पहाड़ों में बसने का सपना 71 दिनों में ही टूटा! दिल्ली छोड़ मनाली रहने गए Gen Z कंटेंट क्रिएटर ने लौटकर क्या बताया?

भागदौड़ भरी जिंदगी, शहरों में पलूशन वाली जहरीली हवा और तेज रफ्तार लाइफ से ऊबकर पहाड़ों की शांत वादियों में जा बसना आज हर वर्किंग युवा का सपना लगता है। वर्क फ्रॉम होम और रील्स की दुनिया में हर कोई बस यही सोचता है कि काश! वो भी सब कुछ छोड़कर पहाड़ों में हमेशा के लिए बस जाए। दिल्ली के रहने वाले एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही किया। वो यह देखने मनाली पहुंचे कि क्या सचमुच पहाड़ों की जिंदगी वैसी ही हसीन होती है जैसी तब लगता है जब हम छुट्टियां मनाने पहाड़ पहुंचते हैं या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई छिपी है?

अजय ने 23 मई को दिल्ली से मनाली के पास बसे छोटे से गांव सियाल में शिफ्ट हुए थे। उनका इरादा था कि वो यहां टूरिस्ट बनकर नहीं बल्कि लोकल शख्स की तरह रहें। अजय ने पूरे 71 दिन पहाड़ों में बिताए, इस दौरान करीब 55 वीडियो बनाए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पल इंटरनेट पर लोगों के साथ शेयर किया। लेकिन 2 अगस्त आते-आते उनका यह सपना सिमट गया और वो वापस दिल्ली लौट आए।

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जब अनजाने रास्ते और अजनबी लोग धीरे-धीरे अपने से लगने लगेअजय जब मनाली पहुंचे थे तो वहां उनका कोई अपना नहीं था, कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन देखते ही देखते वो वहां की गलियों, रास्तों, हसीन वादियों और लोकल लोगों के करीब आ गए, उनसे घुल-मिल गए। जो काम सिर्फ एक प्रयोग की तरह शुरू हुआ था, वो उनकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन गया।

दिल्ली लौटने के बाद एक वीडियो में उन्होंने मनाली की अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ दो महीने से थोड़े ज्यादा वक्त में जिस जगह से उनका इतना दिल लग गया था, उसे छोड़कर आना दर्दनाक था। अजय के मुताबिक इस तजुर्बे ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहराई और जिंदगी का नया नजरिया दिया। मनाली को अलविदा कहना उनके लिए बेहद मुश्किल था क्योंकि यह सिर्फ कोई ट्रिप खत्म नहीं हो रही थी बल्कि उनकी जिंदगी के एक नए दौर की शुरुआत थी।

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क्या वाकई पहाड़ों में बसना उतना ही हसीन है, जितना छुट्टियों में दिखता है?

अजय के मनाली शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह एक सीधे से सवाल का जवाब तलाशना था। वो ये कि क्या पहाड़ों में बसकर रहना सचमुच उतना ही मजेदार है जितना वहां कुछ दिनों की छुट्टियां बिताना? मनाली जाने से पहले अजय के दिलो-दिमाग में भी एक आम शहर की तरह ही खूबसूरत ख्यालात थे, पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच काम करना, ढलते और उगते सूरज को देखना, आसपास की वादियों में घूमना, वहां का लोकल फूड ट्राई करना और रात में अलाव के गिर्द बैठकर लोगों से बातें करना।

इनमें से कई हसीन पल उन्होंने जिए भी। लेकिन वहां फुल टाइम रहने पर उन्हें उन मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा जो अक्सर तब नहीं समझ में आतीं जब हम छुट्टियों में पहाड़ घूमने जाते हैं।

मनाली में रहने का खर्च: उम्मीद से कहीं ज्यादा किफायती!मनाली में रहने के दौरान अजय का सबसे हैरान कर देने वाला अनुभव वहां का खर्च रहा। ये उनकी उम्मीद से काफी कम निकला। अजय सियाल गांव में 14000 रुपये महीने के किराये पर अकेले एक वन-बैडरूम फ्लैट में रहते थे। इस किराये में वाई-फाई और बिजली का बिल दोनों शामिल थे। वो ज्यादातर वक्त घर पर ही खाना खुद बनाते थे। राशन और ग्रोसरी पर महीने का लगभग 3500 रुपये खर्च आता था। जब कभी खाना पकाने का मन न होता, तो वो हफ्ते में एक-दो बार बाहर खा लेते थे। इसमें करीब 500 रुपये हफ्ते का खर्च बैठता था।

फिटनेस के शौकीन अजय ने वहां का एक लोकल जिम भी जॉइन किया। वैसे तो जिम की फीस 1800 रुपये महीना थी, लेकिन उन्होंने बात करके इसे 1500 रुपये करवा लिया। अजय को गाड़ियों के बजाय पैदल चलना पसंद था, इसलिए लोकल ट्रैवल पर उनका न के बराबर पैसा खर्च होता था। अगर इन सारे खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो मनाली में अजय का कुल मासिक खर्च करीब 21000 रुपये के आसपास आता था।

वो दिक्कतें जो आम पर्यटकों की नजरों से हमेशा छिपी रह जाती हैं

मनाली ने अजय को सुकून और नए अनुभव तो दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते कुछ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम भी सामने आईं। पहाड़ों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती थी, जिससे ऑनलाइन काम करना या वर्क फ्रॉम होम संभालना बेहद मुश्किल हो जाता था। पहाड़ों का मौसम मजेदार होने के साथ टेंशन देने वाला भी मिला। बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती थी। मानसून के आते ही सड़कें और रोजमर्रा की आवाजाही बेहाल हो गई।

यहां अकेले रहने का मतलब था कि खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई और घर के बाकी सारे काम अजय को खुद ही करने पड़ते थे। मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचने के लिए लंबी और सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। छुट्टियों में ऐसी ट्रैकिंग भले ही रोमांचक लगे लेकिन हर दिन ऐसा करना शरीर को तोड़कर रख देता है। सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अकेलापन। जिस खामोशी और शांति की तलाश में वो दिल्ली से भागे थे, वही सन्नाटा धीरे-धीरे दीमक की तरह उन्हें काटने लगा और भारी अकेलेपन में बदल गया।

अजय ने 3 जुलाई को शेयर किए गए एक वीडियो में इन तमाम दुश्वारियों का जिक्र किया था और बताया था कि आखिर क्यों पहाड़ों में उनका स्टे समय से पहले खत्म होने जा रहा है।

मनाली से लौटकर अब एक नई राह पर हैं अजय

मनाली का अपना 71 दिनों का आशियाना छोड़कर अजय अब वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन पहाड़ों को लेकर उनका नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। इस छोटे से स्टे ने उन्हें एक बड़े शहर से दूर रहने की खूबसूरती और उसकी कड़वी सच्चाइयों दोनों से रूबरू करा दिया। अजय आज भी मनाली में बिताए अपने इन दिनों को जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल मानते हैं। दिल्ली लौटने के बाद अब वो जिंदगी को एक नए अंदाज में खंगाल रहे हैं। उनके हालिया वीडियो बता रहे हैं कि पहाड़ों की बर्फीली वादियों के बाद अब वो समुद्र के शांत किनारों पर अपना वक्त बिता रहे हैं।

शहर की नौकरी छोड़ पहाड़ों में बसे पति-पत्नी! 4BHK मकान, फ्री पानी और ₹50 हजार के खर्च का ब्रेकडाउन वायरल

शहर की तेज रफ्तार जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच रहना सुनने में जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही दिलचस्प है यह जानना कि वहां रोजमर्रा की जिंदगी कितने खर्च में चलती है। हिमाचल प्रदेश के मनाली के पास रहने वाले दिव्या भट्ट और सौरभ यादव ने अपनी पहाड़ी जिंदगी की झलक सोशल मीडिया पर साझा की है। दोनों ने गजान गांव में अपना ठिकाना बनाया है और साथ ही होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने अपने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में रहते हुए उनका महीने का खर्च करीब ₹50 हजार आता है।

इस बजट में घर का राशन, बाहर खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च शामिल हैं। खास बात यह है कि आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती ही उनके लिए मनोरंजन का बड़ा जरिया है, इसलिए कई आउटिंग पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता। अब उनका यह सादा लेकिन खूबसूरत लाइफस्टाइल इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

मनाली के पास गांव में बसाया घर

दिव्या और सौरभ ने हिमाचल प्रदेश के गजान गांव को अपना ठिकाना बनाया है। यह गांव मनाली के पास हिमालयी इलाके में स्थित है। दोनों यहां रहते भी हैं और एक होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने इंस्टाग्राम पर ‘Living in the Mountains, Episode 1’ नाम से वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ों में अपनी जिंदगी और हर महीने होने वाले खर्च का हिसाब बताया।

1BHK का किराया करीब ₹15 हजार

कपल जिस 4BHK प्रॉपर्टी में रहता है, उसका इस्तेमाल उनके होमस्टे से भी जुड़ा है। इसलिए उनका रहने का खर्च सामान्य किरायेदार से अलग है। दिव्या के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ रहने के लिए मनाली के पास घर किराए पर लेना चाहता है, तो 1BHK का किराया करीब ₹15,000 और 2BHK का करीब ₹25,000 तक हो सकता है।

घर का खाना, फिर भी ₹15 हजार का फूड बजट

पहाड़ों में रहने के बावजूद कपल खाने पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करता। दोनों ज्यादातर खाना घर पर ही बनाते हैं। दिव्या के मुताबिक, उनकी महीने की ग्रॉसरी करीब ₹10,000 आती है। इसके अलावा बाहर खाने-पीने पर करीब ₹5,000 खर्च हो जाते हैं।

छोटी दूरी के लिए गाड़ी नहीं, पैदल सफर

गांव में रहने का एक फायदा यह भी है कि रोजमर्रा के कई छोटे काम पैदल ही हो जाते हैं। दिव्या ने बताया कि दोनों स्थानीय स्तर पर ज्यादातर जगह पैदल जाते हैं। इसके बावजूद गाड़ी के ईंधन पर करीब ₹3,000 प्रति महीने खर्च हो जाता है।

पानी का बिल जीरो, बिजली करीब ₹1,000

यूटिलिटी खर्च की बात करें तो कपल के लिए पानी पर कोई मासिक खर्च नहीं है। दिव्या के अनुसार, पानी मुफ्त है। वहीं बिजली का बिल करीब ₹1,000 प्रति महीने आता है।

पहाड़ों में घूमना भी बजट में शामिल

पहाड़ों में रहने का सबसे बड़ा फायदा शायद यही है कि घूमने के लिए महंगी जगहों की जरूरत नहीं पड़ती। आसपास प्रकृति आसानी से उपलब्ध है, इसलिए कपल की ज्यादातर आउटिंग मुफ्त ही होती हैं। फिर भी अपने छोटे-मोटे माउंटेन एडवेंचर पर करीब ₹3,000 महीने का खर्च हो जाता है।

करीब ₹50 हजार में पूरा महीना

दिव्या के मुताबिक, ग्रॉसरी, बाहर का खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च जोड़ने पर दोनों का कुल मासिक खर्च करीब ₹50,000 बैठता है। हालांकि, उनका रहने का इंतजाम होमस्टे बिजनेस से जुड़ा है, इसलिए यह खर्च ऐसे व्यक्ति से अलग होगा जो सिर्फ अपने रहने के लिए घर किराए पर लेता है।

लोगों को पसंद आई पहाड़ों वाली जिंदगी

वीडियो सामने आने के बाद लोगों का ध्यान सिर्फ ₹50 हजार के बजट पर नहीं गया, बल्कि कपल की शांत जिंदगी ने भी खूब आकर्षित किया। एक यूजर ने पहाड़ों के नजारे को जिंदगी का ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ बताया। वहीं कई लोगों ने कहा कि असली लग्जरी पैसा नहीं, बल्कि ऐसी जगह मिलने वाला सुकून और शांति है।

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