनाना चाहती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. करुणाकर रेड्डी के मुताबिक ShauryAstra इसी दिशा में अगला कदम है। यह पहल भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के मुताबिक भी है।

Apollo Micro Systems के शेयर NSE पर 0.14% गिरकर ₹384 प्रति शेयर पर बंद हुए।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मुक्त व्यापार समझौतों से बने हैं बड़े मौके, MSME उठाएं फायदा: PM मोदी

भारत ने 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को अंतिम रूप दिया है। इससे देश के सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए एक बड़ा अवसर तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे उद्यमों से इन अवसरों का लाभ उठाने और इस मौके को हाथ से न जाने देने की अपील की है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कपड़ा, मशीनरी और दवाओं जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाएं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें वैश्विक मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) पर खरा उतरना होगा।

भारत ने हाल में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, EFTA समूह और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

देश की मैन्युफैक्चरिंग में MSME सेक्टर का हिस्सा लगभग 35.4 प्रतिशत है। वहीं एक्सपोर्ट में लगभग 48.58 प्रतिशत और GDP में 31.1 प्रतिशत का योगदान है। MSME सेक्टर में 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम हैं और यह 32.82 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। यह खेती के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। दुनिया भर में कुल कारोबारों में MSMEs का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत है। ये कुल वैश्विक रोजगार में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देते हैं।

अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ”भारत की वैश्विक साख बढ़ रही है। आज यह विश्व मंच पर एक सम्मानित राष्ट्र बन रहा है। भारत के पास एक स्थिर राजनीतिक जनादेश और सरकार, एक जीवंत लोकतंत्र और एक मजबूत न्याय व्यवस्था है। ये सभी भारतीय संविधान द्वारा निर्देशित हैं। दुनिया हमारी क्षमताओं को पहचान रही है, यही वजह है कि 2014 से हमने लगभग 40 देशों के साथ FTA किया है।”

उन्होंने आगे कहा, ”इन व्यापार समझौतों से तैयार हुए विशाल अवसर को देखिए। मैं अपने MSME क्षेत्र से आग्रह करना चाहता हूं कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हमें वैश्विक मंच तक पहुंचना है। भारतीय उत्पाद, चाहे वे कपड़ा हों, मशीनरी हों या दवाएं, उन्हें वैश्विक बाजारों में जगह बनाने की जरूरत है। हम इस अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें वैश्विक स्तर पर उत्पादों की मौजूदा उपलब्ध गुणवत्ता से बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत की पेशकश करनी चाहिए। पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुप्पुर तक फैले हमारे कपड़ों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।”

कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

घरेलू समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर

पीएम ने यह भी कहा कि इन समझौतों ने घरेलू समुद्री खाद्य (seafood) क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर खोले हैं। केरल से लेकर गुजरात और तमिलनाडु से लेकर बंगाल तक, ये FTA घरेलू झींगा निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”मैं चाहूंगा कि हम इस स्थिति का पूरा फायदा उठाएं।” पीएम ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और ड्रोन प्रणाली जैसी एडवांस्ड क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की भी वकालत की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन की मात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।

PM Modi Achievements: ‘डिफेंस प्रोडक्शन 4 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 7 गुना…’, PM मोदी ने 12 साल की यात्रा का किया जिक्र

PM Modi Achievements: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से अपनी सरकार के पिछले 12 साल के कामकाज और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प और सामर्थ्य से संभव हुई है।

इस दौरान पीएम मोदी ने पिछले 12 साल में अलग-अलग क्षेत्रों में हुई प्रगति के आंकड़े भी बताए। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन 5 गुना बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ी है। मोबाइल फोन का उत्पादन 33 फीसदी बढ़ा है और डिजिटल ट्रांजैक्शन में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा: “कोई देश तब महान बनता है और अपने लक्ष्य हासिल करता है जब वह अपने सपनों, अपने संकल्प और अपनी अंदरूनी ताकत के दम पर आगे बढ़ता है। अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। हमें बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को बड़ा करते हैं और हमारे नजरिए का दायरा बढ़ाते हैं। हमारा संकल्प अडिग होना चाहिए। जब हमारा संकल्प पक्का होता है, तो मुश्किलों और आपदाओं के बीच भी आगे बढ़ने का रास्ता बनाने की क्षमता अपने आप पैदा हो जाती है…”

प्रधानमंत्री ने भारत की तेजी से हो रही तरक्की के बारे में बताते हुए कहा: “2014 से पहले, यानी 12 साल पहले, हमारे देश में सिर्फ 70 शहरों में ही पाइप से गैस पहुंचाने की सुविधा थी। इन 12 सालों में हमने इस संख्या को 70 शहरों से बढ़ाकर 700 शहर कर दिया है। इसी को तेज़ी और विस्तार कहते हैं। 2014 से पहले, पाइप वाली गैस मुश्किल से 20-22 लाख घरों तक पहुंचती थी। आज, लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पाइप वाली गैस पहुंचाने का काम चल रहा है। बारह साल पहले, देश की सोलर एनर्जी क्षमता सिर्फ 2 GW थी। सिर्फ 2 GW। आज यह 160 GW है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे समुद्री क्षेत्र के 99 फीसदी हिस्से को नो-गो एरिया घोषित कर दिया गया था। इस सोच की वजह से हमने खुद ही समुद्र में खोज और संसाधनों की तलाश का काम रोक रखा था। यह हमारी सोच की कमी थी। हमने तय किया कि ऐसा अब नहीं चल सकता। इसलिए जिस 99 फीसदी हिस्से को पहले नो-गो एरिया कहा गया था, उसे अब खोज और काम के लिए खोल दिया गया है।”

पीएम मोदी ने अंत कहा, “हमने PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की। और यह खुशी की बात है कि इतने कम समय में 50 लाख परिवार अब सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे रेलवे सिस्टम का इलेक्ट्रिफिकेशन 1925 में शुरू हुआ था। लेकिन 1925 से 2014 तक, यानी 90 सालों में, रेलवे नेटवर्क का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा ही इलेक्ट्रिफाई हो पाया था। यानी 90 सालों में सिर्फ 30 प्रतिशत। हमारी रफ्तार देखिए। अपने लक्ष्यों को पाने का हमारा संकल्प देखिए। हमने पिछले एक दशक में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा कर लिया है।”

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लाल किले से 75 मिनट बोले PM मोदी, 4 साल में सबसे छोटा रहा भाषण, जानें किन बड़े मुद्दों पर किया फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित किया। यह उनका लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण था। करीब 75 मिनट के संबोधन में उन्होंने भारत के विकास, आत्मनिर्भरता, युवाओं, तकनीक और देश के भविष्य को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने देशवासियों से बड़े लक्ष्य तय करने और मिलकर भारत को आगे बढ़ाने की अपील की।

75 मिनट का रहा भाषण

इस साल पीएम मोदी का भाषण 75 मिनट का रहा। 2025 में उन्होंने 103 मिनट का भाषण दिया था, जो उनका अब तक का सबसे लंबा संबोधन था। 2024 में उनका भाषण 98 मिनट और 2016 में 96 मिनट का रहा था। वहीं 2017 में उन्होंने 56 मिनट का सबसे छोटा भाषण दिया था। पीएम मोदी ने 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया था। तब उनका संबोधन 65 मिनट का था। इसके बाद 2015 में 88, 2018 में 83, 2019 में करीब 92 और 2020 में 90 मिनट का भाषण रहा। 2021 में 88, 2022 में 74 और 2023 में 90 मिनट तक उन्होंने देश को संबोधित किया।

लगातार 13वीं बार लाल किले से संबोधन

2026 में पीएम मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया। पिछले साल लगातार 12 बार भाषण देने के बाद वह इंदिरा गांधी से आगे निकल गए थे। अब वह इस मामले में केवल जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं। नेहरू ने लगातार 17 बार लाल किले से भाषण दिया था।

वंदे मातरम् और तिरंगे का जिक्र

पीएम मोदी ने भाषण की शुरुआत वंदे मातरम् और तिरंगे के जिक्र से की। उन्होंने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए अपना जीवन देने वाले वीरों को देश हमेशा याद रखेगा।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए। देश ने 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह सपना तभी पूरा होगा, जब सरकार के साथ देश के नागरिक भी इसमें अपनी भूमिका निभाएंगे।

12 साल की उपलब्धियों का जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हुए बदलावों की भी बात की। उन्होंने कहा कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, रेलवे और खादी जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल लेन-देन और सौर ऊर्जा में भी देश ने तेजी से प्रगति की है।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को जरूरी बताते हुए मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल पर जोर दिया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत को मजबूत बनाने की बात कही।

सप्तधारा और युवाओं पर फोकस

प्रधानमंत्री ने विकास के लिए सप्तधारा का जिक्र किया। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने युवाओं को देश की बड़ी ताकत बताया। छात्रों के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग देने का ऐलान किया। साथ ही एक करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य भी बताया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

भारत को कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में गिना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में बदल गया है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कही। ‘फ्रेजाइल फाइव’ वैश्विक वित्तीय और आर्थिक जगत में इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है, जिसका अर्थ है ”5 नाजुक या कमजोर अर्थव्यवस्थाएं।” इनमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये को रखा गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद भारत के बड़े सपने थे, लेकिन प्रगति अक्सर उस गति से कम रही, जिसे हासिल करने की देश की आकांक्षा थी। आज भारत अभूतपूर्व गति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अब कोई भी ताकत 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को नहीं रोक सकती। भारत का 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का बड़ा सपना है, जो 140 करोड़ भारतीयों की ताकत और संकल्प से साकार होगा।

उन्होंने कहा, ”जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र एक विकसित देश बनने का लक्ष्य निर्धारित करता है, तो यह दुनिया को एक शक्तिशाली संदेश देता है और इससे दुनिया का भारत को देखने का नजरिया भी बदल रहा है।” यह भी कहा कि कोई भी देश तब महान बनता है जब वह अपनी उपलब्धियां हासिल करता है। भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने होंगे और ऊंचे संकल्प लेने होंगे। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और संकल्प दृढ़ होने पर कठिनाइयों व आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।

रक्षा उत्पादन 4 गुना, डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा

पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ गया है, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ गई है, आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना वृद्धि हुई है, इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4 गुना बढ़ गई है और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित हों, पीड़ित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांव या शहर में रहने वाले हों, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।

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दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम ने यह भी कहा कि देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने पहले ही 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है, और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है।