
दीपावली पर घर लौटने से लेकर त्योहार के मौके पर अयोध्या में रामलला और अन्य धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने के लिए जाने वाले यात्रियों को ट्रेनों में टिकट नहीं मिल रहे हैं। लोगों को सीट पाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। कई ट्रेनों में दो सौ वेटिंग के बाद स्थिति रिग्रेट की बन चुकी है। 8 नवंबर को दीपावली है, इससे पहले एक से 7 नवंबर के बीच अयोध्या जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
कुछ यही हाल इंदौर से गांधीनगर जाने वाली शांति एक्सप्रेस (19309), मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, पटना, लखनऊ, बैंगलोर, हैदराबाद आदि शहरों में जाने वाली ट्रेनों का है। वहीं, उत्तर भारत, मुंबई और पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में सेकंड एसी, स्लीपर और अन्य श्रेणियों में सीटें बुक करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
मजबूर यात्री क्या करे : कुल मिलाकर इंदौर और अन्य शहरों से चलने वाली ट्रेनें फुल हो चुकी हैं। ऐसे में यात्रियों के पास बस ही एकमात्र सहारा बचा, हालांकि बस संचालकों ने भी किराया दुगुना कर दिया है। बसों का किराया 2500 से 4 हजार तक पहुंच गया है। बस संचालकों ने मनमाने ढंग से किराया बढ़ा दिया है। जिन्हें दिवाली पर घर जाना है ऐसे यात्रियों को मजबूरन भारी किराया देना पड़ रहा है।
कई स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए : यात्रियों की भारी मांग को देखते हुए रेलवे ने इंदौर, डॉ. अंबेडकर नगर और लक्ष्मीबाई नगर से दिल्ली, मुंबई, पटना, रीवा और अन्य प्रमुख शहरों के लिए कई स्पेशल ट्रेनों के फेरे नवंबर के अंतिम सप्ताह तक बढ़ाए हैं।
लंबी वेटिंग और बुकिंग बंद : 19309 शांति एक्सप्रेस गांधीनगर से शाम 7:10 बजे रवाना होती है और अगले दिन सुबह 5:45 बजे इंदौर पहुंचती है। यात्रा का समय करीब 10 घंटे 35 मिनट है। दीपावली से ठीक पहले घर आने वाले यात्रियों के लिए यह महत्वपूर्ण ट्रेन है, लेकिन लंबी वेटिंग और बुकिंग बंद होने से यात्रियों को दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
फर्स्ट एसी में भी लंबी वेटिंग : गांधीनगर से इंदौर आने वाली शांति एक्सप्रेस में सीटों की स्थिति ऐसी है कि सेकंड एसी, 3एसी में कई तारीखों पर बुकिंग बंद हो गई है। फर्स्ट एसी में भी कन्फर्म बर्थ नहीं मिल रही और टिकट बुकिंग के दौरान ‘रिग्रेट’ दिखाई दे रहा है। स्लीपर और थर्ड एसी में भी लंबी वेटिंग है। 5, 6 और 7 नवंबर की स्थिति के अनुसार, शांति एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की वेटिंग 141 तक पहुंच गई है। थर्ड एसी में भी वेटिंग 144 तक है। वहीं, सेकंड एसी में ‘रिग्रेट’ यानी बुकिंग भी बंद कर दी है। फर्स्ट एसी में भी लंबी वेटिंग है।
बस का किराया भी दुगना : ट्रेन में सीट नहीं मिलने पर बस का विकल्प मौजूद है, लेकिन 6 नवंबर के लिए गांधीनगर से इंदौर की एक नॉन-एसी स्लीपर बस का किराया 2,500 रुपए दिखाई दिया। इतना ही नहीं, कई शहरों के लिए तो 3500 से 4000 तक किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में त्योहार से पहले यात्रा करने वालों के सामने कन्फर्म टिकट और किफायती सफर, दोनों की चुनौती है।
टिकट बुकिंग की सलाह: यात्री केवल IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत काउंटर से ही टिकट की वास्तविक स्थिति जांचकर अपनी यात्रा की योजना बनाएं।
वैकल्पिक साधन : ट्रेन में कन्फर्म सीट न मिलने की स्थिति में यात्री अतिरिक्त संचालित बसों या अन्य वैकल्पिक साधनों की सहायता ले सकते हैं, हालांकि त्योहारी सीजन के चलते बसों के किराए में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।


