उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर बवाल, भाई के बचाव में उतरे मिका सिंह ने दिया सिंगिंग छोड़ने का चैलेंज, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।

‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा

मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?

मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।

उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल

यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।

अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई

एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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ड्रैगन फ्रूट की खेती से छप्परफाड़ कमाई! महाराष्ट्र के किसान ने अपनाया ऐसा तरीका, आज सालाना ₹2 करोड़ का कारोबार!

किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

पिता ने शुरू की थी खेती

महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।

बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।

धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।

इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक

महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।

3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म

आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।

खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।

ड्रैगन फ्रूट से ₹1.25 करोड़ की सालाना कमाई

Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।

महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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फिल्म ‘प्रहार’ में ललित प्रभाकर निभा रहे हैं यह अहम किरदार | Lalit Prabhakar

फिल्म ‘प्रहार’ में ललित प्रभाकर निभा रहे हैं यह अहम किरदार | Lalit Prabhakar

एक वक्त था, जब पिता को रेलवे स्टेशन पर सोना पड़ता था और पूरा परिवार एक छोटे-से वन रूम किचन में रहता था!
अभिनेता ललित प्रभाकर की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष, त्याग और एक-दूसरे का साथ है।
‘जुळून येती रेशीमगाठी’ में आदित्य के किरदार से लेकर फिल्म ‘प्रहार’ में अजमल कसाब की चुनौतीपूर्ण भूमिका तक… ललित का यह सफर कई सीख देता है।

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ये चायवाला अपनी कमाई का 80% Underprivileged बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है | Mahboob Malik

ये चायवाला अपनी कमाई का 80% Underprivileged बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है | Mahboob Malik

खुद आर्थिक तंगी की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए…
लेकिन आज महबूब मलिक अपनी कमाई का करीब 80% हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं।
कानपुर में चाय बेचने से शुरू हुई उनकी छोटी-सी कोशिश आज 3500+ बच्चों को Education से जोड़ चुकी है।
कभी उनकी चाय की दुकान ही बच्चों की Classroom बनी थी। आज Foundation के जरिए बच्चों को Uniforms, Books, Courses और Teachers की सुविधा मिलती है।
इनमें कोई Doctor बनना चाहता है, तो कोई Engineer।
महबूब की कहानी सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं, बल्कि इस बात की याद है कि किसी के भविष्य को बदलने के लिए हमेशा बहुत कुछ होना जरूरी नहीं।
कभी-कभी शुरुआत करने की जरूरत होती है।
अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा आम इंसान है जो चुपचाप बदलाव ला रहा है, हमें Comment में जरूर बताएं।
और अगर आप Mahboob Malik और Maa Tujhe Salaam Social Foundation की इस पहल में मदद करना चाहते हैं, तो दिए गए Contact details पर संपर्क करें।

@matujhesalamfoundation

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मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #जिसे दुनिया ने बोझ समझा, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
16 साल की ऑटिस्टिक रिद्धिमा बोल नहीं सकतीं, लेकिन अपने प्यार से हर दिन बहुत कुछ कहती हैं।
आज रिद्धिमा अपनी छोटी बहन आध्विका का वैसे ही ख्याल रखती हैं, जैसे कोई बड़ी बहन रखती है—उसे गोद में लेना, उसके चोट लगने पर उसके साथ रोना और हर दिन उसके घर लौटने का इंतज़ार करना।
जिस बच्ची को कभी लोगों ने श्राप कहा था, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
उनकी कहानी याद दिलाती है—किसी बच्चे की काबिलियत उसकी कमियों से नहीं, उसके प्यार और हौसले से पहचानी जानी चाहिए।
@addu_dadyprincess

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Body Shaming से Netflix तक | Stand-up Comedian Sumukhi Suresh Story | Hoemonal | Don’t Tell Amma |

Body Shaming से Netflix तक | Stand-up Comedian Sumukhi Suresh Story | Hoemonal | Don't Tell Amma |

स्कूल में बॉडी शेमिंग झेली, लोगों की हंसी के डर से डांस करना छोड़ दिया…
लेकिन सुमुखी सुरेश ने अपनी कहानी का अंत दूसरों को तय नहीं करने दिया।
नौकरी के साथ कॉमेडी शुरू करने से लेकर Pushpavalli में लीड रोल निभाने और Motormouth के जरिए महिला किरदारों की कहानियों को जगह देने तक, उनका सफर अपने लिए मौके बनाने की मिसाल है।
अपने Netflix स्पेशल Hoemonal में वो बॉडी इमेज, डेटिंग, सिंगलहुड और माँ बनने के सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करती हैं।
आपके हिसाब से, वो कौन-सा मुद्दा है जिस पर महिलाओं को अब चुप नहीं रहना चाहिए?
कमेंट में बताएं।

@sumukhisuresh
@motormouthwriter

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Ashutosh Rana का Ram Leela से Humare Ram तक का सफर | Ashutosh Rana as Ravana

Ashutosh Rana का Ram Leela से Humare Ram तक का सफर | Ashutosh Rana as Ravana

बचपन में देखा एक सपना… जिसे पूरा होने में लग गए कई दशक।
आशुतोष राणा का रामलीला से जुड़ाव और उनके पसंदीदा किरदार को निभाने की ख्वाहिश, आज उन्हें एक बार फिर थिएटर के मंच पर ले आई।
यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता और एक किरदार की नहीं, बल्कि उस जुनून की है जो वक्त के साथ कम नहीं हुआ।
आपने Humare Ram देखा है? अपने विचार कमेंट में बताइए।

@ashutosh_ramnarayan

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Saif Ali Khan: पिता से मजाक करना इब्राहिम को पड़ा भारी, सैफ अली खान बेटे को किया ऐसा रोस्ट फैंस की छूटी हंसी

Saif Ali Khan: सैफ अली खान आखिरकार इंस्टाग्राम पर डेब्यू कर चुके हैं। उनकी पहली पोस्ट ने ही फैंस के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। बीते दिनों उन्होंने पटौदी लाइब्रेरी के पास निकलवाईं तस्वीरें शेयर करके इंस्टाग्राम पर कदम रखा। इन तस्वीरों ने काफी चर्चा बटोरी। यूजर्स की तरह उनके बेटे और एक्टर इब्राहिम अली खान को भी यकीन नहीं हुआ कि उनके पिता इंस्टाग्राम पर आ गए हैं। दोनों के बीच की इस मजेदार नोकझोंक ने सबका ध्यान खींच लिया है।

इब्राहिम अपने पिता को इस प्लेटफॉर्म पर देखकर हैरान रह गए और पूछा, “क्या ये आप हैं, अब्बा? नहीं ना?” जवाब में सैफ ने इब्राहिम की बचपन की एक पुरानी फोटो शेयर की और पूछा कि क्या इसमें दिख रहा छोटा बच्चा मई 2008 में पैदा हुआ इब्राहिम है। इब्राहिम ने भी इस मजाक में साथ देते हुए कहा, “शायद हां।”

उनकी यह मजेदार बातचीत देखकर कई लोग हंस पड़े। पिता-बेटे की इस जोड़ी को ऑनलाइन एक-दूसरे के साथ मजाक करते देखना लोगों को बहुत अच्छा लगा। ‘एले’ (Elle) के साथ एक पुराने इंटरव्यू में इब्राहिम ने बताया था कि वह अपने माता-पिता सैफ अली खान और अमृता सिंह से क्या सीखना या अपनाना चाहते हैं।

इब्राहिम ने कहा, “सच कहूं तो, मुझे उनके शानदार करियर से कुछ भी नहीं चाहिए। मैं एक एक्टर के तौर पर अपना रास्ता खुद बनाना चाहता हूं। शायद मेरे पिता का नेशनल अवार्ड और मेरी मां का डेब्यू – बस इतना ही।”

इब्राहिम अली खान ने अपनी फैशन पसंद के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे उनके पिता, सैफ अली खान, उनके स्टाइल को प्रभावित करते हैं। उनका मानना ​​है कि उनके पिता के कपड़े पहनने का अंदाज एकदम अलग है। इसलिए उनकी नकल करने का कोई मतलब नहीं बनता। हालांकि सैफ की कुछ फैशन पसंदों का इब्राहिम पर असर पड़ा है, जैसे कि जींस, बंदाना, कुर्ते और जैकेट।

साथ ही इब्राहिम ने यह भी कहा कि उन्हें थोड़े मॉडर्न कपड़े पहनना ज्यादा पसंद है। उन्होंने यह भी बताया कि कभी-कभी वह सैफ की टी-शर्ट और बंदाना उधार ले लेते हैं।

बेटे की याद में हर दिन 300 लोगों का भरते हैं 70 साल के बापू | Free Food | 70 YO Dada | Gondal

बेटे की याद में हर दिन 300 लोगों का भरते हैं 70 साल के बापू | Free Food | 70 YO Dada | Gondal

गुजरात के गोंडल में मुफ़्त टिफिन सेवा चलाने वाले 70 साल के चंदू बापू ने 20 साल पहले अपने बेटे को खोने के बाद एक संकल्प लिया था: “मैं किसी को भूखे पेट नहीं सोने दूँगा!”

आज बापू उन लोगों का पेट भरते हैं, जो देख नहीं सकते, बोल नहीं सकते, दिव्यांग हैं, शारीरिक रूप से असमर्थ हैं या बेसहारा हैं। उन्होंने सिर्फ़ 10 लोगों से इस सेवा की शुरुआत की थी, लेकिन आज 300 लोग बापू की गाड़ी का इंतज़ार करते हैं! जैसे ही बापू की गाड़ी पहुँचती है, उनके चेहरों पर मुस्कान आ जाती है।

बापू को आपके साथ की ज़रूरत है। यह कोई संस्था नहीं, बल्कि एक पिता का अपने बेटे के प्रति प्यार है और निःस्वार्थ सेवा है।

आपकी छोटी-सी मदद किसी की भूख मिटा सकती है।
संपर्क करें- 80000 83700

और इस वीडियो को ज़रूर शेयर करें, ताकि आपके एक शेयर से किसी को खाना मिल सके। :heart:
@free_tifin_seva

[Chandu Bapu free food service Gondal Gujarat, 70-year-old man feeding 300 needy people daily, Free tiffin service for disabled people in Gujarat]

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Blindness नहीं बनी सीमा,, आज पियानो से जीत रही है दिल | Aeny Mishra | Blind Girl Inspirational Story

Blindness नहीं बनी सीमा,, आज पियानो से जीत रही है दिल | Aeny Mishra | Blind Girl Inspirational Story

15 स्कूलों ने Aeny को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया, क्योंकि वो देख नहीं सकती थी।
लेकिन उन लोगों ने ये नहीं देखा कि वो क्या-क्या कर सकती है। आज Aeny पियानो बजाती है, कराटे करती है, तीन भाषाएं फर्राटे से बोलती है और All India STEM Exhibition में.अपना Science Project भी पेश कर चुकी है। उसकी Blindness कभी उसकी सीमा नहीं थी। सीमाएं तो उन लोगों की सोच में थीं,
जो उसकी काबिलियत की कल्पना तक नहीं कर पाए।

@aeny_mishra

Blindness नहीं बनी सीमा,, आज पियानो से जीत रही है दिल | Aeny Mishra | Blind Girl Inspirational Story

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