इन चीजों को बनाये अपने डाइट का हिस्सा, यूरिक एसिड कंट्रोल करने का है ये आसान तरीका!

सर्दियों में ठंड बढ़ने के साथ कुछ लोगों में यूरिक एसिड से जुड़ी परेशानी भी बढ़ जाती है। इसका असर जॉइंट पर ज्यादा दिखाई देता है, जिससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। शरीर में यूरिक एसिड तब बढ़ता है जब प्यूरीन टूटने के बाद बनने वाला यह सब्सटेंस किडनी के जरिए ठीक से बाहर नहीं निकल पाता। धीरे-धीरे यह जोड़ों के आसपास जमा होकर परेशानी पैदा कर सकता है।

ऐसे में दवाओं के साथ खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी माना जाता है। रोजाना खाई जाने वाली कुछ सब्जियों को लेकर भी यूरिक एसिड के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसलिए सर्दियों में डाइट में इन सब्जियों को शामिल करने से पहले सावधानी रखना बेहतर है।

यूरिक एसिड के पेशेंट इस सब्जियों और फलों का करें सेवन

यूरिक एसिड की समस्या में खान-पान का ध्यान रखना जरूरी होता है। डाइट में गाजर, खीरा, नींबू जैसी कम प्यूरीन वाली चीजों को शामिल किया जा सकता है। फलों में सेब और चेरी भी अच्छे ऑप्शन माने जाते हैं। इसके साथ दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि पानी शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। रोज करीब 8-10 गिलास पानी पीने की कोशिश करें।

इस सब्जियों से बनाए रखें दूरी, नहीं तो बढ़ जाएगा यूरिक एसिड

1. बैंगन

बैंगन खाने से बचने के लिए यूरिक एसिड के पेशेंट को सावधानी बरतना चाहिए। इसमें प्यूरीन पाया जाता है, इसलिए इसका ज्यादा सेवन कुछ लोगों में यूरिक एसिड और गाउट से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकता है। इससे जॉइंट में दर्द और सूजन की प्रॉब्लम परेशान कर सकती है। वहीं, कुछ लोगों को बैंगन खाने के बाद खुजली या स्किन पर रैशेज जैसी एलर्जी भी हो सकती है।

2. मशरूम

यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या से परेशान लोगों को मशरूम खाते समय सावधानी रखनी चाहिए। मशरूम में प्यूरीन होता है, जो शरीर में यूरिक एसिड बनने की प्रोसेस से जुड़ा है। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने पर कुछ लोगों में जोड़ों का दर्द और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए हाई यूरिक एसिड या गाउट की प्रॉब्लम होने पर इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से कंसल्ट करना चाहिए।

3. फूलगोभी

सर्दियों में फूलगोभी खाना हर किसी को पसंद आता है, लेकिन यूरिक एसिड की प्रॉब्लम वाले लोगों को इसे ज्यादा खाने से बचना चाहिए। फूलगोभी में प्यूरीन पाया जाता है और इसका ज्यादा सेवन कुछ लोगों में गाउट के लक्षणों को बढ़ा सकता है। यदि पहले से आपको जोड़ों में दर्द या सूजन रहती है, तो अपनी डाइट में फूलगोभी की मात्रा को लेकर सावधानी बरतना बेहतर है।

4. पालक

पालक को हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसमें भी प्यूरीन मौजूद होता है। इसलिए यूरिक एसिड या गाउट की प्रॉब्लम वाले लोगों को इसे कम मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। यदि खाने के बाद जोड़ों का दर्द या सूजन बढ़ती महसूस हो, तो पालक को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले एक्सपर्ट से कंसल्ट करना सही रहेगा।

5. ब्रोकोली

ब्रोकोली को एक बहुत ही हेल्दी सब्जी माना जाता है, लेकिन यूरिक एसिड की प्रॉब्लम में इसे लेकर भी सावधानी जरूरी है। इसमें प्यूरीन पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा कई अन्य प्यूरीन वाली चीजों की तुलना में कम हो सकती है। इसलिए इसे पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी कंडीशन के हिसाब से इसका सेवन करना चाहिए।

पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

आइसक्रीम खाने के लिए न मारें मन, डायबिटीज में ऐसे लें इसका मजा बस अपनाएं सही तरीका!

डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि आपको अपनी पसंदीदा आइसक्रीम पूरी तरह छोड़नी पड़ेगी। सही मात्रा, सही समय और बेहतर ऑप्शन चुनकर डाइबिटीज के मरीज भी कभी-कभार आइसक्रीम का आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं ब्लड शुगर को कंट्रोल रखते हुए आइसक्रीम खाने के आसान और हेल्दी तरीके:

डायबिटीज के मरीज और आइसक्रीम खाना

Managing Diabetes in Older Adults

जी हां, डायबिटीज के मरीज भी सीमित मात्रा में और सही तरीके से आइसक्रीम खा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए ब्लड शुगर को ध्यान में रखते हुए बैलेंस डाइट का पालन करना जरूरी है। आइसक्रीम का सेवन कभी-कभार और कम मात्रा में ही करना बेहतर माना जाता है।

कम चीनी और कम वसा वाली आइसक्रीम चुनें

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आइसक्रीम खरीदते समय ऐसी वैरायटी चुनें जिसमें चीनी और सैचुरेटेड फैट कम हो। आजकल बाजार में डायबिटीज-फ्रेंडली या शुगर-फ्री आइसक्रीम भी अवेलेबल हैं, जिनमें चीनी की मात्रा कम होती है। खरीदने से पहले न्यूट्रिशन लेबल जरूर पढ़ें और कार्बोहाइड्रेट व शुगर की मात्रा पर ध्यान दें।

मात्रा पर रखें पूरा कंट्रोल

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आइसक्रीम को प्रोटीन और फाइबर के साथ खाएं

आइसक्रीम को अकेले खाने की बजाय इसे प्रोटीन और फाइबर वाले फूड्स के साथ लेना बेहतर माना जाता है। उदाहरण के लिए, बिना नमक वाले मेवे, पिस्ता, बादाम या थोड़ी मात्रा में ताजे फल के साथ आइसक्रीम खाई जा सकती है। इससे खाने में पोषण बढ़ता है और ब्लड शुगर में अचानक तेजी का रिस्क कम हो सकता है।

 

आइसक्रीम को प्रोटीन और फाइबर के साथ खाएं

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आइसक्रीम को अकेले खाने की बजाय इसे प्रोटीन और फाइबर वाले फूड्स के साथ लेना बेहतर माना जाता है। उदाहरण के लिए, बिना नमक वाले मेवे, पिस्ता, बादाम या थोड़ी मात्रा में ताजे फल के साथ आइसक्रीम खाई जा सकती है। इससे खाने में पोषण बढ़ता है और ब्लड शुगर में अचानक तेजी का रिस्क कम हो सकता है।

सही समय पर खाएं और कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखें

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आइसक्रीम को खाली पेट खाने से बचें। इसे भोजन के बाद कम मात्रा में खाना बहुत बेहतर माना जाता है। यदि आप आइसक्रीम खाने वाले हैं, तो उसी दिन दसफरे मीठे या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स का सेवन कम करें, ताकि कुल कार्बोहाइड्रेट बैलेंस रहे।

 

 

सेफ और अच्छी क्वालिटी वाली आइसक्रीम चुनें

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हमेशा रेप्युटेबल ब्रांड की, सही तरीके से स्टोर की गई और एक्सपायरी डेट वाली आइसक्रीम ही खरीदें। खराब तरीके से रखी गई आइसक्रीम में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए खुले में आइसक्रीम खरीदने से बचें।

 

 

रोजाना न खाएं और डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें

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डायबिटीज के मरीजों को रोजाना या लगातार कई दिनों तक आइसक्रीम खाने से बचना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पिएं, हरी सब्जियां, फल और बैलेंस डाइट लें ताकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें। यदि आपका ब्लड शुगर अक्सर बढ़ा रहता है या आप इंसुलिन/दवाएं ले रहे हैं, तो आइसक्रीम को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

 

बचा हुआ खाना भी रहेगा फ्रेश बस इन 5 बातों के रखें ध्यान, नहीं तो फ्रिज में रखा हुआ खाना भी कर सकता है बीमार!

घर में खाना बच जाना बहुत आम बात है। कई लोग इसे दोबारा गर्म करके खा लेते हैं या कई दिनों तक फ्रिज में रख देते हैं। इससे खाना बर्बाद तो नहीं होता, लेकिन अगर इसे सही तरीके से स्टोर और इस्तेमाल न किया जाए तो यही बचा हुआ खाना फूड पॉइजनिंग, पेट की समस्या और बैक्टीरिया बढ़ने का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं बचा हुआ खाना इस्तेमाल करते समय होने वाली 5 बड़ी गलतियों के बारे में:

1. खाने को लंबे समय तक बाहर रखना

K Bhagat Tarachand, Borivali West, Mumbai | zomato

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग बचे हुए खाने को घंटों तक कमरे के तापमान पर ही छोड़ देते हैं। गर्म मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे खाना खराब हो सकता है। कई बार खाना देखने और सूंघने में ठीक लगता है, लेकिन उसमें हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। खाने को पकने के बाद ज्यादा देर तक बाहर रखने से बचना चाहिए। अगर खाना बच गया है तो उसे जल्दी ठंडा करके साफ डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखना बेहतर होता है।

2. फ्रिज में रखे खाने को कई दिनों तक इस्तेमाल करना

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कई लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखा खाना लंबे समय तक सेफ रहेगा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। फ्रिज केवल बैक्टीरिया की बढ़ने की गति को धीमा करता है, उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता। बचा हुआ खाना कितने समय तक सेफ रहेगा, यह खाने के प्रकार और स्टोरेज पर निर्भर करता है। चावल, दाल, सब्जी, मांस या डेयरी से बनी चीजों को ज्यादा दिनों तक रखने से उनमें खराबी आने का खतरा बढ़ सकता है।

3. खाने को बार-बार गर्म करना

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कई घरों में बचा हुआ खाना बार-बार गर्म करके खाया जाता है। यह आदत सही नहीं मानी जाती क्योंकि बार-बार गर्म करने से खाने का स्वाद और पोषण कम हो सकता है। साथ ही अगर खाना लंबे समय तक बाहर रहा हो, तो गर्म करने के बाद भी कुछ हार्मफुल एलिमेंट रह सकते हैं। बेहतर है कि जितना खाना खाना हो, उतनी ही मात्रा गर्म करें और पूरे बचे हुए खाने को बार-बार गर्म करने से बचें।

4. खाने को गलत तरीके से स्टोर करना

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बचे हुए खाने को खुले बर्तन में रखना या बिना ढके फ्रिज में रख देना भी एक बड़ी गलती है। इससे खाने में दूसरी चीजों की गंध आ सकती है और बैक्टीरिया पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। खाने को हमेशा साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखना चाहिए। फ्रिज में रखने से पहले खाने को नॉर्मल टेम्परेचर तक आने देना और सही तरीके से ढकना जरूरी है।

5. खराब होने के संकेतों को नजरअंदाज करना

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कई बार लोग सिर्फ इसलिए खाना खा लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसे फेंकना नहीं चाहिए। लेकिन अगर खाने से अजीब गंध आ रही हो, रंग बदल गया हो, स्वाद खराब लग रहा हो या उसमें फफूंद दिखाई दे रही हो तो उसे खाना हार्मफुल हो सकता है। खाने की खराबी के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती है।

बचा हुआ खाना सुरक्षित रखने के आसान तरीके:

फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करना पड़ सकता है भारी! जानिए कौन-सी गलती बढ़ा सकती है फूड पॉइजनिंग का खतरा - News18 हिंदी

खाना बचने के बाद उसे जल्दी से फ्रिज में रखें।

हमेशा साफ और ढक्कन वाले कंटेनर का इस्तेमाल करें।

फ्रिज का टेम्परेचर सही बनाए रखें।

खाने को खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें।

बहुत पुराना या हाइजीन खाना खाने से बचें।

एक बार निकाले गए खाने को बार-बार फ्रिज में रखने से बचें।

 

बचा हुआ खाना सही तरीके से रखा जाए तो उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही से यही खाना बीमारी का कारण बन सकता है। खाने की सही स्टोरेज, समय पर इस्तेमाल और साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप स्वाद के साथ अपनी हेल्थ का भी ख्याल रख सकते हैं।