हिमाचल प्रदेश के मैक्लॉडगंज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसके वायरल होने के बाद लोगों के सिविक सेंस को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वीडियो में दिख रहा कि लोग कई पर्यटन स्थलों पर लोग घूमने के बाद प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट और दूसरी चीजें वहीं फेंक दिए हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा पड़ा दिखाई दे रहा है। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को याद दिलाया है कि पर्यटन स्थलों को साफ रखना और कचरा सही जगह पर फेंकना सभी की जिम्मेदारी है।
वायरल हो रहा वीडियो
वीडियो में दिख रहे नजारे देखकर लोग नाराजगी जता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार जागरूक करने के बावजूद पर्यटन स्थलों पर लोग जिम्मेदारी से पेश क्यों नहीं आते। इस घटना ने एक बार फिर पर्यटकों के व्यवहार और सार्वजनिक जगहों पर नियमों का पालन करने की जरूरत को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
चारों तरफ फैला है कचरा
सस्टेनिफाई ने हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के पास स्थित मैक्लॉडगंज का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जिसे बाद में X पर भी पोस्ट किया गया। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा फैला दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति जैसे-जैसे सड़क पर आगे बढ़ता है, रास्ते के दोनों तरफ फैला कचरा साफ नजर आता है। वहां प्लास्टिक के रैपर, पुराने कपड़े और कागज समेत कई तरह की गंदगी पड़ी हुई थी। पर्यटकों की इस लापरवाही के कारण खूबसूरत पहाड़ी रास्ता कूड़े के ढेर में बदल गया, जिससे इलाके की सुंदरता खराब होती दिखाई दी।
Condition of Mcleod Ganj.
Next time you hear someone saying Switzerland.. Send this video.
Himachal needs to start promoting trash tourism now.. Come volunteer to clean and get a room and food for free for a few days.
वीडियो शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “मैक्लॉडगंज की हालत देखिए। अगली बार जब कोई इसे स्विट्जरलैंड जैसा बताए, तो उसे यह वीडियो जरूर दिखाएं। हिमाचल को अब कचरा साफ करने वाले पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए, जहां लोग सफाई के लिए स्वयंसेवक बनें और बदले में उन्हें कुछ दिनों तक मुफ्त में रहने और खाने की सुविधा मिले।” वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई और पहाड़ी इलाकों में कचरा फैलाने वाले पर्यटकों की आलोचना की।
यूजर ने किया ये कमेंट
लोगों ने पर्यटकों से अपील की कि वे कचरा पहाड़ों पर फेंकने के बजाय अपने साथ वापस ले जाएं। इस घटना ने हिमाचल में बढ़ते पर्यटन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर फिर चिंता बढ़ा दी है। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा, “यह बेहद शर्मनाक है। हर तरफ प्लास्टिक के कवर और बोतलें दिखाई दे रही हैं। तमिलनाडु के ऊटी और पूरे नीलगिरी जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध है। फिर हिमालयी राज्य भी ऐसा नियम क्यों नहीं लागू कर सकते?”
दूसरे यूजर ने लिखा, “यहां पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा है और लोगों में नागरिक जिम्मेदारी की कमी है। इसके अलावा, नगर निगम की व्यवस्था भी बेहद कमजोर है। सफाई के लिए स्वयंसेवक मौजूद हैं, लेकिन इस खूबसूरत शहर को बचाने के लिए पर्यटकों पर जुर्माना लगाना और उनकी संख्या सीमित करना जरूरी है।” एक अन्य यूजर ने सहमति जताते हुए कहा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यह सोचकर भी बहुत दुख होता है कि हमारे हिमाचली भाई-बहनों को इन हालात में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।”
शिमला (Shimla): हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में विंटर सीजन ने तय समय से पहले दस्तक दे दी है। बुधवार को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के एक्टिव होने से धौलाधार रेंज, मनाली और लाहौल-स्पीति की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। इसका सीधा असर टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी पर दिखने लगा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, चंबा के सच पास में 1 फीट तक बर्फ गिरी है। सुराल में 3 इंच बर्फ रिकॉर्ड की गई है। बर्फबारी के बाद लाहौल पुलिस ने एहतियातन 3 बड़े हाईवे – रोहतांग से सरचू, दारचा से शिंकू ला और ग्राम्फू से बटल को बंद कर दिया है।
100 गाड़ियां फंसी, पुलिस ने किया रेस्क्यू
भारी बर्फबारी के कारण गोंदला के पास करीब 100 पर्यटक वाहन फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर निकाला। लाहौल-स्पीति पुलिस ने पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है कि बिना मौसम की जानकारी के हाई-एल्टीट्यूड एरिया में न जाएं।
धर्मशाला में बुधवार को न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। बर्फबारी के बाद धौलाधार का नजारा साफ हुआ तो बड़ी संख्या में लोग इसे देखने बाहर निकले। मनाली में भी ऊपरी इलाकों में बर्फ और निचले इलाकों में बारिश से ठंड बढ़ गई है।
टूरिज्म कारोबार को बूस्टर डोज की उम्मीद
हिमाचल होटल एसोसिएशन के मुताबिक, अक्टूबर में हुई इस पहली बर्फबारी से विंटर टूरिज्म को बड़ा फायदा होगा। पिछले साल अक्टूबर अंत तक बर्फ नहीं गिरी थी, जिससे बुकिंग 30% कम रही थी। इस बार अर्ली स्नोफॉल से दिवाली और क्रिसमस सीजन की एडवांस बुकिंग 20-25% बढ़ने की उम्मीद है।
IMD का लेटेस्ट अपडेट
मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि शुक्रवार तक राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। शनिवार से पूरे प्रदेश में मौसम साफ हो जाएगा और तापमान में और गिरावट आएगी। किसानों के लिए ये बर्फबारी सेब और गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
रूपिन दर्रे में बर्फ का कहर, 2,000 से ज्यादा भेड़-बकरियां दबने की आशंका
शिमला, 30 सितंबर (PTI) हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भारी बर्फबारी से हालात बिगड़ गए हैं। सांगला और डोडरा-क्वार के बीच रूपिन दर्रे में 2,000 से ज्यादा भेड़-बकरियों के बर्फ में दबे होने की आशंका है। इलाके में तीन फीट से ज्यादा बर्फ जमा हो गई है।
26 सितंबर को रूपिन दर्रे के ऊंचाई वाले इलाके में तेज बर्फबारी शुरू हो गई। उस समय चरवाहे अपने पशुओं को लेकर नीचे लौट रहे थे। मौसम अचानक खराब होने पर कुछ चरवाहे वापस आ गए, लेकिन जो दर्रा पार कर चुके थे, उनके लिए लौटना मुश्किल हो गया। ज्यादा बर्फ के कारण भेड़-बकरियां भी रास्ते में फंस गईं और कई के बर्फ में दबने की जानकारी सामने आई।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के मुताबिक, शुरुआती अनुमान में करीब 2,000 भेड़-बकरियों के फंसे होने की बात सामने आई है। अभी यह साफ नहीं है कि इनमें से कितने पशु मारे गए हैं। बर्फ हटने के बाद ही पशुओं की सही संख्या और नुकसान का पता चल सकेगा। कुछ बड़े पशुओं के सींग बर्फ के ऊपर दिखाई दे रहे हैं, जबकि बाकी पशुओं की स्थिति का अभी पता नहीं है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद डोडरा-क्वार के SDM को रेस्क्यू टीम बनाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद स्थानीय चरवाहों के साथ होम गार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की टीम तैयार की गई। यह टीम बुधवार को रूपिन दर्रे की चोटी तक पहुंच गई। वहां से सैटेलाइट फोन के जरिए प्रशासन को हालात की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों की एक और टीम भी जल्द मौके पर भेजी जाएगी।
प्रशासन की टीम मौके पर हालात देख रही है। बर्फ हटने के बाद ही पशुओं के नुकसान का सही पता चलेगा। इसके बाद प्रभावित चरवाहों को मदद दी जाएगी। सरकार ने नुकसान की भरपाई के लिए राहत पैकेज देने की बात कही है। अभी तक किसी इंसान के घायल होने की खबर नहीं है।
At Autocar India, we spend a lot of time talking about great driving roads. Smooth tarmac, flowing corners and fast highways are all very well, but some of the most memorable drives begin when the good roads run out. That’s the idea behind Terrible Roads to Terrific Places, a series in which we take the new Renault Duster to some of India’s most spectacular destinations, using the roads, and sometimes what passes for roads, to get there.
For the first drive, we picked Kibber, more than 4,200 metres above sea level in Himachal Pradesh’s Spiti Valley. Surrounded by enormous mountains and vast, stark landscapes, it’s the sort of place that looks almost too remote to be real. Getting there, however, is the tricky bit.
THE EASY PART
Our journey began in Chandigarh, with roughly 400km between us and Kibber. That might not sound like much, but distances on mountain roads aren’t like those on an expressway.
There was also the small matter of all the camera equipment and luggage that comes with a road-trip shoot. Thankfully, the Duster’s 700-litre boot (incidentally, that’s the largest in its segment) swallowed it all without complaint. With Kibber set in the navigation and Manali marked as our overnight stop, we headed out.
With 163hp on tap, making a splash is mandatory.
The first part of the drive was almost civilised. Chandigarh’s wide roads and smooth surfaces gave me time to settle into the Duster. The 10.1-inch infotainment screen, with Google services integration, handled navigation, calls and music, while directions also appeared on the 10.25-inch digital driver’s display, lowering the risk of distraction.
Once we left the city, the turbo-petrol engine had some room to stretch its legs. Paired with the six-speed dual-clutch automatic, it made light work of the highway, and then the foothills arrived; corners tightening, and I found myself reaching for the paddles. The scenery was getting better, and the driving was getting more interesting.
The Duster was ready for more, but we had earned a warm break.
By evening, we were in Manali. The Duster felt ready to carry on, but we weren’t. The real test was still ahead.
ROADWORKS AHEAD
The next morning was rainy and quiet, and for a moment, staying put seemed like a very good idea. Everyone we’d spoken to, though, had offered the same warning: enjoy the tarmac while it lasts. They were right.
The transition is gradual with smooth tarmac giving way to broken tarmac, then gravel, and eventually sections where you have to wonder if the road was ever there in the first place. Corners tighten even more, roadworks appear and the surface becomes increasingly unpredictable.
Not every delay is unwelcome, especially with a view like this.
This is where the Duster started showing a different side. With 212mm of ground clearance, negotiating rocks and broken surfaces wasn’t especially worrying. More impressive was the suspension. On narrow sections with no guardrails, deep ruts and rough surfaces, remarkably little of the punishment made its way into the cabin. It’s the kind of terrain where you quickly appreciate a car that can take a beating without making every bump your problem.
As we climbed higher, the landscape changed dramatically. The forests disappeared, villages became smaller and the gaps between them longer. Spiti is enormous, empty and almost surreal. Here, a kilometre can feel like five, especially when you’re picking your way through dirt, potholes, loose rocks, washed-away sections and water crossings.
Spiti is best explored from behind the Duster’s wheel.
Then we hit a landslide.
An enormous pile of debris had blocked the road, so we joined the queue and waited while excavators cleared a path. That’s where we met two cyclists heading towards Kaza, one of whom happened to own a Duster back home in France. It was incredible that they were tackling these mountains on two wheels! Suddenly, our journey seemed rather comfortable. Two and a half hours later, we were moving again.
By now, dusk was setting in. The road continued to throw everything at us, from deep ruts and gravel to broken sections and water crossings. These are the moments when you want to have confidence in your car. Ground clearance helps, suspension strength matters and you need enough performance to keep moving when the going gets tough. Oncoming traffic and narrow sections also meant there was often no avoiding the worst of the potholes.
Thankfully, the final stretch to Kibber is paved to perfection.
Despite it all, I never really found myself wishing for all-wheel drive. The Duster just kept going.
PEAKING AT THE SUMMIT
The landslide had delayed our arrival, and we eventually reached Kibber late at night, tired and with no idea what the place looked like. In hindsight, that may have made the next morning even better.
At 4,145m above sea level, Chicham Bridge is Asia’s highest suspension bridge and a sight to behold.
The first thing that struck me when I stepped outside wasn’t the view. It was the silence. There was no traffic, no rush and none of the constant background noise we’re so used to. Just a tiny village surrounded by mountains.
A short drive away, Chicham Bridge hangs dramatically over a vast gorge. Photos don’t quite prepare you for the scale of it. Standing there and looking down, you finally understand the landscape you’ve spent the past couple of days driving through.
No trip to the mountains is complete without a steaming hot plate of momos.
Looking back, the difficult bits quickly become part of the story rather than something to complain about. The landslide, the weather, the slow progress and the hours behind the wheel all fade away, leaving the views, the unexpected encounters and the satisfaction of having made it.
You don’t simply arrive at Kibber. You earn it. And that is exactly what Terrible Roads to Terrific Places is about. Some of India’s most unforgettable destinations aren’t easy to reach, and the road is as much a part of the experience as the destination itself. It helps, of course, to have a capable companion along the way. On this journey, the Renault Duster proved to be exactly that.
Kibber is only the beginning, so imagine where the road, or lack of one, will take us next. In fact, if you stay tuned to this series, you’ll find out soon. But for now, I’ll leave you with a little hint: it’s a lot closer to Autocar India’s home than you think.
मुजफ्फरनगर के रहने वाले सुमित कुमार प्रजापति इन दिनों अपने अनोखे सफर की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। जहां लोग स्पीति वैली जाने के लिए कार, बाइक या एसयूवी का सहारा लेते हैं, वहीं सुमित अपनी ई-रिक्शा लेकर पहाड़ों की ओर निकल पड़े। उनका यह सफर सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मोड़ पर एक नई चुनौती और नया अनुभव सामने आ रहा है। सुमित ने इस यात्रा की शुरुआत 15 अगस्त को की थी। सफर शुरू करते समय उन्होंने इंस्टाग्राम पर बताया था कि वह रोजाना वीडियो के जरिए लोगों को अपनी यात्रा की जानकारी देंगे।
रास्ते में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लोग उनकी ई-रिक्शा को देखकर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और यात्रा किस तरह आगे बढ़ रही है इन सभी चीजों को वह कैमरे में कैद करते रहे। अब तक उन्होंने कुल 27 वीडियो के जरिए अपनी यात्रा की कहानी साझा की है।
मनाली तक पहुंचने का तरीका भी था खास
सुमित के इंस्टाग्राम पेज के मुताबिक, वह अपने दोस्तों के साथ गाड़ी से मनाली पहुंचे। उनकी ई-रिक्शा को ट्रक में लादकर मनाली तक पहुंचाया गया। इसके बाद यात्रा का सबसे दिलचस्प हिस्सा शुरू हुआ। 19 अगस्त को सुमित मनाली से ई-रिक्शा पर सवार होकर अकेले स्पीति वैली की ओर निकल पड़े। पहाड़ों के मुश्किल रास्तों पर तीन पहियों वाली इलेक्ट्रिक सवारी को आगे बढ़ते देखकर लोग भी हैरान रह गए। उनके एक वीडियो पर यूट्यूब इंडिया ने भी प्रतिक्रिया दी और मजेदार अंदाज में लिखा, “मॉडर्न प्रॉब्लम्स को देसी सॉल्यूशन चाहिए।”
‘बैटरी कहां चार्ज होगी?’ लोगों ने पूछा सवाल
जैसे ही सुमित के वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे, लोगों के मन में सबसे पहला सवाल ई-रिक्शा की बैटरी को लेकर उठा। यूजर्स पूछने लगे कि पहाड़ों के बीच आखिर ई-रिक्शा को चार्ज कहां किया जाएगा। सुमित ने बताया कि वह जिस जगह रुकते हैं, वहीं अपनी ई-रिक्शा को चार्ज करते हैं। इतना ही नहीं, किसी आपात स्थिति में काम आने के लिए उन्होंने जेनरेटर भी अपने साथ रखा है।
फैंस की एक बात मानकर बदल दिया सफर का अंदाज
सुमित की पहली वीडियो देखने के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने उनसे कहा कि अगर ई-रिक्शा इतनी दूर जा रही है तो इसमें सवारियां क्यों नहीं बैठाते। सुमित ने इस सुझाव को मान लिया। इसके बाद उन्होंने ई-रिक्शा में सवारियां बैठाकर स्पीति की ओर सफर जारी रखा। इससे उनकी यात्रा का अनुभव और भी अलग हो गया। अब वह सिर्फ अपनी मंजिल की ओर बढ़ने वाले यात्री नहीं थे, बल्कि रास्ते में मिलने वाले लोगों के साथ भी इस अनोखे सफर को साझा कर रहे थे।
12,500 फीट की ऊंचाई पर ई-रिक्शा ने सबको रोका
जैसे-जैसे सुमित ऊंचाई की ओर बढ़े, उनकी ई-रिक्शा लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गई। करीब 12,500 फीट की ऊंचाई वाले पथरीले रास्तों पर तीन पहियों वाली इस सवारी को चलते देखकर कई लोग रुक गए। कुछ लोगों ने सुमित के वीडियो बनाए, कुछ ने उनकी हिम्मत की तारीफ की और कई लोग तालियां बजाते नजर आए। वहीं, कुछ लोगों के लिए यह समझना ही मुश्किल था कि आखिर ई-रिक्शा इतनी खड़ी चढ़ाई और खराब रास्तों को पार कैसे कर रही है।
कुंजुम पहुंचकर बनाया रिकॉर्ड
26 अगस्त को सुमित अपनी ई-रिक्शा लेकर कुंजुम पहुंचे। उन्होंने इसे अपनी यात्रा की बड़ी उपलब्धि बताया और दावा किया कि ई-रिक्शा से वहां तक पहुंचने वाला यह पहला ऐसा सफर है। इस उपलब्धि ने उनकी यात्रा को और खास बना दिया। सोशल मीडिया पर पहले जहां लोग उनकी ई-रिक्शा को लेकर सवाल पूछ रहे थे, वहीं अब उनके सफर की चर्चा उपलब्धि के तौर पर होने लगी।
1 सितंबर को शेयर किए गए वीडियो में सुमित ने अपने सफर के पीछे की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह कभी शहर से दूर पहाड़ों के किसी गांव में जाकर सुकून के कुछ पल बिताए। उनका भी ऐसा ही सपना था, लेकिन उनके पास कार नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने रुकने के बजाय अपनी ई-रिक्शा को ही सफर का साथी बना लिया। सुमित का कहना है कि जहां लोग मुश्किल पहाड़ी रास्तों पर 4×4 गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं वह बैटरी से चलने वाले तीन पहियों के वाहन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनकी कहानी अब सोशल मीडिया पर सिर्फ एक अनोखी यात्रा नहीं, बल्कि इस बात की मिसाल बन गई है कि सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का हौसला भी जरूरी है।
Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पंडोह-तकोली सेक्शन के NH-03 पर देवड़ और हनोगी की दो प्रमुख सुरंगों को 11 सितंबर 2026 से ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। इससे कुल्लू-मनाली और आगे लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के तहत 2.8 किलोमीटर लंबी देवड़ टनल (T4-01) और 650 मीटर लंबी हनोगी टनल (T4-02) तैयार की गई हैं। ये दोनों सुरंगें इस मार्ग के दो बेहद महत्वपूर्ण जाम वाले हिस्सों को खत्म करने में मदद करेंगी।
जाम से मिलेगी राहत
इन दोनों टनल के शुरू होने के बाद प्रभावित सड़क का हिस्सा 6 किलोमीटर से घटकर करीब 3.5 किलोमीटर रह जाएगा। इससे जोगनी माता मंदिर, देवड़ और हनोगी के पास लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। खासकर टूरिस्ट सीजन में इन जगहों पर लोगों को 1 से 2 घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है।
समय की बचत
ये टनल NH-21 के एंड ऑफ पंडोह बाईपास-टकोली सेक्शन के ₹4,465.94 करोड़ के 4-लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। 18.908 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। सड़क पर ट्रैफिक बेहतर होने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मंडी से कुल्लू का सफर करीब 2 घंटे से घटकर लगभग 60 मिनट रह जाएगा।
नितिन गडकरी ने X पर पोस्ट कर दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, ” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए सुरक्षित, तेज और ज्या भरोसेमंद कनेक्टिविटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
A major boost to connectivity in Himachal Pradesh!
major tunnels at Deod and Hanogi are being opened to traffic on 11 September 2026, marking a significant transformation in connectivity on the Pandoh–Takoli section of NH-03.
बता दें कि केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश में ट्रैफिक व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय लोगों की आवाजाही को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
Kangana Ranaut: हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर, शनिवार को BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई।
BJP सांसद ने सांसद निधि (MPLADS) के तहत उपलब्ध फंड का पूरा इस्तेमाल न किए जाने को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। X पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उनके MP फंड में करोड़ों रुपये उपलब्ध थे, लेकिन उनमें से केवल आधी रकम का ही इस्तेमाल किया गया है।
DISHA मीटिंग में कंगना रनौत का गुस्सा: वीडियो
रनौत ने अधिकारियों से कहा, “मुझे ये बेकार के जुमले (झूठे वादे) मत सुनाइए। मुझे हर DISHA कमिटी मीटिंग में यही सुनने को मिलता है।”
उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDOs) से खर्च की रिपोर्ट मांगी। कंगना ने कहा कि इससे पहले अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि काम में कोई रुकावट नहीं है और सांसद निधि की करीब 90 फीसदी रकम खर्च की जा चुकी है।
कंगना ने आगे कहा, “अब बस काम पूरा करके दिखाइए। अब सिर्फ बातें करने का समय नहीं रहा। ये मामले दो साल पुराने हैं। कुछ डेढ़-दो साल पुराने मामले हैं। अब काम पूरा कीजिए और मुझे रिपोर्ट दीजिए कि काम हो गया है! कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए, फिर भी एक भी काम नहीं हुआ। यह कितनी अक्षमता और शर्मनाक बात है।”
रनौत ने आरोप लगाया कि बैठकों में दिखाए गए खर्च के आंकड़े असल खर्च से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने एजेंसी की उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें दावा किया गया था कि MPLADS फंड का 30-40 प्रतिशत हिस्सा धोखाधड़ी करने वाले लाभार्थियों को दिया गया था और उसे वापस नहीं पाया जा सका।
‘अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं’
एक्टर से नेता बनीं रनौत ने कहा कि एक सांसद के तौर पर उनके काम को लेकर नेशनल मीडिया में उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंडी के लोग रुके हुए प्रोजेक्ट्स के बारे में लगातार रील्स पोस्ट कर रहे हैं, जबकि अधिकारी अपने दफ्तरों में उन पर हंस रहे हैं और उन्हें “कोस” रहे हैं।
कंगना ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करें और उपलब्ध MPLADS फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल आज से महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर ऑर्फन एंड विडो यानी अनाथ और विधवा सेस (Orphan and Widow Cess) लगाने की घोषणा की है। यह सेस 11 अगस्त, 2026 की आधी रात से लागू हो गया है। राज्य के टैक्स और आबकारी विभाग ने 11 अगस्त को जारी एक नोटिफिकेशन में कहा कि यह सेस पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल दोनों पर ₹0.60 (60 पैसे) प्रति लीटर की दर से लगाया जाएगा।
नोटिफिकेशन के अनुसार, अनाथ और विधवा सेस हिमाचल प्रदेश में पहली बार बिक्री के समय लगाया जाएगा। यह सेस ‘हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2005’ की धारा 6-A के तहत लागू किया गया है। इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली हुई है। यह सेस मार्च में राज्य विधानसभा द्वारा ‘हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (संशोधन) बिल, 2026’ पास किए जाने के बाद लगाया गया है।
अभी और महंगा होने की आशंका
इस संशोधन ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीज़ल पर ‘अनाथ और विधवा सेस’ लगाने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया। हमारे सहयोगी cnbctv18.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक संशोधित कानून के तहत, सरकार ₹5 प्रति लीटर तक की दर से सेस लगा सकती है। अभी जो 60 पैसे का सेस लगाया गया है। वह कानून में तय अधिकतम सीमा से काफी कम है।
जब यह बिल पेश किया गया था, तो राज्य सरकार ने कहा था कि इस सेस का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की विधवाओं और अनाथों के कल्याणकारी कार्यों के लिए रेवेन्यू का एक खास और टिकाऊ जरिया बनाना है। राज्य सरकार ने पहले कहा था कि यह सेस हिमाचल प्रदेश के भीतर बिक्री के शुरुआती चरण पर वसूला जाएगा, न कि बिक्री के बाद के चरणों में। मार्च में बने कानून में मौजूदा VAT कानून के तहत पहले से लागू टैक्स के अलावा यह सेस लगाने का प्रावधान है।
इस बीच, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के लिए कांग्रेस आलाकमान की अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। सुक्खू ने डिया से बातचीत के दौरान कहा कि कुल्लू से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर जल्द होने वाली पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की बैठक से पहले या बाद में शपथ ले सकते हैं।
Himachal Pradesh Rain Alert: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही तेज बारिश का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तेज से बहुत तेज बारिश दर्ज की गई है। कई इलाकों में भूस्खलन और खराब मौसम की वजह से 150 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। शिमला मौसम विभाग ने 10 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हिमाचल प्रदेश के इस शहरों में काफी ज्यादा बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, कुकुमसेरी राज्य का सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां रात का न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, दिन के समय सबसे अधिक गर्मी हमीरपुर में रही, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
कहां पर बंद है कितनी सड़कें
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के अनुसार, मंगलवार शाम तक हिमाचल प्रदेश में 153 सड़कें बंद थीं। इसके अलावा 58 पेयजल योजनाएं और 191 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी प्रभावित रहे। सबसे ज्यादा दिक्कत मंडी जिले में हुई, जहां 51 सड़कें बंद हैं। वहीं, सिरमौर में 39, कुल्लू में 36, शिमला में 15, कांगड़ा और चंबा में 5-5 तथा ऊना में 2 सड़कें बंद हैं। पिछले 24 घंटों में राज्य के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। सबसे ज्यादा 182.4 मिमी बारिश नाहन में दर्ज की गई। इसके अलावा ददाहू, नैना देवी, जट्टन बैराज, धौलाकुआं, मलरोआं और ओलिंडा में भी अच्छी बारिश हुई, जिससे कई जगहों पर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई।
सिरमौर में हो रही लगातार बारिश
मंगलवार को सिरमौर जिले में लगातार बारिश के कारण जलमुशा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे खानाबदोश समुदाय के 25 लोग बीच में फंस गए। सूचना मिलते ही सिरमौर पुलिस और होम गार्ड की टीम मौके पर पहुंची और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते हुए इस रेस्क्यू अभियान से एक बड़ा हादसा होने से बच गया। सिरमौर के पुलिस अधीक्षक एन.एस. नेगी के अनुसार, नाहन से लगभग 25 किलोमीटर दूर कटासन मंदिर के पास तेज बारिश के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ गया, जिससे चार गुज्जर परिवारों के करीब 25 लोग बीच में फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और होम गार्ड की टीम ने रस्सियों की मदद से मानव श्रृंखला बनाकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
अगर आप पहाड़ों (mountain) की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन लंबी ट्रेकिंग (trekking) और मुश्किल रास्तों से बचना चाहते हैं, तो हिमालय गांव (Himalayan village) आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। यहां आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचकर ऊंचे पहाड़, ठंडी हवा, शांत माहौल और अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती का भरपूर आनंद ले सकते हैं:
Zuluk village (जुलुक गांव का शांत और खूबसूरत नजारा)
सिक्किम (Sikkim) का जुलुक गांव समुद्र तल से करीब 9,400 फीट की ऊंचाई पर है। भारत-चीन (India-China) बॉर्डर के पास बसे इस गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां की घुमावदार सड़कें, बादलों से घिरी पहाड़ियां और शांत वातावरण इसे ऑफबीट ट्रैवल (offbeat travel) पसंद करने वालों के लिए खास बनाते हैं।
Silk Route (सिल्क रूट का यूनिक एक्सपीरियंस)
जुलुक (Zuluk) सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ओल्ड सिल्क रूट (Old Silk Route) का हिस्सा होने के कारण भी मशहूर है। यहां आने वाले टूरिस्ट शानदार व्यू पॉइंट्स (viewpoint) के साथ-साथ इस ऐट्रेड रुट की झलक भी देख सकते हैं। भीड़भाड़ से दूर सुकून भरी छुट्टियां (holiday) बिताने के लिए यह शानदार जगह है।
Nako Village (नाको गांव में मिलेगा हिमालय का अलग रूप)
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के किन्नौर जिले में नाको गांव लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है। स्पीति घाटी के नजदीक यह गांव अपनी बौद्ध संस्कृति, शांत माहौल और खूबसूरत पहाड़ी नजारों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचते ही बदलता प्राकृतिक दृश्य ट्रैवलर को अलग ही एक्सपीरियंस देता है।
adventure and tranquility (एडवेंचर और सुकून का परफेक्ट कॉम्बिनेशन)
नाको (Nako) की खासियत इसकी अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण है। यहां भूरे पहाड़, साफ आसमान, ठंडी हवा और लोकल कल्चर मिलकर ऐसा एक्सपीरियंस देते हैं, जो शहर की भागदौड़ से पूरी तरह अलग होता है। अगर आप ऑफबीट ट्रिप (offbeat trip), नेचर और फोटोग्राफी (photography) के शौकीन हैं, तो जुलुक और नाको दोनों गांव आपकी ट्रैवल लिस्ट (travel list) में जरूर होने चाहिए।