34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta Adopted 34Girls

34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta  Adopted 34Girls

अगर अपने Birthday पर खुद को महंगी कार देने का मौका हो… तो क्या आप वो छोड़कर 34 बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएंगे?
साल था 2009।
Preity Zinta अपने 34वें birthday पर खुद को एक महंगी car gift करने वाली थीं। लेकिन एक बच्ची की कहानी ने उनका पूरा फैसला बदल दिया।
उन्होंने ऋषिकेश के Mother Miracle Orphanage की 34 बच्चियों की पढ़ाई, खाना, कपड़े और परवरिश की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया।
और ये सिर्फ एक birthday decision नहीं था। Preity इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई causes के लिए काम करती रही हैं।
और शायद यही वजह है कि आज भी उनकी ये कहानी याद की जाती है।
क्या आपको लगता है कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना ज्यादा मायने रखता है?

@realpz

34वां Birthday और 34 बच्चियां- प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला | Preity Zinta Adopted 34 Girls

Preity Zinta adopted 34 girls, Preity Zinta social work, Preity Zinta latest movie
Preity Zinta role in Batwara 1947, Preity Zinta HIV awareness campaign, Preity Zinta Comeback

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

“तुम अकेले बेटी नहीं पाल पाओगे”
ये बात विराज़ ने कई बार सुनी।
लेकिन उन्होंने जवाब शब्दों से नहीं दिया।
हर रात कुछ नया सीखा।
हर सुबह एक बेहतर पिता बनने की कोशिश की।
आज उनकी 6 साल की बेटी स्कूल से लौटकर सबसे पहले अपने पापा को ही ढूँढती है, क्योंकि उसके लिए वही उसकी सबसे सुरक्षित जगह हैं।

कुछ कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि प्यार किसी रिश्ते का नाम नहीं, निभाने का नाम है।

क्या आपको लगता है कि Parenting किसी एक Gender की ज़िम्मेदारी है? कमेंट में बताइए।

Single Father Raising Daughter, Parenting Story By Single Father, Single Parent Success Story

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

पहाड़ों में बसने का सपना 71 दिनों में ही टूटा! दिल्ली छोड़ मनाली रहने गए Gen Z कंटेंट क्रिएटर ने लौटकर क्या बताया?

भागदौड़ भरी जिंदगी, शहरों में पलूशन वाली जहरीली हवा और तेज रफ्तार लाइफ से ऊबकर पहाड़ों की शांत वादियों में जा बसना आज हर वर्किंग युवा का सपना लगता है। वर्क फ्रॉम होम और रील्स की दुनिया में हर कोई बस यही सोचता है कि काश! वो भी सब कुछ छोड़कर पहाड़ों में हमेशा के लिए बस जाए। दिल्ली के रहने वाले एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही किया। वो यह देखने मनाली पहुंचे कि क्या सचमुच पहाड़ों की जिंदगी वैसी ही हसीन होती है जैसी तब लगता है जब हम छुट्टियां मनाने पहाड़ पहुंचते हैं या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई छिपी है?

अजय ने 23 मई को दिल्ली से मनाली के पास बसे छोटे से गांव सियाल में शिफ्ट हुए थे। उनका इरादा था कि वो यहां टूरिस्ट बनकर नहीं बल्कि लोकल शख्स की तरह रहें। अजय ने पूरे 71 दिन पहाड़ों में बिताए, इस दौरान करीब 55 वीडियो बनाए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पल इंटरनेट पर लोगों के साथ शेयर किया। लेकिन 2 अगस्त आते-आते उनका यह सपना सिमट गया और वो वापस दिल्ली लौट आए।

pahad 3

जब अनजाने रास्ते और अजनबी लोग धीरे-धीरे अपने से लगने लगेअजय जब मनाली पहुंचे थे तो वहां उनका कोई अपना नहीं था, कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन देखते ही देखते वो वहां की गलियों, रास्तों, हसीन वादियों और लोकल लोगों के करीब आ गए, उनसे घुल-मिल गए। जो काम सिर्फ एक प्रयोग की तरह शुरू हुआ था, वो उनकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन गया।

दिल्ली लौटने के बाद एक वीडियो में उन्होंने मनाली की अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ दो महीने से थोड़े ज्यादा वक्त में जिस जगह से उनका इतना दिल लग गया था, उसे छोड़कर आना दर्दनाक था। अजय के मुताबिक इस तजुर्बे ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहराई और जिंदगी का नया नजरिया दिया। मनाली को अलविदा कहना उनके लिए बेहद मुश्किल था क्योंकि यह सिर्फ कोई ट्रिप खत्म नहीं हो रही थी बल्कि उनकी जिंदगी के एक नए दौर की शुरुआत थी।

https://www.instagram.com/reels/DbQxxKKTZuY/

क्या वाकई पहाड़ों में बसना उतना ही हसीन है, जितना छुट्टियों में दिखता है?

अजय के मनाली शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह एक सीधे से सवाल का जवाब तलाशना था। वो ये कि क्या पहाड़ों में बसकर रहना सचमुच उतना ही मजेदार है जितना वहां कुछ दिनों की छुट्टियां बिताना? मनाली जाने से पहले अजय के दिलो-दिमाग में भी एक आम शहर की तरह ही खूबसूरत ख्यालात थे, पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच काम करना, ढलते और उगते सूरज को देखना, आसपास की वादियों में घूमना, वहां का लोकल फूड ट्राई करना और रात में अलाव के गिर्द बैठकर लोगों से बातें करना।

इनमें से कई हसीन पल उन्होंने जिए भी। लेकिन वहां फुल टाइम रहने पर उन्हें उन मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा जो अक्सर तब नहीं समझ में आतीं जब हम छुट्टियों में पहाड़ घूमने जाते हैं।

मनाली में रहने का खर्च: उम्मीद से कहीं ज्यादा किफायती!मनाली में रहने के दौरान अजय का सबसे हैरान कर देने वाला अनुभव वहां का खर्च रहा। ये उनकी उम्मीद से काफी कम निकला। अजय सियाल गांव में 14000 रुपये महीने के किराये पर अकेले एक वन-बैडरूम फ्लैट में रहते थे। इस किराये में वाई-फाई और बिजली का बिल दोनों शामिल थे। वो ज्यादातर वक्त घर पर ही खाना खुद बनाते थे। राशन और ग्रोसरी पर महीने का लगभग 3500 रुपये खर्च आता था। जब कभी खाना पकाने का मन न होता, तो वो हफ्ते में एक-दो बार बाहर खा लेते थे। इसमें करीब 500 रुपये हफ्ते का खर्च बैठता था।

फिटनेस के शौकीन अजय ने वहां का एक लोकल जिम भी जॉइन किया। वैसे तो जिम की फीस 1800 रुपये महीना थी, लेकिन उन्होंने बात करके इसे 1500 रुपये करवा लिया। अजय को गाड़ियों के बजाय पैदल चलना पसंद था, इसलिए लोकल ट्रैवल पर उनका न के बराबर पैसा खर्च होता था। अगर इन सारे खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो मनाली में अजय का कुल मासिक खर्च करीब 21000 रुपये के आसपास आता था।

वो दिक्कतें जो आम पर्यटकों की नजरों से हमेशा छिपी रह जाती हैं

मनाली ने अजय को सुकून और नए अनुभव तो दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते कुछ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम भी सामने आईं। पहाड़ों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती थी, जिससे ऑनलाइन काम करना या वर्क फ्रॉम होम संभालना बेहद मुश्किल हो जाता था। पहाड़ों का मौसम मजेदार होने के साथ टेंशन देने वाला भी मिला। बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती थी। मानसून के आते ही सड़कें और रोजमर्रा की आवाजाही बेहाल हो गई।

यहां अकेले रहने का मतलब था कि खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई और घर के बाकी सारे काम अजय को खुद ही करने पड़ते थे। मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचने के लिए लंबी और सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। छुट्टियों में ऐसी ट्रैकिंग भले ही रोमांचक लगे लेकिन हर दिन ऐसा करना शरीर को तोड़कर रख देता है। सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अकेलापन। जिस खामोशी और शांति की तलाश में वो दिल्ली से भागे थे, वही सन्नाटा धीरे-धीरे दीमक की तरह उन्हें काटने लगा और भारी अकेलेपन में बदल गया।

अजय ने 3 जुलाई को शेयर किए गए एक वीडियो में इन तमाम दुश्वारियों का जिक्र किया था और बताया था कि आखिर क्यों पहाड़ों में उनका स्टे समय से पहले खत्म होने जा रहा है।

मनाली से लौटकर अब एक नई राह पर हैं अजय

मनाली का अपना 71 दिनों का आशियाना छोड़कर अजय अब वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन पहाड़ों को लेकर उनका नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। इस छोटे से स्टे ने उन्हें एक बड़े शहर से दूर रहने की खूबसूरती और उसकी कड़वी सच्चाइयों दोनों से रूबरू करा दिया। अजय आज भी मनाली में बिताए अपने इन दिनों को जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल मानते हैं। दिल्ली लौटने के बाद अब वो जिंदगी को एक नए अंदाज में खंगाल रहे हैं। उनके हालिया वीडियो बता रहे हैं कि पहाड़ों की बर्फीली वादियों के बाद अब वो समुद्र के शांत किनारों पर अपना वक्त बिता रहे हैं।

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

विदेश से कुछ समय रहकर या घूमकर आने के बाद, हममें से ज्यादातर लोग अपने देश में साफ-सफाई की शिकायत जरूर करते हैं। लेकिन देखिए, बिहार के शुभम कुमार क्या कर रहे हैं?
वे सफाई का जिम्मा खुद उठा रहे हैं।
बिहार के शुभम हर रविवार घाट की सफाई करते है।
एक रविवार से शुरू हुई उनकी ये सफाई मुहिम, आज 1,100+ वॉलंटियर्स तक पहुँच चुकी है।
1.4 लाख किलो से ज्यादा प्लास्टिक हटाई गई।
2 लाख से ज्यादा बोतलें रीसायकल हुईं।
और 16,000+ लोगों की रोजी-रोटी इन सुधरे हुए इलाकों से जुड़ गई।
इस Independence Day, आइए देशभक्ति का एक अलग रूप celebrate करें।
द बेटर इंडिया लेकर आया है #CivicSenseHero—एक ऐसी पहल, जिसके जरिए हम उन आम भारतीयों को सम्मान देंगे, जो सिर्फ़ अपने देश से प्यार नहीं करते, बल्कि अपने कामों से उसकी बेहतर तस्वीर बनाते हैं।

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी Community के लिए कुछ अच्छा कर रहा है और बदलाव ला रहा है?

तो अपने #CivicSenseHero को Nominate करें और उनकी कहानी हम तक पहुंचाएं।

@beinghelperfoundation

Civic Sense Hero, Ganga Cleaning Initiative, Bihar Civic Sense, Civic Sense Hero

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna | Civic Sense Hero

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज वह Scientist हैं और अपनी कहानी खुलकर साझा करती हैं, ताकि उनके जैसा कोई भी बच्चा यह न सोचे कि उसके सपनों की कोई सीमा है।
जो मानते हैं की Trans लोग बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते, ये कहानी उनके साथ शेयर करें। 

@suri_not_sorryy

[Trans Woman in STEM, From India to Germany, Fighting gender norms, Breaking Stereotypes]

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM। #thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज वह Scientist हैं और अपनी कहानी खुलकर साझा करती हैं, ताकि उनके जैसा कोई भी बच्चा यह न सोचे कि उसके सपनों की कोई सीमा है।
जो मानते हैं की Trans लोग बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते, ये कहानी उनके साथ शेयर करें। 

@suri_not_sorryy

[Trans Woman in STEM, From India to Germany, Fighting gender norms, Breaking Stereotypes]

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम

Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

ये भी पढ़ें- Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, 30 मीटर नीचे बन रहा BKC स्टेशन, सूरत स्टेशन ने लिया भव्य आकार

वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

View this post on Instagram

नौकरी छोड़ कर रहे बच्चे की परवरिश | Refining Fatherhood | Breaking Stereotypes | Good Parenting

नौकरी छोड़ कर रहे बच्चे की परवरिश | Refining Fatherhood | Breaking Stereotypes | Good Parenting

अकसर माना जाता है कि माँ बनने के बाद एक महिला को अपने सपने पीछे छोड़ने पड़ते हैं, अपना करियर त्यागना पड़ता है, क्योंकि बच्चे की परवरिश के लिए ये जरूरी है। लेकिन अगर उत्सव शर्मा के जैसी सोच हो तो, बच्चे को संभालना किसी एक की जिम्मेदारी नहीं, माता-पिता दोनों की साझेदारी बन जाता है।

उत्सव ने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर, घर पर रहकर अपने बच्चे को पालने का फैसला किया.. ताकि उनकी पत्नी के सपने ना रुकें।

आज वह Parenting की नई परिभाषा लिख रहे हैं, और लोगों को बताना चाहते हैं कि ये कोई महान काम नहीं, बल्कि हर पिता की ज़िम्मेदारी है।

@the_house_husband_

[A Husband from Madhya Pradesh Redefining Fatherhood, Breaking Stereotypes]

नौकरी छोड़ कर रहे बच्चे की परवरिश | Refining Fatherhood | Breaking Stereotypes | Good Parenting | Madhya Pradesh
#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

Video: हजारों जूतों के बीच गुम हुई एक चप्पल, शख्स ने अपनाया AI का अनोखा जुगाड़; वीडियो हुआ वायरल

हजारों जूतों और चप्पलों के बीच अपनी एक जोड़ी तलाशना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में एक शख्स ने इस उलझन को सुलझाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। बताया जा रहा है कि उसके सामने 1,000 से ज्यादा जोड़ी फुटवियर का ढेर था, जिसमें उसकी एक चप्पल कहीं गुम हो गई थी। हर जोड़ी को खुद देखकर तलाशने में काफी समय लग सकता था, इसलिए उसने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया। शख्स ने पूरे ढेर की तस्वीर खींची और उसे ChatGPT के सामने रखकर अपनी खोई हुई चप्पल पहचानने में मदद मांगी।

दावा है कि AI ने तस्वीर का विश्लेषण कर उसे संभावित जगह बताई, जिससे चप्पल तलाशना आसान हो गया। इस अनोखे इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और यूजर्स ने AI के इस ‘जुगाड़’ पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं।

तस्वीर खींची और AI से मांगी मदद

Instagram यूजर शुभांग बोरकर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में बड़ी संख्या में फुटवियर एक साथ रखे नजर आते हैं। पोस्ट के मुताबिक, इस ढेर में 1,000 से ज्यादा जोड़ी जूते-चप्पल थे और शख्स की एक clog कहीं गुम हो गई थी। उसने पूरे ढेर की तस्वीर खींचकर ChatGPT से पूछा कि उसकी खोई हुई चप्पल कहां हो सकती है। दावा है कि AI ने तस्वीर देखकर उसे सही जगह तक पहुंचने में मदद की और आखिरकार चप्पल मिल गई।

20 लाख से ज्यादा बार देखा गया वीडियो

यह अनोखा AI इस्तेमाल सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आया। वीडियो को 20 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब ChatGPT का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां सुलझाने के लिए भी होने लगा है। एक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता था कि ChatGPT का इस्तेमाल इस तरह भी कर सकते हैं।” वहीं दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि सबसे सुंदर जोड़ी चुनकर वहां से निकल जाना चाहिए।

किसी ने कहा- AI तो रो रहा होगा!

वीडियो पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा, “AI कोने में बैठकर रो रहा होगा।” वहीं किसी ने सुझाव दिया कि इसके लिए Google के AI चैटबॉट Gemini Live का इस्तेमाल किया जा सकता था। हालांकि, कुछ लोगों ने इसे मजाक के बजाय तकनीक के स्मार्ट इस्तेमाल के तौर पर देखा। एक कमेंट में लिखा गया, “आधुनिक समस्याओं के लिए आधुनिक समाधान चाहिए।”

सिर्फ चप्पल नहीं, किताब खोजने में भी AI की मदद

इस पोस्ट ने लोगों को अपने ऐसे अनुभव साझा करने का मौका भी दिया। एक महिला ने बताया कि उसके पति को एक किताब की तलाश थी। बुक सेल में मौजूद किताबों की तस्वीरें खींचकर उन्होंने ChatGPT की मदद ली और कथित तौर पर AI ने किताब का स्थान पहचानने में सहायता की।

Instagram पर यह पोस्ट देखें

AI का बढ़ता अनोखा इस्तेमाल

यह घटना दिखाती है कि लोग AI का इस्तेमाल अब सिर्फ लेख लिखने, सवालों के जवाब पाने या कोडिंग तक सीमित नहीं रख रहे हैं। तस्वीरों के जरिए चीजों को पहचानने और खोजने जैसे छोटे-छोटे कामों में भी AI मददगार साबित हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें बताई गई पूरी घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

देशभक्ति सिर्फ तिरंगा लहराने या नारे लगाने तक सीमित नहीं है।
देश के लिए सही काम करना भी देशभक्ति है। जो सड़क पर कचरा नहीं फैलाता, जो पानी बचाता है, पेड़ लगाता है, जो Traffic Rules और Public Rules का पालन करता है—
वही है असली Civic Sense Hero!
इसी सोच को एक movement बनाने के लिए The Better India ला रहा है #CivicSenseHero Campaign, 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक।
अपने आसपास के उस Hero को पहचानिए, जो India को हर दिन थोड़ा और Better बना रहा है।
उसे Nominate कीजिए, उसकी कहानी दुनिया तक पहुँचाइए और Civic Sense को नया TREND बनाइए!
Nomination के लिए ये फॉर्म भरें-
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScoBw41mDqbS63Bv7hr7XubQwdz6LA2fS0lcqffx3xqF5bXJQ/viewform

Civic Sense Hero, CivicSenseHero Campaign, The Better India, Civic Sense Revolution, Responsible Citizenship, Deshbhakti, Better India#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/