India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

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भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। रूस ने भारत के सामने अपने अत्याधुनिक S-500 Prometheus एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव रखा है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद रक्षा सहयोग पर चर्चा एक बार फिर केंद्र में है। दोनों नेताओं की नई दिल्ली में भी मुलाकात होने की संभावना है।

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रूस की नई पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत की रक्षा नीति तेजी से बदल रही है। एक तरफ भारत स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वायुसेना की तत्काल जरूरतें भी हैं। भारत को तय करना होगा कि S-500 जैसी विदेशी एयर डिफेंस प्रणाली की कितनी जरूरत है, जबकि Project Kusha जैसी स्वदेशी प्रणालियां आगे बढ़ रही हैं। 

IAF को यह भी तय करना होगा कि AMCA के आने तक इंतजार करना बेहतर है या Su-57 जैसे विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को अंतरिम विकल्प के तौर पर शामिल किया जाए। अंतिम फैसला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से नहीं होगा, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाला राजनीतिक समर्थन बड़े रक्षा समझौतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

S-400 के बाद S-500 पर रूस का फोकस

रूस भारत के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए S-500 Prometheus का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भारत द्वारा तैनात किए गए रूसी S-400 सिस्टम ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। खबरों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी हवाई खतरों से निपटने के लिए S-400 सिस्टम का इस्तेमाल किया था। इसी अनुभव के बाद रूस अब भारत को अतिरिक्त S-400 सिस्टम देने के साथ S-500 पर भी चर्चा आगे बढ़ा रहा है।

 

मोदी-पुतिन मुलाकात से एक दिन पहले रूस की ओर से भारत को S-400 की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन देने का प्रस्ताव रखे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो भारत के पास पहले से तय स्क्वाड्रन की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है।

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S-500 खरीदना भारत के लिए कितना जरूरी?

 

भारत के सामने S-500 को लेकर फैसला आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि भारत खुद लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता विकसित कर रहा है। Project Kusha को S-400 श्रेणी की स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में भारत को यह आकलन करना होगा कि S-500 वास्तव में किसी मौजूदा क्षमता की कमी को पूरा करेगा या फिर यह स्वदेशी प्रणालियों के साथ काफी हद तक समान भूमिका निभाएगा।

 

Su-57 पर भी भारत के सामने बड़ा फैसला

रूस की दूसरी बड़ी पेशकश Su-57 Felon पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान है। रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारतीय वायुसेना लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है और भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) अभी ऑपरेशनल होने से कई साल दूर है।

 

रूस ने संकेत दिए हैं कि Su-57 के संभावित सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय स्तर पर उत्पादन और भारत में मैन्युफैक्चरिंग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। Su-57 को AMCA के उपलब्ध होने तक एक संभावित स्टॉपगैप विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के लिए इसे खरीदने में कीमत, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और रणनीतिक जरूरतों जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

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चीन और पाकिस्तान की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर से बढ़ी चुनौती

भारत के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि पड़ोसी देश भी स्टील्थ फाइटर क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं।

चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ फाइटर होने का अनुमान है, जबकि पाकिस्तान को चीन से J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के सामने अहम सवाल है कि क्या AMCA के आने तक इंतजार किया जाए या फिर अंतरिम अवधि के लिए किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को शामिल किया जाए।

 

Su-57 से IAF के लिए बढ़ सकती है लॉजिस्टिक चुनौती

 

Su-57 को भारतीय वायुसेना में शामिल करने से एक और चुनौती सामने आ सकती है। IAF के बेड़े में पहले से ही कई अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमान शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के प्रमुख फाइटर बेड़े में Su-30MKI, MiG-29, Rafale, Mirage 2000, Jaguar और स्वदेशी Tejas शामिल हैं। हर नए फाइटर के लिए अलग पायलट ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स, हथियार, मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। ऐसे में Su-57 को शामिल करने से बेड़े का संचालन और जटिल हो सकता है।

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 S-500 और Su-57 के अलावा भी रूस की कई पेशकश

 

रूस की पेशकश केवल S-500 और Su-57 तक सीमित नहीं है। मॉस्को भारत के लिए Voronezh Strategic Early-Warning Radar पर भी सहयोग की संभावना तलाश रहा है। यह रडार लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च और अन्य खतरों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा रूस, Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ भारत के Su-30MKI बेड़े के अपग्रेड और रूसी मूल की Kilo-class submarines के आधुनिकीकरण में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने नई डिफेंस कंपनी में 34% हिस्सेदारी खरीदी, वैज्ञानिक वीके सारस्वत करेंगे अगुवाई

Apollo Micro Systems: डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनी Apollo Micro Systems ने नई रक्षा तकनीक कंपनी ShauryAstra Defence Systems में 34% हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने इसके लिए ₹34,000 का निवेश किया है। ShauryAstra का फोकस ऐसी रक्षा तकनीकों पर रहेगा, जिनकी जरूरत भारतीय सेना को है, लेकिन अभी उनके स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं।

ShauryAstra में 34% हिस्सेदारी

Apollo Micro Systems ने ShauryAstra के 3,400 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। इस निवेश के बाद ShauryAstra में Apollo Micro Systems की हिस्सेदारी 34% हो गई है।

ShauryAstra को 21 अगस्त 2026 को शामिल किया गया था। अब यह Apollo Micro Systems की एसोसिएट कंपनी बन गई है।

डॉ. वी.के. सारस्वत का मिलेगा अनुभव

नई कंपनी का वैज्ञानिक नेतृत्व डॉ. वी.के. सारस्वत करेंगे। वह DRDO के पूर्व महानिदेशक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के पूर्व सचिव रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं।

डॉ. सारस्वत भारत के कई बड़े रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें पृथ्वी, धनुष, प्रहार और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं। वह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम, तेजस और INS अरिहंत से भी जुड़े रहे हैं।

फोकस होगा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक पर

ShauryAstra संपूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगी। कंपनी का फोकस एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।

खास बात यह है कि कंपनी सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर काम नहीं करेगी। वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में आने वाली तकनीकी जरूरतों और संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।

Apollo की मौजूदा क्षमता का मिलेगा फायदा

Apollo Micro Systems पिछले चार दशक से डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में है। कंपनी मिशन-क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, रग्ड कंप्यूटिंग, फ्यूज, एक्ट्यूएटर्स और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

ShauryAstra रिसर्च और सिस्टम डिजाइन पर ज्यादा फोकस करेगी। वहीं Apollo Group की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता का इस्तेमाल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

कंपनी का लक्ष्य क्या है?

Apollo Micro Systems अब सिर्फ कंपोनेंट और सबसिस्टम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी संपूर्ण स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स के विकास में बड़ी भूमिका बनाना चाहती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. करुणाकर रेड्डी के मुताबिक ShauryAstra इसी दिशा में अगला कदम है। यह पहल भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के मुताबिक भी है।

Apollo Micro Systems के शेयर NSE पर 0.14% गिरकर ₹384 प्रति शेयर पर बंद हुए।

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