Viral Video: मैक्लॉडगंज में हर तरफ कचरे का ढेर! वायरल वीडियो देख भड़के लोग, टूरिस्ट पर उठे सवाल

हिमाचल प्रदेश के मैक्लॉडगंज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसके वायरल होने के बाद लोगों के सिविक सेंस को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वीडियो में दिख रहा कि लोग कई पर्यटन स्थलों पर लोग घूमने के बाद प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट और दूसरी चीजें वहीं फेंक दिए हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा पड़ा दिखाई दे रहा है। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को याद दिलाया है कि पर्यटन स्थलों को साफ रखना और कचरा सही जगह पर फेंकना सभी की जिम्मेदारी है।

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो में दिख रहे नजारे देखकर लोग नाराजगी जता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार जागरूक करने के बावजूद पर्यटन स्थलों पर लोग जिम्मेदारी से पेश क्यों नहीं आते। इस घटना ने एक बार फिर पर्यटकों के व्यवहार और सार्वजनिक जगहों पर नियमों का पालन करने की जरूरत को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

चारों तरफ फैला है कचरा

सस्टेनिफाई ने हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के पास स्थित मैक्लॉडगंज का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जिसे बाद में X पर भी पोस्ट किया गया। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा फैला दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति जैसे-जैसे सड़क पर आगे बढ़ता है, रास्ते के दोनों तरफ फैला कचरा साफ नजर आता है। वहां प्लास्टिक के रैपर, पुराने कपड़े और कागज समेत कई तरह की गंदगी पड़ी हुई थी। पर्यटकों की इस लापरवाही के कारण खूबसूरत पहाड़ी रास्ता कूड़े के ढेर में बदल गया, जिससे इलाके की सुंदरता खराब होती दिखाई दी।

पोस्ट में कही ये बातें

वीडियो शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “मैक्लॉडगंज की हालत देखिए। अगली बार जब कोई इसे स्विट्जरलैंड जैसा बताए, तो उसे यह वीडियो जरूर दिखाएं। हिमाचल को अब कचरा साफ करने वाले पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए, जहां लोग सफाई के लिए स्वयंसेवक बनें और बदले में उन्हें कुछ दिनों तक मुफ्त में रहने और खाने की सुविधा मिले।” वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई और पहाड़ी इलाकों में कचरा फैलाने वाले पर्यटकों की आलोचना की।

यूजर ने किया ये कमेंट

लोगों ने पर्यटकों से अपील की कि वे कचरा पहाड़ों पर फेंकने के बजाय अपने साथ वापस ले जाएं। इस घटना ने हिमाचल में बढ़ते पर्यटन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर फिर चिंता बढ़ा दी है। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा, “यह बेहद शर्मनाक है। हर तरफ प्लास्टिक के कवर और बोतलें दिखाई दे रही हैं। तमिलनाडु के ऊटी और पूरे नीलगिरी जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध है। फिर हिमालयी राज्य भी ऐसा नियम क्यों नहीं लागू कर सकते?”

दूसरे यूजर ने लिखा, “यहां पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा है और लोगों में नागरिक जिम्मेदारी की कमी है। इसके अलावा, नगर निगम की व्यवस्था भी बेहद कमजोर है। सफाई के लिए स्वयंसेवक मौजूद हैं, लेकिन इस खूबसूरत शहर को बचाने के लिए पर्यटकों पर जुर्माना लगाना और उनकी संख्या सीमित करना जरूरी है।” एक अन्य यूजर ने सहमति जताते हुए कहा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यह सोचकर भी बहुत दुख होता है कि हमारे हिमाचली भाई-बहनों को इन हालात में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।”

Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात की इस वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में फिर सुनाई देने लगी है शेरों की दहाड़, 144 साल बाद बर्दा बना 17 एशियाटिक शेरों का घर

Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात में गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की आबादी अब सीमित नहीं रह गई है। इसी राज्य का एक और इलाका शेरों की आबादी की पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में लगभग 144 सालों से गायब एशियाई शेरों की दहाड़ फिर से सुनाई देने लगी है। यह जंगल अब 17 एशियाई शेरों का घर है।

PLOS One जर्नल में छपी एक स्टडी में पाया गया है कि बर्दा में सही रहने की जगह, पर्याप्त शिकार और ऐसे माहौल के हालात हैं जो लंबे समय तक शेरों की आबादी को सहारा दे सकते हैं। ये नतीजे गिर के अलावा एशियाई शेरों के लिए इस सैंक्चुअरी को दूसरे घर के तौर पर तैयार करने लिए पर्याप्त बता रहे हैं। इससे एशियाई शेरों आबादी को एक ही जगह इकट्ठा करने से जुड़े खतरों को कम करने में मदद मिलेगी।

एशियाई शेर कैसे लौटे बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी

‘बियॉन्ड गिर: बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी एज ए पोटेंशियल स्ट्रॉन्गहोल्ड फॉर एशियन लायंस’ नाम की इस स्टडी में जानवरों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने छह शेरों, एक नर और पांच मादा को GPS कॉलर लगाए, और जनवरी 2023 और जुलाई 2025 के बीच 169,000 से अधिक लोकेशन पॉइंट रिकॉर्ड किए। आंकड़ों से पता चला कि जानवर बर्दा के जंगलों और घास के मैदानों का इस्तेमाल कर रहे थे और सैंक्चुअरी के अंदर अपना क्षेत्र बना रहे थे।

शेरों की वापसी में प्राकृतिक फैलाव और एक योजनाबद्ध संरक्षण कोशिश, दोनों शामिल थे। एक नर शेर गिर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों से बर्दा में आया। गुजरात फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने बाद में आबादी बनाने में मदद के लिए पांच मादा शेरों को दाखिल किया।

राज्य सरकार ने दशकों पहले बर्दा को एक संभावित वैकल्पिक हैबिटैट के तौर पर पहचाना था। 1979 में, जिस साल सैंक्चुअरी को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था, उसने जंगल को एशियाई शेरों के लिए एक और घर के तौर पर विकसित करने के लिए गिर-बर्दा प्रोजेक्ट शुरू किया।

जंगली सूअर बने शेरों के भोजन का 55% हिस्सा

शेरों की आबादी के पनपने का एक अहम फैक्टर है शिकार की उपलब्धता। इससे तय होता है कि कोई हैबिटैट एक बड़ी शिकारी आबादी को बनाए रख सकता है या नहीं। बार्दा स्टडी में पाया गया कि जंगली सूअरों का रिकॉर्डेड डाइट में 55% हिस्सा था, जबकि पालतू मवेशियों का 17% हिस्सा था।

नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि जैसे-जैसे शेरों की संख्या बढ़ रही है, जंगली शिकार की आबादी को बचाना कितना जरूरी है। एक हैबिटैट उन्हें छिपने और रहने की जगह दे सकता है, लेकिन जानवरों के लंबे समय तक जिदा रहने के लिए एक टिकाऊ फूड सप्लाई भी उतनी ही जरूरी है।

एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए बार्दा क्यों जरूरी है?

एशियाई शेर ज्यादातर गुजरात में पाए जाते हैं, और गिर उनका मुख्य गढ़ है। एक और रहने लायक आबादी बनाने से उन खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है जो इतनी सारी प्रजातियों के एक ही इलाके में जमा होने से आते हैं। बार्दा गिर से फैलने वाले शेरों के लिए पॉपुलेशन बफर का भी काम कर सकता है। गुजरात के जंगल और एनवायरनमेंट मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया ने छोटे हैबिटैट को बचाने और उनके बीच संपर्क बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया है, ताकि वाइल्डलाइफ लैंडस्केप में घूम सकें।

बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कहां है?

बर्दा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों के कुछ हिस्सों में है। यह 192.31 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है और पोरबंदर शहर से लगभग 15 km दूर है। अपने बेहद छोटे आकार के बावजूद, यह सैंक्चुअरी बबूल, धव, रायन, बेर, जामुन, अमली और बांस सहित कई तरह के पेड़-पौधों का समर्थन करती है। यह गुग्गल जैसे औषधीय पौधों के साथ-साथ कई दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का भी घर है। बड़े वाइल्डलाइफ समुदाय में तेंदुए, लकड़बग्घा और सियार के साथ-साथ सांभर, चीतल और चिंकारा जैसे हिरण भी शामिल हैं।

क्या टूरिस्ट बार्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जा सकते हैं?

गुजरात के जंगलों और वाइल्डलाइफ में दिलचस्पी रखने वाले यात्रियों के लिए बार्दा एक विकल्प है। सफारी के मौके सुबह और दोपहर में मिल सकते हैं, लेकिन आगंतुकों को ट्रिप प्लान करने से पहले गुजरात वन विभाग से मौजूदा व्यवस्था और टाइमिंग कन्फर्म कर लेनी चाहिए।

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दिल्ली की रफ्तार होने वाली है सुपरफास्ट! आ रही हैं नई इलेक्ट्रिक बसें और चार्जिंग की शानदार सुविधा

नई दिल्ली, (ANI)। दिल्ली में बसों से सफर करने वालों के लिए 150 नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। पांच जगहों पर गाड़ियां चार्ज करने के स्टेशन भी शुरू होंगे। जिससे लोगों को बस से सफर करने में आसानी होगी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चार्ज करने की सुविधा भी बढ़ेगी।

150 नई बसें आने के बाद दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़कर 5,238 हो जाएगी। अभी शहर के पास करीब 6,838 इलेक्ट्रिक बसें हैं। नई बसों के आने के बाद इनकी कुल संख्या 6,988 हो जाएगी। इनमें 1,750 CNG बसें भी हैं।

सरकार आने वाले सालों में दिल्ली में बसों की संख्या बढ़ाना चाहती है। 2028-29 तक शहर में कुल बसों की संख्या करीब 14 हजार करने का लक्ष्य है।

किन सुविधाओं से लैस होंगी नई बसें?

नई इलेक्ट्रिक बसें लो-फ्लोर और एयर-कंडीशन्ड होंगी। इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि पैसेंजर को सफर के दौरान आराम और सुविधा मिल सके। बसों में कई आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं।

• CCTV कैमरे: बसों में सुरक्षा पर नजर रखने के लिए।

• पैनिक बटन: जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए।

• रियल-टाइम ट्रैकिंग: बस की लोकेशन की जानकारी पाने के लिए।

• दिव्यांगों के लिए सुविधा: बस में चढ़ने और सफर करने को आसान बनाने के लिए।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग सुविधा बढ़ाने के लिए पांच जगहों पर स्टेशन तैयार किए गए हैं। इनमें एक स्टेशन अंतर-राज्यीय बस अड्डे पर और चार DTC डिपो में हैं।

इन पांच जगहों पर मिलेंगे EV चार्जिंग स्टेशन:

स्वामी विवेकानंद ISBT, आनंद विहार

नंद नगरी DTC डिपो,

रोहिणी सेक्टर-37 DTC डिपो,

नांगलोई DTC डिपो,

केशवपुर DTC डिपो

आनंद विहार ISBT पर दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (DTIDC) ने ज्यादा कैपेसिटी वाला EV चार्जिंग स्टेशन बनाया है। इस बस अड्डे पर रोज करीब 1.25 लाख पैसेंजर आते-जाते हैं और औसतन 2,300 बसें गुजरती हैं। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की बसों के साथ टूरिस्ट बसें भी शामिल हैं।

दिल्ली परिवहन निगम (DTC) दूसरे डिपो में भी EV चार्जिंग स्टेशन बना रहा है। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह के मुताबिक, नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने और चार्जिंग की सुविधा बढ़ाने से लोगों को बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलेगा। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ाने और दिल्ली में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

‘दृश्यम’ का मशहूर घर कोई सेट नहीं, जो बना टूरिस्ट स्पॉट, जानें कहां है विजय सालगांवकर की हवेली

अजय देवगन की फिल्म drishyam विजय सालगांवकर का घर कहानी का अहम हिस्सा है। फिल्म में इसी घर से कई बड़े राज जुड़े हैं और कहानी बार-बार यहीं लौटकर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में दिखाया गया यह घर असली है? गोवा में मौजूद करीब 100 साल पुरानी इस हवेली को अब लोग ‘दृश्यम मूवी हाउस’ के नाम से जानने लगे हैं।

नॉर्थ गोवा के इस गांव में है Drishyam वाला घर

फिल्म में विजय सालगांवकर अपने परिवार के साथ जिस घर में रहता है, वह नॉर्थ गोवा के उक्कासिम गांव में स्थित है। ‘दृश्यम’ के तीनों हिंदी पार्ट में यह घर नजर आया है। फिल्म की कहानी में इसका खास महत्व है, इसलिए दर्शकों के बीच भी इसे लेकर काफी दिलचस्पी बनी रहती है।

सादगी और पुर्तगाली शैली है इस हवेली की खासियत

यह हवेली किसी आलीशान महल जैसी नहीं है। इसकी पहचान इसकी सादगी, पुराने फर्नीचर, बड़े कमरों और आसपास फैली हरियाली से है। घर की नीली-सफेद दीवारें, लाल छत और मेहराबदार खिड़कियां इसे पुराने गोवा के घरों जैसा लुक देती हैं।

हवेली के अंदर कई हिस्से हैं और इसके आसपास बड़ा बगीचा भी है। घर की सीढ़ियां भी फिल्म के कई सीन याद दिलाती हैं। यही वजह है कि फिल्म के फैंस इस जगह को देखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

तीनों फिल्मों में बदलता रहा घर का रंग

‘दृश्यम’ की पहली फिल्म में इस घर की दीवारों का रंग हल्का पीला था, जबकि दूसरे और आखिरी पार्ट में इसे नीले रंग में दिखाया गया। घर की बनावट और इसके आसपास का माहौल हालांकि दर्शकों को पहले की तरह ही नजर आता है।

घर के अंदर जाने की अनुमति नहीं

यह हवेली एक निजी प्रॉपर्टी है और इसकी देखभाल के लिए एक केयरटेकर मौजूद है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिसर के अंदर आम लोगों की एंट्री पर रोक है। इसलिए यहां जाने वाले पर्यटकों को घर के बाहर से ही इसे देखना पड़ सकता है।

गोवा में फिल्मी लोकेशन देखने वालों के लिए एक और जगह

गोवा में फिल्मी लोकेशन देखने के शौकीनों के लिए यह घर एक खास आकर्षण बन गया है। इसके अलावा पणजी स्थित गोवा पुलिस मुख्यालय भी ‘दृश्यम’ से जुड़ी चर्चित जगहों में शामिल है। इसकी पीली-सफेद इमारत फिल्म देखने वालों को आसानी से पहचान में आ जाती है।

drishyam की कहानी में अहम भूमिका निभाने वाली यह पुरानी हवेली अब फिल्म के फैंस के लिए भी खास जगह बन चुकी है। गोवा घूमने जाने वाले लोग अपनी यात्रा में इस जगह को शामिल करने के बारे में सोच सकते हैं, हालांकि घर के अंदर जाने की अनुमति मिलने की गारंटी नहीं है।गोवा में मौजूद इस हवेली से जुड़ी जानकारी इंडिया टुडे की रिपोर्ट के आधार पर दी गई है।

 

सिर्फ 500-1000 रुपये में नेपाल के नेशनल पार्क, सुर्खेत की वादियों तक पहुंच जाएंगे आप! बहराइच के रुपईडीहा बॉर्डर से मिलेगा ये मौका

28 सितम्बर, 2026 बहराइच/रुपईडीहा: बिन्नू बाल्मीकि की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-नेपाल बॉर्डर पर बहराइच (Bahraich) का रुपईडीहा बॉर्डर (Rupaidiha border) ऐसा रास्ता है, जहां से कम बजट में नेपाल की जर्नी की जा सकती है। यहां घूमने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती है क्योंकि बॉर्डर पार करने के बाद नेपालगंज और कोहलपुर की ओर जाने के लिए लोकल बस, ऑटो, टेंपो और रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।

बर्दिया पार्क से सुर्खेत तक घूमने को कई खास जगहें

नेपाल (Nepal) का बर्दिया नेशनल पार्क (Bardiya National Park) वाइल्डलाइफ और नेचर पसंद करने वाले टूरिस्ट के बीच काफी पॉपुलर है। यहां जंगल सफारी में रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी और एक सींग वाले गैंडे जैसे जंगली जानवरों को देखने का मौका मिल सकता है। पार्क के पास ठाकुरद्वारा मंदिर भी टूरिस्ट और श्रद्धालुओं के घूमने के लिए खूबसूरत जगह है। कर्णाली नदी का इलाका अपने प्राकृतिक नजारों के लिए जाना जाता है। घोड़ाघोड़ी ताल नेपाल का प्रसिद्ध रामसर जगह है। यहां अलग-अलग तरह के पौधों के साथ रंग-बिरंगे पक्षियों को भी देखा जा सकता है।

नेपाल का सुर्खेत इलाका भी नेचुरल ब्यूटी और हिस्टोरिक साइट के लिए जाना जाता है। यहां कांक्रेविहार, बुलबुले ताल और देउती बज्यै मंदिर देखने लायक जगहें है।

नेपालगंज में बागेश्वरी मंदिर

रुपईडीहा बॉर्डर के पास नेपालगंज का बागेश्वरी मंदिर भी काफी प्रसिद्द है। यहां भारत और नेपाल दोनों देशों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बहराइच से रुपईडीहा तक बस का किराया और नेपाल के अंदर लोकल वाहन का खर्च मिलाकर लगभग 500 से 1000 रुपये में जर्नी की जा सकती है।

बहराइच से रुपईडीहा तक का खर्च

यदि बहराइच मुख्यालय से रुपईडीहा बॉर्डर जाना है तो बस का किराया करीब 100 रुपये तक लग सकते है। बहराइच से रुपईडीहा की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। बस से उतरने के बाद बॉर्डर तक जाने के लिए करीब एक किलोमीटर पैदल पहुंचा जा सकता है। इसके बाद नेपाल जाने पर लोकल रिक्शा, ऑटो और टेंपो से आगे की जर्नी की जा सकती है। रुपईडीहा से बॉर्डर पार करने के बाद नेपालगंज और कोहलपुर (Kohalpur) जाने के लिए लोकल बसें मिल जाती हैं। लोकल बस का किराया करीब 200 से 250 रुपये तक लग सकता है। आगे की जगहों पर घूमने के लिए 100 से 200 रुपये के आसपास किराए में लोकल ट्रांसपोर्ट मिल सकते हैं।

अमेरिकी दबाव में आतंकवादी छोड़े!

एक जाने माने सामरिक विशेषज्ञ ने भारत को ‘पेरेनियल सॉफ्ट स्टेट’ यानी ‘चिरंतन नरम देश’ कहा है। पंडित नेहरू के समय से भारत को सॉफ्ट स्टेट माना जाता है। भारत की नीतियां कभी भी टकराव और हमले वाली नहीं रही हैं। इसकी जड़ें भारत के सनातन इतिहास में खोजी जाती हैं और बड़े गर्व से कहा जाता है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। लेकिन यह सिर्फ हमले की बात नहीं है। हमला नहीं करने भर से भारत सॉफ्ट स्टेट नहीं है। भारत अपनी विदेश और सामरिक नीतियों के कारण सॉफ्ट स्टेट है। एक बार फिर यह प्रमाणित हुआ है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने आतंकवादियों की मदद करने वाले और उनको ट्रेनिंग देने वाले सात आतंकियों को जेल से छोड़ दिया है।

इनमें एक मैथ्यू वैन डाइक भी है, जो अमेरिकी नागरिक है और लीबिया के गृह युद्ध से लेकर यूक्रेन में चल रही लड़ाई तक में वह भाड़े के सैनिक के रूप में काम करता है। उसके साथ छह और यूक्रेनी नागरिक थे, जिनके साथ वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। पहले भी ये लोग भारत आते थे और पूर्वोत्तर जाकर वहां के रास्ते म्यांमार की सीमा में चले जाते थे, जहां आतंकवादी संगठनों को हथियार चलाने और ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देते थे। इस बार भी ये लोग इसी तरह से म्यांमार गए लेकिन इस बार रूस ने भारत को अलर्ट कर दिया तो इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

लेकिन ये लोग छह महीने भी जेल में नहीं रहे। इनको न सिर्फ जमानत मिल गई, बल्कि अपने देश जाने की इजाजत भी दे दी गई।

सोचें, एनआईए ने इन लोगों के खिलाफ यूएपीए की धाराएं लगाई थीं। यूएपीए में ही अनेक लोग छह साल या उससे ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि ये लोग एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं, जो भारत में ड्रोन सप्लाई कर रहा है और यहां से दूसरे देश में भेज रहा है। लेकिन एक दिन अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने निजी रूप से मैथ्यू वैन डाइक का मुद्दा उठाया और आनन फानन में भारत ने यूएपीए के आरोप ड्रॉप कर दिए और सबको रिहा कर दिया। अब फेस सेविंग के लिए कहा जा रहा है कि उनको एक महीने में भारत लौटना होगा लेकिन सबको हकीकत पता है। भोपाल गैस कांड से लेकर पुरुलिया हथियार कांड और बोफोर्स कांड तक के आरोपियों के भारत से जाने की घटनाएं गवाह हैं कि अपने घरेलू मामलों में भी भारत किस तरह से बाहरी दबाव में झुकता है।

आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने वाले रिहा, अपने देश लौटेंगे

नई दिल्ली। भारत की सीमा पार कर के म्यांमार में आतंकवादियों को हथियार चलाने और ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देने वाले एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को भारत ने छोड़ दिया है। उनको अपने देश जाने की इजाजत दे दी गई है। हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए ने कहा है कि इन सभी लोगों को एक महीने में भारत लौटना होगा। एजेंसी ने यह भी कहा कि जांच चल रही है और अभी इनके भारत में रहने की जरुरत नहीं है।

अमेरिका नागरिक मैथ्यू वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में म्यांमार के ट्रेनिंग कैंप में उग्रवादियों को हथियार और ड्रोन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय खबर आई थी कि ये सभी भारत से मलेशिया भागने वाले थे। इससे पहले कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। यह भी खबर आई थी कि इनके बारे में रूस ने भारत को खबर दी थी और तब गिरफ्तार किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि विदेशी नागरिकों को परिवार से मिलने देना संवैधानिक अधिकार है। इन्हें जमानती बॉन्ड भरना होगा और एक महीने बाद भारत लौट कर कोर्ट को जानकारी देनी होगी। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के कारण अमेरिकी नागरिक वैन डाइक को राहत मिली और सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया। कांग्रेस ने पूछा कि इन नागरिकों को भारत का वीजा कैसे मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार कैसे पहुंचे?

बहरहाल, एनआईए ने सातों विदेशी नागरिकों अमेरिका के मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेन के हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम व कामिन्स्की विक्टर को मार्च 2026 में रूस से मिली खुफिया सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। आरोपी कई बार ट्रेनिंग देने आ चुके हैं। ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। वे इस बार गुवाहाटी पहुंचे और फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुसे। इतने गंभीर आरोपों के बावजूद इनको छोड़ दिया गया है।

Agra Metro: क्या 10 अक्टूबर से आगरा में चलना शुरू होगी मेट्रो? 5 नए स्टेशनों पर सर्विस शुरू करने को लेकर आया ये अपडेट

26 सितम्बर, आगरा: आदित्य मुदगल की रिपोर्ट की मुताबिक, आगरा में मेट्रो सेवा का विस्तार होने जा रहा है। पहले कॉरिडोर के तहत मनकामेश्वर स्टेशन से ISBT तक पांच नए स्टेशन तैयार हो चुके हैं। इनमें SN मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी, RBS कॉलेज और ISBT स्टेशन शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों पर ट्रैक, सिग्नल और पैसेंजर से जुड़ी सभी सुविधाओं की जांच भी पूरी हो चुकी है।

यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर पंचानन मिश्रा ने बताया कि पांचों स्टेशनों पर मेट्रो चलाने की तैयारी पूरी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब सेवा शुरू करने की तारीख का इंतजार है। ISBT तक मेट्रो चलाने के लिए 10 अक्टूबर 2026 की तारीख प्रस्तावित की गई है।

लोगों को मेट्रो शुरू होने का इंतजार

शहरवासियों को इन पांच नए स्टेशनों पर मेट्रो चलने का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि मेट्रो शुरू होने से रोज सफर करने वाले लोगों को आसानी होगी। कंस्ट्रक्शन में कई जगह जाम की परेशानी होती थी, लेकिन मेट्रो सेवा शुरू होने से रोड ट्रैफिक कम हो सकता है। इससे पॉल्यूशन भी कम होगा। मेट्रो शुरू होने से लोग बिना जाम में फंसे अपने ऑफिस, कॉलेज के साथ और भी जगह आसानी से पहुंच सकेंगे।

नए स्टेशनों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, टूरिस्ट और स्टूडेंट्स को भी फायदा

पांचों स्टेशनों के शुरू होने से शहर के कई इलाके मेट्रो से कनेक्ट हो जायेंगे। SN मेडिकल कॉलेज, राजा की मंडी रेलवे स्टेशन और ISBT जाने वाले लोगों को सफर में आसानी होगी। आगरा मेट्रो का पहला कॉरिडोर ताज पूर्वी गेट से सिकंदरा तक करीब 14 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 13 स्टेशन बनाए जाने हैं।

ISBT से शहर के बड़े इलाकों तक मेट्रो चलने से आगरा आने वाले टूरिस्ट का सफर भी आसान होगा है और रोड पर जाम की वजह से होने वाली परेशानी भी कम हो सकती है। SN मेडिकल कॉलेज आने वाले पेशेंट के लिए भी मेट्रो एक आसान सफर बन सकती है। वहीं RBS कॉलेज आने-जाने वाले स्टूडेंट्स और फैकल्टी को भी सफर में आसानी होगी।

International Trip: विदेश जाने से पहले सावधान! भारतीयों के लिए बदल गए इन देशों के वीजा और एंट्री के नियम

विदेशों में घूमना हर किसी का सपना होता है। अगर आप भी विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए ये काम की खबर है। विदेश घूमने का प्लान करने से पहले उस देश के वीजा और एंट्री नियम को एक बार जरूर चेक कर लें। कई देशों ने भारतीय यात्रियों के लिए वीजा के नियम बदले हैं। कुछ देशों ने ई-वीजा की सुविधा शुरू की है, वहीं कुछ ने एंट्री के नियमों में बदलाव किया है। इसलिए विदेश जाने से पहले नए नियमों की जानकारी जरूर ले लें, ताकि सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में

लाओस

लाओस जाने वाले भारतीय पासपोर्ट धारक ई-वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, यह इलेक्ट्रॉनिक वीजा (ई-वीजा) केवल कुछ तय किए गए एंट्री पॉइंट्स पर ही मान्य है। इसलिए यात्रा से पहले लाओस की आधिकारिक ई-वीजा वेबसाइट पर जाकर यह जरूर जांच लें कि किन बॉर्डर चेकपॉइंट से प्रवेश की अनुमति है। साथ ही, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, वीजा की वैलिडिटी और वीजा मिलने में लगने वाले समय की जानकारी भी पहले से ले लें, ताकि यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो।

श्रीलंका

25 मई 2026 से श्रीलंका भारत समेत 40 देशों के नागरिकों को 30 दिनों का मुफ्त टूरिस्ट इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल परमिट यानी ईटीए दे रहा है। ये परमिट मुफ्त है, लेकिन यात्रियों को श्रीलंका जाने से पहले इसे लेना जरूरी होगा। भारतीय यात्री डबल एंट्री परमिट के साथ 30 दिनों तक श्रीलंका में रह सकते हैं। दूसरी बार श्रीलंका जाना पहली यात्रा के समय मिली परमिट की वैधता के दौरान ही होना चाहिए। यात्रा से पहले यात्रियों को श्रीलंका की आधिकारिक ईटीए वेबसाइट पर जाकर नए नियम और जरूरी शर्तें जरूर जांच लेनी चाहिए।

चिली

चिली ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए डिजिटल वीजा एप्लिकेशन की सुविधा शुरू की है। अब भारतीय यात्री केवल कागजी प्रक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय ऑनलाइन वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले यात्रियों को अपनी एलिजिबिलिटी वेरिफाई करनी चाहिए और जरूरी डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन जमा करने होंगे। यात्रा की योजना पक्की करने से पहले चिली के आधिकारिक दूतावास या वाणिज्य दफ्तर की वेबसाइट पर वीजा प्रक्रिया और आवेदन पूरा होने में लगने वाले समय की जानकारी जरूर ले लें।

घाना

घाना अब भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए ई-वीजा की सुविधा देता है, जिससे एलिजिबिल यात्री घाना जाने से पहले ऑनलाइन वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले यात्रियों को घाना की आधिकारिक इमिग्रेशन या एम्बेसी की वेबसाइट पर यह जांच लेना चाहिए कि यात्रा के किस उद्देश्य के लिए अनुमति है, कौन-कौन से जरूरी दस्तावेज देने होंगे, कितनी फीस लगेगी और वीजा कितने समय तक मान्य रहेगा। इससे यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।

वेनेजुएला

वेनेजुएला जाने वाले भारतीय यात्री इलेक्ट्रॉनिक वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, वहां प्रवेश के नियम यात्रा के उद्देश्य और कितने दिनों के लिए जाना है, इसके आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए यात्रा की तैयारी शुरू करने से पहले यात्रियों को अपनी पात्रता और जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

ईरान

ईरान जाने वाले भारतीय यात्रियों को यात्रा से पहले ई-वीजा के लिए आवेदन करना जरूरी है। यात्रियों को यह नहीं मानना चाहिए कि ईरान पहुंचने के बाद उन्हें अपने आप वीजा मिल जाएगा। यात्रा में आखिरी समय पर परेशानी से बचने के लिए पहले ही वीजा के लिए जरूरी कागजात, आवेदन की प्रक्रिया, वीजा मिलने में लगने वाला समय और किन जगहों से ईरान में प्रवेश की अनुमति है, इसकी जानकारी जरूर जांच लें।

इन बातों का जरूर रखें ध्यान

सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये हैं कि वीजा और विदेश यात्रा के नियम कभी भी बदल सकते हैं। इसलिए टिकट बुक करने से पहले जिस देश में जाना है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वीजा और एंट्री के नए नियम जरूर चेक कर लें। विदेश यात्रा पर जाने से पहले अपना पासपोर्ट जरूर जांच लें कि वह तय अवधि तक वैलिडिटी है या नहीं। साथ ही ई-वीजा या यात्रा की अनुमति, वापसी या आगे की फ्लाइट का टिकट, होटल की बुकिंग और पर्याप्त पैसे होने का सबूत अपने पास रखें। अगर जरूरी हो तो ट्रैवल इंश्योरेंस भी करा लें।

Kashmir First Snowfall: कश्मीर में समय से पहले बर्फबारी! गुलमर्ग और गुरेज में गिरी बर्फ और मौसम को लेकर आया ये अपडेट

कश्मीर के गुलमर्ग और गुरेज में मौसम की पहली बर्फबारी का नजारा

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कश्मीर का मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। सितंबर के महीने में ही घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ की हल्की परत दिखाई देने लगी है। गुलमर्ग और गुरेज जैसे इलाकों में बदले मौसम ने आसपास का नजारा भी खास बना दिया है। पहाड़ों पर बर्फबारी और घाटी के मैदानी हिस्सों में बारिश के कारण मौसम में ठंडक महसूस की जा रही है। आने वाले दिनों में भी मौसम पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

गुलमर्ग की ऊंची पहाड़ियों पर पहली बर्फ

उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों में रात के समय मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। गोंडोला फेज-2 और अफरवत इलाके में बर्फ की हल्की सफेद परत जम गई। सुबह के समय ऊंचे पहाड़ बर्फ से ढके नजर आए। गुलमर्ग पहले से ही अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पहाड़ों के लिए जाना जाता है, ऐसे में शुरुआती बर्फबारी ने यहां के नजारे को और खास बना दिया।

गुरेज में भी बदला पहाड़ों का रंग

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सीमावर्ती गुरेज सेक्टर में भी मौसम की पहली बर्फबारी हुई। अधिकारियों के मुताबिक, तुलेल घाटी और काबुली गली में बर्फ देखने को मिली। इन इलाकों में पहाड़ों पर हल्की बर्फ जमने से आसपास का नजारा बदल गया। जम्मू-कश्मीर के कुछ दूसरे ऊंचे इलाकों से भी हल्की बर्फबारी की जानकारी मिली है।

मैदानी इलाकों में रातभर बारिश

ऊंचे इलाकों में बर्फबारी के साथ कश्मीर घाटी के मैदानी हिस्सों में बारिश हुई। श्रीनगर समेत कई मैदानी इलाकों में रातभर बारिश का दौर देखने को मिला। इससे मौसम में ठंडक बढ़ी और आसमान में बादल छाए रहे। पहाड़ों पर बर्फ और नीचे के इलाकों में बारिश के कारण घाटी में मौसम का अलग रंग देखने को मिला।

अगले दिनों में मौसम रहेगा कैसा

मौसम विभाग ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में हल्की बारिश या आंधी-तूफान की संभावना जताई थी। हालांकि, शुक्रवार से अगले कुछ दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। ऐसे में फिलहाल ऊंचे इलाकों में हुई शुरुआती बर्फबारी के बाद मौसम के सामान्य होने की उम्मीद है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों की नजर अब आने वाले दिनों के मौसम पर रहेगी।

कश्मीर में बदलता मौसम आने वाले सर्द मौसम के बदलाव का असर यहां की यात्रा और रोज की गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और टूरिस्ट के लिए मौसम की जानकारी लेते रहना और सफर की तैयारी उसी के अनुसार करना बेहतर रहेगा।