जापान में 1 लाख लोग 100 साल के पार:हर 10 में से 9 महिलाएं; द्वितीय विश्वयुद्ध में पुरुष ज्यादा मरे थे

जापान में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या पहली बार 1 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। इनमें 88 फीसदी महिलाएं हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब 1,07,677 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र कम से कम 100 साल है। इनमें महिलाएं 94.3 हजार और पुरुष 13.4 हजार हैं। पिछले साल की तुलना में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या करीब 8 हजार बढ़ी है। जापान की सबसे बुजुर्ग महिला क्योटो की फुयो किशिमोटो हैं, जिनकी उम्र 114 साल है। वहीं, सबसे बुजुर्ग पुरुष कुमामोटो के हिकारू काटो हैं। उनकी उम्र 112 साल है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जापान में 100 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं की संख्या ज्यादा होने की एक वजह द्वितीय विश्वयुद्ध भी है। एक अनुमान के मुताबिक तब करीब 23 लाख सैनिक मारे गए थे। इसमें लगभग सभी पुरुष थे। जापान में लोग इतनी लंबी उम्र तक क्यों जीते हैं? हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सोशल साइंस प्रोफेसर स्टुअर्ट गीटेल-बास्टेन के मुताबिक, जापान में लंबी उम्र के पीछे कई कारण हैं। इनमें स्वस्थ खान-पान, रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहना और सस्ती स्वास्थ्य व्यवस्था अहम हैं। जापान में लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी होती है। युद्ध से बचने वाले पुरुषों में भी महिलाओं की तुलना में धूम्रपान और शराब पीने की आदत ज्यादा थी। इसके अलावा पुरुषों के औद्योगिक कामों में शामिल होने की संभावना ज्यादा थी, जिसका लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर पड़ा। रिटायरमेंट या जीवनसाथी की मौत के बाद कई पुरुष सामाजिक रूप से अलग-थलग भी पड़ गए। इसके मुकाबले महिलाएं अपने समुदाय और आसपास के लोगों से ज्यादा जुड़ी रहीं। इससे उन्हें सामाजिक और मानसिक स्तर पर फायदा मिला। 106 साल के सातो आज भी अपना काम खुद करते हैं निगाता प्रांत के पहाड़ी इलाके ओसोनोगो गांव में रहने वाले तेत्सुओ सातो भी जापान के 1 लाख से ज्यादा 100+ उम्र वाले लोगों में शामिल हैं। सातो अब 107 साल के होने वाले हैं। वह अपने बेटे, बहू, कुत्ते और बिल्ली के साथ रहते हैं। उन्हें सुनने में परेशानी है और नजर भी कमजोर हो चुकी है। इसके बावजूद वह खुद को दिनभर व्यस्त रखते हैं। सातो पुराने कैलेंडर और रैपिंग पेपर से नोटबुक बनाते हैं। वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इम्फाल की लड़ाई में अपने अनुभवों की कहानियां भी सुनाते हैं। उनकी 68 साल की बहू कुनिको सातो बताती हैं कि उनके ससुर आज भी ज्यादातर काम खुद करने की कोशिश करते हैं। वह बिना मदद के खुद नहाते हैं। पिछले साल जब कुनिको के पैर में चोट लगी थी, तब सातो ने अपने चावल के कटोरे खुद धोने शुरू कर दिए थे। कुनिको कहती हैं, “हम बुढ़ापे में एक-दूसरे का ख्याल रखने लगे हैं।” दो दिन बाद सातो 107 साल के हो जाएंगे। उनकी सालगिरह के लिए परिवार की चार पीढ़ियों के एक दर्जन से ज्यादा सदस्य एक पारंपरिक हॉट स्प्रिंग होटल में जुटेंगे। यहां चार पीढ़ियों की साथ में तस्वीर भी ली जाएगी। सातो का मकसद 100 साल तक जीना था। अब वे 110 साल तक जीना चाहते हैं। 2070 तक 4 करोड़ से ज्यादा घट सकती है आबादी जापान की आबादी 2008 में करीब 12.8 करोड़ के साथ सबसे ज्यादा थी। सरकारी अनुमान के मुताबिक 2070 तक यह घटकर करीब 8.7 करोड़ रह सकती है। यानी आने वाले दशकों में देश की आबादी 4 करोड़ से ज्यादा घट सकती है। फिलहाल जापान में हर एक बच्चे के जन्म पर करीब दो लोगों की मौत हो रही है। इसका सीधा असर देश की कामकाजी आबादी पर पड़ रहा है। काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। इससे सरकार पर टैक्स और सामाजिक सुरक्षा का बोझ बढ़ रहा है। जापानी सरकार पिछले कई दशकों से लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके बावजूद आबादी में गिरावट का रुख नहीं बदला है। 5 साल में 31 लाख कम हुई आबादी जापान की आबादी 2020 से 2025 के बीच 31 लाख कम हुई। 2020 में देश की आबादी 12.61 करोड़ थी, जो 2025 में घटकर करीब 12.3 करोड़ रह गई। 1920 में जनगणना शुरू होने के बाद यह आबादी में सबसे बड़ी गिरावट है। जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि यह समस्या अब जापान के लगभग हर हिस्से में पहुंच चुकी है। देश के 47 प्रांतों में से 45 की आबादी 2025 में कम हुई। सिर्फ दो प्रांत ऐसे रहे, जहां आबादी बढ़ी। गांव खाली हो रहे, स्कूलों की जगह नर्सिंग होम बन रहे जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। युवा नौकरी और पढ़ाई के लिए टोक्यो, ओसाका और नागोया जैसे बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं। इसका असर गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिख रहा है। कई जगह स्कूलों में बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई है कि उन्हें बंद करना पड़ा है। कुछ इलाकों में बंद स्कूलों को नर्सिंग होम और सामुदायिक केंद्रों में बदला जा रहा है। देश में लाखों घर खाली पड़े हैं। कई जगह सरकारी दफ्तर और अस्पताल अपने काम का दायरा कम कर रहे हैं। कुछ इलाकों में ट्रेन सेवाएं भी बंद हो रही हैं। टोक्यो में आबादी बढ़ रही, बाकी देश घट रहा जहां जापान के ज्यादातर हिस्सों में आबादी घट रही है, वहीं टोक्यो और उसके आसपास का इलाका अभी भी लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है। 2025 में टोक्यो मेट्रो क्षेत्र की आबादी करीब 3.7 करोड़ थी। इसमें टोक्यो के साथ कनागावा, सैतामा और चिबा प्रांत शामिल हैं। यह क्षेत्र अब जापान की कुल आबादी का करीब 30% हिस्सा है। टोक्यो की अपनी आबादी भी 2025 में 1% से ज्यादा बढ़कर करीब 1.42 करोड़ हो गई। इसकी बड़ी वजह पढ़ाई और नौकरी के लिए युवाओं का यहां आना है। आबादी की कमी रोकने के लिए विदेशियों को लाने पर बहस आबादी घटने की समस्या से निपटने के लिए कुछ विशेषज्ञ जापान में ज्यादा विदेशियों को काम करने और रहने की अनुमति देने की बात कहते हैं। उनका मानना है कि इससे काम करने वाले लोगों की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। लेकिन जापान में इसे लेकर बहस भी चल रही है। कुछ लोग विदेशियों की संख्या बढ़ाने के बजाय इमिग्रेशन के नियम और सख्त करने की मांग कर रहे हैं। यह सोच ‘जापान फर्स्ट’ जैसे आंदोलनों में भी दिखाई देती है।

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इन चीजों को बनाये अपने डाइट का हिस्सा, यूरिक एसिड कंट्रोल करने का है ये आसान तरीका!

सर्दियों में ठंड बढ़ने के साथ कुछ लोगों में यूरिक एसिड से जुड़ी परेशानी भी बढ़ जाती है। इसका असर जॉइंट पर ज्यादा दिखाई देता है, जिससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। शरीर में यूरिक एसिड तब बढ़ता है जब प्यूरीन टूटने के बाद बनने वाला यह सब्सटेंस किडनी के जरिए ठीक से बाहर नहीं निकल पाता। धीरे-धीरे यह जोड़ों के आसपास जमा होकर परेशानी पैदा कर सकता है।

ऐसे में दवाओं के साथ खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी माना जाता है। रोजाना खाई जाने वाली कुछ सब्जियों को लेकर भी यूरिक एसिड के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसलिए सर्दियों में डाइट में इन सब्जियों को शामिल करने से पहले सावधानी रखना बेहतर है।

यूरिक एसिड के पेशेंट इस सब्जियों और फलों का करें सेवन

यूरिक एसिड की समस्या में खान-पान का ध्यान रखना जरूरी होता है। डाइट में गाजर, खीरा, नींबू जैसी कम प्यूरीन वाली चीजों को शामिल किया जा सकता है। फलों में सेब और चेरी भी अच्छे ऑप्शन माने जाते हैं। इसके साथ दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि पानी शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। रोज करीब 8-10 गिलास पानी पीने की कोशिश करें।

इस सब्जियों से बनाए रखें दूरी, नहीं तो बढ़ जाएगा यूरिक एसिड

1. बैंगन

बैंगन खाने से बचने के लिए यूरिक एसिड के पेशेंट को सावधानी बरतना चाहिए। इसमें प्यूरीन पाया जाता है, इसलिए इसका ज्यादा सेवन कुछ लोगों में यूरिक एसिड और गाउट से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकता है। इससे जॉइंट में दर्द और सूजन की प्रॉब्लम परेशान कर सकती है। वहीं, कुछ लोगों को बैंगन खाने के बाद खुजली या स्किन पर रैशेज जैसी एलर्जी भी हो सकती है।

2. मशरूम

यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या से परेशान लोगों को मशरूम खाते समय सावधानी रखनी चाहिए। मशरूम में प्यूरीन होता है, जो शरीर में यूरिक एसिड बनने की प्रोसेस से जुड़ा है। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने पर कुछ लोगों में जोड़ों का दर्द और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए हाई यूरिक एसिड या गाउट की प्रॉब्लम होने पर इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से कंसल्ट करना चाहिए।

3. फूलगोभी

सर्दियों में फूलगोभी खाना हर किसी को पसंद आता है, लेकिन यूरिक एसिड की प्रॉब्लम वाले लोगों को इसे ज्यादा खाने से बचना चाहिए। फूलगोभी में प्यूरीन पाया जाता है और इसका ज्यादा सेवन कुछ लोगों में गाउट के लक्षणों को बढ़ा सकता है। यदि पहले से आपको जोड़ों में दर्द या सूजन रहती है, तो अपनी डाइट में फूलगोभी की मात्रा को लेकर सावधानी बरतना बेहतर है।

4. पालक

पालक को हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसमें भी प्यूरीन मौजूद होता है। इसलिए यूरिक एसिड या गाउट की प्रॉब्लम वाले लोगों को इसे कम मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। यदि खाने के बाद जोड़ों का दर्द या सूजन बढ़ती महसूस हो, तो पालक को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले एक्सपर्ट से कंसल्ट करना सही रहेगा।

5. ब्रोकोली

ब्रोकोली को एक बहुत ही हेल्दी सब्जी माना जाता है, लेकिन यूरिक एसिड की प्रॉब्लम में इसे लेकर भी सावधानी जरूरी है। इसमें प्यूरीन पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा कई अन्य प्यूरीन वाली चीजों की तुलना में कम हो सकती है। इसलिए इसे पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी कंडीशन के हिसाब से इसका सेवन करना चाहिए।