सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बांग्लादेश सरकार ने रविवार को कहा है कि उसे सजा होने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्हें इस मामले का पता फांसी दिए जाने के बाद चला। कैदियों की सूची में नाम थे, लेकिन सजा का जिक्र नहीं था द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में बांग्लादेश के दूतावास ने जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मांगी थी। सऊदी सरकार ने जो सूची भेजी, उसमें इस पति-पत्नी के नाम भी शामिल थे। हालांकि, सूची में यह जानकारी नहीं थी कि दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि उनकी सरकार ने मामले की ज्यादा जानकारी लेने के लिए सऊदी अरब से संपर्क किया है। सऊदी सरकार का जवाब मिलने के बाद ही बांग्लादेश तय करेगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएं। सऊदी सरकार ने कहा- मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को इस्लामी कानून के तहत ‘ताजीर’ के नियमों के आधार पर मौत की सजा दी गई। ताजीर ऐसी सजा होती है, जिसकी गंभीरता तय करने का अधिकार न्यायाधीश के पास होता है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों का अपराध गंभीर था और उन्होंने मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया था। इसी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई। सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते हैं सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते और काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो कम वेतन वाली नौकरियां करते हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक और आर्थिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। ऐसे में बांग्लादेशी नागरिकों को सजा दिए जाने के मामले में दोनों देशों के बीच जानकारी साझा किए जाने का सवाल अहम हो गया है। बांग्लादेश सरकार अब सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है। सऊदी अरब में इस साल करीब 100 लोगों को फांसी एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, सऊदी अरब में इस साल अब तक करीब 100 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। कई विदेशी नागरिकों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। इससे पहले 2011 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आठ बांग्लादेशी पुरुषों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। उन्हें मिस्र के एक नागरिक की हत्या का दोषी ठहराया गया था। फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में श्रीलंकाई नागरिक की सजा रद्द इसी महीने सऊदी अरब ने श्रीलंका के एक नागरिक की मौत की सजा रद्द कर दी थी। उसे फेसबुक पर एक टिप्पणी करने के लिए धर्म का अपमान करने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले को लेकर श्रीलंका में विरोध हुआ था। इसके बाद उस व्यक्ति को राहत दिलाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें की गईं। आखिरकार, सऊदी अरब ने उसकी मौत की सजा रद्द कर दी। ———————– यह खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया की महिला सांसद हेलेन को कार से कुचला:ऑफिस के बाहर मारी टक्कर, हालत गंभीर; 43 साल का आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार ऑस्ट्रेलिया में निर्दलीय महिला सांसद हेलेन हेन्स को सोमवार को उनकी ऑफिस के बाहर कार से कुचल दिया गया। 65 साल की हेन्स की हालत गंभीर है। उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

कॉकरोच जनता पार्टी के पिछले आंदोलन को देखे। 25 जुलाई को समझौता हुआ। 1 सितंबर को एफआईआर रद्द करने का न्यायिक आदेश आया। बीच में 38 दिन लगे। लिखित गारंटी का इंतजार हुआ। फिर आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ी। सर्वोच्च न्यायालय में बार-बार मामला उठा। तब जाकर सरकारी आश्वासन एक लागू होने वाले आदेश में बदला। मगर मुआवजा नीति?वह अभी भी वादा है। … आंदोलन चलाना एक काम है। आंदोलन की जीत को लागू करवाना उससे भी लंबा काम।
श्रीलंका में 2022 का आर्थिक संकट केवल महंगाई या विदेशी मुद्रा की कमी का संकट नहीं था। वह उस शासन व्यवस्था के प्रति जनता के भरोसे के टूटने का क्षण था। महंगाई लगभग सत्तर प्रतिशत तक पहुंच गई थी। श्रीलंकाई मुद्रा का मूल्य करीब आधा रह गया था। आम आदमी के लिए ईंधन, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतें जुटाना कठिन हो गया था।
इसी संकट से अरगलया आंदोलन पैदा हुआ। सिंहली भाषा में अरगलया का अर्थ है संघर्ष। मगर आंदोलन केवल राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को हटाने के लिए नहीं था। उसका नारा था, व्यवस्था बदलो। पुराने चेहरों और पुरानी राजनीति से मुक्ति पाओ। सड़क पर जनता उतरी। राष्ट्रपति भवन तक पहुंची। गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर भागे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
आंदोलन जीत गया। मगर उसके बाद क्या हुआ?
राष्ट्रपति को चुनने का अधिकार उसी पुरानी संसद के पास था जिसके राजनीतिक ढांचे के खिलाफ जनता उठी थी। संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुन लिया। वे श्रीलंका की उसी पुरानी राजनीति के अनुभवी नेता थे जिसे आंदोलनकारियों ने अस्वीकार किया था। जनता ने राष्ट्रपति को हटाया था। मगर नए राष्ट्रपति का चुनाव पुरानी व्यवस्था ने किया।
यही जनक्रांति का पहला विरोधाभास है। सड़क सत्ता को खाली करा सकती है। मगर खाली हुई सत्ता पर अधिकार किसका होगा, यह उस समय मौजूद संगठित राजनीतिक शक्तियां तय करती हैं।
श्रीलंका में आंदोलन की व्यवस्था परिवर्तन की मांग को चुनावी रास्ता मिलने में दो वर्ष लग गए। सितंबर 2024 में अनुरा कुमारा दिसानायके राष्ट्रपति बने। वे नेशनल पीपुल्स पावर के नेता थे। 2019 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें केवल तीन प्रतिशत वोट मिले थे। पांच वर्ष बाद वे लगभग 42 प्रतिशत वोट लेकर राष्ट्रपति बने। उसके बाद उनकी पार्टी को संसद में दो-तिहाई से भी अधिक बहुमत मिला।
तब जाकर आंदोलन की व्यवस्था परिवर्तन की मांग को एक राजनीतिक माध्यम मिला।
मगर यहां भी विरोधाभास समाप्त नहीं हुआ। जिस आर्थिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तों के खिलाफ जनता में असंतोष था, नई सरकार ने उसी आईएमएफ कार्यक्रम को जारी रखा।
तो आंदोलन ने क्या बदला?
उसने पहले दौर में राष्ट्रपति को हटाया। दूसरे दौर में, दो वर्ष बाद, मतदाताओं ने सत्ता के नए दावेदार को चुना। मगर आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों की निरंतरता बनी रही। इसका अर्थ यह नहीं कि आंदोलन व्यर्थ था। बल्कि यह कि सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन की गति अलग-अलग होती है।
जनता एक दिन में राष्ट्रपति को हटा सकती है। मगर राज्य की आर्थिक निर्भरताओं, प्रशासनिक संस्थाओं और शासन की आदतों को एक दिन में नहीं बदल सकती।
अब बांग्लादेश को देखिए।
अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले जनविद्रोह ने शेख हसीना की सत्ता समाप्त कर दी। वर्षों से जमा असंतोष, राजनीतिक दमन और चुनावी विश्वसनीयता के संकट के बीच छात्रों का आंदोलन देशव्यापी विद्रोह बन गया।
हसीना चली गईं। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। फिर संवैधानिक सुधारों का एक दस्तावेज तैयार हुआ जिसे जुलाई चार्टर कहा गया। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा, दो सदनों वाली संसद और आनुपातिक प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण सुधार शामिल थे।
यानी बांग्लादेश में आंदोलन केवल प्रधानमंत्री को हटाकर नहीं रुका। उसने नई राजनीतिक व्यवस्था का खाका भी तैयार किया। फरवरी 2026 में चुनाव हुए। कार्नेगी के विश्लेषक अविनाश पालीवाल ने इन्हें लगभग दो दशकों में बांग्लादेश का पहला विश्वसनीय चुनाव बताया।
परिणाम में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, यानी बीएनपी, ने संसद की 300 में से 209 सीटें जीतीं। जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। जबकि छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटिजन पार्टी को केवल छह सीटें मिलीं।
जरा इस परिणाम का अर्थ समझिए।
जिन छात्रों ने आंदोलन खड़ा किया, जिनके संघर्ष से पुरानी सत्ता गिरी, जिनकी नैतिक शक्ति पर राजनीतिक परिवर्तन संभव हुआ, चुनाव में उन्हें केवल छह सीटें मिलीं। आंदोलन की नैतिक विजय और चुनावी राजनीति की शक्ति एक जैसी नहीं होती। जनता किसी आंदोलन का समर्थन कर सकती है, मगर चुनाव में किसी दूसरी पार्टी को सत्ता सौंप सकती है।
बांग्लादेश में यही हुआ।
फिर भी छात्रों के आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। चुनाव के दिन ही मतदाताओं ने जुलाई चार्टर को भी लगभग दो-तिहाई समर्थन से मंजूरी दी। इसका अर्थ था कि मतदाता नई सरकार चाहते थे, मगर संवैधानिक सुधार भी चाहते थे।
अब असली परीक्षा शुरू हुई।
अविनाश पालीवाल के अनुसार बीएनपी ने चुनाव से पहले ही जुलाई चार्टर के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी। विशेषकर ऊपरी सदन की संरचना और कार्यवाहक सरकार के प्रमुख के चयन की प्रक्रिया पर। सत्ता में आने के बाद उसने सर्वोच्च न्यायालय के लिए अलग सचिवालय बनाने का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में डाल दिया, जबकि पहले उसका समर्थन किया था।
यानी जनता ने जिस सुधार दस्तावेज को मंजूरी दी, उसे लागू करने वाली सरकार के अपने राजनीतिक हित थे। वह कुछ प्रावधानों को बदलना या कमजोर करना चाहती थी।
बांग्लादेश आज उसी मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है जहां भारत का सूचना अधिकार आंदोलन 2004 में पहुंचा था। मसौदा तैयार है। जनसमर्थन मौजूद है। राजनीतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। मगर कानून को अंतिम रूप देने और लागू करने का अधिकार उन लोगों के पास है जिनके लिए उसके कुछ प्रावधान असुविधाजनक हो सकते हैं।
आंदोलन के सामने अब प्रश्न है कि वह इस प्रक्रिया पर कितना दबाव बनाए रख सकता है। क्योंकि संविधान में सुधार लिख देना और सत्ता को उन सुधारों के अनुसार चलने के लिए बाध्य करना दो अलग काम हैं।
बांग्लादेश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को हटा दिया। मगर वे उस पुरानी राजनीति को समाप्त नहीं कर सके जिसने चुनाव जीतकर फिर सत्ता संभाल ली। सड़क पर जनविद्रोह का नेतृत्व करने वाले चुनाव में सत्ता के स्वाभाविक उत्तराधिकारी नहीं बन जाते।
तीसरा उदाहरण नेपाल का है।
सितंबर 2025 में नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया। इसके विरोध में शुरू हुआ आंदोलन तेजी से व्यापक राजनीतिक विद्रोह में बदल गया। रॉयटर्स के अनुसार दो दिनों की हिंसा में 76 लोग मारे गए। पहले ही दिन पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। 9 सितंबर को प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया।
सरकार गिर गई।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। संसद भंग हुई और 5 मार्च 2026 को चुनाव हुए। इन चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को अधिकांश सीटें मिलीं। 27 मार्च को बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री बने। नेपाल ने तीनों पड़ोसी देशों में सबसे तेजी से सड़क के आंदोलन को राष्ट्रीय चुनाव में बदला।
श्रीलंका में लगभग 26 महीने लगे। बांग्लादेश में करीब अठारह महीने। नेपाल में लगभग छह महीने। मगर जवाबदेही की गति यहां भी धीमी रही। 28 मार्च को पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली और उनके गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उस जांच आयोग की सिफारिश पर हुई जिसने पहले दिन प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी रोकने में विफल रहने के लिए ओली को जिम्मेदार माना था।
8 सितंबर को अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार दोनों के खिलाफ जांच जारी थी और औपचारिक आरोप तय नहीं हुए थे। हालांकि दूसरी रिपोर्टों में आपराधिक लापरवाही के आरोपों का उल्लेख था। यानी सरकार गिर गई। चुनाव हो गए। नया प्रधानमंत्री आ गया। मगर जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, उनके लिए न्याय की प्रक्रिया अभी चल रही थी।
सत्ता परिवर्तन की घड़ी तेज चलती है। न्याय की घड़ी धीमी। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के इन तीन अनुभवों में कुछ समानताएं हैं। मगर इनके कारण और परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं।
पहली समानता यह कि सत्ता का खाली स्थान अधिक देर खाली नहीं रहता। उसे वही राजनीतिक शक्ति भरती है जो पहले से संगठित है या जल्दी संगठन खड़ा कर सकती है।
श्रीलंका में पुरानी राजनीतिक परंपरा वाली पार्टी ने आंदोलन की मांग को चुनावी रास्ता दिया। बांग्लादेश में स्थापित बीएनपी ने सत्ता हासिल की। नेपाल में अपेक्षाकृत नई पार्टी चुनाव जीतकर सरकार में आई। तीनों में सड़क का आंदोलन स्वयं सरकार नहीं बना।
आंदोलन की स्थायी शक्ति इस बात में थी कि वह सत्ता में आने वालों को चुनने और उनसे जवाब मांगने की नागरिक क्षमता पैदा कर सके। दूसरी समानता यह कि किसी दस्तावेज को जनता की मंजूरी मिल जाना उसके लागू होने की गारंटी नहीं है।
बांग्लादेश में मतदाताओं ने संवैधानिक सुधारों का समर्थन किया। मगर उसके बाद संघर्ष कानून के प्रावधानों, उनके कमजोर किए जाने और लागू होने की प्रक्रिया में पहुंच गया।
भारत में सूचना अधिकार आंदोलन को भी यही लड़ाई लड़नी पड़ी थी। तीसरी समानता यह कि समझौता, न्याय और जवाबदेही की घड़ियां अलग-अलग चलती हैं।
सोशल मीडिया के सहारे लाखों लोग कुछ घंटों में जुट सकते हैं। सरकार को कुछ दिनों में गिराया जा सकता है। मगर समझौते के लिए ऐसे प्रतिनिधि चाहिए जो आंदोलन की ओर से निर्णय ले सकें। और न्याय के लिए संस्थाएं चाहिए जो अपने निर्णयों को लागू भी कर सकें।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे लंबा इंतजार अक्सर उन परिवारों को करना पड़ता है जिन्होंने आंदोलन में अपने लोगों को खोया होता है। मगर क्या इन तीनों देशों में सरकारें इसलिए गिरीं क्योंकि उनके राज्य कमजोर थे? और क्या भारत में ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि भारतीय राज्य मजबूत है?
यह तुलना इतनी सरल नहीं है। इन घटनाओं को समझने के लिए चार बातों पर गौर करना होगा।
पहली है आर्थिक स्थिति। श्रीलंका में आर्थिक संकट असाधारण था। देश भुगतान संकट से जूझ रहा था। बांग्लादेश में भी विदेशी मुद्रा भंडार लगभग तीन महीने के आयात के बराबर रह गया था।
दूसरी है सुरक्षा बलों की भूमिका। बांग्लादेश में सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार किया। नेपाल में पुलिस की गोलीबारी में पहले ही दिन कम से कम 19 लोग मारे गए।
तीसरी है सरकार की वैधता पर जनता का भरोसा। बांग्लादेश में जनवरी 2024 के विवादास्पद चुनाव के बाद शासन की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। नेपाल में घातक विरोध प्रदर्शनों के एक दिन के भीतर सरकार गिर गई।
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण बात है प्रशासनिक मशीनरी की निरंतरता। यही वह पहलू है जिस पर तोकविल सबसे अधिक ध्यान देते। सरकारें गिर गईं। मगर उनके साथ प्रशासन समाप्त नहीं हुआ। बांग्लादेश के बारे में पालीवाल का निष्कर्ष है कि जिस क्रांति ने नई व्यवस्था स्थापित की, उसके बाद भी पुरानी व्यवस्था का बड़ा हिस्सा बना रहा। यही राज्य की वास्तविक शक्ति है। राजनीतिक सत्ता बदल सकती है। मगर नौकरशाही, संस्थागत हित, प्रशासनिक नियम और शासन की परंपराएं बनी रह सकती हैं।
भारत की स्थिति इन देशों से अलग है। मगर अंतर केवल इतना नहीं कि वहां कमजोर राज्य हैं और यहां मजबूत राज्य।
भारत में श्रीलंका जैसा दिवालियापन नहीं है। सुरक्षा बलों की निष्ठा डगमगाने का कोई संकेत नहीं है। न्यायालय, मंत्रालय और संघीय व्यवस्था काम कर रहे हैं। 10 अक्टूबर के आंदोलन की मांग भी इन देशों के आंदोलनों से छोटी है। यहां सरकार गिराने की मांग नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग है।
ऐसी परिस्थिति में सरकार के लिए किसी व्यक्ति का इस्तीफा स्वीकार करना, पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया बदलने की अपेक्षा कहीं आसान हो सकता है। यहीं भारत के लिए तोकविल की चेतावनी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यहां खतरा सरकार के गिर जाने का नहीं, बल्कि आंदोलन को व्यवस्था के भीतर समाहित कर लेने का है। सरकार किसी मांग को स्वीकार कर सकती है। समिति बना सकती है। इस्तीफा ले सकती है। नया कानून घोषित कर सकती है। आंदोलन समाप्त हो सकता है। मगर जिस प्रक्रिया के खिलाफ आंदोलन हुआ था, वह जस की तस बनी रह सकती है।
श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल बताते हैं कि सरकार गिर जाने के बाद क्या होता है।
भारत के अपने आंदोलन बताते हैं कि सरकार के बने रहने और आंदोलन की मांग स्वीकार कर लेने के बाद क्या होता है। और इसका सबसे ताजा उदाहरण स्वयं कॉकरोच जनता पार्टी का पिछला आंदोलन है। 25 जुलाई को जंतर मंतर पर पांच सप्ताह से अधिक चले आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। संगठन ने कहा कि सरकार ने उसकी सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना, कुछ दिनों के भीतर इसकी लिखित गारंटी देना, नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और परीक्षा सुधार के पांच सूत्री मांगपत्र पर विचार करना शामिल था।
सीजेपी ने कहा कि वह सद्भावना के आधार पर आंदोलन वापस ले रही है। उसे भरोसा है कि तय शर्तें तय समयसीमा में पूरी होंगी। मंत्री का इस्तीफा हो गया। समझौता हो गया। आंदोलन समाप्त हो गया।
मगर दो दिन बाद, 27 जुलाई को संगठन लिखित गारंटी का इंतजार कर रहा था। उसने सरकार को मंगलवार तक का समय दिया। 25 अगस्त को सीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने कहा कि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं की हैं। संगठन के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार से तीन बार एफआईआर की समेकित सूची मांग चुका था।
सीजेपी ने 5 सितंबर को फिर मार्च करने की घोषणा की। फिर 1 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने एफआईआर रद्द कर दीं। सरकार ने अदालत को बताया कि वह तीन महीने के भीतर पूरे देश के लिए मुआवजा नीति तैयार करेगी। इसके बाद सीजेपी ने अपना प्रस्तावित मार्च रद्द कर दिया।
जरा इस घटनाक्रम को देखिए। 25 जुलाई को समझौता हुआ। 1 सितंबर को एफआईआर रद्द करने का न्यायिक आदेश आया। बीच में 38 दिन लगे। लिखित गारंटी का इंतजार हुआ। फिर आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ी। सर्वोच्च न्यायालय में बार-बार मामला उठा। तब जाकर सरकारी आश्वासन एक लागू होने वाले आदेश में बदला। मगर मुआवजा नीति?
वह अभी भी वादा है। दिसंबर की शुरुआत तक उसे तैयार करने की बात कही गई है। यानी आंदोलन की एक मांग पूरी हुई। दूसरी मांग के लिए नई समयसीमा मिल गई।
और यही पूरी कहानी का सार है।
सरकार के लिए घोषणा करना एक घटना है। नागरिक के लिए उस घोषणा का लागू होना एक लंबी प्रक्रिया। मंत्री के इस्तीफे की खबर तुरंत बनती है। कानून में सजा बढ़ाने की घोषणा सुर्खियां बनती है। अदालत का आदेश खबर बनता है।
मगर उसके बाद फाइल कहां पहुंची, किस अधिकारी ने क्या निर्णय लिया, किस परिवार को कितना मुआवजा मिला और किस छात्र को कब राहत मिली, इसकी खबर कौन रखता है?
यह काम महीनों और अनेक दफ्तरों में बंट जाता है। सरकार को घोषणा करने का श्रेय मिल जाता है। मीडिया को एक बड़ी खबर मिल जाती है। जनता को लगता है कि मामला समाप्त हो गया। जबकि काम अधूरा रहता है।
इसके लिए जरूरी नहीं कि हर अधिकारी की नीयत खराब हो। समस्या व्यवस्था की बनावट में भी है। एक सार्वजनिक घोषणा कहानी को समाप्त कर सकती है, जबकि उसका वास्तविक काम अभी शुरू भी नहीं हुआ होता। फिर जब महीनों बाद वादा पूरा नहीं होता तो उसे पुराने समझौते की अधूरी जिम्मेदारी के बजाय एक नया विवाद मान लिया जाता है।
इस तरह सत्ता की जवाबदेही लगातार टुकड़ों में बंटती रहती है। सीजेपी ने समयसीमाएं तय करके, सरकार के वादों की निगरानी करके और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इस सिलसिले को टूटने नहीं दिया।
मगर यह भी समझना होगा कि हर प्रदर्शनकारी ऐसा नहीं कर सकता। जिस नौजवान की परीक्षा सिर पर है, वह कितने महीने धरने पर बैठेगा? जिस मजदूर को रोज कमाना है, वह कितने दिन अदालत और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाएगा?
आंदोलन चलाना एक काम है। आंदोलन की जीत को लागू करवाना उससे भी लंबा काम। और नागरिक के लिए सबसे महंगी चीज वही है जो सरकार के पास सबसे अधिक है। (जारी)
श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के 19 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर खाने-पीने के सामान, पानी और ईंधन की कमी हो गई है। इसके बावजूद श्रीलंका सरकार फिलहाल उनकी मदद करने से बच रही है। सरकार को डर है कि ईरानी जहाजों को सहायता देने से अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम पैदा हो सकता है। श्रीलंका का कहना है कि वह किसी भी फैसले से पहले अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो के मुताबिक, ये जहाज देश के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर खड़े हैं। हालांकि, श्रीलंका को अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं मिली है कि ईरानी जहाजों की मदद करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से फंसे जहाज श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संडे टाइम्स को बताया कि ये ईरान के तेल टैंकर हैं। उनके मुताबिक, होर्मुज में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से दर्जनों ईरानी जहाज फंसे हुए हैं और अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं। होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। श्रीलंका के अमेरिका और ईरान, दोनों से कारोबारी रिश्ते श्रीलंका के लिए यह फैसला आसान नहीं है। देश अभी आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका व ईरान दोनों उसके कारोबारी साझेदार हैं। श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज दिलाने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका की मदद से कृषि क्षेत्र को खाद्य संकट से उबारने के प्रयास भी किए गए थे। श्रीलंका के अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों को सामान और दूसरी सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय जरूरतों और अमेरिका के साथ अपने रिश्तों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। पहले भी ईरानी जहाज को मदद दे चुका है श्रीलंका करीब सात महीने पहले अमेरिकी टॉरपीडो हमले में ईरान का नौसैनिक जहाज IRIS Dena डूब गया था। इस घटना में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई थी। यह जहाज भारत के निमंत्रण पर आयोजित नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसके बाद एक दूसरे ईरानी जहाज को तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका के बंदरगाह पर लाया गया था। उसके घायल नाविकों का श्रीलंकाई अस्पतालों में इलाज किया गया। जहाज से बचाए गए लोगों और घायल नाविकों को बाद में सुरक्षित ईरान भेज दिया गया था। एक्सपर्ट बोले- हमला होने पर मदद देना नैतिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार दयान जयतिलके ने कहा कि श्रीलंका मुश्किल स्थिति में है और उसकी मदद करने की भी व्यावहारिक सीमाएं हैं। उनके मुताबिक, दुनिया को यह समझना चाहिए कि श्रीलंका जानबूझकर सहायता से इनकार नहीं कर रहा, बल्कि उसे सावधानी से फैसला लेना पड़ रहा है। जयतिलके ने कहा कि ये युद्धपोत नहीं, बल्कि मालवाहक जहाज हैं, जो ईरान से चीन तक तेल ले जाते थे। अगर इन जहाजों पर हमला होता है और वे मदद के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें तुरंत सहायता देना देश की नैतिक जिम्मेदारी होगी। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया:हमलों के डर से ब्रिटेन से 12 बमवर्षक हटे; अमेरिकी सैनिक होटलों में रहने को मजबूर ईरान पर हमला करके अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था, लेकिन अब यही युद्ध उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ईरानी हमलों के बाद अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बदलनी पड़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अगस्त महीने में भारत के खिलाफ 0-1 से टेस्ट सीरीज हारने वाले श्रीलंकाई ऑलराउंडर और मध्यक्रम के बल्लेबाज धन्नजय डीसिल्वा ने टेस्ट कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि धन्नजय डीसिल्वा ना केवल भारत पर वेस्टइंडीज के खिलाफ भी एक टेस्ट गंवा चुके हैं।
भारत के खिलाफ घरेलू धरती पर 2 टेस्ट सीरीज में उनका बल्ला भी खामोश रहा जिसमें एक भी अर्धशतक नहीं आया। ऐसे में टीम के विश्व टेस्ट चैंपियनशिफ फाइनल के अरमानों पर पानी फिर गया।
श्रीलंका के टेस्ट कप्तान धनंजय डिसिल्वा ने तुरंत प्रभाव से कप्तानी से इस्तीफा देते हुए कहा है कि अब अगली पीढी को बागडोर सौंपने का समय आ गया है।अपने कैरियर में 69 टेस्ट खेलकर 13 शतक समेत 4400 से अधिक रन बनाने वाले 35 वर्ष के धनंजय बतौर खिलाड़ी चयन के लिये उपलब्ध रहेंगे।
Sri Lanka’s Test captain, Dhananjaya de Silva, has decided to step down from the captaincy with immediate effect. READ: https://t.co/8IeasaKyun #SriLankaCricket
— Sri Lanka Cricket (@OfficialSLC) October 8, 2026
जनवरी 2024 में टेस्ट कप्तान बने डिसिल्वा ने श्रीलंका क्रिकेट चयन समिति को अपने फैसले से अवगत करा दिया है।उन्होंने चयन समिति को लिखे पत्र में कहा ,‘‘ मेरा मानना है कि अब बागडोर अगली पीढी को सौंपी जानी चाहिये।’’
श्रीलंका क्रिकेट के सीईओ एशले डिसिल्वा ने क्रिकेट के पारंपरिक प्रारूप में योगदान के लिये धनंजय को धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा ,‘‘ श्रीलंका क्रिकेट उन्हें भविष्य के लिये शुभकामना देता है और बतौर कप्तान योगदान के लिये धन्यवाद भी।’’
IND vs PAK Pitch Report: एशियन गेम्स 2026 के क्रिकेट में शनिवार को भारत और पाकिस्तान के बीच धमाकेदार मुकाबला होने वाला है। दोनों टीमें निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में आमने-सामने होंगी। फाइनल से पहले भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर शानदार अंदाज में अपनी जगह पक्की की। वहीं पाकिस्तान ने बांग्लादेश को छह विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट हासिल किया। वहीं अब दोनों टीमें गोल्ड मेडल के लिए एक दूसरे भिड़ेगी। वहीं इस महामुकाबले से पहले फैंस के मन में ये सवाल है कि क्वार्टरफाइनल मुकाबले की तरह फाइनल मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो जाएगा। वहीं अगर मैच रद्द होता है तो किस टीम को फायदा होगा।
भारत ने श्रीलंका को दी मात
भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर शानदार अंदाज में अपनी जगह पक्की की। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने 20 ओवर में 169 रन बनाए और 7 विकेट गंवाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और सिर्फ 45 रन पर पूरी टीम आउट हो गई। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल और अभिषेक शर्मा ने दो-दो विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। वहीं पाकिस्तान ने बारिश से प्रभावित मुकाबले में बांग्लादेश को छह विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे।
कैसा होगा मौसम
भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले एशियन गेम्स के फाइनल से पहले मौसम भी अहम भूमिका निभा सकता है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, मैच के दिन सुबह बारिश होने की संभावना करीब 62 प्रतिशत है, वहीं दोपहर तक इसके घटकर लगभग 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तापमान करीब 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है, जबकि आसमान में लगभग 37 प्रतिशत बादल छाए रहने की संभावना है। ऐसे में बारिश के कारण मुकाबले में रुकावट पड़ने की आशंका बनी हुई है और दोनों टीमों को मौसम की स्थिति पर भी नजर रखनी होगी।
बारिश से रद्द हुआ मैच तो किसे होगा फायदा
2023 के हांग्जो एशियन गेम्स में बारिश के कारण पुरुष क्रिकेट का फाइनल पूरा नहीं हो पाया था। इसके बाद भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ विजेता घोषित किया गया था। लेकिन इस बार निशिन में नियम अलग हैं। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल बारिश की वजह से नहीं हो पाता या मैच का कोई नतीजा नहीं निकलता, तो किसी एक टीम को विजेता नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में दोनों टीमों को संयुक्त रूप से गोल्ड मेडल दिया जाएगा।
कैसी है निशिन की पिच
निशिन के मैदान की पिच बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। यहां गेंद की गति धीमी रहने के साथ उछाल भी हर गेंद पर एक जैसा नहीं रहता, जिससे बल्लेबाजों को शॉट खेलने में परेशानी हो सकती है। पिच पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं और ऐसे हालात में स्पिन गेंदबाजों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। इस मैदान पर आमतौर पर 135 से 145 रन के आसपास का स्कोर बनता है, इसलिए अच्छी गेंदबाजी करने वाली टीम के लिए इस तरह के लक्ष्य का बचाव करना संभव हो सकता है।
भारत और पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग 11
भारत की संभावित प्लेइंग 11: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह
पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग 11: साहिबज़ादा फरहान (कप्तान), सैम अयूब, उस्मान खान (विकेट कीपर), माज़ सदाकत, हसन नवाज, अब्दुल समद, अराफात मिन्हास, अहमद दानियाल, मोहम्मद वसीम जूनियर, अबरार अहमद, सुफ़यान मोकिम
World Cup 2027 Schedule: क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर है। ICC ने 1 अक्टूबर को 2027 पुरुष वनडे वर्ल्ड कप का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है। इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें से 12 टीमें पहले राउंड में खेलेंगी, जबकि इसके बाद 7 टीमें सुपर-7 स्टेज में पहुंचेंगी। वहीं, वर्ल्ड कप का पहला मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होगा पहला मुकाबला
2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली दोनों टीमें भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला मैच 7 अक्टूबर 2027 को केप टाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर खेला जाएगा।
इसके अगले दिन यानी 8 अक्टूबर को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला होगा। यह मैच त्श्वाने में खेला जाएगा। इसी दिन इंग्लैंड और बांग्लादेश भी आमने-सामने होंगे। इन दोनों टीमों के बीच मुकाबला विंडहोक में होगा।
वहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच रोमांचक मुकाबला 10 अक्टूबर को जोहान्सबर्ग में खेला जाएगा, जबकि सह-मेजबान दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला 9 अक्टूबर को केप टाउन में 2019 की उपविजेता टीम न्यूजीलैंड से होगा।
टूर्नामेंट के दोनों सेमीफाइनल 17 और 18 नवंबर को खेले जाएंगे। पहला सेमीफाइनल केप टाउन और दूसरा त्श्वाने में होगा। वहीं, वर्ल्ड कप का फाइनल 21 नवंबर को जोहान्सबर्ग के द वांडरर्स मैदान पर खेला जाएगा।
ODI वर्ल्ड कप 2027 के पहले राउंड में 12 टीमों को छह-छह टीमों वाले दो ग्रुप में बांटा जाएगा। भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और सह-मेजबान जिम्बाब्वे के साथ ग्रुप A में है, जबकि ग्रुप B में सह-मेजबान दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल है। क्वालिफायर के बाद ग्रुप A और B में एक-एक टीम और जोड़ी जाएगी।
ODI वर्ल्ड कप 2027 ग्रुप
| ग्रुप A | ग्रुप B |
|---|---|
| अफगानिस्तान | बांग्लादेश |
| ऑस्ट्रेलिया | इंग्लैंड |
| भारत | दक्षिण अफ्रीका |
| पाकिस्तान | श्रीलंका |
| जिम्बाब्वे | न्यूजीलैंड |
| क्वालिफायर A | क्वालिफायर B |
दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया के कुल 12 वेन्यू पर 2027 का ODI वर्ल्ड कप खेला जाएगा। टूर्नामेंट में कुल 57 मैच होंगे, जो 2 अक्टूबर से 21 नवंबर तक आयोजित किए जाएंगे।
ODI वर्ल्ड कप 2027 का पूरा शेड्यूल
| तारीख | दिन | मुकाबला | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 2 अक्टूबर | शनिवार | क्वालिफायर 1 बनाम क्वालिफायर 3 | विंडहोक |
| 4 अक्टूबर | सोमवार | क्वालिफायर 1 बनाम क्वालिफायर 2 | विंडहोक |
| 6 अक्टूबर | बुधवार | क्वालिफायर 2 बनाम क्वालिफायर 3 | विंडहोक |
| 7 अक्टूबर | गुरुवार | भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया | केपटाउन |
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | पाकिस्तान बनाम अफगानिस्तान | त्श्वाने |
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | इंग्लैंड बनाम बांग्लादेश | विंडहोक |
| 9 अक्टूबर | शनिवार | जिम्बाब्वे बनाम क्वालिफायर A | बुलावायो |
| 9 अक्टूबर | शनिवार | दक्षिण अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड | केपटाउन |
| 10 अक्टूबर | रविवार | भारत बनाम पाकिस्तान | जोहान्सबर्ग |
| 10 अक्टूबर | रविवार | श्रीलंका बनाम क्वालिफायर B | विंडहोक |
| 11 अक्टूबर | सोमवार | जिम्बाब्वे बनाम अफगानिस्तान | बुलावायो |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | ऑस्ट्रेलिया बनाम क्वालिफायर A | पार्ल |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश | कुगोम्पो सिटी |
| 13 अक्टूबर | बुधवार | इंग्लैंड बनाम श्रीलंका | विंडहोक |
| 13 अक्टूबर | बुधवार | दक्षिण अफ्रीका बनाम क्वालिफायर B | पार्ल |
| 14 अक्टूबर | गुरुवार | भारत बनाम अफगानिस्तान | त्श्वाने |
| 15 अक्टूबर | शुक्रवार | पाकिस्तान बनाम क्वालिफायर A | ब्लोमफोंटेन |
| 15 अक्टूबर | शुक्रवार | जिम्बाब्वे बनाम ऑस्ट्रेलिया | हरारे |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | श्रीलंका बनाम बांग्लादेश | डरबन |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड | गक्बेरहा |
| 17 अक्टूबर | रविवार | भारत बनाम क्वालिफायर A | ब्लोमफोंटेन |
| 17 अक्टूबर | रविवार | न्यूजीलैंड बनाम क्वालिफायर B | हरारे |
| 18 अक्टूबर | सोमवार | ऑस्ट्रेलिया बनाम अफगानिस्तान | कुगोम्पो सिटी |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | जिम्बाब्वे बनाम पाकिस्तान | हरारे |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | दक्षिण अफ्रीका बनाम बांग्लादेश | डरबन |
| 20 अक्टूबर | बुधवार | न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका | जोहान्सबर्ग |
| 20 अक्टूबर | बुधवार | इंग्लैंड बनाम क्वालिफायर B | हरारे |
| 21 अक्टूबर | गुरुवार | अफगानिस्तान बनाम क्वालिफायर A | कुगोम्पो सिटी |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान | पार्ल |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | दक्षिण अफ्रीका बनाम श्रीलंका | जोहान्सबर्ग |
| 23 अक्टूबर | शनिवार | इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड | गक्बेरहा |
| 23 अक्टूबर | शनिवार | बांग्लादेश बनाम क्वालिफायर B | त्श्वाने |
| 24 अक्टूबर | रविवार | जिम्बाब्वे बनाम भारत | विक्टोरिया फॉल्स |
| 25 अक्टूबर | सोमवार | A2 बनाम B3 | जोहान्सबर्ग |
| 26 अक्टूबर | मंगलवार | B1 बनाम A3 | गक्बेरहा |
| 27 अक्टूबर | बुधवार | B2 बनाम AB4 | त्श्वाने |
| 28 अक्टूबर | गुरुवार | A1 बनाम A2 | विक्टोरिया फॉल्स |
| 29 अक्टूबर | शुक्रवार | B1 बनाम B3 | कुगोम्पो सिटी |
| 30 अक्टूबर | शनिवार | A3 बनाम AB4 | विक्टोरिया फॉल्स |
| 31 अक्टूबर | रविवार | B2 बनाम A1 | जोहान्सबर्ग |
| 1 नवंबर | सोमवार | A2 बनाम B1 | विक्टोरिया फॉल्स |
| 2 नवंबर | मंगलवार | B3 बनाम AB4 | केपटाउन |
| 3 नवंबर | बुधवार | B2 बनाम A3 | डरबन |
| 4 नवंबर | गुरुवार | A1 बनाम B1 | पार्ल |
| 5 नवंबर | शुक्रवार | A2 बनाम AB4 | डरबन |
| 6 नवंबर | शनिवार | B2 बनाम B3 | ब्लोमफोंटेन |
| 7 नवंबर | रविवार | A1 बनाम A3 | केपटाउन |
| 8 नवंबर | सोमवार | B1 बनाम AB4 | डरबन |
| 9 नवंबर | मंगलवार | B2 बनाम A2 | गक्बेरहा |
| 10 नवंबर | बुधवार | A3 बनाम B3 | ब्लोमफोंटेन |
| 11 नवंबर | गुरुवार | A1 बनाम AB4 | गक्बेरहा |
| 12 नवंबर | शुक्रवार | B2 बनाम B1 | केपटाउन |
| 13 नवंबर | शनिवार | A2 बनाम A3 | ब्लोमफोंटेन |
| 14 नवंबर | रविवार | A1 बनाम B3 | डरबन |
| 17 नवंबर | बुधवार | सेमीफाइनल-1 | केपटाउन |
| 18 नवंबर | गुरुवार | सेमीफाइनल-2 | त्श्वाने |
| 21 नवंबर | रविवार | फाइनल | जोहान्सबर्ग |
दक्षिण अफ्रीका ने इससे पहले 2003 में ODI वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। उस टूर्नामेंट में भी फाइनल मुकाबला जोहान्सबर्ग के द वांडरर्स स्टेडियम में खेला गया था।
भारत का ODI वर्ल्ड कप 2027 का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 7 अक्टूबर | गुरुवार | ऑस्ट्रेलिया | केपटाउन |
| 10 अक्टूबर | रविवार | पाकिस्तान | जोहान्सबर्ग |
| 14 अक्टूबर | गुरुवार | अफगानिस्तान | त्श्वाने |
| 17 अक्टूबर | रविवार | क्वालिफायर A | ब्लोमफोंटेन |
| 24 अक्टूबर | रविवार | जिम्बाब्वे | विक्टोरिया फॉल्स |
ऑस्ट्रेलिया के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 7 अक्टूबर | गुरुवार | भारत | केपटाउन |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | क्वालिफायर A | पार्ल |
| 15 अक्टूबर | शुक्रवार | जिम्बाब्वे | हरारे |
| 18 अक्टूबर | सोमवार | अफगानिस्तान | कुगोम्पो सिटी |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | पाकिस्तान | पार्ल |
पाकिस्तान के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | अफगानिस्तान | त्श्वाने |
| 10 अक्टूबर | रविवार | भारत | जोहान्सबर्ग |
| 15 अक्टूबर | शुक्रवार | क्वालिफायर A | ब्लोमफोंटेन |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | जिम्बाब्वे | हरारे |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | ऑस्ट्रेलिया | पार्ल |
अफगानिस्तान का ODI वर्ल्ड कप 2027 का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | पाकिस्तान | त्श्वाने |
| 11 अक्टूबर | सोमवार | जिम्बाब्वे | बुलावायो |
| 14 अक्टूबर | गुरुवार | भारत | त्श्वाने |
| 18 अक्टूबर | सोमवार | ऑस्ट्रेलिया | कुगोम्पो सिटी |
| 21 अक्टूबर | गुरुवार | क्वालिफायर A | कुगोम्प |
जिम्बाब्वे के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 9 अक्टूबर | शनिवार | क्वालिफायर A | बुलावायो |
| 11 अक्टूबर | सोमवार | अफगानिस्तान | बुलावायो |
| 15 अक्टूबर | शुक्रवार | ऑस्ट्रेलिया | हरारे |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | पाकिस्तान | हरारे |
| 24 अक्टूबर | रविवार | भारत | विक्टोरिया फॉल्स |
श्रीलंका के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 10 अक्टूबर | रविवार | क्वालिफायर B | विंडहोक |
| 13 अक्टूबर | बुधवार | इंग्लैंड | विंडहोक |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | बांग्लादेश | डरबन |
| 20 अक्टूबर | बुधवार | न्यूजीलैंड | जोहान्सबर्ग |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | दक्षिण अफ्रीका | जोहान्सबर्ग |
इंग्लैंड के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | बांग्लादेश | विंडहोक |
| 13 अक्टूबर | बुधवार | श्रीलंका | विंडहोक |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | दक्षिण अफ्रीका | गक्बेरहा |
| 20 अक्टूबर | बुधवार | क्वालिफायर B | हरारे |
| 23 अक्टूबर | शनिवार | न्यूजीलैंड | गक्बेरहा |
दक्षिण अफ्रीका के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 9 अक्टूबर | शनिवार | न्यूजीलैंड | केपटाउन |
| 13 अक्टूबर | बुधवार | क्वालिफायर B | पार्ल |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | इंग्लैंड | गक्बेरहा |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | बांग्लादेश | डरबन |
| 22 अक्टूबर | शुक्रवार | श्रीलंका | जोहान्सबर्ग |
न्यूजीलैंड के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 9 अक्टूबर | शनिवार | दक्षिण अफ्रीका | केपटाउन |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | बांग्लादेश | कुगोम्पो सिटी |
| 17 अक्टूबर | रविवार | क्वालिफायर B | हरारे |
| 20 अक्टूबर | बुधवार | श्रीलंका | जोहान्सबर्ग |
| 23 अक्टूबर | शनिवार | इंग्लैंड | गक्बेरहा |
बांग्लादेश के ODI वर्ल्ड कप 2027 के मैचों का शेड्यूल
| तारीख | दिन | प्रतिद्वंद्वी | वेन्यू |
|---|---|---|---|
| 8 अक्टूबर | शुक्रवार | इंग्लैंड | विंडहोक |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | न्यूजीलैंड | कुगोम्पो सिटी |
| 16 अक्टूबर | शनिवार | श्रीलंका | डरबन |
| 19 अक्टूबर | मंगलवार | दक्षिण अफ्रीका | डरबन |
| 23 अक्टूबर | शनिवार | क्वालिफायर B | त्श्वाने |
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महिला क्रिकेट टीम ने मंगलवार को आइची के निशिन में कारोजी एथलेटिक पार्क में खेले गए फाइनल में श्रीलंका को हराकर भारत को एशियन गेम्स 2026 में पहला स्वर्ण पदक दिलाया। हांगझोउ 2023 के गोल्ड मेडल मैच की तरह ही इस मुकाबले में भी भारतीय महिलाओं ने 147 रनों से जीत हासिल की और एशियन गेम्स क्रिकेट चैंपियन के तौर पर अपना दबदबा बनाए रखा।
स्मृति मंधाना ने 45 गेंदों में 79 रन बनाए, जिससे भारत ने 216/3 का स्कोर खड़ा किया। यह एशियन गेम्स में महिला टी 20 क्रिकेट का सबसे बड़ा स्कोर है। दीप्ति शर्मा ने छह रन देकर तीन विकेट लिए। एशियन गेम्स 2026 में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है। श्रीलंका की टीम को लगातार दूसरे संस्करण में सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा, जबकि पाकिस्तान ने बंगलादेश को तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ़ में हराकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया।
स्मृति मंधाना की 45 गेंदों में 79 रनों की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने 216/3 का स्कोर बनाया, जो इस महाद्वीपीय टूर्नामेंट का एक रिकॉर्ड है। शेफाली वर्मा और ऋचा घोष दोनों ही दुर्भाग्यशाली रहीं और अर्धशतक बनाने से चूक गईं। इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों ने श्रीलंका को 69 रनों पर समेट दिया और आसानी से जीत हासिल की। भारतीय ओपनर स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाज़ों का डटकर सामना किया और पावरप्ले में 66 रन जोड़े। शेफाली, जिन्होंने बंगलादेश के खिलाफ़ सेमीफ़ाइनल में शतक लगाया था, ने श्रीलंका की कप्तान और स्टार ऑलराउंडर चामरी अथापथु के पांचवें ओवर में तीन छक्के जड़े।
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मंधाना ने 30 गेंदों में अपनी 37वीं टी 20 फिफ्टी पूरी की, जबकि शेफाली (48) हाफ-सेंचुरी से दो रन दूर रह गईं; 10वें ओवर में 17 साल की स्पिनर चमुडी प्रबोदा ने उन्हें आउट किया, तब भारत का स्कोर 98 रन था। इसके बाद हरमनप्रीत ने स्मृति के साथ 42 रनों की शानदार साझेदारी की, लेकिन 15वें ओवर में कविशा दिलहारी ने भारतीय कप्तान को कैच आउट करा दिया। स्मृति भी पूरी पारी नहीं खेल पाईं; स्कोरिंग रेट बढ़ाने की कोशिश में सुगंदिका कुमारी के 17वें ओवर में वह आउट हो गईं। हालांकि, ऋचा घोष की तूफानी पारी (22 गेंदों में नाबाद 49 रन) और श्रीलंकाई गेंदबाजों की खराब गेंदबाजी की बदौलत भारत ने 216/3 का स्कोर बनाया – जो एशियाई खेलों में महिला क्रिकेट का अब तक का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इससे पहले यह रिकॉर्ड हांगकांग चीन के नाम था, जिसने हांगझोऊ 2023 में क्वार्टर-फाइनल क्वालीफायर में मंगोलिया के खिलाफ 202/4 रन बनाए थे।
श्रीलंका की ओर से चामरी अथापथु ने रन बनाने की कोशिश में टीम की कमान संभाली, लेकिन भारत को शेफाली ने शुरुआती सफलताएं दिलाईं; उन्होंने तीसरे और पांचवें ओवर में क्रमशः इमेशा दुलानी और हसिनी परेरा को आउट किया। दीप्ति शर्मा ने सबसे अहम विकेट लिया और पावरप्ले के ठीक बाद अथापथु (21 गेंदों में 29 रन) को आउट किया। इस विकेट ने श्रीलंकाई टीम की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया। लगातार अंतराल पर विकेट गिरते रहे और श्रीलंकाई पारी 15.4 ओवर में सिमट गई।
दीप्ति भारतीय गेंदबाजों में सबसे सफल रहीं और उन्होंने 3/6 के आंकड़े दर्ज किए। शेफाली वर्मा, श्री चरानी और श्रेयंका पाटिल ने भी दो-दो विकेट लिए। संक्षिप्त स्कोर: भारत महिला टीम ने 20 ओवर में 216/3 (स्मृति मंधाना 79, ऋचा घोष 49 नाबाद; चमुडी प्रबोदा 1/34) बनाए और श्रीलंका को 15.4 ओवर में 69/10 (चमारी अथापथु 29; दीप्ति शर्मा 3/6) पर समेटकर 147 रनों से जीत हासिल की।
Pic Credit : UNI
विदेशों में घूमना हर किसी का सपना होता है। अगर आप भी विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए ये काम की खबर है। विदेश घूमने का प्लान करने से पहले उस देश के वीजा और एंट्री नियम को एक बार जरूर चेक कर लें। कई देशों ने भारतीय यात्रियों के लिए वीजा के नियम बदले हैं। कुछ देशों ने ई-वीजा की सुविधा शुरू की है, वहीं कुछ ने एंट्री के नियमों में बदलाव किया है। इसलिए विदेश जाने से पहले नए नियमों की जानकारी जरूर ले लें, ताकि सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में
लाओस
लाओस जाने वाले भारतीय पासपोर्ट धारक ई-वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, यह इलेक्ट्रॉनिक वीजा (ई-वीजा) केवल कुछ तय किए गए एंट्री पॉइंट्स पर ही मान्य है। इसलिए यात्रा से पहले लाओस की आधिकारिक ई-वीजा वेबसाइट पर जाकर यह जरूर जांच लें कि किन बॉर्डर चेकपॉइंट से प्रवेश की अनुमति है। साथ ही, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, वीजा की वैलिडिटी और वीजा मिलने में लगने वाले समय की जानकारी भी पहले से ले लें, ताकि यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो।
श्रीलंका
25 मई 2026 से श्रीलंका भारत समेत 40 देशों के नागरिकों को 30 दिनों का मुफ्त टूरिस्ट इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल परमिट यानी ईटीए दे रहा है। ये परमिट मुफ्त है, लेकिन यात्रियों को श्रीलंका जाने से पहले इसे लेना जरूरी होगा। भारतीय यात्री डबल एंट्री परमिट के साथ 30 दिनों तक श्रीलंका में रह सकते हैं। दूसरी बार श्रीलंका जाना पहली यात्रा के समय मिली परमिट की वैधता के दौरान ही होना चाहिए। यात्रा से पहले यात्रियों को श्रीलंका की आधिकारिक ईटीए वेबसाइट पर जाकर नए नियम और जरूरी शर्तें जरूर जांच लेनी चाहिए।
चिली
चिली ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए डिजिटल वीजा एप्लिकेशन की सुविधा शुरू की है। अब भारतीय यात्री केवल कागजी प्रक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय ऑनलाइन वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले यात्रियों को अपनी एलिजिबिलिटी वेरिफाई करनी चाहिए और जरूरी डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन जमा करने होंगे। यात्रा की योजना पक्की करने से पहले चिली के आधिकारिक दूतावास या वाणिज्य दफ्तर की वेबसाइट पर वीजा प्रक्रिया और आवेदन पूरा होने में लगने वाले समय की जानकारी जरूर ले लें।
घाना
घाना अब भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए ई-वीजा की सुविधा देता है, जिससे एलिजिबिल यात्री घाना जाने से पहले ऑनलाइन वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले यात्रियों को घाना की आधिकारिक इमिग्रेशन या एम्बेसी की वेबसाइट पर यह जांच लेना चाहिए कि यात्रा के किस उद्देश्य के लिए अनुमति है, कौन-कौन से जरूरी दस्तावेज देने होंगे, कितनी फीस लगेगी और वीजा कितने समय तक मान्य रहेगा। इससे यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।
वेनेजुएला
वेनेजुएला जाने वाले भारतीय यात्री इलेक्ट्रॉनिक वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, वहां प्रवेश के नियम यात्रा के उद्देश्य और कितने दिनों के लिए जाना है, इसके आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए यात्रा की तैयारी शुरू करने से पहले यात्रियों को अपनी पात्रता और जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
ईरान
ईरान जाने वाले भारतीय यात्रियों को यात्रा से पहले ई-वीजा के लिए आवेदन करना जरूरी है। यात्रियों को यह नहीं मानना चाहिए कि ईरान पहुंचने के बाद उन्हें अपने आप वीजा मिल जाएगा। यात्रा में आखिरी समय पर परेशानी से बचने के लिए पहले ही वीजा के लिए जरूरी कागजात, आवेदन की प्रक्रिया, वीजा मिलने में लगने वाला समय और किन जगहों से ईरान में प्रवेश की अनुमति है, इसकी जानकारी जरूर जांच लें।
इन बातों का जरूर रखें ध्यान
सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये हैं कि वीजा और विदेश यात्रा के नियम कभी भी बदल सकते हैं। इसलिए टिकट बुक करने से पहले जिस देश में जाना है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वीजा और एंट्री के नए नियम जरूर चेक कर लें। विदेश यात्रा पर जाने से पहले अपना पासपोर्ट जरूर जांच लें कि वह तय अवधि तक वैलिडिटी है या नहीं। साथ ही ई-वीजा या यात्रा की अनुमति, वापसी या आगे की फ्लाइट का टिकट, होटल की बुकिंग और पर्याप्त पैसे होने का सबूत अपने पास रखें। अगर जरूरी हो तो ट्रैवल इंश्योरेंस भी करा लें।

भारत के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बाएं हाथ के श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनूशा मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड तो नहीं जीत पाए क्योंकि उनकी टीम को 0-1 से सीरीज गंवानी पड़ी थी लेकिन अपनी सधी हुई बल्लेबाजी के कारण उन्होंने प्लेयर ऑफ द मंथ का अवार्ड पा लिया।
कोलंबो टेस्ट में भारतीय गेंदबाजो के सामने दोनों पारियों में उन्होंने शतक जमाया पहली पारी में उन्होंने 102 रन बनाए।सोनल दिनूशा ने 2 टेस्ट की सीरीज में न्यूनतम स्कोर 84 रनों का रहा है। यह ही वह पारी थी जब वह शतक नहीं लगा सके। सोनल दिनूशा ने गॉल टेस्ट की पहली पारी में भी शतक लगाकर भारतीय टीम को फॉलोऑन नहीं देने दिया था हालांकि कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में उनका यह प्रयास विफल गया।सोनल दिनूशा पहली बार भारत के सामने खेल रहे हैं और वह 3 टेस्ट शतक लगा चुके हैं। ट्रेविस हेड को इतने शतक लगाने के लिए भारत के खिलाफ 4 सीरीज खेलनी पड़ी थी।
Performances in the #WTC27 series against India help Sri Lanka batter Sonal Dinusha claim the ICC Men’s Player of the Month award for August https://t.co/Vb2BVtcRPK
— ICC (@ICC) September 18, 2026
सोनल दिनूशा ने कोलंबो टेस्ट मैच के चौथे दिन भी अपना शतक पूरा किया और पांचवे दिन भी, यह बताता है कि उनकी फिटनेस किस स्तर की है। अपने इस प्रदर्शन के कारण वह भारत बनाम श्रीलंका सीरीज के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बन कर उभरे हैं। दो पारियों में दो शतक लगाने के कारण वह मैन ऑफ द मैच मैन ऑफ द मैच चुने गए।

बुधवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों से पहले, ट्रांसपोर्ट में भारी देरी के कारण कई देशों और क्षेत्रों के एथलीट और अधिकारी चुबू सेंट्रेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित वेन्यू, आइची स्काई एक्सपो में फंस गए।कई देशों के दल अपने आधिकारिक ठहरने की जगह तक जाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे, क्योंकि ऑन-साइट सिस्टम में बड़ी संख्या में एथलीटों की जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे वे पहले से तय शटल बसों में नहीं चढ़ सके। इस समस्या के लिए कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।
चीनी दल के सदस्यों का एक समूह, जिसमें कई राष्ट्रीय टीमें शामिल थीं, स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग 12:15 बजे एयरपोर्ट पहुंचा। सिस्टम में उनकी कुछ जानकारी नहीं मिल सकी, जिससे समूह शटल बसों में नहीं चढ़ सका।
इस अव्यवस्था से कई देशों और क्षेत्रों के दल प्रभावित हुए। भारत की रोइंग टीम के एक कोच ने बताया कि उनकी टीम सुबह 10 बजे पहुंची थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट के लिए चार घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा; उनसे पहले पहुंची टीमों को भी ऐसी ही देरी का सामना करना पड़ा। एक दल सदस्य के अनुसार, चीन की जिम्नास्टिक टीम के 21 सदस्यों में से केवल दो ही ऑन-साइट सिस्टम में मिल सके, जिससे पूरी टीम फंस गई।
INDIAN ATHLETES LEFT STRANDED IN NAGOYA DURING ASIAN GAMES!
Indian athletes reportedly waited for more than 14 hours for accommodation after arriving in Nagoya for the Asian Games.
Athletes from Vietnam, China, South Korea and Thailand were also reportedly a
Credits -…
— The Khel India (@TheKhelIndia) September 17, 2026
थके-हारे एथलीट एयरपोर्ट टर्मिनल के ठीक बाहर आइची स्काई एक्सपो में घंटों इंतजार करते रहे। कई चीनी एथलीटों ने इस खाली समय का इस्तेमाल ट्रेनिंग के लिए किया और वार्म-अप के लिए योग मैट बिछाए। चीनी दल के एक अधिकारी ने कहा, “किसी ने हमें रवानगी का सही समय नहीं बताया। यहां तक कि स्टाफ और वॉलंटियर्स के पास भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।”
दोपहर भर इंतजार का सिलसिला चलता रहा। कजाकिस्तान की शूटिंग टीम ने बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के दो घंटे से अधिक समय तक इंतजार किया। एक वॉलंटियर ने कहा कि यह अव्यवस्था विभागों के बीच खराब तालमेल के कारण लग रही थी। वॉलंटियर ने कहा, “कामकाज के कई हिस्से आपस में जुड़े नहीं हैं। टीमें चाहें तो प्राइवेट ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर सकती हैं, लेकिन उन्हें इसका खर्च खुद उठाना होगा।”
आधिकारिक बसों के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने के कारण, चीन की बैडमिंटन टीम ने एयरपोर्ट की पब्लिक बसों से जाने की कोशिश की, लेकिन सभी के लिए पर्याप्त टिकट नहीं मिल सके। कुछ एथलीट अलग-अलग चले गए, जबकि बाकी वहीं रुके रहे। बाकी बचे बैडमिंटन खिलाड़ियों की मदद नागोया में चीनी कॉन्सुलेट जनरल के स्टाफ़ ने की, जिन्होंने स्थानीय प्रवासी चीनी संपर्कों के ज़रिए चार्टर्ड गाड़ियों का इंतज़ाम किया। आख़िरकार पूरी टीम शाम 4:30 बजे आइची स्काई एक्सपो से रवाना हुई।
Japan’s Asian Games Hosting Is a Mess. India Would Never Hear the End of It.
– Indian athletes were left stranded in Nagoya for more than 12 hours on Wednesday with no rooms ready
– Cabins on the cruise ship also took hours to come through
– The men’s athletics team reached… pic.twitter.com/2iJRmqnYK9— Vipin Tiwari (@Vipintiwari952) September 16, 2026
दूसरी चीनी टीमों को भी काफ़ी देर तक इंतज़ार करना पड़ा। टेबल टेनिस, वुशु और रोइंग टीमों के कुछ सदस्य शाम 5 बजे के आस-पास सरकारी बसों में सवार हुए, जबकि जिम्नास्टिक्स टीम शाम 6 बजे तक वहाँ से नहीं निकल पाई – यानी पहुँचने के लगभग छह घंटे बाद।
कुछ डेलिगेशन के लिए यह परेशानी और भी लंबी चली। स्थानीय समय के अनुसार शाम 7 बजे के आस-पास, श्रीलंकाई डेलिगेशन के एक अधिकारी ने बताया कि घर से निकलने के बाद से टीम का कुल सफ़र और इंतज़ार का समय 24 घंटे तक पहुँच गया था।
पूरे दिन हालात बहुत साधारण रहे। वेन्यू पर सिर्फ़ पीने का पानी उपलब्ध था, खाने-पीने की कोई चीज़ नहीं थी। एक थके हुए एथलीट ने कहा, “मुक़ाबलों के मुक़ाबले मैदान के बाहर की ये परेशानियाँ झेलना ज़्यादा मुश्किल है।”गेम्स से पहले लॉजिस्टिक्स में आई इस गड़बड़ी ने मेज़बान की इवेंट को सुचारू रूप से चलाने की क्षमता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

