सिर्फ फिटनेस ही नहीं, गार्डनिंग में भी नंबर 1 हैं मिलिंद सोमन! घर पर खुद उगाते हैं ये सब्जियां

फिटनेस आइकन और मैराथन रनर मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें गार्डनिंग का भी काफी शौक है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता ने 2020 के लॉकडाउन के दौरान घर पर सब्जियां उगाना शुरू किया था। धीरे-धीरे उनका घर का बगीचा एक छोटे से होम फार्म में बदल गया, जहां वे कई तरह की ताजी सब्जियां उगाते हैं। दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर अपने गार्डन और उसमें उगी सब्जियों की तस्वीरें भी शेयर करते रहते हैं।

मिलिंद के घर के गार्डन में कद्दू, लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली, मेथी और पालक जैसी सब्जियां उगती हैं। अंकिता भी कई बार भिंडी और मूली जैसी सब्जियों की झलक दिखा चुकी हैं। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से बड़ा-सा कद्दू तोड़ते हुए वीडियो शेयर किया था। साथ ही उन्होंने लोगों से कद्दू की पसंदीदा रेसिपी भी पूछी थी।

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मिलिंद की फिटनेस का राज और गार्डनिंग 

मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस, मैराथन और एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ-साथ उन्हें नेचर और गार्डनिंग में भी काफी दिलचस्पी है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता कोंवर ने 2020 के लॉकडाउन में घर पर सब्जियां उगाने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनका यह शौक एक छोटे से किचन गार्डन में बदल गया, जहां वे अपनी जरूरत के हिसाब से कई तरह की ताजी सब्जियां उगाने लगे। दोनों अक्सर अपने गार्डन और वहां उगने वाली फसलों की झलकियां सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे हैं।

मिलिंद के गार्डन में सिर्फ कद्दू ही नहीं, बल्कि लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मेथी, पालक और मूली जैसी कई सब्जियां उगाई जाती हैं। उनकी गार्डनिंग से पता चलता है कि यह केवल लॉकडाउन के समय शुरू हुआ शौक नहीं था, बल्कि दोनों ने इसे लगातार जारी रखा। मिलिंद ने अपने इस अंदाज को मजाकिया तरीके से “दाढ़ी वाला किसान” भी कहा है।

 

मिलिंद के साथ पत्नी अंकिता की भागीदारी

अंकिता भी गार्डनिंग में मिलिंद का साथ देती हैं और उनकी पोस्ट से साफ पता चलता है कि यह सिर्फ लॉकडाउन के समय शुरू हुआ कोई छोटा-मोटा शौक नहीं था। दोनों ने इसे लगातार आगे बढ़ाया और अपने घर में ही हरियाली से भरा एक खूबसूरत गार्डन तैयार किया। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से निकला बड़ा सा कद्दू दिखाते हुए मजाक में कहा था कि अब अगले कुछ दिनों तक कद्दू ही खाना पड़ेगा। अंकिता ने भी कद्दू के साथ मूली, भिंडी और दूसरी सब्जियों की तस्वीरें शेयर की हैं।

 

घर में ऐसे बनाएं अपना DIY ग्रीन हाउस

गार्डनिंग सेटअप की सबसे खास चीजों में से एक उनका घर पर बनाया गया छोटा सा ग्रीनहाउस है। उन्होंने इसे सब्जियां उगाने के लिए एक अलग जगह के तौर पर तैयार किया था। उनके घर के केयरटेकर ने इसे प्यार से “सब्जी का घर” नाम दिया था। ग्रीनहाउस में पौधों और बेलों के बढ़ने के बाद यह जगह काफी हरी-भरी नजर आने लगी थी।

आप भी घर पर ताजी सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो छोटा DIY ग्रीनहाउस बना सकते हैं। इसके लिए छत, बालकनी या आंगन में ऐसी जगह चुनें जहां अच्छी धूप आती हो। बांस या लकड़ी से मजबूत फ्रेम बनाकर उसे साफ ऐक्रेलिक या UV-स्टेबलाइज्ड पॉलीइथिलीन शीट से कवर करें। गमलों या ग्रो बैग में अच्छी मिट्टी और कम्पोस्ट भरकर सब्जियां लगाएं। पौधों को रेगुलर पानी दें, लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न हो। बहुत ज्यादा गीली मिट्टी से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर देख लें। इसके साथ ही ग्रीनहाउस को रोजाना चेक करते रहें। पौधों की पत्तियों पर कीड़े या किसी तरह की परेशानी तो नहीं है, पत्तियां मुरझा तो नहीं रही हैं और अंदर का टेम्परेचर बहुत ज्यादा तो नहीं हो रहा, इन सभी बातों का ध्यान रखें। थोड़ी-सी देखभाल से पौधे स्वस्थ रहेंगे और अच्छी तरह बढ़ेंगे।

 

पहाड़ों में बसने का सपना 71 दिनों में ही टूटा! दिल्ली छोड़ मनाली रहने गए Gen Z कंटेंट क्रिएटर ने लौटकर क्या बताया?

भागदौड़ भरी जिंदगी, शहरों में पलूशन वाली जहरीली हवा और तेज रफ्तार लाइफ से ऊबकर पहाड़ों की शांत वादियों में जा बसना आज हर वर्किंग युवा का सपना लगता है। वर्क फ्रॉम होम और रील्स की दुनिया में हर कोई बस यही सोचता है कि काश! वो भी सब कुछ छोड़कर पहाड़ों में हमेशा के लिए बस जाए। दिल्ली के रहने वाले एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही किया। वो यह देखने मनाली पहुंचे कि क्या सचमुच पहाड़ों की जिंदगी वैसी ही हसीन होती है जैसी तब लगता है जब हम छुट्टियां मनाने पहाड़ पहुंचते हैं या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई छिपी है?

अजय ने 23 मई को दिल्ली से मनाली के पास बसे छोटे से गांव सियाल में शिफ्ट हुए थे। उनका इरादा था कि वो यहां टूरिस्ट बनकर नहीं बल्कि लोकल शख्स की तरह रहें। अजय ने पूरे 71 दिन पहाड़ों में बिताए, इस दौरान करीब 55 वीडियो बनाए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पल इंटरनेट पर लोगों के साथ शेयर किया। लेकिन 2 अगस्त आते-आते उनका यह सपना सिमट गया और वो वापस दिल्ली लौट आए।

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जब अनजाने रास्ते और अजनबी लोग धीरे-धीरे अपने से लगने लगेअजय जब मनाली पहुंचे थे तो वहां उनका कोई अपना नहीं था, कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन देखते ही देखते वो वहां की गलियों, रास्तों, हसीन वादियों और लोकल लोगों के करीब आ गए, उनसे घुल-मिल गए। जो काम सिर्फ एक प्रयोग की तरह शुरू हुआ था, वो उनकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन गया।

दिल्ली लौटने के बाद एक वीडियो में उन्होंने मनाली की अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ दो महीने से थोड़े ज्यादा वक्त में जिस जगह से उनका इतना दिल लग गया था, उसे छोड़कर आना दर्दनाक था। अजय के मुताबिक इस तजुर्बे ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहराई और जिंदगी का नया नजरिया दिया। मनाली को अलविदा कहना उनके लिए बेहद मुश्किल था क्योंकि यह सिर्फ कोई ट्रिप खत्म नहीं हो रही थी बल्कि उनकी जिंदगी के एक नए दौर की शुरुआत थी।

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क्या वाकई पहाड़ों में बसना उतना ही हसीन है, जितना छुट्टियों में दिखता है?

अजय के मनाली शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह एक सीधे से सवाल का जवाब तलाशना था। वो ये कि क्या पहाड़ों में बसकर रहना सचमुच उतना ही मजेदार है जितना वहां कुछ दिनों की छुट्टियां बिताना? मनाली जाने से पहले अजय के दिलो-दिमाग में भी एक आम शहर की तरह ही खूबसूरत ख्यालात थे, पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच काम करना, ढलते और उगते सूरज को देखना, आसपास की वादियों में घूमना, वहां का लोकल फूड ट्राई करना और रात में अलाव के गिर्द बैठकर लोगों से बातें करना।

इनमें से कई हसीन पल उन्होंने जिए भी। लेकिन वहां फुल टाइम रहने पर उन्हें उन मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा जो अक्सर तब नहीं समझ में आतीं जब हम छुट्टियों में पहाड़ घूमने जाते हैं।

मनाली में रहने का खर्च: उम्मीद से कहीं ज्यादा किफायती!मनाली में रहने के दौरान अजय का सबसे हैरान कर देने वाला अनुभव वहां का खर्च रहा। ये उनकी उम्मीद से काफी कम निकला। अजय सियाल गांव में 14000 रुपये महीने के किराये पर अकेले एक वन-बैडरूम फ्लैट में रहते थे। इस किराये में वाई-फाई और बिजली का बिल दोनों शामिल थे। वो ज्यादातर वक्त घर पर ही खाना खुद बनाते थे। राशन और ग्रोसरी पर महीने का लगभग 3500 रुपये खर्च आता था। जब कभी खाना पकाने का मन न होता, तो वो हफ्ते में एक-दो बार बाहर खा लेते थे। इसमें करीब 500 रुपये हफ्ते का खर्च बैठता था।

फिटनेस के शौकीन अजय ने वहां का एक लोकल जिम भी जॉइन किया। वैसे तो जिम की फीस 1800 रुपये महीना थी, लेकिन उन्होंने बात करके इसे 1500 रुपये करवा लिया। अजय को गाड़ियों के बजाय पैदल चलना पसंद था, इसलिए लोकल ट्रैवल पर उनका न के बराबर पैसा खर्च होता था। अगर इन सारे खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो मनाली में अजय का कुल मासिक खर्च करीब 21000 रुपये के आसपास आता था।

वो दिक्कतें जो आम पर्यटकों की नजरों से हमेशा छिपी रह जाती हैं

मनाली ने अजय को सुकून और नए अनुभव तो दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते कुछ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम भी सामने आईं। पहाड़ों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती थी, जिससे ऑनलाइन काम करना या वर्क फ्रॉम होम संभालना बेहद मुश्किल हो जाता था। पहाड़ों का मौसम मजेदार होने के साथ टेंशन देने वाला भी मिला। बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती थी। मानसून के आते ही सड़कें और रोजमर्रा की आवाजाही बेहाल हो गई।

यहां अकेले रहने का मतलब था कि खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई और घर के बाकी सारे काम अजय को खुद ही करने पड़ते थे। मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचने के लिए लंबी और सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। छुट्टियों में ऐसी ट्रैकिंग भले ही रोमांचक लगे लेकिन हर दिन ऐसा करना शरीर को तोड़कर रख देता है। सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अकेलापन। जिस खामोशी और शांति की तलाश में वो दिल्ली से भागे थे, वही सन्नाटा धीरे-धीरे दीमक की तरह उन्हें काटने लगा और भारी अकेलेपन में बदल गया।

अजय ने 3 जुलाई को शेयर किए गए एक वीडियो में इन तमाम दुश्वारियों का जिक्र किया था और बताया था कि आखिर क्यों पहाड़ों में उनका स्टे समय से पहले खत्म होने जा रहा है।

मनाली से लौटकर अब एक नई राह पर हैं अजय

मनाली का अपना 71 दिनों का आशियाना छोड़कर अजय अब वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन पहाड़ों को लेकर उनका नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। इस छोटे से स्टे ने उन्हें एक बड़े शहर से दूर रहने की खूबसूरती और उसकी कड़वी सच्चाइयों दोनों से रूबरू करा दिया। अजय आज भी मनाली में बिताए अपने इन दिनों को जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल मानते हैं। दिल्ली लौटने के बाद अब वो जिंदगी को एक नए अंदाज में खंगाल रहे हैं। उनके हालिया वीडियो बता रहे हैं कि पहाड़ों की बर्फीली वादियों के बाद अब वो समुद्र के शांत किनारों पर अपना वक्त बिता रहे हैं।

कबाड़ से जुगाड़! पुरानी डेनिम से बनाएं खूबसूरत और लक्जरी डेकोरेटिव आइटम्स

आपकी पुरानी जींस फट गई है या पहनने लायक नहीं रही, तो उसे फेंकने से पहले एक बार ये आइडियाज को जरूर ट्राई करें। डेनिम का कपड़ा काफी मजबूत और टिकाऊ होता है, इसलिए उसके बचे हुए छोटे-छोटे टुकड़ों से भी कई खूबसूरत और काम की चीजें बनाई जा सकती हैं। थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के साथ आप वेस्ट डेनिम को नया और स्टाइलिश रूप दे सकते हैं।

कपड़ा तैयार करें

सबसे पहले पुरानी जींस या डेनिम के बचे हुए टुकड़ों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। इसके बाद जिप, बटन, रिवेट और मोटी सिलाई वाले हिस्सों को अलग कर दें। बड़े और साफ कपड़े के टुकड़ों को अलग रखें और छोटे टुकड़ों को रंग, साइज और मोटाई में छांट लें। ऐसा करने से आगे सिलाई करना आसान हो जाता है और तैयार प्रोजेक्ट ज्यादा साफ और सुंदर दिखाई देता है। अलग-अलग ब्लू शेड्स को मिलाकर इस्तेमाल करने से डिजाइन और भी डिजाइनर बनती है।

सही टूल्स चुनें 

डेनिम मोटा और मजबूत कपड़ा होता है, इसलिए इसकी सिलाई के लिए सुई की बजाय डेनिम सुई और मजबूत पॉलिएस्टर धागे का उपयोग करना बेहतर होता है। अगर आप सिलाई मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो मोटे कपड़े के लिए परफेक्ट सेटिंग चुनें। सही टूल्स की मदद से कपड़ा आसानी से सिलता है और तैयार सामान ज्यादा मजबूत होता है।

पैचवर्क से स्टाइलिश लुक 

छोटे-छोटे डेनिम के टुकड़ो को जोड़कर एक नया फैब्रिक तैयार किया जा सकता है। अलग-अलग रंग और डिजाइन वाले टुकड़ों को मिलाकर यूनिक पैटर्न बनाएं। इस पैचवर्क कपड़े से बैग, कुशन कवर, मैट या दूसरी कई चीजें बनाई जा सकती हैं। इस तरीके में कपड़े का पूरा इस्तेमाल होता है।

क्रिएटिव टेक्सचर और डिजाइन 

डेनिम के टुकड़ों को सिर्फ सीधे जोड़ने की बजाय अलग-अलग क्राफ्ट टेक्निक का इस्तेमाल करें। बोरो स्टाइल, रॉ एज एप्लिक या क्विल्टिंग टेक्निक से कपड़े में नया टेक्सचर और डिजाइन बनाया जा सकता है। किनारों को खुला छोड़ने से डेनिम का रफ और ट्रेंडी लुक और भी खूबसूरत लगता है। इससे तैयार प्रोजेक्ट प्रोफेशनल और यूनिक दिखाई देता है।

हर हिस्सा इस्तेमाल करें 

पुरानी जींस का सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसकी पीछे की जेब, कमरबंद, बेल्ट लूप को भी फिर से उपयोग करे। पीछे की जेब को किसी बैग पर सिलकर एक्स्ट्रा पॉकेट बनाया जा सकता है। कमरबंद से मजबूत हैंडल या स्ट्रैप तैयार किए जा सकते हैं, जबकि छोटे टुकड़ों से की-चेन, बुकमार्क या दूसरे छोटे DIY प्रोजेक्ट बनाए जा सकते हैं। इससे पूरा जींस काम आ जाता है।

घर की सजावटी चीजें

डेनिम के स्क्रैप्स से घर की सजावट के लिए कई अट्रैक्टिव चीजें बनाई जा सकती हैं। जैसे कुशन कवर, टेबल रनर, प्लेसमैट, कोस्टर, स्टोरेज बास्केट, प्लांटर कवर, वॉल हैंगिंग या डोर हैंगर। डेनिम का मजबूत कपड़ा इन चीजों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखता है और घर को एक मॉडर्न, रस्टिक और यूनिक लुक देता है।

फैशन और रोजमर्रा चीजें

बचे हुए डेनिम से टोट बैग, पाउच, कॉइन पर्स, मोबाइल कवर, लैपटॉप स्लीव, हेयरबैंड, स्क्रंची, बेल्ट, एप्रन के साथ और भी कई चीजें बनाई जा सकती हैं। पुरानी डेनिम जैकेट, शर्ट या बैग पर पैचवर्क करके उसे नया और ट्रेंडी लुक दिया जा सकता है। इस तरह बिना ज्यादा खर्च किए आप अपनी पुरानी जींस को फिर से उपयोग में ला सकते हैं।

बचा हुआ खाना भी रहेगा फ्रेश बस इन 5 बातों के रखें ध्यान, नहीं तो फ्रिज में रखा हुआ खाना भी कर सकता है बीमार!

घर में खाना बच जाना बहुत आम बात है। कई लोग इसे दोबारा गर्म करके खा लेते हैं या कई दिनों तक फ्रिज में रख देते हैं। इससे खाना बर्बाद तो नहीं होता, लेकिन अगर इसे सही तरीके से स्टोर और इस्तेमाल न किया जाए तो यही बचा हुआ खाना फूड पॉइजनिंग, पेट की समस्या और बैक्टीरिया बढ़ने का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं बचा हुआ खाना इस्तेमाल करते समय होने वाली 5 बड़ी गलतियों के बारे में:

1. खाने को लंबे समय तक बाहर रखना

K Bhagat Tarachand, Borivali West, Mumbai | zomato

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग बचे हुए खाने को घंटों तक कमरे के तापमान पर ही छोड़ देते हैं। गर्म मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे खाना खराब हो सकता है। कई बार खाना देखने और सूंघने में ठीक लगता है, लेकिन उसमें हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। खाने को पकने के बाद ज्यादा देर तक बाहर रखने से बचना चाहिए। अगर खाना बच गया है तो उसे जल्दी ठंडा करके साफ डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखना बेहतर होता है।

2. फ्रिज में रखे खाने को कई दिनों तक इस्तेमाल करना

क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले - News18 हिंदी

कई लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखा खाना लंबे समय तक सेफ रहेगा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। फ्रिज केवल बैक्टीरिया की बढ़ने की गति को धीमा करता है, उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता। बचा हुआ खाना कितने समय तक सेफ रहेगा, यह खाने के प्रकार और स्टोरेज पर निर्भर करता है। चावल, दाल, सब्जी, मांस या डेयरी से बनी चीजों को ज्यादा दिनों तक रखने से उनमें खराबी आने का खतरा बढ़ सकता है।

3. खाने को बार-बार गर्म करना

क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका - News18 हिंदी

कई घरों में बचा हुआ खाना बार-बार गर्म करके खाया जाता है। यह आदत सही नहीं मानी जाती क्योंकि बार-बार गर्म करने से खाने का स्वाद और पोषण कम हो सकता है। साथ ही अगर खाना लंबे समय तक बाहर रहा हो, तो गर्म करने के बाद भी कुछ हार्मफुल एलिमेंट रह सकते हैं। बेहतर है कि जितना खाना खाना हो, उतनी ही मात्रा गर्म करें और पूरे बचे हुए खाने को बार-बार गर्म करने से बचें।

4. खाने को गलत तरीके से स्टोर करना

Kitchen Tips: फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करके खाते हैं? पहले जान लें इससे होने वाले नुकसान| Kitchen Tips

बचे हुए खाने को खुले बर्तन में रखना या बिना ढके फ्रिज में रख देना भी एक बड़ी गलती है। इससे खाने में दूसरी चीजों की गंध आ सकती है और बैक्टीरिया पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। खाने को हमेशा साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखना चाहिए। फ्रिज में रखने से पहले खाने को नॉर्मल टेम्परेचर तक आने देना और सही तरीके से ढकना जरूरी है।

5. खराब होने के संकेतों को नजरअंदाज करना

क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका - News18 हिंदी

कई बार लोग सिर्फ इसलिए खाना खा लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसे फेंकना नहीं चाहिए। लेकिन अगर खाने से अजीब गंध आ रही हो, रंग बदल गया हो, स्वाद खराब लग रहा हो या उसमें फफूंद दिखाई दे रही हो तो उसे खाना हार्मफुल हो सकता है। खाने की खराबी के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती है।

बचा हुआ खाना सुरक्षित रखने के आसान तरीके:

फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करना पड़ सकता है भारी! जानिए कौन-सी गलती बढ़ा सकती है फूड पॉइजनिंग का खतरा - News18 हिंदी

खाना बचने के बाद उसे जल्दी से फ्रिज में रखें।

हमेशा साफ और ढक्कन वाले कंटेनर का इस्तेमाल करें।

फ्रिज का टेम्परेचर सही बनाए रखें।

खाने को खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें।

बहुत पुराना या हाइजीन खाना खाने से बचें।

एक बार निकाले गए खाने को बार-बार फ्रिज में रखने से बचें।

 

बचा हुआ खाना सही तरीके से रखा जाए तो उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही से यही खाना बीमारी का कारण बन सकता है। खाने की सही स्टोरेज, समय पर इस्तेमाल और साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप स्वाद के साथ अपनी हेल्थ का भी ख्याल रख सकते हैं।